साधुओं ने राजा को प्रणाम किया फिर राजा उनसे पूछा तलाशी करने लगा परंतु साधुओं की दलील सुनकर राजा संतुष्ट हो गया और फिर अपना खेल प्रारंभ करने को कहा जोगियों ने अपने-अपने वाद्य यंत्र बजाने शुरू किए सारा दरबार मोहित हो गया राजा ने सोने का मुकुट देकर विश्राम करने का आग्रह किया ऊदल बोले हमें पता चला है कि लाखा नाम की नर्तकी आपके दरबार में है उसके नाच की प्रशंसा हमने काशी में सुनी थी राजा ने तुरंत संदेश भेजकर लाखा पातुर को बुलवाया नाच फिर शुरू हुआ जोगियों ने अपने साज बनाए नाचते-नाचते लाखा जोगियों के
बहुत करीब चली गई ऊदल ने रानी से प्राप्त नौलखा हार लाखा पातुर को दे दिया और कहा हम महोबा के राजकुमार है इस हार को संभाल कर रखना और जोगी वहां से चल पड़े लाखा ने हार को लाख छिपाया पर जंबई राजा को हार दिखाई पड़ ही गया राजा ने अपने को ठगा महसूस किया राजा ने करिया राय से कहा जल्दी जाकर जोगियों को पकड़ो वे जोगी नहीं महोबा के राजकुमार हैं राजा के आदेश पर करिया राय जोगियों के पीछे चला करिया राय ने तलवार खींच ली और रुकने को कहा फिर तो उदल मलखान आल्हा
ढेवा चारों ने तलवारें निकाल ली मलखान बोला जोगियों के धोखे में ना रहना अगर एक कदम भी आगे और रखा तो जान से हाथ धो बैठोगे करिया राय बेबस होवर वापस चल दिया उसने आकर जंबई राजा को सारी घटना बता दी और समझा दिया कि ये जोगी नहीं महोबा के कुमार हैं राजा जंबे ने अपने बड़े पुत्र सूरज को बुलवा लिया और फौज सजाने के लिए कहा इधर पांचों जोगी वेष भारी वूरी वन पहुंच गए माता ने सबका स्वागत किया उन्होंने ने माता को मांडवगढ़ और लोहागढ़ की सारी घटना खोलकर बता दी उदल ने नर्मदा
नदी की कम गहराई वाली जगह का पता लगाया और बड़े भाई आल्हा को बताया कि नर्मदा पर मैंने बांस गाड़ करर झंडे लगा दिए हैं वहां से पार करेंगे आल्हा ने कहा चंदन नामक बढ़ई को बुलाकर व वुरी वन काटने पर लगाओ चंदन के साथ 900 बढ़ई और लगे परंतु ताला सयद ने अपने सभी लड़कों को भी इस काम में लगा दिया तो चार पांच घंटे में सारा वन साफ हो गया उदल के संकेत के अनुसार घास और छोटे पौधे घोड़ों के चरने के लिए छोड़ दिए गए आल्हा को जब यह समाचार मिला तो वह
बहुत प्रसन्न हुआ जंबई के राजकुमार अनूप अपने दरबार में बैठे थे टोडरमल भी उनके दाहिने हाथ विराजमान थे तभी एक हरका दौड़ता हुआ आया और सीधे अनूप के सामने जा पहुंचा उसने कहा महाराज महोबा की सेना आ रही है उसने सारा वूरी वन काट डाला है अनूप ी तन करर खड़े हो गए और तुरंत अपनी सेना को तैयार होने का आदेश दिया जितने प्रकार की तोपें उनके पास थी उन्हें साफ करके तैयार किया गया हाथियों के हदे सजाए गए सभी प्रकार के घोड़े काले सफेद लंबे ऊंचे चितु नकुला अरबी सब सजवा गए टोडरपुर से सारी
