दोस्तों आज हम आपको एक ऐसे केस फाइल के बारे में बताने वाले हैं जिसे सुनकर आपका दिल भी दहल जाएगा इस केस ने पूरे श्रीलंका के साथ-साथ दुनिया तक को यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि आखिर कब तक लड़कियों के साथ गलत होता रहेगा क्या लड़कियां अब अकेले स्कूल भी नहीं जा सकती हैं क्या मां-बाप को उनकी पढ़ाई-लिखाई करना भी बंद कराना होगा क्या कहीं भी लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं ऐसी ही कहानी है विथिया की जिसे आठ लोगों ने मिलकर मौत की नींद सुला दिया लेकिन विथिया का गुनाह क्या था क्यों इन लोगों
ने उसे अपना शिकार बनाया और पुलिस ने क्या कहकर विथिया के माता-पिता की मदद नहीं की अगर आप भी जानना चाहते हैं इन सवालों के जवाब तो हमारे साथ वीडियो के लास्ट तक बने [संगीत] रहिए दोस्तों इस केस फाइल की शुरुआत होती है 90 के दशक में हुई श्रीलंका की एक फॉर से जिसकी वजह से लोगों के दिल में इतना डर बैठ गया था कि व यह सोचने लगे थे कि पता नहीं आने वाला कल उन्हें देखना नसीब होगा या नहीं क्या वह कल जिंदा रह भी पाएंगे या नहीं क्योंकि हर रोज यहां किसी ना
किसी की मौत हो रही थी और वहां के जो लोग थे वोह अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए इधर से उधर भटक रहे थे उनके पास ना तो रहने के लिए जगह थी और ना ही खाने को खाना आपको बता दें जहां वॉर छुड़ी हुई थी वहां पास में ही एक समुदाय भी रहा करता था जो इस वॉर की वजह से अब यहां नहीं रह पा रहा था यानी इनका गुजर बसर करना अब इस जगह पर नामुमकिन साबित हो रहा था था इसलिए इन्हें अपनी जान बचाने के लिए दूसरे इलाकों का रुख करना पड़
रहा था इस समुदाय में एक परिवार भी था जहां 25 नवंबर साल 1996 को एक प्यारी सी बच्ची ने जन्म लिया जिसका नाम माता-पिता ने बड़े ही प्यार से विथिया शिव लोग नाथन रखा विथिया को बचपन से ही बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा क्योंकि इसके परिवार के पास रहने के लिए अपनी खुद की कोई भी जगह नहीं थी इन्हें बार-बार एक जगह से दूसरी जगह पर जाना पड़ता था जब यह लोग किसी नई जगह पर जाते थे तो सबसे पहले वहां की जमीन और आसपास की स्थिति को देखते थे कि यहां पर इनका गुजर
बसर हो भी पाएगा या फिर नहीं या रहने के लिए जो जरूरी चीजें चाहिए वो इन्हें यहां मिल भी पाएगी या नहीं जब इन्हें लगता था कि हां यह लोग यहां आराम से रह सकते हैं और इनकी जान को कोई खतरा नहीं है तब यह यहां टेंट वगैरह लगाकर रहना शुरू कर देते थे लेकिन कुछ टाइम बाद इन्हें किसी मजबूरी के चलते इस जगह को भी छोड़ना पड़ जाता था जिसके बाद ये दोबारा एक नई जगह की तलाश करते और फिर वहां रहना शुरू कर देते थे इससे आप अंदाजा लगा कही सकते हैं कि छोटी
सी उम्र में ही विथिया ने कितनी मुश्किलों का सामना किया जैसे-जैसे विथिया बड़ी होती जा रही थी परिवार की फिक्र भी बढ़ती जा रही थी हालात तब और ज्यादा बिगड़ गए जब इनके पूरे समुदाय को जिसमें करीब 300 लोग थे उन्हें वॉर के दौरान कैद कर लिया गया और करीब एक साल तक ये वॉर में कैदी बनकर रहे और फिर इन्हें रिहा कर दिया गया इसके बाद विथिया के पिता अपने परिवार और पूरे समुदाय को लेकर बंगू द्विती वु द्वीप पर आ गए और उन्होंने यहीं बसने का फैसला किया विध्या के पिता को लगने लगा
