क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया के सबसे महान निवेशकों में गिने जाने वाले वॉरेन बफेट ने अपनी जिंदगी में कभी लॉटरी नहीं जीती? कभी रातों-रात अमीर बनने का सपना नहीं बेचा। फिर भी आज उनकी दौलत इतनी ज्यादा है कि कई देशों के बजट से [संगीत] भी बड़ी मानी जाती है। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह नहीं है। हैरान करने वाली बात यह है कि अगर आज बफेट के पास सिर्फ 20 या 25 साल की उम्र होती, बहुत कम पैसे होते, कोई बिजनेस नहीं होता, कोई बड़ा पारिवारिक बैकग्राउंड नहीं होता जैसे देश में फिर
से शुरुआत करनी पड़ती, तो क्या वह अपना पहला 1 करोड़ बना पाते? उनका जवाब था, हां। क्योंकि बफेट का मानना है कि करोड़पति बनने का राज ज्यादा पैसे कमाने में नहीं, तरीके से सोचने में छिपा होता है। दोस्तों, दुनिया में करोड़ों लोग हर महीने सैलरी कमाते हैं। से बहुत कम लोग ऐसे होते हैं में पहला 1 [संगीत] करोड़ बना पाते हैं। आखिर ऐसा क्यों? क्या उनकी किस्मत खराब होती है? पास अच्छी नौकरी नहीं होती? असली वजह कुछ और होती है? बफेट कहते हैं कि अमीर और गरीब इंसान के बीच सबसे बड़ा फर्क उसकी इनकम नहीं,
सोच होती है। जैसे ही पैसा कमाता है, वह उसे खर्च करने के बारे में सोचता है। दूसरा इंसान उसी पैसे से ऐसा एसेट खरीदने के बारे में सोचता है जो आने वाले सालों तक उसके लिए पैसा कमाता रहे। सा फर्क आगे चलकर करोड़ों का फर्क बन जाता है। में हम बफेट की उसी सोच को समझेंगे दुनिया का सबसे सफल निवेशक बनाया। कि अपना पहला 1 करोड़ बनाने के लिए सबसे पहले आपको क्या बदलना होगा। ऐसी गलतियां हैं जो 90% लोग बार-बार करते हैं ऐसे प्रिंसिपल्स हैं जिन्हें अगर आपने आज से अपनी जिंदगी में लागू कर
दिया, तो आने वाले वर्षों में आपकी फाइनेंशियल जर्नी पूरी तरह बदल सकती है। लेकिन ध्यान रखिए, यह वीडियो कोई जल्दी अमीर बनने का फार्मूला नहीं है। यहां आपको कोई शॉर्टकट, [संगीत] ट्रेडिंग ट्रिक या ओवरनाइट सक्सेस स्टोरी नहीं मिलेगी। क्योंकि बफेट हमेशा कहते हैं कि जो इंसान जल्दी अमीर बनने के पीछे भागता है, वह अक्सर लंबे समय तक अमीर नहीं रह पाता। इसलिए, अगर आप सच में अपना पहला एक [संगीत] करोड़ बनाना चाहते हैं और चाहते हैं कि वह सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि आपकी रियलिटी बने, तो इस वीडियो को आखिर तक जरूर देखिए। है अगले
कुछ मिनटों में आपको पैसे के बारे में ऐसी बातें पता चलें, जो आज तक किसी स्कूल, कॉलेज या नौकरी ने आपको कभी नहीं सिखाई। अब सबसे पहला सवाल, आखिर एक करोड़ ही क्यों? लाख काफी नहीं है? करोड़ का सपना नहीं देखना चाहिए? बफेट का मानना था कि किसी भी बड़ी मंजिल तक पहुंचने के लिए पहले एक ऐसा माइलस्टोन होना चाहिए जो आपकी सोच बदल दे। लोगों के लिए वह माइलस्टोन होता है एक करोड़। क्योंकि पहला एक करोड़ [संगीत] सिर्फ पैसे का आंकड़ा नहीं होता। का सबूत होता है कि अब आपने पैसे के लिए काम करना
