[संगीत] मित्र के द्वारा अनुकूलता के द्वारा कैसे भागवत प्रेरणा होती कैसे मिले तेरी लीला तू ही जाने है जग के पालन [संगीत] प्रभु [संगीत] [संगीत] [संगीत] बस आप अपनी दवाई चाहते हो की अपना कल्याण चाहते हो निर्णय का [संगीत] वह जान यहां कोई शोक नहीं कहा दुख नहीं कोई बंधन नहीं और अपना कर्तव्य सहज में कर्तव्य पालने का अभियान पर हिट का भी आनंद है पर है ही नहीं अनेक स्वरूपों में अपने ही है मौज ही मौज है लेकिन तब तक जिम्मेदारी और जिसकी है वो उसमें भी अपन लोग भी रहे बस भागवत ज्ञान की
भगवान की सत्ता की स्वीकृति का चेतन के सत्ता की स्वीकृति कार्लो चेतन की लीला की स्वीकृति जो तुझे अच्छा लगे वह मुझे अच्छा लगे तो नहीं है तू बता अनुभवी ने एकदम आनंद मारे हुए आत्मा ना ज्ञान शिवानंद मारे हुए सुख दुख आत्मा एन ज्ञान सिवाय के ना क्यों रे यह वीरा अनुभवी ने एक आनंद भरे आनंद ही आनंद ही भगवान वीर रस भाव रस करूं रस कई रसोई से तो है उसी रासो वही सब वही करूं सहस्य रस विनोद रस है वो भी रस ले लिया क्या है तमाम दुनिया प्रभु का खेल तो यह
भक्ति ज्ञान लेकिन सर्वत्र भगवान लेकर भागवत प्रेम करें तो अभी कम पियोगे गम पित्त नहीं हुआ कैसे हो सुनाएं [संगीत] और संत के वचन अभ्यास करने से जीव को का चित्रा स्वस्थ होता है जहां से बात चली वही पूर्ण चाहिए उसी के विषय में समर्थन होना चाहिए यह सत्संग करने की यहां किसी विषय पर बोलने की रीत हो जाए और अंत में वही पूरा ऐसा नहीं चालू कहीं से किया बीच में कहीं चले गए अंत में कहीं पहुंच गए मनोरंजन है शास्त्री व्याख्या नहीं तो फिर वो आया फिर तो इस ऐसा बोला फिर ये नहीं
सर घर वित्त वचन बीच में ऊंचा गंभीर अंत में हल्का हल्का ताकि सुनने वाले को भारी एन लगे लेकिन आप ईश्वर में रहो तो फिर आपको यह सब चिंतन चिंता नहीं करनी पड़ेगी कैसा बैल के द्वारा ले जाएंगे नाग रहता था कभी-कभी उसका आदर करते द नाग में भी भगवान चाहते द लेकिन और कुछ लिया नहीं फिर उन्होंने भेजा चिट्ठी समाचार भेजा की तुम भला नहीं जगह ए जाओ चलो लड़का ले आए कैसे रक्षा करता [संगीत] जितना कांता बढ़ गया है उतने ढंग से जैसे कांता निकले यह तो खाली सुनते तो इतना आनंद और शांति
और पुण्य कितना सारा हो रहा है इसका अभ्यास हो तो बस अनुभव हो जाए कैसा है एक होती है प्रतीक्षा दूसरी होती समीक्षा प्रतीक्षा उसकी pratibhavi नहीं आएगा बड़े नेक कर पाना दर्शन करना मंच से अनुभव का ही लाल जी महाराज प्रेम नारायण यह सब कैसे आकृति अमाती नाचती खेलती है अंत में शमशान में फिर भी दूसरी बन रही है चल रही है कैसी है खेल के पीछे खिलाड़ी के हाथ को दे सृष्टि के पीछे सृष्टि करता की सत्ता को दे फूलों की सुगंध ले लेकिन सुगंध डाटा को याद रखना पहले हमको नहीं समझ में
