कि अ ए हार्ट बंद और दांत अलग ऊपर से ऊपर निचे थोड़े नीचे बीच में गैर अ कि अ सेंटर में अजीब सा में कैसे मन की एकाग्रता का व्यास होता है आप देख रहे हैं कि चित्र में और किशन कल कम होने लगते हैं अजय को में पहली बार 1 घंटे में एक हजार संकल्प विकल्प होते होंगे तुम फिर नोट्स होने लगेंगे 800 7766 500 600 साढे तीन सौ सवा तीन सौ 310 303 282 संकल्प-विकल्पों की थी की संख्या कम होने लगे थे की अर्जियों संकल्प-विकल्पों की संख्या कम होने लगी थी कि त्यों तन
तन मन और शरीर को मारोगे रहे तंदरुस्त रहेगा और कि जितने संकल्प की पद्धित होते हैं उतने ही तन की शक्तियां विकसित होती हैं है और मन की शक्तियां विकसित होती है अब अधिक योग्यता दुश्मन होती है है और यही कारण है कि तुकाराम महाराज स्कूल विद्या में हुआ है मैं अनपढ़ से थे है फिर भी तुम तुकाराम महाराज की एकाग्रता का प्रभाव कि भीतर की शक्तियों को विकसित करके है है ऐसे अभंग उपचारित किया उनके कर तक और प्रेम ने ए प्रेम मुंबई यूनिवर्सिटी में एमबीए के विद्यार्थियों को संत तुकाराम जो लौकी विद्या से
अनुपस्थित थे मैं अभी भी मुंबई यूनिवर्सिटी में एमबीए के विद्यार्थियों को संत तुकाराम के अभंग पढ़कर अ की परीक्षा देने होते हैं अरे बाप चालू है बच्चे जिनको संत तुकाराम की पाठ्य-पुस्तकों में कि अभंग पढ़ने का मौका मिलता है में नरसी मेहता को दे तो यह पिंपल देखो या रामकृष्ण को देखो रमण महर्षि को देखो तो उनके वचनों को समझने के लिए अभी एंव और पीएचडी वालों को भी जोर लगाना पड़ता है वह कौन सी यूनिवर्सिटी में पढ़े थे कि सभी आधुनिक यूनिवर्सिटी है है जितना जितना एकाग्रता बढ़ती जाती है उतना-उतना कर दो में आए
ही व्यवहार में सफलता उठ जाती है की तंदुरुस्ती में भी शायरी लिखी है कि अवधि में बलवती होती है को दुर्बल आदमी सब जगह से मार खाता है हैं दुर्बलता मौत है भले ही जीवन है शुष्क बल नहीं ने से भरा हुआ बल पर हिट से भरा हुआ बल ए परम आत्मविश्वास से भरा हुआ बल है आज बारिश पलायनवाद नहीं लेकिन समझदारी की निश्चिंतता से में आलस्य नहीं लेकिन आराम ध्यान दें आलस्य नहीं आराम ए हाई लिवर में तमस होता है पराधीनता होती आराम में यह सब तो होता है स्वाधीनता ड्यूटेबल होता है एक अंधी
दौड़ नहीं पुरुषार्थ जरूरी है कोई भी विघ्न-बाधा में अशांति पैदा करने वाली घटना है है उसमें धैर्य से मुकाबला करने की अगर योग्यता चाहिए तो एकाग्रता से आएगी हैं की सूचना सिंह ने कहा तुलसी पर दृढ पर घर जाए के दुख कहिए रोए थे को इज्जत घुमावे आपके कि द्वितीय फलित हो े ु कि जब दुख कष्ट आता है तो किसी को सुनाने से को सुनें इज्जत बढ़ती नहीं है कि फरियाद करने वाले व्यक्ति की इज्जत बढ़ती नहीं आ इस दुख से भागना दुख से झगड़ा ना मैं अपने को धोखे खाए में फेंकना है दुख
से काम भागना नहीं यह कपड़ा नहीं और ऐसा व्यवहार नहीं करना के ऊपर पैदा होता है और सज्जनों से सदाचारियों से श्रेष्ठ पुरुषों से अवेयर मोल नहीं लेना चाहिए में अच्छे व्यक्तियों के साथ जो भी गाना नहीं चाहिए और बुरे व्यक्तियों के साथ सहमत नहीं होना चाहिए बड़ों के साथ सहमत हो जाते हैं की प्रबलता है अच्छों के साथ बिगाड़ लेते हैं दुर्बलता है अरे दुर्बलता मिटेगा करतात में भूत-प्रेत यक्ष गंधर्व किन्नर उन व्यक्तियों पर अपना जो राजमाता जो मन से दूर कर होते हैं है जो दुर्बल नहीं होते हैं उन पर उनका जोर नहीं
