नमस्कार मैं रवीश कुमार संभल उत्तर प्रदेश में है बहराइच भी उसी प्रदेश में है अक्टूबर में बहराइच नवंबर में संभल दिसंबर जनवरी फरवरी मार्च का पता नहीं किस जिले में इस तरह की घटना दोहरा दी जाए कई बार लगता है कि उत्तर प्रदेश को लंबे समय के लिए सांप्रदायिक माहौल में झोंकने के लिए तैयार किया जा रहा है अब तय उत्तर प्रदेश को करना है इसी चक्र में रहना है या निकलना है इस तरह की घटनाएं उत्तर प्रदेश के बारे में क्या कह रही है क्या यूपी कभी इस पर सोचता है हमारे सामने भी कम
चुनौती नहीं है हर घटना मन पर गहरा बोझ डालती है अब कैसे कवर करें कौन सी नई बात कहे कि लोगों को बात समझ में आ जाए हिंसा किसी के फायदे में नहीं हम कितनी लाशों को दिखाएं कितनों को गिन दे कितनों के नाम बताएं और घायलों की गिनती बताते रहे कभी मुजफ्फरनगर कभी ब कभी संभल कभी अलीगढ़ इस तरह की घटनाएं और कितनी बार दोहराई जाएंगी समझ नहीं आता है किसी भी घटना की रिपोर्टिंग या उस पर बनाया गया हमारा ही वीडियो अब अलग नहीं लगता है लगातार एक वर्ग को अधिकार विहीन किया जा
रहा है सांप्रदायिक नारों और दावों से उनकी ऐसी घेराबंदी कर दी गई है कि किसी तरह तनाव पैदा हो ही जाए और उसके बाद भी तनाव अगर पैदा नहीं होता है तब फिर कुछ ऐसा कर दिया जाता है कि हो ही जाता है अखबारों की रिपोर्टिंग की भाषा डरावनी होती जा रही है वह एक पक्ष को हमलावर लिखने लग जाता है एक पक्ष का हौसला बढ़ाने लग जाता है अखबार भी धर्म की रक्षा के नाम पर राजनीति के इस लंबे प्रोजेक्ट में शामिल हो चुके हैं वैसे भी जब दिल्ली के बड़े-बड़े संपादक बड़े-बड़े चैनलों के
मालिक अखबारों के मालिक झुक गए और मीडिया को गोदी मीडिया बना दिया तो जिले का पत्रकार कितना सामना कर स सकता है आखिर जब संभल में पहली बार सर्वे शांतिपूर्ण तरीके से हो गया तो दूसरी बार सर्वे कराने के आदेश दिए गए तब हिंसा क्यों भड़की क्यों दोबारा सर्वे के आदेश दिए गए क्या सुप्रीम कोर्ट को नहीं देखना चाहिए कि जिस दिन याचिका दायर हुई उसी दिन आदेश क्यों हुआ कई लोग इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 19 नवंबर 20224 को स्थानीय कोर्ट में एक याचिका दायर होती है लिखा जाता है
कि 1526 में मंदिर ढाकर यहां मस्जिद खड़ी की गई आठ लोगों ने याचिका दायर की और इसमें ज्ञानवापी मामले में वकील हरिशंकर जैन भी शामिल थे दावा किया गया कि कलकी भगवान के सदियों पुराने श्री हरिहर मंदिर का जबरन इस्तेमाल किया जा रहा है और यह ऐतिहासिक तथ्य है इस तरह की बातें कही गई हैं कि कलयुग में कल्की भगवान यही अवतरित होने वाले यहीं याचिका में यह भी मांग की गई कि याचिकाकर्ताओं को मस्जिद के अंदर प्रवेश करने की अनुमति मिले चंदौसी की जामा मस्जिद एएसआई की संरक्षित इमारतों की सूची में है याचिकाकर्ताओं ने
एएसआई पर भी आरोप लगाया कि उसके पास इमारत का नियंत्रण नहीं इस याचिका के दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर चंदौसी में सीनियर डिवीजन के सिविल जज आदित्य सिंह ने आदेश जारी कर दिया एक एडवोकेट जनरल की नियुक्ति कर दी और उन्हें मस्जिद में शुरुआत सर्वे करने के लिए कह दिया गया संभल का जो मामला आपने बताया पूरा प्रकरण उठाकर देखिए कैसे हुआ मथुरा में सर्वे हुआ कोई हिंसा नहीं हुई काशी में सर्वे हुआ कोई हिंसा नहीं हुई यह सरकार प्रायोजित हिंसा है यह साजिश के तहत कराई गई हिंसा है एक ही घंटे