सेना सजधज कर चल पड़ी सैनिक तो युद्ध वस्त्र पहनकर चले ही स्वयं अनूप ने भी हरी वर्दी पहन ली ऊपर कवच सहित एक अचकन पहनी जिसमें हथियार गड़े ही नहीं फिर वह सुरखा घोड़े पर सवार हुआ तब समर भूमि की ओर चल पड़े दूसरी तरफ महोबा वालों की भी फौज युद्ध के लिए तैयार ही थी [संगीत] वैदुर्य में फौज मैदान में जा पहुंची उदल ने अपना घोड़ा आगे बढ़ाया तो अनूप के सामने जा पहुंचा अनूप ने पूछा कौन हो तुम व वूरी वन क्यों कटवाया ऊदल ने परिचय दिया महोबा वाले चंदेले राजा के हम बेटे
हैं मेरा नाम उदय सिंह राय है अनूप ने उदल को लौट जाने को कहा उदल ने अपना इरादा स्पष्ट बता दिया कि नौलखा हार हाथी गज शबद घोड़ा पपीहा लाखा पातुर और तुम्हारी विजय का डोला लेकर जाऊंगा साथ में करिया राय का सिर काट कर ले जाऊंगा अपने पिता का बदला लिए बिना महोबा नहीं लौट सकता अनूप ने टोडरमल को आदेश दिया कि तोपें चला दो इधर उदल ने भी तोपों में बत्ती लगवा दी दोनों ओर से गोले छूटने लगे जिस हाथी को गोला लग जाता वह चक्कर खाकर गिर जाता पैदल सैनिकों को भी दबाकर
मार देता चार घड़ी तक गोले चलते रहे पर कोई दल पीछे ना हटा फिर चार कदम मैदान रह गया दोनों ओर सांग भाले और तलवारें चलने लगी कौन किसके सामने पड़ गया और किसे कौन मार रहा है जगह-जगह लाशें कटकर गिर रही हैं हाथी पहाड़ से मैदान में पड़े हैं वैद उल घोड़े पर सवार उदल हर मोर्चे पर जाज करर कह रहा है जी जीत के चलोगे तो महोबा जाते ही सबकी पगार दुगुनी कर दी जाएगी तुम लोग नौकर चाकर नहीं सब हमारे भाई लगते हो अनूप की 3 लाख सेना महोबा वालों ने आधी मार
गिराई अनूप की सेना मैदान छोड़ भागने लगी उदल और अनूप राय फिर एक दूसरे के सामने पहुंच गए अनूप ने खींच कर तीर चलाया उदल बच गए फिर अनूप ने सांग उठाकर फेंकी घोड़ा बदुल ने पैंतरा बदलकर उदल को बचा लिया अनूप ने कहा अभी महोबा को लौट जाओ अनूप को ऊदल ने उत्तर दिया अपनी तलवार खींचकर दोनों ओर से खटाखट तलवारें बजने लगी अनूप की तलवार टूट गई उधर उदल ने जो तलवार का वार किया ढाल तो अड़ाई पर ढाल ही कट गई ऊदल ने तलवार का एक जोरदार बार किया अनुप राय ने ढाल
पर उदल का बार झेला परंतु ढाल ही कट गई और पूरा बार अनूप को लगा और वह मैदान में गिर गया तभी टोडरमल ने मोर्चा संभाला टोडरमल ने वार किया तब उदल ने तलवार से बार का जवाब दिया और एक जोरदार बार से टोडरमल की तलवार तोड़ दी और वह बेबस खड़ा रह गया उदल ने तुरंत उसे बांध लिया और ढेवा से कहा कि इसे बांधकर जेल में डाल दो ढेवा टोडरमल को बंधी बनाकर ले गया इस प्रकार अनूप और टोडरमल की सेना रण छोड़कर भाग गई जैसे ही सूरजमल को अनूप के मरने का समाचार
मिला वह तुरंत अपनी सेना सजाकर युद्ध के मैदान में जा पहुंचा उसने महोबा के वीरों को ललकारा उदल तो तैयार ही था सूरजमल ने पूछा महोबा के वीर कहां हैं जिन्होंने मेरे अनुज अनूप को मार दिया टोडरमल को बांधने वाला वह वीर कहां है तब तक उदल उसके सामने पहुंच गया और कहा मैंने मारा है अनुप राय को आप जो कर सकते हो कर लो उदल की बात सुनकर सूरजमल ने तोपों को गोले दागने का आदेश कर दिया महोबे की तोपें भी आग उगलने लगी तोपों के बाद बंदूकें चली और फिर सेनाएं आमने-सामने आ गई
