दोस्तों, दिल्ली के किराए के मकान में एक परिवार पिछले 14 सालों से रह रहा था। उसी परिवार में एक 18 साल की लड़की थी जिसकी शादी तय हो चुकी थी। लेकिन वह शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि उसे आगे की पढ़ाई करनी थी। कुछ बनकर दिखाना था। लेकिन उसके मां-बाप उसकी शादी की जिद पर अड़े थे, वह लड़की फिलहाल पिछले 14 सालों से जिस मकान में रह रही थी, उसी मकान के मालिक से मदद मांगती है। अपने मां-बाप को समझाने के लिए कहती है। अब उस मकान मालिक के दखल अंदाजी से उसके माता-पिता तो मान
जाते हैं लेकिन दोस्तों वो लड़की और भी बुरी तरीके से फंस जाती है। दोस्तों क्या कुछ होता है? एक दिलचस्प कहानी है। आइए जानते हैं पूरी कहानी इस वीडियो में। लेकिन वीडियो में आगे बढ़ने से पहले बस यही रिक्वेस्ट वीडियो को लाइक कर दीजिए। चैनल को भी सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि मेरा हौसला बढ़ता रहे। दोस्तों, यह कहानी है दिल्ली के बसंत कुंज इलाके की। एक व्यक्ति जिनका नाम रोशन अग्रवाल होता है, वह दिल्ली के बसंत कुंज इलाके में उनका तीन मंजिलों का मकान होता है। एक मंजिल पर वो खुद रहते थे। बाकी के दो मंजिल
उन्होंने किराए पर चढ़ा रखे थे। छह कमरे थे और उसमें छह किराएदार रहते थे। उसी मकान के कमरे में एक बिहार का परिवार रहता था जिसमें माता-पिता और एक बेटी थी। 2004 से वो लोग रह रहे थे। बात है 2018 की जब उनकी बेटी 18 साल की हो गई तब वह 12वीं पास करती है और उसके माता-पिता बिहार में ही यानी कि गांव में उसकी शादी तय कर देते हैं। लेकिन वह आगे पढ़ना चाहती थी। पढ़ाई लिखाई में होशियार थी। तो वह अपने माता-पिता से रिक्वेस्ट करती है कि मैं भी शादी नहीं करूंगी। लेकिन वो
नहीं मानते हैं तो फिर वो अपने मकान मालिक से संपर्क करती है जिनका नाम रोशन अग्रवाल होता है और उनकी पत्नी उनके साथ रहती थी। वो उन पति-पत्नी से मदद मांगती है और कहती है कि मेरे माता-पिता को समझाओ। मैं आगे की पढ़ाई करना चाहती हूं। तो रोशन अग्रवाल उसके माता-पिता को समझाते हैं। लेकिन वो कहते हैं कि भाई साहब जुग जमाना खराब है और हमारे गांव में इससे भी कम उम्र की लड़कियों की शादी हो चुकी है। अगर गांव में होती तो अब तक कब की हो गई होती। अब इसकी उम्र 18 साल की
हो गई है तो इसकी शादी करनी जरूरी है। लेकिन वह समझाते हैं कि और लड़कियों में तुम्हारी लड़कियों में फर्क है। यह सीधी शादी है। भोलीभाली है। इसमें कोई बुराई नहीं दिखती। रोशन अग्रवाल की जो पत्नी थी वह कहती हैं मैं तो इसे जब 4 साल की थी जब आप लोग आए थे यहां पर तब से जान रही हूं यह बहुत अच्छी लड़की है फिर वो कहते हैं कि फिर हम खर्चे कहां से लाएंगे इसको कॉलेज में पढ़ाने के लिए क्योंकि गांव में मेरे बूढ़े माता-पिता हैं और भी खर्चे हैं और हम मैं किसी तरीके
से गुजारा करता हूं दिहाड़ी मजदूरी का वह काम करते थे। अब दोस्तों जब खर्चे की बात आती है तो रोशन अग्रवाल कहते हैं कि अगर तुम खर्चे से डर रहे हो तो डरने की कोई बात नहीं है। तुम मुझे जो ₹2500 हर महीने का किराया देते हो वो आज से मत देना जब तक तुम्हारी बेटी पढ़कर कुछ बन नहीं जाती। इसे पढ़ाओ और तुम्हें किराया देने की जरूरत नहीं है। और अगर यह भी ध्यान रखो कि अगर यह पढ़ लिख के कुछ बन जाएगी तो तुम्हारी एक ही औलाद है। तुम्हारे बुढ़ापे का सहारा भी बन
