क्या आपने कभी रात को सोते वक्त यह सोचा है? अगर कल मेरी जॉब चली गई तो मैं कितने महीने सर्वाइव कर पाऊंगा? ज्यादातर लोग इस सवाल से डर जाते हैं क्योंकि सच्चाई कड़वी है। हम पूरी जिंदगी सैलरी के भरोसे जीते हैं और सैलरी एक ऐसी चीज है जो आती भी है और डर भी देती है। आज अगर जॉब है तो सब ठीक। कल नहीं है तो पैनिकिक। लेकिन सवाल यह नहीं है कि जॉब बुरी है या अच्छी। सवाल यह है क्या आप सिर्फ जॉब पर डिपेंडेंट रहना चाहते हैं क्योंकि जॉब आपको जिंदा रखती है लेकिन
एसेट्स आपको आजाद बनाते हैं। आज इस वीडियो में मैं आपको बताऊंगा नाउ ऐसे एसेट्स जो अगर आपने जॉब के साथ साथ बना लिए तो आने वाले 5 सात साल में आपकी पूरी फाइनेंशियल रियलिटी बदल सकती है। यह मोटिवेशन नहीं है। यह फाइनेंशियल ट्रुथ है। एसेट एक डिजिटल प्रोडक्ट्स सबसे पावरफुल एसेट जो एक जॉब करने वाला इंसान बना सकता है वह है डिजिटल प्रोडक्ट और इसकी ताकत समझने के लिए पहले एक कड़वी सच्चाई समझनी पड़ेगी। जॉब में आप जितना काम करते हो उतना ही पैसा मिलता है। काम रुका, पैसा रुका लेकिन डिजिटल प्रोडक्ट में आप काम
एक बार करते हो और पैसा बार-बार आता है। यही फर्क है इनकम और एसेट में। डिजिटल प्रोडक्ट का मतलब कोई बहुत बड़ा कोर्स या बहुत भारी चीज नहीं होती। डिजिटल प्रोडक्ट वो होता है जो आपकी नॉलेज को एक यूजेबल फॉर्म में बदल दे। जैसे एक सिंपल ई बुक एक छोटा ऑनलाइन कोर्स एक पीडीएफ गाइड रेडी मेड टेंपलेट्स वर्क बुक्स चेक लिस्ट्स [संगीत] या फिर वीडियो ट्यूटोरियल सीरीज आज के टाइम में हर इंसान के पास कुछ ना कुछ ऐसा एक्सपीरियंस है जो किसी और इंसान की प्रॉब्लम सॉल्व कर सकता है। लेकिन ज्यादातर लोग यहीं पर रुक
जाते हैं। वह सोचते हैं मेरे पास तो कोई खास नॉलेज नहीं है। मैं एक्सपर्ट नहीं हूं। मेरे जैसे तो हजारों लोग हैं। कौन खरीदेगा मेरा प्रोडक्ट? और यही सोच उन्हें हमेशा कंज्यूमर बनाकर रखती है। क्रिएटर नहीं बनने देती। सच्चाई यह है कि आपको एक्सपर्ट नहीं होना है। आपको बस उस इंसान से दो कदम आगे होना है जो अभी आपकी बात सुन रहा है। अगर आपने किसी प्रॉब्लम को दो-ती साल में सॉल्व किया है तो वही आपकी प्रोडक्ट है। हो सकता है आपने जॉब स्ट्रेस हैंडल करना सीखा हो। हो सकता है आपने फ्रीलांसिंग स्टार्ट की हो।
हो सकता है आपने एग्जाम्स क्रैक किए हो। हो सकता है आपने वेट लॉस किया हो। हो सकता है आपने पैसे मैनेज करना सीखा हो। आप जो आज नॉर्मल समझते हो वो किसी और के लिए लाइफ सेविंग सॉल्यूशन हो सकता है। डिजिटल प्रोडक्ट बनाने का मतलब नॉलेज बेचना नहीं है। सॉल्यूशन बेचना है। लोग इंफॉर्मेशन नहीं खरीदते। लोग क्लेरिटी खरीदते हैं, शॉर्टकट खरीदते हैं, मिस्टेक से बचने का रास्ता खरीदते हैं। मान लो आपने एक छोटी सी ई-बुक बना दी जिसका टॉपिक है जॉब करते हुए स्ट्रेस कैसे मैनेज करें या 30 दिन में एक नई स्किल कैसे सीखें
या फ्रीलांसिंग बेसिक्स फॉर बिगिनर्स। अब सोचो अगर तुम इस प्रोडक्ट को 1999 या ₹99 या ₹499 में बेचते हो और महीने में सिर्फ 100 लोग भी खरीद लेते हैं तो भी कैलकुलेशन खुद बोलती है और सबसे बड़ी बात यह इनकम आपके टाइम से जुड़ी नहीं है। आप ऑफिस में हो, आप सो रहे हो। आप ट्रैवल कर रहे हो, आप फैमिली के साथ हो, फिर भी प्रोडक्ट बिक रहा है। यही वह जगह है जहां पैसा आपके लिए काम करना शुरू करता है। डिजिटल प्रोडक्ट बनाने के लिए आपको फैक्ट्री नहीं चाहिए, स्टाफ नहीं चाहिए, स्टॉक नहीं चाहिए,
शॉप नहीं चाहिए। आपकी पूरी कंपनी है। आपका लैपटॉप, आपका इंटरनेट और आपका दिमाग। शुरुआत में सेल्फ डाउट आएगा। आप खुद से पूछोगे क्या लोग सच में खरीदेंगे? मैं सही बोल रहा हूं या नहीं? अगर फेल हो गया तो लेकिन याद रखना हर सक्सेसफुल डिजिटल क्रिएटर इसी फेज से गुजरा है। जो लोग आज लाखों कमा रहे हैं। उन्होंने भी पहला प्रोडक्ट डर के साथ ही डाला था। डिफरेंस सिर्फ इतना था। उन्होंने डर के बावजूद एक्शन लिया [संगीत] और बाकियों ने सिर्फ सोचा डिजिटल प्रोडक्ट का असली जादू टाइम के साथ दिखता है। पहले महीने शायद दो सेल
