एक बच्चा जो अभी मां के पेट में ही है और अभी पैदा भी नहीं हुआ उसको भी कैंसर हो सकता है कैंसर किसी को भी हो सकता है और यह मेजर्ली चार फैक्टर्स पर डिपेंड करता है ट्यूमर इतना बड़ा भी हो सकता है जो किसी इंसान के आधे से ज्यादा फेस को खा ही जाए कैंसर होने के बाद आप जिंदा बच पाओगे या नहीं यह हद से ज्यादा इस फैक्टर पर डिपेंड करता है हर साल 70000 से ज्यादा लोग अपने देश में ब्लड कैंसर से खुद की जान गवा बैठते हैं कैंसर से होने वाली मौत
इसलिए भी भयानक मानी जाती है क्योंकि आखिरी सात दिनों में भी आप सब कुछ नोटिस कर पाते हो कि कैसे आपका शरीर धीरे-धीरे सड़ के मर रहा है ह्यूमैनिटी ने मेहनत की और पूरी दुनिया की इलेक्ट्रिसिटी की प्रॉब्लम सॉल्व कर दी हमने मेहनत की और स्मॉल पॉक्स को पूरी तरह से रेडिकेट कर दिया हमने मेहनत की आज पोलियो खत्म होने की कगार पर है लेकिन हम बिलियंस ऑफ डॉलर्स इन्वेस्ट करके भी सालों साल रिसर्च करके भी दुनिया के मोस्ट एडवांस्ड इक्विपमेंट्स और बेस्ट साइंटिस्ट की मदद लेके भी एक प्रॉब्लम नहीं सॉल्व कर पा रहे हैं
और वो है टाइप सफ कैंसर कैंसर एज द कैंसर कैंसर डायग्नोसिस कैंसर ू कैंसर थेरेपिस्ट कैंसर फ्रॉम कैंसर कैंसर बट व्हाट एगजैक्टली इज कैंसर ये देखो ये ह्यूमन बॉडी है और इस ह्यूमन बॉडी में मौजूद हर चीज चाहे वो स्किन हो बोनस हो मसल्स हो या फिर ब्रेन ही क्यों ना हो हमारी बॉडी में सब कुछ सेल्स से ही बना हुआ होता है इसका एक सिंपल सा एग्जांपल घर है जैसे घर में किचन हो वॉशरूम हो लिविंग रूम हो बेडरूम हो घर का सारा हिस्सा सब कुछ ईंट यानी कि ब्रिक्स से ही बना हुआ होता
है वैसे ही बॉडी में मोस्ट फंडामेंटल थिंग एक सेल है अब दिक्कत यह है कि अपनी बॉडी में मौजूद सेल्स की एक लाइफ होती है और बॉडी की कंटीन्यूअस ग्रोथ और डेवलपमेंट के लिए सेल्स को डिवाइड होकर अपनी ही और कॉपीज बनानी होती हैं बायोलॉजी में इस प्रोसेस को माइटोसिस कहा जाता है इसको ऐसे समझो जैसे आपकी बॉडी एक फुटबॉल टीम है इस टीम में मौजूद हर एक प्लेयर एक सेल है जब कुछ प्लेयर्स थक जाते हैं या फिर इंजर्ड हो जाते हैं तो गेम को कंटिन्यू रखने के लिए न्यू प्लेयर्स का अंदर आना जरूरी
होता है नए प्लेयर्स के बिना टीम अच्छे से खेल ही नहीं पाएगी सिमिलरली समय-समय पर आपकी बॉडी में नए सेल्स बनते रहना जरूरी है वरना बॉडी सड़ जाएगी और माइटोसिस एक ऐसा प्रोसेस तो दुनिया के सभी लोगों में होता है इनफैक्ट जितनी देर आप ये वीडियो देखोगे उतनी सी देर में आपके शरीर में मोर दन 20 बिलियन सेल्स डिवाइड हो जाएंगे क्योंकि हमारी बॉडी इतनी एक्टिव इतनी अलाइव और इतनी बिजी प्लेस है कि हर सेकंड में ढाई करोड़ सेल्स डिवाइड होते हैं अब जब हमारी बॉडी में ये सेल्स ग्रोथ होती है तो उसके कुछ नियम
होते हैं नॉर्मल सेल्स के लिए ये रूल्स हैं कि सेल्स ग्रो करेंगे डिवाइड होकर अपनी कॉपी बनाएंगे और फिर रुक जाएंगे यानी ग्रो डिवाइड एंड स्टॉप लेकिन कुछ फैक्टर्स की वजह से किसी के भी शरीर में ऐसी सिचुएशन आ सकती है जब ये नॉर्मल सेल्स अपने आप को डॉन समझने लगे और इस ग्रो डिवाइड एंड स्टॉप के रूल को फॉलो करना बंद कर दें तो एक ऐसी कंडीशन जिसमें सेल्स अनकंट्रोलेबल तरीके से ग्रो करने लग जाएं उस कंडीशन को ही कैंसर बोला जाता है नाउ आई एम श्यर कि कभी भी अगर आप न्यूज़ वगैरह में
