क्या हमारा भाग्य पहले से लिखा होता है हमारे भाग्य में जो भी कुछ घटता है वह पहले से तय है दोस्तों गरूर पुराण में बताया गया है कि मनुष्य के भाग्य में जो भी कुछ जन्म से मृत्यु तक जो भी घटना घटता है वह पहले से तय होता है दोस्तों मृत्यु और जन्म ही एक ऐसा सत्य है जिसे कोई टाल नहीं सकता है पर दोस्तों हम यह नहीं जान पाते हैं कि हमारा भाग्य हमारे से जन्म से पहले ही लिखा होता है या जन्म के बाद लेकिन गरूर पुराण में जन्म मरण कर्म के बारे में
विस्तृत रूप से जानकारी दिया गया है तो आइए शुरुआत करते हैं गरुर पुराण की उस ज्ञानवर्धक प्रस्तुति की कि मनुष्य का भाग्य कब लिखा जाता है क्या मनुष्य भाग्य उसके जन्म से पहले लिखा जाता है या जन्म के बाद नमस्कार दोस्तों स्वागत है हमारे इस चैनल गीता गुरु ज्ञान पर मित्रो गरूर पुराण की इस ज्ञान वर्धक प्रस्तुति में आप खो जाए उससे पहले हम आपको बता दें कि इस वीडियो को आधा अधूरा देखना कि गलती बिल्कुल भी नहीं करें क्योंकि यह गरुर पुराण की ज्ञान वर्धक प्रस्तुति है जो आपके जीवन से जुड़ी हुई है गरुर
पुराण की इस रहस्यमय ज्ञान को जानने के बाद आपके जीवन से जुड़ समस्त लोभ क्रोध मोह दुखों का अंत होगा मित्रों भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कभी भी किस व्यक्ति को गरूर पुराण की बातों को आधा अधूरा नहीं सुनना चाहिए क्योंकि आधा अधूरा ज्ञान हमेशा विस के समान होता है इसीलिए मित्रों आपसे यही आग्रह है आप इस वीडियो को बिना स्केप किए अंत तक जरूर देखिए साथ ही इस वीडियो को एक लाइक करके चैनल को अवश्य सब्सक्राइब कर लीजिए और हां दोस्तों कमेंट बॉक्स में जय श्री कृष्णा लिखकर ईश्वर को आप अपना आभार व्यक्त जरूर
कर दीजिए इससे आपके जीवन से सभी दुखों का अंत होगा आइए दोस्तों जानते हैं गरुर पुराण में श्री कृष्ण ने बताए हैं कि हर मनुष्य के जीवन में जो भी कुछ होता है वह जन्म पहले से तय होता है उसे कोई टाल नहीं सकता है दोस्तों गरूर पुराण हमें जन्म मरण से लेकर वर्तमान जीवन कैसे जिए यह सभी चीजों के बारे में सिखाते हैं आइए दोस्तों आज हम एक कथा के माध्यम से जानते हैं कि हमारा भाग्य जन्म से पहले लिखा जाता है या जन्म के बाद जो गरुर पुराण स्कंद पुराण के द्वारा बताया गया
है जो श्री कृष्ण ने स्वय नारद बतलाया था आज हम उन्हीं कथा जानेंगे मित्रों एक समय की बात है द्वारका नगरी में दिन श्री कृष्ण अपने दिव्य आसन पर बैठे हुए थे तभी देवर श्री नारद नारायण नारायण का जाप करते हुए उनके पास पहुंचते हैं और उन्होंने प्रणाम करके और बोले हे प्रभु आप त्रिकालदर्शी है मैंने सुना हो कि जो जीव मनुष्य जन्म लेता है क्या उसका भाग्य पहले से लिखा होता है हे प्रभु मैं जानना चाहता हूं कि मनुष्य के साथ जो कुछ घटना घटित होता है वह उसके जन्म से पहले तय होता है
