अगर आपकी उम्र 25 से 35 साल के बीच है और आपके बैंक अकाउंट में अभी ₹1 करोड़ तो दूर ₹1 लाख भी नहीं है तो आज का वीडियो आपकी पूरी फाइनेंशियल लाइफ बदल सकता है। क्योंकि दुनिया का सबसे सफल इन्वेस्टर वारेन बफेट कहते हैं कि 1 करोड़ बनाने के लिए आपको करोड़पति परिवार में पैदा होने की जरूरत नहीं है। आपको लॉटरी जीतने की जरूरत नहीं है। आपको बिजनेस करने की [संगीत] भी जरूरत नहीं है। आपको सिर्फ एक सिस्टम चाहिए। और इस वीडियो में मैं आपको वही स्टेप [संगीत] बाय स्टेप सिस्टम दिखाने वाला हूं जिसे समझने
के बाद आप खुद कैलकुलेट कर पाएंगे कि 1 करोड़ तक पहुंचने में आपको कितने साल लगेंगे। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात 1 करोड़ बनाने का सबसे बड़ा दुश्मन गरीबी नहीं है बल्कि [संगीत] एक ऐसी गलती है जो लगभग हर मिडिल क्लास इंसान रोज करता है। उस गलती के बारे में हम वीडियो के अंत में बात करेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं। चैप्टर एक [संगीत] करोड़ सुनने में असंभव क्यों लगता है? चलो बिल्कुल सच से शुरुआत करते हैं। जब आप पहली बार यह शब्द सुनते हैं ना ₹1 करोड़ तो दिमाग में सबसे पहला विचार क्या आता
है? भाई यह मेरे बस का नहीं है। हमारे खानदान में आज तक किसी ने एक साथ ₹1 करोड़ [संगीत] नहीं देखा तो मैं कैसे देखूंगा? यह सोचना आपकी गलती नहीं है। यह हमारी मिडिल क्लास रियलिटी है। चलिए आपकी रोज की जिंदगी [संगीत] का एक कैलकुलेशन करते हैं। जिससे आपको समझ आएगा कि यह डर आपके दिमाग में बैठाया किसने [संगीत] है। मान लेते हैं कि आपकी मंथली सैलरी ₹35,000 है। आप हर महीने बहुत कंजूसी से रहते हैं। घर का किराया या होम लोन की ईएमआई ₹10,000, राशन और दूध का खर्चा ₹6000, [संगीत] बिजली, पानी और इंटरनेट
का बिल ₹3000। माता-पिता की दवाइयां और बच्चों की स्कूल फीस ₹5000। आने जाने का पेट्रोल या ऊंटों का खर्चा ₹3000। सब कुछ काटने के बाद महीने के आखिरी हफ्ते में जब आप अपना बैंक अकाउंट चेक करते हैं तो वहां बचते हैं सिर्फ ₹8,000। अब जरा इस ₹8,000 की बचत से ₹1 करोड़ का सफर नापते हैं। अगर आप हर महीने ₹8,000 अपने बैंक [संगीत] के सेविंग्स अकाउंट या अलमारी में संभाल कर रखते हैं, तो एक साल में आपकी कुल बचत होगी [संगीत] ₹96,000 यानी लगभग ₹1 लाख। इस रफ्तार से अगर आपको एक करोड़ रुपए इकट्ठे करने
हैं तो जानते हैं आपको कितने साल लगेंगे। [संगीत] पूरे 104 साल 104 साल यानी जब तक आपके पास एक करोड़ रुपए होंगे तब तक आपकी [संगीत] तीन पीढ़ियां निकल चुकी होंगी। यही वो वजह है जिससे एक आम नौकरी करने वाला इंसान, एक स्टूडेंट या एक बिगिनर इन्वेस्टर यह मान लेता है कि अमीर बनना सिर्फ किस्मत वालों का काम है। वह [संगीत] सोचता है कि बिना कोई बड़ा बिजनेस किए या बिना किसी बेईमानी के इतना पैसा कमाना मुमकिन ही नहीं है। लेकिन यहीं पर एंट्री होती है दुनिया [संगीत] के सबसे बड़े वेल्थ क्रिएटर वारेन बफेट की।