चलता है कि पड़ोसी भी उन पर जोर आजमाइश हैं जो दुर्बल बना होते हैं अजय को कि जब बलवान है उसके पक्ष में लोग हो जाते हैं को दुर्बल के लोग मजाक उड़ाते हैं है ना एवं आत्म बल जीने लगते हो कि इतिहास महादेव बलहीन को प्राप्त नहीं होता है कर दो की तनख्वाह बल होता है जन्म का फल होता है पद का बल होता है धन का बल होता है इलेक्ट्रिकल बाल होता है और इलेक्ट्रॉनिक बल्ब होता है यह सारे बल जहां से सत्ता लाते हैं वह है आत्मा अ कि अ कि यह हाइड्रोलिक
बाल गार्जियंस थे रिमेडी करता है कि यह बनाए किसने है कि किसी इंजीनियर इंजीनियर बाल कहां से लाया अकल कहां से लाया था कि आत्मा की एक एक अति अति छोटी सी किरण एकाग्रता से विशेष किरण मिलती है है जैसे सूरज के खैर हैं पेड़-पौधों को पल्लवित करते हैं विलो रिकार्ड सूर्य किरणों के साथ सब स्क्रीन की ऊर्जा को भी प्रकट कर देता है ऐसे एक आक्रमण उस परात्पर ब्रह्म के सामर्थ्य को प्रगट करने में सफल रहता है अपने पास क्यों मकान है दुकान है घर है पुत्र है परिवार है दम है दलित के वास्तविक
में आ एक बहुत छोटी चीजें हैं मैं बहुत छोटी थी मैं अभी तक जो आपको मिला है वह बहुत छोटा है यहां तक कि पूरे भारत का यह पूरे विश्व का राज्य भी मिल जाए फिर भी तुम्हारी असलियत के आगे यह बहुत छोटी चीज है कि तुम इनमें रुक मत जाओ इन उलट मत जाओ हैं इनमें तृप्त मत हो जाओ कि चला दो पहले दो गाड़ियां 64 हो गए मैं खुश हूं ऐसे करके समय इसमें खर्च मत डालो मैं तुम्हारी योग्यताएं बहुत खुश है मैं तुम्हारे भीतर बहुत कुछ छुपा है अ हुआ है मैं अर्जुन
छुपा है वह दृश्यों को देख रहा है कि ब्रह्मवेत्ताओं को दिख रहा है हैं और उन्हें ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ होने कि भारत से संस्कृति के घरवालों ने अ में उत्सवों और पर्वों का आयोजन किया है ताकि मनुष्यों के बहाने भी अ कि तुम उत्साहित होकर राधे की विशालता को प्रेम को सुधारता को की क्षमताओं को विकसित कर सको और इस बहाने से हो संतों योगियों के पास जा सको है और उन महापुरुषों को आजाद धन्यवाद हैं जिन्होंने ऐसे उत्सवों का आयोजन करके अ कि सनातन धर्म के एवं बीजों को हिंदू धर्म के के पथिकों को
है नश्वर पत्थर पथ में से हटाकर शाश्वत पर लगा दिया कि ऐसी व्यवस्था पर्वों और उत्सवों की व्यवस्था और कोई धर्म में नहीं जितनी सनातन धर्म में में और ज्योति शारीरिक बल से को प्रसन्न रहते हैं उनके लिए भी दशहरा का शस्त्र पूजन का दशहरा का उत्सव है कि खेलकूद और अस्त्र-शस्त्र का पूजन अ क्यों करते हुए भी वह अपनी शक्ति को में केंद्रित करें के बल बुद्धि के अधीन होगा तो बल सेवा का सत्कार में सा अनुभूति में खर्च होगा अ कि अगर बल के अधीन वृद्धि हो जाएगी तो विनाश कर देगी कि 2,000
सिपाही है लेकिन कमांडर एक है और कमांडर उसी बनाया जाता है जो बल नहीं बुद्धि प्रदान होता है में तहसीलदार कलेक्टर आदि कि मोटे और सारे सिब्बल से संपन्न है उसी लिए उनको वह पोस्ट नहीं दी जाती है उन्हें बुद्धि बल विशेष है इसलिए उनको मोस्ट दी जाती है अब तुम बोलो जितना सूक्ष्म होता है इतना उसकी योग्यता उसकी क्षमताएं सेवा आदि की सफलता देखी थी कि योगिता ज्यादा होती है और मन ध्यान करता तो सूक्ष्मताओं पड़ती थी ए स्ट्रेंजर ने जो रिसर्च करके आ कि जगत को अपनी और आकर्षित कर दिया उसके पीछे कार्यकर्ता
