जरा एक सेकंड के लिए सोचिए। आपकी उम्र 30 पार हो चुकी है। शायद 35, शायद 40। आपने जिंदगी के कम से कम 15 से 20 साल काम करते हुए बिता दिए। मेहनत की, ओवरटाइम किया, बॉस की सुनी, डेडलाइंस पूरी की, सैलरी का इंतजार किया और फिर भी। फिर भी अगर आज कोई अचानक मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, कोई बड़ा खर्चा आ जाए, तो आपके पास इतना भी पैसा नहीं है कि आप बिना किसी से मांगे उसे हैंडल कर सकें। यह सुनने में बुरा लगता है। मैं जानता हूं। लेकिन यही सच है। और सबसे बड़ी बात यह
सिर्फ आपकी कहानी नहीं है। यह करोड़ों लोगों की कहानी है जो 30 या 40 की उम्र में भी फाइनेंशियली वहीं खड़े हैं। जहां वह 22 से 23 साल की उम्र में थे। बस ईएमआई बढ़ी है, जिम्मेदारियां बढ़ी है और बैंक बैलेंस वह वहीं का वहीं। अब सवाल यह है क्या यह इसलिए हो रहा है क्योंकि आप मेहनत नहीं करते। नहीं, मेहनत तो आप शायद जरूरत से ज्यादा करते हैं। असल प्रॉब्लम कुछ और है। और वह प्रॉब्लम इतनी गहरी है कि ज्यादातर लोगों को पूरी जिंदगी पता ही नहीं चलता कि कंगाल रहने की असली वजह क्या
है। अगर आप 30 या 40 साल के हैं और अभी भी कंगाल हैं। तो यह वीडियो सिर्फ आपके लिए है और मैं प्रॉमिस करता हूं अगर आपने इसे पूरा देखा तो आज के बाद आपकी फाइनेंशियल जिंदगी वैसी नहीं रहेगी जैसी अभी तक रही है क्योंकि आज मैं वह बातें बताने वाला हूं जो कोई नहीं बताता ना स्कूल ना फैमिली ना सोसाइटी ज्यादातर लोग सोचते हैं कि कंगाल होने की वजह कम इनकम है भाई सैलरी ही कम है क्या करें बिजनेस में प्रॉफिट नहीं आ रहा महंगाई बहुत बढ़ गई है और यह बातें सच भी है
पार्शियली लेकिन पूरा सच नहीं है। सच्चाई यह है कि कंगाल होना एक इनकम प्रॉब्लम नहीं है। यह एक पैटर्न प्रॉब्लम है। यह एक सिस्टम फेलियर है जो आपकी सोच में, आपकी डेली हैबिट्स में, आपके डिसीजन मेकिंग प्रोसेस में इतनी गहराई से बैठ चुकी है कि आपको लगता है यही नॉर्मल है। आपने नोटिस किया होगा। कुछ लोग होते हैं जो आपसे कम कमाते हैं। लेकिन उनके पास सेविंग्स हैं, इन्वेस्टमेंट्स हैं, एक प्लान है और कुछ लोग होते हैं जो लाखों कमाते हैं। लेकिन महीने के आखिर में उनका अकाउंट भी खाली होता है। इसका मतलब साफ है
पैसा कितना आता है, वह इंपॉर्टेंट है। लेकिन पैसा कैसे बिहेव करता है आपकी जिंदगी में, वह उससे कहीं ज्यादा इंपॉर्टेंट है। और अगर आप 30 या 40 के हो चुके हैं, और अभी भी कंगाल है। तो इसका मतलब यह है कि पिछले 10 से 15 सालों से एक गलत पैटर्न चल रहा है। एक गलत ऑपरेटिंग सिस्टम है जिस पर आपकी पूरी फाइनेंशियल लाइफ रन कर रही है। और जब तक आप वह ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं बदलते कोई भी सैलरी ह कोई भी बोनस, कोई भी साइड इनकम कुछ भी आपको कंगाल होने से नहीं बचा सकती। आज