सुनोगे कि अनफॉर्चूनेटली किसी को कैंसर हो गया है तो आप ये समझ पाओगे कि बॉडी में बायोलॉजिकल लेवल पर एगजैक्टली क्या हुआ है और एक बात और कैंसर दुनिया में किसी को भी हो सकता है किसी को भी मतलब किसी को भी इनफैक्ट एक बच्चा जो अभी मां के पेट में ही है और अभी पैदा भी नहीं हुआ उसको भी कैंसर हो सकता है ये कुछ वो लोग हैं इंडिया में जिनको आप जानते होंगे होंगे जिनको कैंसर डायग्नोज हुआ था राकेश रोशन को थ्रोट कैंसर संजय दत्त को लंग कैंसर युवराज सिंह को लंग कैंसर किरण
खेर को मल्टीपल मायलोमा सोनाली बेंद्रे को मेटास्टेटिक कैंसर मनीषा कोयराला को ओवेरियन कैंसर पैरालिटिक एथलीट दीपा मलिक को स्पाइनल कोर्ड में कैंसर और आयुष्मान खुराना की वाइफ ताहिरा कश्यप को ब्रेस्ट कैंसर अदर देन दैट ये वो लोग हैं जिनको आप जानते होंगे जो कैंसर से लड़े लेकिन सरवाइव नहीं कर पाए इरफान खान को न्यूरो एंडोक्राइन कैंसर था ऋषि कपूर को ब्लड कैंसर था संजय दत्त की मां नरगेश दत्त को पैंक्रियास था राजेश खन्ना को यूरिनरी ब्लेडर में कैंसर था विनोद खन्ना को ब्लेडर कैंसर था अमरीश पुरी को ब्लड कैंसर था मनोहर पारकर जी को पक्रिया
कैंसर हुआ था और फॉर्मर एंड सेवंथ प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया वीपी सिंह जी को ब्लड कैंसर हुआ था एनीवेज यूं तो कैंसर के काफी सारे सिमटम्स हैं बट मोस्टली दे आर कॉमन वंस लेकिन एक ऐसा सिमटम्स के दिमाग में क्विकली डाउट क्रिएट करता है कि कहीं उसे कैंसर तो नहीं हो गया और वो सिंटमोबाइल और ट्यूमर इतना बड़ा भी हो सकता है जो किसी इंसान के आधे से ज्यादा फेस को खा ही जाए लेकिन क्या शरीर में डिटेक्ट होने वाला हर ट्यूमर कैंसर ट्यूमर होता है नो ट्यूमर यानी कि गांठें दो टाइप्स की होती हैं
बिनाइन एंड मेलिट बिनाइन ट्यूमर जनरली हार्मलेस होते हैं और शरीर में एक जगह पर ही बने रहते हैं बिनाइन ट्यूमर नॉन कैंसरस होते हैं और शरीर के दूसरे पार्ट में स्प्रेड नहीं होते बिनाइन ट्यूमर सर्जरी से इजली रिमूव किए जा सकते हैं ऑन द अदर हैंड मैलिनेटर कैंसरस होते हैं और शरीर के लिए काफी हार्मफुल होते हैं ये तेजी से शरीर के दूसरे ऑर्गन्स में स्प्रेड होकर कैंसर को स्प्रेड कर सकते हैं मैलिनेटर भी सर्जरी से रिमूव किए जा सकते हैं लेकिन इनकी कुछ कंडीशंस हैं ध्यान से समझो सपोज करो ये कोई पर्सन है x
इस पर्सन की बॉडी में थोरली सेल्स प्रेजेंट हैं ये मैंने आपको बता दिया इसके सेल्स कंटीन्यूअसली डिवाइड और ग्रो भी कर रहे हैं यह भी मैंने आपको बता दिया लेकिन अनफॉर्चूनेटली इसके लिवर में एक सेल ग्रो डिवाइड एंड स्टॉप के बेसिक नियम को अनसुना करके अनकंट्रोलेबल तरीके से हड़कंप मचाना शुरू कर देता है तो बोला जाएगा कि इसको लीवर में कैंसर हो गया है अब ओबवियस सी बात है कि खतरनाक स्पीड से कैंसर सेल्स की ग्रोथ एक जगह पर होगी तो लिवर में ट्यूमर फॉर्म होने लगेगा ध्यान दो कि ये कैंसर अभी लीवर के एक