हो, पांच सेल हो, 10 सेल हो। लेकिन जैसे जैसे आप ऑडियंस बनाते हो, ट्रस्ट बिल्ड होता है, कंटेंट डालते रहते हो। वही प्रोडक्ट हर महीने अपने आप बिकने लगता है। Instagram, YouTube, WhatsApp Telegram, Lindin हर प्लेटफार्म आपकी डिजिटल शॉप बन सकता है। आप वैल्यू शेयर करते हो। लोग आप पर भरोसा करते हैं और वही लोग आपके कस्टमर बन जाते हैं और जब एक बार सिस्टम बन जाता है तो वही सिस्टम आपके लिए दिन रात काम करता है। यही कारण है कि डिजिटल प्रोडक्ट को मॉडर्न टाइम का सबसे स्मार्ट एसेट कहा जाता है। जॉब में आपकी
इनकम लिमिटेड होती है। डिजिटल प्रोडक्ट में आपकी इनकम स्केलेबल होती है। आप अपना टाइम नहीं बेचते। आप अपना एक्सपीरियंस बेचते हो, अपनी सोच बेचते हो, अपनी क्लेरिटी बेचते हो। और यही माइंडसेट एक जॉब होल्डर को एसेट बिल्डर बना देता है। अगर आप चाहते हो कि आने वाले सालों में आपकी सैलरी आपकी मेन इनकम ना रहे। बल्कि एक सपोर्ट सिस्टम बने तो डिजिटल प्रोडक्ट के बारे में आज ही सोचना शुरू करो। आज शुरू करोगे तो छोटा लगेगा। लेकिन कल यही छोटा कदम आपकी फाइनेंशियल फ्रीडम की सबसे बड़ी वजह बनेगा। याद रखना जो लोग आज सिर्फ कंटेंट
कंज्यूम कर रहे हैं वो वहीं रुक जाएंगे। और जो लोग कंटेंट को प्रोडक्ट में बदल रहे हैं वो क्वाइटली नेक्स्ट लेवल पर पहुंच रहे हैं। डिजिटल प्रोडक्ट सिर्फ पैसा नहीं देता। यह आपको कंट्रोल देता है, कॉन्फिडेंस देता है और सबसे बड़ी बात ऑप्शन देता है और ऑप्शंस ही असली अमीरी होती है। एसेट दो सेल्फ एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट। दूसरा और सबसे अंडर रेटेड एसेट जिसे ज्यादातर लोग एसेट मानते ही नहीं वो है सेल्फ एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट। और मजे की बात यह है कि अगर यह एसेट मजबूत हो गया तो बाकी सारे एसेट्स अपने आप
बनना आसान हो जाते हैं। क्योंकि किसी भी इंसान का सबसे कीमती एसेट उसका दिमाग होता है। लेकिन प्रॉब्लम यह है कि ज्यादातर लोग सीखना वहीं बंद कर देते हैं। जहां स्कूल और कॉलेज खत्म होता है। उन्हें लगता है अब जॉब मिल गई। अब सीखने की जरूरत नहीं। और यहीं से उनकी ग्रोथ रुक जाती है। दुनिया बहुत तेज बदल रही है। जो स्किल आज काम की है, हो सकता है 5 साल बाद इररेवेंट हो जाए। लेकिन जो इंसान खुद को अपडेट करता रहता है, वह कभी आउटडेटेड नहीं होता। सेल्फ एजुकेशन का मतलब सिर्फ किताबें पढ़ना नहीं
होता। सेल्फ एजुकेशन का मतलब है अपनी सोच को अपग्रेड करना। अपनी स्किल्स को शार्पन करना और अपने माइंडसेट को एक्सपेंड करना। आज मार्केट टाइम के पैसे नहीं देता। मार्केट वैल्यू के पैसे देता है। आप जितनी बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व कर सकते हो, आप उतना ज्यादा कमा सकते हो। [संगीत] और प्रॉब्लम सॉल्व करने की एबिलिटी स्किल्स से आती है। सोचो दो लोग एक ही जॉब करते हैं। एक ही कंपनी में एक ही डेेजिग्नेशन पर। लेकिन एक इंसान कम्युनिकेशन में स्ट्रांग है, डिसीजन लेने में क्लियर है, डिजिटल टूल्स समझता है। नई चीजें जल्दी सीखता है। और दूसरा इंसान
बस वही करता है जो उसे बोला जाता है। लॉन्ग टर्म में कौन आगे जाएगा यह बताने की जरूरत नहीं। सेल्फ एजुकेशन आपको भीड़ से अलग करता है। आज इंटरनेट पर हर स्किल अवेलेबल है। कम्युनिकेशन स्किल्स, सेल्स, डिजिटल मार्केटिंग, वीडियो एडिटिंग, ग्राफिक डिजाइन, कोडिंग, एआई टूल्स, इन्वेस्टिंग, फ्रीलांसिंग सब कुछ। बस एक क्लिक दूर है। लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ लोग स्क्रॉल करते रहते हैं और कुछ लोग सीख करते रहते हैं। जो सीख करता है वही अर्न करता है। अगर आप अपनी मंथली इनकम का सिर्फ 10% खुद पर इन्वेस्ट करना शुरू कर दो तो कुछ