सकती है। तो इसीलिए तो तुम बेफिक्र होकर इसको पढ़ाओ। अब दोस्तों, जब उनकी यह बात सुनते हैं सृष्टि के माता-पिता, तो उनका एहसान जताते हैं और कहते हैं जब आप इतनी मदद कर रहे हैं, तो मैं अपने बेटी को अब जरूर पढ़ाऊंगा। दोस्तों, वह आगे की पढ़ाई में लग जाती है। फिलहाल वो बीकॉम में एडमिशन लेती है और फिर वह मेहनत से पढ़ने लगती है। अब दोस्तों, 2 साल बीतते हैं, लेकिन मामला तब खराब हो जाता है जब उस मकान मालिक का एक बेटा होता है जिसका नाम आदित्य होता है। जो अभी मात्र 10वीं में
पढ़ रहा था। उसकी उम्र 16 साल की होती है। वह जो है सृष्टि से एक तरफ़ा प्यार करने लगता है। जबकि सृष्टि की उम्र जो है उससे 4 साल ज्यादा होती है। वो किसी ना किसी बहाने उसके कमरे पर आ जाता था। अब वो उसके कपड़ों की तारीफ करता। उसके खूबसूरती की तारीफ करता। यह बात जो है सृष्टि समझ जाती है। तो उससे कहती है कि बच्चों तुम बिगड़ रहे हो। पढ़ाई पर ध्यान दो और इस तरीके से मेरी तारीफ मत किया करो। लेकिन दोस्तों वह जो है उससे प्यार की इज़हार कर देता है और
हां ना में जवाब मांगता है। सृष्टि कहती है कि तुम अभी बच्चे हो। मुझसे 4 साल छोटे हो। तुम्हारा दिमाग खराब है। तुम ये क्या कह रहे हो? कोई सुनेगा तो क्या कहेगा? वो कहता है मुझे किसी की परवाह नहीं। बस तुम हां कर दो। अब वो जो है सीरियस हो जाता है। सृष्टि कहती है कि अगर तुम ऐसे करोगे तो मैं तुम्हारी मम्मी से कह दूंगी। वह कहता है कि अगर मम्मी से कह दोगी तो मैं मर जाऊंगा। वो उसे उसे धमकी देने लगता है। सृष्टि जो है अब उसे समझ में नहीं आता कि
करें तो क्या करें। उससे कहती है कि कब से तुम यह सब सोच रहे हो। तो वह कहता है कि छ महीनों से मैं तुम्हारे बारे में सोचता हूं। मुझे नींद नहीं आती। मुझे चैन नहीं मिलता। फिल्मी डायलॉग मारने लगता है। सृष्टि असमंजस में पड़ जाती है कि अगर इसे मना करती हूं तो मरने की धमकी दे रहा है और मुझसे 4 साल छोटा है। अभी इसने इसके समझ लो 16 साल का है। इसे कुछ समझ तो है नहीं। तो अब इसे क्या ही कहूं। तो वो आदित्य से कहती है कि ठीक है मैं तुम्हें
2- 4 दिन में जवाब दूंगी। अब आदित्य जो है दो-चार दिन बाद फिर उससे मिल जाता है। मिल क्या जाता है? एक ही मकान में रहते थे। तो आ जाता है और पूछता है तुमने क्या सोचा है? सृष्टि ने बोला कि ठीक है जैसा तुम कह रहे हो वैसा मैंने भी सोचा है। लेकिन अभी जब मैं कुछ करके बन जाऊंगी अपनी पढ़ाई पूरी करके और तुम भी पढ़ाई पर ध्यान दो तो तब तक हम दोस्त बनकर रहते हैं और जैसे मैं कुछ कामयाब हो जाऊंगी तो फिर हम प्यार के बारे में सोचते हैं। लेकिन इस
बीच में तुम मुझे ना तो परेशान करना ना ही मुझे बदनाम करना। अब जो आदित्य था वह इस बात पर सहमत हो जाता है और उससे प्रॉमिस कर लेता है कि कहीं तुम धोखा तो नहीं दोगी। अब सृष्टि को हंसी आती है। वह कहती है यार मैं तुम्हें धोखा क्यों दूंगी? जब होगा तब देखा जाएगा। अभी फिलहाल अपने-अपने काम पर ध्यान देते हैं। अब दोस्तों आदित्य मान जाता है। सृष्टि सोचती है कि चलो कम से कम मुसीबत टली। लेकिन दोस्तों वह गलत सोच रही थी। जो आदित्य था, वह मन ही मन उस बात को ठान
लेता है और फिर वह पढ़ाई में लग जाता है। धीरे-धीरे साल दर साल वक्त गुजरता गया। दोनों अच्छे से दोस्त बनकर रहे। एक दूसरे से प्यार भरी बातें भी कर लेते थे। तो सृष्टि थी उसका दिल रखने के लिए उसके हां में हां मिलाती रही। लेकिन जब छ साल बीत गए। सृष्टि जो है उसका कोर्स कंप्लीट हुआ। बीकॉम करने के बाद भी उसने 2 साल का कोर्स कर लिया और उसके बाद वो एक प्राइवेट कंपनी में ₹25,000 महीने पर नौकरी भी करने लगी। उसकी उम्र 24-25 साल की हो गई और यह भी 20 साल का