थोड़ा कम को अपने लिए काम पर लगाना थोड़ा ज्यादा शुरू कर दिया है। लेकिन यहीं पर ज्यादातर लोग पहली गलती कर बैठते हैं। उन्हें लगता है कि करोड़पति बनने के लिए सबसे पहले ज्यादा पैसे कमाने पड़ेंगे। हैं, नहीं। अगर सिर्फ ज्यादा कमाने से लोग अमीर बनते, तो दुनिया में सबसे ज्यादा करोड़पति सिर्फ हाई सैलरी वाले लोग ही होते। लेकिन हकीकत कुछ और है। बहुत से लोगों को देखा होगा जिनकी सैलरी लाखों में होती है। के आखिर में उनका बैंक बैलेंस लगभग खाली होता है। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो शुरुआत में
बहुत साधारण कमाई करते हैं। लेकिन धीरे-धीरे बड़ी संपत्ति खड़ी कर लेते हैं। तो दोनों के बीच फर्क कहां है? फर्क है उनके मनी सिस्टम में। बफेट कहते हैं कि आपकी इनकम आपको अमीर नहीं बनाती। आपकी मनी हैबिट्स आपको अमीर बनाती है। जरा सोचिए, अगर आप हर महीने शून्य रुपए कमाते हैं। लेकिन उसमें से एक भी रुपया ऐसा नहीं है जो भविष्य में आपके लिए पैसा कमाए। तो अगले 10 साल बाद भी आपको हर महीने फिर से शून्य रुपए कमाने के लिए उतनी ही मेहनत करनी पड़ेगी। लेकिन अगर उसी इनकम का एक हिस्सा ऐसे एसेट्स में
जाने लगे जो हर साल आपकी नेटवर्थ बढ़ाते रहे। तो धीरे-धीरे आपकी कमाई सिर्फ आपकी नौकरी या बिजनेस पर निर्भर नहीं रहेगी। यहीं से वेल्थ बननी शुरू होती है। इसे समझने के लिए एक छोटी सी कहानी सुनिए। मान लीजिए दो दोस्त हैं राहुल और अर्जुन। दोनों की उम्र 25 साल है। नौकरी एक जैसी है। सैलरी भी लगभग बराबर है। दोनों के अकाउंट में ₹500 आते हैं। [संगीत] राहुल सोचता है जिंदगी एक ही बार मिली है। पहले अपने सारे शौक पूरे करता हूं। मोबाइल खरीद लेता है। महंगे कपड़े लेता है। वीकेंड पर बाहर घूमता है और महीने
के आखिर में उसके पास बचते हैं लगभग रुपए। को देखिए। वह भी अपनी जिंदगी एंजॉय करता है। महीने सबसे पहले अपने भविष्य को पे करता है। यानी जैसे ही सैलरी आती है वह उसका एक हिस्सा ऐसे एसेट्स में लगाता है [संगीत] जिनकी वैल्यू समय के साथ बढ़ सकती है। बाकी पैसों से वह अपना खर्च चलाता है। ध्यान दीजिए। दोनों की इनकम बराबर है। लेकिन उनकी सोच अलग है। कहते हैं जिंदगी में सबसे बड़ा कंपाउंडिंग सिर्फ इन्वेस्टमेंट का नहीं होता। भी होता है। इंसान 25 साल की उम्र में सही फाइनेंशियल डिसीजंस लेना शुरू कर देता है,
साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते [संगीत] वही डिसीजंस करोड़ों का फर्क बना कर देते हैं। यह है, आखिर बफेट की नजर में एसेट होता क्या है? दुनिया के ज्यादातर लोग एसेट समझकर ऐसी चीजें खरीदते रहते हैं, जो धीरे-धीरे उनकी जेब खाली करती रहती हैं? शुरू होता है करोड़पति बनने का पहला असली प्रिंसिपल। बफेट की फिलॉसफी कहती है, अगर आपको अपना पहला 1 करोड़ बनाना है, तो सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि आपके बैंक अकाउंट में आने वाला हर रुपया एक कर्मचारी की तरह है। आपके ऊपर है, आप उस कर्मचारी को पूरी जिंदगी सिर्फ खर्च कर
