नारायण नारायण नारायण जन्म जात सबं संपादित सबं और शाश्वत स जन्मजात सबं तो कभी दादा मरे कभी नानी मरी कभी बेटा मरा कभी वही मरा कभी वही मरा मरती बन संपादित संबंध कोई मित्र बना कोई शत्रु बना कोई लुगाई बने कोई पति बना कोई देवर बन गया कोई जेठ बन गया कोई दोस्त बन गया कोई भागीदार बन गया कोई दुश्मन बन गया यह संपादित संबंध उसमें उथल पाथल रहती लेकिन जीवात्मा का परमात्मा के साथ शाश्वत संबंध जन्म के पहले भी आपके साथ व आत्मा परमात्मा था अभी भी है दुख के समय भी है दुख को
जानता है सुख के समय भी है मौत के बाद भी रहता है वो शाश्वत संबंध है शाश्वत स का ज्ञान नहीं इसलिए दुखी शाश्वत संबंध से प्रेम नहीं इसलिए दुखी शाश्वत संबंध में स्थिति नहीं इसलिए जन्म मरण होहा नहीं तो गर्भ में लटकना फिर जन्म लेना फिर इकट्ठा करना मृत्यु का झटका लगे छोड़कर मर जाना यह सब शाश्वत संबंध की विस्मृति का ही पाप का फल है भूल ज भी आपन तभी होया खरा भटक मुआ भेदु बिना पावे कोन उ पाय खोजत खोजत युग गए पाव कोस घर आए सब कुछ चाहते तो सुखी होने के
लिए जाते शादी भी सुख के लिए करते कोलकात्ता भी सुखी होने के लिए जाते मुंबई भी सुखी होने के लिए जाते देश परदेश भी सुखी होने के लिए जाते तलाक भी देते तो सुखी होने के लिए दुख हो गया कि सुबह से शाम तक सुखी होने के लिए कर रहे हैं लेकिन फिर भी दुखी के दुखी भटक मुआ भेदु बिना भेद को जानने वाले गुरुओं का ज्ञान नहीं लिया अंदर में गए नहीं भटक मुआ भेदु बिना पावे कोन उ पाय खोजत खोजत युग गए सुख को खोजते खोजते युग बीत गए जरा सा मजा आया फिर
दुखी के दुखी वे लोग मूर्ख है जो संसार में सुखी रहना चाहते संसार दुखाल भगवान राम के गुरुदेव बोलते हैं कि राम जी आग लगे और फिर वह बोले इसमें सूखे तिनके डाल ऊपर घास डालो तो मूर्ख है आग लगी और पेट्रोल पंप पर जावे बोले जरा फुआरा मार दे आग बुजा अरे आग बुझेगी काहे वो तो और बड़ केगी ऐसे संसार का दुख आया तो संसार के सुखों से दुख मिटाना चाहता है वो थोड़ी देर लगेगा क्या हाश लेकिन फिर वो भी दुख हो जाएंगे दादर की बीमारी हो गई खुजली हुई तो जरा खुजला
के सुखी होना चाहता हो दादर बढ़ जाएगी क्या दाद की दवा खुजली मिटा ले दाद मिटा ले व दाद की दवा तो फेरियो के पास है लेकिन जन्म मरण की दाद की दवा तो संतों के पास होती जवानी में कैसे कैसे तरंगों पर नाच रहे थे कि मैं डॉक्टर बनूंगा मैं वकील बनूंगा मैं बढ़िया हूं मैं व्यापारी बनूंगा मैं शादी करूंगा बड़े ऊंचे ऊंचे तरंगों पर नाच रहे थे अब पूछो क्या हाल है बोले बाबा जी संस कोई सार नहीं गढे दुख रहे छोरा मानता नहीं है इनकम टैक्स की चिंता खाता हूं तो छाती जल