हिस्से में ही है बट विद द पैसेज ऑफ टाइम ये पूरे ही लिवर में फैल जाएगा तो लिवर के एक हिस्से से शुरू होकर पूरे लीवर में फैलने के इस प्रोसेस को जनरली लोकल स्प्रेड बोल दिया जाता है लेकिन असली दिक्कत तब आती है जब शरीर में मेटास्टेटिक होने लगे मेटास्टेटिक क्या होता है ध्यान से समझो लिवर में फैल गया वो ठीक है लेकिन लिंफ नोड्स का यूज करके जब कैंसर एक ऑर्गन से दूसरे ऑर्गन में फैलना शुरू कर देता है इस प्रोसेस को मेटास्टैसिस बोला जाता है इसको आप ऐसे समझ सकते हो जैसे ये
पांच अलग-अलग क्लासरूम्स हैं ये वाला क्लासरूम लिवर है ये वाला गोल ब्लैडर है ये वाला स्टमक है ये वाला पेनक्रियाज है और ये राइट वाली किडनी है अब इमेजिन करो इन सभी क्लासरूम्स में 10-10 स्टूडेंट्स बैठे हुए हैं और ये सभी स्टूडेंट्स नॉर्मल स्टूडेंट्स हैं जो स्कूल के रूल्स को फॉलो करते हैं टाइम पे होमवर्क करते हैं शैतानी नहीं करते और बेसिकली भस नहीं मचाते लेकिन ये जो लेवर वाला क्लासरूम है इसमें 10 में से सिर्फ तीन बच्चे ऐसे हैं जो दिन रात पने के शौकीन हैं पूरे स्कूल टाइम में मस्ती करते हैं और नॉर्मल
बच्चों को उंगलियां करते रहते हैं तो कभी ना कभी इस लिवर क्लासरूम के अंदर ही ये तीनों बच्चे इन बचे हुए सात बच्चों को अपनी तरह बिगाड़ और एक टाइम ऐसा आएगा जब पूरी क्लास इनफेक्शियस हो जाएगी ये तो एग्जांपल हुआ लोकल स्प्रेड का अब ये 10 के 10 निकम मेंे स्टूडेंट्स रुकने वाले तो हैं नहीं ये अपनी बगल वाली क्लास में सेम हरकत करेंगे गॉल ब्लैडर क्लासरूम के बच्चों को बिगाड़ फिर स्टमक को फिर पैंक्रियाज और फिर राइट वाली किडनी को तो जब ये इंफेक्शन एक क्लासरूम से दूसरे क्लास रूम में फैलता है तो
इसे मेटास्टैसिस बोल दिया जाता है ये मेटास्टेटिक बहुत इंपोर्टेंट रोल प्ले करता है किसी पेशेंट को यह बताने में कि उसको जो कैंसर डिटेक्ट हुआ है वो किस लेवल का कितना खतरनाक कैंसर है क्योंकि कभी भी अगर आप ये सुनोगे कि किसी को कैंसर डिटेक्ट हुआ है तो ये बात आपको पक्का पता चलेगी कि कौन सी स्टेज का कैंसर है स्टेज का पता चलना कैंसर डिटेक्शन प्रोसेस में इतना ज्यादा इंपॉर्टेंट फैक्टर है कि अगर किसी को बोल दो कि आपको फोर्थ स्टेज कैंसर है तो आधा तो बंदा वैसे ही मर जाता है और अगर किसी
को बोल दो कि आपको फर्स्ट स्टेज कैंसर है तो उसे सुनके ही जीने का कॉन्फिडेंस आ जाता है मतलब डॉक्टर्स ऐसे हवा में नहीं बोल सकते कि किसी को फर्स्ट स्टेज का कैंसर है या किसी को फोर्थ स्टेज का कैंसर है कैंसर रिलेटेड सिमटम्स में एक चीज नहीं बल्कि अलग-अलग ऐसे फैक्टर्स हैं जिनके बेसिस पर डॉक्टर्स ये डिसाइड कर पाते हैं कि किसी पेशेंट को डिटेक्ट होने वाला कैंसर कौन से स्टेज का है और इस सिस्टम को बोला जाता है टी एनएम स्टेजिंग सिस्टम यहां टी का मतलब है कि ट्यूमर का साइज कितना है यहां
ए का मतलब है कि ट्यूमर की लिंफ नोड्स में प्रेजेंस कितनी है और यहां एम का मतलब है कि मेटास्टेटिक किस लेवल का हो चुका है यानी कि किन-किन ऑर्गन्स तक ट्यूमर पहुंच चुका है इन तीनों फैक्टर्स के बेसिस पर ही डॉक्टर्स प्रेसा इजली डिसाइड कर सकते हैं कि किसी को किस स्टेज का कैंसर है लेकिन यह बात भी ध्यान रखना कि टीएनएम स्टेजिंग सिस्टम भी अलग-अलग ऑर्गन्स के लिए अलग-अलग रिजल्ट्स बताता है फॉर एग्जांपल एक 5 सेमी वाइट ट्यूमर ओरल कैंसर्स में t3 कैलकुलेट किया जाएगा लेकिन ब्रेस्ट कैंसर में t2 कैलकुलेट किया जाएगा मोर
