[संगीत] 27th जून 1976 को एयर फ्रांस की फ्लाइट 139 हर बार की तरह इजराइल के तल अबीब से पेरिस जाने के लिए उड़ान भरने को तैयार थी तेल अवीव के बेन गोरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फ्लाइट 139 में लगातार पैसेंजर्स को अपनी-अपनी जगह पर बैठने की हिदायतें दी जा रही थी फ्लाइट की कमान कैप्टन मिशेल बैकस के हाथ में थी सभी पैसेंजर्स के बैठने के बाद फ्लाइट अपने नियत समय पर टेक ऑफ कर जाती है तल अबीफ से उड़ने वाली फ्लाइट 139 को ग्रीस की राजधानी एथ से होते हुए पेरिस पहुंचना था एथेंस में हर रोज
लैंड करके प्लेन में रिफ्यूलिंग की जाती और इस दौरान यहां से पेरिस जाने के लिए कुछ पैसेंजर्स इसी फ्लाइट का इस्तेमाल करते आज एथन से इस फ्लाइट में 58 पैसेंजर्स का टिकट बुक्ड था इन्हीं 58 में से चार लोग ऐसे भी थे जिनके इरादे नेक नहीं थे और वह एक खौफनाक घटना को अंजाम देने की फिराक में थे लगभग डेढ़ घंटे तक उड़ान भरने के बाद फ्लाइट एथेंस में लैंड करती है लैंड करते ही प्लेन को रिफ्यूल किया जाता है साथ ही कुछ नए पैसेंजर्स प्लेन में सवार होते हैं रिफ्यूलिंग के वक्त फ्लाइट में काफी
चहल-पहल थी कोई बातचीत का आनंद ले रहा था तो कोई नींद में मशगूल था हर किसी को पेरिस पहुंचकर अपने परिवार जनों से मिलने की जल्दी थी पर उन्हें कहां पता था कि यह खुशनुमा माहौल अब से कुछ ही पल बाद मातम में बदलने वाला है जैसे ही प्लेन एथेन से टेक ऑफ कर कुछ ऊंचाई पर पहुंचता है अचानक से चार हथियारबंद लोग उठ खड़े होते हैं उनके हाथों में पिस्टल और हैंड ग्रेनेड्स थे अचानक से प्लेन का माहौल खौफनाक रूप ले लेता है बंदूक ू को को देखकर सभी पैसेंजर्स के पसीने छूट जाते हैं
कुछ ही समय में चारों हाईजैकर्स पूरी फ्लाइट को अपने कंट्रोल में ले लेते हैं जहां पैसेंजर्स का चीखना शुरू होता है वही एक हाईजैकर तेजी से कॉकपिट की तरफ दौड़ता है और पायलट पर बंदूक तानकर खुद को पायलट वाली सीट पर बैठ जाता है 248 पैसेंजर्स और 12 क्रू मेंबर्स को लेकर उड़ी ये फ्लाइट 139 हाईजैक हो चुकी थी हाईजैकर्स में से दो आतंकी पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ पलेस्टाइन के थे और बाकी के दो वेस्ट जर्मनी के रेवोल्यूशन सेल आरजी के मेंबर होते हैं जिनमें से एक महिला भी थी कोपायलट की जगह पर
बैठा आतंकी अब पायलट से फ्लाइट को पेरिस के बजाय लिबिया के बनज एयरपोर्ट ले जाने को कहता है कई घंटों के लगातार उड़ान के बाद प्लेन को लिबिया के बेनगाजी एयरपोर्ट पर लैंड करवाया जाता है और वहां पर रिफ्यूलिंग करवाई जाती है जिस वक्त बेंजी एयरपोर्ट पर प्लेन को रिफ्यूल किया जा रहा था उसी समय एक ब्रिटिश बर्न इजराइली महिला पेट्रिशिया माटेल ने मिसकैरिज का बहाना करते हुए हाईजैकर्स कोय यकीन दिला दिया कि उसकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब है पेट्रिशिया की यह चाल काम कर गई और हाईजैकर्स ने उन्हें बेंजी एयरपोर्ट पर ही रिलीज कर