वारेन बफेट की सबसे बड़ी [संगीत] वेल्थ सीक्रेट। वारेन बफेट ने अपनी जिंदगी में ऐसा क्या अलग किया कि वह सिर्फ एक आम नौकरी पेशा परिवार से निकलकर दुनिया के सबसे अमीर इंसान बन गए। उन्होंने कभी कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं लगाई। कोई सॉफ्टवेयर नहीं बनाया। उनके पास सिर्फ एक सीक्रेट फार्मूला था जिसे दुनिया वारेन बफेट की सबसे बड़ी वेल्थ [संगीत] सीक्रेट कहती है। यह सीक्रेट क्या है? हम इसे आगे डिकोड करेंगे। लेकिन उससे [संगीत] पहले यह समझना जरूरी है कि कमी आपके पैसे में नहीं। आपके तरीके में है। जब आप इस ट्रेडिशनल सेविंग्स क्राइसिस को देखते
हैं तो आपको लगता है कि रास्ता बंद है। लेकिन वारेन बफेट कहते हैं कि अमीर बनने का रास्ता सीधे नहीं जाता। वह एक कर्व की तरह ऊपर जाता है। पहला करोड़ सबसे कठिन क्यों होता है? बफेट का एक बहुत ही फेमस रूल है कि [संगीत] आपका पहला करोड़ सबसे कठिन क्यों होता है? उन्होंने खुद कहा था कि जब उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की तो उन्हें अपने पहले $1 लाख डॉलर बनाने में रात दिन एक करना पड़ा था। लेकिन उसके बाद के करोड़ों डॉलर अपने आप बनते चले गए। ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे की
जो [संगीत] साइकोलॉजी और मैथमेटिक्स है उसे जब आप समझ जाएंगे तो आपको 104 साल का यह पहाड़ सिर्फ 12 से 15 साल का एक छोटा सा रास्ता लगने लगेगा। चैप्टर दो वारेन बफेट ने करोड़ों से नहीं आदतों से शुरुआत की। लोग अक्सर वारेन बफेट को आज देखते हैं। एक 90 साल [संगीत] से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग जिनके पास अरबों डॉलर की संपत्ति है जो दुनिया की किसी भी कंपनी [संगीत] को एक झटके में खरीद सकते हैं। लेकिन कोई भी उनके 11 साल की उम्र के उस लड़के को नहीं देखता जो सुबह 4:00 बजे उठकर ओमाहा
की सड़कों पर अखबार बांटता था। वारेन बफेट कोई बचपन से करोड़पति नहीं थे। उनके पिता एक छोटे स्टॉक ब्रोकर थे। जिनकी कमाई इतनी नहीं थी कि वह बफेट को एक ऐशो आराम की जिंदगी दे सकें। लेकिन बफेट के पास एक चीज थी जो आज [संगीत] के किसी भी मिडिल क्लास युवा के पास हो सकती है। वह थी पैसे की समझ और सही आदतें। जब बफेट 11 साल के थे उन्होंने एक किताब पढ़ी [संगीत] जिसका नाम था $1000 वेज़ टू मेक $1000। उस किताब ने उनके सोचने का [संगीत] तरीका पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने यह नहीं
सोचा कि मैं एक साथ $1 करोड़ कैसे कमाऊं। उन्होंने सोचा कि मैं आज ₹1 कैसे बचाऊं और उसे ₹2 में कैसे बदलूं। अखबार बांटने से जो पैसे मिलते बफेट उससे टॉफियां खरीदते और अपने स्कूल के बच्चों को थोड़े मुनाफे पर बेच देते। वह [संगीत] कोल्ड ड्रिंक की बोतलों के ढक्कन इकट्ठे करते थे। यह देखने के लिए कि लोग सबसे ज्यादा कौन सा ब्रांड पीते हैं ताकि वह समझ सकें कि किस कंपनी का बिजनेस सबसे [संगीत] अच्छा चल रहा है। बफेट ने बहुत कम उम्र में यह सीख लिया था कि पैसा कमाना कोई टैलेंट नहीं है।
