कभी-कभी आपने यह महसूस किया है कि कोई बात दिमाग में बार-बार घूम रही है मान लीजिए कोई गलती हो गई या कोई फैसला लेना है तो उसके बारे में सोचना तो स्वाभाविक है लेकिन ज्यादा सोचने की आदत लग जाए तो यह तनाव का कारण बन सकता है ऐसे में मन में तरह-तरह के विचार आते रहते हैं जैसे क्या होगा अगर मैं असफल हो गया या क्या मैंने उन्हें नाराज कर दिया यह विचार हमें चिंतित परेशान और बेचैन बना देते हैं ज्यादा सोचने से हम असल में कुछ कर ही नहीं पाते और जिंदगी के मौके भी
हाथ से निकल सकते हैं दोस्तों एक समय की बात है एक नगरी में एक व्यक्ति रहता था जिसका नाम विजय था विजय एक मेहनती किसान था और अपने काम में बहुत मेहनती था लेकिन विजय की सबसे बड़ी समस्या थी चिंता वह एक साधारण जीवन जीता था परंतु उसकी मनमानी चिंता उसे हमेशा तंग करती रहती थी रोज वह अपने कामों को करते हुए अपने मन के कोने में यह सोचता रहता कि आने वाला कल कैसा होगा विजय को हमेशा यह लगता था कि उसका भविष्य अनिश्चित है उसे लगता था कि वह किसी अच्छे या बुरे कल
के सामने है जिससे उसका जीवन पूरी तरह से प्रभावित हो जाएगा वह अपनी चिंताओं में इतना खो जाता कि उसका व्यक्तित्व भी प्रभावित हो जाता सुबह उठते ही विजय सोचने लग लगता था कि आज क्या होगा क्या काम ठीक से चलेगा क्या वह पर्याप्त पैसा कमा पाएगा क्या उसका परिवार खुश रहेगा इन सवालों का जवाब ना होने के कारण उसके मन में एक तूफान उठ खड़ा होता रात भर नींद ना आने के कारण उसकी आंखें सूझी हुई रहती सुबह होते ही वह थका हुआ और निराश महसूस करता उसकी चिंता सिर्फ भविष्य तक ही सीमित नहीं
थी वह हर छोटी-छोटी बात को लेकर भी चिंतित रह यदि कोई काम समय पर पूरा ना हो पाता तो वह घंटों सोचता रहता कि क्या होगा इसका बुरा परिणाम इस चिंता के कारण वह जीवन का आनंद नहीं ले पाता था वह एक ऐसा व्यक्ति था जो हर काम शुरू करता था लेकिन उसे पूरा करने का साहस नहीं होता था डर का साया उसके पीछे हमेशा बना रहता था जो उसे बीच में ही हार मानने पर मजबूर कर देता था यह डर केवल असफलता का ही नहीं था बल्कि अपने और अपने परिवार के भविष्य को लेकर
भी था हर रोज रात को सोने से पहले उसके मन में अनेक प्रश्न उठते थे क्या मैं अपने बच्चों को एक अच्छा जीवन दे पाऊंगा क्या मैं उनका पालन पोषण ठीक से कर पाऊंगा क्या मेरे बाद उनका क्या होगा यह चिंताएं उसे रातों रात जगाए रखती थी उसके माथे पर चिंता की गहरी रेखाएं उभर आई थी और उसकी आंखों में हमेशा एक उदासी छाई रहती थी वह सोचता था कि काश वह कुछ ऐसा कर पाता जिससे उसका भविष्य और उसके परिवार का भविष्य सुरक्षित हो जाता उसने कई बार नौकरी बदलने की कोशिश की लेकिन हर