दिया इस महिला के फ्री होते ही इस हाईजैकिंग की खबर पूरी दुनिया में आग की तरह फैल गई अब तक इजराइल को भी इस घटना की खबर लग चुकी थी इस फ्लाइट में ज्यादातर पैसेंजर्स इजराइली ही थे इसलिए इजराइल में हंगामा मच गया हर पल बीतने के साथ इजराइली गवर्नमेंट पर अपने सिटीजंस को रेस्क्यू करवाने का प्रेशर बढ़ता जा रहा था इजराइल को पता था कि इतने सारे पैसेंजर्स को छुड़ाने के बदले हाईजैकर्स बड़ी डिमांड रखेंगे इसलिए हाईजैकर्स की डिमांड के पहले ही इजराइल रेस्क्यू ऑपरेशन प्लान करने लगता है यदि आप एक सक्सेसफुल बिजनेस को
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हैं हाईजैकर्स की यह बात सुनकर पायलट और क्रू हैरान था कि कैसे कोई हाईजैक किया हुआ प्लेन इतनी आसानी से दूसरे देश के एयरपोर्ट पर उतारा जा सकता है पर उन्हें कहां पता था कि हाईजैकर्स की पहले से ही युगांडा प्रेसिडेंट ईदी आमीन से बातचीत हो चुकी है आखिरकार 28 मई की रात के करीब 3:00 बजे फ्लाइट 139 युगांडा के एनटी बी एयरपोर्ट पर लैंड करती है एटीबी एयरपोर्ट पर लैंड करते ही युगांडा आर्मी इस प्लेन को चारों ओर से घेर लेती है प्लेन के लैंड करते ही पैसेंजर्स और क्रू मेंबर्स राहत की सांस लेते
हैं उन्हें लगता है कि युगांडा आर्मी उन्हें रेस्क्यू करने आई है पर उनकी यह खुशी चंद मिनटों के अंदर ही गायब हो जाती है जब वह देखते हैं कि युगांडा आर्मी उन्हें रिहा कराने नहीं बल्कि वो तो हाईजैकर्स को सपोर्ट करने आई है आर्मी के लोग हाईजैकर्स को पकड़ने की जगह उनकी आवा भगत में लग जाते हैं अब तक पैसेंजर्स और क्रू समझ चुके थे कि उनके इंतजार की घड़ियां लंबी होने वाली है इनमें से किसी को पता नहीं था कि किसकी जान बच पाएगी और किसकी नहीं सभी के होश तब और उड़ गए जब
उन्होंने देखा कि पांच और आतंकियों ने हाईजैकर्स को जॉइन कर लिया है जिससे अब हाईजैकर्स की संख्या नौ हो चुकी थी और अब वह पहले से भी ज्यादा घातक हो चुके थे लेकिन हद तो तब हो गई जब ईदी आमीन भी हाईजैकर से मिलने एनटी बी एयरपोर्ट चला आता है एयरपोर्ट पर आते ही वह अपनी आर्मी को इन हाईजैकर्स की सिक्योरिटी देने का इंस्ट्रक्शन देने लगता है ताकि इजराइल युगांडा में कोई रेस्क्यू ऑपरेशन ना कर पाए वैसे भी 4000 किलोमीटर दूर किसी भी देश के लिए अपनी सेना को भेजकर रेस्क्यू ऑपरेशन करना काफी डिफिकल्ट था
वह भी तब जब खुद यूगांडा आर्मी द्वारा हाईजैकर्स को प्रोटेक्शन दिया जा रहा था हाईजैकर से मिलने के बाद ईदी आमीन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ अफ्रीकन यूनिटी की बैठक में हिस्सा लेने के लिए मोरिशियस निकल जाता है इस दौरान इजराइल को भी प्लेन के युगांडा में होने के बारे में पता चल चुका था और इजराइल ईदी आमीन की हर एक्टिविटी पर नजर गड़ाए बैठा था इजराइल को भनक लग चुकी थी कि ईदी आमीन भी हा जैकर्स की हेल्प करवा रहा है लेकिन यहां सोचने वाली बात यह है कि हाईजैकर्स ने इजराइली प्लेन को ही क्यों हाईजैक किया