या वह पिछले जन्म का भोग भोगता है क्या यह सत्य है या हम अपनी मेहनत और कर्मों से उसे बदल सकते हैं फिर भगवान श्री कृष्ण नारद की बात सुनकर मुस्कुराए और बोले हे नारद आपका यह प्रश्न बहुत ही गुण और महत्त्वपूर्ण है जो मानव जाति लिए उसके जन्म कर्म और मृत्यु पर आधारित है फिर कृष्ण बोले हे नारद मैं तुम्हें एक कथा सुनाता हूं जो ना तुम्हारे इस प्रश्न उतर देगी बल्कि हर मनुष्य के लिए एक चेतावनी और प्रेरणा भी होगी तुम इस कथा को पूरे ध्यान पूर्वक आखिरी तक सुनो कृष्ण बोले हे नारद
यह गरूर पुराण की है जो यह यह कथा को आधा अधूरा सुनने की गलती करता है उस पर भारी संकट आती है क्योंकि आधा अधूरा ज्ञान हमेशा विष के समान होता है कृष्ण बोले हे नारद इस कलयुग भरी संसार में जो मनुष्य इस कथा को पूरे ध्यान पूर्वक आखरी तक सुन लेगा और समझ लेगा उसका इस संसार से सभी पाप कर्म क्रोध मोह से मुक्ति मिलेगा फिर नारद बोले हे प्रभु मैं उस कथा को पूरे ध्यान पूर्वक आखिरी तक सुनूंगा आप उस कथा को निश्चित हो सुनाएं फिर श्री कृष्ण ने नारद को वह कथा सुनाते
हैं श्री कृष्ण बोले हे नारद प्राचीन काल में एक विशाल और समृद्ध राज्य था जिसका नाम अक्षय पुरी था उस राज्य का शासक राजा रत्न धर था राजा रत्न धर अत्यंत धर्मात्मा और न्यायप्रिय था वह सदैव अपने राज्य के प्रजा के कल्याण के लिए काम करता था और धर्म का पालन करता था उसे भगवान से एक संतान का आशीर्वाद चाहिए था ताकि वह अपने राज्य का कार्यभार किसी योग्य उत्तराधिकारी को सौंप सके फिर है नारद राजा रत्न दर और रानी दोनों ने कई वर्षों तक तपस्या की इससे भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसे संतान होने
का वरदान दिया फिर एक दिन भगवान शिव के आशीर्वाद से रानी गर्भवती हुई राजा और रानी अत्यंत प्रसन्न थे क्योंकि वे चाहते थे कि उनका बेटा महान शासक बने और राज्य को सुख समृद्धि की ओर ले जाए परंतु जब रानी ने बेटे को जन्म दिया तो वह बच्चा विकलांग और शरिक रूप से कमजोर था उसके शरीर की हड्डियां टूटी हुई थी और वह शारीरिक रूप से सक्षम नहीं था राजा रत्न धर का दिल टूट गया उसने भगवान से यह सवाल पूछा कि ऐसा क्यों हुआ तब राजा रत्न धर ने भगवान श्री कृष्ण से मिलने का
निर्णय लिया और उन्हें अपने दुखों को सांझा करने के लिए वहां पहुंचे राजा ने भगवान से पूछा हे प्रभु मैंने इतनी तपस्या की यज्ञ किए फिर भी मेरे बेटे का जन्म विकलांग क्यों हुआ मैंने भगवान शिव से आशीर्वाद लिया था लेकिन ऐसा क्यों हुआ क्या यह मेरे भाग्य में पहले से लिखा हुआ था फिर श्री कृष्ण मुस्कुराए और कहा हे राजा तुम सही कहते हो कि तुम्हारा पुत्र विकलांग जन्मा है क्या तुम जानते हो कि तुम्हारे पुत्र का जन्म इस प्रकार क्यों हुआ है यह तुम्हारे द्वारा किए गए पूर्व जन्मों के कर्मों का फल है
