एक लड़की जो शिव की अनन्य भक्त थी जिसके लिए महादेव ही उसका संसार थे जिसकी जिंदगी ओम नमः शिवाय से शुरू होती और उसी पर खत्म होती थी। ओम नमः शिवाय। लेकिन फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि वही लड़की अब यीशु मसीहा का प्रचार करने। हे प्रभु यीशु मुझे बचा। [संगीत] यह बदलाव कैसे आया? आस्था बदली या कोई चमत्कार हुआ? आइए जानते हैं इस वीडियो में। यह वीडियो प्रभु यीशु मसीह में विश्वास रखने वालों के लिए बनाया गया है। इसका उद्देश्य केवल प्रभु के प्रेम, करुणा और विश्वास के संदेश को दिखाना है। यह एक काल्पनिक
प्रस्तुति है। इसका मकसद किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं बल्कि प्रभु के प्रेम को सांझा करना है। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में जहां [संगीत] नदियां शांत बहती हैं और खेतों की हरियाली सुबह की पहली किरणों से जगमगाती [संगीत] है, वहां पिंकी नाम की एक साधारण सी लड़की रहती थी। कस्बा ऐसा था जहां हर गली में मंदिरों की घंटियां [संगीत] बजती और लोग जीवन को एक साधारण चक्र की तरह जीते। जन्म, विवाह, मृत्यु। पिंकी का घर कस्बे के किनारे पर था जिसके आंगन में आम का एक पुराना पेड़ खड़ा था। वह पेड़
पिंकी के बचपन का साक्षी था। जहां वह [संगीत] झूले की तरह लटक कर गाती, भोले बाबा, मेरी हर मनोकामना पूरी करो। पिंकी की उम्र अभी 25 के आसपास ही थी। वह एक छोटे से स्कूल में [संगीत] पढ़ाती थी। जहां बच्चे उसके नाम से ही खुश होते। उसके चेहरे पर हमेशा एक मासूम सी मुस्कान [संगीत] तनी रहती जो उसके भीतर की सरल आस्था को दर्शाती। सुबह होते ही वह उठती, स्नान करती और घर के छोटे से मंदिर में जाती। वहां शिवलिंग पर जल [संगीत] चढ़ाती, दूध की धार बहाती, धूप जलाती और दीपक की लौ को देखते
हुए प्रार्थना करती। भोलेनाथ मेरे परिवार पर आपकी कृपा बनी रहे। मेरा पिता मजबूत रहे। [संगीत] मां स्वस्थ रहे। भाई पढ़ाई में आगे बढ़े। बस इतना ही उसकी आवाज इतनी कोमल होती कि लगता जैसे हवा में घुलकर आकाश तक पहुंच जाए। उसके परिवार में चार ही सदस्य थे। [संगीत] पिता रामलाल जो एक छोटी सी दुकान चलाते थे। मां सरला जो घर संभालती [संगीत] और कभी-कभी सिलाई का काम करती। छोटा भाई राजू जो दसवीं कक्षा में था और सपने देखता [संगीत] था डॉक्टर बनने के और पिंकी खुद जीवन सादा था लेकिन खुशहाल। [संगीत] हर सोमवार को पिंकी
व्रत रखती, मंदिर जाती, भजन गाती। कस्बे [संगीत] के लोग उसे पिंकी भक्तिन कहते। वह कहती भगवान सब संभालते हैं। बस हमें [संगीत] विश्वास रखना है। लेकिन जिंदगी कभी-कभी ऐसी परीक्षा लेती है जो आस्था की जड़ों को हिला देती है। एक सामान्य सी शाम थी। सूरज ढल रहा था और पिंकी स्कूल से लौट कर घर पहुंची। आंगन में मां खड़ी थी। [संगीत] चेहरे पर चिंता की लकीरें। पिंकी तेरे पापा को खांसी हो गई है। तेज-तेज खांस रहे हैं। [संगीत] पिंकी ने जल्दी से बैग रखा और कमरे में गई। पिता बिस्तर पर लेटे थे। सांसे भारी चेहरा