रही है एसिडिटी है ऐसा है वैसा है अंत में बोले कोई साथ नहीं मर जाए तो अच्छा मरने में भी क्या रखा है मर के फिर जन्म लेगा जन्म नहीं मिला तो फिर पेशाब में बहना पड़ेगा तू तो जीते जी शाश्वत संबंध को जान ले भाई राजे महाराजे राज पाठ छोड़कर गुरुओ के दार जाते हम भी अपना सारा छोड़ छाड़ के गुरु के पास गए और सेवा करते आते लोग भोजन बनता वो बर्तन मांजता था में हाथ में वो पहाड़ की मिट्टी लगती तो उंगलियों में थोड़ा खून निकल जाता तो फिर पट्टी बांध के पता
नहीं चले कि उस को सेवा कर गुरु के द्वार रहते सत्संग सुनते ध्यान करते प्रकट कर लिया अपना शाश्वत संबंध को बस हो गए मौज आप ईश्वर के असली संबंध से जोड़ जुड़ जाओ जग जाओ तो सब लोग आपसे संबंध मानने को पीछे पीछे घूमे नहीं तो अपने भी रूठे रूठे रहते बारात में महमान आए यह दो वो दो खिलाओ फिर भी कोई नाराज कोई नाराज यहां तो बिना बलाए सारे मेहमान आ जाते कोई रुठ के ही नहीं जाता असली संबंध जोड़ ले अपने ईश्वर के साथ फिर मेहमानों को चाय पिलाना नाश्ता कराना आओ बैठो
करना कुछ नहीं करना पड़ेगा हे सज्जन मेहमान जहां जाओ हजारों लाखों आ जावे असली संबंध जोड़ लो बस नहीं तो दम घुट जाता है 200 मेहमान आवे बाराती फिर देखो शादी कराने वाले के कैसे हालत होते यहां तो रोज लाखों मेहमान आते हर नई एक शादी है हर रोज मुबारक बाजी है जब आशिक मस्त संबंध से हुआ तो फिर क्या दिलगिरी बाबा अरे बोले राम सुख दास जी को जा अरे हमारे गांव में आए थे गाव देख लो उन्होंने शाश्वत सब बन जाना तो सब लोग हर्ष करते हमारे गाव हमारी जाति के अ हमा राजस्थान
के सब जुड़ जाते हैं हम भी बोलते हमारे में पधारे हमारे परिचित हमारा उनका बड़ा स्नेह था सब जोड़ देते सबं असली सबंध जोड़ो तो आपसे सभी लोग संबंध जोड़ देंगे नहीं तो अपने वाले भी मुह डोकरो वगैरे का बड़ो हो अरे डोकरी मरती नहीं बाप जी आशीर्वाद दे मेरे सासु का काई हो जाए काई हो जाए मतलब मर जाए ये संसार का सब ऐसा है मेरा पिताजी बड़ा बीमार है बाप जी अब कुछ कर दो कुछ क्या कर दे बोले सुखी हो जाए सुखी हो जाए क्या मतलब मर जाए जब बूढ़े हो जाएंगे शरीर
निकम्मा हो जाएगा फिर भजन क्या करोगे भ घर वाले भजन करेंगे हे भगवान अब इनको ले लो ऐसी लाचारी आए उसके पहले अपना असली संबंध जोड़ने में तुम्हारे बाप का थारा बाप रो काए जाए अरे भया थारा बाप रो का जाए असली संबंध जोड़ो परा बाहर के संबंध तो बांधने पड़ते हो टिकते नहीं और असली संबंध जोड़ना नहीं पड़ता है खाली जान लो बस खाली मान लो मेरा भगवान के साथ असली संबंध है अगले जन्म का बाप नहीं लेकिन तू अगले जन्म वाला मेरे साथ है अगले जन्म की की लुगाई नहीं पति नहीं बेटा नहीं
मकान नहीं शरीर अगले जन्म वाला नहीं लेकिन तू कोई का बिन फेरे हम तेरे प्रभु फेरे फिरते वहां भी झगड़े होते सबन टूटता बिन फेरे हम तेरे उसकी स्मृति कर दो बस तो भगवान का वचन है तस हम सुलभ पार्थ नित्य युक्त योगी ना हे पार्थ मैं उनके लिए सुलभ हो जाता हूं जो नित्य युक्त होते प्रीति पूर्वक जब अपना संबंध हो गया तो प्रीति हो गई जहां संबंध होता है वहां प्रेम होता है व कुत्ता पेशाब कर रहा है उसके जूते पर आपको कोई आपके जूते पर जरा वो टांग ची कु जूते के साथ
