एक अंधकारमय युग में जब धरती पर दानवों का राज था दारुक अपनी अद्वितीय शक्ति और शिव के वरदान के कारण अजय माना जाता था उसने अपनी पत्नी दारुका के साथ मिलकर समुद्र के बीचोंबीच दारुक वन का निर्माण किया जहां दानव आतंक मचाते थे गांव-गांव में भय का माहौल था और यज्ञ व पूजा पाठ बंद हो गए थे अंतः देवताओं ने भगवान शिव से सहायता की याचना की शिव ने शांत चित्त से पार्वती से कहा कि दारुक का विनाश केवल एक स्त्री द्वारा संभव है माता पार्वती ने उग्र भद्रकाली का रूप धारण किया जिसकी तेजस्वी आंखें
और तलवार से भरपूर शक्ति ने दानवों के दिलों में भय भर दिया द ने अपनी राक्षसी सेना के साथ भद्रकाली का सामना किया लेकिन उसकी वीरता के आगे वह टिक नहीं सका संघर्ष के चरम पर दारुक ने कहा तुम मुझे नहीं मार सकती मुझे शिव का वरदान प्राप्त है भद्रकाली मुस्कुराई और बोली वरदान में यह भी तय था कि अंत एक स्त्री के हाथों होगा तथा अपनी तलवार से दारुक का सिर विच्छेद कर दिया दारुक वन का अंधकार ंट गया और धर्म व न्याय की पुनः स्थापना हुई देवताओं और मनुष्यों ने भद्रकाली की विजय का
उत्सव मनाया शेयर योर थॉट्स इन द कमेंट बॉक्स