बार असफलता का सामना करना पड़ा धीरे-धीरे उसकी आत्मविश्वास कम होने लगा और हताशा उसे घेरने लगी इस चिंता के समाधान की तलाश में वह कई ज्ञानियों से मिला उसने प्रसिद्ध आश्य विद्वानों और संतों की शरण ली उनसे घं बातें की अपनी चिंता का कारण बताया और समाधान की भीख मांगी लेकिन किसी भी ज्ञानी आर्ष या संत ने उसकी चिंता का समाधान नहीं बता पाया सभी ने उसे धैर्य रखने और भगवान पर भरोसा करने की सलाह दी निराश होकर वह अपने मित्रों और सगे संबंधियों से भी इस बारे में बात करने लगा कई लोगों ने उसे
सलाह दी कि वह अपना धन किसी सुरक्षित जगह पर निवेश करें ताकि उसे मुनाफा मिल सके कुछ लोगों ने कहा कि उसके ग्रह नक्षत्र ठीक नहीं चल रहे हैं और उसे ज्योतिषी से सलाह लेनी चाहिए कुछ अन्य लोगों ने कहा कि उसके कर्मों में ही कोई कमी है और उसे अच्छे कर्म करने चाहिए लेकिन सारे नुस्खे हिदायतें और सलाह को बखूबी निभाने के बाद भी उसके ना में अजीब सी बेचैनी थी एक दिन उसे इतनी परेशानी में देख उसके एक मित्र ने उसे एक बोध भिक्षु के बारे में बताया उस मित्र ने कहा कि जो
कोई भी उन बोध भिक्षु से मिलने जाता है वे उसकी समस्या का समाधान अवश्य ही करते हैं चाहे समस्या कितनी ही बड़ी क्यों ना हो उनके समझाने का तरीका थोड़ा अलग होता है वे अपनी बातों को कुछ अनोखे ढंग से समझाते हैं बहुत खुश हुआ उसे लगा कि हां अब वही साधु बाबा उसकी समस्या का समाधान बता सकते हैं उत्सुकता से वह व्यक्ति तुरंत बोध भिक्षु के आश्रम की ओर चल पड़ा आश्रम एक शांत और सुंदर स्थान पर स्थित था चारों ओर ऊंचे पेड़ों से घिरा हुआ था जैसे ही वह आश्रम के द्वार पर पहुंचा
उसने एक शांत और पवित्र वातावरण महसूस किया उसने धीरे से दरवाजा खटखटाया और अंदर प्रवेश किया वह बोध भिक्षु एक बैठने स्थान पर बैठकर ध्यान कर रहे थे जैसे ही विजय प्रवेश करता है वह बोध भिक्षु आंखें खोलकर विजय की ओर देखते हैं तभी विजय व जाकर वह उन बोध भिक्षु से कहता है हे महाराज मैंने आपके बारे में बहुत सुना है लोग आपकी प्रशंसा करते थकते नहीं मैंने यह भी सुना है कि जो भी आपके पास अपनी समस्या लेकर आता है आप उसका समाधान उसे अवश्य देते हैं हे महाराज मेरी हाथ जोड़कर आपसे एक
विनती है मेरी भी एक समस्या है मुझे अपने आने वाले कल की चिंता है मैं चाहता हूं कि मेरे बच्चे और परिवार सुरक्षित रहे और उनका भविष्य सुरक्षित हो मैं अपने भविष्य की चिंताओं में अपना सारा समय गुजार देता हूं मुझे बहुत डर लगता है भविष्य के बारे में सोच सोच कर मेरे मन में अनेक प्रश्न उठते थे क्या मैं अपने बच्चों को एक अच्छा जीवन दे पाऊंगा क्या मैं उनका पालन पोषण ठीक से कर पाऊंगा मेरे बाद उनका क्या होगा यह चिंताएं मुझे रातों-रात जगाए रखती है अगर आप उसका समाधान कर देंगे तो आप