ही सालों में आपकी वैल्यू कई गुना बढ़ सकती है। और जैसेजैसे आपकी वैल्यू बढ़ती है वैसे वैसे आपकी इनकम भी बढ़ती है। याद रखना कंपनी आपको उसके हिसाब से पैसे देती है लेकिन मार्केट आपकी वैल्यू के हिसाब से पैसे देता है। सेल्फ एजुकेशन आपको जॉब सीकर नहीं प्रॉब्लम सॉल्व बनाती है और प्रॉब्लम सॉल्वर्स कभी बेरोजगार नहीं होते। शुरुआत में रिजल्ट्स छोटे लग सकते हैं। एक नई स्किल सीखने में [संगीत] शायद 3 महीने लगे, 6 महीने लगे। लेकिन वही स्किल आपको आगे चलकर मल्टीपल इनकम सोर्सेज बनाने की ताकत देती है। आप फ्रीलांसिंग शुरू कर सकते हो,
कंसल्टिंग दे सकते हो, साइट प्रोजेक्ट्स ले सकते हो, डिजिटल प्रोडक्ट्स बना सकते हो, YouTube कंटेंट बना सकते हो। एक स्किल दूसरे एसेट का दरवाजा खोलती है। लेकिन यहां एक ट्रैप भी है। ज्यादातर लोग लर्निंग में ही फंसे रहते हैं। कोर्स पर कोर्स वीडियो पर वीडियो बुक पर बुक लेकिन एक्शन जीरो। याद रखना लर्निंग तब तक यूज़लेस है जब तक उसे अप्लाई ना किया जाए। स्किल वही है जो प्रॉब्लम सॉल्व करे। नॉलेज वह है जो दिमाग में पड़ी रहे। अगर आपने कुछ सीखा है तो उसे तुरंत छोटे लेवल पर अप्लाई करो। परफेक्ट होने का इंतजार मत
करो। मार्केट परफेक्ट लोगों को नहीं यूजफुल लोगों को रिवॉर्ड करता है। आज का जमाना डिग्री का नहीं स्किल का है और स्किल सर्टिफिकेट से नहीं एग्जीक्यूशन से प्रूव होती है। आपका लैपटॉप आज का सबसे बड़ा वेपन है। इंटरनेट आज का सबसे बड़ा मार्केट है और आपकी स्किल आज की सबसे स्ट्रांग करेंसी है। जितनी ज्यादा स्किल्स उतने ज्यादा ऑप्शंस और ऑप्शंस ही असली फ्रीडम है। [संगीत] सेल्फ एजुकेशन आपको सिर्फ पैसे नहीं देती यह आपको कॉन्फिडेंस देती है, क्लेरिटी देती है और कंट्रोल देती है। कंट्रोल इस बात का कि अगर एक रास्ता बंद हो जाए तो आपके
पास दूसरा रास्ता हो। यही वजह है कि स्मार्ट लोग जॉब के साथ साथ खुद को कंटीन्यूअसली अपग्रेड करते रहते हैं। वह जानते हैं कि जॉब परमानेंट नहीं है लेकिन स्किल हमेशा आपके साथ रहती है। अगर आप सच में जॉब करते करते अमीर बनना चाहते हो तो सबसे पहले अपने अंदर यह एसेट बनाओ। सेल्फ एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट। क्योंकि बाकी जितने भी एसेट्स आप आगे बिल्ड करोगे उनकी फाउंडेशन यही होगी कमजोर फाउंडेशन पर कोई मजबूत इमारत नहीं बनती और मजबूत फाउंडेशन हमेशा स्ट्रांग स्किल्स से बनती है एसेट तीन स्टॉक मार्केट और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग तीसरा एसेट
सुनते ही ज्यादातर लोग डर जाते हैं। नाम सुनते ही दिमाग में एक ही शब्द आता है। रिस्क और यही डर ज्यादातर लोगों को इस एसेट से दूर रखता है। लोग कहते हैं स्टॉक मार्केट जुआ है। पैसा डूब जाता है। यह सब अमीरों का खेल है। लेकिन सच्चाई यह है कि स्टॉक मार्केट जुआ नहीं है। जुआ तब बनता है जब आप बिना समझे बिना डिसिप्लिन और जल्दी अमीर बनने की सोच के साथ मार्केट में उतरते हो। असल में स्टॉक मार्केट उन लोगों के लिए सबसे बड़ा मौका है जो अपनी फाइनेंशियल डेस्टिनी खुद लिखना चाहते हैं। सोचो
जरा आम इंसान पूरी जिंदगी मेहनत करता है पैसा कमाने के लिए। लेकिन अमीर इंसान अपने पैसों को मेहनत पर लगा देता है। ताकि पैसा उसके लिए और पैसा बनाए। यही फर्क है और स्टॉक मार्केट आपको यही पावर देता है। यहां आप अपने पैसों को देश की बड़ी-बड़ी कंपनीज के साथ पार्टनर बना देते हो। जब कंपनी ग्रो करती है तो आपका पैसा ग्रो करता है। अब प्रॉब्लम कहां आती है? प्रॉब्लम आती है। जब लोग शॉर्टकट ढूंढते हैं आज बाय, कल सेल, आज प्रॉफिट, कल लॉस। और फिर कहते हैं मार्केट बेकार है लेकिन मार्केट कभी गलत नहीं