था कि अब उनकी जिंदगी शायद अच्छी हो जाएगी क्योंकि इन्हें अब इधर से उधर भागना नहीं पड़ेगा इसके अलावा व अपनी बेटी की परवरिश भी अच्छी तरह से कर पाएंगे इसलिए उन्होंने विथिया का पास के एक स्कूल में एडमिशन करा दिया विथिया बचपन से ही पढ़ाई में काफी ज्यादा होशियार थे वह हर वक्त बस अपनी किताबों में ही लगी रहती थी टाइम से स्कूल का काम करना रिजल्ट्स में अच्छे नंबर से पास होना यह सब विथिया की जिंदगी का एक हिस्सा बन गया था वहीं विथिया के माता-पिता भी अब यह समझ चुके थे कि उनकी
बेटी पढ़ाई में काफी इंटेलिजेंट है इसके अलावा स्कूल के सभी टीचर्स का भी ऐसा मानना था कि विथिया काफी होनहार और काबिल स्टूडेंट है जो आगे चलकर अपनी लाइफ में कोई बड़ी अचीवमेंट जरूर हासिल करेगी जैसे-जैसे विथिया बड़ी होती जा रही थी वैसे-वैसे उसे नए लोगों के साथ उठना बैठना दूसरों से बात करना अच्छा लगने लगा था इसी तरह कई साल बीत गए और फिर साल 2015 ने दस्तक दी हर साल की तरह इस साल भी विथिया ने अपना डेली रूटीन सेट किया जो जिसमें वो सबसे पहले सुबह जल्दी उठती थी और उठने के बाद
अपनी मां के साथ घर का काम करती थी घर का सारा काम करने के बाद तैयार होकर स्कूल के लिए निकल जाती थी लेकिन विथिया अकेली स्कूल नहीं जाती थी बल्कि वह पहले अपनी दोस्त के घर जाती थी फिर उसके साथ स्कूल जाया करते थे हालांकि कई बार ऐसा भी होता था कि उसकी फ्रेंड किसी वजह से उसके साथ नहीं जा पाते थे ऐसे में फिर विथिया को अकेले ही स्कूल जाना पड़ता था लेकिन उसे अकेले जाना पसंद नहीं था इसलिए वोह अक्सर अपने भाई को अपने साथ ले जाती थी थे ऐसा ही एक दिन
आया 13 मई साल 2015 का आज विथिया का एग्जाम था और यह अपने एग्जाम के लिए तैयारी कर रहे थे विथिया को पूरी उम्मीद थी कि हर बार की तरह इस बार भी वह अच्छे नंबरों से पास होगी दरअसल विथिया एक काबिल टीचर बनना चाहती थी और एक अच्छे स्कूल में जॉब करना यही उसका सपना था जिसके लिए वह दिन रात मेहनत भी कर रही थी इसी तरह 13 मई की सुबह विथिया जल्दी उठती है और घर का काम करने के बाद स्कूल के लिए निकल जाती है जैसा कि हमने आपको बताया कि विथिया आमतौर
पर अपने दोस्तों के साथ स्कूल जाती थी क्योंकि इसका स्कूल घर से लगभग 2 किमी दूर था 13 मई की सुबह भी विथिया अपनी दोस्त को लेने के लिए उसके घर जाती है लेकिन उसे पता चलता है कि वह बीमार है इसलिए वह अपने भाई के साथ जाने का सोचती है पर विथिया का भाई निशां थन जो उसे अपनी मोटरसाइकिल पर स्कूल ले जाता था वह आज बाहर गया हुआ था इसलिए विथिया 7:2 पर अपनी साइकिल से अकेले ही स्कूल के लिए निकल जाती है इसी तरह वक्त भीता गया और दिन खत्म होने को आ
गया लेकिन विथिया जो 3:00 बजे तक घर आ जाती थी वह अभी तक स्कूल से नहीं आई थी यह देखकर विथिया की मां जिनका नाम सरस्वती है उन्हें अब फिक्र होने लगी क्योंकि स्कूल की छुट्टी भी 2 बजे तक हो जाती थी लेकिन अब 3:00 बज चुके थे पर विथिया का कोई भी अता पता नहीं था हालांकि जब वो एक्स्ट्रा क्लासेस लेती थी तब अपनी मां को पहले ही बता दिया करती थी लेकिन आज उसने कुछ नहीं कहा था यही सब सोचते हुए विथिया की मां ने अपने बेटे निशांतन को अपने पास बुलाया और उससे