पीला। [संगीत] पापा क्या हुआ? उसने पूछा। हाथों में उनका हाथ थामते हुए। रामलाल ने मुस्कुराने की कोशिश की। कुछ नहीं बेटी। बस ठंड लग गई होगी। कल ठीक हो जाऊंगा। लेकिन अगला दिन सुबह-सुबह [संगीत] ही काला पड़ गया। डॉक्टर के पास ले गए। छोटा सा क्लीनिक जहां इंतजार की लंबी लाइनें। रिपोर्ट आई फेफड़ों में कुछ गड़बड़। कैंसर के लक्षण हैं। डॉक्टर ने कहा आवाज में संकोच। जल्दी शहर के बड़े अस्पताल ले जाओ। घर लौटते वक्त पिंकी की आंखें नम [संगीत] थी। लेकिन वह चुप रही। घर पहुंचकर उसने सीधे मंदिर की ओर रुक गया। भगवान यह
क्या हो गया? पापा को कुछ मत होने दो। मैं रोज पूजा करूंगी। व्रत [संगीत] रखूंगी। बस उन्हें बचा लो। उसकी प्रार्थना में अब डर घुला था लेकिन विश्वास अभी भी बरकरार दिन बीतने लगे पिता की हालत बिगड़ती गई [संगीत] दवा इंजेक्शन लेकिन सुधार नहीं घर का माहौल बदल गया हंसी गायब सिर्फ चुप्पी और सिसकियां पिंकी ने पूजा [संगीत] का समय बढ़ा दिया सुबह 4:00 बजे उठना रात 2:00 बजे तक मंत्र जपना लेकिन शांति [संगीत] नहीं मिल रही थी ऐसा लगता था जैसे उसके शब्द आकाश में टकरा रहे हो वापस लौट आ रहे फिर अनहोनी शुरू
हुई। छोटा भाई राजू जो पहले होमवर्क में तेज था, अब स्कूल से लौट कर चुपचाप बैठ जाता। नोट्स भूल जाता, [संगीत] परीक्षा में फेल होने लगा। भाई क्या हुआ? पिंकी पूछती लेकिन राजू सिर्फ सिर हिला [संगीत] देता। मां सरला को भी सिर दर्द होने लगा। लगातार जैसे कोई सुई चुभ रही हो। मुझे लगता है घर में कोई नेगेटिव एनर्जी है। मां कहती [संगीत] लेकिन कोई विश्वास नहीं करता। रातें सबसे डरावनी हो गई। पहले तो छोटी-छोटी आवाजें जैसे कोई फुसफुसा रहा हो या दरवाजा खटखटा रहा हो। सबने इसे हवा या तनाव समझा। लेकिन एक रात [संगीत]
पिंकी अकेली कमरे में थी। लालटेन की रोशनी में वह शिव चालीसा पढ़ रही थी। अचानक पीठ के पीछे ठंडक [संगीत] महसूस हुई। ऐसा लगा जैसे कोई सांस ले रहा हो। उसके कंधे पर। हृदय की धड़कन तेज हो गई। वह मुड़ी कमरा खाली। लेकिन दिया जो अभी-अभी जला था अपने [संगीत] आप बुझ गया। हवा में सन्नाटा। पिंकी की सांसे रुक-रुक कर चलने लगी। कौन है? उसने फुसफुसाया लेकिन जवाब में सिर्फ अंधेरा। अगली रात सपने आए। एक काली परछाई [संगीत] लंबी पतली आंखें लाल। वह पिंकी को घूरती, मुस्कुराती। तुम्हारा कोई नहीं। तुम्हें कोई [संगीत] नहीं बचा सकता।