होती। [संगीत] गलत होती है लोगों की सोच। अगर आप जॉब करते हो तो आपके लिए सबसे सही शुरुआत है लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग ना कि ट्रेडिंग ना टिप्स ना रूमर्स लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग। [संगीत] डिसिप्लिन सिखाता है, पेशेंस सिखाता है और कंपाउंडिंग की पावर दिखाता है। शुरुआत बहुत छोटी हो सकती है। पांच ₹100 ₹1000 दो ₹1000 एसआईपी के थ्रू। यहां अमाउंट इंपॉर्टेंट नहीं है। इंपॉर्टेंट है। कंसिस्टेंसी हर महीने इन्वेस्ट करना। चाहे मार्केट ऊपर हो या नीचे। क्योंकि पैसा मार्केट को टाइम करने से नहीं मार्केट में टाइम बिताने से बनता है। यही वह लाइन है जो बिगिनर्स को
समझ नहीं आती और प्रोफेशनल्स इसी पर जीते हैं। जब मार्केट गिरता है तो आम लोग डरते हैं लेकिन लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर खुश होता है क्योंकि उसे पता है आज सस्ता मिल रहा है जो कल महंगा होगा। स्टॉक मार्केट धैर्य वालों को रिवॉर्ड करता है। जो लोग जल्दी अमीर बनना चाहते हैं, उन्हें बाहर निकाल देता है। और जो लोग शांत रहते हैं, नियमित इन्वेस्ट करते हैं। 10 15 साल का विज़न रखते हैं, उन्हें क्वाइटली वेल्थ दे देता है। कंपाउंडिंग धीरे चलती है लेकिन अनस्टपेबल होती है। [संगीत] पहले कुछ साल रिटर्न्स बोरिंग लगते हैं। आप सोचते हो
इतना समय, इतनी पेशेंस और फायदा इतना कम लेकिन फिर एक समय आता है जब ग्राफ ऊपर मुड़ता है और वही पैसा तेजी से बढ़ने लगता है। यही वो मोमेंट है जहां लोग कहते हैं ओवरनाइट सक्सेस। लेकिन सच्चाई यह है यह ओवरनाइट नहीं। सालों की कंसिस्टेंसी होती है। अब एक और जरूरी बात स्टॉक मार्केट इमोशन वालों के लिए नहीं है। डर, लालच, जल्दबाजी यह तीनों आपके सबसे बड़े दुश्मन हैं। अगर आप हर न्यूज़ से डर जाओ, हर फॉल में बेच दो, हर राइज में खरीदो, तो मार्केट आपको सिखाएगा और सीख महंगी होगी। इसलिए स्टॉक मार्केट को
स्किल की तरह सीखो। इन्वेस्टमेंट क्या है? रिस्क क्या है? डायवर्सिफिकेशन क्या है? लॉन्ग टर्म सोच क्या होती है? धीरे धीरे [संगीत] कोई जल्दी नहीं है। याद रखना आप मार्केट में कंपटीशन करने नहीं आए हो। आप मार्केट में पार्टिसिपेट करने आए हो। मार्केट रोज चलेगा। ओपोरर्चुनिटीज आती जाती रहेंगी। लेकिन डिसिप्लिन आपको अलग बनाएगा। स्टॉक मार्केट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एसेट पूरी तरह स्केलेबल है। आप जितना अर्न करते हो उसका छोटा हिस्सा इन्वेस्ट करते जाओ। सैलरी बढ़े, इन्वेस्टमेंट भी बढ़े, बोनस मिले, इन्वेस्टमेंट बढ़े और धीरे। धीरे एक ऐसा पोर्टफोलियो बने जो आपके लिए
हर साल वैल्यू क्रिएट करे। एक दिन ऐसा आएगा जब आपकी एनुअल रिटर्न्स आपकी एनुअल सैलरी से ज्यादा होंगी और वही दिन आपको असली कॉन्फिडेंस देगा। स्टॉक मार्केट आपको अमीर बनने का शॉर्टकट नहीं देता। यह आपको फाइनेंशियली मैच्योर बनाता है। आपको डिसिप्लिन सिखाता है, पेशेंस सिखाता है। और सबसे बड़ी बात आपको लॉन्ग टर्म सोच देता है। अगर आप जॉब करते करते वेल्थ बनाना चाहते हो तो इस एसेट को इग्नोर मत करना। स्मॉल शुरुआत करो। रेगुलर रहो। लॉन्ग टर्म सोचो और मार्केट को अपना काम करने दो। क्योंकि स्टॉक मार्केट उन लोगों को नहीं बनाता जो स्मार्टेस्ट होते
हैं। स्टॉक मार्केट उन लोगों को बनाता है जो कंसिस्टेंट होते हैं। एसेट चार रियल एस्टेट और रेंटल कैश फ्लो। जब भी रियल एस्टेट का नाम आता है। ज्यादातर लोगों के दिमाग में एक ही सोच आती है। यह तो अमीरों का खेल है। इसमें तो करोड़ों लगते होंगे। हम जैसे जॉब वालों के लिए नहीं है। और इसी सोच की वजह से ज्यादातर लोग इस एसेट को जिंदगी भर दूर से ही देखते रहते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि रियल एस्टेट आज भी [संगीत] दुनिया का सबसे भरोसेमंद एसेट है। फर्क सिर्फ इतना है कि [संगीत] पहले एंट्री
