मुझे अल्लाह ताला के ऐसे नाम मिले हैं कि मैं जिसके दिल में चाहूं अपने लिए मोहब्बत पैदा कर लूं। किसी बंजर जमीन पर पड़कर फूंक दूं तो जमीन जरखेज हो जाए। मिट्टी पर पढ़ लूं तो मिट्टी सोना बन जाए। यह तोहफा मुझे मिला था। हजरत ख्वाजा अवैस करनी रहमतुल्लाह अल से सदियों से मैं किसी ऐसे शख्स की तलाश में हूं जिसे मैं यह अमानत दे सकूं। मुझे मेरे एक दोस्त ने बताया कि आप यहां मकली के कब्रिस्तान में मिलेंगे। मेरा दोस्त आप शायद उसे बावर्ची जिन कहते हैं। जी बिल्कुल। मेरे दिल में एक अजीब सी
परेशानी थी कि इंसानों में इतने बुजुर्ग गुजरे हैं जिन्होंने सहाबा इकराम की रिवायत को जमा किया है। इसके अलावा इन लोगों की रिवायत जमा [संगीत] की जिन्होंने सहाबा इकराम से कुछ सुना। लेकिन बहुत सी चीजें ऐसी हैं जो सिर्फ जिन्नात के सीनों [संगीत] में मौजूद है। कितने जिन्नात ऐसे हैं जो सहाबा इकराम की महफिल में जाया करते थे। और उन्होंने वो मोती चुने हैं जो किसी इंसान और [संगीत] किसी किताब तक नहीं पहुंचे। लेकिन अब मुझे तसल्ली है कि आपने जिन्नात [संगीत] की इन रिवायत को अपने पास जमा किया क्योंकि जो तोहफा मैं आपको बताने
जा रहा हूं वो शायद किसी इंसान ने ख्वाजा अवैस करनी रहमतुल्लाह अल से ना सुना हो ना उसे किसी किताब में नकल किया हो। जी जरूर बताएं। मैं भी आपको एक तोहफा दूंगा। मेरे पास एक ऐसा अनोखा अमल है जो मुझे एक जिन ने बताया था। वो जिन क्या था? बस राजों का एक जहान था। मेरी सारी जिंदगी जिन्नात के साथ गुजरी है। लेकिन जो कायनात के राज मुझे उन्होंने बताए और जो मुझे उस पर हैरत हुई, कई दिनों तक मैं उसके ख्याल से बाहर ना आ सका। उन्होंने मुझे तीन ऐसे तोहफे दिए [संगीत] जो
मुझे इस दुनिया में शायद हर चीज से ज्यादा अजीज हैं। पहले आप अपनी बात जारी रखें। फिर मैं आपको अपनी कहानी बताता हूं। चल तो मैं अपना वाक्या शुरू करता हूं। मेरी जिंदगी में जो कमाल आपको नजर आ रहा है, यह हमेशा से ऐसे [संगीत] नहीं था। आज से तकरीबन 1400 साल पहले मैं एक छोटा सा ताजर था। इंसानों के दरमियान [संगीत] रहता और इंसानी शक्ल में उनके साथ तिजारत करता था। मैं मक्का से खजूरें खरीद कर मुख्तलिफ शहरों में बेचकर अपना गुजर बसर करता था। कितने महीने की भाई तुम जो यह माल लाते हो
क्या जायका है इसका मैंने तुमसे कितनी बार गुजारिश की है कि मुझे यह खजूरें ज्यादा मिकदार में ला दो मैं तुम्हें मुंह मांगी कीमत दूंगा फिलहाल मेरे पास इतने वसाइल नहीं है कि तजारत के लिए ज्यादा माल लाऊं काफी अरसा ऐसे चलता रहा फिर एक दिन एक अजीब वाक्या क्या हुआ? भाई इतना अरसा हो गया। मैं देख रहा हूं आप मेरी दुकान से खजूर खरीद कर तिजारत कर रहे हैं। मेरे पास आपके लिए एक पेशकश है। मेरे कुछ मुलाजिम हैं। वह भी खजूरें लेकर जाते हैं। लेकिन मुझे इन पर एतबार नहीं है। आप मुझे ईमानदार
