ब्रॉट टू यू बाय केआर मंगलम यूनिवर्सिटी वी प्रोवाइड यू द प्लेटफार्म टू टर्न योर ड्रीम्स इनू रियलिटी गिविंग्स टू योर एस्पिरेशंस विद के आर मंगलम यूनिवर्सिटी तो आदाब नमस्कार गुड इवनिंग सत श्रीाल एक बार फिर आप तमाम लोगों का स्वागत है प्रेम तक की कहानी के इस एपिसोड में उम्मीद है पूरी फैमिली अच्छी होगी अपना और अपनों का ख्याल रख रही होगी छ और 7 मई ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश के कई इलाकों में अचानक पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के इल्जाम में 12 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं और इन गिरफ्तार सभी लोगों
के तार सीधे नई दिल्ली में पाकिस्तानी हाई कमीशन से जाकर जुड़ रहे हैं यानी पाकिस्तान के उच्चा आयोग से और पाकिस्तानी हाई कमीशन के अंदर भी उस जगह से जहां से पब्लिक डीलिंग होती है यानी वीजा सेक्शन से कैसे नई दिल्ली में मौजूद पाकिस्तानी हाई कमीशन और उसके वीजा सेक्शन और वीजा सेक्शन की क्या अहमियत है। वहां से जासूसी का यह पूरा खेल शुरू हुआ और कैसे चल रहा है। पूरी इनसाइड स्टोरी आपको सुनाऊं। उससे पहले फर्स्ट हैंड एक्सपीरियंस जिसको कहते हैं वहां से शुरू करता हूं आपको। बात 2004 की है। और 2004 में इंडियन
क्रिकेट टीम को पाकिस्तान का दौरा करना था। यह दौरा मार्च से अप्रैल शायद 13th मार्च से शुरू होना था और 16th अप्रैल को खत्म होना था। इस टूर के दौरान इंडिया को कुल पांच वनडे खेलने थे ओडीआई और थ्री टेस्ट मैच और एक लंबे वक्त के बाद इंडियन टीम पाकिस्तान जा रही थी। हालांकि जाने से पहले सिक्योरिटी को लेके बहुत सारे कंसर्न थे। BCCI ने तब पाकिस्तान तीन लोगों की एक टीम भेजी जिन्होंने जाकर वहां की सिक्योरिटी को असेसमेंट किया और आकर अपनी रिपोर्ट दी और रिपोर्ट में कहा कि ठीक है। सेफ है पाकिस्तान खेलने
के लिए। इसके बाद इंडियन क्रिकेट टीम सौरव गांगुली की कैप्टनशिप में पाकिस्तान पहुंचती है। वाइस कैप्टन थे राहुल ड्रविट। पाकिस्तान टीम की कप्तानी कर रहे थे इंजमामुल हक। ओडीआई से सीरीज शुरू होता है और टेस्ट मैच पे खत्म। पाकिस्तान ओडीआई की सीरीज तीन दो से जीतती है। जीतता है और टेस्ट मैच दो एक से। यानी हम ओडीआई भी जीते और टेस्ट मैच भी जीते। टेस्ट मैच में राहुल टेस्ट मैच में बल्कि वीरेंद्र सहवाग मैन ऑफ द सीरीज थे। वो 309 रन की पारी उन्होंने मुल्तान में खेली जहां से उनका नाम मुल्तान का सुल्तान पड़ा था।
खैर बस ये बता रहा था मैं क्रिकेट के बारे में नहीं जा रहा हूं। तो ये दोनों सीरीज वनडे और टेस्ट मैच हम जीत कर आए थे। जब 2004 में यह फाइनल हो गया कि पांच में पाकिस्तान इंडियन टीम जा रही है तो वह बड़ी खबर थी क्योंकि तब भी रिश्ते बहुत ठीक थे नहीं। पार्लियामेंट अटैक हो चुका था। उसमें जश मोहम्मद का नाम था। मौलाना मसूद अहर का नाम आ रहा था। तो उसके दो-ती साल के बाद इंडियन क्रिकेट टीम पाकिस्तान जाए। ये सोचना भी मुश्किल था। लेकिन खैर फिर भी टीम गई। तो जब
टीम गई तो सारे मीडिया वालों में भी अब यह हुआ कि पाकिस्तान टीम जा रही है तो सारे जर्नलिस्ट जाएंगे स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट मुझे याद है विक्की पाजी ने अपने आप के स्पोर्ट्स तक के हमारे विक्रांत गुप्ता जी उन्होंने अप्लाई किया हमारे विनोद शिकार पुरी वो भी और भी टीम कैमरामैन वहां से शो भी करना था हमारे बॉस सुप्रिया प्रसाद जी है वो भी गए तो मतलब एक बड़ा लश्कर यहां से लाओ लश्कर वो वाला लश्कर नहीं टीम उर्दू में लश्कर का मतलब टीम भी होता है। तो तभी मेरे बॉस ने मुझसे कहा कि एक काम