और यदि आमीन ने हाईजैकर्स की मदद क्यों की दरअसल इस प्लेन को हाईजैक करने वाले दो आतंकी पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ पलेस्टाइन के थे और बाकी के दो आतंकी रेवोल्यूशन सेल आरजी के सदस्य थे वो 53 कैदियों की रिहाई चाहते थे जिनमें से सबसे ज्यादा 40 कैदी इजराइल की जेलों में बंद थे वहीं दूसरी तरफ कभी इजराइल और ईद आमीन में काफी अच्छी दोस्ती हुआ करती थी थी जब ईदी आमीन युगांडा की सेना में मेजर जनरल हुआ करता था तब इजराइली डिफेंस फोर्सेस ने उसे पैरा ट्रूपिंग की स्पेशल ट्रेनिंग भी दी थी यह
दोस्ती इस कदर मजबूत थी कि आगे चलकर जब ईदी आमीन ने युगांडा में तख्ता पलट किया तब भी इजराइल ने अपने इंजीनियर्स और टेक्निशियंस को भेजकर उसे भरपूर सहयोग दिया था तख्ता पलट के बाद दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते भी काफी बेहतर हो गए थे और कई इजराइली युगांडा में बिजनेस करने के लिए भी गए इसके बाद ईदी आमीन ने अपने पड़ोसी देश तंजे निया से युद्ध ड़ा और इजराइल से हथियारों की मदद मांगी पर इस बार इजराइल ने ईदी आमीन को मदद देने से इंकार कर दिया इस बात से ईदी आमीन गुस्से से भर
गया और अपने देश में रह रहे इजराइली लोगों को युगांडा से निकल जाने का आदेश दे दिया इसके बाद उसने लिबिया के शासक गद्दाफी से अपनी नजदीकियां बढ़ाई और बदले में गद्दाफी ने उसे खूब हथियार दिए लिबिया का शासक गद्दाफी इजराइल का दुश्मन था और इस दुश्मनी में ईद आमीन ने गद्दाफी को साथ देने का वादा किया 1967 आते-आते ईदी आमीन इजराइल का कट्टर दुश्मन बन चुका था और इजराइल से बदला लेने के लिए सही मौके की तलाश में था इसलिए उसे जैसे ही इस प्लेन हाईजैकिंग का पता लगा उसने पूरे मन से आतंकियों को
मदद करने की पेशकश की इसलिए पहले इस प्लेन को लिबिया फिर उसे युगांडा ले जाया गया युगांडा में हाईजैकर्स ने सभी पैसेंजर्स को दो ग्रुप में बांटकर एयरपोर्ट के ओल्ड टर्मिनल बिल्डिंग में हॉस्टेस बनाकर रखा हुआ था इनमें से एक ग्रुप इजराइली सिटीजंस का था जिन्हें एक अलग कमरे में रखा गया था और वही दूसरा ग्रुप अन्य देशों के नागरिकों का था जिन्हें किसी दूसरे कमरे में रखा गया था सिचुएशन पूरी तरह हाईजैकर्स के कंट्रोल में थी और वह युगांडा में पूरी तरह से सेफ थे घटना के करीब दो दिन बाद हाईजैकर्स पहली बार इजराइल
के सामने अपनी डिमांड रखते हैं हाईजैकर्स की तरफ से इजराइल केनिया फ्रांस वेस्ट जर्मनी और स्विटजरलैंड की जेलों में बंद 53 कैदियों को 1 जुलाई तक रिहा करने और 5 मिलियन डॉलर की फिरौती देने की मांग की जाती है ऐसा ना करने पर हॉस्टेस को मारने की खुली धमकी भी दी जाती है इन कैदियों में से 40 कैदी इजराइल की जेलों में बंद थे वही 13 कैदी केनिया फ्रांस वेस्ट जर्मनी और स्विट्जरलैंड की जेलों में कैद होते हैं हाईजैकर्स की डिमांड्स पर गौर करने से पहले इजराइल डिप्लोमेटिक तरीकों से सभी हॉस्टेस को छुड़ाने की कोशिश