हो गया। तो अब एक दिन वो आता है और इत्तेफाक से घर पर कोई नहीं था। आदित्य के भी माता-पिता नहीं थे। सृष्टि के भी माता-पिता नहीं थे। उस दिन सृष्टि की छुट्टी थी। अपने घर पर ही थी। तो वो आ जाता है उसके पास और कहता है कि देखो अब तुम्हें नौकरी भी मिल गई और मैं भी जो है ग्रेजुएशन कर रहा हूं। तो अब बताओ आगे क्या करना है? वो बोली कि आगे क्या करना है? तो उसने कहा कि शादी के बारे में क्या सोचा है? अब सृष्टि जो है उससे टालमटोल करने लगी।
तो वह समझ गया कि शायद यह मुझे झांसा दे रही है। तो इसीलिए वह अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने की बात करने लगा। उससे दोस्तों वह संबंध बनाने के लिए कहने लगा। सृष्टि जब सुनती है तो उसका मुंह खुला का खुला रह जाता है। वह उसे मना करती है लेकिन वह अब उस पर उतारू हो जाता है। कहता है कि इसका मतलब तुम किसी और से प्यार करती हो। वो कहती है कि नहीं ऐसी बात नहीं मैं किसी से प्यार नहीं करती। लेकिन अभी यह वक्त नहीं है। अभी तो मुझे और भी आगे कुछ करना
है। तुम्हें भी बहुत कुछ आगे करना है। और यह तुम्हारी क्या हरकत है। लेकिन दोस्तों अब वो समझ चुका था। वह और मौका देना नहीं चाहता था। वो जो है उससे जबरदस्ती करने लगता है। सृष्टि उसे मना करती है। वो अपनी जिद पर उतारू हो जाता है। उसे इमोशनल ब्लैकमेल भी करने लगता है। कहता है कि मान जाओ वरना मैं अपनी जान दे दूंगा। तो कहती है कि जाओ तुम्हारी जो मर्जी वो कर लो। मैं किसी और से प्यार करती हूं और मैं तुम्हारी नहीं हो सकती। आदित्य जो है जब उसकी यह बात सुनता है
तो फिर वह वहां से चला जाता है और अपने में कमरे में जाकर कुंडी बंद कर लेता है। जब कुंडी बंद कर लेता है सृष्टि उसके बारे में सोचती है कि अब क्या करूं? उसने पिछले 6 सालों से किसी से भी इस बात की चर्चा नहीं की थी। उसे इसी बात का डर लग रहा था कि अगर मैं किसी से कुछ बोलूंगी तो यह धमकी दे रखा है मैं कुछ कर लूंगा। और आज देखो वो चला गया। क्या पता वो कुछ कर ही ना ले। वह जाती है उसके कमरे पर। उसका दरवाजा पीटती है। वह
अंदर से कुंडी बंद कर लेता है। शोर मचाती है। कहती है दरवाजा खोलो। मैं झूठ बोल रही हूं। मैं किसी से प्यार नहीं करती। सिर्फ तुमसे प्यार करती हूं। लेकिन दोस्तों वो दरवाजा नहीं खोलता। वो जो है उसे जो करना था उसकी तैयारियों में अंदर ही अंदर लगा था। अब वह शोर मचाती है। जब दरवाजा पीटने की आवाज और किराएदारों को के कानों में पड़ती है। तो वह भी आ जाते हैं और उसके बाद फिर पूछते क्या हुआ? को बताती है कि अंदर यह जो है अपना सारा मामला नहीं बताती है और कहती है कि
कुछ नाराज चल रहा था और ऐसे-ऐसे धमकी दे रहा था। पता नहीं अंदर उसने कुंडी मार रखी है। अब किसी ने उसके मां-बाप को फोन किया जो कि पास में ही उनकी दुकान थी। उसके पिताजी भाग कर आते हैं। पड़ोसी लोग दरवाजा तोड़ने की कोशिश करते हैं और जैसे ही दोस्तों दरवाजा तोड़ते हैं तो सबके पैरों तले जमीन खिसक जाती है। क्योंकि जो आदित्य था वो लटक चुका था। लेकिन जस्ट अभी-अभी वह लटका ही था कि लोग जाकर उसे पकड़ लेते हैं। उसे फिलहाल नीचे उतारते हैं। उसके गले से जो भी उसने बांध रखा था