कर तू भी वीजा के लिए अप्लाई कर दे और पाकिस्तान में क्रिकेट चल ही रहा है और तू पाकिस्तान इस बहाने चलना। अच्छा एक टेस्ट मैच कराची में भी था। तो ये था कि कराची भी जाएंगे और कराची में लगे हाथ थोड़ा दाऊद इब्राहिम के घर के अंदर झांक लेंगे। मौका मिला तो तो मैं भी बड़ा खुश कि चलो जिंदगी में कभी गया नहीं जाने का मौका मिलेगा और फिर अपना क्राइम रिपोर्टर जागा कि वहां जाकर जरा पाकिस्तान की क्राइम की खबरें और खासतौर पर दाऊद इब्राहिम जाहिर सी बात है तो खुशी-खुशी मैंने अप्लाई किया
नई दिल्ली में इसी पाकिस्तानी हाई कमीशन में और अब सबके वीजा के बाद सबके इंटरव्यू के डेट फिक्स हुए सभी के इंटरव्यू हो गए एक दिन मेरा का भी नंबर आया। मैं भी गया इंटरव्यू देने के लिए। जब वीजा सेक्शन पे गया उसी वीजा सेक्शन पर उसी काउंटर पर जिसकी कहानी इसके बाद सुनाऊंगा आपको। तो वहां गया तो उसके बाद बैठे हुए थे एक साहब। उन्होंने इंटरव्यू लिया। उन्होंने देखा कि हां ये मीडिया के कोटे से हैं। इंडिया पाकिस्तान मैथ्स को कवर करने के लिए जाना है। मैंने अपना पासपोर्ट और जो भी वीजा एप्लीकेशन फॉर्म
था वो भर कर दे दिया। उसने मेरी तरफ नजर उठाकर अब तक नहीं देखा था। बस बैठा एक ऐसे हल्का सा देखा और अब मेरे फॉर्म पर और पासपोर्ट पर उसकी नजर थी। थोड़ी देर के बाद अच्छा मैं बैठा हुआ हूं। देख रहा हूं यह भी है कि यार वीजा मिल जाए। कई लोगों ने कह दिया था कि तू क्राइम रिपोर्टर है। तुझे तो वीजा मिलेगा नहीं। वो भी दुख दुखी थी और मुझे यह था कि जाना ही जाना है। अचानक कुछ देर के बाद उस शख्स ने अपना सर उठाया। मेरी आंखों में देखा और
कहता है खान साहब आप पाकिस्तान जाके क्या करोगे? आपका क्रिकेट से क्या लेना देना? अब जैसे ही उसने बोला मेरा दिल धक मैंने कहा यह क्या मतलब है? तो उसने कहा अरे आप तो एक क्राइम जर्नलिस्ट हो और इंडियन टीम जा रही है तो स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट जाएगा। एक क्राइम जर्नलिस्ट का पाकिस्तान में क्या काम? अब जैसे ही बोला तो मैंने अब भूमिका माननी थी। मैंने कहा मैं क्राइम जर्नलिस्ट तो बस गलती से हूं। असल में स्पोर्ट से ज्यादा प्यार है। क्रिकेट से ज्यादा ही कुछ जुनून है। तो इसीलिए कवर करने के लिए जा रहा हूं
और मैंने कई मैच कवर भी किए हैं। इत्तेफाक से जब मैं जनसत्ता में था तो एक दो टेस्ट मैच फिरोशा कोटला में मैंने किया था। तो बोला देखिए खान साहब ये बातें किसी और को बताइएगा। आपके बारे में हमारे पास पूरी जानकारी है जब आपने अप्लाई किया था। अप्लाई के कुछ दिन बाद इंटरव्यू के लिए बुलाते हैं। तो हर एक जर्नलिस्ट का हमारे पास पूरी कुंडली है। आपने जब से टीवी में है, आज तक में है, सिर्फ क्राइम रिपोर्टिंग की है। आपने कभी कोई क्रिकेट मैच इंडिया के बाहर जाकर भी कवर नहीं किया। इंडिया के
