[संगीत] हेलो दोस्तों आज की वीडियो में देखेंगे कि इंडक्टर क्या होता है इंडक्टर का सिंबल कैसा होता है यूनिट क्या है इंडक्टर की प्रॉपर्टीज क्या-क्या होती है इंडक्टर की कहां पर और क्यों यूज किया जाता है इंडक्टर का फार्मूला क्या होता है इंडक्टर का और वेव फॉर्म कैसी होती है इंडक्टर की एंड पावर फैक्टर पे क्या इफेक्ट होता है इंडक्टर का तो पूरी इंफॉर्मेशन के लिए वीडियो को लास्ट तक देखिएगा स्टार्ट करते हैं दोस्तों पहले हम लोग इंडक्टर का डेफिनेशन देख लेते हैं इंडक्टर इज अ पैसिव इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट एंड इंडक्टर टिपिकली कंसिस्ट ऑफ इंसुलेटेड वायर
वाउंड इन टू अ कॉइल दैट स्टोर्स एनर्जी इन अ मैग्नेटिक फील्ड व्हेन इलेक्ट्रिकल करंट फ्लो थ्रू इट तो दोस्तों इसका मतलब क्या है जैसा कि मैंने आप लोगों को रजिस्टर वाली वीडियो में भी बताया था कि दो टाइप के कंपोनेंट होते हैं एक्टिव एंड पैसिव तो इंडक्टर इज अ पैसिव इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट एक्टिव पैसिव क्या होता है वो हम लोग किसी और वीडियो में देखेंगे तो तो इंडक्टर क्या है पैसिव कंपोनेंट इंडक्टर टिपिकली कंसिस्ट ऑफ इंसुलेटेड वायर बाउंड इन टू अ कॉइल दोस्तों इंडक्टर जो है वो नॉर्मली इंसुलेटेड वायर को गोलगोल लपेट करके कॉइल जैसा बनाया
जाता है उसको हम लोग इंडक्टर बोलते हैं जैसा कि आप लोग देख सकते हैं ये इंडक्टर है ये जो वायर है वो इंसुलेटेड है दोस्तों ये जो आप लोग फोटो में देख रहे हैं ये भी इंडक्टर है बट इसमें तो इंसुलेशन नहीं है नहीं दोस्तों ये जो वायर यहां पर यूज किया गया है इस वायर में बहुत ही पतली सी इंसुलेशन की लेयर है तो इंसुलेटेड वायर को गोलगोल लपेट करके इंडक्टर बनाया जाता है दैट स्टोर्स एनर्जी इन अ मैग्नेटिक फील्ड वन इलेक्ट्रिकल करंट फ्लो थ्रू इट मतलब जब इंडक्टर में से करंट फ्लो होता है
तो इंडक्टर मैग्नेटिक फील्ड को स्टोर करता है दोस्तों इंडक्टर को और भी अच्छे से देखेंगे हम लोग कुछ देर में अभी पहले हम लोग देख लेते हैं सिंबल कैसा होता है इंडक्टर का [संगीत] दोस्तों यह चार टाइप के सिंबल होते हैं इंडक्टर के एयर कोर टाइप के इंडक्टर दोस्तों कुछ इस प्रकार से दिखते हैं इसके अंदर हम लोग खाली इंसुलेटेड वायर का यूज करते हैं आयरन कोर टाइप इंडक्टर कुछ इस प्रकार से दिखते हैं दोस्तों आयरन कोर इंडक्टर में हम लोग आयरन का यूज करते हैं मतलब पतले पतले लोखन का यूज करते हैं इंसुलेटेड वायर
के बीच में फराइड कोर टाइप इंडक्टर दोस्तों कुछ इस प्रकार से दिखते हैं फराइड एक टाइप का मटेरियल है जो कि इंसुलेटेड वायर के बीच में डाला जाता है वेरिएबल कोर इंडक्टर कुछ इस प्रकार से दिखते हैं दोस्तों जिसका हम इंडक्टर वैल्यू चेंज कर सकते हैं दोस्तों अब हम लोग देख लेते हैं कि इंडक्टर का यूनिट क्या होता है इंडक्टर का यूनिट दोस्तों हेनरी होता है हेनरी को दोस्तों हम लोग h से डिनोट करते हैं मोस्टली जो इलेक्ट्रॉनिक सर्किट होते हैं उसके अंदर जो इंडक्टर की वैल्यू होती है वो काफी कम होती है मतलब मिली
हेनरी में होती है और दोस्तों माइक्रोहेनरी में होती है तो दोस्तों इंडक्टर का यूनिट क्या है हेनरी दोस्तों अब देख लेते हैं प्रॉपर्टी क्या होती है इंडक्टर की फर्स्ट इज इंडक्टर अपोज सडन चेंज इन करंट इसको हम लोग एग्जांपल के थ्रू समझेंगे समझ लीजिए इंडक्टर में से करंट फ्लो हो रहा है और अचानक से अगर करंट कम या ज्यादा हो जाता है तो इंडक्टर उसे कम या ज्यादा नहीं होने देगा जैसे कि कोई इंडक्टर है और सर्किट में से 5 एंपियर करंट फ्लो हो रहा है बट इनपुट करंट में अचानक से 4 एंपियर हो गया