यह तुम्हारे पिछले जन्म के कर्मों का परिणाम है जो तुम्हारे भाग्य में लिखा हुआ था लेकिन इसका का कारण यह नहीं है कि तुम्हारा भाग्य पहले से निर्धारित था यह घटना तुम्हारे और तुम्हारे बेटे के कर्मों का फल है जो उसके पिछले जन्मों से जुरा हुआ है राजा ने आश्चर्य चकित होते हुए पूछा हे प्रभु क्या भाग्य वास्तव में पहले से लिखा होता है श्री कृष्ण ने कहा जन्म मृत्यु और जीवन के उतार चढ़ाव पहले से निर्धारित होते हैं लेकिन हम जो कर्म करते हैं वह हमारे भाग्य को बदल सकते हैं जिस दिन तुम्हारे बेटे
का जन्म हुआ उस दिन तुमने एक विशेष संतान का वरदान प्राप्त किया था लेकिन उस संतान को चुनौतियां मिलना जरूरी था ताकि वह अपने जीवन में धैर्य साहस और पराक्रम को विकसित कर सके लेकिन उसका भविष्य केवल उस समय के कर्मों से नहीं होता है बल्कि यह तुम्हारे पिछले जन्मों के कर्मों का परिणाम है श्री कृष्ण ने राजा रत्न धर से कहा हे राजन भाग्य और कर्म में बहुत गहरा संबंध है हमारे कर्म ही हमारे भाग्य का निर्माण कर है यही कारण है कि हमें जीवन में अपने कर्मों को सदैव धर्म और सत्य के मार्ग
पर रखना चाहिए श्री कृष्ण ने कहा हे राजन जो कुछ भी तुम्हारे जीवन में घटित होता है वह तुम्हारे पिछले जन्म के कर्मों का परिणाम है यदि तुम्हारा बेटा विकलांग जन्मा है तो यह उसकी आत्मा के पिछले जन्म के कर्मों का फल है जब तुम एक पुण्य आत्मा के रूप में जन्म लेते हो तो तुम्हारे जीवन में कठिनाइया और स संघर्ष जरूर होंगे क्योंकि इस दुनिया में हर आत्मा को कुछ ना कुछ कष्ट भोगना पड़ता है ताकि वह अपने पिछले कर्मों को समाप्त कर सके लेकिन याद रखो तुम्हारे बेटे के जीवन में जो कठिनाई है
वह उसकी परीक्षा है यदि वह धैर्य और साहस से इन कठिनाइयों का सामना करता है तो वह अपने भाग्य को बदल सकता है एक दिन वह वही कार्य करेगा जिसकी कल्पना तुमने अपने जीवन में की थी मित्रों फिर राजा रत्न धर ने पूछा हे प्रभु क्या मैं और मेरे पुत्र अपने भाग्य को बदल सकते हैं श्री कृष्ण ने उत्तर दिया बिल्कुल तुम दोनों ही अपने भाग्य को बदल सकते हो तुम्हारे बेटे के जन्म के समय जो विकलांगता थी वह उसके कर्मों का फल था लेकिन उसका भविष्य तुम्हारे अच्छे कर्मों पर निर्भर करता है यदि तुम
उसे साहस धैर्य और आत्मविश्वास से भर दोगे तो वह अपने भाग्य को बदल सकता है तुम्हारे अच्छे कर्मों के परिणाम स्वरूप वह एक दिन महान बनेगा और राज्य का भार संभालने में सक्षम होगा मित्रों फिर भगवान श्री कृष्ण ने आगे कहा भाग्य एक चक्र के समान है जो कर्मों के आधार पर घूमता रहता है जब तुम अच्छे कर्म करते हो तो तुम अपने भाग्य को सुखमय बना सकते हो फिर आगे श्री कृष्ण से राजा रत्न धर ने कहा क्या भाग्य निश्चित रूप से पिछले कर्मों से जुरा होता है श्री कृष्ण बोले हां लेकिन उसे बदलने