अंदर तो छोड़िए और यह सच था। बोला देखिए कोशिश तो करूंगा। उम्मीद कम है। आपके चैनल के लोगों को वीजा मिलेगा। आपको नहीं मिल पाएगा। फिर धीरज से कहता है कि मेरा अपना एक मशवरा है। बाकी आप माने ना माने। बोला मैं मेरे हाथ में तो है नहीं लेकिन मैं आपका भेज रहा हूं। पर मुझे उम्मीद नहीं है कि वीजा अप्रूव होगा। 1% को अप्रूव हो गया तो मेरा मशवरा मानिएगा तो आप जाना मत। वहां आपको आपका चैनल भी नहीं बचा पाएगा क्योंकि आप जैसे ही पाकिस्तान में लैंड करेंगे आपके पीछे दो तीन आईएसआई के
लोग पहले से होंगे और आप अपनी हरकत से बाज आएंगे नहीं तो आप क्रिकेट के बाहर दाएं बाएं एग्जांपल के तौर पर उसने कहा कि कराची के कुछ खास रोड को भी खंगालने की कोशिश करेंगे और आप वैसे ही पकड़े जाएंगे और उसके बाद फिर आप जेल जाएंगे और आपका चैनल भी आपको जेल से नहीं निकाल पाएगा। मैंने शुक्रिया कहा। मैंने कहा फिर भी कोशिश करता हूं। उसके बाद उसने पहली बार अपना नाम बताया। वो नाम आज भी मुझे याद है। 31 साल हो गए शाहनवाज। उसने कहा मेरा नाम शाहनवाज है। मैं यहां वीजा सेक्शन
में हूं। आपको फॉलो करता हूं। आपके शो टीवी पर देखता हूं। और तब ये डिजिटल विज़ तो था नहीं। फिर उसने मुझे अपना नंबर दिया था। और बोला मेरा यह नंबर है। जो भी अपडेट होगा मैं आपको दूंगा। मैंने वह नंबर अपने मोबाइल में संभाल कर रखा और शायद अगले 101 साल तक संभाल कर रखा। अब मेरे दो-तीन फोन लास्ट में चेंज हुए। फिर यह भी पता चला हमारे जो फॉरेन मिनिस्ट्री कवर करते हैं। उनके जरिए कि अब शाहनवाज दिल्ली में है नहीं। किसी और देश में ट्रांसफर हो गया। ये लोग दो चार पांच साल
रहते हैं। तो फिर मैंने नंबर रखने की कोशिश भी नहीं की। और वैसे भी फिर जो हालात हुए आजकल पता है आपको नंबर रखना और बात करना वह भी पाकिस्तान से वो अपने आप में बड़ा जोखिम भरा है। तो नंबर मेरे पास 101 साल तो रहा उसके बाद नहीं रहा। बट इस दौरान में तीन चार बार बात हुई और हमेशा मेरी यही थी कि एक बार तो वीजा दे दो। कम से कम किसी और चीज के लिए लाहौर में खाना खाने के लिए दे दो। दो दिन में चला आऊंगा। वाघा बॉर्डर से जाऊंगा बस से
और चला आऊंगा। उसका हमेशा यही कहना था। तो जिंदगी में कभी कोशिश मत कीजिएगा पाकिस्तान जाने की। यह आपके भले के लिए कह रहा हूं। यह बात 21 साल पुरानी है। आज वो सारी चीजें वो पाकिस्तानी उच्चायोग का वीजा सेक्शन सब मेरी नजरों के सामने घूम रहा है और मुझे एक-एक कोना याद है। उस वीजा सेक्शन में कहां कौन क्या बैठा था। नाम सबके पता नहीं। नाम भी एक ही शख्स का। अब वो भी उसने अपना असली नाम बताया कि नहीं यह मुझे मालूम नहीं लेकिन उसने शाहनवाज नाम बताया और फोन नंबर दिया था और
मेरा नंबर नोट किया था। मेरा नंबर वैसे भी फॉर्म पे था क्योंकि उनको इनफॉर्म करना था। तो वो दिन है आज का दिन है जिंदगी में कभी पाकिस्तान जाने का मौका नहीं मिला और शायद कभी वीजा दे भी ना। कोई बात नहीं। अब ये कहानी मैंने आपको क्यों सुनाई? छ और 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश भर से करीब 12 से ज्यादा लोगों को पकड़ा गया है पाकिस्तान की जासूसी करने के इल्जाम में जिनमें से एक ज्योति भी है जिसकी कहानी कल आपको सुनाई एक गजाला भी है यामीन भी है और भी बहुत