में निर्णय आ जाता है बगैर दूसरे पक्ष को सुने और एक ही घंटे में सर्वे शुरू हो जाता ऐसा किसी आम आदमी के विषय में न्यायालय की कारवा और प्रशासन की कारवाई आपने देखी है तो यह सरकार प्रायोजित हिंसा है याचिका जिस दिन दायर हुई उसी दिन आदेश आता है उसी दिन सर्वे शुरू हो जाता है सर्वे शांतिपूर्ण तरीके से हो भी गया था हिंसा तब भड़की जब 24 नवंबर को दोबारा सर्वे शुरू हुआ वीडियो है कि सर्वे की टीम के पीछे-पीछे धार्मिक नारे लगाते हुए लोग चल रहे हैं उन्हें कोई नहीं रोक रहा है
उनके हौसले को देखकर लग रहा है इनका इरादा क्या था यह कौन लोग थे क्या यह भी सर्वे की टीम का हिस्सा थे क्या इनकी कभी जिम्मेदारी या भूमिका तय हो पाएगी क्या यह लोग भड़काने के आरोपी नहीं हो सकते हैं लगता है बीजेपी का पेट अभी मणिपुर से भरा नहीं है और इसीलिए बीजेपी ने पूरे देश को मणिपुर बनाने की ठान ली है उत्तर प्रदेश के संभल में हुआ विवाद और उसके बाद की हिंसा में चार लोगों की मौत योगी आदित्यनाथ की सरकार उनके प्रशासन उनकी पुलिस की ही ना कामयाबी नहीं है बल्कि मुसल
मानों के खिलाफ उनकी नफरत का सीधा-सीधा नतीजा है जिस तरीके से खाकी वर्दी पहनने वाले चिल्ला चिल्ला कर कह रहे हैं गोली चलावे जिस तरीके से सर्वे करने वालों के साथ नारेबाजी करते हुए एक भीड़ चल रही है यह सारी बातें इस और इशारा करती हैं कि षड्यंत्र के तहत पूरा मामला रचा गया है एक पैटर्न है और यह एक सेट पैटर्न है जहां सुर्खियां बटोरने के लिए टीवी पर आने के लिए कुछ लोग लोअर कोर्ट में अपील डालेंगे फिर ऑर्डर आ जाएगा मस्जिदें खोदी जाएंगी बवाल होगा और बीजेपी अपनी राजनीतिक रोटियां सेके गी लेकिन
जिन लोगों की जान जाएगी उसका जिम्मेदार कौन है याचिका दायर होने के तुरंत बाद सर्वे का आदेश जारी होता है संभल में तनाव का माहौल बन जाता है इसे लेकर कई लोग सवाल उठा रहे हैं यह देखने का काम हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का है मीडिया में सर्वे का आदेश देने वाले जज की टिप्पणी छपी है कि यदि प्रश्नार्थक आती है तो अदालत को मुकदमे का फैसला सुनाने में मदद मिलेगी इसलिए न्याय के हित में आवेदन एट सी को इस शर्त के साथ स्वीकार किया जाता है कि सर्वेक्षण के समय नियुक्त अधिवक्ता आयुक्त को
पूरी कारवाही की मौके पर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करानी चाहिए सर्वे को लेकर निचली अदालतों की भूमिका और आदेशों की इन दिनों बहुत चर्चा हो रही है संभल में नईम अहमद नुमान कैफ बिलाल अंसारी की हत्या हो गई बहराइच में राम गोपाल मिश्रा की हत्या हो गई संभल के हिंसा में पांच नौजवान मारे गए कब तक यूपी के नौजवान इस पागलपन की आड़ में मारे जाते रहेंगे क्या यही इस हिंसा के दोषी थे इनकी तो जान चली गई हमेशा हमेशा के लिए पुलिस के लोग भी घायल हैं इन मामलों में प्रशासन की भूमिका को लेकर कई
