[संगीत] जी आप शर है घर में एंजॉय करते हैं छोड़ो लंच वंच किसी और दिन अच्छा ठीक है लेकिन मैं पतंग उड़ाऊ पेचा मेरे साथ ही लगाओ पेचा तो आपसे लड़ गया है अब किसी और की कमस क गिरफ्तार करो उसको फायरिंग करने वाले को मेरे बच्चों को कोई गिरफ्तार नहीं करेगा अच्छा ये इतने बड़े बड़े ऊंट के जितने ये बच्चे हैं ये उस घर में आकर रहने लगी ताकि घर के काम संभाल सके और नन्ही बच्ची की देखभाल हो जाए। बजाहिर वह मदद के लिए आई थी। मगर दिल में हसद और खुदग्रजी पल रही
थी। ताजिर दिन भर अपने काम पर रहता और पीछे उसकी मासूम बेटी लावारिसों की तरह झूले में पड़ी रहती। जबकि फूफी नबीहा अपनी बेटी को गोद में लिए प्यार करती सवारती। जिस दिन ताजिर की छुट्टी होती, नबीहा उसके सामने उसकी बेटी के साथ अच्छा बर्ताव रखती और उसका खूब ख्याल रखती। जिसकी वजह से ताजिर को खबर ना हो सकी कि घर के अंदर उसकी बेटी के साथ क्या सुलूक हो रहा है। एक दिन जब ताजिर अपनी छुट्टी के दिन भी घर पर काम में मशरूफ था तो उसकी बेटी खेलतेखेलते सेहन में पहुंच गई। वो वहां
खुशी-खुशी खेलने लगी जैसे दुनिया के किसी गम किसी खौफ से बिल्कुल बेखबर हो। कुछ देर बाद ताजिर की बहन यानी नबीहा कुएं से पानी भरकर सेहन में दाखिल हुई। उसके हाथ में मिट्टी का घड़ा था। जैसे ही उसकी नजर बच्ची पर पड़ी, उसके कदम वहीं जम गए। बच्ची के बिल्कुल करीब एक नागन खड़ी थी। उसकी आंखों में अजीब सी चमक थी। वो किसी हमले की नियत से नहीं खड़ी थी। उसका रुख ताजिर की बेटी की तरफ था। जैसे वो उसकी निगरानी कर रही हो। और ताजिर की बेटी भी उससे बिल्कुल खौफजदा नहीं थी। बल्कि उसके
साथ ऐसे खेल रही थी जैसे वो उसकी अपनी सहेली हो। नबीहा की सांस सीने में अटक गई। उसके मुंह से बेइख्तियार चीख निकल पड़ी। या अल्लाह ये क्या मुसीबत है? ये कैसी नूसत हमारे आंगन में आ गई? वो घबरा कर आवाज देने लगी। भैया जरा जल्दी आओ। ताजिर दौड़ता हुआ आया। जैसे ही उसकी नजर उस मंजर पर पड़ी, उसके हाथ-पांव लरने लगे। दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। हैरत की