यह एक सिस्टम है। अगर आप एक बार उस सिस्टम के पहहिए को घुमाना सीख गए तो पैसा अपने आप एक मैग्नेट की तरह आपकी तरफ खींचा चला आता है। अब आप सोच रहे होंगे भाई बफेट की कहानी तो ठीक है। लेकिन वह अमेरिका में थे। आज से 80 [संगीत] साल पहले थे। आज के इंडिया में जहां इतनी महंगाई है, वहां हम अपनी छोटी [संगीत] सी इनकम से 1 करोड़ का सिस्टम कैसे बनाएं? यहीं पर आता है अमीर बनने का वह ब्लूप्रिंट जो हर उस इंसान को देखना चाहिए जिसके पास आज निवेश करने के लिए सिर्फ
₹2000 या ₹5000 महीना है। चैप्टर तीन पहला करोड़ कैसे बनता है? अगर आपको अपनी लाइफ का पहला एक करोड़ बनाना है तो आपको इस चार स्टेप इंजन को समझना होगा। यह इंजन [संगीत] इन चार चीजों से मिलकर बनता है। एक इनकम आप कितना कमाते हैं? दो सेविंग्स आप कितना बचाते हैं? तीन इन्वेस्टमेंट। आप उस बचे हुए पैसे को कहां लगाते हैं? चार, कंपाउंडिंग। वह पैसा समय के साथ कैसे बढ़ता है? ज्यादातर मिडिल क्लास लोग सिर्फ पहले [संगीत] दो स्टेप्स पर अटक जाते हैं। इनकम और सेविंग्स। वे सोचते हैं कि अगर उनकी सैलरी ₹00 से ₹0000
हो जाएगी [संगीत] तो वे अमीर बन जाएंगे। लेकिन वारेन बफेट कहते हैं अगर आप अपनी इनकम बढ़ाने के बाद भी अपनी पुरानी आदतों [संगीत] को नहीं बदलते तो आप सिर्फ एक महंगे गुलाम बनकर रह जाते हैं। इनकम से ज्यादा जरूरी कौन सी चीज है? [संगीत] यहां पर एक बहुत बड़ा रहस्य छुपा है। बफेट के मुताबिक इनकम से ज्यादा जरूरी कौन सी चीज है जो यह तय करती है कि आप 40 साल की उम्र में रिटायर होंगे या 60 साल की उम्र तक लोन की किस्तें चुकाते रहेंगे। लोग सोचते हैं कि ज्यादा कमाना ही अमीर बनने
का इकलौता रास्ता है। लेकिन इतिहास गवाह है कि बड़े-बड़े लॉटरी विजेता और क्रिकेटर्स करोड़ों कमाने के बाद भी कंगाल हो गए। तो वो कौन सी चाबी है जो [संगीत] पैसे को रोक कर रखती है और उसे मल्टीप्लाई करती है। इसका जवाब आपको जगझोर कर रख देगा। चलिए इसे एक कहानी से समझते हैं। दो दोस्त थे अमित और राहुल। दोनों एक ही कॉलेज से पास आउट हुए और दोनों की [संगीत] नौकरी एक ही कंपनी में लगी। शुरुआती सैलरी दोनों की ₹400 थी। अमित का मानना था कि जिंदगी एक ही बार मिलती है इसलिए खुलकर जियो। जैसे
ही उसकी [संगीत] पहली तीन सैलरीज आई, उसने iPhone ले लिया। हर वीकेंड पर वह महंगे कैफे जाता, अच्छे कपड़े खरीदता। उसकी सेविंग्स थी जीरो। दूसरी तरफ था राहुल। राहुल [संगीत] ने इस वीडियो में बताए गए बफेट के सिस्टम को समझ लिया था। उसने अपनी पुरानी स्प्लेंडर बाइक नहीं बदली। उसने तय किया कि वह अपनी सैलरी का कम से [संगीत] कम 30% यानी ₹12,000 हर महीने बचाएगा और उसे सीधे बैंक अकाउंट में छोड़ने के बजाय एक सही जगह इन्वेस्ट करेगा। अमित राहुल का मजाक उड़ाता था। क्या यार राहुल तू कंजूसों [संगीत] की तरह जीता है। देख