लगते हो। कब तक यह छोटी तजारत करते रहोगे? मेरे काफिले को अपनी निगरानी में ले जाओ। मैं इसका अच्छा मुआवजा दूंगा। मुझे यह पेशकश पसंद आई। मसला यह था कि मुझे इसके काफिले के साथ इंसानी [संगीत] शक्ल में रहना था। किसी को नहीं पता था कि मैं एक जिन हूं। बस फिर मैं काफिले को लेकर यमन की तरफ निकल गया। उस्ताद ये काफिला काफी भरा हुआ नजर आ रहा है। आपकी इजाजत हो तो धावा बोल दें। नहीं छोटे ये लोग अभी खजूरों से लदे हुए हैं। इनके पास माल नहीं होगा। इन्हें वापस आने दो। फिर
इन पर हमला करते हैं। [संगीत] आप पहले कभी यमन गए हैं? हां, कई बार गया हूं। तो आपने ख्वाजा अवैश करनी से तो मुलाकात की होगी। नहीं वो कौन है? फिर मुझे उसने बताया कि वो कौन हस्ती है। अल्लाह ने उनको क्या रूहानी दुनिया अता फरमाई है। अगर तुम्हारी जिंदगी में कभी कोई मसला आए तो उनसे रहनुमाई लेना। जरूर आपकी मदद करेंगे। खैर हम सफर करते-करते यमन [संगीत] पहुंच गए। वाह भाई वाह। यह हुई ना बात। आज तो तुमने खुश कर दिया। मुझे ऐसी खजूरें कहीं नहीं मिलती। मैं तुम्हें इसकी दुगनी रकम अदा करूंगा। बस
तुम जब भी खजूर लाओ तो मुझे ही बेचना। यह मेरे पास तीन खच्चर हैं। इन पर अभी जितने दरहम है, यह तुम ले जाओ इन खच्चरों समेत। बहुत शुक्रिया जनाब। इतना मुनाफा इतना तो कभी हमें जिंदगी में नहीं हुआ। लेकिन एक मसला है। वापसी पर इतने माल की हिफाजत मुश्किल हो जाएगी। आजकल रास्तों में काफी लुटेरे मौजूद होते हैं। हां हां बात तो सही है। लुटेरों का खतरा तो होगा। आप लोग आराम करें। मैं इसका कोई हल ढूंढता हूं। मैं अगर अकेला होता तो वहां से उड़कर आ जाता। लेकिन सारे काफिले को साथ लाना था।
तब मैंने सोचा मैं जाकर ख्वाजा अवैस करनी रहमतुल्लाह अल से मिलता हूं। उनसे इस मसले के हवाले से रहनुमाई लेता हूं। तो मैं ढूंढताढूंढता [संगीत] उनके घर पहुंचा और उन्हें अपना सारा मामला बताया। यह तो कोई मसला ही नहीं। कुछ अरसा पहले यहां हजरत उमर और हजरत अली तशरीफ लाए थे। उन्होंने मुझे एक तोहफा दिया था। वो तोहफा मैं तुम्हें देता हूं। वो अल्लाह के दो नाम है। जो बंदा उन्हें पढ़ेगा वो हर दुश्मन के शर् से महफूज़ रहेगा। कोई भूखा अगर पढ़े तो अल्लाह उसके लिए रिज़्क का निजाम बना दे। कोई भटका हुआ पढ़े
तो अल्लाह उसे मंजिल तक पहुंचा दे। कोई बेघर पढ़े तो अल्लाह उसे घर दे दे। कोई हालात से थका हारा पढ़े तो अल्लाह उसे राहत दे दे। कोई जिंदगी का साथी चाहे तो अल्लाह उसे साथी दे दे। यही नाम ऐसे हैं जिनकी वजह से इन बकरियों के दिल में से इस भेड़िए का खौफ खत्म हो गया है। और इस भेड़िए के दिल में इन बकरियों पर हमला करने की चाहत खत्म हो गई है। तुम यही नाम 40 बार एक कागज पर लिखकर हर थैले में डाल दो और पूरे रास्ते ये नाम पढ़ते हुए जाओ। इंशा्लाह
तुम महफूज़ रहोगे। फिर मैं ख्वाजा अवैस करनी रहमतुल्लाह अल से इजाजत लेकर वहां से वापसी के सफर पर रवाना हुआ। चलते-चलते हमने रास्ते में एक नखलिस्तान में पड़ाव डाला। हम लोग वैसे ही परेशान हो रहे थे कि कोई लूट ना ले। अभी तक तो कुछ नहीं हुआ। हमें अभी भी मोहतात रहना पड़ेगा। हम पर कभी भी हमला हो सकता है। मैं आप सबको अल्लाह के दो नाम बताता हूं। वह पढ़ते रहो। इंशा्लाह हम हिफाजत में रहेंगे। जी भाई जरूर बताओ। मैंने उन्हें भी यह नाम बताए लेकिन सबने कदरदानी से ना लिया। यह बंदा मुझे दीवाना