जो चाहेंगे मैं आपको वो देने को तैयार ह फिर भले ही मुझे बाजार से कर्ज क्यों ना लेना पड़े विजय की बात सुनकर वह बोध भिक्षु मुस्कुराते हैं और कहते हैं बेटा धन दौलत से मेरे मन को कोई संतोष नहीं मिलता मुझे यह सारी चीजें नहीं चाहिए मैं तुम्हारी समस्या का हल तभी निकाल सकता हूं जब तुम मेरी बातों पर गंभीरता से ध्यान दो जब तक तुम मुझ पर भरोसा नहीं करोगे मेरी मदद भी तुम्हारे काम नहीं आ सकती अगर तुम्हें मुझे कुछ देना ही है तो मैं तुम्हारा समय चाहता हूं क्या तुम मेरे लिए
समय निकाल सकते हो ताकि मैं तुम्हें समझा पाऊं कि तुम क्या गलती कर रहे हो यह सुनते ही विजय की आंखों में जो आशा की किरण चमक उठी और वह तुरंत ही बोध भिक्षु से बोला जी गुरु जी मैं आपको अपना समय देने के लिए तैयार हूं आप जो कहेंगे मैं वह करूंगा बस मेरी समस्या का समाधान न दे दीजिए बोध भिक्षु विजय की निश्चित दृढ़ता को देखकर प्रसन्न हुए और उससे कहा कि बेटा मुझे तुम्हारे सात दिन का समय चाहिए और इन सात दिन में तुम मेरे इस आश्रम में रहना होगा जैसा मैं कहूं
ठीक वैसा ही करना होगा क्या तुम तैयार हो युवक थोड़ा सोच में पड़ गया उसके दिमाग में यह ख्याल आया कि अगर वह सात दिन तक बोध भिक्षु के साथ रहेगा तो उसका काम कैसे चलेगा उसके घर के खर्चे कैसे पूरे होंगे और सबसे जरूरी बात उसकी पत्नी यह सुनकर क्या कहेगी लेकिन उसे समाधान भी चाहिए था आदमी ने सोचा अगर मैं अपनी पत्नी से कहूं कि मुझे अपनी समस्या का समाधान ढूंढकर बेहतर इंसान बनना है और इसके लिए मुझे सात दिन इन बोध भिक्षुओं के साथ रहना होगा तो अवश्य ही उसकी पत्नी उसे बोध
भिक्षु के साथ रहने की इजाजत देगी और वैसे भी मेरी जिंदगी से बस सात दिन ही तो है लेकिन अगर मैं इस समस्या का समाधान नहीं ढूंढ पाया तो यह चिंता मुझे जीवन भर परेशान करेगी उसने सोचा कि वह इस समस्या का समाधान ढूंढने के लिए सात दिन समर्पित कर सकता है काफी सोच विचार के बाद वह बोध भिक्षु से कहा ठीक है गुरु जीी मैं आपको सात दिन देने के लिए तैयार हूं लेकिन इसके पहले उसे अपनी पत्नी को यह सब बताना होगा ताकि वह परेशान ना हो इस पर बोध भिक्षु कहते हैं जरूर
बेटा तुम मुझे कल इसी जगह पाओगे घर लौटकर पति ने अपनी पत्नी को सारी बात बताई पत्नी को सुनकर दुख हुआ लेकिन वह अपने पति के प्यार और उसे हो रही तकलीफ को समझ गई उसने अपने पति को हौसला दिया और कहा चिंता मत करो मैं तुम्हारे साथ हूं अगले दिन बध भिक्षु ने उस व्यक्ति से कहा आज से सात दिन तक तुम्हें एक भिक्षु की तरह जीवन जीना होगा तुम्हें उनके जैसे कपड़े पहनने होंगे आश्रम में उनकी तरह सफाई करनी होगी और भिक्षा के लिए गांव में जाकर भोजन लाना होगा लेकिन एक बात का
ध्यान रखना हर काम करने से पहले अपने मन में यह विचार करना होगा कि यह काम कैसा होगा क्या मैं इसे पूरा कर पाऊंगा अगर हां तो कितनी बखूबी से और यह काम खत्म होने के बाद क्या परिणाम होगा यह सोचकर ही हर काम करना होगा व्यक्ति थोड़ा घबरा हुआ था भिक्षु का जीवन बिल्कुल नया अनुभव था लेकिन विजय ने बोध भिक्षु की बातों को स्वीकार कर लिया उसे लगा यह सात दिन आसानी से कट जाएंगे आखिर थोड़े कपड़े धोने झाड़ू लगाने और भिक्षा मांगने में क्या है वह मन ही मन सोच रहा था कि
