[संगीत] दोस्तों 5 साल हो गए हमें आपके लिए हॉरर स्टोरीज बनाते हुए स्करी पंपकिन ने आपको बेहतरीन एनिमेटेड स्टोरीज देने में कोई कसर नहीं छोड़ी और आपने भी हमें जो प्यार और समर्थन दिया है उसके लिए हम तहे दिल से आपका शुक्र गुजार है लेकिन दोस्तों जो लोग इस चैनल पर नए हैं और जिन्होंने अभी तक स्करी पंपकिन को सब्सक्राइब नहीं किया है व शायद बहुत कुछ मिस करने वाले हैं क्योंकि स्करी पंपकिन अब और भी डरावना बनने जा रहा है और हम आपके लिए ढेर सारे सरप्राइज लेकर आने वाले हैं तो जल्दी से चैनल
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के अंदर जाने के लिए उसके पैर जैसे मना कर रहे थे उस मेंटल हॉस्पिटल में ऐसे कई सारे अजीब पेशेंट्स थे और मानसिक बीमारी वाले पेशेंट्स का ऐसे बर्ताव करना काफी आम बात है और वह एक सिस्टर थी तो उसके लिए तो यह रोज का ही काम था लेकिन उस सिस्टर का उस मेंटल हॉस्पिटल में आज पहला दिन था रात का सन्नाटा और अचानक से आती हवा के कारण होने वाली दस्तक उस खौफनाक मंजर में और भी डर पैदा कर रही थी अंदर जाऊं या नहीं इस गहरी सोच में वह पड़ गई थी में थोड़ी
सी हिम्मत कर उस सिस्टर ने अपना एक पैर अंदर बढ़ाया ही था कि तभी अचानक से वह लड़की जोर से हंसने लग गई और अजीबो गरीब हरकतें करने लग गई उसका मुंह दीवार की तरफ था उसने अचानक से अपनी गर्दन उल्टी घुमाई सिस्टर के पसीने छूट गए उसके पैर मानो वही जम गए अपने कांपते हुए हाथों से कमरे का दरवाजा बंद कर सिस्टर दूसरे से सर को आवाज लगाते हुए रिसेप्शन की तरफ दौड़ी सुनीता सिस्टर सुनीता सिस्टर दौड़ते हुए सिस्टर रिसेप्शन पर पहुंच जाती है रिसेप्शन पर एक सिस्टर किसी से फोन पर बात कर रही
थी आंटी जी आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए वह बिल्कुल ठीक है हम उसका अच्छी तरह से ख्याल रख रहे हैं इतना कहकर सुनीता सिस्टर फोन रख देती है और उस दूसरी सिस्टर को देखकर कहती है क्या हुआ रचना सिस्टर तुम इतनी डरी हुई क्यों हो तब रचना सिस्टर जो कुछ हुआ था वह सब सुनीता सिस्टर को बताती है लेकिन आप किससे बात कर रही थी अरे वही रूम नंबर 11 में जो लड़की है ना उसी की मां का फोन था बेचारी रोज रात को फोन करके उसके बारे में पूछती है कुछ ही महीनों पहले उसे
यहां भर्ती करके चले गए तब रचना सिस्टर जिज्ञासा भरी नजरों से सुनीता सिस्टर को देख पूछती है आखिर हुआ क्या है उसके साथ उसकी हालत कैसी हो गई दिखने में तो काफी खूबसूरत है वह हां ऐसी हालत बस दोनों ही हालात में हो सकती है जब कोई किसी से पागलों की तरह प्यार करे और वह उसे ना मिले या फिर तब जब उस परे किसी रूह का साया हो यह सुन रचना सिस्टर हैरान हो जाती है और कहती है तो इसके साथ क्या हुआ अफसोस दोनों मतलब तब सुनीता सिस्टर उसे नैना के बारे में बताने
लग जाती है नैना 27 साल की हो चुकी थी वह इंजीनियरिंग के आखिरी साल में पढ़ रही थी पूरे कॉलेज में नैना से खूबसूरत लड़की और कोई भी नहीं थी कॉलेज के सारे लड़के नैना के पीछे पागल थे लेकिन नैना ने अपने सपनों के राजकुमार की एक अलग ही कहानी बनाई थी वह मन ही मन रोज उसके जिंदगी में आने वाले राजकुमार के सपने सजाती थी नैना और उसके सपनों की दुनिया असल जिंदगी से काफी अलग थी नैना अक्सर खुद से ही बातें करती और कभी-कभी जोर से हंसती उसको देख उसके मां और पापा बहुत