मेरे पास नया फोन है। तू क्या यह छोटे-छोटे पैसे म्यूच्यूल फंड और स्टॉक्स में डालता रहता है। इससे क्या तू करोड़पति बन जाएगा? राहुल मुस्कुराता और चुप रहता। [संगीत] उसने निफ्टी 50 इंडेक्स फंड में हर महीने ₹12,000 की एसआईपी शुरू कर दी। जिसने भारत के इतिहास में पिछले 20 सालों में औसतन 12% से [संगीत] 15% का सालाना रिटर्न दिया है। शुरुआत के 3 साल दोनों की जिंदगी में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। अमित के पास शानदार गाड़ियां और गैजेट्स थे। सोशल मीडिया पर उसकी बड़ी हाइप थी। राहुल अभी [संगीत] भी उसी साधारण लाइफस्टाइल में जी
रहा था। लेकिन कहानी में ट्विस्ट आता है पांचवें साल के बाद। अभी तक जो आपने सीखा है वह महत्वपूर्ण है। लेकिन आगे जो प्रिंसिपल आने वाला है उसी ने वारेन बफेट को दुनिया का सबसे सफल इन्वेस्टर बनाया। अगर आपने अगले 5 मिनट मिस कर दिए तो आप पूरी जिंदगी [संगीत] सिर्फ कड़ी मेहनत करते रह जाएंगे। लेकिन कभी उस फाइनेंशियल फ्रीडम को नहीं छू पाएंगे जिसका सपना आप रोज देखते हैं। क्योंकि अब हम उस जादुई शक्ति की बात करने जा रहे हैं जिसे अल्बर्ट आइंस्टीन ने दुनिया का आठवां अजूबा कहा था। चैप्टर चार द पावर ऑफ
कंपाउंडिंग। अब लौटते हैं अमित और राहुल की कहानी पर। 5 साल बीत चुके हैं। दोनों की उम्र अब 30 साल हो चुकी है। अमित की सैलरी अब बढ़कर ₹70,000 हो चुकी है। लेकिन उसके खर्चे भी बढ़ चुके हैं। उसने अब एक बड़ी कार ले ली है। जिसकी ईएमआई हर महीने ₹15,000 जाती है। उसके पास अभी भी कोई इन्वेस्टमेंट नहीं है। राहुल की सैलरी भी ₹70,000 हो गई है। लेकिन राहुल ने अपनी इन्वेस्टमेंट की रकम को भी थोड़ा बढ़ा दिया। उसने अपनी ₹12,000 की एसआईपी [संगीत] को बढ़ाकर ₹00 महीना कर दिया था। पिछले 5 सालों में
जो उसने ₹12,000 हर महीने जमा किए थे, वह कुल मिलाकर उसने अपनी जेब से 7.2 लाख लगाए थे। लेकिन 15% के कंपाउंडिंग रिटर्न की वजह से [संगीत] उसका वह पैसा बढ़कर लगभग 10.7 लाख हो चुका था। [संगीत] अमित ने जब यह देखा तो उसने कहा, बस ₹3 लाख का ही तो फायदा हुआ ना राहुल। 5 साल में सिर्फ ₹3 लाख ज्यादा। इतने में तो एक अच्छी बाइक भी नहीं आती। इसके लिए तूने अपनी पूरी जवानी की ख्वाहिशें मार दी। राहुल [संगीत] ने फिर मुस्कुराकर कहा, "भाई, कंपाउंडिंग की सबसे बड़ी खासियत यही है। यह शुरुआत में
एक कछुए की तरह चलती है। लेकिन जब यह दौड़ना शुरू करती है, तो इसकी रफ्तार चीते से भी तेज होती है। अब समय को थोड़ा और आगे बढ़ाते हैं। साल बीतते गए। दोनों की उम्र अब 45 साल हो गई। यानी इन्वेस्टमेंट [संगीत] शुरू किए पूरे 20 साल हो चुके हैं। अमित अब थक चुका है। उसकी पीठ में दर्द रहता है। वह अपनी कॉर्पोरेट जॉब से नफरत करता है। लेकिन वह नौकरी छोड़ नहीं सकता क्योंकि उस पर घर का लोन, बच्चों की पढ़ाई और क्रेडिट कार्ड के बिलों का बोझ है। वह आज [संगीत] भी हर महीने
सैलरी का इंतजार करता है। अब जरा राहुल का अकाउंट देखते हैं। राहुल ने पिछले 20 सालों में लगातार अपनी एसआईपी जारी रखी। उसने कोई बहुत बड़ा [संगीत] रिस्क नहीं लिया। कोई सट्टा नहीं खेला। बस भारत की टॉप 50 कंपनियों में अपना पैसा ऑटो डेबिट पर लगा रखा था। 20 सालों में राहुल ने अपनी जेब से कुल निवेश किया था लगभग ₹35 लाख। लेकिन जानते हैं कंपाउंडिंग के जादू के बाद उसके अकाउंट का बैलेंस कितना था। [संगीत] यह देखकर अमित के होश उड़ गए। उसने कहा यह कैसे मुमकिन है? मेरे पास आज 1.2 करोड़ हैं और