इस वीडियो में मैं आपको एग्जैक्टली पांच वो डीप पैटर्न दिखाऊंगा जो 30 से 40 साल के कंगाल लोगों में कॉमन है। यह कोई जेनेरिक टिप्स नहीं है। यह वो इनविज़िबल चेन्स है जो आपको वहीं बांधे रखती है जहां आप हैं। और हर पैटर्न के साथ मैं आपको वो शिफ्ट भी बताऊंगा जो इसे तोड़ सकती है। चलिए शुरू करते हैं। पॉइंट एक आपने कंफर्ट ज़ोन को स्टेबिलिटी समझ लिया। यहीं पर ज्यादातर लोग गलती करते हैं और यह गलती इतनी सटल है कि पकड़ में ही नहीं आती। जब आप 22 से 23 साल के थे तब आपके
अंदर एक हंगर थी। एक रेस्टलेसनेस थी। आप कुछ करना चाहते थे। कहीं पहुंचना चाहते थे। लेकिन फिर एक जॉब मिली। एक रूटीन बनी। एक सैलरी आने लगी और धीरे-धीरे वह हंगर मर गई। आपने खुद को कन्विंस कर लिया कि भाई स्टेबल हूं। यही काफी है। लेकिन सच्चाई यह है कि जिसे आप स्टेबिलिटी कह रहे हैं, वह एक्चुअली स्टैग्नेशन है। स्टेबिलिटी का मतलब होता है कि आपके पास एक स्ट्रांग फाउंडेशन है जिसके ऊपर आप बिल्ड कर सकते हैं। लेकिन स्टैग्नेशन का मतलब है कि आप एक ही जगह बैठे हैं और खुद को सेफ फील करा रहे
हैं। जबकि बाहर सब कुछ बदल रहा है। इनफ्लेशन बढ़ रही है। अपॉर्चुनिटीज निकल रही हैं और आप वहीं बैठे हैं जहां 5 साल पहले थे। एक एग्जांपल दूं। एक आदमी है 35 साल का। एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है। सैलरी ठीक-ठाक है। 45 से 500 महीना। वो 5 साल से सेम पोजीशन पर है। उसने कभी कोई न्यू स्किल नहीं सीखी। कभी कोई साइड प्रोजेक्ट ट्राई नहीं किया। कभी नेगोशिएट नहीं किया रेस के लिए। क्यों भाई? जॉब तो चल रही है ना। रिस्क क्यों लें? और फिर 5 साल बाद जब इनफ्लेशन ने उसकी परचेसिंग पावर
30% कम कर दी। जब उसके बच्चों की स्कूल फीस दोगुनी हो गई। तब उसे रियलाइज हुआ कि स्टेबिलिटी एक्चुअली उसे स्लोली कंगाल बना रही थी। जेफ बेजोस ने एक बार कहा था कि रियल रिस्क यह नहीं है कि आप कुछ न्यू ट्राई करें और फेल हो जाए। रियल रिस्क यह है कि आप 10 साल तक कुछ ना करें और फिर रियलाइज करें कि जिंदगी बीत गई। और यही बात 30 और 40 के कंगाल लोगों पर परफेक्टली फिट होती है। उन्होंने रिस्क से बचने के चक्कर में अपनी पूरी फाइनेंशियल ग्रोथ को ही सैक्रिफाइस कर दिया। तो
पहली बात अगर आप 30 या 40 के हैं और कंगाल हैं तो अपने आप से यह सवाल पूछिए क्या मैं सच में स्टेबल हूं या मैं बस एक कंफर्टेबल जगह पर रुक गया हूं। क्योंकि कंफर्ट ज़ोन और कंगाली यह दोनों एक ही सड़क पर चलते हैं? बस एक दूसरे का नाम अलग है और अगर आपको लग रहा है कि यह बात हार्ड है तो रुकिए। अगला पॉइंट इससे भी ज्यादा अनकंफर्टेबल है। लेकिन जरूरी है। पॉइंट दो आप पैसा कमा रहे हैं लेकिन वेल्थ नहीं बिल्ड कर रहे। यह दूसरा सबसे बड़ा कारण है कि लोग 30
