हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम ओ प्रभु जी ओम प्यारे जी ओम मेरे जी ओम
रामा जी ओम श्यामा जी ओम ओम ओम ओ [प्रशंसा] नारायण नारायण नारायण नारायण परमात्मा से मेल करने का नाम है योग यह जो आसन वासन करते हैं वह तो स्वास्थ्य के लिए योगा आसन है वास्तव में योग क्या है मेल जैसे पांच और सात का योग तुम्हारा हो गया ऐसे जीव और ब्रह्म का योग तो मुक्ति हो गई तरंग का सागर से योग अनित्य का नित्य से योग तो भगवान से योग जब तक नहीं किगा तब तक वियोग रहेगा और वियोग में विकारों का प्रभाव रहता है वियोग में चिंता का प्रभाव रहता है दुख का
प्रभाव रहता है भय का प्रभाव रहता है कपट सब गड़बड़ियां सब वियोग में होती है बिछड़े हैं जो प्यारे से दर बदर भटकते फिरते हैं उस परमात्मा प्यारे से जिसका योग नहीं होता वो ना जाने कितने कितने शरीरों में भटकता है कितने कितने पिं के शरीर से पटका जाता और मां के शरीर में लटकाया जाता है हर शरीर में मैं मेरा मेरा कर कर के सब छोड़ के फिर वियोग हो जाता है तो जब तक भगवत योग नहीं होता तब तक जीव की वासना दुख चिंता भय शोक जड़ मूल से नाश नहीं होता रामायण में
आता है बिनु रघुवीर पद जिय की जरनी न जाई परमात्मा पद की प्राप्ति के बिना जीवात्मा की तपन दुख नहीं मिटते हैं दुख दबना एक बात है दुख भूलना दूसरी बात है दुख मिटना तीसरी बात है लेकिन दुख मिटकर दुख हारी का आनंद और सामर्थ्य आना यह बहुत ऊंची बात है जैसे नींद में दुख मिट जाता है दुख दब जाता है मिटता नहीं शराब में नशे में दूसरी बातों में दुख भूल जाते हैं लेकिन भगवान के साथ योग होने के बाद दुख मिटता है और उसकी जगह पर परमानंद प्रकट होता है नित्य नवीन सुख प्रकट
होता है उसके लिए सुख क्लबों में पिक्चरों में पनों में सुख नहीं उसका सुख अपने आप का है दिले तस्वीरें हैं यार जब की गर्दन झुका ली मुलाकात कर ली ऐसा वो सुखरूप हो जाता है तो सुख तीन प्रकार का होता है एक जिसको संसारी लोग बोलते हैं ना सुख तबीयत ठीक है पैसा है यश है स्वास्थ्य है यह है वह है इसको बोलते संसारी सुख ये कब सिरक जाए कोई पता नहीं और इसको थामने के लिए ब ने के लिए सारी जिंदगी खप जाती और मृत्यु तो आती है तो बड़ा भारी दुख होता है
निंदा होती तो दुख होता है बीमारी होती तो दुख होता है यह सुख टिकता नहीं है संसार का हिलता डलता रहता अंत में परेशान कर देता है दूसरा होता है भाव जन्य सुख भगवान मेरे हैं मैं भगवान का हूं भगवान का स्मरण किया भगवत भाव में आए बड़ा सुख मिला लेकिन भावना आती है फिर सुख होता है फिर भावना बदल जाती है फिर दुख हो जाता तीसरा होता है योग जन्य सुख भगवान के साथ मिलन हो गया योग जन्य सुख तीन प्रकार का है जो धनी है संसारी सुख सुविधाए हैं वो धर्मात्मा बने और सबका
मंगल करके सबके साथ मिलजुल के सुख बांट कर अपने हृदय में संतोष अपने हृदय में भगवत तृप्ति यह है धर्मात्मा का सुख धर्मात्मा का योग धर्म जन्य योग जिसके पास सुख सुविधा रुपया पैसा स्वास्थ्य नहीं है वो अपने हृदय में से इच्छाएं वासना निकाल दे कि जिसके पास सुख है वह भी छोड़ जाएगा जिसके पास सुख है व सुख है वह भी तो अपना ही है ऐसे करके वासना निवृत्ति करके परमात्मा से ज्ञान जन्य योग कर ले तो धर्म धर्म के द्वारा योग ज्ञान के द्वारा योग और तीसरा योग होता है शरणागति योग जिसमें तू
रखे वाहवा रखा और फिर बदला वाहवा हरिश्चंद्र को राज्य है तो वाह वाह राज्य चला गया शमशान में जल्लाद का काम करते तो वाह वाह क्योंकि यह तो बदलने वाला है लेकिन मेरा परमात्मा नित्य है नित्य वस्तु जू की त्यों है अनित्य में परिवर्तन है शरीर अनित्य है शरीर मौत के तरफ जाता है यह सब सुख और शरीर मरने वाला है इसको जानने वाला अमरा वो परमात्मा का है परमात्मा मेरा है वो शरणागत समझता है कि संसार सरकता रहता है और अ सरक परमात्मा की मैं शरण हूं तो ये शरणागति का सुख जैसे बच्चा मां
के गोद में होता तो बड़ा बलपूर्वक देखता है छोटा सा पिल्लर भी अपने मालिक के साथ होता अपने घर में होता तो बड़ा जोरदार बल रखता है ऐसे ही भगवान में शांत होना शवास अंदर जाए ओ बाहर आए तो एक स्वा सनर जाए शांति आनंद भगवान की शरण का योग शरणागति योग तो धर्म ज्ञान जन्य योग शरणागति योग और कर्म योग खूब ध्यान से सुनना बहुत पुण्य होता है बहुत ज्ञान बढ़ेगा भगवान कृष्ण कहते हैं कि हे प्रिय उधव क्षण भर का भी ब्रह्म ज्ञान का सत्संग बड़ी आपदाओं से रक्षा करके जीव को मुझ आत्मा