गंभीर सवाल उठ रहे हैं लेकिन कब आपने सुना कि प्रशासन की जिम्मेदारी तय हो गई बहराइच में या संभल में या कहीं और कभी नहीं तय होती है जिस तरह की रिपोर्ट पढ़ने को मिलती है उससे किसी को भी चिंता होनी चाहिए अगर प्रशासन भी धार्मिक सांप्रदायिक संगठनों के साथ मिल जाए एक तरफा कारवाई करने लग जाए उनकी भाषा बोलने लग जाए तब कुछ भी नहीं बचेगा तब क्या होगा जब कोर्ट का आदेश कोर्ट से जारी सर्वे का आदेश प्रशासन और धार्मिक संगठनों के हाथ लग जाएं और हथियार बन जाए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और
अखिलेश यादव के बयानों में प्रशासन की भूमिका पर यूं ही हताशा नहीं झलक रही राहुल गांधी ने लिखा है संभल उत्तर प्रदेश में हालिया विवाद पर राज्य सरकार का पक्षपात और जल्दबाजी भरा रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है हिंसा और फायरिंग में जिन्होंने अपनों को खोया है उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं प्रशासन द्वारा बिना सभी पक्षों को सुने और असंवेदनशील से की गई कारवाई ने ने माहौल और बिगाड़ दिया और कई लोगों की मृत्यु का कारण बना जिसकी सीधी जिम्मेदार भाजपा सरकार है भाजपा का सत्ता का उपयोग हिंदू मुसलमान समाजों के बीच दरार और भेदभाव पैदा
करने के लिए करना ना प्रदेश के हित में है ना देश के मैं सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में जल्द से जल्द हस्तक्षेप कर न्याय करने का अनुरोध करता हूं अखिलेश यादव लिखते हैं कि सर्वे के नाम पर तनाव फैलाने की साजिश का सर्वोच्च न्यायालय तुरंत संज्ञान ले और जो अपने साथ सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने के उद्देश्य से नारेबाजी शांति और सौहार्द बिगाड़ने का मुकदमा दर्ज हो और उनके खिलाफ बार एसोसिएशन भी अनुशासनात्मक और दंडात्मक कारवाही करें उत्तर प्रदेश शासन प्रशासन से ना कोई उम्मीद थी ना है दुखद है जो घटना हुई है हमारे सांसद जियार
रहमान जब संभल में ही नहीं और उसके बावजूद भी उन पर एफआईआर दर्ज करना ऐसा उदाहरण कभी किसी को मिला होगा देखने को सुनने को एक पुलिस ऑफिसर यह कह रहा हो कि नेता बनना छोड़ दो नेताओं का सहारा लेना छोड़ दो किसके लिए भाषा थी वो और मैं यह कहना चाहता हूं हालांकि सब जानकारी आपके पास है दुखद है कि नईम जैसे नौजवान की जान चली गई बिलाल की जान गई है रोमान की जान गई है कैफ अयान इसमें से कुछ कम उम्र के भी है मुझे याद है जब मैं लखनऊ में प्रेस कर
रहा था उस समय जो जानकारी थी और जो जानकारी छिपाई जा रही थी जब वहां पर लोकल स्तर से जानकारी हासिल हुई तब मैंने कहा कि नईम की जान गई है और पुलिस की गोली से गई है आप लोगों पर सब वीडियोस है आप लोगों पर जगह जगह से वीडियोस मिले हैं कवरेज है पूरी पूरा का पूरा कराया गया यह दंगा है और किसने कराया सरकार ने कराया क्योंकि सरकार जो बेईमानी कर रही थी सरकार जिसने वोट लूटा सरकार ने जिसने मशीन पर ईवीएम की बटन बारबार पुलिस से दवाई प्राइवेट ड्रेस में पुलिस लगाई उस
चुनाव में इनकी धांधली इनकी चोरी ना पकड़ी जाए इसलिए जानबूझ करके संबल में घटना कराई है बुलडोजर का इस्तेमाल भयंकर रूप से होता रहा कई साल तक लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था देने में कितनी देर लगा दी और जब व्यवस्था देने की बारी आई तो कोर्ट ने यही कहा इसका इस्तेमाल असंवैधानिक तरीके से हो रहा था क्या सुप्रीम कोर्ट को सर्वे वैज्ञानिक सर्वे के नाम पर हो रही इस राजनीति का तुरंत संज्ञान नहीं लेना चाहिए लेकिन यहां तो यह भी कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण ही निचली अदालतों को सर्वे