से 40 में भी कंगाल क्यों रहते हैं? और यह समझना बहुत जरूरी है। इनकम और वेल्थ। यह दो बिल्कुल अलग चीजें हैं। इनकम वह है जो हर महीने आपके अकाउंट में आती है। वेल्थ वह है जो तब भी काम करती है जब आप सो रहे होते हैं। बीमार होते हैं या काम नहीं कर रहे होते। ज्यादातर लोग पूरी जिंदगी इनकम के पीछे भागते हैं। और कमाओ और कमाओ और कमाओ। लेकिन कमाई का एक भी हिस्सा वेल्थ में कन्वर्ट नहीं होता। सारा पैसा खर्च हो जाता है। ईएमआई, रेंट, ग्रोसरी, फोन बिल, लाइफस्ट, शॉपिंग, आउटिंग्स और महीने
के एंड में बैलेंस जीरो या नेगेटिव। अब जरा सोचिए एक आदमी जो 500 कमाता है और हर महीने 5,000 इन्वेस्ट करता है, वह 10 साल बाद 12 से 15 लाख की वेल्थ बना लेगा कंपाउंडिंग के साथ। लेकिन एक आदमी जो 1 लाख कमाता है और सब खर्च कर देता है, वह 10 साल बाद भी कंगाल ही रहेगा। यह मजाक नहीं है। यह मैथमेटिक्स है और मैथमेटिक्स कभी झूठ नहीं बोलती। वारेन बफेट ने अपनी लाइफ की पहली इन्वेस्टमेंट 11 साल की उम्र में की थी। और वह आज कहते हैं कि उनकी सबसे बड़ी एडवांटेज टैलेंट नहीं
थी। इंटेलिजेंस नहीं थी। टाइम था। उन्होंने कंपाउंडिंग को जल्दी समझ लिया। और कंपाउंडिंग का सिंपल रूल यह है जितनी जल्दी शुरू करो उतना बड़ा फायदा। लेकिन अगर आप 30 या 40 के हो गए हैं और अभी तक शुरू नहीं किया तो आपने कंपाउंडिंग के सबसे पावरफुल इयर्स वेस्ट कर दिए। पर इसका मतलब यह नहीं कि अब कुछ नहीं हो सकता। अभी भी टाइम है। लेकिन अब आपको ज्यादा एग्रेसिव होना पड़ेगा। ज्यादा इंटेंशनल होना पड़ेगा। अभी भी हर महीने इन्वेस्ट करना शुरू करो। चाहे 2000 ही सही, चाहे 3000 ही सही। क्योंकि वेल्थ बिल्डिंग एक हैबिट है।
एक अमाउंट नहीं। जो लोग अमाउंट का इंतजार करते हैं, जब ज्यादा कमाऊंगा तब इन्वेस्ट करूंगा। वह कभी शुरू नहीं करते कभी नहीं। याद रखिए कंगाल वो नहीं है जो कम कमाता है। कंगाल वो है जो कमाता बहुत है लेकिन रखता कुछ नहीं। और अगर आप 30 से 40 के हो चुके हैं तो अब इनकम चस करना बंद करो और वेल्थ बिल्ड करना शुरू करो। यही वह शिफ्ट है जो आपकी जिंदगी बदलेगी। लेकिन वेल्थ बिल्ड करने से पहले एक और बड़ी दीवार है जो आपके रास्ते में खड़ी है। और वह तीसरा पॉइंट है जो शायद इस