सारे लोग हैं बल्कि इन सभी के नाम है ज्योति गजाला आमीन इसके अलावा शहजाद फलक शेर मसीह सूरज मसीह सुखप्रीत सिंह करणबीर सिंह नोमान इलाही देवेंद्र सिंह अरमान और मोहम्मद तारी ये सारे नाम है। अब पंजाब, हरियाणा और यूपी इन जगहों से इन तमाम 12 लोगों या 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें कॉमन चीज एक इन सों के सों के तार सीधे नई दिल्ली में पाकिस्तानी हाई कमीशन से जाकर जुड़ते हैं। और पाकिस्तानी हाई कमीशन के अंदर भी उस वीजा सेक्शन से जाकर जुड़ते हैं। जिस वीजा सेक्शन की मैंने अभी 21 साल पुरानी कहानी
आपको सुनाई। तो फिर इससे क्या और तीसरा कनेक्शन इन सभी के कनेक्शन उसी वीजा सेक्शन में काम करने वाले एक पाकिस्तानी एजेंट जासूस जो पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव का हिस्सा है दानिश रहमान उर रहीम उर्फ़ दानिश इन सभी के कनेक्शन उससे हैं। अब सवाल है कि ये क्या इत्तेफाक है? इन सभी को जो जासूसी के इल्जाम में गिरफ्तार किया गया क्या सच में जब जासूस है और हैं तो इनके कनेक्शन सीधे पाकिस्तानी उच्चा आयोग में और वो भी एक ही जगह एक ही वीजा सेक्शन के एक ही बंदे से कैसे है और अगर यह है तो
फिर हम अब तक उस दानिश को हमने अरेस्ट क्यों नहीं किया हमने सजा क्यों नहीं दी तो उसकी भी मजबूरी है तो इस कहानी को समझने के लिए पहले आपको ये समझना होगा कि इस दुनिया में जितने भी देश हैं उनकी जो भी एंबेसी या फिर हाई कमीशन होता है। वहां एक लिमिटेड स्टाफ होता है। कुछ साल पहले तक नई दिल्ली के पाकिस्तानी हाई कमीशन में 105 स्टाफ थे। 105 लोगों का सेम हमारा इस्लामाबाद में जो इंडियन हाई कमीशन है वहां पर 105 स्टाफ थे। बीच-बीच में कई बार जासूसी के इल्जाम लगते रहते हैं। हम
निकालते हैं तो उधर से पाकिस्तान निकालता है। पाकिस्तान निकालता है तो हम निकालते हैं। और अभी हालात ऐसे हुए कि 14th मई तक पाकिस्तान के इस हाई कमीशन में जो नई दिल्ली में है। सिर्फ और सिर्फ 26 स्टाफ थे। और इस्लामाबाद में भी हमारे 26 ही थे। 26 कहां कभी 105 हुआ करता था। 26 पर आकर रुक गया। लेकिन 13 मई को फॉरेन मिनिस्ट्री इसी दानिश के बारे में कहती है कि यह एक जासूस है और इसको 24 घंटे की मोहलत देती है कि आप देश छोड़ दो और 14 मई को दानिश देश छोड़ देता
है। उसके देश छोड़ते ही अब पाकिस्तानी हाई कमीशन में सिर्फ 25 स्टाफ है। और उसी दिन इस्लामाबाद में भी इंडियन हाई कमीशन के को कहा जाता है कि आपका एक स्टाफ जासूसी कर रहा है। आप इसको छोड़ दीजिए बाहर निकालिए और वो भी इंडिया आ जाता है। तो अब दोनों ही देशों में हमारे हाई कमीशन मेन इंडिया और पाकिस्तान में 25-25 स्टाफ है। अब इन 25 स्टाफ और ये वीजा सेक्शन का क्या कनेक्शन? तो दुनिया के जितने भी देश हैं जिनके अपने दूतावास होते हैं, जिनके अपने उच्चायोग होते हैं यानी एंबेसी या हाई कमीशन। उसमें
जो स्टाफ होता है उस स्टाफ में एक बड़ा हिस्सा उस देश की खुफिया एजेंसी उस देश के एजेंट या जासूस के तौर पर वहां उनकी बहाली होती है और ये एक ओपन सीक्रेट है। कुछ ऐसे होते हैं जैसे हमारे यहां से आईएफएस इंडियन फॉरेस्ट फॉरेन सर्विस से जो लोग हैं जैसे एंबेसडर है या हाई कमिश्नर हैं वो उस पोस्ट पे होते हैं। उनके नीचे दो चार वो भी फाइल वर्क पेपर वर्क करते हैं सब। लेकिन बाकी जो लोग होते हैं उनमें से मेजरिटी जो होती है वह एक एजेंट की होती है और खासतौर पर जो
