फब 2026 एक स्पेशल पोक्सो कोर्ट में बंदा डिस्ट्रिक्ट के राम भवन और दुर्गावती को डेथ सेंटेंस सुनाया गया जो कि इंडियन लीगल सिस्टम में सबसे ज्यादा एक्सट्रीम पनिशमेंट है। लगभग 10 सालों तक यूपी के बंदा डिस्ट्रिक्ट के अंदर यह दोनों लोग कुछ ऐसी चीजों को अंजाम दे रहे थे जिसकी वजह से इस केस के जजेस ने इस केस को रेस्ट ऑफ द रेयर केस डिक्लेअर करा था। असलियत में हो क्या रहा था? राम भवन अपनी वाइफ के साथ मिलके एक चाइल्ड ऑपरेशन चला रहा था। वो छोटे लड़कों को एक्सप्लइट कर रहे थे और उनकी वीडियोस
बना के डार्क वेब पे सेल कर रहे थे। राम भवन और उसकी वाइफ ने मिलके कम से कम 2 लाख वीडियोस बनाई थी और पता नहीं कितने ही विक्टिम्स को उन्होंने एक्सप्लइट करा था। तो यह कहानी शुरू होती है राम भवन से जो कि यूपी के नारायण टाउन में था। राम एक बहुत ही सिंपल सा दिखने वाला इंसान था। वो एकदम नॉर्मल कपड़े पहनता था और किसी भी 40-50 साल के आदमी की तरह वो बोल्ड था। लेकिन उसके साथ ही साथ राम काफी ज्यादा वेलकमिंग था। राम भवन प्रोफेशन से जूनियर इंजीनियर था इन द स्टेट
इरीगेशन डिपार्टमेंट। वो अपनी वाइफ दुर्गावती के साथ एक रेंटेड अपार्टमेंट में रहता था। अगर वह चाहता तो वो गवर्नमेंट से मिलने वाले सरकारी क्वार्टरों में भी रह सकता था। लेकिन उसने चूज़ करा कि वो गवर्नमेंट कॉलोनी के पास ही एक अपार्टमेंट रेंट करेगा। राम एक बहुत ही फ्रेंडली इंसान था एटलीस्ट बाहर से। उसके सारे नेबर्स उसको बहुत ज्यादा पसंद करते थे। उसे बहुत फ्रेंडली मानते थे। एक तरीके से राम दूर से एकदम हार्मलेस लगता था। राम की यही फ्रेंडली पर्सनालिटी सारे नेबर्स को दिखती थी और उसने सारे नेबर्स के मन में एक इमेज क्रिएट कर
ली थी खुद की कि वो बहुत ही ज्यादा वेलकमिंग है, बहुत ही ज्यादा अच्छा है, हार्मलेस है और उससे किसी भी इंसान को कोई दिक्कत नहीं हो सकती। बेसिकली राम और उसकी वाइफ की ये इमेज थी कि दे कैन डू नो रॉन्ग। नेबर्स को इतना ज्यादा ट्रस्ट था राम और दुर्गावती पे कि वह अपने बच्चों को उनके साथ खेलने के लिए छोड़ देते थे। क्योंकि उन्हें लगता था कि यह जो कपल है राम और दुर्गावती का ये इतने अच्छे हैं तो वो हमारे बच्चों को भी अपने बच्चों की तरह ही मानेंगे। इसी मेंटालिटी के साथ
नेबर्स अपने बच्चों को उनके साथ छोड़ देते थे और जितने भी बच्चों का आना जाना रहता था राम के घर पे वो यूजली माइनर बॉयज थे। राम की जॉब जो थी उसके वजह से राम पूरे दिन लैपटॉप पे लगा रहता था और किसी को भी कोई आईडिया नहीं था कि राम लैपटॉप पे करता क्या रहता है और जब भी राम और उसकी वाइफ घर पे अकेले होते थे तो कुछ नेबर्स नोटिस करते थे कि हमेशा छोटे लड़कों का आना-जाना रहता था उनके घर पे और उनमें से कुछ-कुछ लड़के तो पांच-छ साल के थे। किसी भी