संबंध है तो कैसा हो जाता जूता प्यारा लगता मकान के साथ संबंध नहीं तो मकान प्यारा लगे ये हाड मास के शरीर के साथ संबंध तो शरीर प्यारा लगे अब यह भी रहेगा नहीं जूता भी रहेगा नहीं फिर भी कैसा प्यारा लगे वोह तो पहले था अभी है बाद में रहेगा तो उसके साथ संबंध जागृत कर दो बेड़ा पार हो जाए अंता अत्री कल्याण हो जाएग मन निर्मल भ जाएगा कबीरा मन निर्मल भयो जैसे गंगा नीर पीछे पीछे हरी फिरे कहत कबीर कबीर जब हरी पीछे पीछे पुठे पुठे लारे लारे लागे तो और की तो
बात का करो तिजोरी में पैसा रख दो बैंक में पैसा रख दो एफडी कर दो लेकिन मरते समय दुख देते नहीं उड़े क्या करूं किसको संभालने में भी दुख दे कमाने में भी दुख दे वह तो याद करने में भी सुख दे संभालने में भी सुख दे ध्यान करने में भी सुख दे और मरते समय भी वह सद्गति कर दे जितना हेत रूपयों से है जितना हेत हराम ते उतना हरि से होए कहे कबीर वा दास को पला न पकड़े को मणियों को पैसों के जितना प्यारे लगते उतना भगवान प्यारा लगे तो बढ तो भगवान
बन जाए भाई मोरा पिया कटे है बढ़िया मरने पड़ा करोड़ी म बोले मोरा पि आक है मरा प आक जो प्यारी चीज होती मरते समय वही याद आवे मरा पिया छोरो ने देखा कि डोकरो तो ले तो मरे ग तो 10 की नोट का एक बंडल पांच की नोट का एक बंडल बोले तरस पया मरा पिया कटे है 50 की नोट का एक बंडल रख दिया बोले मैं तो करोड़ों भेड़ की हमारा बया है थोड़े स की आ मंडल लेकिन डोकरा तो आया पिया पिया पिया सारी जि जिंदगी तो मरते समय वही याद आवे अब
छोड़ों ने देखा है तो छाती पर रखेंगे घर में तो नहीं रख सकते य तो भेज देने पड़ेंगे धर्मार्थ तो छोरे भी तो लोभी के छोरे थे पक्के मारवाड़ी के मक्खी चूस के ऐसे मारवाड़ी सब मक्खी चूस नहीं होते मारवाड़ी में भी बड़े बड़े अच्छे दानी समझदार होते हैं अ शीखर जिले में हो गए जमुना दस बजा गांधी जी के पांच में बेटे माने जाते तिजोरी खोल दी गांधी जी के देवी का एक बार चलाते तो जमुना दास बजा ये काम करना है तो जमुना दास बजा कहता मेरे को सेवा दो मारवाड़ी को बदनाम नहीं
करना ज्यादा मारवाड़ी में भी बड़े बड़े समझदार होते जीते जी दान पुण सकर्म करते बचारे बिल्ला परिवार वाले और य जमुना दास बजा गांधी जी के कार्य में दिल खोल के लग जाते कोई कंजूस होता है भले ये तो मारवाड़ी है काहे करो बाप मारवाड़ी को बदनाम करो मारवाड़ी में ड़ चौके चौके आत्मा हो अरे बोले तो कंजूस मारवाड़ी कंजूसी तो हो भाई अब राजस्थान में जन्म हुआ है तो कर कसर तो होनी चाहिए कर कसर करना अच्छी बात है लेकिन कंजूस मक्खी चूस होना बुरी बात है कर कसर तो बुद्धिमता है कर कसर तो
