पहले तो मेरा बेटा राजी ही नहीं था पर मैंने एक ऐसी चाल चली कि वह मुझे किया भी ने रह ही ना पाए और अब तो हर रोज मेरा बेटा मुझे घोड़ी बनाता तो कभी बाथरूम में खड़े-खड़े ही कर लेता चलो दोस्तों शुरू से शुरू करती हूं और आप लोगों को मेरी पूरी कहानी बताती हूं दोस्तों मेरा नाम नेहा है और मैं रायपुर बरेली से हूं यह कहानी मेरे और मेरे बेटे के बीच में हुई कहानी है मेरी शादी बहुत कम उम्र में हो गई थी मेरे पति जिनका नाम विक्रम है वे उम्र में मुझसे
11 साल बड़े हैं मेरे बेटे का नाम राज है अभी मेरी उम्र 35 साल है पति की उम्र 46 साल है और बेटे की 20 साल है एक दिन मैंने मां बेटे की कहानी पढ़ी और सोचा कि क्या यह भी हो सकता है अगर यह हो जाए तो मुझे घर में ही मिल सकता है मेरे पति से तो वैसे भी कुछ होता नहीं है वे बूढ़े हो गए हैं मुझ पर चढ़ने के कुछ मिनट में ही उनका काम तमाम हो जाता है तो क्यों ना मैं बेटे को ही सेट कर लूं उस दिन से मैंने
सोचना शुरू कर दिया कि अपने बेटे को कैसे तैयार करूं मैंने इस योजना को कार्य रूप देने के लिए काफी सोचा और अंत में मां बेटे की स्टोरी पढ़ना और उनमें दिए गए आईडिया पर काम करने लगी कि कौन सा आईडिया सही रहेगा कुछ दिनों बाद मुझे एक आईडिया मिल गया और मैंने उसे ही चुन लिया अगले दिन जब पति ऑफ ऑफिस चले गए तब मैंने अपनी साड़ी निकाल दी और नाइटी पहन ली मेरा बेटा हॉल में बैठा था मैं उसे चाय देने गई और कुछ ऐसे झुकी कि उसको मेरे अच्छे से दिख जाए जैसे
ही उसकी नजर नाईटी के अंदर गई तो वह कुछ देर तक मेरे को देखता रहा मैं भी डीट बनी हुई उसे अपने दिखाती रही फिर जब मैंने उससे पूछा कि क्या देख रहा है इस पर वह थोड़ा घबरा गया और चाय लेकर पीने लगा जैसे ही मैं मुड़कर जाने लगी उसको पीछे से मेरी में नाइटी घुसी हुई दिख गई मैं कुछ देर अपनी मटका हुई उधर कुछ काम करने लगी और फिर अंदर चली गई तब मैं छिपकर अपने बेटे को देखने लगी कि वह अब क्या करता है मुझे लगा कि यह ऐसे कभी तैयार नहीं
होगा वह मेरे साथ यह सब करने से डर रहा है फिर मैं कुछ सोचकर बाजार गई उस दिन मेरी किस्मत भी मेरे साथ थी मेरे पति को किसी काम से ऑफिस में ही रुकना पड़ गया मैंने बेटे से बोला आज तेरे पापा नहीं है तो तू आज मेरे साथ सो जा उसने मेरी तरफ देखते हुए कहा ठीक है रात को सोने से पहले मैंने उसको दूध में गोली मिलाकर पिला दिया उसके बाद हम दोनों सोने चले गए मैंने अपने रूम में एक छोटा बल्ब जला दिया और हम दोनों सोने लगे मेरा बेटा आंख बंद करके
लेट गया मैंने अपनी आंख को हल्के से खोलकर देखा तो मेरा बेटा सोने की कोशिश कर रहा था पर उसे नींद नहीं आ रही थी शायद उस पर टेबलेट का असर होने लगा था इसीलिए उसे कुछ बेचैनी सी हो रही थी कुछ देर बाद मैंने देखा कि वह उठ गया और मेरी तरफ देखने लगा कुछ पल बाद वह बाथरूम में चला गया मैं भी उसके पीछे-पीछे चली गई मैंने देखा कि उसने बाथरूम का दरवाजा बंद नहीं किया था तब मैंने दरवाजे को थोड़ा सा खोलकर देखा तो वह अपना निकाल कर हिला रहा था मैं उसके