थी और सरलता थी अ हुआ है के विश्वविख्यात प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइंस्टीन का जन्मदिन था के लोगों से मिलने पाने वाले थे की पत्नी ने कहा कि क्या तुम्हारा बर्थडे ने अच्छे कपड़े तो है ना लोग मिलने आने वाले स्टंट कार लोग मुझसे मिलने आने वाले हैं कि कपड़ों से अगर कपड़े से मिलने आने वाले हैं तो लॉन्ड्री में चले जाएंगे ए वो मुझसे मिलने आने वाले हैं हमें तो हुई वहीं साथ में पुराने फटे कपड़े अ कि शायद जीवन वही पहन के बैठे रहे लोग मिलने आए पत्नी ने समझाया कि आज तुम्हारा जन्मदिन है हैं
जिनका मन है का ग्रह है वह पत्नी के समझाने में पति के समझाने में किसी गड़बड़ी के समझाने में नहीं आता है कि वह तो समझ जहां से पैदा होती वहां जाता है और सुनाओ है जो दुर्बल मना होते हैं उनको संसारी लोग समझाते हैं कि आप लोग यह तो करना चाहिए ऐसा तो खाना चाहिए अंडा तो कम से कम खाना चाहिए शक्ति के लिए आप दुर्बल मना को भी चेहरे को खबर नहीं कि अंडा एक अंडा में हनी जाता है फायदा बिल्कुल नहीं के बराबर है और दुर्गंध आना लॉक अखाद्य खा लेते हैं मनुष्य
पवित्र होता है उत्तेजित होता है और पड़ी हुई शक्ति भी वह लेकर फंदा बाहर आता है मैं अभी वैज्ञानिकों ने बिल्कुल का विश्लेषण किया गया अंडे का प्रचार करने वाले प्रदेशों ने भारत सरकार को सेंट्रल गवर्नमेंट और राजे गवर्नमेंट कितना टाइम प्रेस कर दिया और राज्य ने और सेंटर ने मिलकर पूरे समाज को इतना इंप्रेस कर दिया टिंडर वापसी हो गई है कि हिना से क्या क्या हानियां होती है अब बाहर आ रहा है है जो शास्त्री विचार रखे हैं जो एकांत मना है शांति बनाए उन्होंने रिसर्च की थी है एक आंवला खाने से है
अथवा एक सौ ग्राम संतरे का रस पीने से कि जोशी विटामिंस प्राप्त होता है वह 200 व्याख्या तब अपना विटामिंस है एक केला खाने से जो कैलरी मिलती है है उतनी कैलोरीस अंडा खाने से नहीं मिलती हुआ है है अरुण यादव काफी विश्लेषण करके अ इस प्रकार किया है एक अंडा के प्रचार करने वालों को अ आज के सारे के सारे समझ कहां से आती एकाग्रता सत्यार्थी अध्यन करना पड़ता है वह अकर्ता चाहिए अ और एक अंडे की नशिस्त उच्चता को देखना है अभी भी एकाग्रता चाहिए और सेव की थी इस मामले की आरोग्यता की
माता देखना है तभी भी एकाग्रता चाहिए से प्रभावित व्यक्ति को पहचान नहीं कभी भी एक कार्यकर्ता चाहिए और सारे व्यक्तियों में व्यक्तित्व जिस तैयार है उसको पहचान उपभोक्ता अ को एकाग्रता सफलता की जननी है और एकाग्रता से चित्र को विश्व शांति मिलती है है और एकाग्रता से ही तुम जहां प्रेम करना चाहिए वहीं प्रेम कर पाओगे ओ अपने प्रेमास्पद एक परमात्मा है कि जगत के बीच वस्तुओं को प्रेम नहीं किया जाता जगत की वस्तुओं का उपयोग किया जाता है कि आज उसके प्रति प्रेम होता है उसके आगे वस्तुएं ने टावर की जाती है कि चैत्र
भगवान शिव शंभू सदा शिव की प्रतिमा हो चाहे कृष्ण कहो या राम की ऊंचाई गुरु की प्रतिमा हो जाए गुरु हो जाए माता हो चाहे समाज का व्यक्ति हो जिसके प्रति प्रेम होता है उसके प्रति वस्तुएं नेता व की जाती यह में शिक्षा देता है कि प्रेम के आगे वस्तुओं का कोई विशेष मूल्य नहीं है और वस्तुए छुपे हुए प्रेम को जगाने में कुछ काम आती है कि पत्रं-पुष्पं भगवान के आगे अर्पण करते देते तु देते-देते देने की आदत में अपना अहंकार भी देने की कुछ योग्यता बढ़ती है के प्रेम में देना होता है और
