जंग में वही जीतता है जिसमें हौसले भर-भर के हो साथ ही हथियारों या लड़ने के तरीकों में आधुनिकता भी हो इतिहास गवाह है कि पैदल सेना को घुर सवारों ने हराया धनुष बाण तलवार भालों को बंदूक ने हराया बंदूक को मिसाइल ने हराया जंग चाहे जमीन पर हो गहरे पानी में हो या हजारों फीट ऊपर आसमान के सीने में जिसके पास बेहतर तकनीक होगी बेहतर हथियार होगा वही बनेगा सिकंदर दोस्तों ऐसी ही नई तकनीक दुनिया ने देखी फाइटर प्लेंस के रूप में जब से मॉडर्न वॉर फेयर शुरू हुए हैं तब से एयरफोर्स ने एक एक्स फैक्टर के तौर पर काम किया है फर्स्ट एंड सेकंड वर्ल्ड वॉर में एयरफोर्स ने ऐसा करके भी दिखाया भारत को भी कारगिल वॉर जितवा में एयरफोर्स की बड़ी भूमिका थी लेकिन आज ऐसा क्यों कहा जा रहा है कि भारत को कई युद्ध जितवा वाली इंडियन एयरफोर्स अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है आखिर क्यों भारत अपने फिफ्थ जन फाइटर प्लेंस को डेवलप करने में पीछे रह गया है आखिर क्यों तेजस अपने प्रोडक्शन में पीछे चल रहा है क्या यह लेट लतीफी भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए कभी चुनौती भी बन सकती है क्या आज अगर भारत चीन में हवाई युद्ध हो जाए तो भारत जीत पाएगा चीन हमसे कितना आगे है क्या पाकिस्तान भी आने वाले सालों में हमसे बेहतर फाइटर प्लेंस का इस्तेमाल करने वाला है भारत सरकार ने इंडियन एयरफोर्स की ताकत बढ़ाने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी कौन सी डिफेंस डील की है आज इन सब एस्पेक्ट्स पर बात करेंगे आप देख रहे हैं फो डायमेंशन मेरा नाम है अमृत [संगीत] अगर आसमान में कोई सबसे घातक हथियार है तो वह है फिफ्थ जन फाइटर प्लेंस आसमान का एपेक्स प्रेडेटर बिजनेस इंसाइडर के मुताबिक केवल ऐसे प्लेंस को फिफ्थ जन फाइटर प्लेंस कहा जा सकता है जिनमें मेनली स्टेल्थ कैपेबिलिटी हो और जो अपने आफ्टर बर्नर को एक्टिव किए बिना सुपरसोनिक गति से उड़ान भर सक स्टेल्थ कैपेबिलिटी मतलब रडार में ना पकड़े जाने की खूबी और आफ्टर बर्नर यानी इंजन के अलावा एक और सहायक बर्नर जिसकी हेल्प से एक्स्ट्रा फ्यूल बर्न किया जाता है ताकि और ज्यादा स्पीड मिल सके फिफ्थ जन फाइटर प्लेंस में बाकी खूबियां तो होती ही हैं जैसे सेल्फ डिफेंस रडार जैमिंग कैपेबिलिटी इंटीग्रेटेड एविनिक्स सेंसर फ्यूजन एटस यह तकनीक इतनी जटिल हैं कि अभी सारे देश इसे हासिल नहीं कर पाए हैं केवल कुछ चुनिंदा देश हैं जिन्होंने यह करना मा करके दिखाया है दोस्तों अमेरिका का f22 रेप्टर दुनिया का पहला फिफ्थ जन फाइटर प्लेन है जो फिलहाल ऑपरेशनल तो है लेकिन इसका प्रोडक्शन नहीं किया जा रहा बिजनेस इंसाइडर के मुताबिक लास्ट f22 रैपटर का प्रोडक्शन लॉकहीड मार्टिन ने दिसंबर 2011 में किया गया था सिल fly. com के अनुसार दुनिया में फिलहाल पांचवीं पीढ़ी के तीन फाइटर प्लेन प्रोडक्शन में है यह है चीन का चेंगदू j20 रूस का सुखोई ए57 और अमेरका का लॉक हीड मार्टिन f35 लाइटनिंग क्या आप इस बात को जानने के लिए क्यूरियस हैं कि अगर आसमान में तीनों फिफ्थ जन फाइटर प्लेंस मौजूद हो और मुकाबला हो तो कौन जीत सकता है अगर ऐसा कोई काल्पनिक मुकाबला होगा तो उसमें नो डाउट f35 लाइटनिंग बाजी मार सकता है लॉक हिड मार्टिन ने f35 को दुनिया का सबसे