करता है सबसे पहले एक रिटायर्ड आईडीएफ ऑफिसर बरूच बुर्का बारले फ को इस काम पर लगाया जाता है उनका युगांडा के प्रेसिडेंट ईदी आमीन के साथ कई सालों से काफी अच्छा रिश्ता था लेकिन अपने ही घमंड में चूर ईदी आमीन उनकी कोई भी बात मानने से साफ इंकार कर देता है इसके बाद इजराइली कैबिनेट अमेरिका से रिक्वेस्ट करती है कि वह इजिप्ट के प्रेसिडेंट अनवर सादतपुर गनाइज के चेयरमैन यासिर अराफा हानी अल हसन को अपना स्पेशल एन्वॉयर हाईजैकर्स और ईदी आमीन से मिलने युगांडा भेजते हैं लेकिन अपने मंसूबे को पूरा करने की जिद लिए बैठे
हाईजैकर्स हॉस्टेस को रिलीज करने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं होते किसी भी तरफ से कोई ऑप्शन ना देखकर अंत में इजराइली कैबिनेट 1 जुलाई 1976 को हाईजैकर्स के पास एक नेगोशिएशन ऑफर भेजती है इजराइल को अपने रेस्क्यू ऑपरेशन को एग्जीक्यूट करने के लिए कुछ और वक्त की जरूरत थी इसलिए इजराइल ने हाईजैकर्स को अपने नेगोशिएशन ऑफर में लिखा कि वह इजराइल की जेलों में बंद कैदियों को तो रिलीज करने को तैयार है पर दूसरे देशों में बंद कैदियों के लिए उसे उन देशों से बात करने में थोड़ा और वक्त लगेगा इसके अलावा इजराइल उनकी
5 मिलियन डॉलर की डिमांड को भी मान लेता है यह सब देख हाईजैकर्स को लगने लगता है कि इजराइल पूरी तरह से बैकफुट पर चला गया है इसलिए अपनी जीत को पक्का समझते हुए उन्होंने इजराइल को 4 जुलाई तक का वक्त दे दिया बस इतना वक्त इजराइल के लिए काफी था यजक राबिन जो उस समय इजराइल के प्राइम मिनिस्टर थे उन्होंने अपनी इंटेलिजेंस एजेंसी मोसाद और इजराइल के डिफेंस मिनिस्टर शिमोनो साद के एजेंट्स को एनटी बी एयरपोर्ट पर होर ही हर एक एक्टिविटी की जानकारी जुटाने का आदेश दिया गया इसके बाद इस मीटिंग में रेस्क्यू
ऑपरेशन को लेकर हर एक पॉसिबिलिटी पर गौर किया गया जिसमें मुख्य तौर पर तीन ऑप्शन सामने आए पहला ऑप्शन सी रूट के जरिए लेक विक्टोरिया से होते हुए एनटी बी पहुंचकर हाईजैकर्स को मार गिराने का था लेकिन इस प्लान में दिक्कत यह थी कि लेक विक्टोरिया के अंदर भारी मात्रा में नाइल क्रोकोडाइल पाए जाते थे जिससे बीच रास्ते में क्रोकोडाइल अटैक का काफी खतरा था वही ऑपरेशन सक्सेसफुल होने के बाद भी ईद आ न के मंजूरी के बिना इजराइली बंधकों को वापस इजराइल लाना पॉसिबल नहीं था इसलिए इस प्लान को छोड़कर दूसरा प्लान बनाया गया