की शक्ति तुम्हारे हाथों में है यदि तुम अच्छे कर्म करते हो तो वह तुम्हारे भाग्य को भी सुधार सकते हो साथ ही भक्ति साधना और सेवा से भाग्य बदला जा सकता है भगवान की भक्ति से ईश्वर को प्रसन्न करके हम अपने भाग्य को बदल सकते हैं अगर तुम अपने पुत्र को साहस और आत्मविश्वास से जीवन के संघर्षों का सामना करने की शिक्षा दोगे तो वह अपने भाग्य को बदल सकता है राजा रत्न धर ने भगवान श्री कृष्ण की बातों को पूरी तरह से आत्मसात किया और अपने पुत्र को शिक्षा देने का संकल्प लिया उसने अपने
पुत्र को कठिनाइयों के बावजूद साहस और विश्वास के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी समय के साथ उस विकलांग पुत्र ने अपनी आत्मविश्वास और कठिनाई से लड़ते हुए समाज में महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया उसकी संघर्ष शलता और साहस ने राज्य में उसका सम्मान बढ़ाया कृष्ण बोले हे नारद तुम यह समझो कि भाग्य एक निरंतर प्रक्रिया है जो कर्मों के आधार पर बदल रहती है जो लोग जीवन में अपने कर्मों को सुधारते हैं और भगवान की शरण में जाते हैं उनका भाग्य भी बदलता है यह केवल कर्म ही नहीं है बल्कि यह जीवन के संघर्षों और
कर्मों का परिणाम है मित्रों फिर श्री कृष्ण ने नारद से कहा यह कथा हमें यह सिखाती है कि जीवन में जो कुछ भी घटित होता है वह हमारे पिछले कर्मों का फल है भाग्य और कर्म का कोई निश्चित प्रारूप नहीं है हमारा कर्म हमारा भाग्य को बदल सकता है मित्रों गरूर पुराण हमें सिखाते हैं यदि हम अच्छे कर्म करते हैं और सत्य की राह पर चलते हैं और ईश्वर के ध्यान करते हैं तो हम अपने जीवन की दिशा बदल सकते हैं फिर श्री कृष्ण ने नारद से कहा हे नारद यह संसार कर्मों का दर्पण है
जो जैसा कर्म करेगा वह वैसा फल भोगे मनुष्य को यह ध्यान रखना चाहिए कि माता-पिता की सेवा दूसरे की सहायता और ईश्वर का ध्यान ही सबसे बड़ा धर्म है जो मनुष्य अपने पिछले जन्म में किसी के साथ पाप किया है किसी को कष्ट दिया है उसे ना केवल नरक में भयानक यातना मिलती है बल्कि वह जन्म जन्मांतर तक उस भोग भगती है लेकिन जो अपना कर्म सुधार है वह इस चक्र से मुक्त हो सकता है क्योंकि यह संसार एक अवसर है धर्म सेवा सत्य ही मनुष्य का जीवन है मनुष्य के यह समझना चाहिए कि मृत्यु
के बाद के उसके अच्छे कर्म ही साथ जाते हैं मित्रों यह कथा हमें यह सिखाती है कि हमारे भाग्य पिछले कर्मों का फल है हर पाप का दंड हर पुण्य का फल निश्चित होता है हे मनुष्य तुम अपने कर्मों पर ध्यान दो स्वार्थ पाप और अहंकार को त्यागो धर्म सत्य और सेवा को अपनाओ क्योंकि यही जीवन का सबसे भरा सत्य मार्ग है मित्रो श्री कृष्ण ने इस प्रकार नारद को गरूर पुराण के रहस्य को बताया मित्र भाग्य निश्चित रूप से जन्म से पहले लिखा जाता है लेकिन हम अपने जीवन के संघर्ष सत्य धर्म और ईश्वर
की भक्ति से हम अपने भाग्य को बदल सकते हैं मित्रों गरूर पुराण में भाग्य का लेखा जोखा और कर्मों के बारे में उल्लेख मिलता है पर दोस्तों मनुष्य अपने कर्मों संघर्ष और ईश्वर की भक्ति से हम अपने जीवन को बदल सकते हैं मित्रों गरूर पुराण हमें सिखाते हैं कि जीवन एक बोया हुआ खेत की तरह है मनुष्य खेत में जो बिच बोते हैं वही फल मिलता प्राप्त होता है उसी प्रकार मनुष्य अपने जीवन में जो कर्म करते हैं उसका अगले जन्म में उसी रूप से फल भोगता है इसलिए दोस्तों गरूर पुराण में श्री कृष्ण कहते