आवाज कान में गूंजती। पिंकी चीख कर जागी। [संगीत] पसीने से तर मां दौड़ कर आई। क्या हुआ बेटी? लेकिन पिंकी कुछ ना कह सकी। बस रोई। अगले दिन मंदिर गई। [संगीत] शिवलिंग के सामने घुटनों पर बैठी। भगवान मेरे परिवार के साथ यह सब क्यों? मैंने तो हमेशा आपके रास्ते पर चली हूं। मेरी प्रार्थना क्यों नहीं सुनते? [संगीत] आंसू जल चढ़ाने वाले हाथों से टपक रहे थे। लेकिन मंदिर का सन्नाटा और [संगीत] गहरा हो गया। कोई चिन्ह, कोई संकेत नहीं। पिंकी टूटने लगी। उसकी मुस्कान गायब हो गई। आंखें [संगीत] सूझी, चेहरा पीला। पूजा अभी भी जारी
थी लेकिन अब इसमें डर था। डर की [संगीत] कहीं भगवान नाराज तो नहीं? पड़ोसी फुसफुसाते कुछ तोनाटोटका लगता है। एक वृद्धा [संगीत] जो कस्बे की जानीमानी ओझा थी ने एक शाम घर आकर कहा बेटी तुम पर किसी चुड़ैल का साया है। कोई जलनखोर औरत ने बुरी नजर डाली होगी। पिंकी के पैर [संगीत] कांप गए। रात को फिर वहीं परछाई करीब आई। सांसे छीनने लगी। पिंकी ने [संगीत] ओम नमः शिवाय जपा लेकिन आवाज दबी रही। उसे लगा मौत आ रही है। आस्था में पहली दरार पड़ चुकी थी। विश्वास और डर के बीच का पुल [संगीत] टूटने
लगा। तूफान अभी शुरू ही हुआ था। पिंकी के जीवन में अब हर पल एक संघर्ष बन गया था। सुबह की पहली किरण भी अब अंधेरे जैसी लगती। [संगीत] पिता रामलाल का इलाज जारी था। लेकिन हर रिपोर्ट निराशाजनक। शहर के अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन डॉक्टर कहते स्टेज तीन है चमत्कार की जरूरत है। [संगीत] पिंकी चमत्कार के लिए प्रार्थना करती। लेकिन उसके भीतर अब शक का कीड़ा काटने [संगीत] लगा था। अगर भगवान है तो क्यों नहीं सुनते? यह सवाल [संगीत] रात दिन उसके दिमाग में घूमता। नींद गायब हो चुकी थी। रातें लंबी, [संगीत] डरावनी, चेहरा सूख
गया। आंखों के नीचे काले घेरे जैसे जख्म। [संगीत] मां सरला देखकर रो पड़ती। बेटी तू खुद को मत मार। लेकिन पिंकी मुस्कुराने की कोशिश करती। एक खोखली [संगीत] मुस्कान जो उसके टूटे मन को छिपाती। घर में मुसीबतें एक के बाद एक आ रही थी। छोटा भाई राजू अब [संगीत] पूरी तरह बदल गया। स्कूल से लौटता तो चुपचाप कोने में सिकुड़ जाता। [संगीत] भाई क्या हुआ? पिंकी पूछती। लेकिन राजू सिर्फ कांपता। एक रात वह चीखा। दीदी खिड़की पर कोई है? काली आकृति, आंखें चमक रही हैं। [संगीत] सब दौड़े, खिड़की खुली थी। हवा का झोंका लेकिन राजू
की आंखें डर से भरी। अगले दिन उसकी किताबें [संगीत] बिखर गई। जैसे कोई अदृश्य हाथ ने उछाल दी। मां को रात में बुखार आ गया। तेज जैसे [संगीत] आग लगी हो। मुझे लगता है कोई मुझे दबा रहा है। वो फुसफुसाती। [संगीत] पड़ोसी आते तांत्रिक बुलाते लेकिन कुछ नहीं बदलता। कस्बे में अफवाहें [संगीत] फैली। रामलाल के घर में भूत है। चुड़ैल का साया। पिंकी ने हर उपाय आजमाया। पहले वाले पंडित को [संगीत] छोड़ दिया। नए बुलाए। महंगे यज्ञ करवाए। मंत्रों की माला जपती हवन करती। [संगीत] लेकिन राहत नाम मात्र की बल्कि समस्या बढ़ी। अब साया सिर्फ