घातक टिकाऊ और कनेक्टेड फाइटर प्लेन बताया है f35 एक फुर्तीला मल्टी रोल उच्च प्रदर्शन वाला 9g कैपेबल मल्टीपर्पज फाइटर प्लेन है जिसमें हाई क्लास स्टेल्थ कैपेबिलिटी सेंसर फ्यूजन और सिचुएशन अवेयरनेस जैसे तामझाम लगे हुए हैं यानी आज की जितनी भी एडवांस से एडवांस तकनीक हैं वो इसी में यूज़ हो रही हैं f35 करेंटली अमेरिका के f16 और a10 थंडर बोल्ट 2 की जगह ले रहे हैं अमेरिका फिफ्थ जन फाइटर प्लेंस को लेकर इतना सीरियस है कि यह देश आने वाले दशकों में लगभग 2500 f35 खरीदने वाला है जिसकी कॉस्ट लगभग 1 द 7 ट्रिलियन डॉलर बैठेगी सोचिए 1. 7 ट्रिलियन डॉलर यह एक बहुत बड़ी रकम है यहां तक कि कई देशों की जीडीपी से भी ज्यादा वहीं लॉकहीड से उम्मीद है कि f35 2070 तक सर्विस में बने रहेंगे दुनिया के दूसरे फिफ्थ जन फाइटर प्लेंस की बात करें तो लिस्ट में नाम है रूस के ए57 का बिजनेस इंसाइडर के अनुसार सुखोई ए57 रूस का पहला फिफ्थ जन फाइटर प्लेन है नाट ने इसको निकनेम दिया किया है फेलन यानी क्रिमिनल या ऑफेंडर या हत्यारा इसका काम बिल्कुल अपने नाम के अनुसार है लेकिन ऐसा अनुमान है कि रूस के पास मात्र 10 एयू 57 जेट्स हैं हालांकि रशियन मीडिया ने बताया है कि 2024 तक 22 और 208 तक ऐसे 76 प्लेंस बनाने की योजना है यह प्लेन पहली बार 2018 में सीरिया में युद्ध में शामिल हुआ था इसके अलावा रूसी अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि एयू 57 ने यूक्रेन युद्ध में भी लड़ाई लड़ी है हालांकि विशेषज्ञ इसकी कई कमियों की तरफ भी इशारा करते हैं जैसे यह कहा जाता है कि यूक्रेन युद्ध में एय 57 जट के उपयोग की कमी यह बताती है कि इस खतरनाक जेट की सो कॉल्ड स्टेल्थ कैपेबिलिटी अप टू द मार्क नहीं है यानी अभी इसमें कई कमियां है बहरहाल एयू 57 के अलावा दुनिया में एक और फिफ्थ जन फाइटर प्लेन है और यह है चीन का चेंडू j20 बिजनेस इंसाइडर के अनुसार चेंगदू j20 ने 2011 में पहली बार उड़ान भरने के बाद 2017 में सर्विस देनी शुरू की थी यानी रूस से पहले ही चीन ने इसे डेवलप कर लिया था सिंपल फ्लाइंग के अनुसार चीन का चेंगदू j20 तकनीकी रूप से पांचवी पीढ़ी का फाइटर प्लेन है लेकिन अमेरिका इसे लेकर ज्यादा चिंतित नहीं ऐसा माना जाता है कि चेंगदू j20 अमेरिकी फाइटर प्लेंस के मुकाबले प्रभावशाली प्लेन नहीं है कई अमेरिकन डिफेंस एक्सपर्ट्स यह मानते हैं कि चेंडू जे2 ने f22 और f35 दोनों की तकनीक की नकल करने की कोशिश की है बिजनेस इनसाइडर के अनुस सार ऐसा माना जाता है कि चीन के पास 200 से अधिक जे2 हैं इसके अलावा तुर्की अपनी पांचवीं पीढ़ी का फाइटर प्लेन विकसित कर रहा है जिसे कान के नाम से जाना जाता है इस प्रोजेक्ट में टर्किश एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और ब्रिटेन की बीए सिस्टम्स आपस में सहयोग भी कर रही हैं वहीं साउथ कोरिया का पांचवीं पीढ़ी के फाइटर प्लेन का नाम है केएफ 21 बोरा में अब आप यह सोच रहे होंगे कि भाई भारत तो इस लिस्ट में है ही नहीं है कहां नभ स् प्रशम दीप्तम यानी गौरव के साथ आकाश को छूना यह भारतीय वायु सेना का आदर्श वाक्य है इसको गीता के 11वें अध्याय से लिया गया है यह कृष्ण जी ने तब कहा था जब कुरुक्षेत्र में भगवान कृष्ण अर्जुन को अपना विकराल दिव्य रूप दिखा रहे थे और