हरि ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओओओओ [संगीत] ओओ हरि ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओ ओम ओम ओ ओम ओ ओम ओ हरि ओम ओम ओम [संगीत] ओ ओ ओ [संगीत] ओ नाक के आगे से पर नजर रखो स्वास अंदर जाए तब राम बाहर आए तो एक स्वास अंदर जाए शांति बाहर आए तो दो स्वासन धर जाए शक्ति बाहर आए तो तीन स्वासो शवास को गिनते जाओ ध्यान करो ध्यान में बैठो कमर सीधी गर्दन सीधी मन में जपते जाओ जहां तिलक किया है हमने लाल वहां उंगली लगाकर तीन बार भगवान का नाम
लो उंगली लगाओ अपने भाग्य पर ओम ओ [संगीत] ओ हमारा भाग्य बढ़िया हो रहा है हमारी जीवन शक्ति यहां आएगी हरि ओम ओम ओस अब यहां तिलक का क्या वहां ओम को देखो हरि ओम माओ मा ओ माओ माओ शक्ति हरि ओम ओम ओम ओम ओम ओम हिम्मत हरि ओम ओम ओम ओम ओ ओम साहस हरि ओम ओओओओ बुद्धि का विकास अब उंगली हटा दो हरि ओम माओ मा आनंद आनंद प्रसन्नता हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम ओम ओम ओम ओ ओ ओम ओ ओम ओम हरि ओम ओम ओम
ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम हरि ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम नमो भगवते वासुदेवाय ओ ओम नमो भगवते वासुदेवा वासुदेवाय इष्ट देवाय आत्म देवाय प्रभु देवाय ओम नमो भगवते वासुदेवाय ओम नमो भगवते वासुदेवाय आनंद देवाय गुरु देवाय माधुर्य देवाय सामर्थ्य देवाय ओम नमो भगवते वासुदेवाय ये वैदिक विचा उच्चारण करने से अपने शरीर में सात केंद्र है और सात केंद्रों में एक एक केंद्र से 100 नाड़ियों जुड़ी है और 100 नाड़ियों से 7200 7200 नाड़ी ऐसे करोड़ों नाड़ियों का जो जाल बिछा है शरीर में उस शरीर के मुख्य सात केंद्र
है तो ये इस प्रकार की जो उच्चारण शैली है यह अंग्रेज मूर्खों ने बदनाम कर दिया कि यह गडरिया लोग गाते थे ओ यजन यज्ञम जंत देवा ऐसा करते स्थानी धर्मानी प्रथमा सान नना कम यह सब अंग्रेज लोग इसकी खिल्ली उड़ाते थे लेकिन यह खिल्ली उड़ाने की चीज नहीं है उनको य खिल्ली उड़ाकर वैदिक संस्कृति की जड़े काटनी थी और वैदिक संस्कृति में जो आत्म बल है और जो अंतरात्मा का सुख है जो संयम है और सूक्ष्म शक्ति सूक्ष्म जगत से जुड़ने की योग्यता है वह पाश्चात्य कल्चर में और इस्लाम में और संस्कृति में नहीं
है नहीं है नहीं है यह वैदिक ज्ञान बहुत ऊंचा है और इस ज्ञान में तो इतनी शक्ति भरी है कि अभी य बच्चे विद्यार्थी भी उसको नहीं जानते य तो आचार्य उन को पढ़ाकर रटा करर तैयार कर रहे हैं लेकिन यह बड़ी ऊंची विद्या है यह भोग और मोक्ष को देने वाली विद्या है यह विद्या का तो आदर देवता लोग भी करते हैं देव आधीन जगत सर्वम मंत्र आधीन स्य देवता सारा जगत उस परमात्मा देव के आधीन है लेकिन मंत्र के आधीन वह देवता भी हो जाता है तो वह जमाना था कि अभिमंत्रित तीर छोड़