और वापस से 5 एंपियर हो गया बट दोस्तों इंडक्टर होने की वजह से जो आउटपुट करंट है वो हमें कांस्टेंट 5 एंपियर ही मिलेगा क्योंकि दोस्तों इंडक्टर सडन चेंज इन करंट को अपोज करता है सेकंड प्रॉपर्टी है दोस्तों इंडक्टर की इंडक्टर वर्क एज अ इलेक्ट्रोमैग्नेट मतलब जब भी हम लोग इंडक्टर में इलेक्ट्रिकल सप्लाई देंगे तो इंडक्टर एज अ मैग्नेट वर्क करेगा मतलब इंडक्टर को हम लोग मैग्नेट जैसा वर्क करा सकते हैं इलेक्ट्रिकल सप्लाई देके थर्ड प्रॉपर्टी है इंडक्टर स्टोर एनर्जी इन मैग्नेटिक फील्ड मतलब इंडक्टर एनर्जी स्टोर करता है मैग्नेटिक फील्ड के फॉर्म में ये स्टोर्ड
एनर्जी ज्यादा देर तक नहीं रहती है दोस्तों अब हम लोग देख लेते हैं इंडक्टर का यूज कहां पे किया जाता है पहले हम लोग डीसी सर्किट में देखेंगे कि कहां पे यूज किया जाता है इंडक्टर का एनर्जी स्टोरेज के लिए इंडक्टर का यूज किया जाता है जैसा कि मैंने आप लोगों को बताया था कि अगर ऐसी कंडीशन क्रिएट होती है कि जब करंट मेरा 4 एंपियर पर जाता है तो उस टाइम पे इंडक्टर क्या करता है अपनी जो स्टोर एनर्जी होती है उसको वहां पे देता है तो जो 1 एंपियर का गैप था वो क्या
करता है इंडक्टर अपनी स्टोर एनर्जी को देता है और जब नॉर्मल 5 एंपियर पे करंट आ जाता है तो वापस वो एनर्जी को स्टोर करने लगता है मतलब इंडक्टर एज अ एनर्जी स्टोरेज के लिए यूज होता है डीसी में दोस्तों इंडक्टर का दूसरा यूज है डीसी में इलेक्ट्रोमैग्नेट की तौर पे जैसा कि हम लोग रिले के अंदर जो कॉइल यूज करते हैं और उसको डीसी सप्लाई देते हैं तो वोह मैग्नेट जैसा एक्ट करता है और लीवर को अट्रैक्ट करता है तो इंडक्टर का यूज डीसी के केस में मैग्नेट बनाने के लिए भी यूज किया जाता
है दोस्तों अब हम लोग देख लेते हैं कि स में इंडक्टर का यूज क्यों किया जाता है फर्स्ट इज मैग्नेटिक फील्ड यूज फॉर वोल्टेज अप एंड डाउन मतलब दोस्तों ट्रांसफॉर्मर में हम लोग जो कॉइल का यूज करते हैं वो कॉइल क्या है वो इंडक्टर है दोस्तों तो ट्रांसफॉर्मर की कॉइल किस काम में आती है वोल्टेज एंड करंट को अप एंड डाउन करने के काम में आती है जैसा कि हम लोग बोलते हैं ना स्टेप अप ट्रांसफॉर्मर है स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर है तो इंडक्टर का यूज किस लिए किया जाता है स्टेप अप एंड स्टेप डाउन करने
के लिए भी यूज किया जाता है एसी में सेकंड यूज़ है एसी में इंडक्टर का इलेक्ट्रिकल एनर्जी को मैकेनिकल एनर्जी में कन्वर्ट करने के लिए मतलब दोस्तों मोटर में भी देखिए कॉइल होता है और कॉइल मतलब क्या है दोस्तों इंडक्टर तो मोटर इलेक्ट्रिकल एनर्जी को मैकेनिकल एनर्जी में कन्वर्ट करता है वो भी इंडक्टर के थ्रू ही होता है थर्ड यूज़ है इंडक्टर का एसी में फिल्टरिंग पर्पस के लिए मतलब जो हार्मोनिक जनरेट होती है और ऐसी कुछ फ्रीक्वेंसी होती है जिसको हमें नहीं पास करने देना है या तो पास करने देना है वहां पर हम
लोग इंडक्टर का यूज करते हैं मेनली हार्मोनिक फिल्टर के लिए हम लोग इंडक्टर का यूज करते हैं तो दोस्तों अब हम लोग देख लेते हैं इंडक्टर का फार्मूला क्या होता [संगीत] है दोस्तों इंडक्टर का फार्मूला यह है l = v / बाडी / dt4 इंडक्टेंस v फॉर वोल्टेज एंड d / dt8 ऑफ करंट चेंजेज इसको और कभी हम लोग फुल डीप में देखेंगे दोस्तों इंडक्टर जो होता है उसके अंदर कोई भी पोलैरिटी नहीं होती है मतलब जैसे कि हमारी जो बैटरी होती है उसके अंदर पॉजिटिव टर्मिनल एंड नेगेटिव टर्मिनल होता है हमारी जो एलईडी होती