से मिलाने में सक्षम है शास्त्र कहते हैं स्नातन तेन सर्व तीर्थम उसने सारे तीर्थ स्नान कर लिया दात तेन सर्व दन उसने सब दान कर दिया कृतम तेन सर्व यज्ञम उसके द्वारा सारे यज्ञ हो गए न क्षणम मन ब्रह्म विचारे स्थिरम कत क्षण भर के लिए भी ब्रह्म परमात्मा के विचार में मन को लगा दिया उसने सारे तीर्थ कर लिए सारे यज्ञ कर लिए सारे दान कर लिए सारे पित्रों को तप करके तृप्त कर दिया एक कोई व्यक्ति मर गया था तो रिश्तेदार कट्ठे हुए थे रो रहे थे दफनाने केलिए तैयारियां हो रही थी य
विदेश की घटना है उस समय के जाने माने एक संत जिनका नाम था गुरु जीएफ जहां लोग कट्ठे हुए थे सब को कब्रस्तान में ले जाने के लिए तो सब के आगे खड़े हो गए व संत मुर्दे के आगे और पूछने लगे कि यह आदमी मरा मर गया है कि जिंदा है लोग हैरान हो गए कि इतने बड़े संत हमसे पूछ रहे हो यहां तो माहौल एकदम गंभीर था कोई मर गया तो सब अलग माहौल था वहां रोने वाले को भी हंसी आ जाए ऐसा सवाल कर रहे इतने बड़े बोले आदमी जिंदा है कि मर
गया है लोग देखने लगे मुर्दे के आगे और संत के आगे अरे मेरे को क्या देखते हो व्ट यू थिंक अबाउट मी एंड हिम मेरे लिए और इसके लिए क्या सोच रहे हो मैं पूछता हूं कि जिंदा है कि मर गया लोग बोलते कि हा यह मर गया है तो इसमें मर गया वह कौन है और जिंदा है वह कौन है लोगों ने समझा किय पागल बाबा जैसी बात कर रहे हैं है तो बहुत अच्छे संत मर गया वो कौन है जिंदा है वो कौन है बोले यह मर गया है और हम जिंदे हैं बोले
झूठी बात है जो जिंदा था वह अभी भी जिंदा है चाहे नहीं दिखता है लेकिन है जिंदा है जो जिंदा था वह अभी भी जिंदा है इससे निकल के जिंदा है और जो मुर्दा है वह अभी भी मुर्दा है जिसको तुम जिंदा बोलते हो तुम अभी भी मुर्दा हो जो दिख रहे हो जो जिंदा है वो दिखता नहीं है जैसे वायर दिखती है थंबे दिखते हैं बल्लब दिखते हैं मशीने दिखती है लेकिन उसमें जीवन है विद्युत का पसार होना लाइट जीवन है ये माइक ये सब दिख रहे हैं अभी पावर उस का सप्लाई बंद हो
जाए तो सब मुर्दा हो जाएंगे क्या ख्याल है ऐसे यह शरीर तो मुर्दा है और इसके अंदर जो चैत जो जीवन है वह जीवन तो जीवन है और मृत्यु तो मृत्यु है तो यह शरीर पांच भूत पृथ्वी जल तेज वायु आकाश मन बुद्धि और अहंकार यह आठ चीजों वाला जो दिखता है व तो मुर्दा है लेकिन जिससे दिखता है जो दिखता है ध्यान देना जो दिखता है वह मृत्यु है जिससे दिखता है व वो जीवन है जिसको दिखता है और जिससे दिखता है तो दिखता तो शरीर से है लेकिन जिसको दिखता है वो चेतन तो
जो जिंदा है वो जिंदा है और जो मृत्यु वाला है वो मृत्यु वाला है तो ये पांच भूत मन बुद्धि अहंकार यह मृत्यु है बचपन का शरीर शिशु की मृत्यु हुई किशोर जिंदा हुआ किशोर की मृत्यु हुई युवक जिंदा हुआ युवक की मृत्यु हुई बूढ़ा जिंदा हुआ बूढ़े की मृत्यु हुई अलग जीव जिंदा है तो शरीर की मृत्यु होती रहती है किशोर अवस्था शिशु अवस्था युवावस्था वृद्ध अवस्था बीमार अवस्था स्वस्थ अवस्था दुखी अवस्था सुखी अवस्था चिंतित अवस्था निश्चिंत अवस्था इसकी तो अवस्थाओं की तो मृत्यु होती रहती है लेकिन इन अवस्थाओं को जो जानता है वह
तो जीवन है लोगों ने सोचा कि बाबा हम मानते थे कि तुम पागल हो लेकिन अब पता चला कि हम ही पागल मृत्यु को जीवन मानने और जीवन का पता नहीं क्या हाल है जी जी नहीं रहे मर रहे हो जन्म से तब से अभी तक कोई 40 साल मरा है कोई 41 कोई 70 हम 72 साल मर चुके जिसको अगर मैं शरीर मानते हैं तो हम 72 साल मर चुके हैं जिसकी मृत्यु उसकी मृत्यु है और जो जीवन है वह जीवन है तो जीवन से मेल करना योग है और मृत्यु वाले शरीर से मेल
कर के सुखी होना यह संसारी पना है सरकना पना है तो शास्त्रों ने बहुत साफ साफ बोला भगवान ने बहुत स्पष्ट कह दिया भूमि रापो अनलोनली है मुझ में दिखती है लेकिन मैं इनमें नहीं हूं यह मुझ में नहीं है ऐसे आप में दिखता है शरीर शरीर दिखता है आप शरीर है लेकिन शरीर मरा रह जाएगा फिर भी आप रहेंगे क्या ख्याल है बचपन मर गया आप है ना बचपन को जानने वाले दुख मर गया आप है ना जानने वाले सुख मर गया आप है ना जानने वाले जो जानने वाले वो कौन है उसके साथ