लगता है। अगर इस रास्ते पर डाकू होते तो हमें आते हुए ही लूट लेते। खैर छोड़ो थोड़ी देर आराम कर लें। फिर सफर पर निकलना है। [संगीत] हमला कोई बचकर जाने ना पाए। वहीं कजाकू ने हमला कर दिया। हमारे दो लोग उस हमले में मारे गए। एक साथी को उन्होंने दरख्त के साथ बांध दिया। मैं वहीं सबके सामने बैठा था। लेकिन किसी को नजर ना आया। जिन खच्चरों पर सारा माल लदा हुआ था, वह मेरे पास ही थे। ना उन लुटेरों को मैं नजर आया और ना ही वह खच्चर। बाकी लोगों के पास जो कुछ
था, वह लूट कर ले गए। जब वो लुटेरे वहां से चले गए तो हमने उनको दफन किया [संगीत] और वापस मक्का पहुंच आए। हैरत है। लुटेरों ने हमला भी किया। दो लोगों की जान भी चली गई और तुम सारा माल हिफाजत से ले आए। आप यकीन नहीं करेंगे। यह सबके सामने बैठा था लेकिन किसी को नजर ना आया। बस मुझे एक मोहसिन ने एक राज बताया था जिसकी वजह से हम हिफाजत से पहुंच जाए। क्या तुम वो हमें भी बता सकते हो? वो नाम है या कादिरो या नाफो। [संगीत] उस दिन से मैंने यह नाम
पढ़ना शुरू किए। सदियों से पढ़ते-पढ़ते मुझ पर उसके इतने कमालात खुले हैं [संगीत] कि मैं अगर बताना शुरू करूं तो शायद कई दिन गुजर जाए। इतने साल पढ़कर इसकी जो तासीर मुझे मिली है, मैं वह आज आपको बखशता हूं। आप भी अगर इसको पढ़ेंगे, तो आपको वही तासीर मिलेगी। इसके अलावा आप जिसको इजाजत दें, उसको [संगीत] भी इतना ही फायदा होगा। कोई भी अगर या कादिरो या नाफिओ रोजाना 45 बार [संगीत] पढ़ने की आदत बना ले, तो उसे भी इसका इतना ही फायदा होगा। जो बंदा [संगीत] अपने रोजमर्रा के काम के दौरान इसे खुला पढ़ने
की आदत बना लेगा, उसका कारोबार सोने के कारोबार जैसा मुनाफा बख्श होगा। अल्लाहू अकबर। बहुत शुक्रिया आपका। यकीनन यह अमानत हर इंसान तक [संगीत] पहुंचनी चाहिए। वादे के मुताबिक अब मैं आपको अपना वाकया सुनाता हूं। चंद साल पहले मेरे एक दोस्त ने मुझे कहा, "हमारे यहां एक मेहमान आए हुए हैं मक्का से। बहुत अजीम हस्ती है। सारी जिंदगी उन्होंने मक्का में गुजारी है। बचपन में उन्होंने जिंदगी का काफी हिस्सा हजरत अनस बिन मालिक रज़ अल्लाहहु ताला अनू की महफिल में गुजारा। उनके पास कायनात के बहुत से राज हैं, लेकिन वह कभी किसी को नहीं बताते।
आप चलकर उनसे बात कीजिए। शायद वह आपको कुछ बता दें। मैं यह सोच रहा था कि जिस हस्ती ने सारी जिंदगी मक्का में गुजारी है, पता नहीं उनके पास क्या-क्या कमालात होंगे। सहाबा इकराम की महफिल में रहे क्या मोती चुने होंगे। काश वो उसका कुछ जर्रा मुझे भी दे दे। यही सोचते-सचते हम वहां पहुंच गए। आइए आइए अल्लामा साहब। हम आप मुझे जानते हैं? मैं आपको भी जानता हूं। आपके वालदैन को भी जानता हूं। आप चाहे तो मैं आपको उनके नाम भी बता सकता हूं। मुझे यह भी पता है कि आप यहां किस नियत से
आए हैं। आप फिक्र मत करें। जितना आप सोच कर आए हैं मेरे पास आपको देने के लिए उससे बहुत कुछ ज्यादा है। और यह तमाम राज मैं सिर्फ आपको क्यों दे रहा हूं इसके पीछे भी एक राज है। वो भी आपको बताता हूं। [संगीत]