नेबर को, किसी भी इंसान को कोई आईडिया नहीं था कि राम के घर के अंदर क्या चल रहा है। कोई सोच भी नहीं सकता था कि राम के घर के अंदर कुछ ऐसा अनइमेजनेबल हो सकता है जिसकी वजह से आगे जाके बहुत ही मेजर कोर्ट केस हो और बहुत ही ज्यादा डार्क ट्रुथ बाहर आए। किसी को कोई शक नहीं था राम और उसकी वाइफ पे। राम का ट्रांसफर यूजुअली बंदा डिस्ट्रिक्ट और चित्रकूट के बीच में ही होता रहता था। यही दो ही जगह थी जहां पे राम का ट्रांसफर होता रहता था। और इसी वजह से
10 सालों के अंदर-अंदर उसने इन दोनों जगहों पे मल्टीपल लोगों के साथ बॉन्ड बना लिया था। और हर बार राम गवर्नमेंट क्वार्टर को छोड़ के हमेशा अपना खुद का अपार्टमेंट रेंट करता था। राम की इमेज हर जगह एकदम क्लीन थी। अंटिल 2019 2020 के आसपास यूपी से 7000 कि.मी. दूर बेल्जियम में एक वीडियो सर्कुलेट होना शुरू होती है। वो वीडियो सिर्फ एकद सेकंड की थी लेकिन उसके अंदर एक बोल्ड आदमी दिखाई देता है जो उस ग्रेनी फुटेज को ठीक करने के चक्कर में, फ्रेमिंग को ठीक करने के चक्कर में अपने लैपटॉप का कैमरा ठीक करता
है। और उसी फुटेज में बेड पर पड़ा हुआ एक छोटा लड़का भी नजर आता है। और उसी क्लिप के अंदर ही बहुत थोड़ी देर के लिए उसी लड़के भी दिखाया जाता है। बेल्जियम की पुलिस ने जब इस वीडियो क्लिप को देखा तो वो पूरी तरीके से कंफ्यूज हो गए थे क्योंकि उन्हें समझ आ गया था कि यह वीडियो क्लिप तो बेल्जियम की नहीं है या आसपास के एरिया की नहीं है। बेल्जियम पुलिस को समझ ही नहीं आ रहा था कि ये वीडियो क्लिप आई कहां से है और इसके अंदर जो बोल्ड आदमी है वो कौन
है। इसी वीडियो क्लिप की इन्वेस्टिगेशन के दौरान बेल्जियम पुलिस एक ड्रंक ड्राइवर को पकड़ती है जिसके पास एक पेनड्राइव निकलती है और जो उस पेनड्राइव में पुलिस को मिलता है वह देख के पुलिस एकदम दंग रह जाती है। उस एक अकेली पेनड्राइव में हजारों ऐसी वीडियोस थी जिसके अंदर छोटे लड़कों को करा जा रहा है। थाउजेंड्स ऑफ वीडियोस। और वो सारी वीडियो क्लिप्स बेल्जियम की तो नहीं लग रही थी। लेकिन तुम्हें पता है उन सारी क्लिप्स में उन हजारों क्लिप्स में एक चीज क्या कॉमन थी? उन वीडियो क्लिप्स में जो भी विक्टिम्स थे उन सबको
अब्यूज करते टाइम बैकग्राउंड में हिंदी गाने चलाए जा रहे थे और इसी एक क्लू से यह साफ हो गया था कि ये सारी वीडियोस यूरोप से नहीं है बल्कि इंडिया से है। लेकिन द फैक्ट कि सीएसएम चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज मटेरियल बेल्जियम में पूरे तरीके से इललीगल है और एक सीरियस क्रिमिनल ऑफेंस भी है। तो बेल्जियम की पुलिस इन सारी वीडियो क्लिप्स को इंटरपोल के साथ शेयर करती है फॉर इंटरनेशनल ट्रेसिंग एंड कहीं ना कहीं उन सारे विक्टिम्स को बचाने के लिए। अराउंड 2020 इंटरपोल इन सारी वीडियो क्लिप्स को इंडियन अथॉरिटीज को हैंडओवर करती है। और