योग करना आहा उसके साथ योग हो जाए तो आपका दर्शन करने वाले को जो शांति मिलेगी जो सुख मिलेगा जो प्रसाद मिलेगा उससे उसके दुख मिट जाएंगे इसीलिए बोलते कबीरा दर्शन संत के साहिबा आवे याद साधु नाम दर्शन पातक नासनम कबीरा दर्शन संत के साहिबा आवे याद लेखे में वही घड़ी बाकी के दिन बाद उसने अपना जीवन साध लिया वह साधु हो गया उसने परम कार्य साध लिया तुमने मथुरा नाम सुना है बृंदावन मथुरा सुना है ना मथुरा में डीजल पेट्रोल की रिफाइनरी है गवर्नमेंट की हजारों लाखों लीटर रो रिफाइन होता है पेट्रोल डीजल आदी
रिफाइनरी सरकारी पता है ना आपको तो बड़े बड़े टंकर भागते तो फिट गाड़ी में भाई बैठी थी उसका पति ड्राइवर टैंकर ने मारी जोर से टक्कर फया उसी समय चूरा हो गई पति मर गया ड्राइवर मर गया दो बच्चे बेटे मर गए और उस बाइक को लगा ऐसा ठक्कर एक्सीडेंट का कि रेड की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया आगरे की अस्पताल में उसको भर्ती कर दिया आगरा नाम सुना है ना तुमने अब उसके रिश्तेदार रोते रोते जा रहे हैं कि अरे तुम तो उड़िया बाबा संत का दर्शन करने जा रही थी और टैकर ने इतना
कहर किया तुम तो धर्मात्मा थी तुम्हारे आंखों के सामने पति की लाश दो बच्चों की लाश ड्राइवर की लाश यह तीसरा जो बच्चा है कोई गरीब भाई मर गई थी झोपड़े वाली उसका दूध पीने वाले बालक को तूने पाला था बच्चे को कुछ नहीं हुआ तेरे को फेक्चर हुआ तू अस्पताल में पड़ी है साल भर बेड रेस्ट में क्या यह भी जीवन है उसने सत्संग सुना था बोले हां यही जीवन है कि पति की लाश बच्चों की लाश देखने पर भी जीवन जीवन है मैंने अपने पति की आत्मा को कहा कि जीवन तो शाश्वत है
जिसकी मौत होनी थी वही मरा है जो पहले नहीं था बाद में नहीं रहेगा वह अभी नहीं की तरफ जा रहा है आप पहले भी थे अभी भी हो बाद में भी रहोगे बेटे इस शरीर के बेटे तो यह मुर्दा होकर पड़े हैं लेकिन तुम वास्तव में परमात्मा के सपूत हो तुम्हें परमात्मा भी नहीं मार सकते हैं क्योंकि परमात्मा का आत्मा और तुम्हारा आत्मा एक है जैसे घड़ का आकाश और महाकाश एक ही है घड़े को कोई तोड़ देगा लेकिन घड़े के आकाश को कोई नहीं तोड़ेगा ऐसे ही तुम्हारे शरीर रूपी घड़े की मृत्यु हुई
तुम तो मृत्यु के बाद भी जीवन हो बेटे इस सत्संग की बलिहारी है कि दो बेटों की लाश पड़ी है पति की लाश पड़ी है ड्राइवर की लाश पड़ी है और मेरा शरीर मोहताज है साल भर मैं यहां पड़ी रहूंगी अभी तो 10 पा दिन बीते हैं लेकिन आप दुखी होकर आते तो मुझे लगता है कि आपके जीवन में सत्संग नहीं है सत्संग सुनाते और लोग हंसते हुए जाते हैं जब साल भर पूरा हुआ एक दो दिन में छुट्टी मिलने वाली तो अमेरिका के रिश्तेदार आए अरे रे रे रे मैं हमने सुना तुम्हारे साथ बड़ा
अनर्थ हुआ बला ये हुआ ये हुआ बोले रोय मत साल भर में रोने वाले आए हस के चले गए जीवन तो निष्कलंक है और जिसकी मृत्यु होती उसमें तो कभी कुछ कभी कुछ कभी किस कैसे भी सके मरने वाला है जो मरने वाला था उसको ही फैक्चर हुआ है जीवन को फैक्चर नहीं हुआ बोले तुम इतना धर्मात्मा थी फिर भी तुमने दुख देखे बोले आप बहुत ठीक बोलते हैं हम ने दुख देखे हैं हम दुखी नहीं हुए हैं अगर सत्संग नहीं होता तो हम दुख के साथ जुड़कर बेटा मर गया हाय हाय हम दुखी होते
पति मर गया हाय हाय मुझे फेचर हुआ हाय हाय तो न जाने यह साल भर में अब कल परसों तो मैं इस पाताल से बरी हो जाऊंगी छुटटी हो जाएगी लेकिन जीवन का ज्ञान नहीं मिलता तो शरीर की मृत्यु में हम ही तो मरे जाते हैं लाख ख करोड़ों रुपयों से जो जीवन नहीं मिलता वो चित्तोर समिति ने जीवन और मृत्यु का रहस्य सुनाने वाला सत्संग आयोजन कर दिया जो लाखों करोड़ों रुपए से निर्द दुखता नहीं मिलती है वह हंसते खेलते तालियां बजाते निर्द दुखता का ज्ञान मिल रहा है इस ज्ञान को आपने संभाल के
रखा तो तो निहाल हो जाओगे लेकिन खाली सुनकर भूल भी जाओ तभी भी यह ज्ञान कोई छीन नहीं सकता भूल सकते हो लेकिन छूट नहीं सकता मृत्यु के समय भी याद आए ओम ओम ओम ओ मना अमर आत्मा मैं मृत्यु को जानता हूं सद्गति हो जाएगी दुख है कि मैं दुख को जानता हूं जो निगरे लोग होते हैं भक्ति भाव तो करते हैं माता जी को पूछते हैं किसी को पूछते हैं लेकिन सत्संग नहीं है वे शरीर को मैं मानते मृत्यु वाले को मैं मानते और अमरता को कई आकाश में मानते हैं कई साथ में