मुंह में लेना होता है जो साधक गुरु कुछ देते हैं लेकिन गुरु भी कुछ दिए बिना नहीं रहते हैं फिर सत्संग देते हैं कुछ सीख देते हैं कुछ ऊंचाई देते हैं है तो जब और प्रेम से प्रभावित होकर व्यवहार होता है तो वह व्यवहार दोनों पक्ष का उन्नत करता हो जाता है जब मौत से प्रेरित होकर काम से प्रेरित हो कर्मों से प्रेरित होकर लोग से प्रेरित होकर उद्वेग से प्रेरित होकर काम होता है कार्य होता तो दोनों पक्ष का विनाश करता है दोनों पक्ष को हानि करता है कि किन्नर मन चंचल मन में काम
क्रोध भय शोक उदय का आता है और शांत मन में प्रेम उदारता क्षमता सहनशक्ति आदि सदगुण आते हैं है जितना जितना चंचल मन है उतना-उतना का पतन के रास्ते जल्दी गिरेगा और जितना जितना शांत मन है उतना-उतना उत्थान के रास्ते जल्दी चलेगा आ है तो मन एकाग्र रखकर ना मानो अपना कल्याण करना है मैं अपने को हर क्षेत्र में सफल करना है कि तुलसीदासजी कहते हैं ए लुक आत्म-धन राम नाम का धन जो अधिकतर पड़ा है वह उस धन को को चोड़कर नाहक धनवानों की खुशामद में लगे मैंने सुनाई थी दो-चार दिन पहले कथा ए
विलेन नगरी के पास है कोई नगर था उस नगर का नगर सेठ धनवान बहुत था के नगरसेठ था वह कि उसने में काफी धन एकत्रित कर रखा था और फिर भी चित्र में शांति नहीं थी घर पर जरूरी नहीं कि धन के हम बाहर होने से चित्र में शांति आती है कोई जरूरी नहीं है मैं अभी एक दिन के लिए हम गए थे इंदौर वहां कुछ लोग आए अपने एक व्यक्ति ने कहा कि स्वामी जी भगवान के आपके अभी दया हो गई जिंदा यह वह गाड़ी मोटर यह बहुत कुछ है ये सब कुछ मिल गया
है है लेकिन शांति नहीं है कि मैंने क्या भले आदमी तो फिर तुम्हें गैरों के साथ नाश हो गया है ये सब मिला और शांति नहीं है तो सब मिलेगी कीमत ही क्या है ये सब कुछ मिल गया है मोटर गाड़ी बंगला नौकरी है प्रमोशन है वह सब मिल गया है लेकिन भीतर शांति नहीं तो तुम्हें तो सब मिला नहीं है तुमने खो दिया है अजय को कि अगर भीतर की शांति नहीं तो सब मिले की कीमत दी क्या है और भीतर शांति है तो सब न होने का दुख भी क्या है कि सुखदेव जी
के पास ऐसा कोई सबूत नहीं था जिसको लोग सब बोलते हैं ऐसा तब सब कोई अश्लील कहो ऐसा तब तक दत्तात्रेय के पास नहीं था दौरान के पास नहीं था कि इतने महाप्रभु कीर्तन करते जाते हैं गांव के लोग इकट्ठे हो जाते हैं मधुर शांति और आनंद से पल्लवित हो जाते हैं आवश्यकता प्रति लेते बाकी जो मिलता मानते थे दौरान कि की सेवा करने वाला व्यक्ति जानता था कि चैतन्य महाप्रभु को भोजन के बाद थोड़ा सा हृदय का टुकड़ा चाहिए कि अभिरक्षा में ले आता था का एग्जाम दे दिया अरे का टुकड़ा दूसरा दिन भी
दे दिया रास्ते में दौरान ने पूछा कि Bigg Boss अभिषेक को तो गया नहीं है अरे यह कहां से बोले कल मांग चलाया था जरा ज्यादा है उसको संभाल रखी थी गांड मार दौरान उनका तो मेरे संग में रहने के काबिल नहीं मेरे साथ रहने के काबिल नहीं कल की हर डे एक दिन दूसरे दिन के लिए संभाल के रख लो है उसको निकाल दिया अलग संभाल रखी थी गुरुजी के काम आएगी तो में निकाल दिया हम शिवलाल को कभी कभी डांटता हूं शिवलाल अपने लिए से शपथ नहीं संभालता है मुझे पता है बिना पूछे
बिना दिए मिठाई नहीं लेता मुझे पता है लेकिन कई बार तोता हूं कि तुम इतना क्यों संग्रह करते इतना क्यों संग्रह करते हैं क्या वे से बुखार ना कितना देवा हाथ बीन सॉर्टेड सुधारों से महसूस अ जो भी महापुरुषों के जीवन की याद आती तो कभी कभी मिलता रहता है कि क्या कभी ऐसा तक सब छोड़ कर चले जाते हैं कि पुतिन के पास कुछ नहीं होता है फिर भी कुछ ऐसा है कि कुछ न होने पर भी सब कुछ होता है और सब कुछ दे सकते हैं सब कुछ देने वालों को देख सकते ऐसी