ओवर पूरी ह्यूमन बॉडी में एक कैंसर टाइप ऐसा है जो शरीर में पाए जाने वाले बाकी सभी कैंसर्स के कंपैरिजन में एकदम अलग है और जिस कैंसर की मैं बात कर रहा हूं वो है ब्लड कैंसर बाकी कैंसर्स की तरह इस ब्लड कैंसर के मोस्ट केसेस में सॉलिड ट्यूमर नहीं बनते बल्कि लिक्विड फॉर्म में ही ये बॉडी के अंदर फैलता जाता है हमारे खून में जो रेड ब्लड सेल्स वाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स मौजूद होते हैं वो हमारी बॉडी को प्रॉपर्ली फंक्शन करने में और अलग-अलग प्रकार के इंफेक्शन से बचाने में हेल्प करते हैं लेकिन
अगर यही ब्लड सेल्स एब नॉर्मली ग्रो करने लग जाएं पागलों की तरह बिहेव करने लग जाएं तो अपना काम ढंग से नहीं कर पाएंगे वो अलग और शरीर में और भी हेल्थ प्रॉब्लम्स जनरेट होंगी वो अलग एंड इवेंचर डिजीज विल बी कॉल्ड ब्लड कैंसर अच्छा इमेजिन करो आपकी बॉडी एक बड़ी सी सिटी है इस सिटी में अलग-अलग सिस्टम्स हैं जो मिलकर काम करते हैं ताकि सब कुछ स्मूथली चले तो जो आप की बॉडी का ब्लड सिस्टम है उसको इस सिटी का ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम मानकर चलो जिसमें कार्स स्ट्रीट्स यानी कि गलियों में ट्रेवल करती हैं ताकि
सफाई के रूप में अच्छा माल पहुंचा सके और कचरा माल उठा के ले जा सकें बस अब कार्स को ब्लड से रिप्लेस कर दो और स्ट्रीट्स को ब्लड वेसल समझ लो इतने में ही आपका ब्लड कैंसर का कांसेप्ट क्लियर हो जाएगा अब सोचो कुछ कार्स अचानक से मैल फंक्शन करने लगे हैं रूल्स फॉलो करने और गुड्स डिलीवर करने की बजाय ये कार्स आपस में टकराने लग जाएं और ट्रैफिक जैम्स क्रिएट करने लगें एगजैक्टली यही होता है ब्लड कैंसर के केस में भी ब्लड सेल्स या यानी कि कार्स एनर्मेक से ग्रो करने लगती हैं और अपना
काम सही से नहीं कर पाती जिसकी वजह से ट्रैफिक जैम्स यानी कि हेल्थ प्रॉब्लम्स अपने शरीर में होने लगती हैं अब ब्लड कैंसर्स मेनली तीन तरीके के होते हैं लकीम लिंफोमा और मायलोमा लकीम या टाइप ब्लड कैंसर में आपके वाइट ब्लड सेल्स पागलों की तरह ग्रो करने लगते हैं और इंफेक्शन से शरीर को नहीं बचा पाते लिंफोमा टाइप ब्लड कैंसर में इंसान के लिंफेटिक सिस्टम पर असर पड़ता है लिंफेटिक सिस्टम में सेल्स पागलों की तरह ग्रो करने लगते हैं और लिंफ नोड्स में ट्यूमर फॉर्म होने लगते हैं मायलोमा टाइप ब्लड कैंसर में इंसान के प्लाज्मा
सेल्स पर पड़ता है जो बोन मैरो में पाए जाते हैं बोन मैरो को समझने का एक बहुत ही शानदार रियल लाइफ एग्जांपल ये देखो ब आई वाना फोकस ऑन दिस बोन हियर दिस बोन इज द ह्यूमरस एंड इन द मिडल ऑ द ह्यूमरस यर गना सी दिस सॉफ्ट टिश्यू हियर दिस इज कॉड येलो बोन मेरो दिस इज एन एनर्जी स्टोरेज यूर सो गुड एट स्टोरिंग एनर्जी दैट यू इवन डू इट इनसाइड ऑफ लंग बोनस बोन मैरो में पाए जाने वाले ये प्लाज्मा सेल्स इंफेक्शन से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज प्रोड्यूस करते हैं लेकिन अगर किसी इंसान