भगवान का विकराल रूप आकाश तक पहुंच रहा था जिससे अर्जुन के मन में डर पैदा हो रहा था और इसी संस्कृत की लाइन को इंडियन एयरफोर्स जस्टिफाई भी करती है क्योंकि भारत के पास फाइटर जेट्स का एक बड़ा जखीरा है जिससे कोई भी दुश्मन आसानी से डर जाएगा भारत के पास 40 मिग 21 115 जगार 47 मिराज 2000 60 मिग 29 259 सुखोई 30 एमके व 33 तेजस 36 डसॉल्ट रफाल जैसे खतरनाक जेट्स हैं हालांकि इन सब में सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है मिग 21 मिग 21 1950 के दशक में तत्कालीन यूएसएसआर द्वारा डिजाइन किए गए सुपरसोनिक जेट फाइटर और इंटरसेप्टर प्लेन है यह ह्यूमन हिस्ट्री में अब तक का सबसे एक्सटेंसिवली यूज्ड फाइटर प्लेन है जिसकी 11000 से अधिक यूनिट्स तैयार की गई और 60 से अधिक देशों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है इंडियन एयरफोर्स ने भी 1933 में अपना पहला मिग 21 हासिल किया था कई युद्धों और संघर्षों में इसने हिस्सा लिया है लेकिन समय के साथ यह पुराना होता गया और इसमें कई तकनीकी खामियां भी आ गई इसमें अक्सर हादसे होते रहते हैं आपको पता है इनमें पाल की जाने भी गई हैं इस कारण से इसे फ्लाइंग कॉफिन भी कहा गया इसलिए इंडियन एयरफोर्स की योजना 2024 25 तक मिग 21 को स्टेप वाइज हटाने की है अब जब यह हटेंगे तो इनकी जगह कोई तो लेगा यहीं आता है एलसीए एलसीए का मतलब है लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट इन्हें पुराने मिग 21 फाइटर प्लेंस को रिप्लेस करने के लिए डिजाइन किया गया है फॉर योर इंफॉर्मेशन कोटा हरिनारायण एलसीए के प्रोग्राम डायरेक्टर और मुख्य डिजाइनर थे एलसीए को डीआरडीओ के एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी एडीए द्वारा विकसित किया गया है और हिंदुस्तान एरोनॉटिक लिमिटेड एचएएल द्वारा इसे बनाया जाता है फिर 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने इस एलसीए को तेजस नाम दिया यह अपनी श्रेणी का सबसे हलका सबसे छोटा टेललेस मल्टीरोल सुपरसोनिक फाइटर प्लेन है हवा से हवा हवा से सतह सटीक गाइडेड मिसाइल को ले जाने में सक्षम हवा से हवा में ईंधन भरने की क्षमता 4000 किग्रा की अधिकतम पेल लोड क्षमता 1.
8 मैक की अधिकतम गति और 3000 किलोमीटर की रेंज अपने आप में यह इंडियन इंजीनियरिंग की मिसाल है लेकिन दोस्तों आज के इस एडवांस तकनीकी युग में तेजस भी काफी नहीं भारत को इससे भी घातक फाइटर प्लेनस चाहिए भारत को अपने लड़ाकू जहाजों के तरकश में चाहिए एक ब्रह्मास्त्र भारत को चाहिए फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट ब्रह्मोस प्रोजेक्ट की सफलता के बाद रूस और भारत 2007 की शुरुआत में फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट एफजीएफए कार्यक्रम के जॉइंट डेवलपमेंट करने को तैयार हुए थे लेकिन यह एफजीएफए सुखोई एयू 57 पर बेस्ड था यानी एयू 57 में छोटे-बड़े 33 मॉडिफिकेशन करके एफजीएफए को बनाया जाना था 2010 में यह तय हुआ कि इसी जॉइंट डेवलपमेंट प्रोग्राम से भारतीय वायुसेना को 166 सिंगल सीट वाले और 48 डबल सीट वाले एफजीएफए मिलेंगे लेकिन बाद में बहुत से रीजन के कारण परियोजना में देरी हुई यहां तक कि परियोजना की शर्तें भी बदलनी पड़ी फिर बाद में 20 अप्रैल 2018 को खबर आई कि भारत ने इस