सबसे ज्यादा डायरेक्ट पब्लिक डीलिंग होती है किसी भी देश के एंबेसी में या हाई कमीशन में वो पता है कहां होती है उसी वीजा सेक्शन पर क्योंकि वीजा लेने के लिए आपको इंटरव्यू देने के लिए वीजा सेक्शन तक जाना होता है और वीजा सेक्शन पर लोग बैठे होते हैं उस देश के नुमाइंदे मैं अगर पाकिस्तान का वीजा लेने गया हूं तो वहां हर काउंटर पर पाकिस्तानी होगा। वो किसी और देश के लोगों को नहीं बैठाते। इवन जब मैं लास्ट ईयर यूएस के लिए मैंने वीजा अप्लाई किया और मिला तो वहां जितने काउंटर थे उसप सारे
पे यूएस सिटीजन बैठे हुए थे। ऐसा नहीं कि इंडियन बहुत सारे उन्होंने एंप्लई हायर कर रखे हैं। वो वीजा का इंटरव्यू लेगा। बिल्कुल नहीं। वो अमेरिकन ही होगा। यह एक जरूरी है और इस जरूरी के पीछे की वजह यह है कि जो वीजा सेक्शन में बैठता है काउंटर पर वो पब्लिक से डायरेक्ट डीलिंग करता है। उसके सामने वीजा एप्लीकेशन होता है। उसके सामने उसका पासपोर्ट होता है। उसके सामने उसकी पूरी कुंडली होती है कि आप क्यों वीजा ले रहे हैं? आपको क्यों पाकिस्तान जाना है? वहां आप कौन रहते हैं? आप क्या करते हो? यहां कहां
रहते हो? आपका पूरा हिसाब किताब। तो एक तो डायरेक्ट डीलिंग। आप उससे बातचीत कर रहे हैं और वो एजेंट है माहिर जासूस है लेकिन डिप्लोमेट के भस में काउंटर पे बैठा हुआ है उस वक्त और वो भांप लेता है नजरों में उतनी देर में और आपसे बात करके कि ये आदमी हमारे किस काम आ सकता है ये कहां रहता है क्या करता है और ये कैसे हमारी मदद कर सकता है वो जो कुछ पल होता है ना उनका काम ही है प्रोफेशनल एजेंट जासूस है ये लोग तो फ्रंट डेस्क पे जो जितने भी एंबेसी या
दूतावास हैं या उच्चा आयोग हैं। उनमें वीजा डेस्क पर आपको दुनिया के हर देश का जासूसी बैठा हुआ मिलेगा। दानिश इसी पाकिस्तानी हाई कमीशन के वीजा सेक्शन में डिपट कर 2023 में भेजा गया था। क्योंकि वो पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव का एक हिस्सा था। यहां उसने डील किया। अब ये जो 12 लोग पकड़े गए अब सभी गए वीजा के लिए। इनमें से अलग-अलग कैरेक्टर है। अब यह वीजा के लिए जब जाते हैं तो उसी तरीके से देखता है कि इनमें से कौन किसका क्या प्रोफाइल है। अब वीजा है तो आप जाहिर सी बात है आप एक
एपेंट हैं। आवेदक हैं। आप मांगने गए हैं और कोई यूं ही फालतू में तो वीजा के लिए अप्लाई करता नहीं है। मिल गया तो ठीक नहीं मिला तो कोई बात नहीं। उन्हें जरूरत होती है। जाना ही जाना है। तो वीजा ऐसा भी नहीं कि हाथ का हाथ मिल जाता है। आपको कहते हैं ठीक है आप छोड़ जाइए। पासपोर्ट जिनको नहीं देना वह तो पासपोर्ट भी नहीं लेते हैं। कहते हैं ठीक है आपको बताएंगे फोन करके। फोन नंबर दे देते हैं और जो फोन नंबर रखते हैं वही फोन नंबर आगे काम आता है। अब उसको वो
फोन करते हैं। जैसे गजाला है मलेरकोट की यामीन है या फिर तारीफ है नूह का। ये सारे वो लोग हैं जब वीजा के लिए पाकिस्तानी एंबेसी गए। इनके नंबर लिए गए और इसके बाद अब इनको फोन आता है। दानिश पहले गजाला को फोन करता है। गजाला से कहता है कि तो मुझे अच्छी लगी। गजाला की कहानी यह है कि वो जवानी में विधवा हो गई। 2020 में उसके हस्बैंड के हार्ट अटैक से मौत हो गई। मलकोटला की रहने वाली पाकिस्तान में रिलेटिव रहते हैं। उसको पाकिस्तान जाना था। उसने पाकिस्तानी हाई कमीशन नई दिल्ली में अप्लाई