को मायलोमा टाइप ब्लड कैंसर हो जाए तो प्लाज्मा सेल्स कैंसरस हो जाते हैं और हार्मफुल प्रोटींस प्रोड्यूस करना शुरू कर देते हैं ब्लड कैंसर स्पेसिफिकली अपने देश में बहुत खतरनाक रूप ले चुका है हर साल 700 हज से ज्यादा लोग अपने देश में ब्लड कैंसर से खुद की जान गवा बैठते हैं और शॉकिंगली हर साल 300 से ज्यादा बच्चों को अपने देश में ब्लड कैंसर डायग्नोज होता है हालत इतनी खराब है कि हर 5 मिनट में इंडिया में किसी ना किसी को ब्लड डिसऑर्डर या ब्लड कैंसर डायग्नोज होता ही है ब्लड कैंसर का एक इजी
और पोटेंशियल सॉल्यूशन है स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से ब्लड ब्लड कैंसर से मरते हुए व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है और डीकेएमएस नाम की एक इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन इस स्टेम सेल ट्रांसप्लांट प्रोसेस को आसान बनाने में लगी हुई है डीकेएमएस साल 1991 से लोगों को डोनर्स ढूंढने में हेल्प कर रही है लेकिन एक प्रॉब्लम है केयरफुली समझो देखो ये एक पर्सन है एक और ये एक पर्सन है वा इन दोनों ही लोगों की सभी बोनस में नहीं लेकिन काफी बिगर और फ्लैट बोनस में बोन मैरो मौजूद होता है इस बोन मेरो के अंदर
ही स्टेम सेल्स मौजूद होते हैं ये स्टेम सेल्स मास्टर बिल्डर्स माने जाते हैं इनके पास ब्लूप्रिंट होता है और अपने शरीर में यही रेड ब्लड सेल्स वाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स एक्सट्रा बनाते हैं जिसको ब्लड कैंसर हो जाता है उसके स्टेम सेल्स में यानी कि मास्टर बिल्डर्स में ही खराबी आ जाती है तो उस इंसान को इस ब्लड कैंसर से बचाने का एक बहुत ही सही तरीका यह है कि किसी हेल्दी बंदे के स्टेम सेल से पेशेंट के अनहेल्दी या कैंसरस सेल्स को रिप्लेस कर दिया जाए लेकिन दिक्कत की बात यह है कि इस एक्स
पर्सन यानी कि कैंसर पेशेंट के टिश्यू टाइप या एचएलए ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन इस वाई पर्सन से यानी कि डोनर से कंप्लीट मैच होना चाहिए वरना ट्रांसप्लांट नहीं हो पाएगा और कैंसर पेशेंट नहीं बच पाएगा अब जैसे हर किसी का अपना एक ब्लड ग्रुप होता है वैसे ही हर किसी का अपना एक एचएलए टाइप भी होता है जो आपकी स्टेम सेल कैटेगरी और बाकी चीजें बताता है इस एक्स पर्सन और वाई पर्सन की एचएलए टाइपिंग मैच होना बहुत ज्यादा जरूरी है वरना स्टेम सेल ट्रांसप्लांट नहीं हो पाएगा टोटल 141 करोड़ की पापुलेशन रखने वाले इस देश
में सिर्फ 7 लाख लोगों को ही अपनी एचएलए टाइपिंग पता है ऊपर से एक ऐसा डोनर ढूंढने के चांसेस जिसका ग्रुप आपसे 100% मैच करे वो वन इन अ मिलियन है यहां तक आपको भी साफ-साफ दिख ही रहा होगा कि इस प्रॉब्लम का एक ही सॉल्यूशन है सॉल्यूशन ये कि हमारे पास डोनर्स का डेटाबेस ज्यादा से ज्यादा बड़ा हो या यूं कह लो कि हमको ज्यादा से ज्यादा डोनर्स की एचएलए टाइपिंग पता हो ताकि टाइम आने पर मैचिंग करके स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया जा सके एकदम फ्री में आप अपने स्पिड का सैंपल देकर यानी कि
थूक का सैंपल देकर आप भी स्टेम सेल डोनर बन सकते हो स्टेप वन नीचे डिस्क्रिप्शन में दी गई लिंक पर क्लिक करके खुद को रजिस्टर करो ध्यान रखना रजिस्टर करने के लिए एलिजिबिलिटी फैक्टर्स हैं और अगर आपको इनमें से कोई बीमारियां हैं तो आप डोनर नहीं बन सकते स्टेप टू सक्सेसफुल रजिस्ट्रेशन पर आपको एक किट घर पर भेजी जाएगी उस किट को ओपन करके इंस्ट्रक्शंस को रीड करके अपने स्वाब सैंपल्स वापस भेज देने हैं स्टेप थ्री आपके सैंपल्स इनकी लेबोरेटरी में चेक होंगे आपको अपना एचएलए टाइप पता चल जाएगा और इसकी हेल्प से अगर देश