महोबे के वीर दोनों हाथों से तलवार चला रहे थे वीरों की लाशें मैदान में बिछ गई स्वयं सूरजमल की फौज में भगदड़ मच गई सूरजमल ने कहा इन सैनिकों को क्यों मरवाते हो आओ हम तुम ही आपस में निपट लें उदल ने कहा तो करो वार हम पहले वार कभी नहीं करते तुम अपने मन की भड़ास निकाल लो सूरजमल ने तीर चलाया तीर बचकर निकल गए फिर तलवार का वार किया तो घोड़ा फुर्ती से हट गया वार खाली गया उदल ने कहा हमारा नौलखा हार गज पक्षावटहम बा लौट जाएंगे हां साथ में विजया रानी का
डोला भी चाहिए यह सुनकर सूरजमल क्रोध से कांपने लगा और कसकर तलवार का वार किया परंतु तलवार की मूठ हाथ में रह गई तलवार टूटकर नीचे जा गिरी सूरजमल को अपनी मौत सामने खड़ी दिखाई देने लगी उदल ने उसे सुनाकर कहा तुम्हारा वार हमने सह लिया अब तुम मेरा वार संभालो उदल ने नारायण को स्मरण करके और मान जी महाराज का नाम लेकर तलवार का जोरदार वार किया और तलवार सूरजमल की ढाल को काटते हुए सूरजमल की छाती में शमा गई इस तरह सूरजमल भी युद्धभूमि में शहीद हो गया जैसे ही सेना ने सूरजमल का
यह हाल देखा तो उसकी सेना भी मैदान छोड़कर भाग गई उदल ने कहा हम भागते लोगों पर वार नहीं करते यह वीरों की परंपरा है अनूप और सूरज के समर में शहीद हो जाने पर धामन पत्र वाहक ने करिया राय को जाकर सूचना दी कि सूरज मल अब संसार में नहीं है महोबा वालों ने वूरी वन काट दिया है सूचना पाकर करिया राय ने तुरंत अपनी सेना को तैयार किया और नगाड़ा बजाते हुए युद्ध के मैदान में जा पहुंचा वह [संगीत] पक्षावटहम बा ले जाएंगे इन सब के साथ तुम्हारी विजया का डोला भी हमारे साथ
जाएगा करिया राय ने भारी लड़ाई शुरू कर दी करिया राय सैनिकों को बार-बार उत्साहित कर रहा था उसकी सेना में भी तोपों के साथ कई प्रकार के हाथ थी और घोड़े युद्ध कर रहे थे भयंकर युद्ध हुआ जबानी जंग में भी करिया और उदल परस्पर बढ़ बढ़कर बोल रहे थे इतने में उदल ने भारी मार काट मचा दी करिया की सेना भागने लगी तब करिया ने हाथी के सिर में जोर से अंकुश मारा तो हाथी विचर गया उस हाथी ने जंजीर को सूंड से पकड़कर जोर से घुमाया जंजीर के सामने जो आ गया वह चोट
खाकर गिरता ही चला गया ऊदल की भी जंजीर की चोट हुई उनका घोड़ा घायल होकर बाहर की ओर भागा उदल के गिरते ही भारी हाहाकार मच गया सेना में भगदड़ मच गई हरकारे ने जाकर डेरे में आल्हा को सूचना दी आल्हा ने ताल हन सैयद को तुरंत और सेना ले जाने का आदेश दिया मलखान और माता दिवला को सूचना दी साथ में कहा कि उदल को अकेले रण में भेजना ठीक नहीं था मलखान ने पूरी फौज साथ ली और युद्धभूमि की ओर चला माता दिवला भी तैयार हुई और रणभूमि में आ पहुंची जब माता दिवला