पिंकी का नहीं। पूरे परिवार का पीछा करने लगा। रात में दरवाजे अपने आप [संगीत] बंद होते जैसे कोई धक्का दे रहा हो। पिंकी चलते-चलते रुक जाती। छोटी खींची जाती ठंडी उंगलियों से। कौन वह चिल्लाती लेकिन [संगीत] सिर्फ हंसी की सी आवाज। एक शाम वह बाजार गई दवाई लेने। लौटते वक्त रास्ता अंधेरा था। अचानक पैरों में कुछ लिपटा जैसे सांप। चीख कर भागी लेकिन घर पहुंच कर देखा। कुछ नहीं सिर्फ डर। परिवार असहाय था। पिता [संगीत] बिस्तर पर लेटे सिसकते। भगवान ने हमें त्याग दिया। मां प्रार्थना करती लेकिन उनकी [संगीत] आंखों में विश्वास नहीं। राजू रातें
जागता दीदी के कमरे में सोने आता। पिंकी अकेले [संगीत] में रोती। मैंने क्या गुनाह किया? उसकी आस्था अब बोझ बन गई। [संगीत] पूजा करती लेकिन मन नहीं लगता। लगता कि शिवलिंग पत्थर का टुकड़ा मात्र है। सपने और डरावने हो गए। काली [संगीत] परछाई अब बोलती, तुम्हारा भगवान बह रहा है। मैं तुम्हें ले लूंगी। पिंकी जागती, [संगीत] वह पसीना पसीना हो जाती। एक रात नदी किनारे गई। कस्बे की पवित्र [संगीत] नदी जहां लोग डुबकी लगाते वह अकेली बैठी आंसू बहाती। [संगीत] पानी की लहरें अपने दर्द को सुनाने लगती। हे भगवान अगर आप सचमुच हैं [संगीत] तो
मेरी सुनिए मैं थक गई हूं। हमेशा पूजा की व्रत रखिए। फिर मेरा घर क्यों [संगीत] उजड़ रहा? हम ही क्यों? उसकी चीख नदी में घुल गई। लेकिन आसमान चुप। अचानक पीठ के पीछे एक [संगीत] ठंडी हवा चली। वह उठी लेकिन उसके पैर जमे रह गए। नहींसाहट आई। तुम अकेली [संगीत] हो। कोई नहीं बचा सकता। वह घर की ओर भागी और मां के गले लगकर रोई। [संगीत] मां भी फूट-फूट कर सब टूट चुके थे। लेकिन इसी अंधेरे में एक किरण की शुरुआत होने वाली थी। एक मुलाकात जो सब बदल देगी। पिंकी अभी नहीं जानती थी। लेकिन
तूफान [संगीत] का केंद्र बीत चुका था। अब मोड़ आने वाला था। डर अभी बाकी था लेकिन उम्मीद की एक पतली [संगीत] डोर भी। दिसंबर का महीना था। कस्बे में सर्दी की ठंड हड्डियां चीर रही थी। [संगीत] लेकिन शहर की ओर सजावटें चमक रही थी। क्रिसमस का समय, रोशनी की मालाएं, स्टार की चमक, गीतों की धुन। पिंकी के लिए यह सब बेईमानी था। उसका संसार [संगीत] अब सिर्फ दर्द का था। पिता अस्पताल में मां बीमार, भाई डरा हुआ। वह खुद एक छाया सी। लेकिन भाग्य ने एक पुरानी दोस्त को भेजा। [संगीत] रीना। रीना शहर में रहती