में किसी को ब्लड कैंसर हुआ है और उसका टाइप और आपका टाइप मैच हो गया और उसका स्टेन सेल ट्रांसप्लांट हो पाएगा आप उसकी जिंदगी बचा पाओगे एज आई सेड कैंसर किसी को भी हो सकता है और ये मेजर्ली चार फैक्टर्स पर डिपेंड करता है लाइफ स्टाइल चॉइसेज एनवायरमेंटल फैक्टर्स जेनेटिक फैक्टर्स और रैंडम एरर्स अब ये रैंडम एरर्स तो वो हो गया जैसे डीएनए रेप्स या म्यूटेशन के टाइम नेचुरली कोई मिस्टेक हो जाए या यूं कह लो कि किस्मत से होने वाला कैंसर आपकी किस्मत में ही लिखा था तो हो गया जेनेटिक फैक्टर्स यानी कि
खानदानी या विरासत में मिलने वाले जींस से भी कैंसर हो सकता है एनवायरमेंटल फैक्टर्स यानी कि रेडिएशन हार्मफुल केमिकल्स और पोल्यूशन से भी कैंसर हो सकता है रेडिएशन से कैंसर कैसे हो सकता है इसका एग्जांपल बहुत इंटरेस्टिंग है ध्यान से समझना जो सनलाइट हमारी बॉडी रिसीव करती है उसके बेसिकली तीन कंपोनेंट्स हैं विजिबल लाइट इंफ्रारेड लाइट और अल्ट्रावायलेट या यूवी लाइट अब विजिबल लाइट तो सनलाइट का वो वाला पार्ट हो गया जिसकी वजह से हम सारी ी चीजें देख पाते हैं और जिसकी वजह से इस दुनिया में हमको कलर्स दिखाई दे रहे हैं इंफ्रारेड लाइट
सनलाइट का वो पार्ट हो गया जो हम देख नहीं सकते लेकिन हीट यानी कि गर्मी के रूप में फील कर सकते हैं लेकिन ये जो तीसरा पार्ट है यूवी लाइट इसके तीन हिस्से होते हैं यूवीए यूवी बी और यूवी स जिसमें से यूवीसी तो मेनली अर्थ एटमॉस्फियर के द्वारा अब्जॉर्ब कर लिया जाता है और हम तक पहुंच ही नहीं पाती और यूवी ए और यूवी बी स्किन में डीप पेनिट्रेट कर सकते हैं लॉन्ग टर्म स्किन डैमेज कर सकते हैं और सन बर्न का रीजन बनकर स्किन कैंसर तक कॉज कर सकते हैं इसलिए ज जली एडवाइज
किया जाता है कि खतरनाक गर्मियों में 10:00 बजे से 4:00 बजे के बीच पड़ने वाली धूप के डायरेक्ट कांटेक्ट में आने से बचा जाए और टाइम टू टाइम सनस्क्रीन यूज की जाए अब जो चार फैक्टर्स मैंने डिस्कस किए उसमें से ये तीन फैक्टर्स तो फिर भी लाइक 100 100 कंट्रीब्यूटर्स हैं लेकिन लाइफ स्टाइल चॉइस इज द बिगेस्ट फैक्टर जो कैंसर केसेस में सबसे ज्यादा कंट्रीब्यूट करता है एंड दिस इज द वन वी सीरियसली नीड टू टॉक अबाउट ऑलमोस्ट सभी कैंसर डॉक्टर्स लोगों को चार चीजों के लिए बार-बार मना करते हैं स्मोकिंग अल्कोहल अनहेल्दी डाइट और
बैड स्लीप पैटर्स बहुत बार ला ला स्टाइल चॉइस सेस को म्य नजर रखते हुए कंपेरिजन भी किया जाता है एथलीट्स की लाइफ स्टाइल वर्सेस रैंडम पीपल्स लाइफ स्टाइल का अभी 30 साल का मेरा एक्सपीरियंस में मैं आपको बताता हूं मैंने सब तरह के पेशेंट्स के ऑपरेशंस किए हैं यानी राइट फ्रॉम टॉप टू बॉटम कि पॉलिटिशियन के किए मिलिनेयर के किए हैं बैंकर्स के किए हैं बहुत कम एथलीट्स के किए है अब अगर कंपैरिजन हो ही रहा है तो ऐसा पॉसिबल नहीं कि सबसे कचरा जिंदगी वालों की बात ना की जाए क्योंकि तुम लोग जिसको हीरो