ने रण में पक्षावटहम [संगीत] जागा तो उदल को अपने पास पड़ा देखकर बहुत खुश हुआ इतने में वीर मलखान वहां आ गया मलखान ने करिया राय को ललकारा करिया राय ने उसे महोबा लौट जाने की सलाह दी मलखान ने कहा अपने चाचा हों का बदला लेकर और तुम्हारे द्वारा महोबा से लूटी गई हर एक चीज लेकर ही महोबा जाएंगे करिया राय ने सांग उठाकर मारी घोड़ी कबूतरी फुर्ती से दाएं हो गई मलखान बाल-बाल बच गया तब करिया ने तलवार से वार किया मलखान ने वार ढाल से बचा लिया फिर मलखान ने कबूतरी घोड़ी में एड
लगाई तो करिया के हदे में दोनों पांव जमा दिए हौदा आधा टूटकर गिर गया हाथी घबराकर भूमि पर बैठ गया इतने में मलखान उदल के पास पहुंच गए रूपण तब तक बदुल घोड़े को ले आया उदल अपने घोड़े पर सवार हो गया जब तक मलखान और उदल सवार हुए तब तक महोबा की सेना भी वहां पहुंच गई करिया राय ने पपीहा घोड़ा मंगवाया और उस परे चढ़कर युद्ध करने लगा इधर आल्हा हाथी पक्षावटहम बा के सैनिक दोनों हाथों से तलवार चलाने लगे उदल अपने वैदुवादी मोर्चों को संभाल रहा था और करिया ढेवा से जूझ ने
जा पहुंचा करिया ने भाला उठाकर ढेवा पर फेंका ढेवा फुर्ती से हट गया तब उदल ने तब मलखान से कहा कि करिया को मारने में इतनी देर क्यों लगा रहे हो कुछ समय तक मलखान और करिया में जमकर युद्ध हुआ फिर मलखान ने ललकार कर कहा तुम्हारे सब हथियार झूठे पड़ गए हैं अब तुम्हारा काल सामने आ गया है तुम्हारे वश में मुझे मारना है ही नहीं मेरा जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ है गुरु बृहस्पति मेरी कुंडली में 12वें स्थान पर है मुझे मारने को काल भी नहीं आ सकता फिर मलखान ने मनिया देव को
शीश नवाकर जो तलवार की चोट की तो करिया राय की गर्दन धरती पर जा गिरी उदल ने घोड़े से उतरकर करिया राय का कटा हुआ सिर उठा लिया सिर ले जाकर उदल ने आल्हा को दिखाया और कहा माता मलना की व्यग्रता दूर करने के लिए करिया राय का यह शीष महोबा भिजवा दीजिए वे बेसब्री से युद्ध का परिणाम जानने की प्रतीक्षा कर रही होंगी आल्हा ने तुरंत रूपण को बुलाया और महोबा जाने को कहा करिया राय का कटा शश महोबा पहुंचा दो उनको धीरज देकर तुरंत लौटकर महोबा के हाल हमें भी बताओ रूपन ने तुरंत
करिया के कटे सिर को लिया और महोबे को चल दिया इधर महोबे में रानी मलना और तिलका मांडवगढ़ से कोई समाचार ना मिल पाने से धो कीी थी तब वहां माहिल पहुंच गया उसने मलना बहन से हालचाल पूछा मलना ने राजकुमारों के ना लौटने की चिंता जताई तो माहिल ने कहा बहन अब लड़के तो लौट करर नहीं आएंगे मांडो गढ़ से एक हरका आया था उसने समाचार दिया कि सारे लड़के युद्ध में मारे गए मलहमा इतना सुनते ही गिर कर मूछे हो गई तिलका भी यह सुनकर विलाप करने लगी जब राजा परिमा ने यह समाचार