के आदेश जारी करने की हरी झंडी मिल गई है मस्जिद के नीचे क्या था 1000 साल की गुलामी उनकी बढ़ती आबादी यह सब अंतहीन मुद्दे हैं जो ज्यादातर झूठ की बुनियाद पर खड़े किए जाते हैं अफसोस की बात है कि इस पूरे मामले में मोहन भागवत के ही बयान को कोट किया जा रहा है इससे दुखद क्या हो सकता है तो क्या यह सर्वे के आदेश पर दावा करने वाले हंगामा करने वाले धार्मिक संगठनों को उनकी परवाह नहीं या मोहन भागवत का बयान दिखावे के लिए दिया गया जिसका कोई मतलब नहीं जून 2022 में उन्होंने
कार्यक्रम में कह दिया इतिहास वह है जिसे हम बदल नहीं सकते इसे ना आज के हिंदुओं ने बनाया ना ही आज के मुसलमानों ने यह उस समय घटा हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों देखना अब हमको कोई आंदोलन नहीं करना है संभल की हिंसा के बाद से मोहन भागवत का कोई बयान आया पता कीजिए आया कि नहीं आया जो कहा जा रहा है और जो हो रहा है उसमें इतना अंतर है मोहन भागवत के बयान के बाद भी कभी कुतुब मीनार तो कभी ताजमहल पर दावा ठोक दिया जाता है ताजमहल का मामला भी बड़ा करने की
बहुत बड़ी तैयारी चल रही है लगातार एक समुदाय को चुनौती दी जाती है उनके भीतर असुरक्षा का बोध पैदा किया जाता है मोहन भागवत ने कह दिया लेकिन इन धार्मिक संगठनों पर कोई असर नहीं पड़ा जो हर समय अलग-अलग शहरों में मस्जिदों पर मंदिर के दावे करते रहते हैं बीजेपी की सरकार इन संगठनों पर लगाम नहीं लगाती ना ही इनका मनोबल कमजोर होता है कभी चुप रहकर कभी हां में हां मिलाकर इन दावों को बढ़ावा दिया जाता है मोहन भागवत के बयान के बाद भी आरएसएस का ही स्टैंड इन मुद्दों पर स्पष्ट नहीं है मोहन
भागवत को यह बात क्यों कहनी पड़ रही है जबकि 1991 का उपासना स्थल कानून साफ-साफ नए और पुराने दावों को रद्द करता है आखिर कितनी मस्जिदों के नीचे क्या है इसके दावे कब तक होते रहेंगे सर्वे कब तक होते रहेंगे उन्हीं जिलों में यूपी के उन्हीं जिलों में कॉलेजों में कितने टीचर हैं कितने पढ़ाने लायक टीचर हैं अस्पतालों में कितने डॉक्टर हैं इसे लेकर सर्वे की मांग कोई नहीं करता हमने कितने वीडियो में कहा कि अस्पताल हिंदी प्रदेशों में घटिया है बिना इलाज के लोग सड़कों पर अस्पताल के भीतर मर जाते हैं स्कूल कॉलेज खराब
है ट्यूशन कोच कोचिंग के लिए मजबूर किए जा रहे हैं मां-बाप 15-15 साल स्कूल कॉलेज में बिताकर दो लाइन पढ़ना नहीं आ रहा है इस पर जोरदार बहस नहीं होती लेकिन मस्जिद के नीचे पहले क्या था सिर्फ एक सवाल से लोगों की आंखों में चमक पैदा की जा रही है उत्तर प्रदेश की सरकार बराबर चाहती है कि उत्तर प्रदेश बर्बाद रहे वहां हिंसा हो दंगे हो फसाद हो नफरत की भाषा हो बुलडोजर हो जिससे यूपी बर्बाद हो क्यों नहीं जाता अमित शाह का बेटा ऐसे मामलों में वो तो हजारों करोड़ रुपए का धंधा कर रहा
है और हमारे नौजवानों को लगा रखा है धर्म के नाम पर जाओ झगड़ा करो इसमें कौन बर्बाद हो रहा है क्या किसी बीजेपी के नेता का लड़का बर्बाद हो रहा है उत्तर प्रदेश का वह नौजवान जो बेरोजगार है जिसके हाथ में काम नहीं है उसके दिमाग में आपने धार्मिक उन्माद पैदा कर रखा है अभी अटानी के भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है दंगा फसाद करा दिया चलो उसपे लग जाओ 100 साल से यह सब चल रहा है मस्जिद के सामने से निकलने वाली शोभा यात्रा का इतिहास अगर 100 साल से चला आ रहा है तो