जब इंडियन अथॉरिटीज इन्वेस्टिगेट करती है तो उन्हें पता चलता है कि तीन फोन नंबर्स हैं जिनसे ये सारी वीडियो क्लिप्स सर्कुलेट करी जा रही थी फ्रॉम इंडिया। उसके बाद यह सारी वीडियो क्लिप्स सीबीआई तक पहुंचती हैं। जब यह वीडियो क्लिप्स बेल्जियम से उठ के इंटरपोल के पास जाती है और फिर इंटरपोल से सीबीआई के पास आती है तो सीबीआई पे बहुत ज्यादा इंटरनेशनल प्रेशर बिल्ड हो जाता है और वो बहुत ही फास्ट ट्रैक कर देती है पूरी इन्वेस्टिगेशन को। एंड फिर फाइनली अक्टूबर 31st 2020 के दिन पे एक ऑफिशियल एफआईआर फाइल होती है। जब सीबीआई
उन तीनों फोन नंबर्स को ट्रेस करती है तो उन्हें दिखता है कि तीनों फोन नंबर्स का कनेक्शन एक स्पेसिफिक एड्रेस से आ रहा है और वो स्पेसिफिक एड्रेस यूपी में था। जिसका मतलब क्लियर था कि यूपी के ही एक प्राइवेट रेजिडेंस के अंदर इन सारे विक्टिम्स को अब्यूज करा जा रहा है। इनकी वीडियोस बनाई जा रही है और वहीं से इन सारी वीडियोस को सर्कुलेट करा जा रहा है ऑल ओवर द वर्ल्ड। इन नंबर्स को ट्रेस करने के बाद सीबीआई पहुंचती है उसी ट्रेस्ड लोकेशन पे उसी घर पे वो नॉक करते हैं और दरवाजा खुलता
है। दरवाजे पे खड़ी होती है दुर्गावती। और वहीं पे पूरी सीबीआई की टीम एकदम शॉक में चली जाती है क्योंकि वो दुर्गावती को देखते हैं एंड दुर्गावती और राम के घर को देखते हैं। एंड दे आर लाइक कि दिस इज द मोस्ट डिसेंट हाउस एवर। उनके दिमाग में सीधा ये आ रहा था कि हो सकता है वो गलत एड्रेस पे आ गए हो क्योंकि इस घर के अंदर ऐसी वीडियोस बनना ऑलमोस्ट इंपॉसिबल है कि मतलब इतने नॉर्मल आंटी अंकल कैसे कर सकते हैं ऐसी चीजें ऐसी वीडियोस कैसे बना सकते हैं कैसे सर्कुलेट कर सकते हैं
इनको नॉलेज कैसे है डार्क वेब की अगर ये ये सारी चीजें कर भी रहे हैं तो ये सर्कुलेट कैसे कर रहे हैं सीबीआई के दिमाग में बहुत सारे सवाल थे राम और दुर्गापवती पे शक काफी कम हो चुका था लेकिन तब भी 1-2% शक था और इसी वजह से सीबीआई ने इन्वेस्टिगेट करना शुरू करा| राम और दुर्गा के पास्ट को, उनके घर को, उनके सारे एसोसिएट्स को, उनके डिवाइसेस को, एवरीथिंग। और जब घर की छानबीन होनी शुरू हुई, तो सीबीआई को समझ आ गया था कि यही दो लोग हैं जो इस पूरे रिंग को रन
कर रहे हैं। जब पूरा घर छान लिया गया तो उसके बाद फाइनली 17th नवंबर 2020 के दिन पे राम और दुर्गावती को अरेस्ट कर लिया गया। लेकिन इसके बाद सवाल सीधा यही आता है कि यह दोनों अपने घर में एक्चुअली कर क्या रहे थे? जैसा कि मैंने बताया कि पिछले 10 सालों तक राम सिर्फ दो ही जगह पर ट्रांसफरर्स ले रहा था। एक चित्रकूट और एक बंदा डिस्ट्रिक्ट। इन 10 सालों के अंदर पूरा एरिया, पूरी लोकालिटी, पूरी सराउंडिंग, सारे नेबर, सारे लोग सब कुछ देख लिया था राम ने। और राम को एग्जैक्टली पता था कि