पूरी वीडियो का सबसे इंपॉर्टेंट हिस्सा है। पॉइंट तीन आपकी सोशल इमेज आपको कंगाल बना रही है। अब जरा ध्यान से सुनिए क्योंकि यह वो बात है जो लोग सुनना नहीं चाहते लेकिन जिसे सुने बिना कोई आगे नहीं बढ़ सकता। भारत में और खासकर मिडिल क्लास फैमिलीज में एक इनविज़िबल प्रेशर होता है जिसे हम लॉग क्या कहेंगे कहते हैं। और इस प्रेशर ने लाखों करोड़ों लोगों को फाइनेंशियली बर्बाद कर दिया है। शादी में 10 से 15 लाख खर्च करने हैं। क्योंकि लॉ क्या कहेंगे? नई कार लेनी है क्योंकि पड़ोसी ने ली। बच्चों को महंगे स्कूल में
डालना है क्योंकि रिश्तेदार जज करेंगे। फेस्टिवल पर गिफ्ट्स, फंक्शनंस में दिखावा, ब्रांड के कपड़े, लेटेस्ट फोन सब कुछ इसलिए नहीं कि आपको जेनुइनली जरूरत है बल्कि इसलिए कि एक इमेज मेंटेन करनी है। और इस इमेज की कीमत क्या है? कंगाली प्योर डीप सोल क्रशिंग कंगाली जो बाहर से दिखती नहीं लेकिन अंदर से तोड़ देती है। एक रियल सिनेरियो सोचिए। एक कपल है। दोनों काम करते हैं। कंबाइंड इनकम अच्छी है। लगभग 1.5 लाख महीना। लेकिन कार लोन, होम लोन, क्रेडिट कार्ड बिल्स और हर वीकेंड की डाइनिंग सब मिलाकर उनकी सेविंग जीरो है। अगर दोनों में से
किसी एक की जॉब चली जाए तो 3 महीने में फाइनेंसियली कोलैप्स हो जाएंगे। और यह लोग बाहर से वेल सेटल्ड दिखते हैं। Instagram पर वेकेशन फोटोस, न्यू कार सेल्फीज़, एनिवर्सरी डिनर पोस्ट्स, सब कुछ परफेक्ट लेकिन बैंक अकाउंट खाली। यहीं पर चार्ली मनगर की एक बात याद आती है। उन्होंने कहा था कि सबसे तेज तरीका अमीर बनने का यह है कि आप अमीर दिखने की कोशिश करना बंद कर दें। और यह लाइन इतनी सिंपल है लेकिन इतनी पावरफुल है कि अगर आप इसे सीरियसली ले लें तो आज से ही आपकी फाइनेंशियल लाइफ बदलनी शुरू हो जाएगी।
असल खेल यहां से शुरू होता है। जब आप डिसाइड करते हैं कि मुझे किसी को इंप्रेस नहीं करना है। मुझे अपनी फाइनेंशियल हेल्थ फिक्स करनी है। जब आप यह डिसीजन ले लेते हैं तो अचानक आपको दिखता है कि कितना पैसा हर महीने बेवजह बह रहा था। कितने एक्सपेंसेस सिर्फ शो ऑफ के लिए थे। कितनी चीजें ऐसी थी जो आपकी जरूरत नहीं बल्कि दूसरों की एक्सपेक्टेशंस थी। 30 या 40 के बाद कंगाल रहने की सबसे साइलेंट वजह यही है। आप किसी और की जिंदगी जीने में अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं और जब तक यह बंद
नहीं होगा। कोई इनकम लेवल आपको बचा नहीं सकता। अगर आपने यहां तक वीडियो देखी है तो मैं जानता हूं कि आप सीरियस हैं। आप उन लोगों में से नहीं हैं जो सिर्फ मोटिवेशन सुनकर अच्छा फील करना चाहते हैं और फिर वापस वही जिंदगी जीना चाहते हैं। आप जेनुइनली बदलना चाहते हैं तो मैं आपसे एक रिक्वेस्ट करूंगा। अगले दो पॉइंट्स को बहुत ध्यान से सुनिए। क्योंकि पहले तीन पॉइंट्स ने आपको दिखाया कि प्रॉब्लम क्या है। लेकिन अगले दो पॉइंट्स वो हैं जो आपको एग्जजेक्टली बताएंगे कि अगर 30 से 40 की उम्र में कंगाली से बाहर निकलना