जिसके तहत इजराइली आर्मी को केनिया पहुंचकर वहां से बाय रोड एटीबी एयरपोर्ट जाकर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देना था लेकिन यह प्लान भी इजराइली अथॉरिटीज को ठीक नहीं लगा इसलिए थर्ड एंड फाइनल ऑप्शन ऑपरेशन थंडरबोल्ट पर गौर किया गया जिसमें एयरक्राफ्ट के जरिए इजराइली आर्मी की एक यूनिट को एनटी बी पहुंचकर पूरे प्लान को एग्जीक्यूट करना था इजराइल के पास समय की भारी कमी थी इसलिए ऑपरेशन थंडरबोल्ट को ही एग्जीक्यूट करने का फैसला लिया गया इस ऑपरेशन के लिए इजराइली डिफेंस फोर्स के एलीट कमांडोज की यूनिट सायरेट मैटकल को चुना जाता है जिसे यूनान नेतनयाहू
लीड कर रहे थे पर युगांडा इजराइल से 4000 किमी दूर था इसलिए ऑपरेशन में शामिल सभी एयरक्राफ्ट्स को बीच में कहीं रिफ्यूलिंग करना बहुत जरूरी था रिफ्यूलिंग करवाने के लिए इजराइल को किसी ऐसे ईस्ट अफ्रीकन देश की जरूरत थी जो अपने देश में उसके एयरक्राफ्ट को घुसने की परमिशन दे दे ऐसे में युगांडा का पड़ोसी देश केन्या इजराइल की मदद के लिए सामने आया केन्या ने इस ऑपरेशन के लिए नैरोबी एयरपोर्ट पर इजराइली एयरफोर्स को लैंड करने की परमिशन दे दी एक और जहां इजराइल रेस्क्यू ऑपरेशन को प्लान कर रहा था तो वहीं हाईजैकर्स ने
एक और चाल चलते हुए 30 जून और 1 जुलाई के बीच 148 ऐसे हॉस्टेस को रिहा करके पेरिस भिजवा दिया जो इजराइल के सिटीजंस नहीं थे ऐसा करके हाईजैकर्स अन्य देशों के इवॉल्वमेंट को खत्म करना चाहते थे ताकि कोई और देश उनके खिलाफ कोई एक्शन ना ले अब टेबी एयरपोर्ट पर केवल 106 इजराइली पैसेंजर्स ही बचे थे जिससे साफ हो चुका था कि हाईजैकर्स केवल इजराइली सिटीजंस को ही टारगेट कर रहे थे इस बीच मोसाद एटीबी एयरपोर्ट की हर छोटी से छोटी इंफॉर्मेशन को जुटा चुका था उसने यहां तक पता कर लिया था कि हाईजैकर्स
ने हॉस्टेस को एयरपोर्ट के पास किस बिल्डिंग में छुपा रखा है इस इंफॉर्मेशन को मोसाद सायरेट मेडकल रेस्क्यू यूनिट से शेयर करता है साथ ही उस बिल्डिंग और एटीबी एयरपोर्ट का मैप भी उनके साथ साझा करता है इजराइल के पास प्लस पॉइंट यह होता है कि एटीबी एयरपोर्ट के जिस टर्मिनल में हॉस्टेस को रखा गया था उसका कंस्ट्रक्शन कुछ साल पहले ही इजराइल की एक कंपनी ने किया था इस कंपनी की मदद से इजराइली फोर्सेस को वहां के चप्पे-चप्पे की जानकारी मिल गई थी इजराइल अब रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तैयार था बस इंतजार था तो
कैबिनेट मिनिस्टर्स की मंजूरी का हाईजैकर्स की तरफ से 4 जुलाई का अल्टीमेटम था इसलिए देर ना करते हुए इजराइल की कैबिनेट मीटिंग में रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए 3 जुलाई का दिन चुना जाता है 3 जुलाई आ चुकी थी अब हाईजैकर्स द्वारा दिए गए अल्टीमेटम में सिर्फ एक दिन ही बचा था इजराइल को पता था कि अगर समय से ऑपरेशन को सक्सेसफुली नहीं किया गया तो उनके सभी नागरिकों की जान जा सकती है इसलिए फौरन ऑपरेशन थंडर बोल्ड को शुरू कर दिया जाता है इस पूरे ऑपरेशन को ब्रिगेडियर जनरल डन शोमर कमांड कर
