उदयपुर के महल में अंधेरा गहराता जा रहा था महाराणा उदय सिंह बीमारी से जूझ रहे थे और महल के अंदर षड्यंत्र की बिसात बिच चुकी थी रानी भटियाणी अपने पुत्र जगमाल को गद्दी पर बैठाना चाहती थी दरबारियों के बीच खुसर पुसर थी क्या महाराणा प्रताप को न्याय मिलेगा रानी भटियानी ने राजा से अपने पक्ष में आदेश लिखवा लिया दस्तावेजों पर राजकीय मुहर लगते ही दरबार में हलचल मच गई सामंतों में आक्रोश था प्रताप ही असली उत्तराधिकारी थे लेकिन षड्यंत्र के चलते उन्हें दरकिनार किया जा रहा था प्रताप के समर्थक एकत्र हुए वीर सामंतों ने आवाज
उठाई प्रताप ही मे के योग्य उत्तराधिकारी हैं राजमहल में विद्रोह का स्वर गूंजा अंतः सामंतों के दबाव में जगमाल को हटाया गया और महाराणा प्रताप को गद्दी का वास्तविक हकदार घोषित किया गया लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत थी प्रताप को अब मुगलों और आंतरिक विरोधियों से लड़ना था यही संघर्ष उन्हें इतिहास में अमर कर गया आपको यह इतिहास कैसा लगा अपने विचार कमेंट में शेयर करें