है तो करना क्या है? और यकीन मानिए यह दो बातें अगर आपने सीरियसली इंप्लीमेंट कर ली तो अगले 2 से तीन सालों में आपकी फाइनेंशियल रियलिटी बिल्कुल अलग होगी। पॉइंट चार आपके पास एक भी हाई वैल्यू स्किल नहीं है। यह सुनने में हारश लगेगा। लेकिन यह जरूरी है अगर आप 30 या 40 के हैं और कंगाल हैं तो बहुत हाई चांस है कि आपके पास कोई ऐसी स्किल नहीं है जिसकी मार्केट में रियल वैल्यू हो। आप रिप्लेसेबल हैं। आपकी जगह कोई और ले सकता है शायद कम सैलरी में। शायद ज्यादा एफिशिएंसी से और यही सबसे
खतरनाक पोजीशन है फाइनशियली। जब आप ईजीली रिप्लेसेबल होते हैं तो आपकी बारगेनिंग पावर जीरो होती है। आप सैलरी नेगोशिएट नहीं कर सकते। जॉब स्विच करने में डरते हैं और फ्रीलांसिंग या साइड इनकम का ऑप्शन भी नहीं होता क्योंकि आपके पास कोई ऐसी स्किल नहीं जो इंडिपेंडेंटली पैसा जनरेट कर सके। अब जरा कंपेयर कीजिए दो लोगों को। दोनों 35 साल के हैं। पहला एक जनरल एडमिन जॉब करता है। डाटा एंट्री बेसिक टास्क कुछ भी स्पेशलाइज नहीं। सैलरी 30 से 35,000 5 साल से कोई ग्रोथ नहीं। दूसरा सेम बैकग्राउंड, सेम एजुकेशन। लेकिन उसने 2 साल पहले डिजिटल
मार्केटिंग सीखना शुरू किया। उसने YouTube, कोर्सेज, प्रैक्टिस सब अपने टाइम में किया। आज वह अपनी जॉब के साथ-साथ फ्रीलांस क्लाइंट्स हैंडल करता है और कंबाइंड इनकम 1 लाख से ऊपर है। दोनों में डिफरेंस क्या है? टैलेंट नहीं, लक नहीं, स्किल एक्विजिशन। बस यही ईलॉन मस्क ने कहा था कि एक इंसान कुछ भी सीख सकता है अगर वह फीडबैक लूप को सीरियसली ले। यानी सीखो, अप्लाई करो, गलतियां देखो, सुधारो और रिपीट करो। और सबसे इंपॉर्टेंट बात आपको कोई डिग्री नहीं चाहिए इसके लिए। इंटरनेट ने सब फ्री कर दिया है। YouTube पर ऐसे ट्यूटोरियल्स हैं जो एमबीए
से ज्यादा प्रैक्टिकल हैं, प्लेटफॉर्म्स हैं जहां आप सीख भी सकते हैं और अर्न भी कर सकते हैं। लेकिन प्रॉब्लम यह है कि ज्यादातर लोग अपना फ्री टाइम Instagram रील्स और क्रिकेट हाईलाइट्स में वेस्ट करते हैं और फिर कंप्लेन करते हैं कि टाइम नहीं है। टाइम सबके पास इक्वल है। 24 घंटे। डिफरेंस यह है कि कोई उन 24 घंटे में से एक से दो घंटे स्किल बिल्डिंग में लगाता है और कोई उन्हें एंटरटेनमेंट में जला देता है और फिर 30 से 40 की उम्र में दोनों की फाइनेंशियल रियलिटी बिल्कुल अलग होती है। एक वेल्थ बिल्ड कर