किया। 2023 में इत्तेफाक से दानिश पोस्टेड था। वहां उस काउंटर पर जाता है। उसी काउंटर पर दानिश बैठा हुआ था। वो उसकी प्रोफाइल देखता है। पंजाब मलेर कोटला सब कुछ। फिर वो नंबर लेता है। कहता है आपको बाद में बताएंगे। और उसके बाद वह उसको फोन करना शुरू करता है और धीरे-धीरे प्यार का इज़हार कहता है। कहता है मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं। गजाला एक विधवा वह भी उसकी बातों में आ गई। इसके बाद वो कहता है तुम्हें कुछ काम करना पड़ेगा वीजा देने से पहले। वो उसे कहता है मैं तुम्हें कुछ पैसे भेज
रहा हूं और तुम्हें कुछ मैं क्यूआर कोड भेजूंगा। यह पैसे उनको देना इनमें से कुछ तुम रख लेना। वो दो क्यू आर क्यूआर कोड भेजता है। अब वो अलग-अलग लोगों को थे। फिर वह फोन करता है और कहता है यह पैसे उसमें डाल दो। उसमें डाल दो। जाहिर सी बात है उसके कोई ना कोई एजेंट होंगे। अमाउंट बहुत बड़ी नहीं थी 10,000 7000 3000 लेकिन यह इस तरीके से काम चला। इसी तरीके से अब एक दूसरा शख्स आया यामीन उसको भी पाकिस्तान जाना। वो गया दानिश मिला उसी वीजा सेक्शन के काउंटर पर। उसने उसके नंबर
सब कुछ था। बोला हम आपको फोन करके बताएंगे। अब उसके बाद वो उसे फोन करता है। कहता है देखो तुमको वीजा तो दे देंगे लेकिन मुझे काम करना पड़ेगा। बोला क्या? बोला हम यहां बैठे हैं बहुत सारे डॉक्यूमेंट्स की जरूरत पड़ती है देनेवेने में फैमिली से बात करनी होती है यहां पाकिस्तानी नंबर यूज़ करूंगा बिल ज्यादा उठता है लोकल सिम चाहिए और दो सिम का इंतजाम कर दो यामीन दो सिम उठाता है और उसको जाकर दे देता है वो उसको वीजा दे देता है वो पाकिस्तान जाता है 14 दिन के लिए 14 दिन के बाद
वापस आता है यामीन भी मलेर कोर्ट का ही पंजाब का उसके बाद कुछ वक्त के बाद अब ये अब भी बात हो रही है पाकिस्तान में गए कैसा रहा सब अच्छे से घूम कर आए। बताता है सब अच्छा था। थैंक यू। इसके बाद अचानक अभी होता है कि भाई एंबेसी में मेरी दोस्ती है। तो वो एक दिन दानिश से कहता है कि मेरे दो-तीन दोस्त भी पाकिस्तान जाना चाहते हैं। उनका वीजा लगवा दो। वो कहता है ठीक है भेज दो। उनके भी वीजा लग गए। अब तीसरी बार फिर कुछ दोस्त। अच्छा इस दौरान में इसकी
दूसरी बार भी वीजा लग जाती। तीसरी बार फिर बात बढ़ती है। कहता है मेरे चार दोस्त हैं। उनका वीजा लगा दो। कहता भेज दो। वो चारों का भेज देता है। अचानक कुछ दिन बाद पता चला चारों के रिजेक्ट। यह कहता है भाई आपने रिजेक्ट क्यों किया? तो दानिश कहता है यार ऐसे फ्री में नहीं एक काम करो दोनों कमाते हैं पर वीजा ₹100 लेंगे। वो ₹100 लेता है और फिर चारों के वीजा दे देता है। फिर यामीन को भी वीजा देता है। यामीन इस दौरान में तीन बार पाकिस्तान हो आता है। अब इसके बाद वो
कहता है कि अब इसके बाद एक काम करो दानिश हट गया। अब एक दूसरा बंदा आ गया वहां पे कोई बलोच करके। उसने कहा यार वीजा तो तुम्हें देंगे तुम्हारे दोस्तों को भी देंगे अब सिम विम तो नहीं चाहिए तुम हिसार एयर बेस की कुछ तस्वीरें या जानकारी भेज दो ये लास्ट था इसी तरीके से जितने लोग वीजा के लिए गए उस वीजा के नाम पर कि वीजा मिलेगी उनको जरूरत थी और वो उनको फांसता गया और इस तरीके से एक नेटवर्क बनाया 12 पकड़े गए हैं अभी और ना मालूम कितने हैं लेकिन इन सब
