खुद से जीतने वालों को मेरा सलाम और प्रणाम मैंने डेढ़ साल के अंदर कॉलेज छोड़ दिया और एक कंपनी में जॉब करने लगा फिर मेरी मुलाकात एक बहुत सुंदर लड़की से हुई जल्द ही मैं उससे शादी के सपने देखने लगा लेकिन जीवन का कठिन सच मेरा इंतजार कर रहा था कठिन सच यह था कि मैं बड़े सपने तो पूरे करना चाहता था मैं मेहनत भी कर रहा था लेकिन मुझे पता नहीं था कि मैं जीवन को सफल कैसे बनाऊंगा चिमर कहते हैं मैं कॉलेज में कुछ खास नहीं सीख रहा था जो मुझे जीवन में मदद
कर सके मैं उस समय बात करने में काफी तेज था इसलिए कॉलेज के दौरान ही मुझे एक बड़े ऑफिस में जॉब मिल गई 21 साल की उम्र में मैं कॉलेज छोड़कर काम करने लगा जॉब करते कुछ ही समय हुआ था कि मुझे एक बहुत सुंदर लड़की मिली मेरी उस से दोस्ती हो गई फिर कुछ ही दिनों में मैंने उसे शादी के लिए मना लिया चिमर कहते हैं मैं शादी के समय 22 साल का था शुरू में सब ठीक था मैं अपनी पत्नी से बड़े-बड़े वादे करता रहा कि मैं सफल आदमी बनूंगा हम बहुत खुशहाल जिंदगी
जिएंगे लेकिन शादी के 3 साल बाद भी मैं ज्यादा पैसे नहीं कमा रहा था चिमर कहते हैं मुझे मेहनत करने में दिक्कत नहीं थी मैं ऑफिस में सबसे पहले आता और बहुत अच्छी तरह काम करता लेकिन दिन रात मेहनत करने के बावजूद घर के खर्चे निकालना मुश्किल हो गया महीना खत्म होने से पहले सैलरी खत्म हो जाती जिन दोस्त और रिश्तेदारों से कर्जा लिया वह मुझ पर ताने कसने लगे मुझे ऐसे समय में कुछ भी समझ नहीं आ रहा था मैं हर रात सोचता कि मैं छोटे से गांव से आया हूं खेतों में पला बड़ा
हूं मैंने छोटी सी नौकरी के लिए पढ़ाई छोड़ दी लेकिन अब मेरे पास पैसे नहीं थे ना मैं बिजनेस कर सकता और ना ही कॉलेज की पढ़ाई लेकिन मैं हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा रहा और कुछ ना कुछ कोशिश करता रहा शायद इसी कारण किस्मत ने मेरा साथ दिया और मेरी मुलाकात हुई मिस्टर अर्ल शोफ से उन्होंने मुझे पर्सनल असिस्टेंट का जॉब दिया मिस्टर शोफ कई सारे बिजनेस तो चलाते ही थे साथ में वे एक अच्छे इंसान थे वह मेरे काम और मेहनत से बहुत खुश हुए उन्होंने कुछ ही समय में सक्सेस के प्रति
मेरी सोच पूरी तरह बदल दी कैसे एक दिन मिस्टर शोफ ने मुझसे आश्चर्य से पूछा चिम तुम अभी तक सफल क्यों नहीं हुए तुम्हारी जेब में पैसे नहीं है ना बैंक में बैलेंस है ना ही तुम अपनी निजी जिंदगी से खुश हो जिमर कहते हैं मैंने एक सांस में उन्हें सारी वजह बता दी कि मेरी पढ़ाई अधूरी रह गई रिश्तेदार मुझे सपोर्ट नहीं करते मार्केट में युवाओं के लिए यह अच्छे मौके नहीं है मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि मैं बिजनेस शुरू कर सकूं जब मैंने शिकायतों की लिस्ट खत्म की तो उन्होंने कहा तुम्हारी