रहा होता है। दूसरा अभी भी कंगाल। तो अगर आप सीरियसली कंगाली से बाहर निकलना चाहते हैं तो आज ही डिसाइड कीजिए एक स्किल बस एक जो मार्केट में डिमांड में है। और अगले छ महीने उसे सीखने में लगा दीजिए। यह आपकी जिंदगी बदल सकता है। गारंटीड। अब लास्ट पॉइंट और यह पॉइंट शायद सबसे ज्यादा ओवरलुक्ड है। लेकिन सबसे ज्यादा पावरफुल भी। पॉइंट पांच। आपने फाइनेंशियल डिसिप्लिन को बाद में के लिए छोड़ रखा है। यही वो बात है जो लोग समझते ही नहीं। हर कंगाल इंसान के पास एक कॉमन डायलॉग होता है। अभी तो सिचुएशन टाइट
है। जब थोड़ा सेटल हो जाऊंगा तब सब मैनेज करूंगा। लेकिन वो तब कभी नहीं आता। कभी नहीं। फाइनेंशियल डिसिप्लिन का मतलब यह नहीं है कि आप कंजूस बन जाए। इसका मतलब यह है कि आप अपने पैसे के बारे में कॉन्शियस डिसीजंस लें। यह जाने कि हर महीने कितना आ रहा है, कितना जा रहा है, कहां जा रहा है और क्या उसमें से कुछ फ्यूचर के लिए बचाया जा रहा है। एक बहुत सिंपल सा एक्सपेरिमेंट करिए। अगले महीने अपने हर एक खर्चे को लिखिए। चाय से लेकर ईएमआई तक। महीने के एंड में देखिए कि कितना पैसा
ऐसे खर्चों में गया जो एक्चुअली जरूरी नहीं थे। मैं गारंटी देता हूं आप शॉक्ड रहोगे क्योंकि ज्यादातर लोगों की इनकम का 20 से 30% ऐसे खर्चों में जाता है जो पूरी तरह अवॉयडेबल है। छोटे-छोटे खर्चे, ऑनलाइन शॉपिंग, फूड डिलीवरी, सब्सक्रिप्शन जो यूज़ नहीं होती। इंपल्स परचेसेस यह सब मिलकर एक बड़ा होल बनाते हैं। और यहीं पर एक कांसेप्ट आता है। जिसे कहते हैं पे योरसेल्फ फर्स्ट। यानी जब सैलरी आए तो सबसे पहले एक फिक्स्ड अमाउंट चाहे 10% ही सही उसे सेविंग्स या इन्वेस्टमेंट में डालो। बाकी में से खर्चा चलाओ। ज्यादातर लोग उल्टा करते हैं। पहले
खर्चा करते हैं और फिर जो बचा उसे सेव करने की सोचते हैं। लेकिन कुछ बचता ही नहीं। कभी नहीं बचता। क्योंकि एक्सपेंसेस हमेशा इनकम को फिल कर लेते हैं। यह पार्किंस लॉ है। एक और बात फाइनेंशियल डिसिप्लिन सिर्फ सेविंग नहीं है। यह अननेसेसरी डेप्ट से बचना भी है। क्रेडिट कार्ड्स, पर्सनल लोंस, कंज्यूमर लोंस यह सब आपको तुरंत सेटिस्फेक्शन देते हैं। लेकिन लॉन्ग टर्म में आपको कंगाल बनाते हैं। हर ईएमआई जो आप किसी डिप्रिशिएटिंग एसेट के लिए चुका रहे हैं। चाहे वह फोन हो, गैजेट हो या कार लोन। वह आपके फ्यूचर वेल्थ को खा रही है।
वारेन बफेट ने कहा है कि अगर आप उन चीजों को खरीदते हैं जो आपको चाहिए नहीं तो जल्दी ही आपको उन चीजों को बेचना पड़ेगा जो आपको चाहिए। और यह लाइन इतनी सच है कि इसे हर कंगाल इंसान को अपने दिमाग में टैटू करवा लेना चाहिए। 30 या 40 की उम्र में कंगाल रहना अगर बदलना है तो फाइनेंशियल डिसिप्लिन को समड़े से टुडे पर लाना होगा। आज से अभी से कोई और तरीका नहीं है। तो चलिए एक बार सब समराइज करते हैं। लेकिन सिर्फ समराइज नहीं बल्कि रियली फील करते हैं कि यह पांच बातें क्या