यह तो रोजमर्रा के काम है जिन्हें मैं वैसे भी घर पर करता हूं इसमें क्या मुश्किल है उसने आश्रम के वस्त्र पहने झाड़ू उठा उठाया और आश्रम की सफाई शुरू करने के लिए तैयार हो गया उसने अपने मन में बोध भिक्षु के शब्दों को दोहराया उसने सोचा यह झाड़ू लगाना कितना कठिन है बिल्कुल नहीं क्या मैं इसे पूरा कर सकता हूं हां आसानी से मैं इसे और भी बेहतर कैसे कर सकता हूं धीरे से और ध्यान से झाड़ू लगाकर यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई कोना ना छूटे इस काम को पूरा करने का क्या परिणाम
होगा आश्रम स्वच्छ होगा और रहने में अच्छा लगेगा और फिर उसने आश्रम की सफाई शुरू कर दी जब सब्जियां काटने का समय आया विजय ने गुरुजी के कहे अनुसार मन में विचार किया कि यह काम कैसा होगा और इसका क्या परिणाम होगा कुछ देर सोचने के बाद उसने यह यकीन बिठाया कि यह काम आसान होगा वह अपने घर में भी अक्सर सब्जियां काटता था और उसे लगा कि इसमें ज्यादा मुश्किल नहीं है उसने सोचा कि थोड़ी मेहनत और सावधानी से सब्जियां काटने से सबको खुश करना संभव होगा इस काम के बाद वह आश्रम के रसोई
में मदद करने का आनंद लेगा जिससे सबको समय पर और स्वादिष्ट भोजन मिल सकेगा विजय को यह अवसर अन्यों की सेवा करने का एक सुंदर मौका प्रदान करेगा और उसे खुशी होगी कि उसने इस काम में योगदान दिया जब भिक्षा मांगने का समय आया तो विजय ने मन में सोचा कि कैसा होगा भिक्षा मांगना उसने खुद से पूछा पूछा कि क्या यह कठिन होगा फिर विजय ने सोचा कि भिक्षा मांगने में क्या कठिनाई है मैं पैसे नहीं मांग रहा बस एक रोटी या थोड़ा अनाज मुझे उम्मीद है कि लोग दया दिखाएंगे और मुझे कुछ ना
कुछ जरूर देंगे क्या यह मुश्किल होगा वह खुद को जवाब देता है मुझे नहीं लगता मैं विनम्रता से भिक्षा मांगूंगा और लोगों से सम्मान पूर्वक बात करूंगा तो मुझे लगता है कि वे मेरी मदद करेंगे विजय ने आशा की कि वह पर्याप्त भोजन प्राप्त करेगा और आश्रम के लिए भोजन ला पाएगा उसे लगा कि यह एक अच्छा अनुभव होगा पहला दिन तो ठीक-ठाक गुजरा उसने आश्रम के वस्त्र पहने आश्रम की साफ सफाई में हाथ बटा और आसपास के घरों से भिक्षा मांगकर लाया सब्जियां काटकर उसने रसोई में भी मदद की लोगों ने उसे सम्मान से
भोजन दिया और उसकी कोशिशों की सराहना भी की उसने सारे काम बखूबी निभाए विजय को लगा कि बाकी दिन भी ऐसे ही आसानी से निकल जाएंगे शाम को बोध भिक्षु के पास बैठकर उसने पूरे दिन के अनुभवों को उन बोध भिक्षु को बताया और कहा देखा गुरुजी मैंने सारे काम कर दिए और मैंने काम करने से पहले सोचा भी कि वह कैसे होंगे बोध भिक्षु ने मुस्कुराते हुए कहते हैं बहुत अच्छे लेकिन याद रखना जैसा कि अक्सर होता है जिंदगी हमारी उम्मीदों से थोड़ी अलग चलती है हर दिन एक जैसा नहीं होता कल शायद परिस्थिति