कौन से विक्टिम्स चूज़ करने हैं। राम मोस्टली उन्हीं विक्टिम्स को चूज़ करता था जो फाइनशियली वीक बैकग्राउंड से आते हैं। और राम और दुर्गावती उन्हीं बच्चों को टारगेट बनाते थे। इनके सारे विक्टिम्स यूजली 5 से 15 साल के बीच के होते थे। और यूजुअली इनके टारगेट्स इतने छोटे इसलिए होते थे क्योंकि जब यही टारगेट्स अब्यूज के बाद बाहर जाके किसी को बताने की भी कोशिश करते थे कि इनके साथ क्या हुआ है तो वो बता ही नहीं पाते थे क्योंकि उनके लिए खुद ही समझना उनके साथ क्या हुआ है वो भी बहुत मुश्किल था और
अगर कोई वर्ड्स में बता भी पाता था कि उनके साथ क्या हुआ है तो कोई विश्वास नहीं करता था क्योंकि राम और दुर्गावती की इमेज तो क्लीन थी लेकिन साथ ही साथ सारे विक्टिम्स लड़के थे। यूजली लोगों के लिए यह बिलीव करना कि एक लड़के के साथ ऐसा हुआ है। वो काफी मुश्किल हो जाता था। राम और उसकी वाइफ पहले तो इन विक्टिम्स को बहुत ही बहला फुसला के अपने घर तक लाने की कोशिश करते थे। वो अलग-अलग बातें बोलते थे। उनको खाने का बोलते थे कि उन्हें खाना दिया जाएगा। उन्हें गिफ्ट्स देते थे। और
कुछ-कुछ विक्टिम्स को तो फोन तक ऑफर किए जा रहे थे। इतने छोटे लड़कों को फोन अगर तुम ऑफर करोगे तो वो छोटे लड़के हैं। कोई उन्हें बोलेगा कि आपको हम फोन देंगे या फिर खाना देंगे या फिर पैसा देंगे। कोई भी फंस सकता है। और इसी छल में आके जब यह विक्टिम्स इन दोनों के घर पहुंचते थे तो राम सीधा दरवाजे पर कुंडली मार लेता था। और उसके बाद राम इन सारे विक्टिम्स के साथ जो भी कुछ राम इन विक्टिम्स के साथ करता था राम यूज्ड टू रिकॉर्ड एवरीथिंग। इससे ज्यादा फक्ड अप बात पता है
क्या है? इन विक्टिम्स को वो बाद में बोलता था कि तुम जाओ और अपने कजिंस और रिलेटिव्स को भी लेके आओ। और कई बार तो वह ब्लैकमेल करता था कि हम दुनिया को बता देंगे कि तुम्हारे साथ क्या हुआ है। अगर तुम चाहते हो हम नहीं बताएं तो अपने रिलेटिव्स और कजिंस को भी लेके आओ। मैं उन छोटे बच्चों के बारे में सोच रहा हूं कि उनपे क्या बीतती होगी। सारे अब्यूज के बाद सारे रिकॉर्डिंग के बाद इन सारे रिकॉर्डिंग्स को डार्क वेब पे सेल करा जाता था। क्योंकि डार्क वेब ट्रेसेबल नहीं रहता है। राम
बहुत ही ज्यादा लैपटॉप पे लगा रहता था। तो उसने पूरा तरीका फिगर आउट कर लिया था कि कैसे सेल करना है। कैसे वीडियोस को एक इंक्रिप्टेड फॉर्म में भेजना है बायर के पास एंड एवरीथिंग ही न्यू एवरीथिंग। डार्क वेब पे किसी को ट्रेस करना बहुत मुश्किल है। और इसी वजह से राम और दुर्गावती बहुत लंबे टाइम तक इस पूरे रैकेट को रन कर पाए थे। डार्क वेब पे जैसे मेजर परचेजेस होती हैं, राम और दुर्गावती को पेमेंट्स बिटकॉइन में आती थी। एंड उन 10 सालों में राम ने और उसकी वाइफ ने पूरे वीडियोस को सेल