रहे थे जबकि लूटने कर्नल योनातन नेतनयाहू को फील्ड ऑपरेशन की जिम्मेदारी दी गई थी प्लानिंग की जा चुकी थी और अब इजराइली एयरफोर्स के चार c130 रो हरकुलिस उड़ान भरने को तैयार थे इसके बाद अलग-अलग टाइम पर सभी एयरक्राफ्ट्स को युगांडा के एटीबी एयरपोर्ट के लिए रवाना कर दिया जाता है पहले तीन एयरक्राफ्ट्स में 200 के करीब कमांडोज और पैराट्रूपर्स बैठे हुए थे जबकि एक जहाज को खाली भेजा गया था ताकि ऑपरेशन पूरा होने के बाद उसमें सभी हॉस्टेस को वापस लाया जा सके इन एयरक्राफ्ट्स में कुछ गाड़ियों को भी भर के लाया गया था
जो कि इजराइल के प्लान का ही एक हिस्सा था इसके अलावा इस मिशन में टू बोइंग 707 भी जोड़े गए जिनमें से एक को एटीबी से स्टैंड ऑफ रेंज पर फ्लाई करते हुए कमांड एंड कंट्रोल का काम संभालना था तो वहीं दूसरा बोइंग 707 केनिया के नैरोबी में मेडिकल इमरजेंसी के परपस से रखा गया प्लान के मुताबिक सभी एयरक्राफ्ट्स रेड सी के ऊपर से फ्लाई करते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे सभी पायलेट्स को इजिप्ट सूडान और सऊदी अरब जैसे तमाम देशों के एटीसी की नजरों से बचते हुए उड़ान भरने के आदेश दिए
गए थे ताकि किसी भी देश का रडार उनके एयरक्राफ्ट्स को डिटेक्ट ना कर पाए सभी ए क्राफ्ट्स रेड सी के ऊपर उड़ान भरते हुए जिबूटी पहुंचते हैं और फिर वहां से टर्न लेकर इथियोपिया और केनिया को क्रॉस करते हुए युगांडा में एंटर कर जाते हैं उसके बाद फर्स्ट एयरक्राफ्ट बड़ी खामोशी से रात के करीब 11:00 बजे एटीबी एयरपोर्ट पर लैंड करता है इस एयरक्राफ्ट के वहां उतरने पर युगांडा आर्मी को जरा भी शक नहीं होता है क्योंकि उन एयरक्राफ्ट्स को युगांडा की कमर्शियल फ्लाइट्स की तरह कलर किया गया था ताकि रनवे पर उतरते वक्त युगांडा
आर्मी उनकी सही पहचान ना कर सके और इजराइली एयरक्राफ्ट पर पर शक ना हो फर्स्ट एयरक्राफ्ट के उतरते ही सभी इजराइली कमांडोज बड़ी सावधानी से छुपते छुपाते एटीबी एयरपोर्ट के न्यू टर्मिनल की बिल्डिंग के पास तैनात हो गए और थोड़े ही समय में एयरपोर्ट के कंट्रोल रूम के आसपास अपनी पोजीशन ले ली इसी दौरान एयरक्राफ्ट का पिछला दरवाजा खुलता है जिससे दो लैंड रोवर और एक ब्लैक कलर की 35 कमांडोज ने युगांडा आर्मी के जैसे ही यूनिफॉर्म पहन रखी थी ब्लैक बढ़ने लगती है जैसे ही यह सभी गाड़ियां ओल्ड टर्मिनल की बिल्डिंग के पास पहुंचने
वाली थी कि तभी दो युगांडा आर्मी के लोग इस गाड़ी को रोकने लगते हैं उनको शक हो गया था कि यह कन्वोय ईदी आमीन का नहीं है यह शक उन्हें इसलिए हुआ था क्योंकि ईदी आमीन ने कुछ दिन पहले ही अपने कन्वोय में ब्लैक की जगह वाइट इसलिए उन्होंने गाड़ी की स्पीड को और तेज कर दिया मगर दोनों युगांडा सिक्योरिटी गार्ड्स ने इस गाड़ी का पीछा करना नहीं छोड़ा स्थिति को हाथ से निकलता देख एक इजराइली कमांडो ने साइलेंसर लगी पिस्टल से उन दोनों को पल भर में मार गिराया पर इसी बीच लैंड रोवर्स में