हैं कि जब मनुष्य का जन्म होता है तो उसके पिछले कर्मों के आधार पर उसका भाग्य उसके जन्म से पहले लिखा जाता है और उस मनुष्य के साथ वही होता है जो उसके जन्म से पहले उसके भाग्य में लिखा हुआ है जिसे कोई टाल नहीं सकता है परंतु सत्य धर्म और सेवा से ईश्वर को प्रसन्न कर हम अपने भाग्य को बदल सकते हैं हिंदू धर्म का सबसे बड़ा धर्म ग्रंथ गरुर पुराण है जिसमें मनुष्य के जीवन मृत्यु और भाग्य कर्मों के बारे विस्तार रूप से बताया गया है यह पुराण हिंदू धर्म के 18 महापुराण में
से एक है और इस पुराण में जन्म मरण से पुनर्जन्म कर्म और आत्मा के मार्ग के बारे में पूरे विस्तार से बताया गया है दोस्तों गरुड़ पुराण के अनुसार मनुष्य का भाग्य उसके पिछले कर्मों निर्भर करता है गरुड़ पुराण जो विष्णु पुराणों के प्रमुख ग्रंथ में से एक है यह पुराण जीवन के रहस्यों और मानव के कर्मफल के बारे में बताया गया है गरूर पुराण में श्री कृष्ण को साक्षात भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं दोस्तों गरुर पुराण श्री कृष्ण कहते हैं मनुष्य अपने जीवन में अच्छे कर्म और सत्य मार्ग पर चलकर ईश्वर को
प्रसन्न कर हम अपने भाग्य में होने वाले घटना से बच सकते हैं और आने वाले भाग्य को हम बदल सकते हैं मित्रो गरुर पुराण में श्री श्री कृष्ण ने मनुष्य को जीवन जिन्हे के लिए तीन मुख्य उपदेश दिए हैं जिन पर चलकर हम अपने भाग्य के कर्मों को बदल सकते हैं दोस्तों आप इस वीडियो को अंत तक जरूर देखिए क्योंकि यह सारी जानकारी गरुर पुराण के द्वारा बताया गया है इस वीडियो को बीच में छोड़कर जाने कि गलती बिल्कुल भी नहीं करें इसलिए इस ज्ञानवर्धक प्रस्तुति को अंत तक जरूर देखिए आइए जानते हैं नंबर एक
अपने धर्म का पालन करना मनुष्य का जन्म किसी खास उद्देश्य के लिए होता है जो मनुष्य अपने पिछले जन्म पाप किया है वह इस जन्म में भी उस पाप का भोग भोगता है क्योंकि मनुष्य के जन्म से पहले उसका जन्म से मरण तक का भाग्य पहले तय होता है इसलिए दोस्तों गरुर पुराण में श्री कृष्ण ने बताया है मनुष्य को हमेशा धर्म सत्य का पालन करना चाहिए इससे हमारे पिछले जन्म के पाप से बच सकते हैं ईश्वर की भक्ति से हम अपने जीवन बदल सकते हैं हम सभी ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं दोस्तों यह जीवन
एक अनमोल उपहार है आप इसे व्यर्थ ना जाने दें सही कर्म और धर्म का पालन से हम अपने जीवन को अगले जन्म में होने वाले घटना से बच सकते हैं यह ना केवल आपके लिए है बल्कि इसे पूरे समाज और दुनिया के आप प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं नंबर दो माता-पिता सेवा और आदर करना दोस्तों गरूर में श्री कृष्ण कहते हैं कि मनुष्य को हमेशा अपने माता-पिता को सेवा करनी चाहिए क्योंकि माता-पिता के ही चरणों से तीनों लोगों का स्वर्ग है जो लोग माता-पिता को नहीं मानते नहीं उसका आदर करता है उसे ना केवल