दिया अपना काम करके आया अभी कुछ वर्ष पहले की बात है एक संत उनका आश्रम काशी में भी है कलकाता में भी है थोड़े समय पहले उनका शरीर शांत हुआ हम मिलकर भी आए उनका आश्रम देख के भी आए वाराणसी में तो उनसे किसी ने पूछा कि यह सब क्या है बाबा जी 1942 में राजा वीरेंद्र सिंह ने पूछा कि महाराज भगवान की नाभी से कमल निकला और फिर उसमें ब्रह्मा जी हुए ये समझाने के लिए बोले नहीं नहीं वैदिक ज्ञान में संदेह नहीं करो य तो हम भी करके दिखा देंगे तो महाराज लेट गए
और नवली क्रिया करके थोड़ी देर में देखा तो उनकी नाभी से कमल की नाल बढ़ते बढ़ते बढ़ते बढ़ते एक हाथ जितनी ऊंची और उसम कमल खिला लोगों ने प्रत्यक्ष देखा महाराज ने बताया कि आज तो बादल है अगर सूर्य के किरण सीधे होते तो हम यह सूर्य उपासना के मंत्र से हमने किया है तो छत तक भी कर सकते जब हम आजकल के योगी भी मात्रिक शक्ति से इतना सारा कर सकते हैं तो पूर्व काल में मंत्रिक शक्ति से दशरथ राजा के दर्शन कर मिलने गए थे रावण तो मंत्री ने बताया गंगा किनारे हैं शिकार
करने गए तो अयोध्या कहां और गंगा किनारे शिकार कैसे बोले तुम दशानन जाओ तब पता चलेगा तो दशरथ गंगा किनारे चावल का दाना अभिमंत्रित करके गुस्से में फेंक रहे थे गंगा जी में तो रावण ने पूछा कि गंगा जी में तो आदर्श अर्पण होता है य आप थोड़ा गुस्से में फेंक रहे बोले मैं वृद्ध हो गया हूं समय की कमी के कारण राजा का कर्तव्य है कि समाज में संतुलन बना रहे तो मनुष्य समाज में पशु समाज में भी शेर अगर बढ़ जाते तो राजा आखेट करके अधिक शेरों को नियंत्रित कर दे ताकि दूसरे प्राणी
भी जीवित रह सके तो मैं इसीलिए शिकार करने तो नहीं जा सकता हूं तो शिकार का काम यहां कर रहा हूं यह न दाना चावल का अभिमंत्रित करके य फेंकता हूं तो वहां तीर बनकर शेरों को लगता है तो रावण देखने गया और वास्तव में चावल का दाना अभिमंत्रित तीर बनकर लगता है तो मंत्रों में ऐसी शक्ति है कि महाराज महाभारत में आता है कि शालवा राजा मंत्रों शक्ति से विद्वानों के द्वारा एक ऐसा जहाज बनाया शाल्व सौभ नगर बसा था वह नगर आकाश में उड़े नगर में सारी व्यवस्था स्पले गौशाला गाय का दूध चाहि
तो नगर में होती पूरा नगर शाल सौरभ नगर में य तो 5000 वर्ष पहले की बात है उसने देखा श्री कृष्ण का बड़ा यश है तो द्वारिका में श्री कृष्ण को अपने नगर ऊपर इतना बड़ा जहाज सुनते हैं कि राम जी जब आए त्रेता में लौटे तो करोड़ों वानरों को पुष्पक विमान में साथ में ले आए तो करोड़ करोड़ वानर आ सकते उतना बड़ा विमान था लेकिन अभी कृष्ण काल में शालवा नगर और शालवा नगर वाले राजा शाल्व ने द्वारका पर धावा बोला तो कृष्ण ने कहा कि हम धरती के जीव मनुष्य है और आप
आसमान में अपना नगर लेकर हम पर हावी हो रहे हैं ये अधर्म है धर्म युद्ध तो आप सामने आओ थोड़ा आपके जहाज को नीचे उतारो तुम्हारा जहाज पानी में रहकर भी लड़ सकता है आकाश में भी उड़ता है आपका नगर और धरती परभ तो आमंत्रण भेजा तो उसको ककड़ी थी कि ये डर गए वो आए तो श्री कृष्ण ने उसके जहाज के उड़ने की योग्यता ही नष्ट कर दी और फिर बराबर हावी हो गए लव नगर समाप्त कर दिया यह कथा आप लोगों ने सुनी होगी य आचार्य सुना तो मात्रिक शक्ति से एक बार वो
