[संगीत] भागवत गीता के यह 30 उपदेश आपको अपनी जिंदगी में हर जगह पर बहुत कम आएंगे जिंदगी की हर मुश्किल में आपको र दिखाएंगे ये दिव्या उपदेश ये बातें जानना समझना आपके लिए बहुत जरूरी है इसीलिए इन 30 उपदेशों को आप आखिर तक जरूर सुन गीता का सबसे पहले उपदेश यह है की आपके सारे दुखों का करण किसी को अपना मानना है आप कभी गौर करना आपकी जिंदगी के सारे दुख साड़ी तकलीफें साड़ी चिंताएं वहीं से आई है जहां आपका अपनापन होता है की यह मेरा है यह मेरा अपना है वहीं से आपकी जिंदगी में
दुख आना शुरू हो जाते हैं एक व्यक्ति के पास एक बहुत बड़ा महल था उसने जिंदगी भर की साड़ी संपत्ति लगाकर उसे महल को बनाया था आसपास के शेरों के कई लोग उसके महल को देखने आते थे कई बड़े बड़े से उसके महल को खरीदने की कोशिश करते थे और वो महल उसका अहंकार था उसकी जीने की वजह था उसका उसे महल में बहुत मो था एक दिन उसके महल में आज ग गई और वो कहानी बाजार गया हुआ था जब वो घर लोट कर आया तो उसने देखा की मेरा महल आदमी जल रहा है
अपने घर को आज में चला हुआ देख कर उससे इतना दुख हुआ उसने कहा अगर ये महल नहीं रहेगा तो मैं भी जिंदा नहीं रहूंगा अगर मेरा महल ही जल रहा है उम्मीद जीके क्या करूंगा वो भी इस आज में चलांग लगाने की कोशिश करने लगा तो किसी ने उसे रॉक लिया की भाई ये जो तुम्हारा महल है इस महल का सौदा कल तुम्हारे बेटे ने किसी के साथ कर लिया है जब उसे पता चला की यह महल आप मेरा नहीं रहा किसी और का हो चुका है तो उसकी साड़ी चिंता खत्म हो गई जैसे
और लोग उसे जलते हुए महल को को लेकर तमाशा देख रहे थे वैसे यह भी खड़ा हो गया इतनी डर में उसका बेटा आया वह अपनी बेटी को देखकर बहुत प्रश्न हुआ उसे आशीर्वाद देने लगा की तेरे जैसा बेटा तो बहुत भाग्ययों से मिलता है उन्हें तो मेरी जिंदगी बच्चा ली आज इस घर में आज लगी है और तूने कल ही इसका सौदा कर दिया वो अपने पिताजी से खाने लगा की पिताजी मैं इस महल के साड के लिए बात तो करने गया था पर सौदा भी पक्का हुआ नहीं है जब उसके पिता ने यह
सुना की अभी इस महल का सौदा हुआ नहीं है तो वो फिर फूट-फूट के रन लगा फिर अपनी छाती पीटने लगा महल वही है इंसान वही है लेकिन जब महल मेरा है तब वो दुख भी देता है खुशी भी देता है लेकिन जब वो मेरा नहीं है उससे मेरा कोई रिश्ता नहीं है तो सारे दुखी खत्म हो जाते हैं ऐसे ही जिंदगी में जब किसी जगह को किसी इंसान को किसी रिश्ते को किसी कम को हम अपना मां लेते हैं मेरा मां लेते हैं तो वहीं से ही सारे दुखों की शुरुआत होती है वहीं से
हर तकलीफ की शुरुआत होती है तो श्रीमद् भागवत गीता का पहले उपदेश यही है की आप जैसे ही किसी को अपनी जिंदगी जीने की वजह मां लेते हो इसके बिना तो मैं जी ही नहीं सकता तो वो चीज वो इंसान वो कम आपको बहुत दुख देता है गीता का दूसरा उपदेश यह है की अवश्य में उपभोक्तव्य प्रथम परम शुभअशुभम की आपने कोई भी कर्म किया हो उसका फल आपको जरूर भोगना पड़ेगा अगर आपने अच्छे कर्म किया हैं तो जान अनजाने किसी मुश्किल वक्त में आपको वो आपके अच्छे कर्म उसे मुश्किल वक्त से बच्चा लेंगे अगर