सर्वे के नाम पर मस्जिदों पर दावा करने का इतिहास भी उतना ही पुराना है सर्वे सांप्रदायिकता का नया राजनीतिक और अदालती हथियार है आप हिंदी अखबारों को निकालकर पढ़िए तो ध्यान से जब सर्वे का आदेश होता है तब उन जिलों का माहौल कैसा हो जाता है कैसी-कैसी खबरें छप दिन रात इसी की चर्चा होने लग जाती है पहले मंदिर था अब मस्जिद है इस राजनीति से किसी गरीब का किसी मिडिल क्लास का घर अच्छा हो गया क्या जिनके पास पैसे हैं या लोन ले सकते हैं वह अपने बच्चों को यहां से अमेरिका भगाने में लगे
हैं अमेरिकी कॉलेजों में भारतीय छात्रों की बाढ़ आ गई है यह बच्चे क्यों भगाए जा रहे हैं इसका जवाब खोज कर देखिए तो इन्हीं कारणों में आपको मिलेगा सुप्रीम कोर्ट की नाक के नीचे बुलडोजर का जुल्म चलता रहा राजनीति में उसे नारा बना दिया गया कानून व्यवस्था का प्रतीक बना दिया गया एक दिन जब बहुत अति हो गया तो कोर्ट को ही कहना पड़ा असंवैधानिक है इसलिए सर्वे के नाम पर यह जो हो रहा है उसे असंवैधानिक कहने में अगर असंवैधानिक है तो सुप्रीम कोर्ट को अब देरी नहीं करनी चाहिए सर्वे के मामले में तुरंत
बोलना चाहिए बल्कि सुप्रीम कोर्ट के कारण सर्वे का इस्तेमाल हो रहा है यह बात अच्छी नहीं है चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूर क्यों शुरू हो गई वाराणसी की निचली कोर्ट से वीडियोग्राफी सर्वे के आदेश आए मस्जिद प्रबंधन समिति इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची उस समय के पूर्व चीफ जस्टिस एनवी रमना ने सर्वे के आदेश पर रोक तो नहीं लगाया लेकिन इसे तब तक के जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच के सामने भेज दिया और वहां इसकी सुनवाई होने लगी उनके चीफ जस्टिस बनने पर भी सुनवाई जारी रही सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डी वाई चंद्र चोट ने
मस्जिद प्रबंधक समिति से कह दिया आपके लिए हिंदू पक्ष की मांग बेतुकी हो सकती है फ्रिवनस हो सकती है मगर वह उनके लिए आस्था का सवाल हो सकता है चंद्रचूड़ की यह मौखिक टिप्पणी निचली अदालतों के लिए हरी झंडी बन गई ऐसा लिखा जा रहा है अब हमें यहां पर 1991 के उपासना स्थल कानून के बारे में भी समझना होगा यह कानून कहता है कि भारत में अयोध्या को छोड़कर जो भी उपासना के स्थल है किसी भी धर्म के और धर्म के भीतर किसी भी संप्रदाय के उनका अब कैरेक्टर नहीं बदला जाएगा अगर कोई दावा
करेगा तो देखा जाएगा कि 15 अगस्त 1947 को उस स्थल का कैरेक्टर क्या था जो था वही रहेगा उसी के आधार पर तय होगा यह कानून इसलिए बनाया गया ताकि हर दूसरी मस्जिद को लेकर या किसी भी उपासना के स्थल को लेकर दावे ना होने लग जाएं और देश नफरत की राजनीति के चक्र में ना फंस जाए तो जब कैरेक्टर नहीं बदल सकता देश का ही कानून है इसका कानून की तारीफ सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर बनाने के आदेश देने वाले फैसले में भी की है तब यह सर्वे क्यों हो रहे हैं ठीक है खुदाई