परियोजना को छोड़ दिया है कारण बताया गया मेंटेनेंस और अदर एस्पेक्ट्स की बहुत ही ज्यादा हाई कॉस्ट अब परियोजना बंद हो गई तो एयरक्राफ्ट बनाना तो पॉसिबल था ही नहीं अब भारत के सामने रास्ता था फिफ्थ जन फाइटर एयरक्राफ्ट को आयात करने का इंपोर्ट करने का लेकिन अक्टूबर 2019 में भारतीय वायु से सेना के चीफ ऑफ एयर स्टाफ आर के एस भदौरिया ने साफ कर दिया कि देश एयू 57 जैसे फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट का आयात नहीं करेगा और इसके बजाय खुद ही फिफ्थ जेन फाइटर प्लेंस को डेवलप करेगा और इसलिए एएमसीए परियोजना लाई गई एएमसीए यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट एएमसीए यानी भारत के लड़ाकू विमानों के तरकश का ब्रह्मास्त्र इस प्रोजेक्ट की इनिशियल डेवलपमेंट कॉस्ट लगभग 000 करोड़ आकी गई है योजना के तहत एएमसीए के पांच प्रोटोटाइप एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी और हिंदुस्तान एरोनोट लिमिटेड द्वारा प्राइवेट प्लेयर्स के सहयोग से संयुक्त रूप से बनाए जाएंगे यानी डिजाइन फर्म के रूप में एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी शामिल है और इसका निर्माण हिंदुस्तान एरोनोट लिमिटेड एचएएल द्वारा किया जाएगा फिलहाल भारतीय रक्षा मंत्रालय कथित तौर पर एएमसीए परियोजना के डिजाइन और डेवलपमेंट में प्राइवेट सेक्टर को शामिल करने के लिए एक रणनीति बना रहा है ताकि इस परियोजना को तेजी से पूरा किया जा सके द हिंदू के एक आर्टिकल के मुताबिक एएमसीए का डिजाइन तैयार है और प्रोटोटाइप 2028 29 तक तैयार होने की उम्मीद है इसके बाद प्रोडक्शन 2032 33 से शुरू होने की उम्मीद है लक्ष्य यह है कि इसे परियोजना की मंजूरी से एक दशक बाद यानी 2034 में सर्विस में शामिल करने के लिए तैयार किया जाए अब सवाल यह आता है कि क्या एएमसीए के लिए इतनी देरी सही है और भारत को एएमसीए की इतनी जरूरत क्यों है देखिए भारत के अगल-बगल दो प्यारे-प्यारे पड़ोसी देश हैं चीन और पाकिस्तान यह इतने प्यारे हैं कि भारत के दोनों दिशाओं में फैले इलाकों पर कब्जा करना चाहते हैं जाहिर है ऐसे शरारती पड़ोसी देशों के खिलाफ भारत को अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत है अब समस्या यह है कि चीन ने फिलहाल 200 से अधिक फिफ्थ जनरेशन j20 फाइटर प्लेंस को ऑलरेडी तैनात कर दिया है एक अनुमान यह लगाया जा रहा है कि जब तक भारत अपना पहला फिफ्थ जन फाइटर प्लेन एएमसीए मैदान में उतारे तब तक तो चीन के पास कम से कम 1000 j20 फाइटर प्लेन हो जाएंगे सोचिए भारत इतना पीछे रह गया है पर यह तो कुछ भी नहीं चीन बहुत तेजी से छठी पीढ़ी के फाइटर जेट तकनीक विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है फरवरी 2023 में एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना एवीआरसी को शेयर किया इसके अलावा चीनी विश्लेषकों ने स्पष्ट रूप सेहा कहा कि चीन j20 तक ही सीमित नहीं रहेगा क्योंकि अमेरिका सहित अन्य देशों ने भी छठी पीढ़ी के फाइटर जेट विकसित करना शुरू कर दिया है इससे भारत मुश्किल में पड़ सकता है क्योंकि ना केवल भारत फिफ्थ जनरेशन के फाइटर प्लेन तैयार करने से कोसो दूर है बल्कि सीमा पार उसका विरोधी कहीं अधिक एडवांस तकनीक को विकसित कर रहा है यहां तक कि पाकिस्तान