सुना तो उन सभी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया सारे महल में हाहाकार मच गया अगले ही दिन रूपन राजा परिमा के दरबार में जा पहुंचा उसने राजा परिमाण को करिया का कटा हुआ सिर दिखाया जिससे राजा परिमा बहुत प्रसन्न हुए महोबा में जश्न मनाया जाने लगा उधर मांडवगढ़ में जब राजा जंबे को पता चला कि उनके चारों पुत्र शहीद हो गए तो राजा बहुत खी हुआ उनकी पुत्री विजया ने माता-पिता को बहुत खी देखा तो उन्हें धीरज बंधाया और कहा कि उदल का ही भारी खटका है तो मैं इस खटके को मिटा देती
हूं विजया ने जादू की पुड़िया ले ली और पुरुष वेश में युद्ध के मैदान में जा पहुंची उसने एक पुड़िया वीर आल्हा पर फेंकी तो उसे दिखाई देना बंद हो गया और पूरे लश्कर में अंधेरा कर दिया ऊदल पर तो जादू फेंक कर उसे मेढ़ा बना दिया और जिलमिल नाम के साधु के मठ में ले जाकर बांध दिया विजय के रंग महल में लौटते ही लश्कर का जादू हट गया आल्हा और मलखान को होश आया तो उदल को खोजने लगे वह कहीं दिखाई नहीं दिया तो ढेवा को ज्योतिष से खोज करने को कहा गया ढेवा
ने अपनी ज्योतिष विद्या से पता लगाया कि विजा ने उदल को मेढ़ा बनाकर जिलमिल गुरु के मठ में बांध दिया है तब मलखान और ढेवा साधु का वेश धारण कर उदल की खोज में निकल पड़े मठ पर पहुंचकर अलख जगाई और जब परिचय पूछा गया तो उन्होंने खुद को गोरखपुर के बाबा गोरखनाथ के शिष्य बताया झिलमिल गुरु ने उनसे खेल दिखाने को कहा तब इन दोनों ने राग रागनी गाई और मलखान ने नृत्य किया इससे प्रसन्न होकर गुरु ने कुछ भी मांगने का वचन दिया तब उन्होंने वही मेढ़ा मांग लिया और उसे वापस आदमी बनाने
का अनुरोध किया ताकि उसे साथ ले जाना आसान हो थोड़ी हिचकिचाहट के बाद गुरु ने मेढ़ा बने उदल को फिर से आदमी बना दिया फिर तीनों आल्हा के पास लौट आए आल्हा ने सुझाव दिया कि राजा जंबई को शांति का संदेश भेजा जाए ताकि बिना युद्ध के ही मामला सुलझ जाए लेकिन जंबे ने इसे ठुकरा दिया और उसकी फौज युद्ध के लिए तैयार हो गई महोबे की फौज लोहागढ़ का द्वार नहीं तोड़ पाई तब उदल ने वूरी वन के झाड़ झं काड़ना खंदक में भरवा करर आग लगवा दी जिससे लोहागढ़ की दीवारें टूटकर बिखर गई
आल्हा और राजा जंबई के बीच भयंकर संघर्ष हुआ जिसमें राजा जंबई को बंदी बना लिया इसके बाद राजा जंबे के खजाने को महोबा भेजने की तैयारी की संदेशवाहक को भेजकर रानी कुशला को बुलवाया गया उदल ने उनसे कहा हमारे मन में आपके खिलाफ कोई द्वेष नहीं है अब आपसे केवल एक विनती है हमारे पिता और चाचा की पगड़ी और कलगी हमें वापस दे दीजिए उनकी खोपड़ यां नौलखा हार और लाखा पातुर भी इसके अलावा विजया का डोला भी हमें सौंप दीजिए इसके बाद उदल स्वयं बरगद के पेड़ से अपने पिता और चाचा की खोपड़ यां
उतार करर राजा जंबई को उसी कोल्हू में पिलवा देता है उधर विजया का ढोला तैयार था लेकिन आल्हा ने कहा कि विजय जादूगरनी है वह कभी भी घात कर सकती है इसीलिए राजनैतिक शत्रु को घर ले जाना उचित नहीं है अतः उसे अपने हाल पर छोड़कर महोबा को रवाना हो गए इसके बाद आल्हा उदल मलखान और सभी भाइयों की ख्याति दूर-दूर तक फेल गई ऐसी ही और ऐतिहासिक कहानियों के लिए हमारे चैनल को अभी सब्सक्राइब करें