शादी के जोड़े में सजी 23 साल की हर्षिता अपनी जिंदगी के सबसे खास दिन को ले बहुत ज्यादा खुश थी क्योंकि हर लड़की की तरह हर्षिता ने भी कई सपने सजाए थे इस दिन को लेकर और फाइनली वो दिन आ ही गया था जहां उसकी शादी लंदन में रहने वाले पंकज से होने जा रही थी। दिल्ली के ही एक फार्म हाउस में दोनों ने अग्नि को साक्षात मानते हुए 22 मार्च 2024 को सात जन्मों की कसमें खाई। हर्षिता का पूरा परिवार इस शादी से बहुत ही ज्यादा खुश था। बिकॉज़ लंदन में एक रेप्यूटेड कंपनी में
काम कर रहा पंकज हर्षिता के लिए एक परफेक्ट मैच था। हर्षिता जिसका सपना बचपन से ही एक टीचर बनने का था और उसे लग रहा था कि शायद लंदन जैसे देश में जहां टीचिंग को लेके ढेरों अपॉर्चुनिटीज होंगी वो वहां अपने इस सपने को पूरा कर पाएगी। उसके पिता सतबीर सिंह जो पेशे से एक ड्राइवर थे उन्होंने बड़ी ही धूमधाम से अपनी छोटी बेटी की शादी करी थी। एंड एक पिता होने के नाते अपनी सबसे बड़ी रिस्पांसिबिलिटी को बहुत ही अच्छे तरीके से निभाया था। जहां एक तरफ शादी के बाद हर्षिता की विदाई का गम
पूरे परिवार को था, वहीं दूसरी तरफ वो इस बात से ज्यादा खुश थे कि हर्षिता अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने जा रही है। पर हर्षिता ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिस नई जिंदगी की शुरुआत वो करने जा रही है, वही नई जिंदगी उसको एक ऐसे दलदल में फंसा देगी जिससे वह कभी बाहर ही नहीं निकल पाएगी। और घर वालों ने कभी कल्पना भी नहीं करी थी कि जिस बेटी को वो खुशी-खुशी अलविदा कर रहे हैं वो उनकी बेटी की आखिरी अलविदा होने वाली थी। हर्षिता गई तो लाल जोड़े में थी,
पर जैसे वह वापस आई, उसने पूरे परिवार को झझोड़ के रख दिया था। केस में आगे बढ़ने से पहले मेरी आपसे एक छोटी सी गुजारिश है कि प्लीज इस वीडियो को जितना हो सके उतना शेयर कीजिएगा ताकि यह वीडियो ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच पाए। एंड मैं ऐसा क्यों बोल रहा हूं वो आपको वीडियो के एंड तक पता चल जाएगा। दिल्ली के पालम विलेज के साधनगर कॉलोनी में रहने वाली हर्षिता बचपन से ही काफी काइंड, इनोसेंट एंड वाइब्रेंट नेचर की लड़की थी। और उसका सपना बचपन से ही एक टीचर बनने का था। और अपने
इसी सपने को पूरा करने के लिए हर्षिता ने प्रतिभा विकास विद्यालय से अपनी स्कूलिंग खत्म करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री वेंकटेश्वर कॉलेज से हिंदी साहित्य में बीए ऑनर्स से अपनी ग्रेजुएशन कंप्लीट करी। ग्रेजुएशन कंप्लीट करने के बाद हर्षिता ने एमडीयू यानी कि महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से बीएड की पढ़ाई करी। अपनी एजुकेशन कंप्लीट करने के बाद हर्षिता ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया था और उसका यह पैशन टुवर्ड्स टीचिंग इतना ज्यादा था कि अक्सर उसके स्टूडेंट्स के पेरेंट्स उसकी इस मामले में तारीफ भी किया करते थे। हर्षिता जो अभी सिर्फ 23 साल