मान रहे हो वो एक्चुअली कैंसर और टोबैको बेचने में लगे पड़े हैं स्पोर्ट्स फॉलो करते हो एक युवराज सिंह छोड़ के आपको कितने क्रिकेटर्स को कैंसर हुआ है मालूम है बताओ मेरे को और वही आप एक्टर्स के बारे में देखो कितने एक्टर्स है जिनको हो रहा है लाइफस्टाइल देखो स्पोर्ट्समैन का लाइफ स्टाइल देखो और हॉलीवुड बॉलीवुड का लाइफ स्टाइल देखो खुद नशे में धुत पड़े रहते हैं और आने वाली जनरेशन को भी ये कचरा परोस रहे हैं इन शॉर्ट स्मोकिंग ड्रिंकिंग और अनहेल्दी डाइट जितनी रिड्यूस हो सके उतनी बेटर और आठ घंटों तक डीप स्लीप
जितनी ज्यादा इंक्रीज हो सके उतनी बेटर जैसे जैसे टाइम के सा साथ साइंस टेक और मेडिसिंस एडवांस होते जा रहे हैं वैसे-वैसे मोर्टालिटी रेट में भी फर्क आया है इस डिफरेंस को अच्छे से नोट करना कि कैंसर कितने लोगों को डिटेक्ट हो रहा है वो कम नहीं हुआ है कैंसर से कितने लोग मर रहे हैं यह जरूर कम हुआ है और कैंसर का सही टाइम पर डिटेक्ट या डायग्नोज होना हद से ज्यादा इंपॉर्टेंट फैक्टर है इनफैक्ट आपको कैंसर होने के बाद आप जिंदा बच पाओगे या नहीं यह हद से ज्यादा इस फैक्टर पर डिपेंड करता
है कि आपको कौन सी स्टेज में कैंसर डिटेक्ट हुआ है डॉक्टर्स आज भी यही मानते हैं अर्ली डिटेक्शन इज द मेजर क्योर कैंसर कौन से स्टेज पर है इससे डिसाइड होता है कि उसका पॉसिबल समाधान क्या होगा क्योंकि अगर अर्ली स्टेज कैंसर है जैसे स्टेज वन या फिर प्रोबेबली स्टेज टू तो सर्जरी से कैंसरस ट्यूमर को रिमूव करना कुछ हद तक पॉसिबल होता है इसका मतलब सर्जरी कैंसर का एक पोटेंशियल सॉल्यूशन है लेकिन अगर लेटर स्टेजेस में कैंसर डिटेक्ट हो रहा है तो लोगों का आखिरी सहारा बचता है कीमोथेरेपी ये पता कैसे लगा कि कीमोथेरेपी
से कैंसर क्योर हो सकता है बहुत वियर्ड स्टोरी है ध्यान से सुनना वर्ल्ड वॉर वन के दौरान मस्टर्ड गैस को एक केमिकल वपन के रूप में यूज किया गया था जब सोल्जर्स इस गैस के कांटेक्ट में आए तो इंटेंटली डेथ होने लगी इस म मस्टर्ड गैस से सोल्जर्स की आंखें जलती थी सांस नहीं ले पाते थे स्किन पर ब्लिस्टर्स हो जाते थे और फाइनली डेथ हो जाती थी बाद में डॉक्टर्स ने नोटिस किया कि ये मस्टर्ड गैस बोन मैरो को खतरनाक तरीके से डैमेज करती है और उसकी ब्लड सेल्स बनाने की एबिलिटी को खत्म कर
देती है वहां से रिसर्चर और साइंटिस्ट को ये आईडिया आया कि बोन मैरो और कैंसर सेल्स की एक कॉमन हरकत है दोनों ही रैपिड रेप्ट करते हैं यानी कि तेजी से मल्टीप्लाई हो सकते हैं इसलिए रिसर्चस ने सोचा क्यों ना मस्टर्ड गैस के कंपाउंड्स को कैंसर सेल्स पर भी यूज किया जाए उन्होंने यूज किया भी और जो रिजल्ट्स चाहिए थे वो मिले भी सो बेसिकली कीमोथेरेपी आपके रैपिड ग्रोइंग सेल्स को मार देती है यही रीजन है कि जिन लोगों की कीमोथेरेपी चल रही है उनके बाल उड़ जाते हैं मुंह में छाले पड़ जाते हैं भूख
कम लगती है उल्टियां होती हैं और शरीर बहुत ज्यादा थका हुआ रहता है क्योंकि हेयर सेल्स और माउथ की लाइनिंग बहुत फास्ट ग्रोइंग सेल्स से बनते हैं कीमो से जब फास्ट ग्रोइंग कैंसर सेल्स मरते हैं तो बॉडी के अदर फास्ट ग्रोइंग सेल्स पे भी असर पड़ता है बट देयर इज अ क्वेश्चन कैंसर हो गया शरीर की वट लग गई अंदर भस मची पड़ी है लेकिन अपना इम्यून सिस्टम कहां है वो क्या कर रहा है वो अभी तक कैसे एक्टिवेट नहीं हुआ इम्यून सिस्टम एक्टिवेट हुआ था उसने कैंसर सेल्स को मारने का ट्राई भी किया था