सवार एक दूसरा इजराइली कमांडो भी इन पर अपनी राइफल से गोलियां चला देता है जिसकी आवाज से युगांडा आर्मी एकदम से अलर्ट हो जाती है अब इजराइली कमांडोज को अपनी स्ट्रेटेजी को बदलने के लिए मजबूर होना पड़ता है पहले की स्ट्रेटेजी के मुताबिक चुपके से ओल्ड टर्मिनल बिल्डिंग में घुसकर अपने सिटीजंस को हाईजैकर्स के चंगुल से छुड़ाना था पर अब उन्हें आगे बढ़ने के लिए युगांडा आर्मी से भी भिड़ना था इसी बीच बाकी के कमांडोज और पैराट्रूपर्स से भरे दो इजराइली एयरक्राफ्ट्स एटीबी एयरपोर्ट पर लैंड करते हैं और तेजी के साथ सभी अपनी-अपनी पोजीशंस लेते
हुए आगे जा चुके कमांडोज को बैकअप देते हैं और रनवे और हाईजैकर्स की सिक्योरिटी में लगाई गई युगांडा आर्मी पर जोरदार फायरिंग शुरू कर देते हैं उधर लैंड रोवर और सभी कमांडो ओल्ड टर्मिनल की बिल्डिंग में हॉस्टेस को रिहा कराने पहुंच जाते हैं इस दौरान तीनों एयरक्राफ्ट के इंजन को चालू रखा जाता है ताकि जैसे ही रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो फौरन वहां से टेक ऑफ किया जा सके पहले से ही पोजीशन लिए इजराइली स्नाइपर्स युगांडा आर्मी पर काल बनकर टूटते हैं इजराइली कमांडोज ने रनवे पर पोजीशन लेते ही वहां की सभी लाइट्स को ऑफ कर
दिया और जैसे ही युगांडा आर्मी की तरफ से कोई हलचल दिखती उन्हें तुरंत मार गिराया जाता थोड़ी ही देर में एयरपोर्ट पर तैनात सभी सिक्योरिटी फोर्सेस को इजराइली कमांडोज ने मार गिराया इस गोलीबारी और आमने-सामने की लड़ाई में अब भी सभी इजराइली कमांडो सेफ थे उधर ओल्ड टर्मिनल पहुंच चुके कमांडोज ने उन चारों आतंकियों पर अटैक करना शुरू कर दिया जिन्होंने बंदूक की नोक पर 106 इजराइली लोगों को बंक बना रखा था इजराइल के इन जाबास कमांडोज के आगे आतंकी ज्यादा देर नहीं टिक पाए और चंद मिनटों में ही ढेर हो जाते हैं इजराइली कमांडोज
के पास इस पूरी बिल्डिंग का मैप था और वह बेहतर प्लानिंग से आए थे इसलिए यहां भी इजराइली कमांडोज की तरफ से एक भी कैजुअल्टी सामने नहीं आती लेकिन क्रॉस फायरिंग के दौरान कुछ इजराइली पैसेंजर्स को गोली लग जाती है जिससे तीन लोगों की जान चली जाती है और कई लोग बुरी तरह से घायल हो जाते हैं सभी आतंकियों को मार गिराने के बाद इजराइली कमांडोज हॉस्टेस को रनवे की तरफ फोर्थ एयरक्राफ्ट में ले जाते हैं अब एटीबी एयरपोर्ट के सभी इलाकों पर इजराइली कमांडोज का कब्जा था सब कुछ कंट्रोल में लेने के बाद सभी
पैसेंजर्स को चौथे एयरक्राफ्ट पर बैठाया जाने लगता है इस दौरान घायल हॉस्टेस को एयरक्राफ्ट में बिठाने का काम फील्ड इंचार्ज योनातन नेतनयाहू ने संभाला हुआ था वह बारी-बारी से सभी को सुरक्षित तरीके से प्लेन में बिठा रहे थे उसी वक्त कुछ कमांडोज की नजर एटीबी एयरपोर्ट पर स्टेश युगांडा के 11 मिग 17 और मिग 21 एयरक्राफ्ट्स पर पड़ती है इजराइली कमांडोज ने फौरन उन सभी जहाजों को हैंड ग्रेनेड और बॉम्ब्स के जरिए तबाह कर दिया ताकि युगांडा एयरफोर्स उनका पीछा ना कर सके अब तक सभी पैसेंजर्स चौथे एयरक्राफ्ट में सवार हो चुके के थे और