की थी अपने ब्राइट फ्यूचर के लिए वह पूरी शिद्दत से मेहनत कर रही थी। घर की सबसे छोटी बेटी होने की वजह से घर के सभी लोग उसे बहुत ज्यादा प्यार करते थे। स्पेशली हर्षिता की बड़ी बहन सोनिया। सोनिया और हर्षिता एक दूसरे से बहुत ज्यादा क्लोज थे और अपनी हर प्रॉब्लम्स को एक दूसरे के साथ शेयर भी किया करते थे। सोनिया की शादी एक अच्छे घर में होने के बाद घर वालों की बस यही रिस्पांसिबिलिटी थी कि अब हर्षिता की शादी भी किसी अच्छे से लड़के से हो जाए और हमारे इंडियन कल्चर के हिसाब
से हर मां-बाप को कहीं ना कहीं अपनी बेटियों की शादी की टेंशन होती है कि उन्हें एक अच्छा घर मिल जाए जहां वह खुशी-खुशी रह सकें। हर्षिता के घर वालों ने उसके लिए लड़का देखना शुरू भी नहीं किया था कि उन्हें किसी क्लोज रिलेटिव के थ्रू एक रिश्ता आया। हरियाणा के धरौली गांव का रहने वाला पंकज लंदन में किसी बड़ी कंपनी में अच्छी पोस्ट पर था। हालांकि पंकज की उम्र हर्षिता से एकद साल छोटी थी। पर घर वालों को लगा कि लड़का वेल सेटल्ड है और एक अच्छी फैमिली से भी है। और क्योंकि रिश्ता किसी
क्लोज रिलेटिव के थ्रू आया था तो उन्होंने बिना कुछ ज्यादा पूछताछ करे हर्षिता का रिश्ता पंकज से फिक्स कर दिया था। हर्षिता भी इस रिश्ते से बहुत ज्यादा खुश थी क्योंकि उसे लगा कि वह अपने इस टीचिंग के सपने को लंदन जैसे शहर में जाकर ईजीली पूरा कर पाएगी। रिश्ता पक्का होने के बाद पंकज जो उस समय लंदन में था कुछ दिनों की छुट्टियां ले अगस्त 2023 में इंडिया आया और दोनों ने लीगल तरीकों से कोर्ट मैरिज कर ली थी। अक्सर ऐसे एनआरआई मैरिजेस में लड़का या लड़की पहले इंडिया आकर कोर्ट मैरिज कर लेते हैं
ताकि वह वीजा प्रोसेस को स्टार्ट कर सकें। अगस्त 2023 में कोर्ट मैरिज करने के बाद पंकज वापस लंदन लौट गया था और इधर हर्षिता और उसके घर वालों ने शादी की तैयारियां करनी शुरू कर दी थी। कोर्ट मैरिज के करीब 8 महीने बाद पंकज फिर से इंडिया आया। जहां दोनों ने हिंदी रीति रिवाजों के साथ बड़ी ही धूमधाम से शादी करी और शादी के कुछ दिनों बाद ही पंकज फिर से यूके चले गया था टू कंटिन्यू हिज वर्क। हर्षिता का वीजा भी तब तक आ गया था। इसलिए वह भी शादी के महज एक महीने बाद
अप्रैल में पंकज के पास चली गई थी। दोनों इंग्लैंड के नॉर्थन शायद डिस्ट्रिक्ट के कॉर्बीन में मूव हो गए थे। जहां पंकज पहले से ही रह रहा था। हर्षिता जिसके लिए एक नए शहर में नए लोगों के साथ एडजस्ट होना एक टेंशन थी। पर अपने पॉजिटिव और काइंड नेचर की वजह से वो लोगों के साथ घुलमिल गई थी और देखते ही देखते अपनी एजुकेशन और डिग्रीज के दम पर उसे एक डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर में जॉब भी मिल गई थी। आई एम ऑन माय वर्क। एक्साइटेड होने के साथ-साथ हर्षिता पूरी तरीके से एक वाइफ और एक पार्टनर