देंगे या उसे ऐसी जगह भेजेंगे जहां वह आपके लिए और कर्मचारी को लेकर वापस आए। इन्वेस्टिंग की असली सोच। है कि बफेट कभी पैसों को सिर्फ पैसा नहीं मानते थे। एक सीड यानी बीज की तरह देखते थे। अगर आपके हाथ में आम का एक बीज हो, तो आपके पास दो विकल्प हैं। पहला, उसे आज ही फेंक दीजिए। दूसरा, उसे मिट्टी में लगाइए। दीजिए, उसकी देखभाल कीजिए और कुछ साल बाद वही [संगीत] एक बीज आपको सैकड़ों आम देने वाला पेड़ बन सकता है। पैसा भी बिल्कुल ऐसा ही काम करता है। बीज को तुरंत खत्म कर देते
हैं, उनके पास भविष्य में कभी बगीचा नहीं बनता। कुछ बीज बचाकर सही जगह लगाते रहते हैं, लिए पूरा जंगल तैयार कर देता है। का जादू है। ज्यादातर लोग कंपाउंडिंग को सिर्फ किताबों में पढ़ते हैं। जिंदगी में कभी लागू नहीं करते। क्यों? क्योंकि उन्हें तुरंत रिजल्ट चाहिए। आज इन्वेस्ट किया तो अगले महीने दो गुना पैसा मिलना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो उन्हें लगता है कि इन्वेस्टमेंट बेकार है। लेकिन बफेट कहते हैं, प्रकृति का कोई भी नियम जल्दबाजी में काम नहीं करता। एक पेड़ रातों-रात नहीं बढ़ता। एक बच्चा [संगीत] एक महीने में बड़ा नहीं हो जाता।
और वेल्थ भी कुछ महीनों में नहीं बनती। हर बड़ी चीज समय मांगती है। यही कारण है कि बफेट ने एक बार कहा था, "आज कोई इंसान छाया में बैठा है क्योंकि बहुत साल पहले किसी ने एक पेड़ लगाया था।" इस एक लाइन में करोड़पति बनने का पूरा विज्ञान छिपा हुआ है। जो लोग आज सिर्फ अपने आज के बारे में सोचते हैं, वह कल भी वहीं खड़े रहते हैं। लेकिन जो लोग आज अपने आने वाले 10, 20 या 30 साल के बारे में सोचकर फैसले लेते हैं, समय धीरे-धीरे उनकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है। अब
यहां एक और बहुत बड़ी गलती होती है। लोग सोचते हैं, "जब मेरी इनकम बढ़ेगी, तब मैं इन्वेस्टमेंट शुरू करूंगा।" यही सोच लाखों लोगों को सालों पीछे कर देती है। क्योंकि बफेट कहते हैं, "आप इन्वेस्ट इसलिए नहीं करते क्योंकि आपके पास बहुत पैसा है, बल्कि एक दिन आपके पास बहुत पैसा हो इसलिए इन्वेस्ट करते हैं।" फर्क बहुत छोटा लगता है लेकिन पूरी जिंदगी बदल देता है। मान लीजिए, दो लोगों ने नौकरी शुरू की। पहला इंसान कहता है, "अभी तो सैलरी कम है, बाद में शुरू करूंगा।" इंसान कहता है, "अमाउंट छोटा है लेकिन हैबिट आज से शुरू
होगी।" 10 से 15 साल बाद पहले इंसान के पास बहाने ज्यादा होते हैं। और दूसरे इंसान के पास एसेट्स ज्यादा होते हैं। यही कारण है कि बफेट हमेशा हैबिट्स पर जोर देते थे। क्योंकि अमीर बनने का फैसला एक [संगीत] दिन में नहीं होता। वह छोटे-छोटे फाइनेंशियल डिसीजंस का रिजल्ट होता है जो आप हर महीने, हर साल लगातार लेते रहते हैं। लेकिन अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल, अगर इन्वेस्टमेंट करना ही काफी होता, तो करोड़ों इन्वेस्टर्स आज करोड़पति [संगीत] होते। फिर आखिर बफेट बार-बार एक ऐसी चीज पर सबसे ज्यादा जोर क्यों देते थे? जिसे ज्यादातर लोग पूरी तरह