कह रही हैं। पहला आपने कंफर्ट जोन को स्टेबिलिटी समझ लिया और स्टैग्नेशन में जी रहे हैं। दूसरा आप इनकम तो जनरेट कर रहे हैं लेकिन वेल्थ बिल्ड नहीं कर रहे। कंपाउंडिंग का कोई बेनिफिट आपको नहीं मिल रहा। तीसरा सोसाइटी की इमेज मेंटेन करने में आप अपनी फाइनेंशियल हेल्थ डिस्ट्रॉय कर रहे हैं। चौथा आपके पास कोई हाई वैल्यू स्किल नहीं है जो आपकी अर्निंग पोटेंशियल को मल्टीप्लाई कर सके। और पांचवा फाइनेंशियल डिसिप्लिन को आपने हमेशा बाद में के लिए पोस्टपोन किया है और वह बाद में कभी नहीं आया। अब अगर आप ऑनेस्ट हैं अपने आप से
तो इनमें से कम से कम तीन से चार बातें आप पर डायरेक्टली अप्लाई होती हैं। और यही वह रीजन है कि 30 या 40 साल की उम्र में भी आप फाइनेंशियली कंगाल हैं। लेकिन यह वह रीजंस भी हैं जो फिक्सेबल हैं। हर एक इनमें से किसी के लिए भी आपको अमीर घर में पैदा होने की जरूरत नहीं है। बड़ी डिग्री की जरूरत नहीं है। कनेक्शंस की जरूरत नहीं है। बस डिसीजन की जरूरत है। एक फर्म क्लियर नॉन नेगोशिएबल डिसीजन कि अब बस अब और नहीं अब मैं बदललूूंगा और लास्ट में एक बात कहूंगा जो शायद
सबसे इंपॉर्टेंट है। 30 या 40 की उम्र लेट नहीं है। बहुत सारे लोग सोचते हैं कि अब क्या होगा? बहुत देर हो गई। एब ट्रेन निकाल गई। लेकिन यह सबसे बड़ा झूठ है जो आप खुद को बोलते हैं। कॉलोनल सैंडर्स ने केएफसी 62 साल की उम्र में शुरू किया था। जैक मां को 30 बार रिजेक्ट किया गया और उन्होंने अलीबाबा 35 में शुरू किया। वेरा वांग ने फैशन डिजाइनिंग 40 की उम्र में शुरू की। लेट कुछ नहीं होता। लेट तब होता है जब आप ट्राई ही ना करें। आप 30 के हैं। आपके पास अभी 30
साल और हैं प्रोडक्टिव लाइफ के। आप 40 के हैं। आपके पास 20 साल और हैं। यह कम नहीं है। 20 साल में एंपायर्स खड़े होते हैं। अगर सही डायरेक्शन में मेहनत हो। लेकिन स्टार्टिंग पॉइंट वही है। आज यह वीडियो, यह मोमेंट। अगर आपने इसे पूरा देखा तो आप ऑलरेडी अलग हैं। ज्यादातर लोग दो मिनट में स्क्रॉल कर देते लेकिन आपने स्टे किया। आपने सुना आपने अपनी अनकंफर्टेबल ट्रुथ्स फेस की और यही क्वालिटी, यही डिसिप्लिन आपको आगे ले जाएगी। तो अब फोन रखिए। एक कागज उठाइए और लिखिए। मेरे अगले 6 महीने का फाइनेंशियल प्लान। कितना बचाना
है, कौन सी स्किल सीखनी है, कौन से बेवजह के खर्चे कट करने हैं, लिखिए, एक्शन लीजिए। क्योंकि मोटिवेशन टेंपरेरी होता है। एक्शन परमानेंट रिजल्ट्स देता है। अगर आप 30 या 40 के हैं और अभी भी कंगाल हैं, तो यह वीडियो आपके लिए एक सिग्नल है। एक वेकअप कॉल। अब डिसीजन आपका है कि आप इस सिग्नल को इग्नोर करते हैं या अपनी जिंदगी बदलते हैं।