महाराज को बोला कि महाराज तीर अभिमंत्रित करते और शत्रु को एक तीर में से अनेक तीर हो जाते ऐसा होता है क्या बोले संदेह मत करो ये सरकंडे उठा लाओ सरकंडे तो समझते नहीं घास य अपने होते जंगल में यही पड़े रहते उठाया महाराज ने एक सरकंडी को थोड़ा सा मोड़ा और दूसरा सरकंडा बाण की नाई उस पर लगाया एक को धनुष्य की मंत्र से अभिमंत्रित करके बड़ के पेड़ को मारा वो सरकंडा बढ के पेड़ में आ लग बोले आगने मंत्र से मैंने किया है तुम्हारे फायर ब्रिगेड वाले इस आग को बुझा नहीं सकते
फिर महाराज जी ने वारुणी मंत्र की धारणा करके व मारा वहां जल जल हो गया शांत हो गया य मंत्र में एक तो श्रद्धा दूसरा संयम तीसरी एकाग्रता मात्रिक शक्ति गजब का काम करती है यंत्र से तो मंत्र बड़ा सूक्ष्म होता है ऐसे ही शब्दों की बड़ी ताकत है लोग भाषण करके प्रधानमंत्री बन जाते हैं मुख्यमंत्री बन जाते हैं आरोग्य मंत्री बन जाते खाली जीभ की तो करामत है शब्दों की वे शब्द अगर मंत्र होते तो सूक्ष्म जगत के साथ जापक को जोड़ देते अभिचार मंत्र है दो मारण मोहन वशीकरण आदि का उच्चाटन का काम
करते दूसरे मंत्र है तो अभीष्ट साबरी मंत्र तो अभीष्ट की प्राप्ति में काम आते और वैदिक मंत्र है तो मुक्ति और भुक्ति के काम आते तो वैदिक मंत्रों का छु मंत्र जैसा नहीं दिखेगा लेकिन लंबे समय ऊंचा फल देता है मोक्ष फल देता है और दूसरे मंत्र थोड़ा सा चुटकला कर देते तो तांत्रिक मंत्र थोड़ा ही जपो तो जल्दी काम दिखता है लेकिन वो उस काम का नतीजा भी थोड़ा सही वैदिक रचाओ का भी अपना प्रभाव है शब्द पुरुष सम और शब्द शाश्वत है जितना वातावरण में तू मार काट अबे आरे आले ले लचे ये
हल्की भाषाए वातावरण में जितना लोगों का मन और तन मायस करती उतना ही वैदिक रचाए वातावरण में शांति देती है मधुरता देती है समता देती है आज के बच्चे वसे तो कितने चंचल हो जाते हैं जरा जरा बात में कुछ का कुछ कर बैठते हैं और विकारों में गिर जाते लेकिन जो वैदिक रीति से प्राणायाम करते हैं जप करते हैं मेरे को तो एक ऐसा मंत्र मिल गया कि बाप रे बाप बहुत फायदा हुआ हमारा और हमने जिनको दिया उनका बहुत फायदा हुआ कई उपाय करते समय भी जो काम नहीं हुआ वह उस मंत्र से
हो गया मेरे पास व मंत्र है आ गया बड़े में बड़ी समस्या है कि मनुष्य भोजन करते हैं उससे जो रस बनता है पहले रस बनता है रक्त बनता है आदि आदि करके फिर धातु वीर्य बनता है तो इधर उधर देखते टीवी देखते सपन दोष होता है ह धातु शय हो जाता है जब धातु शय हो जाता है तो फिर चि लगता नहीं पढ़ने में तो धातु शय होता है तो आदमी का फिर शरीर मोटा होने लगता है चर्बी बढ़ने लगती है और नाड़ियों का ताकत कम हो जाता है उसका मतलब ये नहीं कि सब
जो मोटे हो ऐसा नहीं लगभग शादी के बाद जो मोटा पा आता है तो इसीलिए आता है सप्तम धातु नहीं बनता छठ धातु तक ही भोजन का काम पूरा हो जाता जैसे महाराज बैठे हैं टाट वाले तो दिखने में पतले डबले य बड़े त्यागी लेकिन उनकी नाड़ियों में बल होगा भले भूखे प्यासे तपस्वी रहते हैं पतले डबले हैं मोटे लगेंगे कि ये पहलवान है महाराज कमजोर है लेकिन महाराज जितना दौड़ सकेंगे उतना सेठ नहीं दौड़ सकता तो सप्तम धातु बनता है तो ये सप्तम धातु बने और फिर उस सप्तम धातु को शरीर में स्थिति हो