नजरअंदाज कर देते हैं। वह चीज है अपने आप में इन्वेस्टमेंट करना। का मानना था कि यही वह एसेट है, जो पूरी जिंदगी सबसे ज्यादा रिटर्न देता है। जरा एक पल के लिए अपने आप से एक सवाल पूछिए। अगर आज आपकी सारी सेविंग खत्म हो जाए, आपके सारे इन्वेस्टमेंट्स भी खत्म हो जाएं, यहां तक कि आपका बैंक अकाउंट भी जीरो हो जाए, तो क्या आपके पास ऐसा कुछ बचा होगा, जिसकी वजह से आप दोबारा शुरुआत कर सकें? ज्यादातर लोग इस सवाल का जवाब पैसों में ढूंढते हैं। इस सवाल का जवाब इंसान के अंदर ढूंढते थे। थे,
"दुनिया का सबसे वैल्यूएबल एसेट कोई शेयर नहीं है, कोई गोल्ड नहीं है, कोई प्रॉपर्टी भी नहीं है। नॉलेज, आपकी स्किल्स और आपका कैरेक्टर है। यह तीनों आपके पास हैं, तो पैसा चला भी जाए, फिर से वापस आ सकता है। लेकिन अगर यह तीनों नहीं हैं, तो लाखों रुपए मिलने के बाद भी [संगीत] वह ज्यादा दिनों तक आपके पास नहीं टिकेंगे। यही वजह है कि बफेट अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा हमेशा सीखने में लगाते थे। है कि वह आज भी हर दिन कई घंटों तक पढ़ते हैं। सोचिए, जब दुनिया के सबसे सफल इन्वेस्टर्स में से
एक इंसान [संगीत] सीखना बंद नहीं करता, और आप कैसे सोच सकते हैं कि हमें अब सब कुछ आ गया है? यहीं पर करोड़पति बनने का अगला रूल शुरू होता है। पहले अपनी इनकम बढ़ाने की क्षमता बढ़ाइए, अपने आप बढ़ने लगेगी। ध्यान दीजिए, मैंने इनकम बढ़ाने की बात नहीं कही। मैंने इनकम बढ़ाने की क्षमता बढ़ाने की बात कही है। जमीन आसमान का फर्क है। दो लोग एक ही कंपनी में काम करते हैं। सैलरी ₹400 है। पहला इंसान ऑफिस से घर आता है, मोबाइल चलाता है, सीरीज देखता है और अगले दिन [संगीत] फिर वही रूटीन शुरू हो
जाता है। दूसरा इंसान भी नौकरी करता है। लेकिन हर दिन सिर्फ 1 घंटा अपने ऊपर इन्वेस्ट करता है। नई स्किल सीखता है, कम्युनिकेशन इंप्रूव करता है, बिजनेस समझता है, फाइनेंस पढ़ता है और धीरे-धीरे अपनी वैल्यू मार्केट में बढ़ाता रहता है। शुरुआत में दोनों बराबर दिखाई देंगे। लेकिन 5 साल बाद उनकी इनकम में इतना बड़ा फर्क होगा जिसकी आज कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। क्यों? क्योंकि मार्केट आपको आपके टाइम के पैसे नहीं देती। मार्केट आपको आपकी वैल्यू के पैसे देती है। है कि बफेट कहते हैं, "सबसे अच्छा इन्वेस्टमेंट वही है जो आपकी अर्निंग पावर को
बढ़ा दे।" एक और बात समझिए। अगर आप हर महीने ₹5000 इन्वेस्ट करते हैं, तो यह अच्छी आदत है। [संगीत] लेकिन अगर आप अपने ऊपर काम करके अपनी इनकम ही ₹0 से ₹80000 कर दें, वही इन्वेस्टमेंट दोगुनी स्पीड से बढ़ेगा। यानी पहले खुद को अपग्रेड कीजिए। फिर आपका पोर्टफोलियो भी अपग्रेड होने लगेगा। लेकिन दुख की बात यह है ज्यादातर लोग अपने ऊपर खर्च करने से डरते हैं। मोबाइल, महंगी बाइक या ऐसी चीजों पर बिना सोचे पैसे खर्च कर देते हैं जिनकी वैल्यू समय के साथ कम होती जाती है। वॉरेन बफेट की सोच बिल्कुल उलट ही थी।