कहा कि तुम स्कूल में जाकर पता करके आओ कि आखिर तुम्हारी बहन अभी तक आई क्यों नहीं है अपनी मां की बात सुनने के बाद निशां थन भी बिना वक्त कवाए फौरन स्कूल पहुंच गया और वहां मौजूद टीचर से उसने अपनी बहन के बारे में पूछा तब टीचर्स ने उसे बताया कि विध्या तो आज स्कूल ही नहीं आई है यह सुनकर निशांतन के होश उड़ गए क्योंकि विधिया तो सुबह ही घर से निकल गई थी और आज तो उसका एग्जाम था जिसे वह किसी भी हालत में नहीं छोड़ सकती थी तो ऐसे में विथिया गई
कहां यही सवाल उसके भाई को परेशान कर रहा था इसके बाद निशांतन ने परिवार के एक रिश्तेदार जो स्कूल के पास बुटीक चलाते थे उनसे भी अपनी बहन के बारे में पूछा तब उन्होंने भी यही कहा कि आज उन्होंने विथिया को नहीं देखा है यह जानने के बाद अब निशांतन की टेंशन और ज्यादा बढ़ गई थी इसलिए इसने फौरन घर पहुंचकर अपनी मां को भी पूरी बात बता दी जिसे सुनते ही उनके भी पैरों तले जमीन खिसक गई वहीं विथिया के पिता को भी अपनी बेटी के बारे में जैसे ही पता चला वह भी काम
से घर लौट आए और फिर इन लोगों ने आसपास के पड़ोसियों से विथिया के बारे में पूछताछ की लेकिन सभी ने एक ही जवाब दिया कि उन्होंने आज उसे नहीं देखा है अब शाम के करीब 6:00 बज चुके थे लेकिन विथिया के मिलने का कोई नामो निशान नहीं था उसके माता-पिता जब अपनी बेटी को ढूंढते ढूंढते थक गए तब उन्होंने इसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट कराने का फैसला किया और पंगु दुति वू पुलिस चौकी में पहुंच गए लेकिन यहां पुलिस ने इनकी मदद करने के बजाय विध्या के बारे में उल्टा सीधा बोलना शुरू कर दिया और
इन लोगों से कहा कि वह जरूर अपने आशिक के साथ भाग गई होगी यह सुनकर परिवार को बहुत दुख हुआ कि जिस पुलिस को सरकार ने इनकी हिफाजत के लिए रखा है वही इनकी मदद करने के बजाय इनकी बेबसी का मजाक उड़ा रही है इसके बाद शाम के करीब 6:30 बजे विथिया का परिवार उसके लापता होने की शिकायत दर्ज कराने के लिए विलना इतव के कात्स में पुलिस के पास गया लेकिन रात 9:00 बजे तक किसी भी पुलिस अधिकारी ने उनकी शिकायत नहीं ली परिवार थक कर लौट आया और क्योंकि पुलिस की तरफ से इन्हें
कोई मदद नहीं मिल रही थी तो ऐसे में विथिया की फैमिली ने गांव वालों के साथ मिलकर उसे तलाश करने का फैसला किया गांव वालों ने देर रात तक विथिया को जगह-जगह ढूंढा लेकिन उसका कोई पता नहीं चला इसके बाद सुबह 5:00 बजे फिर से सभी विथिया की तलाश में जुट गए और इस बार इन्होंने दो कुत्तों को भी अपने साथ ले लिया ताकि विथिया को ढूंढने में आसानी हो सके जैसे ही निशांतन इन कुत्तों को लेकर अपने घर से लगभग ढ़ किलोमीटर दूर एक सुसान सड़क पर पहुंचा तो कुत्तों ने सामने खेत की तरफ
देखकर भोकना शुरू कर दिया निशांतन ने जब वहां जाकर चेक किया तो उसे वहां विथिया की साइकिल पड़ी हुई मिली साथ ही थोड़ी सी दूरी पर ही उसके दोनों जूते भी मिल गए जिन्हें देखकर निशांतन बहुत ज्यादा घबरा गया क्योंकि वह समझ चुका था कि जरूर उसकी बहन के साथ कुछ गलत हुआ है यही सब सोचते हुए अब उसकी आगे जाने की हिम्मत बिल्कुल नहीं हो रही थी और उसे इस बात का डर लग रहा था कि पता नहीं उसकी बहन के साथ क्या हुआ होगा किस तरह वह इस मंजर को देख पाएगा फिर भी