आया अच्छा प्रेत किसी में घुस के आया तो बोले की बात याद आई चाहते तो उनको थोड़ी पुष्टि मिलती होगी जाते समय वह कैसी व्यवस्था है वातावरण से प्रसन्नता होती पुष्टि देते लेकिन आजकल तो केमिकल की agarbattiyan कार्बन देती है उसमें घी पड़ता है देसी तो ये कैसा कैसा है वैसे भी अपने घर में अगरबत्ती नहीं होता अगरबत्ती कैसी लगी पुष्टि मिलती है मुल्तानी मिट्टी रगड़ के स्नान करते खुजली और पित्त वित्त समान होता है ऐसा आज हमने निकल लेती फालतू सांप के ऊपर प्यार की नजर डालो तो भी शिला स्वभाव जाता है [संगीत] [संगीत]
[संगीत] घोड़ा विनाश करेंगे मैं लगाऊंगा घोड़े पर तो बैठे गा कहां पहुंचे गाड़ी तो फास्ट लेकर मर्यादा के अनुसार मैन को नियम में बंधे रखना पड़ता है जैसे मैन आए उदा के ले जाएगा तो [संगीत] वास्तव पुष्ट हो जाएगी खमता पोस्ट हो जाएगी शॉर्ट टेंपल हो जाएगी इसीलिए लगा 7 साल बैठे रहे तो हमारी तो बहुत तबाही हो जाती उनके आज्ञा मंगल से द कभी अबू की गुफा में धोखा भी नैनीताल नाम क्या देते तब हम जाते द अगर अपनी तबाही करना हो तो मैन का ऐसा करो और अपने को आवाज़ करना हो तो शास्त्रों
और सतगुरु के सिद्धांत में मैन को जला बस आप अपनी दवाई चाहते हो की अपना कल्याण चाहते हो निर्णय कर लो अभी निर्णय क्या थोड़ी देर के बाद है गए तो आप किस तिथि दया जनक आपका अपने मैन पर ही विश्वास थी तो लोगों का विश्वास भी नहीं दिखेगा आप पूजने योग्य तो नहीं लेकिन धरती पर पूछ रही होगी तो नहीं हो पाओगे पूज्य योग्य तो जो गुरु की शास्त्र में रहेगा वो लेकिन जैसा मैन का ऐसा करने लग जाए तो आप एक साधारण गृहस्थी जैसा भी जीवन नहीं बुझा सकते थोड़ी बहुत गुंजाई है या
किसी का किसी पुण्य के मैन से चला फिर ठोस हो जाओगे [संगीत] मैन ही आपके बंधन का कारण बनेगा अगर उसके कहने में लगे और अगर नियंत्रण से चलाया तो वही मुक्ति नाता बन जाएगा अच्छा जो शास्त्र और गुरु के नियंत्रण में नहीं हुआ ज्ञानी मांडो के नियंत्रण में आके रहेगा जब 21 शरण नहीं जाता उसको हजारों की शरण जाने के बाद भी शांति नहीं है सब सुख चाहते हैं तो जो सच्चे भक्त और ज्ञानी हो एक से सुख जाते एक किसान कपट फिर वहां से धक्के भी लगते रहते द सुख के बदले दुख ही
दुख हो जाता है संसार में दुख है नहीं लेकिन मैन मुक्ता के कारण लगता है संसार किसी शत्रु ने नहीं बनाया किसी मूर्ख ने नहीं बनाया आपके विरोधी ने नहीं बनाया आपके परम हितेश ईश्वर ने बनाया परम समर्थ ईश्वर ने बनाया जैसे मैन बाप बच्चे के लिए दुख थोड़े रहेंगे ऐसे भगवानों भगवान की प्रकृति दुखने देती लेकिन बच्चा जब अपना कला मुंह खुद ही करें तो मैन बाप क्या करें जिसको कोई कहने वाला नहीं है उसकी स्थिति हो जाएगी [प्रशंसा] ओम [संगीत]