वक्त बिल पास होते ही एक गैंग इतना घबराया हुआ है कि उसे देखकर मेरी हंसी छूट रही है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड छाती कूट-कूट कर कह रहा है कि हमारे साथ जुल्म हो गया है ओवैसी और अमानतुल्लाह बोल रहे हैं कि हम इस एक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे खड़गे साहब तो इस फिक्र में साबुन की टिकिया की तरह घुले जा रहे हैं कि बीजेपी वाले वक्त की जमीन को अडानी अंबानी को ना दे दी और इन सबके बीच राहुल बाबा का ये सोच सोच कर कलेजा भारी हो रहा है कि वफ के बाद बीजेपी
की नजर अब कैथोलिक चर्च की जमीन पर है अब राहुल बाबा ने ये बात बोली तो हमने सोचा थोड़ा चेक कर लें वो ऐसा क्यों बोल रहे हैं कहीं ये चोर की दाढ़ी में तिनका वाला मामला तो नहीं है लेकिन इसके बाद जब मैंने कुछ आंकड़े देखे तो ऐसा लगा कि भैया यहां चोर की दाढ़ी में तिनका नहीं पूरी की पूरी झाड़ू फंसी हुई है कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस वक्त पूरे देश में कैथोलिक चर्च के पास 7 करोड़ हेक्टेयर यानी 17 करोड़ एकड़ जमीन है ये जमीन तो व बोर्ड के पास मौजूदा
जमीन से भी ज्यादा है इस जमीन पर चर्च के पास 14000 से ज्यादा स्कूल 1000 से ज्यादा ट्रेनिंग इंस्टट्यूट्स 1800 से ज्यादा अस्पताल 28 साइंस कॉलेज और पांच इंजीनियरिंग कॉलेज इतना ही नहीं कैथोलिक चर्च ऑफ इंडिया के पास देश के लगभग हर राज्य में प्रॉपर्टी है कैथलिक चर्च की गवर्निंग बॉडी सीबीसीआई ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप फ्रांसिस के अंडर आती है अब इसका क्या मतलब है यह बताने की जरूरत है क्या नहीं अब इल्जाम यह है कि चर्च के पास आज जो 17 करोड़ हेक्टेयर से ज्यादा की जमीन बताई जा रही है इसमें ज्यादातर
जमीन आजादी से पहले अंग्रेजी हुकूमत ने चर्च को कौड़ियों के दामों पर दी थी अब लोग ये बोल रहे है कि भैया अगर वक्फ बोर्ड के पास मौजूदा जमीन का हिसाब हो रहा है तो कैथोलिक चर्च के पास जो जमीन है उसका भी हिसाब हो यह जमीन उनके पास कैसे आई कहां से आई उनकी टोटल आमदनी कितनी है उस आमदनी का हिसाब कौन रखता है अब राहुल बाबा का मन यही सब सोच कर भारी हो रहा है तभी उन्होंने स्टेटमेंट दिया है कि वफ के बाद कैथोलिक चर्च पर भी बीजेपी वालों की नजर है मतलब
वक्त संशोधन बिल पास हो गया तो अब एक खेमा डरा हुआ है कि अब हर चीज का हिसाब होगा वैसे इन्हें बड़ी उम्मीद थी कि बीजेपी वालों के पास तो 240 ही सीटें थी तो बीजेपी हिम्मत नहीं करेगी कि वक्त संशोधन एक्ट लाए लेकिन बीजेपी वो भी ले आई इसलिए अब यह लोग सोच कर डर गए हैं भैया कि बीजेपी यहीं पर रुकने वाली नहीं है वह वक्त बिल के पास होने के बाद किस-किस बात को लेकर यह सो कॉल्ड सेक्युलर खेमा डरा हुआ है और ऐसी कौन-कौन सी चीजें जिसे लेकर विपक्ष को बैड ड्रीम्स
आ रहे हैं उस पर भी हम बात जरूर करेंगे लेकिन उस बैड ड्रीम से पहले कुछ स्वीट ड्रीम्स की बात कर लेते हैं अगर मैं आपको बताऊं कि आपकी ड्रीम कार या ड्रीम बाइक आप कैसे जीत सकते हो स्मार्टली तो आपका रिएक्शन क्या होगा वेल ये पॉसिबल है प्रोबो ऐप पर ये एक स्किल गेमिंग ऐप है जहां सिंपल क्वेश्चन के आंसर देकर आप अपनी नॉलेज को अर्निंग में बदल सकते हो आंसर सिर्फ यस या नो में देना है और जिस कैटेगरी में आप चाहो उसमें दो जैसे मेरी फेवरेट कैटेगरी क्रिकेट है और उसमें एक क्वेश्चन