योग्यता होगी ये सब कुछ देने वालों को मुद्दे सकते हैं धन-वैभव मान फल आदि रुपया-पैसा गाड़ी मोटर मकान-दुकान तब अर्पण करने वाले हजारों लाखों रुपए का दान करने वालों को भी वे लोग दाता दान कर सकते हैं जिनके पास बाहर से कुछ भी नहीं है लेकिन उनकी एकाग्रता बहुत कुछ दिन में वस्तु देने वालों को भी योगी लोग आंख के कारणों से ऐसा कुछ देते हैं उन नेताओं को पता चलता है कि हमने कुछ नहीं दिया हम देने के निमित्त गए थे हमने उन्नत और रखा लेकिन फ़क़ीरों की निगरानी हमको हमारे दिल को ऐसा कुछ
हुआ था कि हम कुछ साल हो गए हैं श्री रमण महर्षि के निकाल मात्रा से लोगों को ऐसा कुछ मिलता था कि लोगों को जो कुछ देते थे उनको लगता था कि हमने बहुत थोड़ा दिया है है अरे प्रत्यक्ष प्रमाण है कि हम दृश्यों से संतों से जो पाते हैं उसके सामने हमारे पास जो भी कुछ है या हमने जो कुछ अर्पण किया है कि वह बहुत थोड़ा है बहुत सुंदर फॉर द प्राप्त होता है कि हम कुछ देते हैं और हमारे को बदले में जो मिलता है वह बहुत मधुर सप्ताह बहुत सुंदर सर्वर है
कि अगर ऐसा सुंदर सावधान न होता तो हम आते भी नहीं हो के जरिए ने कहा कि आपूर्ति पड़े क्या कौन जाए तो की जय जय आपने चाहिए ना पड़े आप ऊपर है अ कि त्यों कोई जाए आपने चाहिए ना आपको आना निमित्त एप्पल ने मृत्यु हुई तो डेढ हम लाभ ना लोटे हो कैमरा लिया है कि लाभ ना कि भारत मैं तो आप के संपर्क में कोई भी आता है तो आप से लाभ चाहता है मैं आपसे फायदा चाहता है नारायण है कि कोई भी आप के संपर्क में आता है तो आपसे फायदा चाहता
है ए आर रहमान का फायदा अपने पद का फायदा आरोग्यता का फायदा यह सब छोटे फायदे में ए प्रेम एक ऐसा फायदा है मधुरता एक ऐसा फायदा के बाकी के फायदे छोटे हो जाते हैं और एकाग्रता से प्रेम और मधुरता का विकास होता है है और यही मधुरता और प्रेम का दान कि इस प्रेम और मधुरता के पीछे तो दुनिया दीवानी है दुनिया तो दीवानी है लेकिन साफ-साफ में भगवान भी दीवाने रुपयों के पीछे पीछे घूमते हैं के द्वारा समर्थन दे दे छछिया भरि छाछ तेरे छास के पीछे गोपियों की कृष्ण प्रत्येक जो एकाग्रता की
मधुरता थी वह ठीक है से सूरदासजी कहते हैं जो त्रिभुवन को नाच नचावे बैंक को अहिरन की छोहरियां छछिया भरि छाछ पै नाच नचा दे ऑन करो में एक बार तानसेन गुरुदेव के दर्शन करने गया था कि अ गुरुदेव सूरदास के पद rs.100 कि तानसेन ठगा सा रह गया कि गुरुदेव आपके पद कितनी सुंदर घृत नहीं कि मैं सूरदास के बनाए उपर आ रहा हूं है तो क्या मेरे गुरुदेव से पहले सूरदास बड़े तो लें यहां दांत चिहार के कि मेरे पदों की अपेक्षा अब सूरदास के पदों की मधुरता और ज्यादा है तानसेन इस समय
मिले तो सूरदास के दर्शन करना हुआ है ए गुड लुक मैं अपने आपको बड़ा और किसी श्रेष्ठ का अनादर करें ऐसे नहीं होते हैं है जहां भी सद्गुण है गुरु लोग उसका आदर कर लेते स्वीकार कर लेते हैं और जो दूसरों के सद गुणों का आदर करता है स्वीकार करता है वहीं सद्गुरु के रास्ते चल सकता है और वह सब गुरु बनता है सद्गुरु बनाए हैं तब जब दूसरों के गुणों का आदर किया और स्वीकार किया गुरु के गुणों का आदर किया स्वीकार करें तभी तो शुरुआत है है जो दूसरों के सद्गुण का आदर नहीं