एक्सपेंसिव थी। अब एंट्री स्मार्ट हो गई है। पहले लोगों को लगता था पूरी प्रॉपर्टी खरीदनी पड़ेगी। पूरा फ्लैट, पूरा प्लॉट, पूरा ऑफिस। लेकिन आज ऐसा नहीं है। आज रियल एस्टेट में छोटे लेवल पर भी एंट्री पॉसिबल है और यही जगह है जहां जॉब करने वाला इंसान स्मार्टली गेम में उतर सकता है। रियल एस्टेट का असली पावर प्राइस बढ़ने में नहीं है। उसका असली पावर है। कैश फ्लो में हर महीने आने वाला पैसा। जब आप सो रहे हो, जॉब पर हो, फैमिली के साथ बैठे हो, तब भी रेंट आता रहे। यही रियल एस्टेट को बाकी एसेट्स
से अलग बनाता है। अब एक कॉमन गलती समझो। ज्यादातर लोग रियल एस्टेट को जल्दी अमीर बनने का तरीका समझते हैं। लेकिन रियल एस्टेट स्लो एसेट है। [संगीत] यह पेशेंस सिखाता है। यह स्टेबिलिटी देता है। यह आपको फाइनेंशियल डिसिप्लिन सिखाता है। और जो एसेट डिसिप्लिन सिखा दे वो आपको टूटने नहीं देता। आज के टाइम में रियल एस्टेट सिर्फ [संगीत] फ्लैट या प्लॉट नहीं है। आज कांसेप्ट्स आए हैं फ्रैक्शनल ओनरशिप के। मतलब आपको पूरी प्रॉपर्टी नहीं उसका हिस्सा खरीदना है। कमर्शियल प्रॉपर्टी, ऑफिस, [संगीत] स्पेस, वेयर हाउस, शॉप, आप फ्रेंड्स के साथ या प्लेटफार्म के थ्रू छोटा हिस्सा
ले सकते हो। और उस प्रॉपर्टी से जो रेंट आएगा वह आपके हिस्से में हर महीने आएगा। बिना करोड़ों लगाए। आपने एक इनकम प्रोड्यूसिंग एसेट बना लिया। यही स्मार्ट एंट्री है। अब एक और सच्चाई सुनो। [संगीत] बैंक अकाउंट में पड़ा पैसा धीरे। धीरे अपनी वैल्यू खोता है। इनफ्लेशन हर साल आपके पैसों को चुपचाप खा जाती है। लेकिन रियलस्टेट में [संगीत] पैसा सिर्फ सुरक्षित नहीं रहता। वह काम भी करता है। रेंट के रूप में कैश फ्लो देता है। और लॉन्ग टर्म में वैल्यू एप्रिसिएशन भी। अब यहां एक जरूरी बात रियल एस्टेट इमोशंस से नहीं कैलकुलेशंस से खेला
जाता है। लोकेशन, लीगल क्लेरिटी, रेंटल डिमांड, [संगीत] फ्यूचर, ग्रोथ यह सब समझना जरूरी है। बस किसी के कहने पर प्रॉपर्टी ले लेना सबसे बड़ी गलती होती है। जॉब करने वाले इंसान के लिए बेस्ट स्ट्रेटजी होती है। [संगीत] लो रिस्क, स्टेबल इनकम, लॉन्ग टर्म व्यू एक छोटी शुरुआत भी बहुत बड़ा फर्क ला सकती है। मान लो आपकी रेंटल इनकम आज सिर्फ 5,000 या 10,000 है। लेकिन [संगीत] यही इनकम हर साल बढ़ती रहे और एक दिन ऐसा आए जब आपकी रेंट इनकम आपकी ईएमआई कवर करने लगे और फिर ईएमआई खत्म। उस दिन आपको समझ आएगा रियल एस्टेट
का असली मतलब उस दिन प्रॉपर्टी लायबिलिटी नहीं प्योर एसेट बन जाती है। रियलस्टेट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपको मेंटल पीस देता है। स्टॉक मार्केट में अप्स एंड डाउनर्स होते हैं। लेकिन रेंट लगभग स्टेबल रहता है और स्टेबल इनकम जॉब करने वाले इंसान के लिए बहुत बड़ी ताकत होती है। यह एसेट आपको ओवरनाइट रिच नहीं बनाता लेकिन यह आपको फाइनेंशियली स्ट्रांग बनाता है और स्ट्रांग इंसान रिस्क लेने के लिए भी तैयार रहता है। रियल एस्टेट आपके पोर्टफोलियो को बैलेंस करता है। जहां कुछ एसेट्स फास्ट होते हैं। रियल एस्टेट स्लो लेकिन सॉलिड होता
है और यही बैलेंस लॉन्ग टर्म वेल्थ बनाता है। अगर आप जॉब करते-करते एक ऐसी इनकम चाहते हो जो आपको सिक्योरिटी दे, कॉन्फिडेंस दे और फ्यूचर का डर कम करें तो रियल एस्टेट को इग्नोर मत करना स्मार्ट तरीके से, छोटी शुरुआत से, लॉन्ग टर्म सोच के साथ। क्योंकि जो लोग सिर्फ सैलरी पर जीते हैं वह रिटायरमेंट से डरते हैं और जिनके पास रियल एस्टेट जैसे एसेट्स होते हैं वो रिटायरमेंट की प्लानिंग नहीं करते वो ऑप्शंस चूज़ करते हैं और ऑप्शंस ही असली अमीरी होती है। एसेट पांच गाड़ी को लायबिलिटी से एसेट बनाना ज्यादातर लोग अपनी गाड़ी