का रोल प्ले कर रही थी। जहां वह जॉब करके फाइनेंशियली पंकज को सपोर्ट तो कर ही रही थी और साथ ही साथ घर के कामों में भी पंकज का पूरा हाथ बटा रही थी। दोनों अक्सर समय मिलने पर साथ में घूमने भी जाया करते थे। और शायद यही रीजन भी था कि हर्षिता अपनी इस नई जिंदगी में बहुत ज्यादा खुश थी। जहां उसके पास पति पंकज का साथ तो था ही वहीं दूसरी तरफ वो अपने ब्राइट फ्यूचर को भी देख पा रही थी। पर हर्षिता की इस नई जिंदगी पर बिजली गिरने वाली थी। क्योंकि कहते
हैं ना कभी-कभी जो हमें दिखाया जाता है वो सच नहीं होता। और जो सच होता है वह दिखाया नहीं जाता। जिस पंकज से उसने यह सोचकर शादी करी थी कि वह यूके में एक अच्छी कंपनी में जॉब करता है। वह पंकज किसी अच्छी कंपनी में जॉब नहीं बल्कि एक पिज़्ज़ा डिलीवरी बॉय के रूप में काम करता था और उस समय स्टूडेंट वीजा पर था। हर्षिता ने जब इस बारे में अपनी फैमिली को बताया तो वह भी इस बात से शॉक रह गए। पर उनके पास कोई और ऑप्शन नहीं था और हर्षिता ने भी इन बातों
को इग्नोर करते हुए अपने काम पर फोकस करना शुरू कर दिया था। लेकिन शादी के महज कुछ समय बाद हर्षिता की मेहंदी का रंग भी फीका नहीं पड़ा था कि पंकज ने उसे दहेज के नाम पर मारना पीटना शुरू कर दिया था। पंकज उसे फिजिकली और इमोशनली टॉर्चर तो कर ही रहा था। उसके साथ-साथ उसने हर्षिता के बैंक अकाउंट्स पे भी कंट्रोल कर लिया था। पंकज उसे बुरी तरीके से मारता दहेज के नाम पर कॉन्स्टेंटली पैसों की मांग करता और हर तरीके से उसके ऊपर डोमिनेंस दिखाता था। हर्षिता की जिंदगी बस जॉब और घर के
कामों तक ही सीमित रह गई थी। बिकॉज़ उसने हर्षिता को उसके फ्रेंड से मिलने से भी मना कर दिया था। पंकज के इस अग्रेसिव नेचर को हर्षिता फिजिकली तो झेल ही रही थी बल्कि अंदर ही अंदर इमोशनली वो अपने पति के इस व्यवहार से घुटे जा रही थी और अक्सर ऐसे केसेस में लड़कियां इन बातों को अपने पेरेंट्स को नहीं बताती और वेट करती हैं कि शायद कुछ टाइम तक सब ठीक हो जाएगा। इसलिए इनिशियली हर्षिता ने भी इस बारे में अपनी फैमिली को नहीं बताया। 29 अगस्त 204 को पंकज ने उसे बहुत ही बुरी
तरीके से मारा। जिसके बचाव में हर्षिता ने घर से भागने की भी कोशिश करी। पर पंकज ने उसका पीछा करते हुए उसे पकड़ लिया और उसके बाद उसके साथ फिर से मारपीट करी और पंकज के इस बिहेवियर से जब हर्षिता के आंसुओं का घड़ा भर गया तो उसने फाइनली अपने पिता को कॉल कर इस बारे में बताया और घर वालों ने जब अपनी बेटी को इस हाल में देखा तो उनके ऊपर दुखों का बादल फट गया। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनका दामाद उनकी बेटी का यह हाल कर देगा। हर्षिता के