आपने गलत गम किया हैं पाप किया है तो उसकी सजा भी आपको जरूर मिलेगी वो इंसान कितना ही छुपकर कर्म करें चाहे वो कितना ही चला अरे लेकिन कहते हैं इस परमात्मा के ईश्वर के चारों तरफ कैमरे लगे हुए हैं हमारे एक-एक कर्म पर वो प्रकृति वो परमात्मा अपनी दृष्टि बनाए रखते हैं हमारे एक-एक कर्म का हिसाब होता है एक गांव में दो मित्र रहते थे उन दोनों ने विचार किया इस गांव में हम धन नहीं काम का रहे हैं वो दोनों धन कमाने के लिए शहर में चले गए कुछ वर्ष वहां र कर उन्होंने
काफी धन कमाया फिर सोचा की अब हम अपने घर वापस चलते हैं पर्याप्त मंत्र में हमने धन काम लिया है उसे समय पे जाता है आपकी इतनी सुविधा नहीं होती थी वो अपने बैलों पर ही यात्रा कर रहे थे चलते-चलते मार्ग में रात हो गई तो उन्होंने विचार किया आज रात हम यही विश्राम करते हैं एक मित्र ने कहा की मैं यहां पर रहकर धन की रक्षा करता हूं तुम बाजार जाकर भजन की व्यवस्था कर लो जब वह मित्र बाजार गया तो उसके मां में पाप ए गया उसने कहा इतना पैसा हमने कमाया है अगर
मैं इसको यही जंगल में मार डन तो सर पैसा मेरा हो जाएगा नहीं तो मुझे इसका आधा धन इसको देना पड़ेगा मां में ये कोट आने पर उसने अपने मित्र के खाने में जहर मिला दिया और जब वो खाना लेकर के अपने मित्र के पास गया उसका मित्र वह जहर वाला खाना खाकर वहीं पर उसकी मृत्यु हो गई वो व्यक्ति सर धन लेकर के अपने घर वापस ए गया फिर उसके घर में एक पुत्र ने जन्म लिया जब उसका बेटा पैदा हुआ तो वो बहुत बीमा राहत था उसने अपने जीवन में जो कुछ भी धन
कमाया था उसका वो सर धन अपने बेटे के इलाज में खत्म हो गया बेटा बड़ा होता गया और उसका धन नष्ट होता गया जब उसका बेटा थोड़ा बड़ा हो गया तो उसके पिता ने पूछा की बेटा तू इतना बीमा क्यों राहत है तू ठीक क्यों नहीं होता मैंने अपने जिंदगी का सब कुछ तुझ पे लगा दिया पर फिर भी तेरी तबीयत ठीक नहीं रहती तो उसके बेटे ने बोला कौन सा बेटा और कौन सा पिता मैं तेरा वही मित्र हूं जिसको तूने जंगल में जहर देकर मार दिया था लेकिन मैं अपना वही सांप पूरा करने
के लिए तेरे पुत्र के रूप में तेरे घर में आया हूं अब मेरा तेरा हिसाब बराबर और मेरा जीवन अब यही समाप्त होता है तो गीता का उपदेश हमें यही सीखना है कोई अपने आप को कितना भी चालबाज समझना हो होशियार समझना हो लेकिन अगर उसने गलत कर्म किया है चाहे आज नहीं तो कल उसे उसका फल भोगना ही पड़ेगा कोई भी व्यक्ति अपने किया हुए कर्म से बिना उसको भिगे कभी झूठ नहीं सकता गीता का तीसरा उद्देश्य है की आज मैं जियो कल की चिंता करना छोड़ दो जो भी व्यक्ति अपनी बीते हुए कल
या अपने आने वाले कल में धोया राहत है वो जिंदगी में कभी खुश नहीं र सकता आपको जिंदगी में खुशी सिर्फ और सिर्फ तब मिल शक्ति है जब आप वर्तमान में जीत सके आज के आनंद को जी सके बीते हुए कल का और आने वाले कल का कोई वस्त्वकित अस्तित्व नहीं होता वो सिर्फ आपके बुद्धि और आपके विचारों में होता है उसकी कोई वास्तव इतना नहीं होती उसे सिर्फ आप अपने मां के अंदर और बुद्धि के अंदर जीते हैं लेकिन जिससे आप वास्तवक्ता में जीते हैं वो आपका आज होता है वो आपका चल रहा पाल
होता है अगर आप अपने मां और बुद्धि को अपनी कल में अटका के रखेंगे अपने भूतकाल और भविष्य कल में अटका के रखेंगे तो याद रखना आप कभी खुश नहीं र पाएंगे और अगर जिंदगी में खुश रहना चाहते हैं तो आज मैं और इसी पाल में जीना सीखें गीता का चौथ उपदेश यह है की जो आपके साथ धर्म करें पाप करें गलत करें उसे दंड जरूर देना चाहिए अगर आप उसे सते हैं तो वो आपके साथ और गलत करता है अगर आप उसे सते हैं तो उसके पाप में आप भी भागीदार हो जाएंगे अर्जुन श्री