अरस में होगा अरे भाई जीवन तो जीवन ही रहता है व जीवन कहीं दूर नहीं भगवान तो भगवान लेते जो भगवान यहां नहीं है वो वहां भगवान होगा कि नहीं क्या पता भगवान तो सर्वव्यापक है तो सर्वव्यापक है तो यहां भी है सदा है तो अभी है सब में है तो हम में भी है अगर किसी में भगवान है किसी में नहीं है तो भगवान वो क्या कर लेगा वो तो मुर्दा है ऐसा भगवान हमारा क्या भला करेगा जो किसी में है किसी में नहीं है कभी है कभी नहीं है कहीं है कहीं नहीं है
नहीं भगवान तो सर्वत्र है सब में है सदा है तो जो सदा है वह जीवन है शरीर सदा नहीं है शरीर सर्वत्र नहीं है शरीर सब में नहीं है लेकिन आकाश सब में है चदा काश ऐसे परमात्मा चैतन्य सब में है तो जब भी सामान्य आदमी को बीमारी होती तो बोलता मैं बीमार हूं लेकिन सत्संगी को बीमारी आती तो समझता कि शरीर बीमार है उसका उपाय करेगा लेकिन बीमारी के साथ जुड़ेगा नहीं बीमारी जल्दी भगा देगा निगरे आदमी को दुख होगा मैं तो दुखी हूं मैं दुखी हूं ज्यादा दुखी हो जाएगा लेकिन सत्संगी को दुख
होगा तो बोलेगा दुख मन में आया बीमारी शरीर में आई चिंता चित में आई इसको देखने वाला जीवन तो जो का त है ओम ओम ओम ओम ओम ओ ये ओमकार मंत्र राम मंत्र हरि मंत्र शिव मंत्र ये जीवन के साथ जोड़ने वाले इंद्रदेव ऐसे महापुरुषों को देखकर नतमस्तक हो जाते होंगे कि मैं 33 करोड़ देवताओं का स्वामी हूं 12 मेघ मेरी आज्ञा में रहते हैं फिर भी मुझे सुख चाहिए तो अप्सराएं नाचे गंधर्व गाए साजी साज बनाए बजाए अच्छा तभी मुझे मजा है लेकिन जिन्हो में जिन्होंने जीवन और मृत्यु का रहस्य जान लिया और
व जीवन में जो टिक गए हैं ऐसे महापुरुष की नजर पड़ती है ऐसे महापुरुष की वाणी सुनते उन लोगों को जो सुख मिलता है जो शांति मिलती है वह मेरे को नाच गानों में नहीं मिलती जितना सत्संग को सुख और शांति मिलता [प्रशंसा] है नाच गान में तो पुण्य का हरा होता लेकिन सत्संग में ना समझी का रास होता है अज्ञान का रास होता है दुख और चिंता का रास होता है अहंकार का और ममता का रास होता है और परमात्मा का रस मिलता है इसीलिए जो सत्संग सुनते हैं सत्संग सुनाते सत्संग सुनने सुनाने में
साझीदार होते हैं वे बड़ भागी लेकिन सत्संग कौन कर सकता है किसका सत्संग नेता बोलेगा तो भाषण होगा क्या ख्याल है व अपनी हमारी पार्टी दूध की धोई और फलानी पार्टी वाले ऐसे हैं वैसे हैं वैसे हैं चोर है ऐसा है उनको उखाड़ के फेंक दो वोट हमको दे दो नेता के भाषण का नजरिया यह रहेगा प्रोफेसर बोलेगा तो अपने विषय की व्याख्या करेगा इसमें ये लिखा उसमें ये लिखा इसमें ये लिखा अगर कथाकार कथा करेगा तो पुराणों की शास्त्रों की उपदेशक इधर उधर का सुन के कठा करके किसी गुरु का किसी भगवान का नाम
लेकर अपना रोजी रोटी दीक्षा देने का अधिकार जिसको भगवान का साक्षात्कार हुआ है आत्म वेता को ही है दूसरे लोग दीक्षा देंगे तो दीक्षा लेने वाला दीक्षा देने वाला कबीर जी बोलते हैं बंधे को बंधा मिले छूटे कोन उपाय सेवा कर निर्बंध की पल में दे छुड़ाए गुरु लोभी शिश लालची दोनों खेले दाव दोनों डूबे बावरे चढ़ी पत्थर की नाव कबीर जी ने कहा तो जो निर्बंध नारायण स्वभाव में जीवन में जगे हैं ऐसे आत्म वेता संत के लिए परमात्मा प्राप्त कठिन नहीं है आपके लिए भी कठिन नहीं जीवन है जीवन है मृत्यु है स
मृत्यु है भाग त्याग लक्षणा से समझकर उसमें थोड़ा एकांत में अभ्यास करके टिक जाना है भगवान को बनाना नहीं है भगवान के पास जाना नहीं है भगवान को बुलाना नहीं है दूर होए तो बुलाए दूर होए तो जाए नहीं हो तो बनाए वो तो मौजूद है केवल अपनी बुद्धि पर जो ना समझी के संस्कार पड़े हैं व अनुभवी महापुरुषों से सत्संग सुनते उनके बताया मार्ग के अनुसार संस्कार हटाकर जो कत्य जानना है तो उसमें एक तरीका ऐसा है कि भगवान कृष्ण कहते हैं सुखम वा यदि वा दुखम सहयोगी परमो मता सुखद अवस्था आए चाहे दुख