फादर ने बड़ी समझदारी से उसे अपने किसी फ्रेंड को कांटेक्ट करने को बोला और उसे वहां से चले जाने की सलाह दी। जिसके बाद हर्षिता ने मौका देख अपने कलीग को कॉल किया और वह अपने इस कलीग के साथ उसके घर जाकर रहने लगी। और इस पूरे ड्यूरेशन में सबसे ज्यादा शॉकिंग और दुख भरी बात यह थी कि हर्षिता उस वक्त प्रेग्नेंट थी और काफी टाइम तक फिजिकली और इमोशनली सफर करने की वजह से उसको मिसकैरज भी हो गया था। 29 अगस्त की शाम को ही अपने कलीग के घर पहुंचने के बाद हर्षिता ने नॉर्थन
शहर पुलिस में पंकज के खिलाफ डोमेस्टिक वायलेंस की कंप्लेंट दर्ज कराई। जिसमें उसने पुलिस को एक लेटर लिखते हुए बताया कि पंकज उसे फिजिकली, मेंटली और यूज़ करता है और उसने उसके सभी बैंक अकाउंट्स को कंट्रोल कर लिया है और वह उसे ओवरटाइम करने के लिए भी फोर्स करता है। पुलिस ने जब हर्षिता की यह बातें सुनी तो उन्होंने बड़े ही फास्ट पेस तरीके से इस केस को देखा और 3 सितंबर 2024 को पंकज को गिरफ्तार कर उसे जेल में डाल दिया। हालांकि पंकज को इंसिडेंट के 2 दिन बाद ही बेल मिल गई थी और
वह जेल से बाहर भी आ गया था। पर पुलिस ने हर्षिता के लिए डीबीपीओ यानी कि डोमेस्टिक वायलेंस प्रोटेक्शन ऑर्डर रिलीज कर दिया था। जिसके तहत पंकज 28 दिनों के लिए ना ही हर्षिता से मिल सकता था और ना ही उसे कांटेक्ट कर सकता था। यहां पे नोट करने वाली बात यह थी कि पुलिस ने इस केस को बहुत ही सीरियसली ले लिया था। जिसके बाद उन्होंने हर्षिता के लिए पुलिस के दो डिटेक्टिव्स भी असाइन कर दिए थे जो रेगुलर बेसिस पर उसका हालचाल पूछा करते थे और पुलिस ने हर्षिता को दूसरे घर में मूव
कर दिया था जो पंकज के घर से वॉकिंग डिस्टेंस पर था। हर्षिता पंकज के इस टॉर्चर से इतना टूट चुकी थी कि उसने अपना मन बना लिया था और उसने अपनी फैमिली को कॉल कर बता दिया था कि वह अब पंकज के साथ नहीं रह सकती एंड ना ही वह उसके पास वापस जाएगी नहीं तो वह उसे मार देगा। हर्षिता की फैमिली भी इस इंसिडेंट से काफी डर गई थी। जिसके बाद उन्होंने अपनी बेटी को रिक्वेस्ट करते हुए वहां से वापस इंडिया आने को बोला। पर क्योंकि उसने पंकज के खिलाफ केस दर्ज कराया था तो
लीगली वह वापस नहीं आ सकती थी। जब तक केस क्लोज नहीं होता। इधर दूसरी तरफ 28 दिन बीत जाने के बाद और फाइन पे करने के बाद पंकज के ऊपर से डीवीपीओ आर्डर भी रिलीज हो गया था। जिसके बाद उसने अपने एक रिलेटिव के थ्रू हर्षिता को कॉन्फ्रेंस कॉल पर लिया और उसको कंप्लेंट वापस करने को भी बोला। हर्षिता को बार-बार रिक्वेस्ट करने के बाद या फिर कह सकते हैं धमकी देने के बाद उसने पंकज के खिलाफ अपनी कंप्लेंट वापस ले ली और यही हर्षिता की सबसे बड़ी गलती थी। कंप्लेंट वापस लेने के बाद पंकज
ने फिर से हर्षिता की जिंदगी में इंटरफेयर करना शुरू कर दिया। वो आए दिन उसे कॉल करता और उसे बहलाता कि वह एक नई जिंदगी की शुरुआत कर सकते हैं। और इसी बहकावे में आकर हर्षिता पिघल गई और उसने फिर से पंकज से मिलनाजुलना शुरू कर दिया। और पंकज के दिमाग में जो चल रहा था उससे हर्षिता बिल्कुल अनजान थी। उसे लगा कि शायद जेल जाकर पंकज की अकल ठिकाने आ गई होगी। पर कहते हैं ना सांप को चाहे कितना भी दूध क्यों ना पिलाया जाए वो आखिरकार सांप ही रहता है। पंकज ने फिर से