पर रोक लगा दी गई लेकिन सर्वे के राजनीतिक असर को आप अनदेखा नहीं कर सकते हैं सर्वे से पहले सर्वे के दौरान और उसके बाद वहां क्या था नीचे क्या था बगल में क्या था पीछे क्या था ऊपर क्या था इसे लेकर तमाम दावे राजनीति के लिए बारूद का काम करते रहते हैं एक बार सर्वे होगा तो उस दौरान ही मीडिया में तरह-तरह की बातें दावे छपने लग जाते हैं तरह-तरह के धारणाएं बनाई जाती हैं कि वहां क्या था और क्या होना चाहिए राजनीतिक संगठनों के लिए माहौल बनाने वाले इन धार्मिक संगठनों को यही चाहिए
कि बहस किसी तरह चलती रहे तनाव होता रहे और नौजवान मर जाएं उसकी चपेट में इससे किसी को परवाह नहीं अगस्त 2023 में इस सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी ने कहा था कि अगर सर्वे की अनुमति दी गई तो 1991 के उपा स्थल कानून का उल्लंघन होगा हुजैफा अहमदी ने कोर्ट के सामने कहा कि यह प्रक्रिया ऐसी है कि आप अतीत के घाव को फिर से खोल रहे हैं जब आप एक सर्वेक्षण शुरू करते हैं तो आप अतीत के घाव को उजागर कर रहे हैं और यह वही चीज है जिसे पूजा स्थल अधिनियम
प्रतिबंधित करना चाहता है चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच में जस्टिस जे बी पर्दी वाला जस्टिस मनोज मिश्रा भी थे मूल बात सर्वे की अनुमति को लेकर है कहा गया कि 1991 के कानून के बाद भी 2003 में बाबरी मस्जिद का सर्वे हुआ लेकिन 1991 के कानून में अयोध्या को अपवाद किया गया था उसके अलावा देश के सभी धार्मिक स्थलों पर ऐसे दावों और मुकदमों पर रोक लगा दी गई जब 15 अगस्त 1947 के दिन जैसा भी था उसे नहीं बदला जा सकता तब फिर इस तरह के सर्वे के क्या मतलब हैं ऐसे सर्वे
के बाद जो तनाव पैदा होता है नागरिकों का जीवन खतरे में पड़ता है स्कूल बंद होते हैं शहर में कर्फ्यू लगता है सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मई 2022 में आया था इसमें चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा सर्वेक्षण या अध्ययन 1991 कानून के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करता मई 2022 में पहला सर्वेक्षण पूरा हो गया जुलाई 2023 में वैज्ञानिक सर्वेक्षण भी हो गया मस्जिद प्रबंधन समिति ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी सफलता नहीं मिली इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा वज्ञ सर्वे दोनों पक्षों के लिए अच्छा है अगस्त 2023 में चीफ जस्टिस डी
वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के ऑर्डर पर स्टे लगाने से मना कर दिया इस बीच एक और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है सितंबर 202 में जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच के सामने मथुरा का मामला आता है श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट ने अपनी याचिका में मांग की कि मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए सुप्रीम कोर्ट ने इनकी याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया लेकिन कोर्ट ने फैसला लेने का अधिकार इलाहाबाद हाई कोर्ट पर छोड़ दिया दिसंबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट
ने आदेश दिया वैज्ञानिक सर्वे होगा मगर जनवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर रोक लगा दी जो अभी तक लागू है अब आप देखिए कैसे 1991 के कानून पर ही तरह-तरह से टिप्पणियां हो रही हैं इसकी कमियों का सहारा लिया जा रहा है हमले हो रहे हैं दिसंबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ की टिप्पणी आती है किसी भी उपासना स्थल के धार्मिक कैरेक्टर का फैसला ट्रायल में तय होगा 1991 के एक्ट में धार्मिक कैरेक्टर को परिभाषित नहीं किया गया है कोर्ट ने कहा उपासना का स्थल एक ही
समय में मस्जिद नहीं और मंदिर नहीं हो सकता तो तय करना होगा कि या तो वह मस्जिद है या मंदिर है इसलिए 15 अगस्त 1947 को ज्ञानवापी के धार्मिक चरित्र का निर्धारण वाराणसी सिविल कोर्ट द्वारा दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य दोनों के आलोक में होगा क्या यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अलग नहीं है जिस कानून के सहारे इस तरह के विवादों को शांत किया जा रहा है अब उस कानून को ही विवादित किया जा रहा है सुप्रीम कोर्ट ने कहा है सर्वे होगा लेकिन कैरेक्टर नहीं बदलेगा यहां हाई कोर्ट का कहना है किसी भी
धार्मिक स्थल का कैरेक्टर कोर्ट में तय होगा फिर 1991 के उपासना स्थल कानून का क्या मतलब और महत्व रह जाता है अगर दस्तावेजों को लेकर ट्रायल के दौरान तय होने लगेगा तो ना जाने ऐसे कितने ही उपासना स्थलों पर दावे कर दिए जाएंगे और देश में दिन भर यही चलता रहेगा इसलिए इस बात को लेकर सतर्क होने की जरूरत है कि क्या अब आगे की सांप्रदायिक राजनीति के लिए उसमें प्रशासन का इस्तेमाल करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लिया जा रहा है सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि उपासना स्थल के बारे में भी तुरंत राय
दे 2019 के अयोध्या जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने 1991 के एक्ट के बारे में विस्तार से चर्चा की है कोर्ट ने कहा दो मकसद को पूरा करने के लिए यह कानून बनाया गया पहला किसी भी धार्मिक स्थल के रूपांतरण पर रोक लगा दी गई यानी अगर वह मस्जिद है तो आप मंदिर नहीं कर सकते अगर मंदिर है तो मस्जिद नहीं कर सकते दूसरा यह साफ कर दिया गया कि 15 अगस्त 1900 47 को जो भी उस स्थल का कैरेक्टर है अब नहीं बदलेगा सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून की व्याख्या करते हुए लिखा है कि कानून
के सेक्शन तीन में किसी भी धर्म के पूजा स्थल को उसी धर्म के किसी दूसरे संप्रदाय या किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदलने की बात कही गई है इस संदर्भ में पूजा स्थल या प्लेस ऑफ वरशिप की सबसे व्यापक परिभाषा दी गई है यह परिभाषा सभी धर्मों और संप्रदायों के सभी सार्वजनिक स्थलों को शामिल करती है कोर्ट ने अयोध्या जजमेंट में कहा है कि यह सकारात्मक दायित्व बनता है कि 15 अगस्त 1947 को जो कैरेक्टर था उसे बरकरार रखा जाए इसलिए 1991 के कानून में कहा गया इस मकसद को हासिल करने के
लिए इस तरह के मुकदमे भी रद्द किए जाते हैं जो पहले से चल रहे थे और अब आगे मुकदमे नहीं होंगे जब सब कुछ इतना साफ-साफ लिखा है तब फिर सर्वे और मस्जिद के नीचे मंदिर के दावे क्यों हो रहे हैं दैनिक भास्कर में यूपी के मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का बयान छपा है मंत्री जी कह रहे हैं जहां भी कोई विवाद हो रहे हैं वहां पर सर्वे टीम जा रही है और वह अपना काम कर रही है इससे ऐतराज क्यों किया जाता है यदि वो लोग सही हैं तो उनको ऐतराज नहीं होना चाहिए अगर गलत