अवस्था आए लेकिन य अवस्था आई है तो यह जीवन नहीं है जीवन उनको जानता है तो दोनों अवस्थाओं में जो सम रहता है वह परम योगी है भगवान ने कहा राजा भरतरी उज्जैनी का राज पाठ छोड़कर गोरखनाथ के चरणों में गए और जीवन तत्व का साक्षात्कार हुआ उन्होंने लिखा जब स स्वच्छ सत संग कीनो तभी कछु कछु चीन क्या चीन मुड जान आपको मैं बेवकूफ था मैं राजा हूं सुखी हूं फलाना हूं अभी पता चला कि जीवन जीवन है और मृत्यु मृत्यु है शरीर अनित्य है वैभव शाश्वत नहीं है और नित्य मृत्यु के निकट जा
रहा है शरीर कर्तव्य धर्म संग्रह मन में काम क्रोध लोभ मोह आदि आए उस समय अपने जीवन को जानो तो उसका प्रभाव कम हो जाएगा जैसे मलाई रखी है रबड़ी रखी है लस्सी रखी है मक्खन रखा है या खाना रखा है कुत्ता ता है तो क्या करते हो य य य हो बस बस थ मरा भगाते हो ना ऐसे जब चिंता है तो ओम ओम ओम ओम ओम ओम भय आए शोक आए बीमारी हरि ओम ओम ओम [प्रशंसा] [संगीत] ओ ओम ओम ओम ओम [संगीत] बताओ दुख रहेगा चिंता रहेगी और डंडा फेंका तो कौआ मक्खन
उठाएगा दूध में मुह डालेगा कौवा जब भी दुख है चिंता है तो य आप डंडे बाजी जान लो जीवन जीवन है और नश्वर शरीर नश्वर है मैं शाश्वत आत्मा हूं परमात्मा का हूं परमात्मा मेरे हैं ओम ओम ओम जीवन की सत्ता से स्वास चल रहे जीवन ही मृत्यु को जानता है दुख को जानता है जीवन ही आत्मा परमात्मा है ओम ओम आनंद स्वरूप है सुख रूप है दुखद अवस्था में भी जीवन सुख रूप है चिंता के समय चिंता को जानने वाला जीवन है ओम ओम आनंद ओम शांति ओम माधुर्य ओम सत्य जीवन ओम ओम हम
जीवन में टके हैं हमारा जीवन के साथ सीधा संबंध है शरीर का मृत्यु के साथ संबंध है शरीर बदला बदलता है लेकिन उसको जानने वाला जीवन नहीं बदलता है मैं जीवन हूं और जीवन दाता से मेरा योग है मैं वियोग करना चाहूं तो भी योग है मैं भगवान से बिछड़ना चाहूं तो भी नहीं बिछड़ सकता हूं जैसे गड़े का आकाश महाकाश से अलग होना चाहे तो नहीं हो सकता ऐसे जीव ईश्वर से अलग होना चाहे तो नहीं हो सकता ईश्वर तत्व जीवन है और शरीर मृत्यु है दुख सुख मृत्यु है उसको जानने वाला जीवन है
ओम ओम ओम श्री कृष्ण कौशल्य मां को जीवन में भी शांति मिले इसलिए बाल्यकाल मेंही मस्ती मस्ती में ही जीवन की तरफ ले जाते नन्ने से कृष्ण यशोदा का चोटा पकड़ते और ठोड़ी पकड़ते और ऊंचे होते पंजों के बल और ो के कान में कहते मन ओम जीवन है अब यशोदा भी बोलती है कृष्ण बोलता है यशोदा बोलती है देखना आप यशोदा को अपने जीवन में ले जा रहे कृष्ण व यशोदा और कृष्ण अभी तुम्हारे साथ है भगवान को यश दे ऐसी बुद्धि का नाम है यशोदा और बुद्धि को जो जानता है उसका नाम है
आत्मा कृष्णा जो कषित करते आकर्षित कर दे आनंदित कर दे अलाद कर दे वह आत्मदेव का नाम है कृष्ण नंद यशोदा के यहां अवतार हुआ उसके बाद लोग कृष्ण की भक्ति करते हैं ऐसी बात नहीं है दशरथ के य राम जी जन प्रकट हुए उसके बाद राम जी की भक्ति करते ऐसी बात नहीं है दशरथ राजा के पिता पिता के पिता पिता के पिता रघु राजा भगवान राम का भजन करते थे राम राम राम राम रमंते योगी यस्मिन स राम जिस आत्मा देव में योगी लोग रमण करते हैं जो रोम रोम में रम रहा है
वह चैतन्य राम ऐसे ही कर्ष आकर्ष कृष्ण जो कषित आकर्षित आनंदित करता है वह आत्म कृष्ण उसी परमात्मा का नाम राम है उसी का नाम कृष्ण है तुलसीदास ने दुनिया को अपने दृढ़ भक्ति का परिचय देते हुए जो कृष्ण है वही राम है उसका प्रत्यक्ष अनुभव कराने के लिए एक बार न ली बृंदावन लोगों ने कहा महाराज चलो भगवान के दर्शन करने बांके बिहारी के मंदिर में तो पहुंच गए ना हाथ जोड़े ना सिर झुकाए ना प्रणाम करें पंडा लोग बोले भगवान है प्रणाम कर बोले ये तुम्हारा भगवान है मेरे भगवान थोड़े हैं संतों की
भी कोई मौज होती है बोले महाराज जी भगवान है आपके हमारे नहीं नहीं नहीं मेरे भगवान तो है धनुषधारी ये तो तुम्हारे हैं बांके बिहारी मक्खन मिश्री खाओ उनके नाम से कमाओ मेरे भगवान तु मर्यादा पुरुष होतम ये तो लीलाधारी तुम्हारे हैं बोले महाराज तुम्हारे हमारे क्या प्रणाम करो बोले तुलसी मस्तक तबन में धनुष बाण लियो हाथ तुलसीदास का मस्तक तब नमगा यवा के बि हरी धनुष्य बाण हाथ में ले ले एकही है तो फिर धनुष्य बाण ले ले उनको क्या देर लगती तुलसी मस्तक तबन में धनुष बाण लि हाथ कित मुरली कित चंद्रिका कित