तो ओज बनता है तो आदमी ओजस्वी तेजस्वी आभा संपन्न होता है जितना ओज और तेज उतना ही वो आदमी प्रभावशाली सर्टिफिकेट से प्रभाव का कोई संबंध नहीं है तो मन शक्ति प्राण शक्ति वो ओज से सीधा संबंध है उनका तो अब कुल मिलाकर मायों को ब्रदर की बीमारी पानी पड़ने की बीमारी भाइयों को सपन दोष की बीमारी अथवा पेशाब में धातु जाता है तो उसको संयत करने के लिए एक मंत्र मिला बाप रे बाप गजब का फायदा होता है वोह मंत्र जिसको लेना हो बाहे कान में उंगली डालेगा दाह कान से वह मंत्र सुनेगा और
आदर से एक माला जप करेगा तो वीर्य संबंधी तकलीफों से रक्षा होती है धातु रक्षा सर्व रक्षा वीर्य रक्षा सर्वर रक्षा विद्यार्थियों को तो खास करना है चलो बाहे कान में उंगली डालो और दाह कान से यह महामंत्र सुनो इस मंत्र से विकारी 25 ललना चिपक गई और श्रद्धा पूर्वक के मंत्र जप करो तो आपका धातु की रक्षा हो जाएगी ऐसा महामंत्र इसकी व्याख्या भगवान कृष्ण ने गीता में कहे पितरों में अरमा मैं हूं बड़े संयमी रहे और यह अरमा देव पितरों में श्रेष्ठ अरमा ये अरमा जी का मंत्र है ओम अर माय नमः ओम
अर माय नमः ओम अर माय नमः ओम अर माय नमः ओम अर माय नम उंगली निकाल दो येय 108 बार विद्या जीवन में जप करें तो बहुत अच्छा नहीं तो कम से कम 21 बार जप करके अच्छा जिसको सपन दोष या धातु की तकलीफ हो या शरीर कमजोर हो तो आंवला य आंवले तो बहुत है छाया में सुखा दे फिर कूट के आंवले का चूर्ण बन गया 80 ग्राम आंवले का चूर 20 ग्राम हल्दी मिलाकर रख दिया न ग्राम सुबह और तीन ग्राम शाम को फाके कितना भी कमर कमजोर हो धातु हो सपन दोष हो
हस्त मैथुन की गंदी आदत हो यह मंत्र और आवला हल्दी का मिश्रण फके आठ दिन में गालों पर शरीर पर पड़े हुए महाव से या खील कम होने लगेंगे और चेहरा भराव दार होगा तो युवा धन पुस्तक विद्यार्थियों को पांच दे दो आपस में धन पुस्तक बांटने के और ईश्वर की और दे दो तीन जीवन विकास पुरुषार्थ परम देव तीन य दे दो पढ़ेंगे तो इस प्रकार मंत्र से प्राणायाम से और आसन से रजोगुण का शमन होता है धर्मो रक्षति कीर्तना तो जो हास्य है वो भी आरोग्य के लिए बड़ी एक टोनिक अंग्रेजों ने देखा
कि गांधी जी के साथ भारतवासी हो गए अब हमको इनके आंदोलन से राज्य छोड़ना पड़ेगा तो अंग्रेजों ने कहा हम तुम्हारी मांगे पूरी करेंगे तुम आंदोलन अभी स्थगित करो गांधी जी को विश्वास में ले लिया गांधी जी ने आंदोलन स्थगित कर दिया तो आंदोलन की जो टेंपा था भीड़ थी रोश था वह सारा बिखर गया फिर अंग अजों ने बदमाशों ने गांधी जी को बोला कि ठीक है तुम्हारी जो मांगे हैं उस पर सरकार विचार करेगी मतलब पैरों तले से धरती खींच ली हम यह देंगे वह देंगे सब करेंगे लेकिन अभी आंदोलन बंद करो आंदोलन
