मैं तेरे पधार दिल की बात शायरी में लिख दूं मैं सुना तो खर्च पलकों चौथी डायरी में आज है जब भारत पर 4 साल एक अब यह बीते कुछ बिना पता चला सारी गलती मेरी असली चल दिया मैं मां निकट तेरी मेरी लव स्टोरी दिल मे ज़िंदा है कभी कभी तो सपनों में यह दिल भी तुमसे मिलता है असर हुआ के सब हुआ नजर से जब नजरे मिली स्कूल का वो दिन तेरे इश्क की खबर मिली पहली बार जब मिला तो स्कूलों में लेख था न पकड़े में खड़ा और प्रिंसिपल टारगेट था पहली बार देखते
ही प्यार हो गया था मुझको बज रहे थे पौने दो समय था लंच ब्रेक का समय है लेकिन इसकी पैरों के नीचे से मेरे इस तरह ऐसा लग रहा था दिन में चांद आया हो नजर कुछ को तू पसंद आती हजार चलते चलते युक्ता श्याम तेरी बातें सुनते-सुनते हैं दिल पर कुछ असर किया था तेरी उस अब्बास ने में निकला से जोड़ घूमता था तेरी क्लास में तुम मुस्कुरा कर देखती थी जितनी भी दबा मुझे विराट के बातें करती थी बिना किसी जब बहन के ट्यूब में आती तो मैं बैठे-बैठे भूल जाता खाली खाली दिल
लिए रहता कि निशा लड्डू बचाता दिल में मेरे क्या प्रकाशित से मैं यह पूछ पाता दिल की सारी बातें तेरे सामने मैं भूल जाता हार्टबीट तेरी मेरी सांसें थम जाती थी उड़ गए थे घोषित कि कल के पास व्यक्ति थी कि बोलती ना कुछ तो बस पहेलियां बनाती थी तेरे दिल की बात तेरी सहेलियां बतातीं थी कि आ गया प्यार में चपेट में सूर्य के लिए सिर्फ इतना नासमझ साला बेवकूफ दी लिए मैं तो खुद ने तेरी बातें भी बना बनाकर तथा जिम्मेदार थी आंखों में जगह-जगह संग्रह तथा आसपास के विभिन्न अचानक दोनों कितने दूर
थे बेवजह ही दोनों एक दूसरे को भूनते मुंह फुला के बैठ जाते छोटी-छोटी बात पर हम बेवजह ही मान जाते बेवजह ही रोते आंखें भर गई है मेरी तिल से पर सही हो मैं मुड़कर देख ले जरा सा आज भी यही हूं मैं ऐसे भूल जाती है तू प्यार वाले लोगों को ऐसा लग रहा है तुझको याद भी नहीं हूं मैं चादर स्कूल बस में टेक्स्ट साथ में याद है जब चैट करते थे हम माधुरी प्राथमिक इतने नासमझ तूने समझा ही नहीं तक कि मैं धीरे-धीरे डूबता ही जा रहा था प्यार में याद है जब
छोटी-छोटी बातों पर तू लड़ती थी है याद है जब बारिश को देखकर तू डरती थी अपनी विरासत छोड़कर मैं विल नक्स जाता था वह वक्त था कुछ और जब तो प्यार मुझसे करती थी कोई दूसरा नहीं था प्यार में जब हम दूध थे कैसे भूल जाऊं वह गुजारे हम ने पर जूते चार साल भी तूने मुड़ कर भी न देखा अब हालात अपने वह नहीं हालात अब निकल जाते न जाने क्यों दूर तू नाराज़ मेरी बात से जिंदगी है बाकी चल गुस्सा करते हैं साथ में पहले भी तो कितनों को दिल दे कर देखो पर
रास तक तेरे जैसी मिली न तेरे बाद में वहां सदैव थी बस एक दफा मेरे जख्मों पर मरहम सा लगे मैं प्यार में इतना डूब गया कि हर इक ज़ख़्म विक्रम सा लगे हैं