गोपय को साथ अपने जन के कारण श्री कृष्ण यो रघुनाथ अवध धाम धामा जीी पति अवतार पति राम सकल सिद्ध पति जानकी दासन पति हनुमान राधा जी जानकी बन गई बंदरों का स्वामी हनुमान आ गया बलराम की जगह पर सकल सिद्ध पति जानकी दासन पति हनुमान कर कहे धनुष चढ़ायो चकत भए सबको मगन भए सिया जानकी देख राम जी का रूप जो राम मंदिर में जाते हैं आरती के समय य गाते सुनते [संगीत] हैं तो राम भी वही है कृष्ण भी वही है गोविंद भी वही है गो माना इंद्रिया इंद्रिया जिसकी सत्ता से विचरण करती
उसी परमेश्वर का नाम गोविंद पड़ता है और इंद्रिया थककर आराम करती तो उस परमेश्वर का नाम गोपाल पड़ता है राधा रमण भी वही है राधा उल्टा दो तो धारा ख्यालों की धारा वृति की धारा धारा जिसकी सत्ता से रमण करते व राधा रमण गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो राधा रमण हरि गोविंद बोलो कितना सरल है कितना सहज है जीवन आप शरीर को को तो छोड़ सकते हो लेकिन परमात्मा को नहीं छोड़ सकते सुख को छोड़ सकते दुख को छोड़ सकते लेकिन छोड़ने वाले को नहीं छोड़ [संगीत] सकते ऐसा नित्य परमात्मा हमारा आत्मा है लेकिन अनित्य
जो चीजें हैं अनित्य शरीर है उनमें ममता हो गई और परमात्मा से वि मुक्ता हो गई इसलिए दुख है अब परमात्मा से योग करो और उनका उपयोग तो क्या होगा मन में काम क्रोध आदि दोष शांत होने लगेंगे बच्चे को जन्म दोगे लेकिन काम नहीं रहोगे व्यवहार करने के लिए आंख दिखाओगे लेकिन अंदर क्रोधी नहीं रहोगे जैसे रंग मंच पर कोई राजा का पाठ अदा करता है मंत्री मैं सम्राट अशोक बोल रहा हूं तुमने मुझे बताया कि मेरा बेटा महेंद्र लोफर को पना देता है गुना प्रवृत्ति करने वालों को पाल रखा है प्रजा में त्राहिमाम
हो गया तुमने आज तक मुझे बताया नहीं आदेश सुनो महेंद्र जहां भी हो उसे कटघरे में खड़ा कर दिया जाए यह घटित घटना है उसके ऊपर नाटक कोई कर रहा है सम्राट अशोक बन रहा है लेकिन उसको पता है कि मैं कौन हूं मंत्री की बात सुनकर पातली पुत्र अशोक घुसाए महेंद्र को कटघरे में खड़ा किया महेंद्र बह बेटियों की इज्जत लूटने वालों को पनाह देते हो शराबी कबाबियां को प्रोत्साहित करते हो राज्य के नियम को ताक पर रख देते हो क्योंकि सम्राट का बेटा है पुलिस तुम्हें कुछ नहीं कर पाती लेकिन तुमने आतंक मचाया
है जो बह बेटियों की इज्जत लूटे जो प्रजा का पालन कर दे वह तो प्रजा पालक राजा है पालन ना करे तो कोई बात नहीं लेकिन प्रजा का शोषण करें वो प्रजा का राज्य का द्रोही है राज द्रोह से क्या दंड मिलता है महेंद्र कान खोल के सुन लो मैं तुम्हारे विषय में सब समझ चुका हूं सफाई देने की कोई जरूरत [संगीत] नहीं राजद्रोही को दंड क्या मिलता है सुन लो मृत्यु [संगीत] दंड तुम्हें फांसी के तखत पर चढ़ाया [संगीत] जाएगा सिर झुकाया महेंद्र ने न्याय प्रिय सम्राट को प्रणाम करता हूं सम्राट का बेटा होने
के नाते नहीं न इतने तटस्थ प्रजा पालक पाटली पुत्र सम्राट अशोक का एक नागरिक होने के नाते मुझे गर्व [संगीत] है कि मंत्री राधा गुप्त ने जो कहा है वो सब सत्य है राधा गुप्त की बात को मैं काटता नहीं आपकी सजा को मैं शमा नहीं चाहता लेकिन प्रजा का नागरिक होने के नाते एक सप्ताह के बाद फांसी पर चढ़ाओ इतनी में प्रार्थना कर सकता हूं धर्मात्मा राजा को ऐसा ही होगा जाओ काली कोठरी में रख दो आज से ठीक सातव दिन तुम्हें फांसी मिलेगी याद रखना जो अज्ञ मंत्री राधा गुप्त बड़ा सज्जन आदमी था
झूठी शिकायत करना उसके बश का नहीं था और दबी दबी जिवान उसने कहा मैं जो नहीं बोलना चाहता हूं मुझे बोलना पड़ता है जो नहीं कहना चाहता हूं राजन मुझे कहना पड़ता है क्योंकि मैंने राज्य का अन्न खाया प्रजा का दुख दूर करने का मेरा मंत्री पद राधा गुप्त गवा भी स्वयं फरियाद भी स्वयं और सजा दिलाने वाले भी स्वयं फटाफट निर्णय हो गया छठा दिन की सुबह हुई अंधेरी कोठरी में रहने वाले राजकुमार की जेलर बूढ़ा बुजरक धर्मात्मा [संगीत] था दरवाजा खटखटाया महेंद्रा कल इस समय तुम नहीं होगे क्या सो रहे हो कि हो