उसने हिम्मत करते हुए दोनों कुत्तों की रस्सी को अपने हाथ में पकड़ा और खेतों के अंदर पहुंच गया जहां उसे एक सून सान घर दिखाई दिया जिसके बारे में बच्चे अक्सर यही कहते थे कि इसके अंदर भूत है यह एक भूत बंगला है हालांकि यहां निशांतन को कोई भूत तो नहीं मिला लेकिन उसने एक ऐसा मंजर देखा जिसे देखते ही उसकी चीख निकल गई दरअसल निशांतन जब जब इस घर के पास पहुंचा तो उसे वहां अपनी बहन विथिया की लाश पड़ी मिली जिसके बदन पर कोई कपड़ा नहीं था साथ ही उसके हाथ उसकी स्कूल की
टाई से पीछे बंधे हुए थे इसके अलावा उसका स्कूल बैग भी वहीं पास में ही पड़ा हुआ था विधिया के चेहरे पर भी काफी सूजन आ चुकी थी जिसे देखकर साफ पता चल रहा था कि उसे बहुत बुरी तरह से मारा गया है इतना ही नहीं उसके एक पैर को दूसरे पैर से अलग करके बांधा गया था अपनी बहन को इस हालत में देखना किसी भी भाई के लिए आसान बात नहीं है निशान थन भी अब पूरी तरह से टूट चुका था लेकिन फिर भी अपने माता-पिता को वह संभाल रहा था इसके बाद उसने सुबह
7:00 बजे कात्स में पुलिस को फोन किया लेकिन पुलिस यहां नहीं आई इसके बाद निशान थन खुद पुलिस स्टेशन गया और वहां जाकर उसने अपनी बहन के साथ हुई सारी वारदात के बारे में पुलिस को बताया लेकिन फिर भी पुलिस ने उसकी एक भी बात पर गौर नहीं किया यहां तक कि निशानाथ काफी देर तक पुलिस स्टेशन में ही खड़ा रहा और पुलिस से मदद मांगता रहा लेकिन जब उसने देखा कि यह लोग कोई एक्शन नहीं ले रहे हैं तो वह अपने घर आ गया जिसके बाद इनके एक रिश्तेदार ने इन्हें श्रीलंका के सबसे बड़े
शहर कोलंबो के पुलिस स्टेशन में फोन करने की सलाह दी निशांतन ने जल्दी से कोलंबो पुलिस स्टेशन में कॉल करके सारी घटना की जानकारी पुलिस को दी और फिर करीब 11:00 बजे पुलिस अधिकारी घटना स्थल पर पहुंच गए यहां पहुंचने के बाद उन्होंने पहले तो विथिया के पैरों को जो पेड़ से बंधे हुए थे उन्हें खोला और फिर उसकी शव को माता-पिता को सौंप दिया जिसके बाद विथिया का अंतिम संस्कार 15 मई 2015 को मनाकू कब्रिस्तान में किया गया जिसमें स्थानीय राजनेताओं से हीत सैकड़ों लोग शामिल हुए करीब 1000 लोगों ने विथिया को श्रद्धांजलि दी
हालांकि देखा जाए तो अगर पुलिस टाइम पर विथिया के परिवार की मदद कर देती तो आज इन्हें अपनी बेटी को नहीं खोना पड़ता यहां तक कि यह अपनी बेटी की मिसिंग रिपोर्ट लिखाने के लिए सबसे पहले पुलिस के पास ही गए थे लेकिन पुलिस ने विथिया का मजाक बनाया उसे लेकर उल्टे सीधे शब्दों का भी इस्तेमाल किया अगर पुलिस ने वक्त रहते उसे ढूंढने की कोशिश की होती तो शायद उसकी जान बच सकती थी वहीं जब पूरे श्रीलंका में यह खबर आग की तरह फैली कि पुलिस वालों ने इनकी कोई मदद नहीं की और अब
भी कोई एक्शन नहीं ले रहे हैं तो ऐसे में वहां की सभी औरतों ने मिलकर एक आंदोलन शुरू कर दिया और इंसाफ की गुहार लगाने लगी इस केस ने पूरे देश में खासकर उत्तरी श्रीलंका में लोगों को गुस्से से भर दिया था जैसे-जैसे लोगों को विथिया के साथ हुई बर्बरता के बारे में पता चलता जा रहा था वैसे-वैसे विरोध प्रदर्शन तेज होता जा रहा था सभी के मन में बस एक ही बात थी कि किसी तरह विध्या को इंसाफ दिलाया जा सके जो उस के साथ हुआ है ऐसा किसी दूसरी लड़की के साथ ना हो