थी। एक छोटी सी नौकरी करती। कॉलेज की सहेली जो कभी-कभी चिट्ठियां लिखा करती। एक शाम वह अचानक आई। पिंकी कितने दिनों बाद वह हंसी और गले लगी। [संगीत] लेकिन रीना ने चेहरा देखा। उतारा थका हुआ। क्या हुआ तुझे? इतनी बदली क्यों? पिंकी पहले तो चुप रही। फिर आंगन में बैठे-बैठे रोते हुए कांपते हुए सब कह डाली। पिता की बीमारी, भाई का डर, मां का दर्द, रातों की परछाइयां। [संगीत] रीना लगता है भगवान ने हमें छोड़ दिया। मेरी पूजाएं व्यर्थ हो गई। रीणा ने हाथ थामा, चुपचाप सुना। फिर शांत स्वर [संगीत] में कहा, सुन पिंकी, कभी-कभी
दर्द इतना गहरा होता है कि हमारी पुरानी राहें तंग लगने लगती हैं। [संगीत] हमारे शहर में क्रिसमस प्रोग्राम हो रहा है। बस मेरे साथ चल। वहां लोग हैं, संगीत है, [संगीत] शायद हल्का लगे। कोई प्रेशर नहीं बस घूमा। पिंकी हिचकिचाई। वह हिंदू थी। अपनी परंपराओं से बंधी। क्रिसमस वो तो [संगीत] ईसाई लोगों का। मुझे क्या लेकिन भीतर का दर्द चीख रहा था किसी सहारे [संगीत] के लिए आखिरकार हामी भर ली ठीक है बस एक बार प्रोग्राम का दिन आया रीना [संगीत] ने साड़ी पहनाई हल्का मेकअप शहर पहुंची तो माहौल जादुई चर्च के बाहर लाइट्स बच्चों
की [संगीत] हंसी कैरल गाने पिंकी का दिल धड़का मैं यहां क्यों लेकिन [संगीत] रीना ने हाथ खींचा अंदर घुसे तो संगीत गिटार की धुन आवाें साइलेंट नाइट लोग मुस्कुराते एक दूसरे को गले [संगीत] लगाते पिंकी को लगा जैसे कोई सपना उसके घर की उदासी से कोसों दूर [संगीत] मंच पर एक व्यक्ति आया पादरी जैसा वह बोले क्रिसमस सिर्फ रोशनी का त्यौहार नहीं [संगीत] यह उम्मीद का है कभी हम टूट जाते हैं सोचते हैं ईश्वर हमें भूल गए लेकिन सच यह है वह हमेशा पास है। बस हम उनकी आवाज सुनना भूल जाते हैं। यीशु ने कहा
मैं थके हारे लोगों के पास [संगीत] आता हूं। आपका दर्द सुनता हूं। शब्द पिंकी के दिल में उतर गए। आंखें नम। पहली बार [संगीत] लगा कोई उसका दर्द समझ रहा है। प्रोग्राम के बाद रीना ने उसे एक शांत कोने में ले गई। चर्च के बगीचे में बेंच पर बैठे। पिंकी सुन यीशु के बारे में जानती है। वह दुखियों के दोस्त हैं। टूटे दिलों को जोड़ते हैं। किसी को असहाय [संगीत] नहीं छोड़ते। पिंकी बोली कांपते स्वर में। अगर वह सुनते हैं तो मेरा दर्द, मेरा परिवार, वो परछाई। रीना ने कहा हां बस दिल से पुकार। कोई
रस्म नहीं बस विश्वास कर। पिंकी चुप लेकिन भीतर [संगीत] कुछ हिला। उस रात घर लौटी कमरे में अकेली। पहली बार शिवलिंग की बजाय [संगीत] एक छोटा सा बाइबल जो रीना ने दिया था उसे हाथ में लिया। यीशु अगर आप हैं। [संगीत] मेरी सुनो मुझे डर लगता है। परिवार को बचा लो। डरतेडरते लेकिन एक छोटी उम्मीद के [संगीत] साथ आंसू बहने लगे। लेकिन गर्म शुद्ध उस रात नींद आई [संगीत] महीनों बाद कोई सपना नहीं कोई फुसफुसाहट नहीं सुबह उठी तो हल्कापन ऐसा लगा बोझ कम हुआ [संगीत] लेकिन डर बाकी था क्या यह स्थाई है या फिर