को एक जरूरत समझते हैं। ऑफिस जाने के लिए, फैमिली के साथ घूमने के लिए या बस कन्वीनियंस के लिए और यहीं पर एक बहुत बड़ी गलती हो जाती है क्योंकि गाड़ी खरीदते वक्त खुशी देती है लेकिन टाइम के साथ पैसा खाती रहती है। इंश्योरेंस, पेट्रोल, मेंटेनेंस, सर्विस और धीरे [संगीत] धीरे वैल्यू गिरती जाती है। ज्यादातर घरों में गाड़ी दिन का ज्यादातर टाइम खड़ी रहती है और खड़ी खड़ी उसकी कीमत घटती रहती है। [संगीत] यानी एक परफेक्ट लायबिलिटी लेकिन सोचो जरा अगर वही गाड़ी हर महीने [संगीत] आपके लिए पैसा कमाने लगे तो क्या होगा? यहीं से
लायबिलिटी एसेट में बदलती है। अमीर और गरीब माइंडसेट का सबसे बड़ा फर्क यही होता है। गरीब माइंडसेट पूछता है, मैं इसे कैसे इस्तेमाल करूं? अमीर माइंडसेट पूछता है, मैं इससे कैसे कमा सकता हूं? आज के डिजिटल टाइम में गाड़ी सिर्फ ट्रैवल का साधन नहीं है। यह एक इनकम प्रोड्यूसिंग टूल बन सकती है। अगर आपके पास कार है और वह हफ्ते में दो-तीन दिन भी खाली रहती है तो आप उसे रेंटल मॉडल में डाल सकते हो। सेल्फ, ड्राइव रेंटल, कॉर्पोरेट यूजेज, आउटस्टेशन ट्रिप्स, बिना जॉब छोड़े, बिना नया बिजनेस खोले गाड़ी आपके लिए काम कर सकती है।
और अगर बाइक है तो भी स्टोरी खत्म नहीं होती। डिलीवरी मॉडल्स, राइड शेयरिंग, लोकल यूजेज। कई लोग सिर्फ अपनी बाइक से हर महीने एक साइड इनकम बना रहे हैं। अब एक कंपैरिजन समझो। मान लो आपके पास ₹1 लाख हैं। अगर वह पैसे सेविंग अकाउंट में पड़े रह [संगीत] तो साल भर में थोड़ा सा इंटरेस्ट मिलेगा। लेकिन अगर उसी पैसे से [संगीत] एक सेकंड हैंड बाइक ली जाए और उसे स्मार्ट तरीके से इनकम मॉडल में लगाया जाए [संगीत] तो वही पैसा हर महीने रिटर्न दे सकता है। फर्क सिर्फ सोच का है। एसेट वही नहीं होता जो
महंगा दिखे। एसेट वह होता है जो पैसा पैदा करे। [संगीत] बहुत लोग कहते हैं गाड़ी खराब हो जाएगी। रिस्क है टेंशन है। लेकिन सच यह है हर एसेट में रिस्क होता है। सवाल यह है क्या वो रिस्क इनकम जनरेट कर रहा है या नहीं? जॉब करने वाला इंसान जब अपनी गाड़ी को एसेट बनाता है तो उसकी फाइनेंशियल पिक्चर धीरे धीरे बदलने लगती है। फ्यूल का खर्च इनकम से कवर होने लगता है। मेंटेनेंस [संगीत] इनकम से निकल जाती है और एक समय ऐसा आता है जब गाड़ी खुद का खर्च खुद उठाने लगती है। यहीं से आप
साइकोलॉजिकल जीत हासिल करते हो। आपको लगता है मेरी चीजें मेरे लिए काम कर रही हैं। यही माइंडसेट आपको अगले एसेट के लिए तैयार करता है। ध्यान रखना हर गाड़ी बिजनेस के लिए नहीं होती। इमोशन में खरीदना सबसे बड़ी गलती है। कैलकुलेशन से इस्तेमाल करना। सबसे बड़ी समझदारी है पपज तय करो। अगर गाड़ी सिर्फ खड़ी है तो वह लायबिलिटी है। अगर गाड़ी इनकम दे रही है तो वही एसेट है। स्मॉल अमाउंट से शुरू हुआ। यह मॉडल आपको एक बड़ी सीख देता है कि हर चीज खर्च नहीं होती। सही नजरिए से देखो तो हर चीज कमाई का
जरिया बन सकती है। और यही सोच एक जॉब होल्डर को वेल्थ बिल्डर बनाती है। अगर आप जॉब करतेकरते अपने आसपास की चीजों को इनकम सोर्स बनाना सीख गए तो समझ लो आप फाइनेंशियल गेम [संगीत] सही दिशा में खेल रहे हो। क्योंकि असली अमीर वह नहीं होता जिसके पास सबसे महंगी चीजें हो। असली अमीर वह होता है जिसकी चीजें उसके लिए पैसा कमाती हो। एसेट छह फेसलेस YouTube चैनल और डिजिटल विजिबिलिटी आज के जमाने में सबसे ताकतवर एसेट। कोई जमीन नहीं, कोई फैक्ट्री नहीं, कोई ऑफिस नहीं है। सबसे ताकतवर एसेट है डिजिटल विजिबिलिटी। और इसी डिजिटल