इसके चलते 14 मई 2015 को पंगु दुति वू में सभी स्कूल स्टूडेंट से मिलकर विरोध प्रदर्शन किया इसके अलावा द्वीप पर रहने वाले निवासियों ने लकड़ियों और जलते हुए टायरों से सड़कों पर हंगामा मचाना शुरू कर दिया वहीं किली नोक्षी मुला देवू और जाफना यूनिवर्सिटी में भी छात्रों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया जिसके बाद पुलिस को भी एक्शन लेना पड़ा और 15 मई साल 2015 को पुलिस ने 30 से 40 साल की उम्र के तीन भाइयों को गिरफ्तार किया जो विथिया के साथ हुई इस हैवानियत में शामिल थे आपको बता दें इनका लंबे समय से
विथिया के परिवार के साथ झगड़ा चल रहा था और इस झगड़े का बदला लेने के लिए इन्होंने विथिया को अपना शिकार बनाया पुलिस के अनुसार इन तीनों ने 13 मई 2015 की सुबह विथिया को उस वक्त किडनैप किया जब वह स्कूल जा रही थी इसके बाद यह उसे जंगल में ले गए जहां इन सभी ने उसके साथ गलत काम किया और फिर उसे बड़ी ही बेरहमी से मार दिया इनका बयान लेने के बाद पुलिस को पता चला कि केस में पांच और लोग शामिल हैं यानी कि टोटल आठ लोग थे जिन्होंने विथिया की जान ली
पुलिस ने देर ना करते हुए अपनी छानबीन को आगे बढ़ाया और 17 मई को इन पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया आपको बता दें यह पांचों कोलंबो के रहने वाले थे जो सिर्फ और सिर्फ विथिया की जान लेने के लिए पंगु दुति वू में आए थे या कहें तो इन तीनों भाइयों ने इन्हें यहां बुलाया था इन आठ आरोपियों ने विथिया को किडनैप किया और फिर एक-एक करके उसके साथ गलत काम किया और जब इनका मन भर गया तो उसे बेर से मौत की नींद सुला दिया और फिर यह पांचों दोबारा अपने शहर कोलंबो पहुंच
गए हालांकि आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस दिन विथिया का अंतिम संस्कार किया गया उस दिन भी यह लोग उसके अंतिम संस्कार में शामिल थे ताकि कोई भी इन पर शक ना करे लेकिन अंतिम संस्कार के बाद जब इन्होंने कोलंबो लौटने की कोशिश की तब पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया इसके अलावा 18 मई को पुलिस ने इस केस में शामिल एक और शख्स को गिरफ्तार किया जिसका नाम था महालिंगम शशि कुमार या कहे तो स्विस कुमार जिस पर यह आरो आरोप था कि जब विथिया के संग सभी लोग गलत काम कर रहे थे इसने
वीडियो बनाया था इसलिए गांव वालों ने जब इसे पंगु दतु में देखा तो फौरन इसे पकड़कर एक पेड़ से बांध दिया और उसके साथ काफी मारपीट की जिके बाद शशि कुमार को पुलिस ने अपनी निगरानी में जाफना हॉस्पिटल में भर्ती कराया लेकिन यह वहां से कोलंबो भाग गया और फिर स्विटजरलैंड जाने की तैयारी करने लगा हालांकि 18 मई को पुलिस ने शशि कुमार को कोलंबो के विला वट में गेस्ट हाउस से गिरफ्तार कर लिया जिसके बाद इन सभी आरोपियों पर 41 मुकदमे दर्ज किए गए और करीब 2 साल तक यह केस ऐसे ही चलता रहा
लेकिन बाद में विथिया को इंसाफ मिला और इन आठों लोगों को 30 साल जेल की सजा सुनाई गई और इस तरह विथिया को इंसाफ मिला तो दोस्तों आपको क्या लगता है क्या विथिया के कातिलों के लिए यह सजा काफी है या फिर नहीं कमेंट सेक्शन में अपनी राय जरूर दें वीडियो को लाइक और शेयर करके चैनल को सब्सक्राइब करें बेल आइकॉन प्रेस करें जिससे आपसे आने वाली वीडियोस मिस ना हो मिलते हैं आपसे अगली वीडियो में टिल देन बाय बाय टेक केयर और