ने भी j31 फिथ जनरेशन एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए चीन से संपर्क किया है और उसे यह प्लेन 2029 की शुरुआत में मिल सकता सकते हैं यानी भारत का पहला एएमसीए आने से बहुत पहले चीन से j31 की खरीददारी पाकिस्तानी एयरफोर्स के लिए एक बड़ा अपग्रेड होगा जो पाकिस्तान के लड़ाकू बेड़े को आधुनिक बनाएगा और हवाई युद्ध क्षमताओं को बढ़ा देगा j31 पाकिस्तान को इस क्षेत्र में निसंदेह रणनीतिक लाभ देगा और यह बात भारत की सुरक्षा के लिए अच्छी नहीं है खासकर तब जब बीजिंग भी खुद बहुत अग्रेसिव रवैया अपना रहा है लेकिन फिफ्थ जनरेशन एयरक्राफ्ट की समस्या तो बाद की है अभी फिलहाल इंडि एयरफोर्स में कुछ और भी समस्याएं हैं इंडियन एयरफोर्स की परेशानी थमने का नाम नहीं ले रही देखिए इंडियन एयरफोर्स की स्वीकृत स्क्वाड्रन की संख्या है 42 स्क्वाड्रन मतलब एक छोटी टुकड़ी जिसमें नॉर्मली 18 लड़ाकू विमान होते हैं लेकिन मौजूदा वक्त में इंडियन एयरफोर्स केवल 31 स्क्वाड्रन से काम चला रही है इतना ही नहीं वायुसेना के फाइटर प्लेनों की संख्या भी लगातार घटती जा रही है क्यों हो रहा है ऐसा क्योंकि फाइटर प्लेन पुराने होने के चलते या तकनीकी खराबी से या किसी अन्य कारण से लगातार दुर्घटना ग्रस्त होते रहे हैं पायलट की भी जान चली जाती है इसलिए एयरफोर्स अब पुराने हो चुके मिग 21 फाइटर प्लेनों को चरणबद्ध तरीके से अपने बेड़े से बाहर कर रही है इसे समझिए कि बेशक भारत अपनी एयरफोर्स को मजबूत करने के लिए पुराने प्लेनों को हटा रही है लेकिन नए फाइटर प्लेंस और अन्य उपकरणों की सप्लाई में टाइम तो लगता ही है मैगी तो है नहीं कि 2 मिनट में तैयार हो जाए आपको बताया गया कि मिग 21 की जगह पर तेजस एलसीए मार्क 1a को वायुसेना के बेड़े में शामिल किया जाना है लेकिन दिक्कत यह है कि हिंदुस्तान एरोनॉटिक लिमिटेड हर साल 16 तेजस फाइटर प्लेनों के प्रोडक्शन का टारगेट भी पूरा नहीं कर पा रही लेकिन इसमें एचएएल चाहकर कुछ कर भी नहीं सकती वो इसलिए क्योंकि यूक्रेन रूस वॉर के चलते इजराइल रूस डेनमार्क जैसे देशों के मैन्युफैक्चरर से इंपॉर्टेंट पार्ट ही लेट रिसीव हो रहे हैं जैसे यूक्रेन रूस वॉर के बाद डेनमार्क ने तेजस में लगने वाले इंजन चार्ज एमप्लीफायर्स के निर्यात पर रोक लगा दिए इसके अलावा तेजस mk1a फाइटर प्लेनों में जिन 404 इंजन का उपयोग किया जाता है वह इंजन जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी बनाती है और जी को भी ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही रुकावट से जूझना पड़ रहा है जी ने साफ किया था कि वह सितंबर 20224 के अंत तक 16 इंजनों की सप्लाई नहीं कर पाएगा अगर वह इस समय तक दो इंजनों की भी डिलीवरी कर देता तो यह भी बहुत बड़ी बात होती अब एक तरफ मग 21 फाइटर प्लेनों को हटा ना और दूसरी तरफ एलसीए तेजस के प्रोडक्शन में देरी एमसीए एक दशक बाद मिलेगा तो अब क्या किया जाए अब जो है उसी से काम चलाना पड़ेगा इसी मजबूरी के चलते इंडियन एयरफोर्स को सुखोई 30 एम केव जैसे फाइटर प्लेंस को यूज करना पड़ रहा है और इससे कहीं ना कहीं सुखोई 30 एम केव फाइटर प्लेंस की मशीनरी भी प्रभावित हो रही है सीधी सी बात है जो ज्यादा चलेगा वोह ज्यादा घिसे घिसे का तो इन्हें भी अपग्रेड करने की