अलग हो और ऐसा ही कुछ अगले दिन से विजय के साथ होने लगा अगले ही दिन दिक्कतें शुरू हो गई भिक्षा मांगते समय एक घरवाली ने उसे डांट दिया यह कहते हुए कि वह आलसी है और काम करने के बजाय भीख मांग रहा है विजय को यह बात चुप गई उसने मन ही मन सोचा कि वह तो गुरु के आदेश का पालन कर रहा है फिर भी उसे अपमान सहना पड़ रहा है फिर एक दिन आश्रम में सब्जियां काटते समय विजय का हाथ कट उसे गुस्सा आया कि इतना आसान काम भी वह ठीक से नहीं
कर पाया ऊपर से रात के भोजन में भी सिर्फ रोटी और दाल थी ऐसा सोचते हुए विजय ने आश्रम में झाड़ू लगाना शुरू किया कुछ देर बाद जब उन्होंने आधे हिस्से को साफ कर लिया था तभी अचानक तेज हवा का झोंका आया इस झोंके ने बाहर की धूल और मिट्टी को उड़ाकर आश्रम के अंदर ला दिया जिससे सफाई का काम बेकार हो गया दिन ते गए और विजय की परेशानियां बढ़ती गई उसे जमीन पर सोने की आदत नहीं थी उसकी पीठ में दर्द होने लगा ध्यान के दौरान उसका मन भटकता रहता तो कभी पर्याप्त भिक्षा
ना मिलने पर विजय को भूख से व्याकुल होकर आश्रम खाली हाथ लौटना पड़ता था विजय को जल्द ही एहसास हुआ कि यह काम उतना आसान नहीं है जितना उसने सोचा था धीरे-धीरे विजय का उत्साह कम होता गया उसने सोचा था यह सात दिन आसान होंगे लेकिन असल में यह काफी मुश्किल भरे निकले हर रात सोने से पहले वह सोचता था कि यह सात दिन कब खत्म होंगे उसने सोचा अगले सात दिन तो बहुत मुश्किल से कटेंगे उसने बोध भिक्षु को अपनी परेशानी बताई उसने कहा गुरुजी आपने जैसा कहा मैं वैसा ही करने की कोशिश कर
रहा हूं मैं हर काम से पहले सोचता हूं कि वह काम कैसा होगा उसका परिणाम कैसा होगा पर हर काम में मुझे रुकावट आ रही और दिन बदन यह सब बढ़ते जा रहा है और मेरे कोई भी परिणाम वैसा नहीं होता जैसा मैंने उस काम को शुरू करने से पहले सोचा था मैं क्या करूं आप ही बताइए मेरे सात दिनों में से चार दिन तो यूं ही कठिना में गुजर गए हैं बौद्ध भिक्षु ने शांत स्वर में कहा बेटा चिंता मत करो मैंने यह सब तुम्हें इसलिए करने के लिए कहा था ताकि तुम समझ पाओ
कि ऐसा ही तुम अपने जीवन में भी करते आए हो तुम इससे पहले अपने जीवन में हर काम को शुरू करने से पहले उसके परिणाम क्या होंगे यह सोचने में अधिकतर समय बिता देते थे भविष्य में यह कैसा होगा या यह कैसा होना चाहिए भविष्य में तुम्हारे पास कितना पैसा होगा या फिर पैसा नहीं हुआ तो क्या होगा कि अगले साल बारिश नहीं आई तो फसल कैसे उगे गी या तुम मर गए तो क्या होगा और इसी कारण तुम वर्तमान में कोई काम नहीं कर पाते थे लेकिन असली बात तो यह है कि वर्तमान ही