परेशान थे उनकी बेटी की शादी की उम्र हो गई है और अब उसके लिए कोई अच्छा सा लड़का ढूंढना चाहिए ऐसा उन्हें महसूस होने लगा और उन्होंने कई सारे रिश्ते भी नैना के लिए लाए लेकिन नैना हर रिश्ते के लिए मना कर देती यह कहकर कि वो लड़का उसके सपनों के राजकु जैसा नहीं है जैसा उसने सोचा है काफी सारे रिश्तों को बार-बार मना करने के कारण नैना के लिए रिश्ते आने अब बिल्कुल ना के बराबर हो गए थे इस बात से नैना के मां और पापा बहुत परेशान थे लेकिन नैना इस बात से बिल्कुल
अनजान अपने ही सपनों की दुनिया में मगन थी रात का समय था रात के लगभग 12:30 बजे थे लेकिन नैना अभी भी जाग रही थी उसके कम की बत्ती अभी भी जल रही थी नैना अपने कमरे की खिड़की के पास बैठे खिड़की से बाहर देखे अकेले ही मुस्कुराते हुए अपनी डायरी में कुछ लिख रही थी उसे अक्सर डायरी लिखने की आदत थी उस डायरी में उसने अपने होने वाले लाइफ पार्टनर के बारे में सब कुछ लिखा था वह डायरी नैना के दिल के बहुत करीब थी इतनी कि नैना की जान उसमें बस गई थी वह
मुस्कुराते हुए उस डायरी में कुछ लिख रही थी नैन की यह हरकतें उसके मां और पापा के लिए कुछ नई नहीं थी इसलिए वह इस बात की तरफ ज्यादा गौर नहीं करते थे अगले दिन नैना कॉलेज जाती है आज नैना का 27 वां जन्मदिन था वह आज अपनी डायरी भी साथ ले आई थी नैना के दोस्तों ने नैना का जन्मदिन काफी बढ़िया से मनाया उसके ग्रुप में नैना की सबसे अच्छी दोस्त निशा और अभी कुछ महीने पहले ही दोस्ती हुए नए दोस्त ईशान और जतिन थे दोनों मनी मन नैना को पसंद करते थे लेकिन यह
बात दोनों ने अभी तक नैना से नहीं कही थी और ना ही एक दूसरे से उस दिन नैना कॉलेज की लाइब्रेरी में अपनी डायरी में कुछ लिख रही थी और तभी अचानक उसे अपनी मां का फोन आया वह जल्दी-जल्दी अपनी डायरी वहीं भूल गई जतिन ने वह डायरी उठा ली और किसी का ध्यान नहीं है यह देखते हुए वह डायरी फटाक से अपने बैग में डाल ली घर आक जतिन ने नैना की डायरी पढ़ना शुरू किया जतिन एकएक पन्ना पड़ता जा रहा था वैसे-वैसे उसके माथे पर एक शिकन स आ रही थी और उसकी आंखों
में एक अलग ही भाव दिख रहा था रात के लगभग 1 बज गए थे जतिन ने वो डायरी पूरी पढ़ ली और चेहरे पर एक टेढ़ी मुस्कान लिए वह डायरी को टेबल के साइड पर रखकर सो गया उधर नैना के कमरे की बत्ती अभी भी जल रही थी लेकिन अजीब बात यह थी कि आज नैना बहुत परेशान थी उसका कमरा पूरा बिखरा पड़ा था और वह पागलों की तरह अपनी डायरी ढूंढ रही थी कमरे से आती आवाजों के कारण उसकी मां की नींद खुल गई और वह नैना के कमरे के पास आ गई और उसके
कमरे के दरवाजे पे ठक ठक की और पूछा नैना नैना तू ठीक तो है ना पर नैना का कोई जवाब नहीं आया उसकी मां ने उसे फिर से आवाज लगाई नैना बेटा तू ठीक तो है ना हां हां मां मैं ठीक हूं बेटा बहुत रात हो गई है सो जा इतना कहकर उसकी मां सोने के लिए चली गई इधर नैना को रोना आ रहा था उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसने अपनी सबसे कीमती चीज खो दी है जिसमें उसने अपने सारे सपने संजोए थे अपनी आंखें पूछते हुए नैना ने कमरे की बत्ती बुझा दी