जरूरत होगी यह है एक नई चुनौती कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि भारत फिफ्थ जैन फाइटर प्लेन को डेवलप करने में पीछे है देश फाइटर प्लेंस की कमी का सामना कर रहा है और मौजूदा फाइटर प्लेंस को अपग्रेड करने की भी एक चुनौती सामने है लेकिन भारत को इसका कोई ना कोई सलूशन तो चाहिए ही चाहिए देखिए फिलहाल भारत 500 से अधिक फाइटर प्लेन हासिल करने की महत्वाकांक्षी योजना रखता है और हाल ही में केंद्र सरकार ने 114 मल्टी रोल फाइटर प्लेन खरीदने का डिसीजन लिया है लेकिन खास बात यह है कि भारत केवल उसी सेलर से खरीद करेगा जो पूरा प्लेन बनाने के लिए भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग यूनिट खोले यानी भारत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी चाहता है और कंप्लीट प्रोडक्शन भी वो भी भारत में यह भारत सरकार का एक बहुत ही अच्छा मूव है ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि यह डील लगभग 20 बिलियन डॉलर की होगी इस डील को हाल के समय में दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस डील में से एक माना जा रहा है इस कांट्रैक्ट को हासिल करने की दौड़ में डसॉल्ट का राफेल बो का सुपर हरनेट ए1 एस एए बी का गिपिन लॉकहीड मार्टिन का f21 रूसी मिग 35 और यूरो फाइटर टाइफून शामिल हैं हालांकि राफेल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी ल्ट जो इस कांट्रैक्ट को हासिल करने की दौड़ में सबसे आगे है भारत में प्रोडक्शन के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए तैयार नहीं [संगीत] है इसके अलावा एक और खबर यह है कि अब हिंदुस्तान एरोनोट लिमिटेड के सहयोग से अमेरिकी कंपनी जी एरो स्पेस डिफेंस एंड सिस्टम्स भारत में ही फाइटर जेट इंजन बनाना शुरू करेगी इस मामले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली अमेरिका यात्रा के दौरान एक अहम समझौता किया गया था इस समझौते के अनुसार जी अपने f414 जट इंजन की 80 पर टेक्नोलॉजी को ट्रांसफर करेगा जो एलसीए तेजस एम के2 वेरिएंट में यूज होगी हाल ही में सुरक्षा मामलो की कैबिनेट कमेटी ने एक और बड़ा फैसला किया है दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की कमेटी ने 240 सुखोई 30 mk1 एयरक्राफ्ट के इंजन को खरीदने की मंजूरी दी है इस इंजन को एरो इंजन कहा जा रहा है यह 66000 करोड़ की डील है इन इंजनों की सप्लाई 1 साल बाद ही शुरू हो जाएगी और अगले 8 सालों के भीतर यह सभी इंजन भारत को मिल जाएंगे इन इंजनों में 54 पर कल्प र्जे स्वदेशी होंगे यह कल्प र्जे एच एल के कोरापुट कारखाने में बनेंगे इन इंजनों से अपग्रेड होने के बाद यह फाइटर जेट पहले से कई गुना घातक और एडवांस्ड हो जाएंगे मौजूदा वक्त में वायुसेना के पास 259 सुखोई विमान हैं और यह फाइटर प्लेन भारतीय वायुसेना के जेट विमानों का सबसे बड़ा बेड़ा है इन्हें अपग्रेड कर दिए जाने के बाद वायुसेना की एक बड़ी जरूरत पूरी हो जाएगी इतना ही नहीं इसके अलावा भी एक बड़ा अपग्रेडेशन होने वाला है दरअसल एचएएल सुखोई 30 एम केव में एक नया एडवांस्ड विरूपाक्ष एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैंड एरे एई एसए रडार लगाने वाला है यह रडार सुखोई 30 एम केव लड़ाकू विमानों की क्षमता को 1. 5 से 1.