विजिबिलिटी का सबसे बड़ा हथियार है YouTube। लेकिन ज्यादातर लोग यहीं पर रुक जाते हैं। वो सोचते हैं मुझे कैमरा के सामने आना पड़ेगा। मुझे बोलना नहीं आता। मेरा फेस अच्छा नहीं। लोग जज करेंगे। और इसी डर की वजह से वह इस एसेट को शुरू ही नहीं करते। लेकिन सच्चाई यह है कि आज का YouTube चेहरे का नहीं कंटेंट का गेम है। यही वजह है कि फेसलेस YouTube चैनल्स तेजी से ग्रो कर रहे हैं। यहां इंसान नहीं बिकता। यहां वैल्यू बिकती है। आपका चेहरा नहीं, आपकी सोच बिकती है। आपका एक्सेंट नहीं, आपका मैसेज बिकता है। फेसलेस
चैनल का मतलब है ऐसा चैनल जहां आपका चेहरा नहीं दिखता लेकिन आपकी आवाज या आपका आईडिया दुनिया तक पहुंचता है। [संगीत] मोटिवेशन, फाइनेंस, बिजनेस स्टोरीज, साइकोलॉजी, फैक्ट्स, हिस्ट्री, एआई स्टोरीज इन सब नेचर्स में लाखों व्यूज बिना फेस दिखाए आ रहे हैं। और मजे की बात यह है ज्यादातर लोग जो यह कर रहे हैं, वो जॉब भी करते हैं। सुबह ऑफिस, शाम को स्क्रिप्ट, रात को अपलोड, धीरे, धीरे [संगीत] एक ऐसा सिस्टम बनता है। जो रोज उनके लिए व्यूज लाता है और पैसा भी YouTube पर कमाई व्यूज से होती है। 4000 व्यूज पर एक तय अमाउंट
मिलता है। लेकिन असली गेम व्यूज से आगे का है। YouTube [संगीत] एक वीडियो नहीं एक डिजिटल मशीन है। आप आज एक वीडियो डालते हो और वही वीडियो 6 महीने बाद भी व्यूज लाता है। एक साल बाद भी, 2 साल बाद भी यही चीज YouTube को एसेट बनाती है। जॉब में [संगीत] आप आज काम करते हो। आज पैसा मिलता है। YouTube में आप आज काम करते हो और पैसा [संगीत] कल भी आता है। परसों भी और तब भी जब आप कुछ नहीं कर रहे। फेसलेस चैनल में शुरुआत स्लो होती है। [संगीत] पहले महीने 10 व्यूज, 50
व्यूज, 100 व्यूज और यहीं पर ज्यादातर लोग छोड़ देते हैं। [संगीत] लेकिन जो लोग समझदार होते हैं, वह व्यूज नहीं देखते, वह सिस्टम देखते हैं। वो जानते हैं अगर मैं हर हफ्ते दो या तीन वीडियोस डालता रहा, तो एल्गोरिदम मुझे इग्नोर नहीं कर सकता। YouTube टैलेंट को नहीं। कंसिस्टेंसी को रिवॉर्ड करता है। आप स्क्रिप्ट लिखते हो, वॉइस ओवर करते हो या एआई वॉइस यूज करते हो। सिंपल एडिटिंग करते हो और बस अपलोड परफेक्ट होने की जरूरत नहीं। यूज़फुल होना जरूरी है। YouTube पर कोई भी बड़ा चैनल पहले दिन बड़ा नहीं था। सब जीरो से शुरू
हुए थे। डिफरेंस सिर्फ इतना था। उन्होंने बीच में [संगीत] रुकना नहीं सीखा। फेसलेस YouTube जॉब वाले इंसान के लिए परफेक्ट एसेट है [संगीत] क्योंकि इसमें फिजिकल मेहनत नहीं है। लोकेशन प्रॉब्लम नहीं है। बॉस नहीं है और सबसे बड़ी बात यह स्केलेबल है। एक चैनल थोड़ा कमाएगा। दो चैनल ज्यादा कमाएंगे। पांच चैनल एक सिस्टम बन जाएंगे। और एक दिन ऐसा आएगा जब आपकी YouTube इनकम आपकी सैलरी के बराबर या उससे ज्यादा होगी और तब जॉब का मतलब बदल जाएगा। जॉब मजबूरी नहीं रहेगी। [संगीत] जॉब ऑप्शन बन जाएगी। फेसलेस YouTube सिर्फ पैसा नहीं देता। यह कॉन्फिडेंस देता
है। यह प्रूफ देता है कि आप इंटरनेट से वैल्यू क्रिएट कर सकते हो। और एक बार आपको यह विश्वास हो गया तो आप कभी स्मॉल नहीं सोचोगे। डिजिटल विजिबिलिटी का एक और बड़ा फायदा है। आप एनोनिमस रह सकते हो। कोई जानता नहीं आप कौन हो। लेकिन आपका कंटेंट लाखों लोग जानते हैं। और यही फ्रीडम इस एसेट को खतरनाक बनाती है। आज का जमाना अटेंशन का है। जिसके पास अटेंशन है, [संगीत] उसके पास पावर है। और YouTube अटेंशन की सबसे बड़ी फैक्ट्री है। अगर आप जॉब करते करते एक ऐसा एसेट चाहते हो जो धीरे-धीरे बिना शोर
किए आपकी लाइफ बदल दे। तो फेसलेस YouTube एक गोल्डन अपॉर्चुनिटी है। स्लो है लेकिन सॉलिड है। लेट रिजल्ट देता है लेकिन लॉन्ग रिजल्ट देता है। और याद रखना जो लोग कैमरा के डर से आज शुरू नहीं कर रहे [संगीत] वो कल आपके वीडियोस देखकर सीख रहे होंगे और जो आज क्वाइटली फेसलेस चैनल बना रहे हैं। वो कल ऑप्शन चूज़ कर रहे होंगे। [संगीत] क्योंकि डिजिटल वर्ल्ड में जो दिखता नहीं। वह भी बहुत कुछ कमा सकता है। बस शर्त एक है। कंसिस्टेंसी एसेट साथ ऑनलाइन रिसेलिंग जॉब करने वाला इंसान [संगीत] बिजनेस से इसलिए डरता है क्योंकि