और वह सो गई काफी मशक्कत के बाद उसकी आंख लग गई अगली सुबह नैना कॉलेज आई थी लेकिन वह बहुत उदास लग रही थी उसे उदास देख निशा ने उससे पूछा क्या हुआ नैना तुम इतनी उदास क्यों लग रही हो निशा मेरी वह डायरी तुम्हें याद है जिसमें मैं अपनी सारी बातें लिखती थी वह कहीं खो गई मुझे नहीं मिल रही ईशान वही खड़ा था उतने में जतिन वहां आ जाता है जतिन को देख नैना की आंखें फटी की फटी रह जाती है जतिन ने वैसे ही कपड़े पहने थे जैसे नैना ने डायरी में लिखा
था जतिन को देख नैना उसकी तरफ आकर्षित होने लगी थी एक तरफ उसे डायरी खोने का गम था लेकिन दूसरी तरफ उसे अपने सपनों का लाइफ पार्टनर मिलने की खुशी भी हो रही थी जतिन ने आके नैना को शादी के लिए प्रपोज किया और जतिन की तरफ आकर्षित हुई नैना ने उसे हां कर दी नैना और जतिन दोनों बहुत खुश हो गए लेकिन इशान के चेहरे पर बिल्कुल भी खुशी नहीं थी उसका तो मानो दिल ही टूट गया था लेकिन वह वहीं चुपचाप खड़ा सब देखता रहा दिन बदन जतिन के प्यार का जुनून बढ़ता चला
गया वह नैना के प्यार के लिए पागल होने वाली हरकतें करने लगा वह किसी को नैना के पास आने नहीं देता था यहां तक कि उसने निशा को भी नैना से दूर कर दिया एक दिन तो हद हो गई जतिन ने ईशान के साथ मारपीट कर दी तिन नैना के प्यार के लिए अजीबो गरीब हरकतें करने लगा कभी अपने पूरे शरीर पर नैना का नाम खून से लिखता तो कभी अपने खून से लिखे लव लेटर्स नैना को भेजता नैना को भी अब जतिन के ऐसे बर्ताव से डर लगने लगा था एक दिन नैना जब जतिन
के घर गई तो नैना को वहां उसकी डायरी मिल गई अपनी डायरी को जतिन के कमरे में देख नैना हक्की बक्की रह गई थी साथ ही में टेबल के ड्रॉर में कुछ लव लेटर्स और लड़कियों की कुछ तस्वीरें भी मिली नैना वो देख ही रही थी कि तभी वहां पर 4045 साल का एक आदमी आ गया उसे ऐसा अचानक देख नैना थोड़ी डर गई तब वह आदमी बोला अरे बेटा डरो नहीं मेरा नाम किशोर है मैं जतिन का चाचा हूं मैं अपने काम के सिलसिले में बेंगलोर में रहता हूं हर हफ्ते यहां आ जाता हूं
जतिन का हालचाल पूछने उस बेचारे का इस दुनिया में मेरे अलावा कोई नहीं उसके मां-बाप की एक रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई तब से उसके दिमाग पर एक गहरा असर पड़ा है कितने ही दिनों से वह मानसिक बीमारी से लड़ रहा है यह सुन नैना शौक हो जाती है और कहती है क्या कहा मानसिक बीमारी तब जतिन के चाचा कहते हैं हां मानसिक बीमारी उसे ऐसा लगता है कि दुनिया की हर एक एंटीक खूबसूरत चीज उसके पास हो इसलिए वोह सारी एंटीक खूबसूरत चीज इकट्ठा करता है और अपने घर में सजा के रखता है
यह देखो पूरा घर ऐसी ही चीजों से भरा पड़ा है नैना इधर उधर अपनी नजर घुमा है तो उसे घर में बहुत सारी ऐसी एंटीक और खूबसूरत चीजें दिखाई देती है नैना उन चीजों को देख ही रही थी कि तभी वह चाचा जी आगे कहते हैं वह भावनाएं नहीं समझता बस बाहरी खूबसूरती की ओर आकर्षित हो जाता है और वो चीज अगर खराब हो जाए य सरत हो जाए तो उसका नामो निशान मिटा देता है जतिन के चाचा की बातें सुनकर नैना अंदर से पूरी तरह हिल चुकी थी नैना डोवर में पड़े फोटो चाचा जी
को दिखाते हुए पूछती है और यह तस्वीरें किसकी है तब वह चाचा कहते हैं बेटा यह जतिन की पहली गर्लफ्रेंड की तस्वीरें हैं इन सब से मैं बस एक ही बार मिला हूं हर बार मुझे उसके साथ कोई नई लड़की दिखाई देती थी पता नहीं उनका क्या हुआ वह कहां गई मैंने कभी उससे ज्यादा पूछा ही नहीं क्योंकि डॉक्टर ने जतिन से ऐसी कोई भी बात करने से मना किया था जिससे उसे गुस्सा आ जाए नहीं तो वह गुस्से में आकर कुछ भी कर सकता है नैना उन तस्वीरों को देख रही थी हालांकि उन सभी