कृष्णा से खाने लगा की जींस मैं युद्ध करने जा रहा हूं ये सब मेरे भाई हैं मेरे गुरु जान हैं मैं इनके सामने कैसे हथियार उठाऊं इनको कैसे मैरून तो भगवान श्री कृष्णा ने अर्जुन से कहा की जिन्हें तुम अपना मानता है वह सब अधर्मी है वो पाप के पक्ष में खड़े हैं और अगर तू इनका वध नहीं करेगा युद्ध नहीं करेगा तो समाज में और भी पाप पड़ेगा क्योंकि जब कोई ऐसे पपिया को नहीं रोकना है तो यह और भी ज्यादा पाप करते हैं ऐसे ही जब आपके साथ कोई गलत करता है आपको चोट
पहुंचना है तो पहुंचना है और आप वो चुप सते रहते हैं तो उससे सामने वाले को बाल मिलने लगता है वो आपको कमजोर समझना लगता है और आपके साथ गलत करने को वो अपना हक समझना लगता है लेकिन जब आप उसके गलत व्यवहार को उसके धर्म को रॉक लेते हैं उसका विरोध करते हैं तब वो अपनी सीमा में रहना सिख जाता है यह कलयुग है अगर इस जमाने में आपको खुश रहना है तो आपको अपनी रक्षा खुद ही करनी होगी कोई आपके साथ गलत करें तो उसको कभी नहीं सहाना चाहिए बल्कि उसका बल्कि उसका सामना
करना चाहिए गीता का पांचवा प्रदेश यह है की किसी से भी हद से ज्यादा मो कभी मत करना जिसमें भी आप सबसे ज्यादा मो लगाओगे देखना वो आपको जरूर बुलाएगी मुंह के वजह से ही आप किसी के पीछे मरते रहते हैं मो के वजह से ही आपको कई बार अपना अपमान भी सहन पड़ता है और कई लोगों को मो की वजह अपना अपमान दिखता तक भी नहीं है की सामने वाला मेरी इज्जत तक नहीं कर रहा और मैं उसके पीछे मा रहा हूं वो आपकी आंखों पे ऐसी पट्टी लगा देता है की आपको सच और
झूठ दिखा ही नहीं देता आपको किसी इंसान का चेहरा दिखाई ही नहीं देता आप जो देखते हैं जो सुनते हैं इस पर यकीन कर लेते हैं फिर चाहे आपको कितना ही दर्द मिल रहा हो अगर आप किसी इंसान को ठीक से समझना चाहते हैं इसी की सच्चाई जानना चाहते हैं तो उसके लिए यह बहुत जरूरी है की आप उसके मुंह से जल्दी से जल्दी बाहर ए जाए वास्तव में रिश्ते दुख नहीं देते आपका मुंह आपको दुख जी दिन मो खत्म उसे दिन आपको किसी भी रिश्ते से कोई दुख नहीं मिल सकता क्योंकि आपको फिर कोई
फर्क ही नहीं पड़ेगा गीता का छठ उपदेश ये है की आप वो मत करो जो सब करते हैं बल्कि वो करो जो आपके लिए सही है स्वधर्म निधन श्रेया पर धर्म भयाव है श्री कृष्णा ने अर्जुन से कहा की जो तेरा कर्तव्य है जो तेरे लिए सही है जो तुझे करना चाहिए वो कर तू कभी भी वो कम मत कर जो दुनिया कर रही है क्योंकि अर्जुन श्री कृष्णा से खाने लगा की ऐसे भयंकर युद्ध में पढ़ने से अच्छा है की मैं सन्यासी बन जाऊं तो श्री कृष्णा ने अर्जुन से कहा की सन्यासी बन्ना तेरा
कर्म नहीं है तेरा धर्म नहीं है उसे क्षत्रिय है मेरा कर्म और तेरा धर्म यही है की तू धर्म का नस करें धर्म की रक्षा करें ऐसे ही हर इंसान का एक अलग कर्तव्य होता है एक अलग ही मार्ग होता है तो कभी मत जाना जहां साड़ी भीड़ जा रही हो कभी भी वो कम मत करो जो दुनिया करती है की आजकल ये ट्रेड हो गया है यह फैशन हो गया है सब करते हैं इसलिए हम भी कर रहे हैं साड़ी भीड़ यही कम कर रही है इसलिए हम भी यही कर रहे हैं अगर आप