मंत्री राधा गुप्त का भला हो मुझे उन्होंने जीवन सिखा दिया मैंने मृत्यु को जीत लिया है सम्राट को खबर कर दो जो जीवन है सो जीवन है जो मौत है सो मौत है कल सातवा दिन होगा लेकिन आज छठे दिन में का सूर्योदय मेरे लिए आत्म सूर्य का वैभव ले आया है मैंने जो जाने अनजाने मजाक में भी सत्संग सुना था कि जीवन क्या है मृत्यु क्या है दुख किसको होता है सुख किसको होता है दुख सुख से पार कौन है वो जो मैंने सुन रखा था एकांत में मैंने मनन किया और मुझे उस प्रसाद
की प्राप्ति हो गई जो संत पाकर आनंदित होते हैं महेंद्र की आंखों में चमक थी होठों पर मधुर मुस्कान थी वाणी में अनुभव ता की सुर भी थी बूढ़ा जलर दंग रह गया दौड़ता राधा गुप्त और दूसरे मंत्रियों के पास गया राजा तक खबर पहुंची राजा ने अलग-अलग मंत्रियों को अलग-अलग जानकारों को भेजा और महेंद्र की कसोटी पर महेंद्र खरा [संगीत] उतरा सम्राट प्रसन्नता से फूला ना समाया उसकी रात स्वर्गीय रात बती जिस बेटे को फांसी लगानी थी वो बेटा जीवन को जान चुका है बाप तो अधूरा रह गया लेकिन बेटा गुनाहगार बेटा पूरा हो
गया पूरा प्रभु आराधी पूरा जहां का नाव नानक पूरा पाइए पूरे के गुण गाव हे राधा गुप्त महेंद्र सत्य को उपलब्ध हो गया हां महाराज तुमने उसकी गुना ही प्रवृत्ति बताई थी बोले हां महाराज गुना आदमी अगर बदलना चाहता है तो जैसे गुनाह में तेजी से गिरता है ऐसे जीवन में भी तेजी से चलता है महेंद्र से वो घटना घ महाराज वो दिन सुभावना था जो मैंने फरियाद की और वो घड़ी स्वानी थी जो आपने फांसी की सजा सुनाई और फांसी लगेगी तो शरीर को लगेगी मृत्यु होगी तो मरने वाले की होगी उसके बाद भी
जीवन जो का त्यों है उसमें महेंद्र जग गए महाराज सम्राट की पुण्याई है महेंद्र की कोई पुण्याई है महाराज मैं तो धन्य हूं ऐसे राज्य परिवार का मंत्री होने का मुझे गर्व है राधा गुप्त जैसे और भी मंत्री गदगद हो रहे थे चलो हम चलते हैं आज सातवा दिन महेंद्र को जाकर सुनाया कि आज तुम्हारा फांसी का दिवस फांसी के समय पर तुम्हें एक तोफा दिया जाएगा फांसी के समय आपको राज तिलक करने की मैं व्यवस्था की घोषणा कर रहा हूं त महेंद्र कहता है धर्मात्मा राजा आपकी जय हो मैं आदर सहित आपके राज्य का
अस्वीकार करता हूं मुझे अब जीवन रूपी राज्य मिल गया है अब मेरा राज्य होगा गिरी गुफाओ में एक एकांत में भूले भट के लोगों के बीच उनको सत्संग सुनाने में मेरा राज्य होगा तुम्हारी गद्दी पर मेरा राज्य मुझे नहीं चाहिए वो एक प्रांत का राज्य एक इलाके का राज्य मेरा वास्तविक जीवन तो जहां सूरज है चंदा है उससे भी पार है जहा चार 100 करोड़ सूरज तपते हैं और अग्नि लोक कहा जाता है उससे भी मेरा राज्य पार है जैसे आकाश में गुबारा ऐसे मुझ जीवन में यह आकाश है महाराज अब मुझे आपका राज्य वैभव
नहीं चाहिए अब तो मैं एकांत गिरी गुफाओ में रहूंगा मैंने वास्तविक जीवन को पा लिया शरीर की सुविधाए बेकार शरीर का यश अपयश तुच्छ है गुण आदमी को अपयश से बचना चाहिए यशस्वी काम करना चाहिए लेकिन यश भगवान को अर्पण कर दे और अपयश होता है तो अपनी गलती निकाल दे मैंने जीवन को जान लिया महाराज ऐसा करके उसने अपने जीवन की व्याख्या करते करते अनुभव की डकार दी सम्राट धन्य धन्य हो गया कि महेंद्र राज्य को तोफा नहीं तो पिता का प्रसाद समझ लो बोले नहीं मुझे प्रसाद मिल गया सतगुरु का पिता के प्रसाद
को सादर में वापस करता हूं मुझे गुरु का प्रसाद पर्याप्त है मुझे लीलाशाह जी का प्रसाद मिला तो थामल जी के प्रसाद की मुझे कोई जरूरत ही नहीं [संगीत] पड़ी लीलाशाह बापू का प्रसाद मिल गया ना अब मुझे किसी पिता के प्रसाद की जरूरत नहीं नहीं तो हर जन्म में न जाने कितने बापों में कितना प्रसाद दिया होगा लो बेटा अब तुम संभालो ना बाप संभाल पाया ना बेटा संभाल पाया क्योंकि जिससे मृत्यु जुड़ी है उसका संले तो क्या संले और जिससे जीवन जड़ा है उसका मिटेगा तोगा तो क्या छटेगा मैं तो चित्तोड़ समिति को
धन भागी मानूंगा चित्तोड़ वासियों को खूब धन्यवाद दूंगा कि कैसी ऊंची बात सुन रहे जिससे साथ साथ पीढ़ियों का मंगल हो जाए कुलम पवित्रम जननी कृतार्था वसुंधरा पुण्यवचन यह सत्संग सुनने वाले का कुल पवित्र हो जाएगा जिस घर में जिस धरती में रहता है कृतार्थ हो जाती शिव जी कहते धन्य माता पिता धन्य गोत्रम धन्यम कुलो भवा धन्या च वसुदा देवी यत्र सत गुरु भक्त था उसकी माता धन्य है उसके पिता धन्य उनका कुल और गोत्र धन्य जिनके हृदय में गुरु भक्ति है गुरु का ज्ञान है और गुरु का ज्ञान है कि तुम अपने जीवन