तस्वीरों में एक बात कॉमन थी कि उन तस्वीरों में से वह सारी लड़कियां बेहद खूबसूरत थी उस डोर में एक फोटो और भी थी जो उल्टी कर रखी थी नैना ने अपने कांपते हुए हाथों से वह तस्वीर उठाई और देखने लगी वह तस्वीर देख नैना की आंखें फटी की फटी रह गई वह तस्वीर किसी और की नहीं बल्कि उसकी खुद की थी अपनी तस्वीर को उस डोअर में देख नैना के शरीर के मानो रोंगटे खड़े हो गए धीरे-धीरे अब सारी बातें नैना के समझ आ रही थी नैना से अब वह सब बर्दाश्त नहीं हो रहा
था नैना भागते हुए अपने घर आई और अपने कमरे का दरवाजा बंद कर एक कोने में बैठ गई वह जोर से चीखना चाहती थी लेकिन उसके मुंह से आवाज ही नहीं निकल पा रही थी तभी सामने पड़ा उसका फोन बजने लगता है जतिन का फोन आ रहा था 101 रिंग होने के बाद भी नैना ने फोन नहीं उठाया नैना के अंदर अब वह हिम्मत ही नहीं थी कि वह उससे बात करें कई दिन बीत गए नैना कॉलेज नहीं गई और ना ही किसी से मिली और ना ही किसी से कोई बात की बस अपने कमरे
का दरवाजा बंद कर अकेली अपनी डायरी को देखती बैठती रही आज पहली बार उसे अपनी डायरी से नफरत होने लगी थी उसी दिन अखबार के पहले पन्ने पर एक न्यूज आई थी कि एक लड़की के प्यार में निराश होकर एक लड़के ने अपनी बिल्डिंग से कूदकर अपनी जान दे दी उस न्यूज के साइड में जतिन की तस्वीर छपी हुई थी वो देख नैना पूरी तरीके से शौक हो गई उसे ऐसा लग रहा था मानो उसके शरीर से पूरी ताकत ही चली गई नैना ने अब कॉलेज जाना भी छोड़ दिया दिन भर बस अपने कमरे में
बैठकर दीवारों को देख धीमी आवाज में कुछ बड़बड़ा आती रहती थी मैंने कुछ नहीं किया प्लीज मुझे छोड़ दो हर जगह नैना को बस तीन की रूह दिखाई देती थी और वह उसे हंसते हुए कहता था नैना मैं आज भी तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं तुम सिर्फ मेरी हो सुनीता सिस्टर की बातें सुनकर रचना सिस्टर हैरान हो गई थी रात का वह सन्नाटा और वह खौफनाक किस्सा रचना सिस्टर के दिल में डर पैदा कर रहा था उतने में हॉस्पिटल की सारी लाइट्स बंद चालू होना शुरू हो गई और अचानक से हॉस्पिटल की सारी बिजली चली
गई रचना सिस्टर अब काफी डर गई थी उसने डरते हुए अपना मोबाइल निकाला और अपने मोबाइल की टॉर्ट शुरू की और सुनीता सिस्टर को आवाज देने लगी सुनीता सिस्टर सुनीता सिस्टर आप यही है ना लेकिन सुनीता सिस्टर का कोई जवाब नहीं आया उतने में रचना सिस्टर को टेबल की साइड पर रखा एक पेपर नोट मिला नोट में लिखा था कि रचना मुझे एक इमरजेंसी की वजह से कहीं दूर जाना पड़ रहा है तुम्हारा फोन नहीं लग रहा था इसलिए यह मैसेज रख रही हूं मैं एक घंटे में वापस आती हूं यह पढ़कर रचना सिस्टर को
ऐसा लग रहा था मानो उसके पूरे शरीर से किसी ने उसकी जान ही निकाल दी हो अपनी डर भरी निगाहों से रचना सिस्टर इधर उधर देख रही थी तभी अचानक एक कोने में उसे किसी की परछाई दिखाई देती है व जतिन की रोह थी जो अपने चेहरे पर एक टेढ़ी मुस्कान लिए रचना सिस्टर को देखकर कहता है ऐसे तुम भी काफी खूबसूरत हो और खूबसूरत चीजों पर बस मेरा हक [हंसी] है इतना कहकर वह जोर जोर से हंसने लगता है सपनों की दुनिया और असल जिंदगी में बहुत फर्क होता है इतना कि कभी-कभी वह जिंदगी
और मौत की हदें भी पार कर देता है यह आपको अच्छी लगी हो तो हमें सब्सक्राइब करें हमारा [संगीत]