वो करोगे जो भीड़ कर रही है तो आप भी इस भीड़ में कहानी को जाओगे लेकिन अगर आप वो करोगे जो आपके लिए सही है जो आपकी प्रतिभा है तो दुनिया की साड़ी भीड़ में भी आप सबसे अलग नजर आओगे गीता का सातवां उपदेश यह है की जिंदगी में धोखा अपने ही देते हैं क्योंकि उनको आपकी कमजोरी का पता होता है बाहर वाला आपको धोखा नहीं दे सकता क्योंकि उसको आपके बड़े में पता ही नहीं है की आपको चोट कहां पहुंचती है लेकिन जो आपका अपना है आपका खास है उसे बहुत गहराई से पता होता
है की इसकी कमजोरी क्या है क्या ऐसा करें जिससे इसको दर्द पहुंच सकता है जिससे इसको हम निशा दिखा सकते हैं इसको चोट पहुंच सकते हैं यह कलयुग है इसमें बाहर वालों से नहीं जो हमारे अपने हैं उनसे ही सावधान रहना होता है महाभारत का युद्ध दो अलग राजाओं में नहीं हुआ बल्कि एक ही परिवार के भाइयों में हुआ था सब आपस में एक ही वंश के लोग थे कितनी बार दुर्योधन ने जहर देकर के भीम को मारना चाहा एन जान कितनी बार दुर्योधन ने पांडवों को जान से करने की कोशिश की उसका प्राय नहीं
था उसका भाई था साड़ी लड़ाइयां घर के अंदर ही होती है बाहर कौन लड़ेगा हमसे घर में ही सारे झगड़ा होते हैं तो आपको चोट सिर्फ वही लोग पहुंच सकते हैं जो आपके अपने हैं आपको दो घासरफ वही लोग दे सकते हैं जो आपके अपने हैं गीता का आठवां उपदेश ये है जो इंसान अपनी रक्षा खुद नहीं कर सकता उसकी रक्षा भगवान भी नहीं कर सकते श्री कृष्णा ने अर्जुन से कहा 10 मार्च सर्वेषु कल श मैं अनसूया युद्ध की है अर्जुन तू हर कल में मेरा स्मरण करते रहना और युद्ध भी करते रहना अर्जुन
ने श्रीकृष्ण से पूछा की यह युद्ध तो कुछ दोनों में समाप्त हो जाएगा लेकिन आप का रहे हैं की तू हमेशा तू हमेशा मेरा स्मरण करता है और युद्ध करते रहना हमेशा युद्ध करने का क्या मतलब है अर्जुन से कहा की जिंदगी ही रणभूमि है इस जीवन में सुख दुख आते रहेंगे और तुझे उनका दत के मुकाबला करना है श्री कृष्णा ने ये नहीं कहा की तू चुप करके बैठ जाना और मैं लड़ाई करूंगा बहुत गहराई है गीता के ज्ञान में हमारे जीवन की डोर भी संभल के ईश्वर बैठे हैं लेकिन युद्ध हमें ही करना
है ईश्वर को याद करना है की है ईश्वर मुझे शक्ति देना मुझे समझ देना मुझे बुद्धि देना ताकि मैं अपनी जिंदगी की साड़ी लड़ाइयां जीत सुकून मैं जिंदगी में सही मार्ग पे चल सुकून लेकिन आपको अपनी लड़ाई भी खुद लड़नी पड़ती है जो लोग यह कहते हैं की हम कुछ नहीं करेंगे सब वो ईश्वर करेगा तो कहते हैं की आलसी इंसान को देखकर तो भगवान भी घबरा जाता है ये कुछ नहीं करेगा भगवान ने बुद्धि दी है समझती है ईश्वर आपको प्रेरणा देते हैं शक्ति देते हैं लेकिन आपको अपनी रक्षा स्वयं ही करनी होगी गीता
का नवाबदेश यह है की कोई भी ऐसी गांधी की मदद खुद को मत लगे देना जो आपकी जिंदगी बर्बाद कर दे कहानी ना कहानी महाभारत का यह युद्ध एक जुआ की आदत की वजह से ही शुरू हुआ था सर खेल वही से शुरू हुआ था एक ऐसी जुआ की लट जहां युधिष्ट ने अपनी भाइयों को दानव पर लगा दिया अपनी पत्नी को दानव पर लगा दिया ऐसा जितने का नशा की अपना सब कुछ घुमा दिया ऐसे ही हम भी अपनी जिंदगी में जब कोई ऐसी गांधी आदत लगा देते हैं चाहे वो कोई भी हो चाहे