है तो छिपाना नहीं चाहिए जो लोग सरकारी आदेश या न्यायालय के आदेश पर जा रहे हैं उन पर पथराव करने की क्या जरूरत है बैठकर बात करें लेकिन सर्वे की टीम के साथ धार्मिक नारे लगाते हुए जो लोग जा रहे हैं वह क्या कर रहे हैं तो पहले विवाद करो फिर कोर्ट जाओ सर्वे का आदेश लाओ फिर तनाव पैदा हो जब 1991 के आदेश से किसी स्थल का कैरेक्टर वही रहेगा जो 15 अगस्त 1947 को था तब इस विवाद का क्या मतलब है बैठकर बात करने का क्या मतलब है अयोध्या जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने
उस समय के गृहमंत्री शंकर राव भाव राव चौहाण को भी कोर्ट किया है केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह कानून किसी उपासना स्थल को जबरन बदलने से रोकने के लिए बनाया गया है ताकि नए विवाद पैदा ना हो पुराने विवाद जिंदा नहीं किए जाएं जिन्हें लोग अब भूल चुके हैं सुप्रीम कोर्ट ने लिखा है कि इस कानून के पीछे एक उद्देश्य है यह कानून हमारे देश के इतिहास और भविष्य के बारे में है इतिहास के गलतियों का सुधार लोग कानून को अपने हाथों में लेकर नहीं कर सकते हैं पूजा स्थल के धार्मिक चरित्र को
संरक्षित कर संसद ने स्पष्ट कर दिया कि इतिहास और उसकी गलतियों का इस्तेमाल वर्तमान और आने वाले भविष्य को कुचलने के लिए नहीं किया जा सकता दिख रहा है कि अब अगली बहस इस कानून को लेकर होने वाली है दरअसल मुद्दे खोजे जा रहे हैं ताकि टीवी के सामने लोगों को चकित किया जा सके उनकी हालत खराब है आर्थिक हालत उससे उनका ध्यान हटाना है अयोध्या जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने विस्तार से 1991 के कानून की सराहना की है फिर सवाल उठता है जस्टिस डी वाई चंद्र चोड़ने चीफ जस्टिस बनने के बाद सर्वे का आदेश
देकर अयोध्या जजमेंट में लिखी अपनी ही बात को उलट नहीं दिया चंद्रचूड़ ने कहा सर्वेक्षण या अध्ययन करना कानून के तहत इसकी वर्तमान धार्मिक स्थिति को बदलने के बराबर नहीं है लेकिन संभल से लेकर मथुरा और वाराणसी में सर्वे के आदेश सर्वे की मांग से क्या अध्ययन हो रहा है आखिर इन आदेशों के असर में इतिहास नहीं बदल जाएगा इसकी गारंटी कौन दे सकता है उससे पहले इन दावों को लेकर जो तनाव पैदा हो रहे हैं नागरिक मारे जा रहे हैं उन्हें कौन बचाएगा आज आप सबके सामने लोग कानून हाथ में लेकर इतिहास की गलतियों
को ठीक करने के लिए उतर रहे हैं और प्रशासन को इस खेल में आगे किया जा रहा है कानून का इस्तेमाल हो रहा है एक समय था जब इस तरह के सांप्रदायिक झगड़ों के समय लोग कोर्ट की कसमें खाते थे कि वहां साबित होने दीजिए अब कोर्ट से सर्वे के आदेश लेकर आते हैं मस्जिदों में सर्वे के नाम पर दावे करते हैं और राजनीतिक लड़ाई होती है राम मंदिर निर्माण का फैसला आया तब सबने कहा आगे अब शांति रहेगी लेकिन अपने आसपास सर्वे की राजनीति की तरफ नजर उठाइए भारत आपको वही मिलेगा जहां बाबरी मस्जिद
के खिलाफ शुरू हुई राजनीति के समय खड़ा था कुछ भी नहीं बदला है नमस्कार मैं रवीश कुमार