थे, "अगर कोई चीज समय के साथ आपकी वैल्यू बढ़ा रही है, खर्च करना कॉस्ट [संगीत] नहीं इन्वेस्टमेंट है। कोई चीज सिर्फ कुछ दिनों की खुशी दे रही है, लेकिन भविष्य में आपकी फाइनेंशियल ग्रोथ रोक रही है, तो वह लग्जरी नहीं एक एक्सपेंसिव मिस्टेक है। आपके मन में एक सवाल आ रहा होगा, अगर अपने ऊपर इन्वेस्ट करना इतना जरूरी है, तो फिर क्या सिर्फ नॉलेज से ही [संगीत] इंसान करोड़पति बन सकता है? नहीं। नॉलेज अकेले काफी नहीं है। क्योंकि बफेट एक और बात बार-बार कहते थे, नॉलेज तभी वेल्थ बनती है, जब उसके साथ डिसिप्लिन जुड़ जाता
है। डिसिप्लिन करोड़पति और आम इंसान के बीच सबसे बड़ा अंतर पैदा करता है। अब आगे हम समझेंगे, बफेट का वह रूल जिसे अगर कोई इंसान सिर्फ 10 साल तक ईमानदारी से फॉलो कर ले, तो उसका पहला 1 करोड़ बनाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकता है। कल्पना कीजिए, हर महीने आपकी सैलरी आपके अकाउंट में आती है। पहले ही किसी और का हाथ उस पैसे पर पड़ जाता है। किराया, बिजली का बिल, ईएमआई, ऑनलाइन शॉपिंग, बाहर खाना और महीने के आखिर में जब आप अपना बैंक बैलेंस देखते हैं, तो मन में सिर्फ एक ही बात
आती है। भी कुछ बचा नहीं। अगर आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है, तो समझ लीजिए, समस्या आपकी इनकम नहीं है। समस्या आपके पैसे का डायरेक्शन है। वॉरेन बफेट कहते हैं, को अपने पैसों की दिशा नहीं पता, उसकी मंजिल भी कभी तय नहीं होती। यही वजह है कि करोड़पति बनने वाले लोग हर रुपए को [संगीत] भेजते हैं। पैसा सिर्फ खर्च करने की चीज नहीं होता, बल्कि एक मिशन पर भेजा गया कर्मचारी होता है। आता है वॉरेन बफेट का एक बेहद पावरफुल रूल, पे करो, फिर दुनिया को। ज्यादातर लोग क्या करते हैं? सैलरी आई, सबका पेमेंट
कर दिया [संगीत] और जो बच गया, उसे सेविंग या इन्वेस्टमेंट कह दिया। कहते हैं, यही सबसे बड़ी गलती है। अमीर लोग इसका बिल्कुल उल्टा करते हैं। सैलरी आते ही सबसे पहले अपने भविष्य को पेमेंट करते हैं। यानी इनकम का एक तय हिस्सा सीधे इन्वेस्टमेंट में चला जाता है। बाकी बचे पैसों से पूरी जिंदगी चलती है। शुरुआत में यह थोड़ा मुश्किल लगता है। [संगीत] बाद यही आदत आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। [संगीत] वेल्थ हमेशा उस पैसे से बनती है जो आपने खर्च नहीं किया, बल्कि सही जगह लगाया। आपसे एक छोटा सा सवाल पूछता हूं।
महीने आपके हाथ में ₹100 आए और उनमें से ₹100 के ₹100 खर्च कर दें, महीने फिर आपको जीरो से शुरुआत करनी पड़ेगी। लेकिन अगर आपने सिर्फ ₹20 भी अपने भविष्य के लिए अलग रख दिए, महीने आपके पास सिर्फ सैलरी नहीं होगी। आपके साथ [संगीत] आपका पुराना पैसा भी काम कर रहा होगा। यही छोटा सा अंतर बहुत बड़ा अंतर बन जाता है। लेकिन अब एक और ऐसी गलती हर मिडिल क्लास इंसान कभी ना कभी करता है। जैसे ही उसकी इनकम बढ़ती है, वैसे ही उसका लाइफस्टाइल भी बढ़ जाता है। नई कार, नया मोबाइल, बड़ा घर, महंगे