सपनों में खो गई कि वाह आज तो मजा ही आ जाएगा लेकिन मुझे याद ही नहीं था कि मैं उसके बाथरूम के बाहर खड़ी हूं और वह कभी भी आ सकता है इस बात का जैसे ही मुझे होश आया मैं झट से खुद को ठीक करके वापस अंदर झांकने लगी मैं कुछ सोचकर जल्दी से बाथरूम में घुस गई मुझे आते देखकर वह एकदम से डर गया लेकिन टेबलेट की वजह से उसका पानी जल्दी नहीं निकलने वाला था मैंने उससे कहा यह क्या कर रहा था तो वह डरते डरते बोला कुछ नहीं मम्मी मेरे में दर्द
हो रहा था इसलिए मैं कुछ परेशान सा हूं मैंने उससे कहा अरे तो तूने मुझे क्यों नहीं जगाया चल रूम में और दिखा मुझे कि कहां पर दर्द हो रहा है हम दोनों रूम में आ गए मैंने उससे पजामा निकालने को कहा वह मना करने लगा मैंने उसका पजामा पकड़कर नीचे कर दिया फिर उसकी चड्डी भी जैसे ही मैंने उसकी चड्डी निकाली उसका एकदम से मेरी नाक पर आकर लगा बहुत टाइट था नाक पर टन से टकराया वह पीछे को हट गया मैं उसके पास को हो गई और उसको को पकड़ लिया आप सबको क्या
बताऊं उस टाइम मेरी कैसी हालत हो गई थी मैंने जिंदगी में पहली बार इतना बड़ा पकड़ा था क्या मस्त था मेरे बेटे का मेरे बेटे को भी मजा आने लगा उसने अपनी आंखें बंद कर ली और मजे लेने लगा वह अलग होकर बोला मम्मी यह गलत है मैंने बोला कुछ भी गलत नहीं है तू जल्दी से इधर आ वह नहीं माना मैंने उसे पकड़ा और कहा मैं जो बोलूं चुपचाप वह कर नहीं तो तेरे पापा से बोल दूंगी कि तू मुझे रोज बाथरूम में देखता है वह बोला मैंने ऐसा कब किया तो मैंने बोला तेरे
पापा को थोड़ी पता है कि तुमने किया है या नहीं वह तो मेरी बात मानेंगे ना अब बोल मैं जो बोलूं वह करेगा ना फिर वैसे भी तुझे इस वक्त एक मादा की जरूरत है क्योंकि तेरा खंड खड़ा है वह कुछ सोचकर बोला चलो तो मैं सब करूंगा बस फिर क्या फिर तो दोस्तों उसे कुछ भी नहीं आता था लेकिन मैंने उसे कहा कोई बात नहीं मैं हूं ना मैं तेरी मां हूं बेटे सब कुछ सिखा दिया मैंने उसे और उसके बाद हम दोनों में सब कुछ हुआ जो एक पति-पत्नी होता है और अब तो
हम हर रोज करते हैं पर एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि जब अचानक मेरी तबीयत बिगड़ गई और मुझे आराम करने की सलाह दी गई विक्रम उस समय काम के सिलसिले में शहर से बाहर थे और घर की पूरी जिम्मेदारी राज पर आ गई घर का कामकाज संभालने की शुरुआत जब डॉक्टर ने मुझे आराम की सलाह दी तो मैं थोड़ी परेशान हो गई थी क्योंकि घर का सारा काम मेरे ऊपर ही था लेकिन राज ने बड़े ही प्यार और विश्वास से कहा मां आप चिंता मत करो जब तक आप ठीक नहीं हो जाती मैं सब
संभाल लूंगा उसके बाद सुनकर मुझे तसल्ली मिली पर मन में एक सवाल भी था कि क्या वह सच में सारा काम कर पाएगा पहले ही दिन सुबह सुबह जब मेरी आंखें खुली तो मैंने देखा कि राज मेरे लिए चाय बनाकर ले आया यह देख मैं हैरान भी थी और गर्भ से भर भी उठी चाय का कप हाथ में थमा हुए उसने कहा मां यह आप की स्पेशल चाय है मैं मुस्कुराते हुए चाय पीने लगी और मन ही मन सोचने लगी कि राज ने मेरे बिना घर के काम को खुद संभालने का फैसला कर लिया है