मेरे पास सिर्फ लोन के कागजात। इसे कहते हैं डी पावर ऑफ कंपाउंडिंग। यहां पैसे ने पैसे को जन्म दिया। शुरुआत के पांच सालों में राहुल का पैसा सिर्फ धीरे-धीरे बढ़ रहा था। लेकिन आखिरी के 5 सालों [संगीत] में यानी 15वें साल से 20वें साल के बीच उसका पैसा जितनी तेजी से बढ़ा उतना वह पिछले 15 सालों में भी नहीं बढ़ा था। यही है कंपाउंड इंटरेस्ट का छुपा हुआ सच। जब आप छोटे निवेश से शुरुआत करते हैं तो आपका खुद का पैसा सिर्फ एक बीज होता है। असली पेड़ तो वह ब्याज इंटरेस्ट बनता है जो खुद
अपने ऊपर ब्याज कमाने लगता है। लेकिन यहां एक बहुत बड़ा कैच है। करोड़पति बनने की उम्र का महत्व। अगर राहुल ने यही इन्वेस्टमेंट [संगीत] 25 साल की उम्र के बजाय 35 साल की उम्र में शुरू किया होता तो क्या वह 45 की उम्र में करोड़पति बन पाता। यहीं पर छुपा है करोड़पति बनने की उम्र का महत्व। सिर्फ 5 से 10 साल की देरी आपकी फाइनल वेल्थ को आधा नहीं बल्कि 80% तक कम कर सकती है। बफेट ने 11 साल की उम्र में निवेश क्यों शुरू किया था? क्योंकि उन्हें पता था कि उनके पास समय की
सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन अभी तक हमने उस गलती की बात नहीं की जो करोड़पति बनने से पहले ही लोगों को खेल से बाहर कर देती है। यह एक ऐसी साइकोलॉजिकल [संगीत] बीमारी है जो आज की सोशल मीडिया जनरेशन को खोखला कर रही है। अगर आप इस बीमारी के शिकार हैं तो चाहे आप महीने का 1 लाख कमाएं या 5 लाख आप कभी भी 1 करोड़ का आंकड़ा नहीं छू पाएंगे। चलिए इस सबसे महंगी गलती का पोस्टमार्टम करते हैं। चैप्टर पांच मिडिल क्लास [संगीत] की सबसे महंगी गलती। वारेन बफेट से एक बार किसी ने पूछा
था कि एक आम इंसान अमीर क्यों नहीं हो पाता? उन्होंने बहुत ही खूबसूरत जवाब दिया था। अमीर बनने का रास्ता बहुत आसान है। लेकिन कोई भी धीरे-धीरे अमीर नहीं बनना चाहता। सबको रातोंरात अमीर बनना है और इसी रातोंरात अमीर दिखने की चाहत में जन्म होता है मिडिल क्लास की सबसे महंगी गलती का जिसे हम कहते हैं लाइफस्टाइल इनफ्लेशन और [संगीत] स्टेटस स्पेंडिंग। आज की दुनिया में जब किसी युवा की नई नौकरी लगती है या उसकी सैलरी बढ़ती है तो उसका पहला विचार यह नहीं होता कि मैं इस पैसे को [संगीत] कैसे सुरक्षित करूं। उसका पहला
विचार होता है। लोग क्या सोचेंगे? मेरे पास अच्छा फोन होना चाहिए ताकि जब मैं टेबल पर रखूं तो रुतबा दिखे। मेरे पास वह ट्रेंडिंग कपड़े होने चाहिए जो Instagram पर सब पहन रहे हैं। इसे साइकोलॉजी में कहते हैं इंस्टेंट ग्रेटिफिकेशन यानी तुरंत मिलने वाली खुशी। आपने एक महंगा जूता खरीदा। आपको दो दिन की खुशी मिली। आपके दोस्तों ने तारीफ की और तीसरे दिन वह खुशी गायब हो गई। लेकिन उस खुशी को पाने के लिए जो पैसे आपने खर्च किए वह पैसा [संगीत] अगर इन्वेस्ट होता तो आपके भविष्य के 10 दिन की आजादी खरीद सकता था।
