रात भर रात भर जाए ना घर जाए ना घर है साथ तू क्या है फिक्र पहली बार तुमको मैंने जब देखा था सुन लो यार कि मैंने क्या सोचा था लगा के तुमसे मिलना ही इस दिल को ही समझाने मैंने कहा इस रस कभी ये तेरे लिए नहीं हो जो भी हो हो तुम अंग भी हो, तुम रूप भी हो, तुम धूप भी हो, छाया भी, तुम मैंने कहा हो, तुम अप्सरा हो, तुम मोह भी हो माया भी। तुम ऐसे हो आए, तुम ऐसे होए, तो देखूं मैं आए तुम्ही को। तुम ऐसे हो आए, तुम
ऐसे होए, तो देखूं मैं आए। तुम्हें आज मैंने जो देखा उन्हें आज मैंने जो देखा चमका है किस्मत का तारा बदली नसीब की रेखा तुम्हें आज मैंने जो देखा तुम्हें आज मैंने जो देखा गा तुम हो तो राहों में तुम ही तुम हो निगाहों में किसी दिन को मेरे दिल को तो खोना ही था तुम्हें देखा तुम्हें चाहा तुम्हें ढूंढा तुम्हें पाया तुम्हें बाकी हुआ है जो वो होना ही था चलो अब जो भी हो तुम्हारा या ना हो मेरे दिल में तुम ही तुम हो अब तो बिगराम बिगरा मेरा