करता यह स्वीकार नहीं करता है वह बनी कैसे सकता है हेलो कंचन हुए बीच में विश्व में अमृत होए विद्या नारी बीच में चारों लीजिए सोए को चोटे कोलमैन आ रही है लड़के-लड़की का बेटी बेटे का संबंध है लेकिन व कुल छोटा है गरीब हैं इन थे चीज है स्वीकार कर दो को चोटा आदमी है छोटी पोस्ट का लेकिन उसकी कोई सलाह सुहावनी है सुंदर स्वीकार कर लो कि स्वामी रामकृष्ण कहा करते थे कि मैं तो अपने को आजीवन विद्यार्थी जानता हूं मानता हूं का ज्ञान का कोई छोर नहीं है ज्ञान का कोई था नहीं
कहीं से भी मुझे ज्ञान मिले कि मैं स्वीकार करने को तैयार एक सितारा अपने गुरु के पास चित्र लगाया बड़ी मेहनत से उसने बनाया था बड़े प्यार से बनाया था बड़ी एकाग्रता से जितनी उसकी योग्यता थी पूरी की पूरी डिटेल दी थी उस चित्र में उतार गुरुदेव के पास गया चित्र लेकर वीरवार को कि लंबी सांस लें था का मारते गुरुदेव खिलखिलाकर हंसते हुए पुलिस अधीक्षक को गले लगा रहे हैं तू मेरे से भी आगे निकल गया तो धन्य कि क्या मधुर चित्र बनाया है कि वास्तव में ऐसा चित्र बना था कि गुरु उसकी प्रशंसा
की बना रहा शेयर होने लग गया गुरु ने का बेटा मैंने तो तेरे को धन्यवाद दिया है मैं तेरी मेहनतकश मैंने कलर की है इसमें कोई दोस्त नहीं है बहुत सुंदर चित्र है शेयर होने लगा कि है यह अब मेरी उन्नति को गई अ जो मेरे दोस्त निकालने वाले हैं उनको भी मेरा देश नहीं दिख रहा है तो आप मेरी उन्नति कब होगी तो आ जाए अब मेरी उन्नति रुक गई थी मैं आपको कोई अपना हितैषी कि मां-बाप गुरु कुछ कहे तो उनके कहने के पीछे तुम्हारी उन्नति का भाव होता है कि आज के दिन
यह संकल्प करना कि बड़े और हितैषी हमारी कोई गलती बताए हैं है तो उनका आभार मानकर अपनी गलती को निकालने में तत्पर हूं न कि उनको को तगड़ा प्रति उत्तर देकर चुप करा दें उनकी सीख को ठुकरा दे तो किसी एक को ठुकरा देता है वह काल के पैरों से टकरा जाता हर घर में आता है और फिर ठुकराया जाता है हर जन्म में यह टकरा जाता है है जो मनुष्यों की ब्रह्मवेत्ताओं किसी एक को ठुकराता है वह समझो अपने भाग्य को ठुकराता है कि नालों का भागदौड़ जयपुर शुक्राचार्य के निभाग कि गुरु की सीख
को रिक्शाओं के सीख को ब्रह्मवेत्ताओं के सीख को ठुकराना मानो अपने भाग्य को ठुकराना है कर दो मैं इसमें बात कह रहा था कि सूरदास के पदों की कि सांसद ने गुरु मुख से सूरदास के पदों की महिमा सुनने हैं है और और अपने प्यारे मित्र बीरबल से कहीं अ का मौका पाकर आगरा से में एक बार दर्शन भी कराए थे कि तानसेन अ कि हर सूरदास का एक्सांपल सुनने का भाग्य मिला और वह पलों को याद रहेगा अकबर के आगे गया था उसने ऊपर है कि अकबर ठगा सा रह गया बनने का इतना सुंदर
पद हैं है क्या तेरे सुंदर सुहाने पल यह महाराज हमारा पद नहीं सूरदास जी महाराज का है ऐसा करते प्रशंसा की व कि बीरबल ने भी कहा कि मुझे भी सुनने का मौका मिला हमारा आज आप उनके दर्शन करो अवश्य कि शाही फरमान हो गया सूबेदार को मथुरा के सूबेदार को आ गया हो गई हुआ है जो आज्ञा भेज दो मथुरा के सूबेदार को किशोर दास को ले आए निर्बल ने कहा सूरदास कोई साधारण पुरुष नहीं है अलग किरदार के पास बहुत अधिक गाड़ियां मोटर व्रत नहीं था कि केवल एकाग्रता थी और उस हरी मेथी