तुम्हारा भविष्य बनाता और बिगाड़ है और तुम तो उन भविष्य के भूतों के बारे में सोचकर डर रहे हो जो असल में तुम्हारे हाथ है ही नहीं मुझे बताओ क्या तुम्हारी मृत्यु तुम्हारे हाथ में है विजय उन बोध भिक्षु से कहता है नहीं गुरु जी बोध भिक्षु विजय से फिर पूछते हैं क्या बारिश के ज्यादा या कम गिरना तुम्हारे हाथ में है विजय बोध भिक्षु से फिर से कहता है नहीं गुरु जी गुरुजी आगे कहते हैं तो क्या यह सही नहीं होगा कि तुम उन काल्पनिक भविष्य के डर से भरे हुए भूतों के बारे में
सोचना छोड़ के तुम अपने उस सुनहरे भविष्य के बारे में अभी इसी वक्त क्या कर सकते हो वह करो विजय गुरु जी के इस ज्ञान को समझते हुए बड़े ही गंभीर तरीके से बातों को अपने अंदर सोखता है और कुछ देर शांत रहने के बाद गुरु जी से पूछ है तो क्या गुरुजी आप यह कह रहे हो कि मैं भविष्य के बारे में सोचना छोड़ दूं कोई लक्ष्य ना रखूं अपने जीवन में ऐसे तो मेरे जीवन का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा इस पर वह बोध भिक्षु जोर से हंसते हुए कहते हैं बेटा यह तो
बेवकूफी होगी अगर तुम लक्ष्य ही नहीं रखोगे अपने जीवन में तो तुम्हें कैसे पता चलेगा कि किस दिशा में अपने कार्य करने हैं किन जगहों पर अपनी शक् खर्च करनी है आगे वह बोध भिक्षु कहते हैं कि इस दुनिया में हर किसी को भविष्य के बारे में सोचना चाहिए लेकिन यह भी याद रखो कि भविष्य के बारे में तुम सिर्फ इसलिए सोच रहे हो ताकि तुम अपनी दिशा तय कर सको एक लक्ष्य बना सको ताकि तुम्हें पता हो कि तुम्हें कहां जाना है या क्या बनना है लेकिन अगर तुम बस उसी के बारे में सोचते
रहने की भूल करोगे और वर्तमान में उस लक्ष्य को पाने के लिए कुछ भी नहीं कर करोगे तो तुम्हारे जीवन में निराशा और दुख के सिवाय कुछ नहीं बचेगा और इसीलिए अब से तुम्हारे सात दिनों में से बाकी के तीन दिन तुम हर काम अब इस नए ज्ञान को ध्यान में रखते हुए करना अब से तुम्हें कोई भी काम करने से पहले बस अंतिम परिणाम तय करना है और उसके बाद उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जो भी करना पड़ेगा तुम्हें वह करना है जैसे कि अगर कोई तुम्हें भला बुरा कह रहा है तो तुम्हें
अपने मन को शांत करके यह समझना है कि लोग खुद भी परेशान होते हैं अपनी जिंदगी में वह इतने गुस्सा बस तुम्हें देखकर नहीं हुए हैं उन्हें माफ करो ताकि वह तुम्हारे मन को तंग ना सके और तुम किसी और इंसान के पास जाओ भिक्षा लाने या कभी प्राकृतिक तौर पर तुम्हारे लिए कुछ बुरा होता है जैसे कि हवा के तेज झोंके से मिट्टी आना और तुम्हारे सारे झाड़ू मारने की मेहनत पर फैल जाना तो इस वक्त तुम हार ना मानकर अपने ने लक्ष्य को पूरा करने के लिए जो भी बन सकता है तुम्हें करना
है जरा सोचो क्या हो जाएगा अगर तुम्हें और एक बार झाड़ू मारना पड़े क्या तुम पतले हो जाओगे क्या तुम मर जाओगे क्या सिर्फ एक हवा का झोंका ही तुम्हें रुलाने या परेशान करने के लिए काफी है झाड़ू उठाओ और फिर से मेहनत करो क्योंकि बेटा सिर्फ एक चीज है जो हमारे भविष्य को सुरक्षित कर सकती है और वो है उस भविष्य को पूरा करने के लिए वर्तमान में की गई मेहनत आगे गुरुजी विजय की आंखों में देखकर धीरे से कहते हैं और मजे की बात तो यह है कि इसी नियम का इस्तेमाल तुम अपने