मैं आज अटेम्प्ट करूंगा कि क्या कल यानी 7 अप्रैल को मुंबई बेंगलुरु के सामने जीतेगी यस या नो कल मुंबई वर्सेस बेंगलुरु में कौन ज्यादा सिक्सर मारेगा मतलब सबसे बड़ी खबर तो ये है दोस्तों कि प्रोबो पर पूरी के दौरान डेली और वीकली कास्ट में बड़े-बड़े प्राइिस जीतने का आपके पास मौका है डिस्क्रिप्शन में स्पेशल लिंक है क्लिक करो डाउनलोड करो ₹100 मुफ्त में मिलेंगे और ढेरों प्राइिस जीतने का मौका पाओ वीडियो में आ गया हूं दोस्तों अगर मैं आपसे पूछूं कि मोदी सरकार ने अब तक जो बड़े फैसले लिए हैं उनमें ज्यादा मुश्किल फैसला
कौन सा था क्या 5 अगस्त 2019 को धारा 370 को हटाना बड़ा फैसला था या अभी 2025 में वफ एक्ट में जो अमेंडमेंट करना हो वो बड़ा फैसला था हो सकता है आप में से बहुत सारे लोग ये सोचेंगे रौनक भाई ये क्या सवाल है ऑब्वियसली 370 को हटाना बड़ा फैसला था वफ अमेंडमेंट भी बड़ी बात है मगर उतनी बड़ी नहीं है लेकिन अगर आप मुझसे पूछें तो मैं कहूंगा नहीं वफ एक्ट में अमेंडमेंट करना धारा 370 हटाने से भी बड़ा फैसला है और उसकी सीधी वजह है कि 2019 में बीजेपी ने जब 370 हटाया
तब वो लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत से जीत कर आई थी वो सरकार चलाने के लिए किसी सहयोगी पर डिपेंडेंट नहीं थी लेकिन जून 204 में जब बीजेपी की 240 सीटें आई तो किसी को उम्मीद नहीं थी कि बीजेपी अब कोई बड़ा फैसला खुद ले पाएगी इनफैक्ट कांग्रेस जैसी पार्टियां तो ये उम्मीद लगा कर बैठी थी कि दो-चार महीने में बीजेपी की सरकार गिर जाएगी बीजेपी सरकार गिरे ना गिरे लेकिन सभी अपोजिशन पार्टियों को इतना कॉन्फिडेंस तो था कि मोदी सरकार भूलकर भी वफ बिल में अमेंडमेंट लाने की हिम्मत नहीं करेगी उन्हें लग रहा था
कि बीजेपी की 30-40 सीटें कम आई है तो अब तो मोदी सरकार चुपचाप 5 साल निकालने की कोशिश करेगी लेकिन जैसा कि भाई मोदी तो मोदी है वो ना सिर्फ वफ अमेंडमेंट बिल लेकर आए बल्कि उसे डंके की चोट पर पास भी करा ली कांग्रेस को लग रहा था कि जेडीयू और टीडीपी जैसी बीजेपी की सहयोगी पार्टियां शायद उनकी मदद नहीं करेंगी लेकिन बीजेपी ने ऐसे पत्ते बिछाए कि नवीन पटनायक की बीजू जनता दल और जगन मोहन रेड्डी तक की पार्टियों ने अपने सांसदों को बोल दिया कि जा सिमरन जी ले अपनी जिंदगी मतलब इन
दोनों पार्टियों ने अपने सांसदों को बोला कि जो ठीक लगे वो करो दूसरी तरफ जो राहुल बाबा आज वफ संशोधन बिल पास होने पर संसद के बाहर इतनी हायतौबा मचा रहे हैं उन्होंने और उनकी बहन ने संसद में इस पर भाषण तक नहीं दिया प्रियंका जी खुद वायनाड से आती है जो एक मुस्लिम बहुल सीट है अगर ये संशोधन बिल मुसलमानों के खिलाफ है तो सबसे पहले उन्हें खड़े होकर भाषण देना चाहिए था लेकिन वो नहीं बोली आप बताइए अब ऐसा कैसे हो सकता है कि आप एक चीज को मुसलमानों के लिए बुरा तो मान