वो नसे की हो मोबाइल की हो किसी इंसान की हो कोई गलत कम करने की हो कोई भी गलत आदत जो आपको बर्बाद कर शक्ति है अगर आप उसको नहीं छोड़ोगे तो आपका सब कुछ खत्म हो जाएगा इससे पहले की आपकी आदत आपको खत्म करें आप अपनी गलत आदतों को खत्म कर दीजिए गीता का 10वां उपदेश यह है की आलसी इंसान कभी कुछ हासिल नहीं कर सकता अधिकतर लोग सिर्फ योजनाएं बनाते रहते की मुझे बड़ा घर चाहिए मुझे बड़ी गाड़ी चाहिए मैं दुनिया घूमने चाहता हूं यहां क्या चाहिए ये हर कोई सोच लेट है लेकिन
उसपे मेहनत करना वो बहुत कम लोग करते हैं क्योंकि चाहना बहुत आसन है लेकिन उसके लिए गम करना वो बहुत मुश्किल है एक अच्छा फिट शरीर हर कोई चाहता है लेकिन उसके लिए व्यायाम करना एक्सरसाइज करना वो आपको ही कर रहा होगा जो इंसान आलसी बन के बैठ जाता है ना उसे अच्छा शरीर मिलता है और ना ही अच्छा जीवन मिलता है जिंदगी में अगर कुछ पन चाहते हो ना अलसी को अपनी जिंदगी से जरूर दूर कर देना आलस के चलते आपको कुछ मिलने वाला तो नहीं लेकिन जो आपके पास है आप वह भी गम
डॉग गीता का 11वां उपदेश यह है की जिंदगी में अगर खुशी चाहते हो तो मां की गुलामी का त्याग कर दो कई लोग कहते हैं की हम करना तो बहुत कुछ चाहते हैं लेकिन कुछ कर नहीं पाते पता भी सब कुछ है की क्या करने से हमारी जिंदगी बेहतर हो शक्ति है क्या चीज है जो हमको नुकसान पहुंच रही है लेकिन फिर भी कुछ कर नहीं पाते समझते सब कुछ है लेकिन समझ कर भी छह कर भी कुछ कर नहीं पाते वो इसीलिए होता है क्योंकि आप अपने मां के गुलाम बन चुके हो अरे लोग
तो अपनी जब का स्वाद तक नहीं छोड़ पाते फिर कहते हैं की हम पतले नहीं हो पाते हैं फिट नहीं हो पाते हैं सक्सेस नहीं मिल रही है क्योंकि जो आपको करना चाहिए आपको करते नहीं हैं आपका मां सब कुछ समझकर भी आपको वो करने नहीं देता इसलिए जिंदगी में अगर आगे बढ़ाना है मां से चलना छोड़ दो जो आपके लिए सही है वो आपको करना ही पड़ेगा गीता का 12 उपदेश यह है की जो आपका है वो आपको मिलकर ही रहेगा और जो आपको नहीं मिला है उसके लिए रोना छोड़ दो आप जिसके लिए
जितना रोज वो चीज आपसे उतना दूर जाएगी और जो चीज सच में आपकी है वो कहानी ना कहानी से आपके पास जरूर पहुंच जाएगी इसलिए जो आपको जिंदगी में हासिल नहीं हो रहा यहां से नहीं हुआ उसका पछतावा करना उसके लिए रोना आप बिल्कुल बैंड कर दो गीता का 13वां उपदेश यह है की आप संसार से जितना प्रेम लगाओगे उतना ही जीवन में दुख और पीड़ा का अनुभव करोगे गीता का 14वां उपदेश यह है की जी इंसान को बात-बात पर क्रोध आता है सुख और शांति उसके जीवन में कभी नहीं ए सकते क्योंकि जो इंसान
बहुत ज्यादा क्रोधी होता है ना उसके सारे मित्र उसे छोड़कर चले जाते हैं वो मां में भी कुर्ता राहत है वह अपने मां में भी दर्द में ही जीता है तकलीफ में ही जीता है ज्यादा गुस्सा करके ज्यादा क्रोध करके जो भी आपके पास है प्रार्थना आप उसे भी नष्ट कर डॉग और ऐसे इंसान को शांति तो कभी मिलने वाली नहीं है इसलिए अपनी जिंदगी में शांति चाहते हो तो बात-बात पर गुस्सा करना छोड़ देना चाहिए गीता का 15 उपदेश ये है की चाहे आप किसी की मदद करो या ना करो लेकिन जानबूझकर कभी किसी
