कुछ कड़वा सनोज सुन लो तुम्हारी आंखें खुला जाएगी कंपटीशन इतना ज्यादा लोग तुम्हारे सर पर पाओ रखें आगे बढ़ाने को तैयार बैठे तुम क्या कर सकते हो वह तुम देखो तो मुझे बस यही कहना था की तुम अपने हिस की तैयारी करके रखा क्योंकि जब तुम कंपटीशन में जाओगे तो तुमसे भी माहिर लोग प्यार बैठे हैं तुम्हारी मर्जी है तुम कंपटीशन में नहीं फर्क नहीं पड़ता लेकिन कामयाब होना है तो जाना तो पड़ेगा और उसमें जी जान से मेहनत और हर पर करके लगातार कोशिश होता है इसमें भी इंसान कई बार फेल हो जाता है
लेकिन ऐसा नहीं होता बार-बार कोशिश करने वाला एक दिन पास हो जाता तुम भी इस बात को अच्छी तरह से जानते हो पता है जी कम को तुम बहुत ही पेशेंस करते हो ना वो कम ही तुम्हें जुनून ही बनाता जिसके लिए तुम पागल हो फर्क क्या पड़ता है हर दिन सुबह होती है हर दिन शाम हो जाति दिन का क्या है दिन तो गुर्जर रहा है तुम कुछ करो तो भी और तुम कुछ ना करो [संगीत] लेकिन मजा इसी में है ना यह तुम्हें कमजोर नहीं तुम्हें मजबूत बनती है [संगीत]