ब्रांड और धीरे-धीरे इनकम तो बढ़ती रहती है। वहीं की वहीं रह जाती है। फाइनेंशियल दुनिया में लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन कहा जाता है। इससे हमेशा बच कर रहे। इतनी बड़ी दौलत होने के बावजूद अगर कोई इंसान दशकों तक उसी [संगीत] साधारण घर में रह सकता है, सिर्फ सादगी नहीं है। उसका कारण है प्रायोरिटी। बफेट जानते थे, लोग अमीर दिखने के लिए पैसा खर्च करते हैं। में अमीर बनने वाले लोग अपने एसेट्स बढ़ाने पर पैसा खर्च करते हैं। है कि बहुत से लोग बाहर से अमीर दिखाई देते हैं। से कर्ज में डूबे होते हैं। और कुछ लोग बाहर
से बिल्कुल साधारण दिखाई देते हैं। लेकिन उनकी नेट वर्थ करोड़ों में होती है। अब फैसला आपको करना है। आपको रिच दिखना है या वास्तव में रिच बनना है? दोनों रास्ते [संगीत] एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। दूसरों को इंप्रेस करने में पैसा खर्च करता है, वह अक्सर अपने भविष्य को कमजोर करता है। इंसान अपने फ्यूचर को स्ट्रांग बनाने में पैसा लगाता है, बिना कुछ कहे सबसे ज्यादा रिस्पेक्ट कमाता है। का मानना था, वेल्थ वह है जो दिखाई नहीं देती। महंगी कार दिखाई देती है। महंगी वॉच दिखाई देती है। लग्जरी वेकेशन दिखाई देती है। एसेट्स आपके
लिए हर साल पैसा कमा रहे हैं, वह दिखाई नहीं देते। अमीरी उन्हीं अदृश्य एसेट्स में छिपी होती है। सवाल यह है, दिखने की बजाय रिच बनना है, कौन सी ऐसी क्वालिटी है जो बफेट के अनुसार लगभग हर करोड़पति में कॉमन होती है? कमी की वजह से ज्यादातर लोग पूरी जिंदगी मेहनत तो करते हैं, कभी क्रिएट नहीं कर पाते। आपने एक बात जरूर महसूस की होगी। बफेट की लगभग हर सीख एक ही दिशा में इशारा करती है। कमाओ, बचाओ, इन्वेस्ट करो और समय को अपना साथी बना लो। लेकिन अगर यही पूरी कहानी होती, तो आज करोड़ों
लोग करोड़पति बन चुके होते। है जो कुछ लोगों को बहुत आगे ले जाता है और बाकी लोग वहीं के वहीं रह जाते हैं? का जवाब बफेट सिर्फ एक शब्द में देते हैं। पेशेंस, यानी धैर्य। सुनने में यह शब्द बहुत साधारण लगता है। बनने की यात्रा में यही सबसे महंगी क्वालिटी है। लोग मेहनत करने से नहीं, इंतजार करने से हार मान लेते हैं। सोचिए, आपने एक छोटा सा पौधा लगाया। जाकर देखा, वह पेड़ नहीं बना। उखाड़ कर फेंक देंगे? बिल्कुल नहीं। क्योंकि आपको पता है, प्रकृति को अपना काम करने में समय लगता है। [संगीत] ही बात
इन्वेस्टमेंट की आती है, लोग अपना धैर्य खो देते हैं। रिटर्न कम मिला, तो इन्वेस्टमेंट बदल दिया। मार्केट नीचे गई, तो घबरा कर सब बेच दिया। ने कहा, इसमें जल्दी पैसा बनता है, तो तुरंत अपना पूरा प्लान बदल दिया। बड़ी गलती है। बफेट कहते हैं, स्टॉक मार्केट अधीर लोगों से पैसा लेकर धैर्य रखने वालों को देने का एक साधन है। बात सिर्फ [संगीत] स्टॉक मार्केट पर नहीं, पर लागू होती है। बिजनेस हो, करियर हो, या वेल्थ बिल्डिंग, वही लोग जीतते हैं, जो लंबे समय तक सही काम करते रहते हैं। एक और प्रिंसिपल आता है, को बाकी