थी कर दो कि सूरदास कुछ साधारण आदमी नहीं महाराज जी है और सूबेदार उनको बुलाने जाए इधर भेज देते तो शायद वह न भी आए थे कि इंकार भी करते थे कि अकबर ने कहा कि सूबेदार को विधायकों की राय के बड़े आदर से बड़े सम्मान से ही सलमान से पालकी में बिठाकर सूरदास बुलाया है के अनुसार गया में सूबेदार के पास हुकुम लेकर सूबेदार ने अपने ख़ास आदमियों को भेजा था मैं अशोक दास को विनती की कि आपको पालकी में बिठाकर राजा साहब के पास कि हम ले जाना चाहते हैं आप सब मतदान सूरदास
ने कहा कि मेरा राजा तो एक ही है तू मेरा राजा तो एक ही और उसके पास ही मैं हूं और किसी राजा के पास जाने की मुझे आवश्यकता नहीं है है जहां की राजसत्ता का बोलबाला रहता दबदबा रहता था कोई इनकार नहीं कर सकता राजा का आमंत्रण है और पालकी में बैठकर अ कि सूरदास कितनी मधुर है करता थी और इतना साहस बल कहां से आया मन की चंचलता हुआ था करता है आ रही सूरदास थे कि कहीं निगाह जाती और विकार पैदा करता है तो उसने गानों को स्वभाव के निकाल दिया था अ
मैं इतना उनको समय की कीमत थी समय किस कदर करते थे सूरदास से इनकार कर दिया सूबेदार स्वयं माया के महाराज आप इनकार कर रहे हैं राजा साहब मेरे ऊपर नाराज हो जाएंगे इसको अनुनय-विनय कर सब्सक्राइब करें में ला सकते हैं कि एक व्यक्ति को मथुरा में रहने वाले व्यक्ति को नहीं ला सकता है ऐसा सूबेदार योग्य नहीं है मेरी बदली कर देंगे मुझे निकाल देंगे महाराज मेरी जगह पर किसी जीवन को भर्ती कर देंगे या उनकी पोस्टिंग हो जाएगी उनको व्यवस्था जाएगा बदली तो दो है और कोई अश्लील स्वभाव का जाएगा तुम्हारा है है
तो फिर आपके भक्तों को और आपको वह और नीति व्यक्तियों से साम-दाम-दंड-भेद से ले जाने की कोशिश करेगा महाराज मैं नहीं चाहता कि आपके भक्तों को कोई सुविधा हराकर परेशान करें और मैं नहीं चाहता कि आप की सेवा में असफल होकर घर बैठ जाऊं राजा की नजर से गिर जाऊं महाराज आप कृपा करके मुझे अपनी स्किन पर दया करके भी आप चलने की सम्मति सूरदास जी को लगाकर है सब्सक्राइब और यथावत सूरदास ने वीरवार को ए राजा के हुक्म को ठुकरा रहे हैं सूबेदार की बात को स्वीकार कर लिया किसी ने तंत्र दिनांक तत्व सूरदास
की पंक्ति में बैठे थे में पहुंचे हां अकबर ने उनका स्वागत स्वागत किया सब विनती की कि महाराज और महाराज के कृपापात्र वजीर आप किसी से कुछ वक्त पद सुनना चाहता हूं रास्ते में हूं कि हरी चिंतन हरिध्यान करते हुए है मैं अपनी स्वभाविक देसी भाषा में है ऐसा नहीं कि इंग्लिश ठोकर कोई प्रभाव अहंकार बढ़ाना था जय जय हो की सुविधा शेर तो अपने स्वभाविक भाषा में अ कि मधुर पद गाए थे ए राजा प्रसन्न हुआ आप वजीर भी प्रसन्न हुए थे और फिर बाजरो ने कहा कि यहां जो भी कभी आते हैं का
मन मांगा इनाम ले जाते हैं हैं और आपका इतना मधुर कंठ इतना आकर्षक आवाज कि आपकी वाणी ब्रांड पर आ से आती है तो आप एक हाथ गीत राजा साहब के विषय में भी अ कि सूरदास ने कहा मैं देनदारी राजाओं के गीत गाने के लिए मेरे पास समय ही नहीं है मैं तो मेरे राजा का गीत जानता हूं दूसरा कोई जानता ही नहीं है झाला कि अकबर का चेहरा फीका पड़ गया लेकिन चतुर आदमी था समय को संभाल लिया उसने महाराज नहीं आप बहुत पवित्र संघ की मधुर वाणी से बड़े तत्व हैं है और