के तार दानिश से जाकर जुड़े अब दानिश का जब पोल खुला तो वह कैसे खुला? जब छ और 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर हुआ उसके बाद देश भर की खुफिया एजेंसियों और स्टेट की पुलिस को कहा गया कि आप लड़ रहो क्योंकि पाकिस्तान पलटवार करेगा। तो एक तो उनके पाकिस्तान के नेटवर्क यहां स्लीपर सेल और बाकी उन सब पे आप नजर रखो कि आपके कौन-कौन से इलाके में पाकिस्तानी जासूसी या इस तरह के लोग एक्टिव हैं। खुफिया एजेंसियां भी लगी हुई थी। इसी दौरान में पंजाब की पुलिस को यह पता चला कि यहां मलेर कोटला
में गजाला नाम की एक लड़की है और इसकी एक पाकिस्तानी से बात होती है जो दानिश है और वो ऑलरेडी पाकिस्तानी हाई कमीशन में है। अब उस गजाला को ट्रैप किया गया। उसके नंबर निकाले गए। तो गजाला के नंबर से फिर यामीन के मिले। फिर शरीफ के मिले। फिर एक करतार के मिले। इस तरीके से कुछ मिलते गए। अब उन नंबरों को जब खंगाला गया रेडार पर रखकर तो फिर उनमें से ज्योति के नंबर मिले। फिर कुछ और लोगों के मिले। तो जब ये सारी जानकारी मिली तो इसके बाद फिर सेंट्रल एजेंसी को बताया गया।
सेंट्रल एजेंसी को जब यह पता चला कि इतने लोगों के साथ दानिश संपर्क में है तो फिर पुख्ता सबूत हाथ आते ही 13 मई को पाकिस्तानी उच्चायुक्त को कहा गया कि आपका यह स्टाफ जासूसी में इनवॉल्व है। 24 घंटे दे रहा हूं इसको भेज दीजिए और 14 मई को वो चला गया। इसके बाद इन सबको एक-एक कर गिरफ्तार किया गया। अब इन सभी से यह जानकारी ली जा रही है कि इन लोगों ने क्या-क्या ऐसे डॉक्यूमेंट्स दिए हैं। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कोई ऐसी चीज जो ऐसी क्लासिफाइड इंफॉर्मेशन चाहे वो पंजाब पुलिस हो या
हरियाणा पुलिस हो अभी तक इनकी जानकारी में नहीं आई। लेकिन दानिश के साथ इन सबके कनेक्शन साबित हो चुके हैं। अब सवाल ये है कि एक ऐसा बंदा दानिश जो पाकिस्तानी हाई कमिशन में बैठा हुआ है। हिंदुस्तान में वीजा के लिए आने वाले लोगों को अपने जासूसी के काम में इस्तेमाल करना चाहता है। उस दानिश को गिरफ्तार करने की बजाय पाकिस्तान 24 घंटे के अंदर क्यों भेज दिया गया? बहुत सारे लोगों के सवाल है। कई लोगों ने तो मेल में भी लिखा है क्राइम तक द फैमिली मेंबर ने। तो असल में इसकी एक वजह है।
एक इंटरनेशनल बंदिश वो यह है। कि जितने भी जासूस हैं वो जासूस के रोल में तो नहीं आते। हमारे यहां जो रॉ के लोग काम करते हैं पाकिस्तान में रॉ एजेंट की हैसियत से नहीं जा सकते। जितने जासूस हैं वो जासूस बनकर देश में किसी में दाखिल नहीं होते। या वो जासूस है और किसी और नाम से आए जैसे किसी भी वीजा पे टूरिस्ट वीजा पे आ जाए। आपको एक महीने का 14 दिन का वीजा मिलेगा। उसके बाद जाना पड़ेगा। उसके बाद आप क्या करेंगे? तो इसीलिए सबसे बेस्ट और सेफ रास्ता यह होता है कि
दुनिया की जितनी भी एंबेसी है दूतावास या हाई कमीशन यानी उच्चायोग वहां पर स्टाफ की जरूरत होती है। तो कुल मिलाकर कुछ स्टाफ तो होते हैं जो सच में एक एंबेसडर या हाई कमिश्नर के तौर पर उनका काम है जिम्मेदारी है दो देशों के बीच राब्ता कायम करना उनके बीच जो भी मसले हैं बात करना। बाकी लोगों को खपाया जाता है एजेंट के जरिए। दुनिया का हर देश यह काम करता है कि उनके एंबेसी में या उच्चा आयोग में एजेंट डिप्लोमेट के भेस में होते हैं। अब डिप्लोमेट के भस में क्यों होते हैं? इसलिए कि