लिस्ट में एक दिक्कत है इसमें तुम्हारा नाम तो है ही नहीं जिम अवाक रह गए फिर मिस्टर शोफ ने पहली सीख दी सीख नंबर एक तुम्हारे साथ क्या होता है यह तुम्हारे जीवन की क्वालिटी और क्वांटिटी निर्धारित नहीं करता तुम्हारा रिएक्शन तुम्हारे जीवन की क्वालिटी और क्वांटिटी तय करता है जिम कहते हैं मैंने दोबारा कारणों की लिस्ट बनाई और उस पर वजह लिखी मैं दूसरी बात उन्होंने बताई सक्सेस इ समथिंग यू अट्रैक्ट बाय द पर्सन यू बिकम सफलता वह है जो आप अपने व्यक्तित्व से आकर्षित करते हो मिस्टर शोफ ने कहा जितना तुम अट्रैक्टिव होते
जाओगे उतनी बड़ी सफलता तुम्हें खुद मिलती जाएगी सीख नंबर तीन इंसान अपना एटीट्यूड टेंपरामेंट यानी इमोशंस और माइंडसेट बदलकर अट्रैक्टिव बनता है मैंने पूछा हम अपनी सोच इमोशंस और बर्ताव कैसे बदले मिस्टर शोफ ने कहा सीख नंबर चार खुद को बेहतर करने के लिए अब एवरेज एक्साइटमेंट और इंटेंसिटी पैदा करो सामान्य तौर पर हम खुद को बेहतर करने या गलती ठीक करने को सजा समझते हैं अरे यार यह काम भी करना पड़ेगा इसकी जगह अपनी मेहनत में एक्साइटमेंट और इंटेंसिटी लेकर आओ खुद से कहो वाओ आज मैं यह काम दोबारा सीखने जा रहा हूं मेरे
पास बेहतर होने का नया मौका है ऐसा करने से एटीट्यूड और माइंडसेट में अंदर से बदलाव आएगा सीख नंबर पांच अगर तुम बदलो तो वह शक्ति जिससे सब पैदा हो रहा है वो तुम्हारे लिए काम करेगी इसलिए प्रॉब्लम से ज्यादा खुद पर काम करो जिम्र कहते हैं मुझे समझ आया कि परेशानियां फेस करते-करते मैं तो प्रॉब्लम ओरिएंटेड हो गया हूं यानी मैं लगातार प्रॉब्लम्स पर फोकस कर रहा हूं मैं परेशान होने में कीमती मेंटल एनर्जी वेस्ट कर रहा हूं मैं भविष्य में भी कुछ नया नहीं करना चाहता बस किसी तरह प्रॉब्लम से बचना चाहता हूं
जब मैं सेल्फ ओरिएंटेड हुआ तब मैं प्रॉब्लम्स की चिंता छोड़कर खुद को बेहतर बनाने लगा जरूरी स्किल सीखने लगा तब मुझे समझ आया कि सफल होने के लिए मैं बहुत कुछ सीख सकता हूं लेकिन खुद पर काम करना काफी कठिन है सीख नंबर छह क्योंकि अधिकतर लोग उन चीजों में पीएचडी कर लेते हैं जिनका वे कुछ नहीं कर सकते वे पॉलिटिक्स बॉलीवुड क्रिकेट के बारे में गहरी नॉलेज रखते हैं लेकिन इस नॉलेज से उनकी जिंदगी बेहतर नहीं होती स्टोक्स कहते हैं कि इंसान की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह अपने खाली
समय का कैसे इस्तेमाल करता है अगर हम खुद को बेहतर करना चाहते हैं तो सस्ते मजे को प्रायोरिटी नहीं दे सकते खाली समय में हमें खुद को बेहतर करना होगा जिम कहते हैं कि मैंने 25 साल की उम्र से खुद पर काम करना शुरू कर दिया मुझे समझ आया कि खुद को बेहतर करने के लिए हमें जीवन के चार मौसमों में यह चार चीजें करनी चाहिए पहला बुरे समय का सामना सर्दियों की तरह करो सर्दी वो समय है जब कुछ भी आपका साथ नहीं देता हर तरफ से निराशा ही आपके हाथ लगती है दिमाग पर