उसको छुड़ाते हैं। और फिर उसके बाद पास में ही एक नोट पड़ा था। जैसे ही नोट उसके पिताजी यानी कि रोशन अग्रवाल पढ़ते हैं तो उन्हें समझते देर नहीं लगती है कि मामला क्या है। फिलहाल जो आदित्य था वो होश में था और उसकी जान बच जाती है और सृष्टि के माता-पिता भी वहां पर उसकी जो मां थी वो आ जाती है। उसके पिताजी काम पर गए थे। अब जब यह सारा मामला समझ में आता है तो उसकी जो आदित्य की मां थी वह भड़क जाती हैं। उन लोगों को उल्टा सीधा कहने लगती है कि
तुम एहसान फरामोश हो। पांच छह सालों तक हमने किराया नहीं लिया और तुम पढ़ लिखकर अंदर ही अंदर यह सब कर रही थी। मुझे पता नहीं था। लेकिन सृष्टि जो है उन्हें रो-रो कर पिछले 6 सालों की सारी कहानी बताती है कि कैसे-कैसे क्या कुछ हो रहा था। कैसे-कैसे क्या कुछ चल रहा था और आज जो भी कुछ हुआ था। सारी बातें बताती हैं। सारी बातें सुनने के बाद अब जो सृष्टि की मां थी वह तो रोने चिल्लाने लगती है। कहती है कि इसीलिए मैं कह रही थी जुग जमाना खराब है। ऐसा है वैसा है।
अब दोस्तों जब आदित्य की मां सृष्टि से कहने लगी कि जब तुम किसी और से प्यार करती थी तो मेरे बेटे को क्यों फंसाया? इस पर सृष्टि ने कहा कि आंटी मैं किसी से प्यार नहीं करती। यह सच बात है। मैं किसी से प्यार नहीं करती। अगर मैं थोड़ा बहुत प्यार करती थी तो आदित्य से प्यार करती थी। लेकिन मैंने अपने तरफ से कभी भी इज़हार नहीं किया क्योंकि आप लोगों के एहसानों तले हम लोग दबे थे। आपने इतना एहसान किया कि मैं छ सालों तक पढ़ पाई। आज इस मुकाम पर हूं कि अपने मां-बाप
का और अपना पेट पाल सकती हूं। मैं आप लोगों के साथ विश्वासघात नहीं कर सकती थी। इसीलिए मैंने कभी भी अपने तरफ से आदित्य के लिए इज़हार भी नहीं किया। और सच बात है कि मैं अगर किसी से थोड़ा बहुत भी प्यार किया है तो आदित्य से ही किया है। लेकिन मेरी इतनी औकात नहीं कि मैं आदित्य से शादी करने के लिए सोचती। इसीलिए मैंने कभी भी यह बातें आदित्य से नहीं कही। आदित्य एक अच्छा लड़का है। इसे कोई भी अच्छी लड़की मिल सकती है। आपकी बराबरी की लड़की मिल जाएगी। इसीलिए मैंने जो है चाहते
हुए भी कभी इज़हार नहीं किया। जब उसकी यह बात रोशन सुनते हैं तो कहते हैं कि बेटा तुमसे अच्छी लड़की नहीं चाहिए। अगर तुम भी इससे प्यार करती हो तो हमें कोई ऐतराज नहीं है। यह तुम्हारा हमारे ऊपर एहसान होगा। अगर तुम आदित्य से शादी करती हो क्योंकि तुमसे अच्छी लड़की तो हमें मिल ही नहीं सकती। रही बात बराबरी की तो पैसों से कोई बराबरी नहीं होता। अरे बराबर की लड़कियां तो हमको ढूंढे से भी नहीं मिलेंगी। तो इसीलिए तुम्हारा एहसान होगा अगर तुम हमारी बहू बनना स्वीकार करोगी। जब यह बात सृष्टि सुनती है दोस्तों
आदित्य को पसंद करती थी। ऐसा नहीं था उसे नहीं पसंद करती थी। लेकिन बस डर की वजह से कभी उससे वह प्यार का इज़हार नहीं कर पाई थी। लेकिन जब उसके मां-बाप की यह बात सुनती है तो दोस्तों उसकी आंखों में आंसू आ जाते हैं और फिर इस रिश्ते को मंजूरी मिलती है। दोस्तों यह सारा ड्रामा जो हुआ था वो 2024 में हुआ था और अब दोनों शादी करने की तैयारी कर रहे हैं। दोनों में प्यार है और जल्द ही शादी करने वाले हैं। तो दोस्तों, यह रही कहानी। क्या जो सृष्टि के साथ हुआ वह
सही हुआ या गलत हुआ? आप कमेंट में जरूर बताएं और यह वीडियो अच्छी लगी हो तो लाइक नहीं किया तो लाइक कर दीजिए। चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए इसी प्रकार की कहानियों के लिए। फिर मिलेंगे अगले वीडियो में।