जीवन की कठिनाइयों को भी दूर करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हो तुम्हें अपने परिवार का भविष्य सुखद बनाना था ना इसी परेशानी को हल करने आए थे ना तुम मेरे पास विजय बड़े ही दुख भरे आवाज में कहता है जी गुरुजी मुझे अपने परिवार के भविष्य की बहुत चिंता है गुरुजी कहते हैं तो इसका मतलब तुम्हें अपना लक्ष्य पता है बस अब तुम्हें वर्तमान में जो भी करना पड़े वह करना है उसे पूरा करने के लिए अपने काम में दुगनी मेहनत दो बस भविष्य के सोचते रहने से वह कभी नहीं बदलेगा विजय को अपने
विचारों में एक अजीब सी स्पष्टता का अनुभव होता है कुछ देर शांत बैठकर उसने जो कुछ भी सीखा था उसे से याद रखने का संकल्प लिया फिर बोध भिक्षु से बोला गुरुजी अब मुझे सब समझ में आ गया है मुझे लगता है कि बाकी के तीन दिन मैं आपके निर्देशों का पालन करूंगा अब जब मेरे सामने कोई बाधा आएगी तो मैं उसे पार कर लक्ष्य तक पहुंच ना कि बेकार के सवालों में उलझ करर अपना समय बर्बाद करूंगा बध भिक्षु विजय की दृढ़ता से मुस्कुराए उन्होंने कहा बहुत अच्छा विजय यही वह भावना है जो तुम्हें
सफलता की ओर ले जाएगी बोध भिक्षु की सलाह को ध्यान में रखते हुए विजय ने अगले तीन दिन बिताए रास्ते में वाकई कई कठिनाइयां आई कभी हार मानने का मन होता कभी रास्ता भटकने का डर लगता परंतु उसने गुरुजी के शब्दों को याद रखा उसने सीखे हुए कौशल का प्रयोग किया और दृढ़ता के साथ हर चुनौती को पार किया धीरे-धीरे विजय को एहसास हुआ कि भविष्य की चिंता करना व्यर्थ है जो करना है अभी करना है लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हर पल को सही से इस्तेमाल करना चाहिए गुरुजी को प्रणाम करते हुए विजय ने
कहा गुरुजी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आपकी सीख ने मुझे भविष्य की फिक्र से मुक्त कर दिया है अब मैं जानता हूं कि वर्तमान में जीना ही सबसे महत्त्वपूर्ण है विजय ने गुरुजी को अलविदा कहा और वापस अपने जीवन की ओर चल पड़ा तीन दिन बाद जब विजय वापस घर लौटा तो वह पहले से बिल्कुल अलग इंसान था उसके चेहरे पर एक शांति थी जो पहले कभी नहीं देखी थी अब वह हर पल का आनंद लेने के लिए तैयार था दोस्तों आपने आज के इस वीडियो से क्या सीखा वह मुझे आप कमेंट में बता सकते हैं इसी
के साथ में उम्मीद है कि आपको आज की वीडियो पसंद आई होगी तो इस वीडियो को उस इंसान को शेयर करें जिससे यह कहानी सुनने की जरूरत है और उसी के ठीक बाद चैनल को सब्सक्राइब करें तो चलिए फिर मिलते हैं ऐसी एक और नई वीडियो में एक नए मैसेज के साथ तब तक के लिए अपना ख्याल रखें धन्यवाद और नमो बुद्धाय