हर्षिता के ऊपर कंट्रोल दिखाना शुरू कर दिया था और मिलने के बहाने से वो अक्सर यह कहकर उससे पैसे भी ठगता था कि जेल जाने के बाद उसे जॉब मिलने में मुश्किल हो रही है। 10 नवंबर 2024 को पंकज ने फिर से हर्षिता को घर के पास ही कॉर्बी बोटिंग लेक पे मिलने के लिए बुलाया। दोनों ने काफी देर तक लेक के पास ही वॉक करी जिसके बाद हर्षिता ने उसे घर आने के लिए भी बोला। हर्षिता को लग रहा था कि पंकज अब सुधर चुका है। जिसके बाद उसने अपने घर पर वीडियो कॉल करके
बताया कि पंकज आज डिनर पर घर आ रहा है एंड वह उसके लिए खाना बना रही है। इस बात से अनजान हर्षिता के घर वालों को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि यह उनका उनकी बेटी के साथ आखिरी वीडियो कॉल होने वाला है। 11 नवंबर यानी कि अगले दिन जब घरवालों ने उसको कॉल किया तो उसका फोन अनरचेबल था। हर्षिता ना ही अपने घर वालों का कॉल उठा रही थी एंड ना ही किसी मैसेज का रिप्लाई कर रही थी। घरवालों को लगा कि वह शायद काम में बिजी होगी या फिर पंकज के साथ घूमने गई
होगी। पर जब 13 नवंबर तक भी उसने कोई कॉल बैक नहीं किया तो उसके पिता ने घबराई हुई हालत में उससे पूछा आज फोन नहीं किया सब ठीक-ठाक है बेटा। इस मोमेंट तक घर वालों को अंदाजा हो गया था कि हर्षिता के साथ कुछ तो गलत हुआ है। इसलिए उसके पिता ने अपने एक रिलेटिव के थ्रू हर्षिता की मिसिंग कंप्लेंट दर्ज करवाई। रिलेटिव के थ्रू पता चला कि किसी का कोई है वहां। उसके थ्रू मैंने अपनी कंप्लेंट डलवाई थी कि मेरी बच्ची मिसिंग है। पुलिस ने जब हर्षिता के बारे में अपने रिकॉर्ड्स चेक किए तो
उनका पहला शक पंकज पे ही गया। बिकॉज़ हर्षिता ने कुछ टाइम पहले ही पंकज के खिलाफ डोमेस्टिक वायलेंस की कंप्लेंट दर्ज करवाई थी। पुलिस के लिए यह एक बहुत ही सेंसिटिव सिचुएशन थी। और अपनी इन्वेस्टिगेशन को फास्ट करते हुए उन्होंने जब हर्षिता के दिए हुए एड्रेस पर जाकर चेक किया तो वह वहां पर नहीं थी। और इसी बीच उन्हें यह भी पता चला कि पंकज भी अपने रजिस्टर्ड एड्रेस पर नहीं है। एंड उसकी सिल्वर कलर की वोलel कोसा कार भी मिसिंग थी। ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी की मदद से पुलिस ने पंकज की कार को
ट्रेस किया और 14 नवंबर की सुबह उन्हें उसकी कार अल्फर्ड के पास ब्रिस्पेन रोड पर पार्क मिली। पुलिस ने जब कार को चेक किया तो उसमें कोई भी नहीं था। पर जैसे ही पुलिस ने कार के बूट यानी कि डिग्गी को खोला तो उसमें हर्षिता की लाश मिली। बॉडी को देखकर पुलिस को अंदाजा हो गया था कि डेथ 3-4 दिन पहले हुई है और जैसे ही यह खबर हर्षिता की फैमिली को मिली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। घरवालों का रो-रो कर बुरा हाल था और इधर 15 नवंबर को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह
कंफर्म हो गया था कि डेथ 10 नवंबर की शाम 7:00 से 8:00 बजे के बीच हुई थी और डेथ का रीजन स्ट्रेंगुलेशन था। यानी कि हर्षिता की गला दबाकर हत्या करी गई थी। हर्षिता की डेथ के बाद यह केस आग की तरह पूरे इंग्लैंड में फैल गया और पुलिस के ऊपर इस केस को लेकर प्रेशर भी बढ़ गया। पुलिस टीम ने फॉरेंसिक टीम की मदद से हर्षिता के घर को अच्छे से चेक किया ताकि उन्हें इस केस से रिलेटेड कातिल के बारे में कुछ पता चल सके। पुलिस ने हर्षिता और पंकज के घर के आसपास
सभी सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू किया और उन्हें 10 नवंबर का एक वीडियो क्लिप हाथ लगा जिसमें रात करीब 9:00 बजे ब्लैक कलर की जैकेट पहना यह शख्स कोई और नहीं बल्कि पंकज लावा है जो ऐसे प्रिटेंड कर रहा है कि वह किसी का वेट कर रहा है। लेकिन उसके चेहरे पर घबराहट देख पुलिस को यह कंफर्म हो गया था कि हर्षिता की मौत के पीछे पंकज का ही हाथ है। नेक्स्ट डे यानी कि 11 नवंबर की सुबह पंकज अल्फर्ड एरिया के जेफी रोड में वॉक करता हुआ दिखाई दिया। जहां वह एक अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशन
की तरफ जाते हुए दिखा जिसमें उसने एक लाइट ग्रीन कलर की जैकेट पहनी हुई है और उसने एक ब्लैक कलर का बैग भी अपने पीछे टांगा हुआ था और यही वह पंकज का आखिरी सीसीटीवी फुटेज था जो यूके पुलिस को मिला था। पुलिस ने फुटेज के बेस पर पंकज की एक फोटो निकाली और उसे लोकल पुलिस स्टेशंस में सर्कुलेट कर दिया। इंसिडेंट को ऑलरेडी एक हफ्ता हो चुका था और ऐसे में पुलिस के लिए सबसे बड़ा डर यह था कि पंकज कहीं कंट्री छोड़ भाग ना जाए। पर पुलिस का यह डर सच में तब्दील तब
हो गया जब उन्हें पता चला कि पंकज 11 नवंबर को ही अपने इंडियन पासपोर्ट के थ्रू कंट्री लीव कर चुका है। दिस मींस कि पंकज ने इस पूरे क्राइम को पहले से ही प्लान किया हुआ था। यूके अथॉरिटीज ने इंटरपोल की मदद से इस बात की खबर इंडियन अथॉरिटीज को दे दी थी। जिसके बाद दिल्ली पुलिस की एक टीम ने इस बारे में हर्षिता की फैमिली को भी बता दिया था। हर्षिता के फादर को यह खबर मिलते ही उन्होंने तुरंत पालम विलेज पुलिस स्टेशन में पंकज के खिलाफ दहेज, हरासमेंट एंड हत्या की कंप्लेंट दर्ज करवाई।
सतवीर सिंह ने पुलिस को यह भी बताया कि पंकज की फैमिली का भी इस केस में पूरा इन्वॉल्वमेंट है। जहां उन्होंने पंकज को दहेज के लिए तो उकसाया ही साथ ही साथ उन्होंने उनकी फैमिली को भी दहेज देने के लिए मजबूर किया। जिसके बाद उनको अपनी एक प्रॉपर्टी को भी बेचना पड़ा था। दिल्ली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पंकज के पिता दर्शन सिंह और मां सुनील देवी पे भी डरी डेथ, क्रुएल्टी टू अ मैरिड वूमेन एंड क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट जैसे आरोप लगाए। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें भी रिमांड के लिए भेज