उसे लगता है पैसा लगेगा, रिस्क होगा और जॉब के साथ मैनेज नहीं होगा। लेकिन आज बिजनेस के लिए दुकान नहीं, दिमाग चाहिए। ऑनलाइन रिसेलिंग का मतलब है जो चीज मार्केट में पहले से बिक रही है उसे स्मार्ट तरीके से बेचना। [संगीत] कम इन्वेस्टमेंट, कम रिस्क, रियल बिजनेस एक्सपीरियंस, मोबाइल एक्सेसरीज, गैजेट्स, गिफ्ट आइटम्स, रोज बिकने वाले प्रोडक्ट्स हैं। यहां सबसे जरूरी चीज प्रोडक्ट नहीं ट्रस्ट है। Instagram, WhatsApp, Telegram, Facebook आपकी डिजिटल दुकानें हैं। मार्जिन छोटा हो सकता है लेकिन गेम वॉल्यूम का है। ऑनलाइन रिसेलिंग आपको पैसा ही नहीं बिजनेस माइंडसेट सिखाती है। पार्ट टाइम में शुरू
करो। गलतियां होंगी, लॉस होगा लेकिन वही आपकी एजुकेशन है। रिसेलिंग ओवरनाइट रिच नहीं बनाती लेकिन आपको बिजनेस रेडी बना देती है। और बिजनेस रेडी इंसान पैसा कमाने के रास्ते खुद बना लेता है। एसेट आर्ट पर्सनल ब्रांड और ट्रस्ट इकॉनमी। आज पैसा सिर्फ प्रोडक्ट से नहीं ट्रस्ट से बनता है और ट्रस्ट का सबसे बड़ा रूप है। पर्सनल ब्रांड पर्सनल ब्रांड फेम या सेलिब्रिटी होना नहीं है। मतलब यह है जब लोग आपका नाम सुने तो उन्हें भरोसा हो। भरोसा की आप वैल्यू देते हो। झूठ नहीं बोलते काम के हो। आज इंटरनेट पर सब कुछ वही बोल रहे
हैं। लेकिन लोग उसी की सुनते हैं जिस पर ट्रस्ट हो। अगर आपके कंटेंट से क्लेरिटी मिलती है, डायरेक्शन मिलती है तो आप ब्रांड बन रहे हो। चाहे जॉब हो, बिजनेस हो या फेसलेस कंटेंट। पर्सनल ब्रांड बनाने के लिए। बड़ा नहीं कंसिस्टेंट होना पड़ता है। एक प्लेटफार्म चुनो। ईमानदारी से वैल्यू दो। जॉब जा सकती है, [संगीत] बिजनेस बंद हो सकता है, प्लेटफार्म बदल सकता है, लेकिन ट्रस्ट नहीं जाता। ट्रस्ट के साथ क्लाइंट्स आते हैं, ऑफर्स आते हैं, ओपोरर्चुनिटीज आती हैं। पर्सनल ब्रांड आपको बारगेनिंग पावर देता है। आप चीप नहीं बिकते। आप रिप्लेस नहीं होते। सैलरी की
लिमिट होती है ट्रस्ट की नहीं। आज वैल्यू दो, कल वैल्यू दो। एक [संगीत] दिन लोग खुद कहेंगे यह इंसान सुनने लायक है। एसेट नाउ सिस्टम्स [संगीत] डिसिप्लिन और लॉन्ग टर्म एग्जीक्यूशन ज्यादातर लोग एसेट्स जानते हैं लेकिन अमीर नहीं बनते क्योंकि उन्हें सबसे जरूरी एसेट नहीं पता। सिस्टम सिस्टम मोटिवेशन नहीं होता। सिस्टम वो स्ट्रक्चर है [संगीत] जो आपको काम करने पर मजबूर करे। चाहे मन हो या ना हो। मोटिवेशन टेंपरेरी है। डिसिप्लिन परमानेंट है और डिसिप्लिन सिस्टम से आता है। बेस्ट आईडिया बिना रूटीन के मर जाता है। एवरेज आईडिया स्ट्रांग सिस्टम के साथ जिंदगी बदल देता
है। सक्सेसफुल लोग ज्यादा टैलेंटेड नहीं। ज्यादा डिसिप्लिंड होते हैं। उनके पास इंस्पिरेशन नहीं कैलेंडर होता है। सिस्टम डिसीजन फटीग खत्म करता है। सोचना कम एग्जीक्यूशन तेज जॉब वालों के लिए सिस्टम सबसे पावरफुल है। [संगीत] रोज थोड़ा काम समय के साथ माउंटेन बन जाता है। सिस्टम परफेक्ट प्लान नहीं रिपीटेबल एक्शन है। हर दिन थोड़ा सीखो, थोड़ा बनाओ, थोड़ा पब्लिश करो। पहले महीनों में रिजल्ट नहीं दिखता। यही लोग क्विट करते हैं। लेकिन जो कंटिन्यू करता है, वही गेम बदलता है। सिस्टम इमोशन से नहीं प्रोसेस से चलता है। डेली एफर्ट कंपाउंड होकर लाइफ चेंज करता है। कोई भी
एसेट सिस्टम के बिना नहीं चलता। [संगीत] सिस्टम सबको जोड़ता है। डिसिप्लिन उसे चलाता है। कंसिस्टेंसी परफेक्ट से ज्यादा पावरफुल है। अमीर लोग एक दिन में अमीर नहीं बनते। [संगीत] वो रोज एक जैसे सही काम करते हैं। जॉब आपको सर्वाइव कराएगी। एसेट्स आपको फ्री बनाएंगे। लेकिन सिस्टम [संगीत] और डिसिप्लिन आपको अनस्टपेबल बनाएंगे। आज डिसाइड करो व्यूअर रहना है या बिल्डर बनना