करके लाखों लाखों रुपए बनाए थे। और तुम बिलीव नहीं करोगे कि यह सारी वीडियोस किस-किस कंट्री में खरीदी गई है। चाइना में, यूनाइटेड स्टेट्स में, ब्राजील में, इवन अफगानिस्तान में। जब सीबीआई ने पूरी जांच करी तो उनको पता चला कि एक विक्टिम तो 3 साल का था। राम और दुर्गावती के घर से कुछ 8,8.5 ला, कैश मिला था। 12 मोबाइल फोन्स और दो लैपटॉप्स भी मिले थे। तुम समझ रहे हो 12 मोबाइल फोंस थे वहां पे और इंटरनेशनल अथॉरिटीज और सीबीआई भी सिर्फ तीन ही नंबर निकाल पाई थी और इसके साथ-साथ एक डायरी भी थी
जिसके अंदर सारा हिसाब किताब था। साथ में एक हार्ड डिस्क भी थी जिसके अंदर 34 वीडियोस थी। वो जो 34 वीडियोस थी उनको ही स्प्लिट करके छोटे-छोटे सेक्शंस में सेल करा जा रहा था और उन्हीं सेक्शंस को मतलब वो टोटल वैल्यू में कुछ 2 लाख क्लिप्स थी। ओरिजिनल वीडियोस का नंबर 34 था। और उन वीडियोस के साथ-साथ थी 679 पिक्चर्स ऑफ ऑल दोज़ विक्टिम्स। उन पिक्चर्स को भी सेल करा जा रहा था डार्क वेब पे। जब सीबीआई और पुलिस ने मिलके इन दोनों को अरेस्ट कर लिया तो अरेस्ट के थोड़े दिनों बाद ही दुर्गावती ने
सारे एक्यूज़ेशंस डिनाई कर दिए और दुर्गावती ने बोला कि मेरा कोई लेना देना नहीं है और मेरे को तो पता ही नहीं था मेरा हस्बैंड ऐसा कुछ कर रहा है। लेकिन जब दुर्गावती ने यह सारी बातें डिनाई कर दी तो कुछ विक्टिम्स सामने आए और उन्होंने बोला कि जब ये सारी वीडियोस बन रही थी दुर्गावती आंटी वहीं पे थी। दुर्गावती आंटी वहीं पर खड़ी होकर देखती थी, हेल्प करती थी। वही सारी वीडियोस रिकॉर्ड कर रही थी। और कुछ विक्टिम्स ने तो यह बोला कि जब हमने मदद मांगी थी तो दुर्गावती आंटी बस देखती रहती थी।
वह हमारी मदद करने नहीं आती थी। पूरे टाइम दुर्गावती आंटी घर पे ही थी लेकिन उन्होंने हमारी मदद नहीं करी। विक्टिम्स के ये वर्ड्स थे। कुछ विक्टिम्स ने यह बोला कि दुर्गावती आंटी ने भी हमें अब्यूज करा था और वो राम अंकल के कमांड्स पे ही मेरे को अब्यूज करती थी। कुछ विक्टिम्स ने तो पूरी डिटेल्स भी दी थी पुलिस को जो मैं बता भी नहीं सकता हूं यहां पे कि दोनों वो जो कपल है ये राम और दुर्गावती वो क्या-क्या कर रहे थे विक्टिम्स के साथ। मैं बताऊंगा तो ये वीडियो रिमूव हो जाएगी YouTube
से। इतना इतने इतने हॉरिफाइंग एक्ट्स करे जा रहे थे। और उन सारे विक्टिम्स का फॉल्ट क्या था कि वो ट्रस्ट करते थे इस कपल पे। वो ट्रस्ट करते थे दुर्गावती आंटी पे। वो ट्रस्ट करते थे राम अंकल पे। एंड उनके साथ क्या हो गया। उनकी पूरी लाइफ रूइन कर दी है इन दोनों ने। यह छोटे-छोटे विक्टिम्स, यह छोटे-छोटे लड़के पूरी जिंदगी इस ट्रोमा के साथ जिएंगे। राम और दुर्गावती की सारी की सारी रिकॉर्डिंग, सारी फोटोग्राफ्स, सारी फाइल्स, सारा एविडेंस इकट्ठा करके कोर्ट के सामने रखा गया। और पोक्सो कोर्ट में फाइनली इन दोनों पे ट्रायल शुरू