रहे हैं लेकिन जहां पर जेनुइनली बोलने की बारी आई वहां पर आप बोल ही नहीं रहे हो गायब हो जा रहे हो इसका मतलब है कि आप डरे हुए हो और बीजेपी अब आपका ये डर सेंस कर चुकी है आपको भी पता है जून 204 का रिजल्ट आए वैसे तो 10 महीने हो चुके हैं लेकिन इस बीच गंगा में बहुत पानी भी बह चुका है इसके बाद बीजेपी महाराष्ट्र हरियाणा और दिल्ली का भी चुनाव जीत चुकी है आज बीजेपी को ये पता है कि इस जीत के बाद अब जेडीयू और टीडीपी की भी हिम्मत नहीं
है कि वो किसी मुद्दे पर बीजेपी को आंख दिखाए इसलिए अब बीजेपी सिर्फ वक्त संशोधन बिल पर ही नहीं रुकने वाली अब वो यूनिफार्म सिविल कोड भी लेकर आएगी अभी दो दिन पहले ही कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस संचाटे संजीव कुमार ने भी गवर्नमेंट को बोल दिया कि आप लोग यूनिफार्म सिविल कोड क्यों नहीं ला रहे हैं कर्नाटक हाईकोर्ट ने शनिवार को कहा कि देश में यूसीसी लागू होना बहुत जरूरी है इससे खासकर मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का हक मिलेगा आपको बता दें कि हाईकोर्ट के पास एक मुस्लिम महिला शहनाज बेगम का केस आया था शहनाज
बेगम की मौत के बाद उनके भाइयों और शहनाज के पति के बीच शहनाज की प्रॉपर्टी को लेकर डिस्प्यूट था कोर्ट ने कहा कि हिंदू कानून में बेटियों को पिता की प्रॉपर्टी में बराबरी का हक मिलता है जबकि मुस्लिम कानून में भाई को मुख्य हिस्सेदार माना जाता है और बहन को कम हिस्सा मिलता है कोर्ट ने कहा कि ये असमानता संविधान के अनुच्छेद 14 के राइट टू इक्वलिटी के खिलाफ है आपको बता दें इस केस में तो कोर्ट ने एक इनकलिटी की तरफ इशारा किया है इसके अलावा यूनिफॉर्म सिविल कोड ना आने के कारण मुस्लिम महिलाओं
के साथ बहुत सारे जुल्म हो रहे हैं मुस्लिम कानून के हिसाब से मुस्लिम मर्दों को एक साथ चार पत्नियां रखने की इजाजत है जबकि मुस्लिम महिलाओं को ये हक नहीं है ये जेंडर बेस्ड इक्वलिटी के खिलाफ है अगर यूसीसी आ जाता है तो मुस्लिम मर्दों से ये हक छीन जाएगा और औरतों को बराबरी का हक मिलेगा उसी तरह मुस्लिम पर्सनल लॉ में लड़की की शादी 15 साल की उम्र में भी लीगल मानी जाती है अगर उस उम्र तक वो प्यूबर्टी तक पहुंच चुकी हो अगर यूसीसी आता है तो बाकियों की तरह मुस्लिम लड़कियों की शादी
भी 18 साल से पहले नहीं हो पाएगी और इस तरह से बाल विवाह को रोका जा सके इसी तरह इन्हहेरिटेंस राइट्स का एग्जांपल तो मैंने दिया ही जिसके बारे में कर्नाटक हाईकोर्ट ने बोला है अगर यूसीसी आया तो मुस्लिम लड़कियों को भी पिता की प्रॉपर्टी में मुस्लिम लड़कों के बराबर का ही अधिकार मिलेगा इसी तरह तलाक के बाद मुस्लिम महिलाएं सिर्फ मेयर तक ही लिमिटेड रह जाती है शाबानो केस में सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता देने को कहा था लेकिन बाद में मुस्लिम पर्सनल लॉ में बदलाव करके उसे लिमिटेड कर दिया गया अगर यूसीसी आया