बंद हो गया और खूब दिनों के बाद जो मीटिंग की तो उत्तर ऐसा दिया कि मानो गांधी जी सुशीला नायडू गई थी साथ में उसने देखा कि गांधी जी अब आत्महत्या करने च ले जाएंगे इतना धोखा हुआ अंग्रेजों ने धोखा किया अब गांधी जी जी नहीं सकेंगे तो सुशीला नायडू गांधी जी के पीछे पीछे गई कि क्या अपने को चक्कू मारते या रेल के नीचे जाकर गिरते हैं गांधी जी अब उनके लिए तो जीना मुश्किल हो जाए गांधी जी तो गए जहां स्वतंत्र सेना संग्राम हों का रसोड़ा था वहां जाकर लोकी सवारने लगे लोकी चिलने
लगे और बोले भूख लगी कुछ हो खाने को तो मिला तो खा प गए और फिर लोकी चिलने लगे और गप सप लगाकर महिलाएं और उनके बीच और जोर से ठका मार के हंसने लगे तो सुशीला नायडू ने कहा कि बापू जी बापू जी माने पिताजी बापू जी हमें विश्वास नहीं होता है कि आप हमने तो सोचा या तो नशा करके सो जाएंगे लेकिन आप तो पवित्र आत्मा है नशा नहीं करोगे तो आत्महत्या करोगे तो आप इतने खुश उसी से काम करें बोले सुशीला भारत को आजाद कराना यह भी मेरे ईश्वर का काम है और
यहां लोगों की सबज लोग भोजन करेंगे वह सब्जी सवारना भी मेरे ईश्वर का काम है अब सफलता देना विफलता देना उसके हाथ की मर्जी लेकिन सम रहना हमारा पुरुष है परिस्थितियों में समता ये बड़ी ऊंची चीज है सुख आ जाए उसमें चिपको नहीं और दुख आ जाए उससे घबराओ नहीं तो जब सम र होगे तो आपके आत्म शक्ति का विकास होगा कोई प्रशंसा करे तो भूल ना जाना और कोई निंदा करे तो खिन्न नहीं हो जाना सुखम वा यदि बा दुखम से योगी परमो मता तो परम योगी है सुख और दुख में सम तो यह
कृष्ण की गीता की [संगीत] जो साधना है वह आप चलते फिर घर में दुकान में गुफा में मंदिर में स्कूल में सब जगह कर सकते हो जी दिन में तो कई बार सुख दुख के प्रसंग आते हैं कई बार मान अपमान के प्रसंग आते हैं कई बार हर्ष शक के प्रसंग आते हैं उस समय आप सावधान हो की हर्ष हुआ है तो मन को हुआ है शोक हुआ है तो मन को हुआ है उसको देखने वाला दृष्टा मेरा आत्मा असंग है ओम ओम ओम ओम ओ एक ये दूसरा गांधी जी बोलते दिन में मैं कई
बार हंसता हूं आप बच्चे भी हंसने का प्रयोग सीख लो भगवान नाम कीर्तन करते करते फिर दोनों हाथ ऊपर करोगे तो मन और प्राण ऊपर आ जाएंगे और फिर हसोगे तो रक्त वाहिनी का रक्त सात्विक होगा रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ेगी मन प्रसन्न रहेगा और दिखावटी सर्टिफिकेट मिल गए पैट शर्ट पहर के जी लिया और विद्यार्थी बन गए उसमें आज कोई नहीं वैद संस्कृति के अनुसार तुम आगे बढ़ रहे तो बहुत ऊंची बात है हमारा चित्त तो प्रसन्न होता है ये वैदिक वाणी सुनकर बड़ा माहौल शांत हो रहा है ये शांति देने वाला है कि नहीं
वैदिक ज्ञान मनुष्य की मांग है शांति और प्रसन्नता दो ही मांग है तो वैदिक ज्ञान से शांति मिलती है और सत कर्म और सत स्वरूप ईश्वर के ज्ञान से सच्ची प्रसन्नता मिलती है बस तो पांच प्राणायाम रोज करें कम से कम और एक मिनट रोके तो फैसों की शक्ति बढ़ेगी स्मरण शक्ति में भी ब ओम अर माय नमः तो जप करोगे ना वैदिक विद्यार्थी करोगे ना बहुत लाभ देगा