दिया था। और इस केस का मेन कल्पेट पंकज लांबा अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। पुलिस ने पंकज को एक खतरनाक अपराधी बताते हुए उसके वांटेड पोस्टर्स भी छुपवाए जिस पर उन्होंने उसको पकड़ने वाले शख्स को ₹50,000 देने का भी दावा किया। पुलिस के अकॉर्डिंग 12 नवंबर को वो दिल्ली पहुंचा था और इसी साल 4 मार्च को उसी दिल्ली के एक सीसीटीवी फुटेज में पुलिस ने कैप्चर भी किया जहां वो एक एटीएम से पैसे विड्रॉ करते हुए दिखा| इन्वेस्टिगेशन के दौरान ही 22 मार्च को पुलिस को एक रिक्शे वाले के पास से उसका
मोबाइल फोन भी मिला| जिसका मतलब यह था कि वो अभी भी दिल्ली के अंदर बेखौफ होकर घूम रहा था। पर अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जहां एक तरफ पुलिस यह दावा कर रही है कि उनकी लाख कोशिशों के बाद भी वह पंकज को पकड़ने में नाकाम है। वहीं दूसरी तरफ सोनिया और उसकी फैमिली कोर्ट के चक्कर काट काट के थक चुकी है। सोनिया ने कोर्ट में पंकज को ना पकड़ने की वजह पुलिस की लापरवाही बताई और इस केस को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन को रेफर करने की भी गुहार लगाई। दे आर नॉट डूइंग
ना देयर जॉब वेरी वेल। दैट्स व्हाई आई जस्ट वांट कि प्लीज केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया जाए। पंकज आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। वहीं हर्षिता की फैमिली को यह डर है कि दिल्ली जैसे शहर में ऐसे खुलेआम घूमने के बाद वो मौका देखकर उनके साथ भी कुछ गलत ना कर दे। जहां एक तरफ यूके अथॉरिटीज ने इस बात को कंफर्म किया कि हर्षिता की हत्या के पीछे पंकज का ही हाथ है। वहीं दूसरी तरफ उसकी फैमिली को अभी भी लगता है कि वो ऐसा कुछ कर ही नहीं सकता। हीबल ऑफ कमिटिंग
द क्राइम लाइक दिस। नो नेवर एवर। पंकज लामा की लाइफ में वह सब कुछ था जो एक आम इंसान अपनी लाइफ में चाहता है। एक अच्छा लाइफ पार्टनर, एक अच्छी फैमिली और एक बेटर फ्यूचर। लेकिन इन सबके बावजूद भी उसने एक ऐसा पाप किया जिसकी किसी भी दुनिया में कोई माफी नहीं है। उसने हर्षिता के पेट में पल रहे अपने उस बच्चे के बारे में भी नहीं सोचा जिसकी जान उसके द्वारा हर्षिता के ऊपर किए गए टॉर्चर की वजह से गई। यह केस दिखाता है कि कैसे दिमाग में बैठा पैसों का यह फितूर किसी शख्स
को इस हद तक गिरने के लिए मजबूर कर देता है। मैं तो नहीं जा सकता। लेकिन किसी तरह मेरी बच्ची को इंसाफ दिलाओ। [संगीत] बहुत प्यारी बिटिया थी। आई एम नॉट सरप्राइज्ड कि जहां हमारे देश में ऑलरेडी लाखों केसेस पेंडिंग हैं और हत्यारे आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। शायद उन्हीं केसेस की तरह इस केस को भी किसी धूल भरी फाइल के नीचे दबा दिया जाएगा। लेकिन जाते-जाते मेरी आपसे यही रिक्वेस्ट है कि इस वीडियो को जितना हो सके उतना शेयर कीजिएगा। क्योंकि आपकी बस इतनी सी कोशिश किसी कातिल को पकड़ने में काम आ सकती
है।