का दिल नहीं दुखना चाहिए क्योंकि जब किसी का दिल आपकी वजह से दुखता है ना तो याद रखना आपको भी वो दर्द एक दिन जरूर मिलेगा क्योंकि जब आप किसी का दिल दुखाता हैं तो आपको पता नहीं चला लेकिन जब कोई आपका दिल दुखता है तब आपको समझ में आता है की दिल पर चोट लगे से जितना दर्द होता है इसलिए चाहे आप किसी की मदद करो या ना करो लेकिन किसी का दिल कभी नहीं दुखना चाहिए गीता का 16वां उपदेशी है जो मुश्किल वक्त में जो दुख के समय में आपका साथ दे वही आपका
अपना है बाकी सब पराई हैं अपनेपन का नाटक करने वाले बहुत लोग होते हैं बड़ी-बड़ी बातें करने वाले बहुत लोग होते हैं की हम आपसे बहुत प्रेम करते हैं कोई भी दुख हो कोई भी तकलीफ हो हमें याद करना लोग दुख उठाने की बात करते हैं लोग आनी जान की बात करते हैं हाथ मिलन तो ठीक से नहीं जानते और दिल मिलने की बात करते हैं जब सच में आपकी जिंदगी में तकलीफ आएगी ना तब आपको समझ में ए जाएगा की आपका साथ देने के लिए कौन खड़ा है क्योंकि उसे समय पे सारे लोग भाग
जाते हैं क्योंकि लोगों को पता होता है यह व्यक्ति हमारे पास आया तो हमसे मदद ही मांगेगा हमको कुछ दे नहीं पाएगा लोग आपसे सिर्फ तभी रिश्ता रखते हैं की आप उन्हें कुछ दे सकते हैं आपसे उन्हें कुछ फायदा हो सकता है लेकिन जब लोगों को यह पता चल जाता है समझ में ए जाता है उनको आपसे कोई फायदा नहीं होने वाला बल्कि उनको आपकी मदद करनी पड़ेगी तो वो आपको दूर से ही देख के भाग जाते हैं इसलिए जो आपके मुश्किल वक्त में आपके साथ खड़ा हो जाए सिर्फ वही आपका अपना होता है बाकी
इस दुनिया में सब पर आए हैं क्योंकि सिर्फ अपना अपना का देने से कोई अपना नहीं हो जाता भिता का 17वां उपदेशी है की जो कुछ भी होता है अच्छे के लिए होता है जो हो रहा है वो भी अच्छे के लिए हो रहा है और जो आने वाले भविष्य में होगा वो भी अच्छे के लिए होगा हालांकि यह बहुत गहरी बात है कुछ चीज जिंदगी में ऐसी होती हैं जो हमें लगता है की मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ मेरे साथ ही होना था यह सब लेकिन जब वो वक्त गुर्जर जाता है एक दिन हमको
समझ आता है की अगर हमारे साथ यह सब नहीं होता तो आज हम इस मुकाम पर नहीं होते अगर मेरे साथ यह सब नहीं होता वो शायद हमारी जिंदगी और भी बर्बाद हो शक्ति थी इसलिए अगर हमको ये समझ में ए जाए की जिंदगी में जो कुछ भी हो रहा है वो सब अच्छे के लिए हो रहा है तो हम जीवन में हमेशा खुश रहेंगे गीता का 18वां उपदेशी है की हर कम को समझदारी से करना ही योग होता है योग है कर्म स कौशल्लम कई लोग कम तो करते हैं लेकिन उन्हें हासिल कुछ नहीं
होता बहुत लोग कहते हैं की हम बहुत मेहनत करते हैं तब भी जिंदगी में सफलता हासिल नहीं हो रही बहुत कुछ करने से बहुत मेहनत करने से आपको सफलता नहीं मिलेगी लेकिन सही तरीके से समझ के साथ कम करने से आपको जिंदगी में सफलता जरूर मिलेगी गीता का 19वां उपदेशी है की कभी भी किसी भी चीज की अति नहीं करनी चाहिए कोई भी चीज हद से ज्यादा मत करना किसी से प्रेम भी हद से ज्यादा मत करना किसी से नफरत भी हद से ज्यादा मत करना 8 से ज्यादा मीठा भी खराब इससे ज्यादा कड़वा भी
खराब हद से ज्यादा आराम भी आपको बीमा कर देगा हद से ज्यादा खाना भी आपको बीमा कर देगा हद से ज्यादा बुखार है ना भी आपको नुकसान पहुंचाएगा और हद से ज्यादा जगन भी आपको बहुत नुकसान पहुंचाएगा तो जीवन को संतुलन के साथ जीना चाहिए जैसे ही आप संतुलन को देते हैं वैसे ही आपके जीवन में दुर्घटना हो जाति है गीता का 20वां उपदेश यह है की जिससे आप सबसे ज्यादा महत्व डॉग वो आपको कभी महत्व नहीं देगा आपने कभी गौर किया की आपका अपमान कौन लोग करते हैं आपका अपमान सिर्फ वही लोग करते हैं