नरक में भयानक यातना भोग है बल्कि उसके अगले जन्म में भी भारी संकट भोगना पड़ता है और उस मनुष्य अपने पाप का परिणाम जन्म जन्मांतर तक उस कर्म का भोग को भोगता रहता है नंबर तीन अहंकार दोस्तों गरुर पुराण में श्री कृष्ण ने बताया है मनुष्य सबसे बड़ा शत्रु उसके अहंकार होता है जो मनुष्य को अपने कर्मों से दूर कर देता है जिस मनुष्य के मन में अहंकार प्रवेश कर लेता वह मनुष्य अपने जीवन को उस ओर के चला जाता है जहां उसे संकट के सिवा कुछ और नहीं मिल पाता है उस व्यक्ति को ना
केवल नरक में भयानक यातना भोग है बल्कि वह व्यक्ति अपने आने वाले भाग्य को भी नरक की और ले जाता है इसलिए मनुष्य को हमेशा सत्य धर्म और प्रेम की भवना रखना चाहिए इससे वर्तमान जीवन और आने वाले भाग्य हमेशा खुशहाल रहे मित्रों गरूर पुराण हमें सिखाता है यह जीवन हमारे कर्मों का फल है यह ग्रंथ हमें यह समझने की प्रेरणा देता है अपने जीवन से धर्म सत्य परोपकार का पालन करना ही सबसे बारा कर्तव्य है आत्मा की मुक्ति और अगले जन्म उच्च योनि प्राप्त करने के लिए मनुष्य को अपने कर्मों को ध्यान रखना चाहिए
मित्रों गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के महान ग्रंथों में से एक यही हमारे जीवन को सही दिशा में चलने का ज्ञान देता है जो हमें यह सिखाता है कि मनुष्य का भाग्य उसके कर्मों और ईश्वर की इच्छा का परिणाम होता है यह ग्रंथ ना केवल जीवन और मृत्यु के रहस्यों के बारे में बतलाता है बल्कि यह भी समझाता है कि मनुष्य अपने जीवन को किस प्रकार सही दिशा में ले जा सकता है गरुर पुराण में मनुष्य के जन्म मरण से लेकर वर्तमान जीवन कैसे जय इन सभी चीजों के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है
मनुष्य के जीवन से लेकर क मृत्य तक की सार जानकारी इस धर्म ग्रंथ गरुर पुराण में बताया गया है मनुष्य जीवन में जो कुछ घटित होता है वह हमारे पिछले जन्म का फल है दोस्तों गरुड़ पुराण हमें यह सिखाता है कि भाग्य केवल कर्मों का फल है भले ही भाग्य जन्म पहले से लिखा हो पर हम अपनी कर्म से इसे बदल सकते हैं मित्रों जीवन एक दुर्लभ अवसर है जिसे सही दिशा में ले जाकर हम आत्मा को मोक्ष की ओर अग्रसर कर सकते हैं धन्यवाद दोस्तों गरुर पुराण के द्वारा सभी बतलाए गए बातों को अवश्य
ध्यान में रखें और सत्य की राह पर चले इससे आने वाले जीवन अत्यंत सुखद हो और दोस्तों वीडियो अच्छा लगा तो इस वीडियो को लाइक करके कमेंट में जय श्री कृष्ण जरूर लिख दीजिए और हमारे इस चैनल गीता गुरु ज्ञान को अवश्य सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि हर एक नया वीडियो आप तक तुरंत पहुंचे धन्यवाद हर हर महादेव ओम नमः शिवाय राधे राधे