इन्वेस्टर्स से अलग बनाया। भी हर मौके के पीछे नहीं भागते थे। अच्छा अवसर नहीं मिलता, तो वे इंतजार करते थे। वे जानते थे, हर अपॉर्चुनिटी अच्छी अपॉर्चुनिटी नहीं होती। अगर एक बल्लेबाज हर आती हुई गेंद पर जोर से शॉट मारने लगे, तो क्या वह लंबी पारी खेल पाएगा? नहीं। अच्छा बल्लेबाज वही होता है, जो सही गेंद का इंतजार करता है। हैं, इन्वेस्टिंग भी बिल्कुल ऐसी ही है। के पीछे भागना, हर हॉट स्टॉक खरीदना, हर नई स्कीम में पैसा लगाना, यह वेल्थ बिल्डिंग नहीं, बेचैनी है। असल वेल्थ फोकस से बनती है। अपने आसपास देखिए, कोई ना
कोई कहता है, यहां पैसा लगाओ, इससे जल्दी प्रॉफिट होगा। यह मौका दोबारा नहीं मिलेगा। सोचे अपनी मेहनत की कमाई दांव पर लगा देते हैं। की फिलॉसफी बिल्कुल [संगीत] अलग है। हैं, अगर आपको कोई चीज पूरी तरह समझ नहीं आती, [संगीत] तो उसमें पैसा मत लगाइए। याद रखिए, रिस्क वहां नहीं होता जहां मार्केट ऊपर नीचे होती है। रिस्क वहां होता है जहां आपको पता ही नहीं होता कि आप क्या कर रहे हैं। यही कारण है कि बफेट हमेशा अपने सर्कल ऑफ कॉम्पिटेंस की बात करते थे। [संगीत] सिर्फ उसी चीज में फैसला लो जिसे तुम अच्छी तरह
समझते हो। सिर्फ इन्वेस्टिंग पर लागू नहीं होता। करियर चुनने में, बिजनेस शुरू करने में और जीवन के बड़े फैसलों में भी यही रूल काम करता है। क्योंकि जब [संगीत] आप दूसरों की कॉपी करना बंद करते हैं, अपनी वेल्थ क्रिएट करना शुरू करते हैं। यही वजह है कि बफेट ने कभी दुनिया को देखकर अपने फैसले नहीं बदले। ने उनके फैसलों को देखकर उनसे सीखना शुरू किया। लेकिन अब एक आखिरी और सबसे गहरा सवाल बचता है। इंसान ने सही माइंडसेट बना लिया, अपने ऊपर इन्वेस्टमेंट करना शुरू कर बनाना सीख लिया, पेशेंस भी रख लिया, उसका पहला एक
करोड़ तय है? वॉरेन बफेट कहते हैं, अभी एक आखिरी प्रिंसिपल बाकी है और वही तय करेगा कि आपकी वेल्थ [संगीत] कुछ साल टिकेगी या पीढ़ियों तक बढ़ती रहेगी। अब तक हमने बफेट की कई ऐसी बातें समझी जो किसी भी इंसान की फाइनेंशियल जर्नी बदल सकती हैं। लेकिन अब हम उस प्रिंसिपल पर पहुंच चुके हैं सिर्फ वेल्थ बनाने का नहीं बल्कि वेल्थ बचाने का सबसे बनना मुश्किल है रहना उससे भी ज्यादा मुश्किल है। है कि बफेट का पहला रूल था, एक, नेवर [संगीत] लूज मनी। रूल, नेवर फॉरगेट रूल नंबर एक। से लोग इस बात को गलत
समझ लेते हैं। है कि बफेट कभी लॉस नहीं करते थे। ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने भी गलत फैसले लिए। कई इन्वेस्टमेंट्स में पैसा खोया। लेकिन फर्क यह था, वह ऐसी गलती कभी नहीं करते थे जो उन्हें खेल से हमेशा के लिए बाहर कर दें। यही बात आपको भी समझनी होगी। वेल्थ बिल्डिंग कोई 100 मीटर की रेस नहीं है। यह मैराथन है। जीतने वाला इंसान सबसे तेज भागने वाला नहीं होता, बल्कि सबसे लंबे समय तक दौड़ते रहने वाला होता है। इसीलिए वॉरेन बफेट कहते हैं ऐसा कोई फाइनेंशियल डिसीजन मत लीजिए जो एक गलत कदम में आपकी