लेकिन वो कंफ्यूज हो गया कि कैंसर सेल्स हमारे लिए डेंजरस हैं भी या नहीं असल में कैंसर सेल्स और कुछ नहीं अपने नॉर्मल सेल्स का बस एक चेंज्ड वर्जन ही होते हैं चूंकि वो बॉडी के अपने टिश्यू से ही आते हैं इसलिए इम्यून सिस्टम को कैंसर सेल्स का सिनेरियो एकदम नॉर्मल लग सकता है इसके अलावा कैंसर सेल्स का मल्टीप्लिकेशन और ग्रोथ कुछ केसेस में इम्यून सिस्टम के रिस्पांस से ज्यादा फास्ट भी हो सकते हैं द स्प्रेडिंग कैंसर फास्टर इन द बॉडी साइंटिस्ट ने कुछ लेटेस्ट ट्रेंड भी पिछले पले कुछ सालों में नोटिस किए हैं जो
पहले नहीं हुआ करते थे यंग लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर के केसेस काफी तेजी से बढ़ रहे हैं और उससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि डायरेक्टली थर्ड या फोर्थ स्टेज में ही पता चल रहा है कि किस बंदे को कोलोरेक्टल कैंसर है कोलोरेक्टल कैंसर का मतलब ऐसा कैंसर जो आपके लार्ज इंटेस्टाइन या रेक्टम में स्प्रेड होता इन शॉर्ट पिछले कुछ सालों में फास्ट फूड की तरफ इंक्लिनेशन जो दुनिया का बड़ा है वो इंटेंटली तो कुछ भी असर नहीं दिखाता लेकिन लॉन्ग टर्म बेसिस पर एक ऐसा कैंसर लोगों में फैल रहा है जो सीधा
थर्ड या फोर्थ स्टेज में ही डिटेक्ट साइंटिस्ट ऐसा भी क्लेम करते हैं कि जो लोग नॉर्मल डिलीवरी से पैदा नहीं होते या यूं कह लो कि सी सेक्शन से पैदा होते हैं यानी कि ऑपरेशन से पैदा होते हैं उनको कैंसर होने का रिस्क कंपेरटिवली ज्यादा होता है ऐसा इसलिए क्योंकि बर्थ कैनाल में मौजूद बेनिफिशियल बैक्टीरिया का एक्सपोजर नहीं मिल पाता जो लोग नॉर्मल डिलीवरी से पैदा होते हैं उनको ये बैक्टीरिया इम्यून सिस्टम डेवलपमेंट में मदद करते हैं साइंटिस्ट ऐसा भी क्लेम करते हैं कि आजकल की मॉडर्न महिलाएं जो ब्रेस्ट फीडिंग को स्किप करती हैं उनको
ब्रेस्ट कैंसर होने के चांसेस इंक्रीज हो जाते हैं बिकॉज ब्रेस्ट फीडिंग हार्मोंस को रेगुलेट करने में हे करती है दस रिड्यूस इंग द चांसेस ऑफ हार्मोनल इंबैलेंस साइंटिस्ट ऐसा भी क्लेम करते हैं कि जिन लोगों की हाइट ज्यादा होती है उनमें कैंसर के चांसेस भी ज्यादा होते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि शरीर में ज्यादा सेल्स होते हैं जितने ज्यादा सेल्स उतने ज्यादा म्यूटेशंस के चांसेस होंगे जो कैंसर होने का रीजन बन सकते हैं स्टिल इन सभी चेंजेज में से लाइफ स्टाइल चेंजेज का फैक्टर मोस्ट इंपोर्टेंट कैंसर कॉजिंग फैक्टर माना जाता है कैंसर से होने वाली मौत
इसलिए भी भयानक मानी जाती है क्योंकि आखिरी सात दिनों में भी आपका ब्रेन सही स्थिति में और अवेयर होता है आप सब कुछ नोटिस कर पाते हो कि कैसे आपका शरीर धीरे-धीरे सड़ के मर रहा है स्मोकिंग अल्कोहल अनहेल्दी डाइट और स्लीप को बैलेंस करके अगर हम काफी हद तक कैंसर को कंट्रोल कर सकते हैं तो सड़के मरना क्यों है अगेन आपका एक स्टेप कैंसर पेशेंट्स की जिंदगी बचा सकता है क्लिक द लिंक इन द डिस्क्रिप्शन