भी चिंता हावी रहती है आप कैलेंडर से दिसंबर और जनवरी के पेज फाड़कर सर्दी से पीछा नहीं छुड़ा सकते आपको इन दिनों का सामना करना ही पड़ता है ऐसे कठिन दिनों का सामना करना भी जरूरी है पहले मैं सर्दियों में सोचता था कि काश गर्मी होती आप समय आसान होने की उम्मीद मत करो बल्कि खुद को बेहतर बनाओ चैलेंज ना होने की उम्मीद मत करो बल्कि खुद को इतना बुद्धिमान बनाओ कि आप 5 साल आगे देख पाओ खुद को इतना समझदार और धैर्यवान बनाओ कि मन आपको परेशान ना कर पाए दूसरा मौसम है वसंत अच्छे
समय का फायदा उठाओ जब आपका समय अच्छा चलता है तो सब कुछ आसानी से होता है कई मौके तो खुद आकर आपका दरवाजा खटखटा हैं ऐसे समय चार गुना मेहनत करो लेकिन सामान्यता लोग उल्टा करते हैं कठिन समय में कमर तोड़ मेहनत करते हैं और अच्छे समय में आराम करते हैं लेकिन समझदार लोग अच्छे समय का मूल्य समझते हैं इस समय में नए काम शुरू करते हैं और वसंत ऋतु में नई फसल के बीज लगाते हैं आपको भी इस समय यही करना है आपको अच्छी आदतों और नए काम के गार्डन तैयार करना है क्योंकि इस
समय आपकी एनर्जी शरीर मन सब अच्छे से काम कर रहे हैं अगला मौसम गर्मियों के दिन गार्ड योर ग्रोथ आपने गार्डन तैयार कर लिया अच्छी हैबिट्स और नए काम शुरू कर दिए लेकिन अब आपके पास इसे संभालने की जिम्मेदारी है क्योंकि जिस तरह फसल से कीड़े और खर पतवार की लगातार देखभाल करनी पड़ती है उसी प्रकार आपको डिसिप्लिन बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करना पड़ता है हमेशा अलर्ट रहना पड़ है अगला मौसम है शरद ऋतु यानी फसल काटने का समय हो सकता है कि परिणाम आपके हिसाब से ना आए फिर भी आपको खुशी से
सब कुछ स्वीकार करना है चिमन कहते हैं कि जिस दिन आप हर चीज की जिम्मेदारी लेना सीख जाते हो उसी दिन आप बचपन से निकलकर समझदार व्यक्ति बन जाते हो और इस तरह आप जीवन में लगातार ग्रोथ करते हो अगले 90 दिन आप खुद में में बदलाव लेकर आएंगे तो उसका रिजल्ट जरूर मिलेगा आप छोटी से छोटी चीज शुरू करके देख सकते हो जैसे आप किताब पढ़ने का छोटा सा चैलेंज ले सकते हो हर दिन 30 मिनट उन बातों पर किताब पढ़ सकते हो जो बातें आप जीवन में उतारना चाहते हो और उनमें से कुछ
अप्लाई करना शुरू कर सकते हो ऐसा करने से कुछ ही दिनों में आपके जीवन में बदलाव आने लगेगा और इस चैलेंज से स्पष्ट हो जाएगा कि खुद पर काम करने से जीवन बद ता है दोस्तों जो प्रेशर और स्ट्रेस में कंट्रोल नहीं खोते वह अपनी शक्ति का सही उपयोग कर पाते हैं इसलिए सेल्फ कंट्रोल विकसित करने के लिए अगला वीडियो देखिए या बात के लिए सेव कर लीजिए और याद रखिए आपके समय से कोई वीडियो कोई ऐप कोई न्यूज कीमती नहीं है मैं काम के किस्से लाता रहूंगा हिम्मत हरकत होशियारी हम जीतेंगे i