कई सालों की मेहनत खत्म कर दें। यहीं पर लोग सबसे बड़ी गलती करते हैं। जल्दी अमीर बनने के चक्कर में अपनी पूरी सेविंग [संगीत] एक ही जगह लगा देते हैं। की टिप पर, कभी किसी इन्फ्लुएंसर की बात पर, तो कभी सिर्फ फोमो की वजह से। उम्मीद के मुताबिक नहीं होती, तो सिर्फ पैसा ही नहीं, आत्मविश्वास भी टूट जाता है। याद रखिए, वेल्थ बनाने के लिए सबसे पहले गेम में बने रहना जरूरी है। गेम से ही बाहर हो गए, तो कंपाउंडिंग कभी अपना जादू दिखा ही नहीं पाएगी। बफेट की पूरी फिलॉसफी को एक साथ जोड़कर देखिए।
उन्होंने कभी नहीं कहा कि सबसे पहले करोड़ों कमाओ। सबसे पहले सही [संगीत] सोच बनाओ। उन्होंने कभी नहीं कहा कि सबसे पहले लग्जरी लाइफ जियो। उन्होंने कहा, सबसे पहले एसेट्स बनाओ। उन्होंने कभी नहीं कहा कि हर मौके पर पैसा लगाओ। उन्होंने कहा, सिर्फ [संगीत] वही करो जिसे तुम अच्छी तरह समझते हो। नहीं कहा कि जल्दी अमीर बनो। ऐसा सिस्टम बनाओ जो तुम्हें धीरे-धीरे, लेकिन हमेशा के लिए अमीर बना दे। यही वजह है कि आज भी पूरी दुनिया वॉरेन बफेट को सिर्फ एक इन्वेस्टर नहीं, बल्कि वेल्थ बिल्डिंग का सबसे बड़ा टीचर मानती है। में मैं चाहता हूं
कि आप एक काम जरूर करें। वीडियो के बाद एक कागज उठाइए और अपने आप से सिर्फ तीन सवाल पूछिए। पहला, क्या मेरा पैसा हर महीने मेरे लिए काम कर रहा है या सिर्फ खर्च हो रहा है? दूसरा, क्या मैं हर महीने अपने फ्यूचर को पे करता हूं या सिर्फ बिल्स को? और तीसरा, अगर मैं अगले 10 साल [संगीत] तक इसी तरह चलता रहा, तो क्या मैं सच में अपना पहला करोड़ बना पाऊंगा? अगर इन तीन सवालों के जवाब आपको सोचने पर मजबूर कर दें, [संगीत] तो समझ लीजिए आज की इस वीडियो ने अपना काम कर
दिया। याद रखिए, करोड़पति बनने की शुरुआत बैंक अकाउंट से नहीं होती। वह आपके माइंडसेट से होती है। जिस दिन आपकी सोच बदल जाती है, उसी दिन आपकी फाइनेंशियल जर्नी भी बदलनी शुरू हो जाती है। है आज आपके पास बहुत ज्यादा पैसा ना हो। आज आपने बफेट के इन प्रिंसिपल्स को अपनी आदत बना लिया, [संगीत] तो आने वाले वर्षों में पैसा धीरे-धीरे आपकी आदतों का परिणाम बन जाएगा। कुछ साल बाद जब आप पीछे मुड़कर देखेंगे, तो आपको एहसास होगा कि आपका पहला 1 करोड़ किसी एक बड़े फैसले से नहीं, दिन लिए गए छोटे-छोटे सही फैसलों से
बना था। अगर आपको इस वीडियो से कुछ नया सीखने को मिला, तो इसे अपने उन दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ जरूर शेयर कीजिए पैसे कमाना नहीं, बल्कि वेल्थ बनाना सीखना चाहते हैं। आप ऐसी ही आसान भाषा में दुनिया [संगीत] की बेहतरीन बुक्स, सफल लोगों की सोच और वेल्थ बिल्डिंग की पावरफुल फिलॉसफी सीखना चाहते हैं, तो हमारे चैनल सब्सक्राइब करना मत भूलिए। क्योंकि यहां हम सिर्फ किताबों की बातें नहीं करते। आइडियाज की बात करते हैं जो आपकी [संगीत] पूरी जिंदगी बदल सकते हैं। धन्यवाद।