य मारवाड़ी का सद्गुण है कर कसर कोई बुरी हो होती क्या हमारे गुरुजी भी बहुत कर कसर से रहते हम भी कर कसर से रहते अब यह देखो बकमल का लोक लगाते क्यों साबू बिगाड़ कन तान चढ़ा दो कनता चढ़ाए तकिया का बस य बछ तन कन तान कर कसर तो मैं भी खूब अच्छी लगे लाल बहादुर शास्त्री भी कर कसर करते गांधी जी भी कर कसर करते थे मेरे गुरुजी भी कर कसर करते और राम सुखदास जी को मैंने देखा उनकी जो जूती थी वो भी टाका लगी हुई थी धोती देखी गंगा किनारे तो
वहां भी वो धागा धोती तो काश रंग की और धागा दूसरे रंग का मैं मैं बोला महाराज जी आपकी सादगी बड़ी बहुत अच्छी लगते बड़े प्रसन्न रहते हम तो कर कसर तो सद्गुण होता है मारवाड़ी की कर कसर हो देसी में भी कर कसर हो तो सदगुण है लेकिन कोई कंजूस हो तो बोले ये तो मारवा म बदनाम मक्खी चूस तो होता है कि बुरी तरह से पैसा कमाए और सत्कर्म में भी मरे नहीं करे वह है कंजूस कंजूस मारवाड़ी अलग बात है और कर कसरिया मारवाड़ी अलग बात है कंजूस से कहते कि अच्छे काम
में भी हाथ नहीं खुले वह कंजूस तोव कंजूस करोड़ी मल मरा मरा पिया कटे है कंजूस र औलाद भी कंजूस देखा के डोकरा मरे पराज तो दूसरे बंडल निकाल के रुपए खोल दिए खोल के ेर बना दिया ला खुले खुले कर मयारा पिया अराया पिया तो तो गया रा बाप रा बले अब तो अब चिपकली होकर तिजोरी में आएगा के नाग होकर घर में घूमेगा कि प्रेत होकर भटके का पता नहीं कि जो मान मन भगवान में लगाना था वह पियो में लगाया और पीए निगुण को तो पता नहीं कि मैं करोड़ी मल का हूं
या और कुर्सी तो कनारी र ग नेता कुर्सी याद करे कुरसी कुरसी का वैशा वैशा किसी की नहीं रही कईयों को आया बिठा बिठा के गिरा दिया तेरे को कब तक रगी रखेगी कुर्सी ना कुर्सी थारी शाश्वत है ना पिया थारा शाश्वत है ना शरीर थारो शाश्वत है ना पति पत्नी रो संबंध शाश्वत है ना नेता जनता रो संबंध शाश्वत है ना दुकान सेठ रो संबंध शाश्वत है लेकिन जीवर आत्मा और परमात्मा को संबंध कभी कोई मिटा नहीं सकता काल को बाप भी नहीं मिटा सके ऐसो श थोड़ा धन आ गया थोड़ी पढ़ लिख गए
लोगों ने थोड़ा मान अभिमान आ जा राम बहुत घंडा है अभिमान मत कर रे गरव गुमान गुलाबी रंग उड़ी जावे लो उड़ी जावे लो रे फको पड़ी जावे ग माटी में मली जावे ग पासो नहीं आवेग काई रे लायो वीरा कहीं ले जावे ग धन जो बन थारा जोर जवानी अठे मिली जावे ग पासो नहीं आवेग माटी में मली जावे को मत कर रे गर्व गुमान पतंगी रंग उड़ी जावे उड़ी जावे लो रे वीरा फी को पड़ी जावे ग माटी में मली जावे ये फीका पड़ जाए मट्टी में मिल जाए उसके पहले अपना अभिमान अपनी
वासना अपना अज्ञान मिट्टी में मिला देना और अपने को भगवान के संबंध में जगा दे थारो तो बेड़ो पार धारा दर्शन करे सत्संग सुने नारो बेड़ो पार वे [संगीत]