तो तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को बाकी महिलाओं की तरह गुजारा भत्ता भी मिल पाएगा वेल मैंने अभी जो चार पांच एग्जांपल्स दिए उसी से आपको ये क्लियर हो गया होगा कि यूसीसी मुसलमानों के खिलाफ नहीं बल्कि ये मुस्लिम महिलाओं को जो राइट्स नहीं मिल रहे हैं उसके लिए लाया जा रहा है लेकिन प्रॉब्लम ये है कि वोट बैंक की पॉलिटिक्स के लिए कुछ पार्टियों ने इसे मुसलमानों के खिलाफ बताकर प्रोजेक्ट किया है अब तक शाहबानो के केस में तो हम देख ही चुके हैं कि किस तरह मुस्लिम सोसाइटी के अंदर ही शायद कुछ लोग ही नहीं
चाहते कि औरतों को बराबरी का हक मिले तब ये लोग तो उस बेचारी को सिर्फ गुजारा भत्ता नहीं लेने दे रहे थे यहां तो औरतों को चार हक और भी मिल रहे हैं अब ये बात ये लोग कैसे बर्दाश्त करेंगे बताइए एक तरह से देखा जाए तो ये सरकार मुसलमानों के खिलाफ है ये प्रॉब्लम नहीं है बल्कि मुस्लिम मर्दों का मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का हक दिए जाने की प्रॉब्लम है इस बिल का सरकार का मुसलमानों के खिलाफ होने से कोई लेना देना ही नहीं है यही बात वक्त बिल में भी थी यही बात ट्रिपल
इंस्टेंट तलाक को लेकर भी थी ट्रिपल इंस्टेंट तलाक में भी तो मुस्लिम औरतों को एक साथ तलाक तलाक तलाक बोलकर डिवोर्स दिए जा रहे थे और वो कुछ नहीं कर पाई थी वक्त में भी जो बड़े लेवल पर जो लोग परेशान थे वो आम मुसलमान ही थे जिनकी जमीनें हड़प ली गई थी तो समझे मैं यहां क्या कह रहा हूं प्रॉब्लम ये नहीं कि बीजेपी सरकार मुसलमानों के खिलाफ कुछ कर रही है हो ये रहा है कि पिछली सरकारों के टाइम मुसलमानों को खुश करने के लिए उन्हें अपीज़ करने के लिए जो फालतू के कानून
बना रखे थे उन कानूनों को एक-एक करके हटाया जा रहा है मतलब उन्हें भी हिंदुओं के बराबर का हक दिया जा रहा है मगर इसे प्रोजेक्ट कैसे किया जा रहा है जैसे उनके साथ कोई जुल्म हो रहा हो ये ऐसे ही है क्रिकेट के एग्जांपल से समझते हैं मानो ICC ने पाकिस्तान या किसी और क्रिकेट टीम के लिए कोई रूल बना दिया हो कि हर कोई उनके बैट्समैन को अंडर आर्म बॉल ही फेंकेगा इनके बॉलर 22 गज की बजाय 12 गज से ही बॉल करेंगे और बाद में जब इनके इस प्रिविलेज को अगर वापस ले
लें तो कुछ लोग शोर मचाएंगे कि देखो पाकिस्तानी टीम पर तो जुल्म हो रहा है प्रिविलेज हटा दिया गया है यूसीसी लाकर मुसलमानों को भी हिंदुओं या किसी के बराबर लाने की जो कोशिश है वो भी मुसलमानों के साथ वैसा ही जुल्म है कुल मिलाकर कहानी ये है कि वक्त संशोधन बिल पास होने पर एक गैंग ये सोच कर डरा हुआ है कि अगर बीजेपी ने यूसीसी भी हटा दिया तो मुस्लिम महिलाएं खुश ना हो जाए अगर इससे वो खुश होकर बीजेपी को वोट करने लगेंगी तो फिर ये वोट बैंक भी उनके हाथ से निकल
जाएगा बस यही सोच-सच कर बेचारों का मन भारी हो रहा है और खट्टी डकारें आ रही है इनको वैसे कुछ लोग तो ये भी बोल रहे हैं कि यूसीसी के बाद बीजेपी को पॉपुलेशन कंट्रोल बिल भी लाना चाहिए वेल वो क्यों जरूरी है उसकी बात हम किसी और वीडियो में करेंगे अभी तो आप कमेंट बॉक्स में ये बताओ कि वक्त बिल के बाद ऐसे कौन से बड़े काम हैं जो बीजेपी को कर देने चाहिए तुरंत जो भी हो आपकी राय कमेंट करके हमें जरूर बताएं और जाने से पहले डिस्क्रिप्शन में प्रोबo ऐप का लिंक दिया
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