धोखा नई राह का दरवाजा खुल चुका था [संगीत] लेकिन अंदर कदम रखना अभी बाकी था पिंकी कशमकश में पुरानी आस्था और नई [संगीत] उम्मीद के बीच लेकिन पहला कदम उठ चुका था अगली सुबह सूरज की किरणें आंगन में अलग तरह से चमकी पिंकी [संगीत] जगी और चाय चाय बनाकर लाई। मां ने उसे देखा और बोली, बेटी आज तुम कुछ बदली हुई लग रही हो। पिंकी ने हल्की मुस्कान दी। हालांकि [संगीत] भीतर डर अभी भी बचा था। रात को फिर वही सपना आया। काली आकृति उसकी ओर बढ़ी। [संगीत] पर इस बार पिंकी नहीं डरी। उसने बाइबल
पकड़ा और कहा, तुम्हारा मुझ पर कोई हक नहीं। यीशु मसीह के कोड़े खाने से मैं आजाद हो चुकी हूं। हर एक बंधन से, हर [संगीत] एक पाप से, हर एक शाप के बंधन से प्रभु यीशु मसीह ने मुझे छुड़ा लिया है। यीशु मेरे साथ है। कमरे में रोशनी फैल गई और परछाई गायब हो गई। पिंकी राहत से उठी। क्या यह सब सच में खत्म हो गया? धीरे-धीरे घर में शांति लौटने लगी। पिता की तबीयत सुधरने लगी। राजू ने फिर पढ़ाई शुरू [संगीत] की। मां का सिर दर्द गायब हो गया। छोटी-छोटी बातों पर घर में हंसी
लौट आई। पड़ोसी पूछते क्या जादू हो गया। पिंकी बस मुस्कुरा देती। वह जानती थी यह [संगीत] उसकी प्रार्थनाओं की ताकत थी। वह यीशु की कहानियां पढ़ने लगी। उसे यह बात गहराई से छू गई कि हर दर्द का एक द्वार मुक्ति की [संगीत] ओर खुलता है। एक दिन वह फिर नदी किनारे गई और बोली यीशु [संगीत] धन्यवाद। आपने मेरी पुकार सुनी। उसे लगा जैसे हवा भी शांत होकर उसे सुन रही हो। यहीं से उसकी आध्यात्मिक राह बदलने लगी। अपने व्यक्तिगत अनुभव और भीतर उठी नई आस्था के कारण पिंकी ने धीरे-धीरे अपने पुराने देवी देवताओं की पूजा
छोड़ दी और पूरी तरह यीशु के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया। यह उसका [संगीत] स्वयं का निजी चुनाव था। किसी के प्रति विरोध या कटुता से नहीं बल्कि उस शांति के कारण जो उसने महसूस की। [संगीत] घर लौटकर उसने परिवार से कहा, "मैं अब यीशु की प्रार्थना करूंगी। अगर आप चाहे तो साथ बैठ सकते हैं। [संगीत] परिवार ने उसकी भावनाओं का सम्मान किया और किसी ने विरोध नहीं किया। समय के साथ पिंकी मजबूत होती गई। वह लोगों की मदद करने लगी। विधवा को सांत्वना, बीमार [संगीत] बच्चे को हौसला। धीरे-धीरे वह यीशु के वचनों को
सीखा। साझा करने लगी प्यार, क्षमा और [संगीत] उम्मीद की बातें। महीनों बाद पिता घर लौट आए। डॉक्टरों ने इसे चमत्कार कहा। पिंकी ने महसूस किया कि उसकी नई राह ने उसे टूटन से ताकत दी थी। कस्बे के लोग उसे सेविका कहने लगे। वह मुस्कुरा कर कहती मैं बस वो हूं जिसने दर्द देखा और उम्मीद को पकड़ा। घर फिर से हंसी से भर गया और पिंकी अंधेरे को पार कर अब रोशनी बांटने निकल गई थी।