जिसे आप सबसे ज्यादा महत्व देते हैं दूसरों की इज्जत करना अच्छी बात है पर दूसरों की अगर बहुत ज्यादा इज्जत करोगे तो उनकी नजर में आपके ही इस खत्म हो जाति है इसीलिए किसी को भी कभी अपना सब कुछ नहीं बनाना चाहिए की तुम ही मेरे सब कुछ हो जैसे ही आप किसी को सब कुछ बना लेते हैं अपना तो आप उसके लिए कुछ भी नहीं र जाते इसलिए लोगों को इज्जत उतनी ही देनी चाहिए जितना वो हजम कर सके हद से ज्यादा इज्जत देना आपकी ही बेइज्जती करवा सकता है गीता का भविष्व उपदेशी है
की इसी पर भी आंख बैंड करके भरोसा मत करना जिससे महाभारत की कथा में दुर्योधन ने कितनी बार षड्यंत्र करके पांडवों को करने की कोशिश की आज में जलन की कोशिश की और वो धर्म पर चलने वाले लोग बार-बार उसकी बटन में ए जाते थे यह बात और है की ईश्वर उनकी रक्षा कर रहे थे पर जिसे वह अपना भाई समझ रहे थे जिसे वह अपना सागा समझ रहे थे जी पर वह भरोसा कर रहे थे वही उनकी मृत्यु करवाना चाहता था इसीलिए भरोसा करते समय अपनी आंखें जरूर खोलिए रखना गीता का 23वां उपदेश्या है
जिसके साथ सत्य और ईश्वर की शक्ति है चाहे साड़ी दुनिया उसके खिलाफ हो जाए लेकिन अंत में जीत इस की होती है श्रीमद् भागवत गीता में 18 अध्याय हैं 700 श्लोक हैं गीता का आखिरी श्लोक है यात्रा योगेश्वर यात्रा पार्थो धनोरा तत्र शरीर विजय और भुरटिर ध्वनि ट्रीमर धृतराष्ट्र बार-बार संजय से पूछता था की बताओ युद्ध में कौन जीत रहा है कौन हर रहा है क्योंकि उसे विश्वास था की महापात्रमी भीष्म पितामह मेरे पक्ष में हैं गुरु द्रोणाचार्य वो मेरे पक्ष में है करण मेरे पक्ष में हैं तो हमें कौन हर सकता है लेकिन संजय
हमेशा वही जितना है चाहे आपके पास कितनी भी शक्ति क्यों ना हो लेकिन लेकिन सत्य और ईश्वर जिसके साथ खड़े हो जैन उसे दुनिया में कोई भी नहीं हर सकता गीता का 24वां उपदेश है की जीवन में लड़ाई झगड़ा से बचाना चाहिए लेकिन जब बात आपके चरित्र सम्मान और अधिकार की हो तो लड़ना भी चाहिए अर्जुन भी महाभारत का युद्ध करना नहीं चाहता था क्योंकि सामने उसके अपने खड़े थे लेकिन श्री कृष्णा ने उसे उपदेश दिया की यहां पर बात लड़ाई की नहीं है तेरे सम्मान की है तेरे चरित्र की है तेरी अधिकार की है
जो द्रोपदी के साथ और उन्होंने भारी सभा में अपमान किया उसे नॉन करने की कोशिश की इतना बड़ा धर्म किया वह तुम्हें कभी नहीं सहाना चाहिए इसलिए बात जब आपके चरित्र पर ए जाए आपके सम्मान पे ए जाए तो चाहे वो अपना ही क्यों ना हो आपको उसके साथ जरूर लड़ना चाहिए गीता का 25वां उपदेशी है चाहे कितना भी बड़ा वक्त ए जाए लेकिन जो इंसान जिंदगी में हिम्मत नहीं हारता वो सब कुछ हासिल कर सकता है जब पांडव लोग हुए में सब कुछ हर गए उनको 12 साल के लिए वनवास मिला और एक साल
के लिए अज्ञातवास मिला वो भिक्षा करके अपनी जिंदगी को प्लेट थे जंगलों में भटकती रहते थे भयानक जानवरों के बीच लेकिन इतना मुश्किल वक्त झेलना के बाद भी आखरी में विजय उन्हीं की हुई क्योंकि उन्होंने अपने अंदर में कभी हिम्मत नहीं कोई थी ऐसे ही आपकी जिंदगी में कितना ही मुश्किल वक्त क्यों ना ए जाए लेकिन आपके अंदर अगर हिम्मत है तो जीत आपकी ही होगी गीता का 26 वन उपदेश यह है की जो किसी और का है उसे पर कभी अधिकार मत जमाना कभी कब्ज मत जमाना जब शकुनी ने षड्यंत्र करके पांडवों को हस्तिनापुर