फील्ड इंचार्ज योनातन नेतनयाहू ने अपने सभी कमांडोज को भी ग्राउंड छोड़ने का ऑर्डर दे दिया था ग्राउंड पर अकेले खड़े योनातन नेतनयाहू अशोर करते हैं कि सभी इजराइली पैसेंजर्स कमांडोज और ऑफिसर्स सेफली एयरक्राफ्ट में सवार हो चुके हैं सब कुछ अशोर करने के बाद योनातन नेतनयाहू भी प्लेन में सवार होने ही वाले होते हैं कि अचानक से युगांडा आर्मी के कुछ सिपाही वहां पहुंचते हैं और उन पर अंधाधुन गोली चला देते हैं इस गोलीबारी में दो गोली यूनान नेतनयाहू को लगती है और वह शहीद हो जाते हैं आगे चलकर इजराइली सरकार उनकी बहादुरी के लिए
इस ऑपरेशन का नाम बदलकर उनके नाम पर ऑपरेशन योनातन कर देती है इस घटना के 20 साल बाद 1996 में योनातन नेतनयाहू का छोटा भाई इजराइल का प्राइम मिनिस्टर बनता है जिन्हें हम बेंजामिन नेतनयाहू के नाम से जानते हैं इस पूरे ऑपरेशन में केवल एक इजराइली कमांडर की जान गई थी वहीं दूसरी ओर सात हाईजैकर्स और 45 युगांडा आर्मी मारे गए दोनों तरफ से चली भयंकर गोलीबारी और बम धमाकों के कारण इस ऑपरेशन के दौरान तीन हॉस्टेस की भी मौत हो गई थी जबकि 10 हॉस्टेस गंभीर रूप से घायल हो गए थे 90 मिनट तक
चले इस ऑपरेशन में इजराइल अपने 102 सिटीजंस को हाईजैकर्स के चंगुल से छुड़वाने में सफल रहता है कई दिनों तक हॉस्टेस बने रहने के कारण इजराइल की एक महिला डोरा ब्लॉक की तबीयत काफी खराब हो गई थी इसलिए उन्हें युगांडा के ही एक हॉस्पिटल में भर्ती करवा दिया गया था ऑपरेशन के दौरान इजराइली कमांडोज को डोरा ब्लॉक जिस हॉस्पिटल में भर्ती थी उसकी जानकारी नहीं थी जिस कारण उन्हें रेस्क्यू नहीं किया जा पाता इजराइल के इस ऑपरेशन में भारी शिकस्त खाने के बाद युगांडा अथॉरिटी अपना बदला हॉस्पिटल जाकर डोरा ब्लॉक की बेरहमी से हत्या करके
लेती है इस ऑपरेशन के बाद जैसे ही इि आमीन को मालूम चलता है कि उसकी अनुपस्थिति में इजराइल उसके घर में घुसकर अपने सभी हॉस्टेस को छुड़ा ले गया है तो उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो पाता है उस समय यदि आमीन की क्रूरता के किस्से काफी मशहूर थे कहां तो यहां तक जाता है कि वह एक समय पर इंसानी मांस भी खाने लगा था इस ऑपरेशन में केनिया ने इजराइल की हेल्प की थी यह इंफॉर्मेशन के मिलते ही इी यामीन का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है वह अपनी मिलिट्री को युगांडा में
रह रहे सभी केनिया के लोगों को मार देने का आदेश दे देता है इससे युगांडा में 245 केनियन को तड़पा तड़पा कर मार दिया जाता है इसके अलावा 3000 से अधिक केनियन को पकड़कर जेल में डाल दिया जाता है यह सब ईद आमीन की खिसिया हट ही थी उसे इजराइल का इस तरह उसके देश में आकर और उसके सिपाहियों को मारकर सभी लोगों को कर ले जाना बर्दाश्त नहीं हो रहा था वही पूरी दुनिया में इजराइल के इस डेयरिंग ऑपरेशन के बाद इजराइल की जबरदस्त तारीफ हो रही थी