अगर वो कोई क्राइम करते हुए उस देश में पकड़े भी जाए, भांडा भी फूट जाए तो आप उनको उस देश के कानून के हिसाब से सजा नहीं दे सकते। आप ज्यादा से ज्यादा यह कर सकते हैं कि उन्हें उनके देश को वापस भेज दीजिए। बस यही सजा हो सकती है। यही वजह है कि दानिश हिसार में जो ज्योति मल्होत्रा की एफआईआर दर्ज हुई है 16th मई को उसमें दानिश का नाम है और एफआईआर में दर्ज होने का मतलब होता है वांटेड है वो। लेकिन दानिश को गिरफ्तार करके यहां की अदालतों में उसके खिलाफ मुकदमा हम
चला ही नहीं सकते। क्यों? क्योंकि वो एक डिप्लोमेट के उस सर्किल के अंदर बंद कर यहां भेजा गया था। तो हम उस पर हाथ नहीं डाल सकते। हम ज्यादा से ज्यादा उसे देश निकाला दे सकते हैं। सजा नहीं दे सकते। तो इसी डिप्लोमेसी और इसी का फायदा उठाकर दुनिया का हर देश अपने जासूसों को उसी के नकाब पहनाकर उसी की आड़ में अपने अपने दूतावासों में जासूसी के लिए भेज देता है। और फ्रंट डोर पे जो जासूसी होती है वो उस वीजा सेक्शन से होती है। जिसका 21 साल पहले मैं खुद देख विटनेस था। तो
यह थी आज की कहानी। कहानी खत्म करूं उससे पहले वही अपना सिलसिला। आज इशाना इशू छोटी से अब बड़ी हो गई बहुत और मतलब चीनी और इशू लगभग सात-सात पहले बड़े थे। अब दोनों अलग रहे हैं। चीनी कहीं और पहुंच गई है पढ़ने के लिए। इशू अब तो खैर बड़ी हो गई। जॉब लग गई और मुंबई में है। बहुत होरार और यही दो बच्चे थे जिनके इर्द-गिर्द मैंने अपने खेलते हुए देखा। आज उसका बर्थडे है और स्पेशली मुंबई से आई हुई है इस वक्त इशू घर पे तो हैप्पी बर्थडे इशू हमेशा अच्छी रहो खुश रहो
और मम्मी पापा दादी दादा आज सब और रात को पार्टी भी है तुमने तो बताया भी था तो मेरी यही दुआ है ईशु की तुम हमेशा अच्छे रहो ईशु का पूरा नाम असल में ईशाना है ईशाना नाम बिहार बिल्कुल मुझे सही याद है तो हैप्पी बर्थडे ईशाना नाम बिहार उर्फ ईशु जो हम लोग पुकारते हैं ईशु के साथ मैंने में सबसे ज्यादा दिवाली और खोली चीनी इशू और मैं ये तीनों उसके हम लोग पाट रहे हैं। उसकी वजह ये है कि दोनों बच्चे थे और खूब गुब्बारा फेंकते थे पानी भरभर कर और दिवाली में मुझे
याद है कि ये सारी जो लाइटिंग और कैंडल्स और वो दिए जलाए जाते थे। इशू और चीनी का ही काम था। तो इन दोनों के जरिए मैंने ये सारी चीजें देखी। सारी चीजें याद आ जाती हैं। हैप्पी बर्थडे इशू। इसके अलावा आज इशिका का भी बर्थडे है। तो हैप्पी बर्थडे इशिका और यह भेजा है अमृत कुमार जी ने एंड थैंक यू सो मच ईशिका क्राइम तक की इस कहानी को सुनने के लिए इसको इसकी तारीफ के लिए जैसा कि अमृत ने बताया। प्रेमलता महंत इनका भी आज बर्थडे है। तो हैप्पी बर्थडे प्रेमलता जी और यह
हरिदास महंत जी की वाइफ है। साथ ही आलीशा खान इनका भी आज बर्थडे है। हैप्पी बर्थडे आलीशा और ये समीर खान जी ने भेजा है। इसके अलावा कमिश्क अवस्थी इनका भी आज जन्मदिन है। तो हैप्पी बर्थडे कमिश और अरविंद राठौर इनका भी आज बर्थडे है। हैप्पी बर्थडे अरविंद साहब। भेजा है विजय सेवरा ने। इसके अलावा एडवोकेट अब्दुल कादिर इनका भी आज बर्थडे है। तो हैप्पी बर्थडे कादिर साहब। तो इसके साथ ही कहानी में आज इतना ही। अब आपसे मुलाकात होगी कल रात 9:00 बजे किसी नई कहानी के साथ। तब तक अपना और अपनों का ख्याल
रखिएगा। थैंक यू वेरी मच।