की तरफ देखो गुरु जीएफ ने कहा कि ये मरा कौन है जिंदा कौन है बोले हम जिंदे हैं ये मरा है झूठी बात है जो मरा है वो मरे हैं और जो जिंदा है वो अभी भी जिंदा है जो जीवन है वो अभी भी जीवन है जरा सावधान रहकर शवास चल रहा है अंदर गया ओम शवास बाहर आया गिनती अंदर गया ओम ओम जीवन के साथ तुम्हारी स्मृति कराएगा जोड़ देगा स्वास उ स्वास गिनते गिनते शांति आनंद में सो गए सुबह उठे तो ओम शा जो जीवन है जीवन है जो मौत है मौत है जो
भी मिलेगा आएगा छूटेगा सब मर जाएगा फिर जीवन में जीवन के बल से य शरीर जीता है लेकिन शरीर के बाद भी जीवन तो रहता है दुख को भी जानता है जीवन सुख को भी जानता है जीवन चिंता को भी जीवन जानता है चिंता जीवन को नहीं जानती शरीर आत्मा को नहीं जानता आत्मा शरीर को जानता है हाथ तुम जानते हो तुम जीवन हो हाथ तुमको नहीं जानता है हाथ मरा हुआ [संगीत] है पैर तुमको जानता नहीं तुम पैर को जानते हो तुम जीवन हो पैर जीवन नहीं है लगता है कि पैर जीवन है हाथ
जीवन है नहीं ये मृत्यु का ठेला है उसको चलाने वाले तुम जीवन हो मरने वाली वस्तुओं को मेरा मानते हैं और सोचते कि ऐसा क्यों हुआ ऐसा क्यों हुआ इसलिए दुख बनाते हैं नहीं तो पति की लाश है बच्चों की लाश लेकिन सत्संग जीवन का है माई दुखी नहीं हुई ठीक ठाक हो गई इससे बड़ा दुख क्या हो सकता है पया गाड़ी कचुंबर हो गई ड्राइवर मारा पड़ा है पति मरे पड़े बच्चे मरे पड़े माइको फचर हुआ लेकिन जीवन की स्मृति में निदु हो रही कितनी बड़ी बात दुख नहीं आना यह बड़ी बात नहीं है
दुख में दुख का साक्षी होकर जीवन में चला जाना बहुत बड़ी बात है जीवन का रस भी जग मंग आएगा गुनाहगार महेंद्र अकेला कोठी में याद करता है सत्संग की बातें और फिर रसमय हो जाता है राज्य को ठुकरा देता है देश भर में विचरण करता है श्रीलंका तक महेंद्र का सत्संग भारत की सीमावर्ती इलाका चीन के इलाकों में बर्मा में महेंद्र के अनुयाई मंद्र के सत्संग ऐसे लीला श बापू ने जो जीवन दिखाया तो मेरे भी बहुत सारे अनुयाई अहंकार रहित चिंता रहित मृत्यु वाले शरीर में होते हुए भी अमरता की तरफ आ गए
आज रे आनंद भयो मरा सदगुरु आया पमना मरा जोगी आया पमना परमेश्वर आया पमना गोमती गाय रो दूध मंगाओ दूध खीर रवना खीरा खारा अमृत भोजन गुरुजी ने जी मावना मरा जोगी ने जी मावना फलो जड़ी प्रेम री चादर फलोरा पे रावना फूलो फूलो मैं फिरू मारा फूलोरा परावना मारा हारो रा परावना आज रे आनंद भयो मारा सगर आया पावना की जय रना पायर डोला रेमना बिछावना टे बिराजे मोरे सदगुरु देवा पंखे वाव लावना आज रे आनंद भयो मारा सदगुरु आया पा मना मथुरा में तो कंस मारयो लंका जी में रावना कुद पड़ कालेंद्र माथे
नागनाथ के रावना आज रे आनंद होयो मरा सदगुरु आया पावना मारा जोगी आया पाम मारा परमेश्वर आया [संगीत] पाम जाम पर जाम पीने से क्या फायदा रात अभागी शराब सत्यानाश करके उतर जाएगी तू हरि नाम की पलिया पिया कर नहीं तो की पलिया पिया कर तेरी सारी जिंदगी सुधर जाएगी रे भाया ार जकार थारी नजर पड़ ना ब पार जाया रा बाप जाए रेरा अ हर लगे नहीं फटकड़ी रंग च [संगीत] भाया बुढ़ापे में भी याद शक्ति रहे और बच्चों को भी सिखाओ में तो उनका मार्क तो अच्छे आएंगे क्योंकि स्मृति के अदर भी सक्रिय
हो [संगीत] जावे दो तीन बार बच्चों को दिन में ऐसा कराओ और फिर माना ओ आत्मा परमात्मा इससे बच्चों को तो परमात्मा की तो भक्ति मिलेगी लेकिन याद शक्ति और प्रीति वाले हो जाएंगे रूठने वाले नहीं होंगे बच्चों को सिखा दो मां बाप या भाई बहन कोई लड़े आपस में लोटा पानी भर के नारायण नारायण [संगीत] नारायण लड़ाई वाले भक्ति में बदल जाएंगे क्या आटी हो जाए आटा हो राजी राजी हो जाएंगे मज आएगा क्या अरे हत बे चको रंग आवे [संगीत] ग ये होने से मन में काम क्रोध आएगा तो सही टिकेगा [संगीत] नहीं
आत्म विलास [संगीत] होगा विहित भोग में भी आसक्ति नहीं होगी अधर्म तो नहीं करोगे शराब कबाब नहीं लेकिन जो ठीक खाना पीना पहले अच्छी आसक्ति होती अब ठीक है संयम से खा लोगे और कर्मों में दौड़ भाग पहले जो आ सक्ति थी व नहीं आप कर्मों से भी उपरा मता होगी मवे धीरे धीरे झंझट छूटता जाएगा गब सब चन छोड़ो लागे देख आख चरित्र ब