है उसमें भी पॉजिटिव टर्मिनल नेगेटिव टर्मिनल होता है बट दोस्तों हमारा जो इंडक्टर होता है उसमें नेगेटिव और पॉजिटिव टर्मिनल कोई भी नहीं होता मतलब आप दोनों साइड में से भी कौन से साइड में यूज कर सकते हो तो दोस्तों अब हम लोग देख लेते हैं इंडक्टर का वेव फॉर्म कैसा होता [संगीत] है तो दोस्तों मैंने यहां पे वोल्टेज की वेव फॉर्म बनाई है अब मैं आप लोगों को करंट की वेव फॉर्म बना के दिखा देता हूं कि प्योर इंडक्टर के केस में करंट की वेव फॉर्म कैसी होती है तो दोस्तों ये वोल्टेज एंड करंट
की वेव फॉर्म है प्योर इंडक्टर के केस में तो वोल्टेज से हमारा करंट 90° पीछे रह जाता है प्योर इंडक्टर के केस में तो ऐसा क्यों हो रहा है कि वह पीछे रह जा रहा है क्योंकि इंडक्टर की प्रॉपर्टी होती है कि सडन चेंज इन करंट को वो अपोज करता है मतलब इंडक्टर करंट को तुरंत चेंज नहीं होने देता होने देता है बट तुरंत नहीं होने देता तुरंत ना होने देने की वजह से इंडक्टर की जो करंट की वेव फॉर्म होती है वो 90° लैक करती है वोल्टेज से मतलब 90° पीछे चलती है वोल्टेज से
90° पीछे चलने की वजह से दोस्तो तो हमारे पावर फैक्टर पे बहुत गंदा असर पड़ता है इसका पावर फैक्टर का फार्मूला क्या होता है दोस्तों क एंगल तो यहां पे हमारा एंगल कितना है 90° और क 90 कितना होता है दोस्तों रो मतलब प्योर इंडक्टर के केस में हमारी सर्किट में से करंट फ्लो ही नहीं हो पाएगा क्योंकि हमारा पावर फैक्टर रो हो गया है और रो पावर फैक्टर पे करंट नहीं फ्लो हो पाता बट दोस्तों ये चीज प्रैक्टिकली पॉसिबल नहीं है मतलब प्योर इंडक्टर मिलना प्रैक्टिकली पॉसिबल ही नहीं है जैसे कि आप लोगों ने
मोटर वगैरह देखे होंगे मोटर के आप लोगों ने कई बार वाइंडिंग के रजिस्टर भी निकाले होंगे मल्टीमीटर से तो जो वाइंडिंग है वो क्या है कॉइल है और कॉइल क्या है इंडक्टर है बट इंडक्टर के अंदर भी खुद का कुछ रेजिस्टेंस होता है तो दोस्तों प्रैक्टिकली इंडक्टर की वेव फॉर्म कैसी होती है इंडक्टर प्लस रजिस्टर की कॉमिनेशन की वेव फॉर्म होती है मैं अभी आप लोगों को वो भी बना के दिखा देता हूं [संगीत] दोस्तों ये हमारी वोल्टेज की वेव फॉर्म हो गई मैं आप लोगों को करंट की वेव फॉर्म भी बना के दिखाता हूं
तो दोस्तों हमारी इंडक्टर की वेव फॉर्म कंप्लीट हो गई है प्रैक्टिकली दोस्तों हमारी इंडक्टर की वेव फॉर्म लगभग ऐसी ही होती है जैसा कि आप लोग देख सकते हैं यहां पे मैंने 36 लख दिखाया है मतलब हमारे वोल्टेज से करंट कितना पीछे चल रहा है 36° पीछे चल रहा है अगर हमारा करंट 36° पीछे चल रहा है वोल्टेज से तो पावर फैक्टर कितना होगा वो हम लोग अभी कैलकुलेट कर लेते हैं तो दोस्तों अगर करंट हमारा 36° पीछे चलेगा वोल्टेज से तो हमारा पावर फैक्टर कितना आ रहा है 0.8 पावर फैक्टर जैसा कि नॉर्मली आप
लोगों ने प्रैक्टिकली सुना भी होगा कि 0.8 पावर फैक्टर है तो उस केस में क्या होता है कि हमारा जो करंट है वो इंडक्टर से कितना पीछे चल रहा है 36° पीछे चल रहा है तो इंडक्टर क्या करता है दोस्तों सर्किट में लगिंग पावर फैक्टर क्रिएट करता है तो दोस्तों आज की वीडियो में इतना ही देखेंगे थैंक यू फॉर वाचिंग आप लोगों को ये वीडियो कैसी लगी प्लीज मुझे लाइक करके एंड कमेंट करके जरूर बताएं मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में [संगीत]