जो इंसान [संगीत] अंदर से फाइनेंशियली सिक्योर होता है ना उसे दुनिया को दिखावा करने की जरूरत नहीं पड़ती। दिखावा सिर्फ वही करता है जो अंदर से खोखला होता है और जिसका बैंक [संगीत] बैलेंस जीरो होता है। जब आप हर महीने किसी चीज को सिर्फ इसलिए खरीदते हैं क्योंकि उसे क्रेडिट कार्ड की नो कॉस्ट ईएमआई पर लिया जा सकता है तो आप असल में अपने भविष्य की कमाई को आज ही बेच रहे होते हैं। आप उस बैंक के गुलाम बन रहे होते हैं जो आपसे ब्याज कमाकर खुद अमीर हो रहा है। क्यों कुछ लोग 20 साल
मेहनत करके भी अमीर नहीं बनते। यही वजह है वे पूरी [संगीत] जिंदगी चूहे दौड़ रैट रेस में फंसे रहते हैं। सैलरी आती है, बिल चुकाते हैं, ईएमआई भरते हैं, दिखावे के सामान खरीदते हैं। [संगीत] बैंक बैलेंस जीरो होता है और फिर से अगले महीने काम पर चले जाते हैं। इस लूप को तोड़े [संगीत] बिना आपका 1 करोड़ का सपना सिर्फ एक सपना ही रह जाएगा। आपने बफेट के इस सिस्टम को [संगीत] पूरी ईमानदारी से फॉलो किया। आपने फालतू के दिखावे बंद किए। आपने हर महीने बिना छूके अपनी एसआईपी [संगीत] जाने दी। और आज वह सुबह
है जब आप सोकर उठते हैं, अपना फोन उठाते हैं और अपना इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो ऐप खोलते हैं। वहां टोटल करंट वैल्यू लिखी है 1 करोड़ ₹12450। [संगीत] उस पल आपके दिल पर जो बोझ है ना वो हमेशा के लिए उतर जाता है। वो जो रोज सुबह उठकर ऑफिस जाने का डर था कि अगले महीने का किराया कैसे जाएगा? बच्चों की फीस कहां से आएगी? वो सारा स्ट्रेस। वो सारा मानसिक तनाव एक झटके में गायब हो जाता है। इसे कहते हैं फाइनेंशियल फ्रीडम। ₹1 करोड़ सिर्फ एक नंबर नहीं है। यह आपकी जिंदगी की वह चाबी है जो
आपको अपनी शर्तों पर जीने की आजादी देती है। और सबसे मजेदार बात जानते हैं क्या है? पहला करोड़ बनने के बाद खेल पूरी [संगीत] तरह बदल जाता है। पहले करोड़ को बनाने में अगर आपको 15 साल लगे थे ना तो उसी 1 करोड़ को 2 करोड़ बनने में सिर्फ 3 से 4 साल लगेंगे और उस 2 करोड़ को 4 करोड़ बनने में सिर्फ 2 साल लगेंगे। क्योंकि अब आपके पास पैसों की एक ऐसी फौज खड़ी हो चुकी है जो आपके लिए तब भी काम कर रही होती [संगीत] है जब आप रात को चैन की नींद
सो रहे होते हैं। तो अब फैसला आपका है। आप अमित की तरह पूरी जिंदगी सिर्फ दिखावे की ईंटें जोड़कर दूसरों को इंप्रेस करना चाहते हैं या राहुल और वारेन बफेट की तरह एक शांत सुरक्षित और करोड़पति भविष्य की नीव रखना चाहते हैं। 1 करोड़ का रास्ता आपके सामने साफ है। सही आदतें, लगातार निवेश और कंपाउंडिंग का भरोसा। मुझे उम्मीद है अब आप समझ चुके हैं कि पहला एक करोड़ कैसे बनता है। अगले वीडियो में हम बात करेंगे ₹100 प्रतिदिन निवेश करके करोड़पति बनने का पूरा-पूरा रोड मैप। इसलिए अभी वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब
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