हुआ। सीबीआई ने इस पूरे केस के ऊपर 700 पेज की रिपोर्ट सबमिट करी थी कोर्ट में। टोटल 30 से 35 विक्टिम्स थे। 35 वीडियोस थी, 700 पिक्चर्स थी। एंड व्हाट नॉट सारे विक्टिम्स के बयान भी सबमिट करे गए थे। एंड फाइनली काफी सालों तक ये ट्रायल चला और उसके बाद राम और दुर्गावती को डेथ सेंटेंस दिया गया। तुम्हें एक और फक्ड अप बात बताऊं? राम और दुर्गावती पे जब सेंटेंस दिया गया तो उन दोनों के लॉयर ने क्या बोला? उन दोनों के लॉयर ने बोला कि जस्टिस नहीं हुआ है मेरे क्लाइंट्स के साथ कि राम
और दुर्गावती को गलत सजा सुनाई गई है और अब हम हाई कोर्ट जाएंगे। मैंने जब यह सुना था, मैं हिल गया था अंदर से क्योंकि मैं मानता हूं कि लॉयर्स का काम है अपने क्लाइंट को डिफेंड करना। चाहे वो कितना ही बुरा क्यों ना हो। लेकिन यहां पे डिफेंड करना एक मतलब आई डोंट गेट इट कि एक लॉयर इतना तो नहीं गिर सकता। लेकिन इस कोर्ट हियरिंग के एंड पे एक बहुत अच्छा जेस्चर देखने को मिला था कोर्ट की तरफ से। कोर्ट ने यह बोला था कि जितने भी विक्टिम्स हैं उन सबको ₹1 लाख की
एड या फिर हेल्प या फिर आई आई डोंट नो व्हाट टू कॉल इट। ₹1 लाख यूज करे जाएंगे उन विक्टिम्स के लिए। उनको दिए जाएंगे उनके लिए एड होगा यह। और जितने भी पैसे दुर्गावती और राम के घर से मिले थे वो जो 8 ₹8 लाख थे उनको भी इक्वली डिस्ट्रीब्यूट कर दिया जाएगा अमोंग्स ऑल द विक्टिम्स। यह बस सुनने में अच्छा लगता है बट इससे कुछ फर्क पड़ेगा नहीं। बाय द वे राम और दुर्गावती के लॉयर का नाम था भूरा प्रसाद निषाद। जस्ट इन केस तुम्हें पता होना चाहिए कि कभी तुम्हारे सामने ये नाम
आए तो यह आदमी कितना घटिया है। और इस लॉयर ने पता है क्या बोला था कोर्ट में कि अगर विक्टिम्स के साथ ऐसा अब्यूज हुआ था, कुछ हुआ था तो इनके परिवारों ने एफआईआर क्यों नहीं करी? व्हाट द [ __ ] यूजुअली हम जब डार्क वेब के बारे में बात करते हैं इस चैनल पे, हम कहानियां डिस्कस करते हैं। हम थ्यरीज डिस्कस करते हैं। तो हमें कहीं ना कहीं हमें दिमाग में यह लगता है कि डार्क वेब का कांसेप्ट तो बाहर का ही होगा। इंडिया में तो ऐसा कुछ नहीं होता होगा। यह केस सबसे बड़ा
एविडेंस है कि इंडिया में शायद ऐसे बहुत सारे केसेस होते हो। यह एक केस तो बस सामने आ गया और कितने ऐसे केसेस होंगे जो सामने ही नहीं आते होंगे क्योंकि अब इंटरनेट सबके पास है। नॉलेज सबके पास है। डार्क वेब के बारे में भी काफी सारे लोगों को पता है तो यू नेवर नो कि कौन सा इंसान जो तुम्हें बहुत ज्यादा फ्रेंडली लग रहा हो, बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा हो, बिहाइंड द सीन्स कुछ ऐसा कर रहा हो। जैसे-जैसे इंडिया में इंटरनेट कंसमशन बढ़ता जा रहा है, टेक्नोलॉजी बढ़ती जा रही है, लोगों की नॉलेज
बढ़ती जा रही है, मेरे को डर यही लगता है कि हमें नहीं पता कि आगे चलके फ्यूचर में हम ऐसे या इससे वर्स कितने केसेस के बारे में सुनने वाले हैं।