से अलग करवा दिया एक खंडवा पृष्ठ का राज दे दिया जहां की भूमि भी बंजारा थी जहां कुछ नहीं हो सकता था लेकिन पांडवों ने उसे शहर को इतना सुंदर बनाया इतना वैभवशाली बनाया की हंसनापुर भी उसके आगे फीका लगे लगा और उनके उसे वैभव को देख के सुख को देख के दुर्योधन अंदर ही अंदर चला था उसने कई बेइमानिया करके षड्यंत्र करके उनका वो खंडवा प्रेस्टो भी उनसे छन लिया जो चीज उसकी नहीं थी उसे पर कब्जा किया तो उसका आखिर में परिणाम यही हुआ की जो चीज उसके पास थी वो भी उसके पास
नहीं रही इसलिए जो आपका नहीं है कभी उसे पे अधिकार नहीं जमाना चाहिए गीता का 27वां उपदेश यह है की वही इंसान जिंदगी में सफल माना जाएगा जो अंदर से हमेशा खुश राहत है बाहर से तो सब कुछ दिखाई देते हैं लेकिन अंदर से इंसान अशांति से भारत राहत है बहुत पैसा काम लिया कामयाबी हासिल कर ली लेकिन वो कामयाबी असली नहीं है असली कामयाबी तब मनी जाएगी जब आपका मां खुश राहत हो गीता का 28वां उपदेशी है की आप जैसा अनुभवोगे वैसा ही आपका मां और आपकी बुद्धि होगी अब वैसा ही कर्म करोगे वैसा
ही आचरण करोगे सात्विक अंखोगे तो आपका मां भी सात्विक होगा सात्विक व्यवहार भी करोगे तमोगुण और रजोगुणी आहार करोगे तो आपकी बुद्धि भी वैसी होगी आप कम भी वैसे करोगे श्री कृष्णा ने भागवत गीता में सातवीं और तामसी इन तीनों अहीरों का विस्तार से वर्णन किया है की क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए पर सर यही है जो मनुष्य सातवां ता से भजन करता है सात्विक भजन करता है उसे जीवन में शांति और सुख जरूर मिलते हैं गीता का 29वां उपदेशी है की बड़ा इंसान कभी अपनी बुराई नहीं छोड़ेगा चाहे आप उसके साथ कितना
भी अच्छा चलो वो आपको तकलीफ देगा ही देगा है इसलिए जो जैसा है आप उसके साथ वैसा ही व्यवहार करो बुरे इंसान के साथ आप कितना भी अच्छा बन जो वो कभी अच्छा नहीं बने वाला दुर्योधन जंगल में पांडवों को करने के लिए गया था लेकिन वहां पर भीलों ने दुर्योधन को पकड़ लिया उसका मित्र करण भी उसे छोड़कर भाग गया वो भी दुर्योधन को मार देना चाहते थे लेकिन युधिष्ठिर अपने भाई की रक्षा करने के लिए वहां पहुंच गया उसके जीवन की रक्षा की लेकिन उसके बाद भी वो हमेशा पांडवों का नुकसान ही करता
रहा इसलिए अगर कोई इंसान बड़ा है उसके साथ आप ज्यादा अच्छा बने की कोशिश मत करो जो जैसा है आप उसके साथ वैसा ही व्यवहार करो गीता का तीसरा उद्देश्य है की जो इंसान अपने केमोन को समय से खत्म नहीं करता समय की कादर नहीं करता उसकी जिंदगी का सर समय व्यर्थ में ही समाप्त हो जाता है क्योंकि समय ही आपका जीवन है अगर आप समय को व्यर्थ ही नष्ट करते रहेंगे व्यर्थ के केमोन में गाव देंगे तो आपको जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होगा अगर कुछ जिंदगी में पन चाहते हो तो समय की
कादर जरूर करना जो भी व्यक्ति गीता के इन 30 उपदेशों को रोज सुनेगा समझेगा तो जिंदगी की कितनी भी मुश्किल से मुश्किल घड़ी क्यों ना ए जाए उसे ऐसे मुश्किल समय में भी रास्ता जरूर मिल जाएगा [संगीत]