चाय के बाद राज ने किचन में जाकर नाश्ता बनाना शुरू किया वह किचन में धीरे-धीरे अपने हाथ आजमा रहा था और मुझे महसूस हुआ कि वह मेरी हर बात हर नुस्खे को कितने ध्यान से सुनता है कुछ देर बाद उसने मेरे लिए पराठे और दही का नाश्ता तैयार कर दिया नाश्ता करने के बाद मैंने उसे बर्तन साफ करते देखा शायद पहली बार वह बर्तनों की सफाई कर रहा था पर उसके चेहरे पर किसी भी तरह की झुंझलाहट नहीं थी उसने काम को पूरी लगन से किया इस मेहनत और जज्बे को देखकर मेरी आंखें नम हो
गई क्योंकि मेरे बेटे ने बड़ी ही जिम्मेदारी से घर का हर छोटा बड़ा काम अपने कंधों पर उठा लिया था अगले दिन भी राज ने चाय बनाकर मुझे जगाया इस बार उसने मुझे आराम से बैठने का आदेश दिया और खुद पूरे घर की सफाई में लग गया झाड़ू पोछा करते हुए उसे देखकर मुझे अपनी पुरानी बातें याद आने लगी जब मैं उसे बचपन में छोटी-छोटी जिम्मेदारियां सिखाया करती थी अब वह बड़ा हो गया था और घर के कामों को बखूबी निभा रहा था दिन भर वह घर का सारा काम करता रहा उसने सब्जियों को काटना
दाल और चावल बनाना सीखा और धीरे-धीरे उसकी पकाई हुई दाल में वह स्वाद आने लगा जो मैं रोज बनाया करती थी जब उसने सब्जियों का तड़का लगाया तो मैं उसकी मदद करना चाहती थी पर उसने मुझसे कहा मां आप आराम कीजिए मैं सब संभाल लूंगा तीसरे दिन तक राज काफी थक चुका था पर उसने मुझे इसका आभास नहीं होने दिया वह सुबह जल्दी उठता मेरी देखभाल करता और फिर घर के काम में जुट जाता शाम को उसने बर्तन साफ की और मुझे देखकर कहा मां अब मुझे समझ में आ रहा है कि घर के काम
कितने मेहनत वाले होते हैं उसकी बातें सुनकर मैं मुस्कुराई और उसके माथे को प्यार से चूम लिया राज ने घर की सफाई से लेकर खाना बनाने और कपड़े धोने तक सब कुछ किया वह हर चीज को मेरी तरह ही करने की कोशिश कर रहा था और उसकी इस कोशिश में मुझे उसके अंदर की समझदारी और परिपक्वता दिखाई दी यह पूरा अनुभव हमारे बीच के रिश्ते को और भी मजबूत बना गया उसकी मेहनत और लगन देखकर मुझे गर्व महसूस हो रहा था यह कहानी मेरे लिए केवल घर के कामकाज की नहीं है बल्कि मेरे बेटे के
उस प्यार और देखभाल की भी है जिसने मुझे उस मुश्किल समय में हर पल संभाले रखा रात की मेहनत ने ना केवल उसे एक बेहतर इंसान बनाया बल्कि मुझे भी एक सच्ची मां का एहसास कराया जो अपने बेटे के प्यार और देखभाल में खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती है इस कहानी का मुख्य संदेश यह है कि हमें अपने अनुभवों को सांझा करने और अपने विचारों को व्यक्त करने से कभी नहीं चूकना चाहिए क्योंकि यह बातें ना केवल हमें जोड़ती हैं बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा भी बनती हैं दोस्तों आज मैंने अपनी कहानी साझा
की जो मेरे और मेरे बेटे के बीच के गहरे संबंधों की एक झलक थी यह एक ऐसा अनुभव था जिसने ना केवल मुझे बल्कि मेरे बेटे को भी एक नई सोच और जिम्मेदारी सिखाई जब मैंने अपनी कहानी को आप सभी के साथ साझा किया तो मुझे उम्मीद थी कि आप इसे पसंद करेंगे और इससे कुछ सीखेंगे यदि आप इस तरह की कहानियों को पसंद करते हैं और आगे भी सुनना चाहते हैं सब्सक्राइब करें