एक आदत पद मालिका बता दीजिए सुना अतिथि श्री कृष्ण पक्ष सुना दिया अकबर ने उनको 84 गांव और 1000 सोना मौज भेंट करने की घोषणा की सूरदास बोलते हैं कि राजा मुझे माफ करो यह तुम्हारे 1000 सोनम और गांव कहां संभाल लूंगा और ने निद्रा का यों लेना चाहिए था हैं जिनके पास अंदर की मधुरता है उनको हजार सोनम और चार गांव मिलता है तुमको बुरा लगता है भैया जी को एकाग्रता ऐसा धन है उसके आगे यह बहुत कुछ है ए राजा ने कहा आप जैसे संत पवित्र आत्मा मेरे पास आए और मैं ख्यात तो
यह नहीं सकता महाराज अनुमति युवा पीढी अपने ढंग से समझा ले ले नहीं सकता है कि आखिर बीरबल ने अपने व्यक्ति खोजी बीरबल ने कहा कि महाराज आप न लें तो कोई हरकत आप अपने पास रखे तो कोई बात नहीं से स्वीकार करके अच्छे काम में लगा दो है अरुण अभिनय किया कि अकबर ने कहा अगर आप यह नहीं लेते तो कम से कम है मैं एक चीज तो स्वीकार करें अ और सुनाओ कि शाहिद स्वागत हर मैंने सात सुसमा नियुक्त 70 60 हजार से भी जुड़े हो सकते हैं कि शाही मन पत्र स्वीकार करें
अर्जेंट को मानपत्र मिलता था उनका हमारा बन जाता था तो 70 हमारा अ कि सूरदास ने स्वीकार कर लिया है कि सूरदास जब मथुरा पहुंचे थे है और मित्र भक्त संत आए थे आ जाओ भगत हुई सूरदास ने कहा कि यह दे रहे थे हमने उस ज्ञान का कुछ लिया नहीं कि यह सब गांव लेकर मैं कहां समान हूं तब एक संत ने का सुभ लिया नहीं फिर भी वह 70 परवाना तो लाए हैं कुछ नहीं लेना तो यह सब स्कूल में कारण तो बीरबल एक व्यक्ति ने मुझे समझाया उन्होंने समझा लूंगा तो अपमान हो
जाएगा यह दूसरी बात है कि मैंने देख राजा अकबर को साधारण व्यक्ति हूं कि यह अगले जन्म का बाल मुकुंद ब्रह्मचारी है कि गांव का दूध पीकर एकाग्रता करता था ध्यान करता है है और दूध में गाय का बॉईल आ गया बिना छाने दूध पी लिया उसमें गाय का मामला आगे उससे उसकी योग साधना स्थगित हो गई है और योग भ्रष्ट है अगले जन्म का भगवान का भक्त तो है लाला का प्यारा तो है लाला के पथिक हों तो है इसलिए मैंने कहा कि अपनी जात वाला है कि संत में पूछा कि तुमने कैसे जाना
बोले मेरे लाला के बिना और बताएगा कौन मेरे लाला नहीं मां बताया मेरे को अजय को कि एक तरफ वजीर है दूसरी तरफ राजा है लेकिन सूरदास की एकाग्रता मेरे लाला को बाध्य कर देती है कि अकबर के भूतकाल को भी सामने प्रकट कर दे दो कुछ लोगों की नजर से सूरदास के पास कुछ नहीं था लेकिन क्या आप ऐसा करेंगे सूरदास के पास कुछ नहीं था सूरदास के पास प्रेम और एकाग्रता का ऐसा दिन था कि सम्राट उनकी कृपा का आकांक्षी हूं कि हर यह प्रेमधन एकाग्रता का धन सब कमा सकते हैं है जिसके
आगे भाई अधीन कुछ हो जाता है हां भाई अर्थसत्ता एक छोटी पड़ जाती है के बाहर के वस्तुएं सब एक-एक व्यक्ति को जो धन-वैभव पत्री पत्नी पुत्र परिवार है वैसे का वैसा दूसरे को होना संभव नहीं लेकिन कि आंतरिक सुख आंतरिक प्रसाद जो एक आदमी को मिलता है वह दूसरा भी पा सकता तीसरा भी पा सकता है जितनी व्यक्ति इतने सब के सब पा सकते कलेक्टर व्यक्ति नहीं बन सकते हैं एक देश में दो प्राइम मिनिस्टर नहीं रह सकते हैं है कि एक घर में एक कंबल पर 10 साधक रह सकते 10 साल दूर रह
सकते हैं क्योंकि वहां क्षमता है मानवता पद से बड़ी होती है का पद मानवता के आगे छोटा हो जाता है 210 मानव एक कंबल पर रह सकते हैं लेकिन 10 प्राइम मिनिस्टर एक तत्व नहीं रह सकते जय राम जी की को एकाग्रता से मानवता का विकास होता है है और मानवता का विकास मतलब मनसा समिति मनुष्य जो मन से अपने मूल के तरफ अपने मूल के साथ संबंध जोड़ दे मन से अपने मूल को पहचानने लगी है उसका ना मानो तो [संगीत] कर दो [संगीत]