नमस्कार दोस्तों। कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है जहां दो ही रास्ते होते हैं। या तो हम टूट जाएं या फिर खुद को इतना मजबूत बना लें कि पूरी दुनिया भी हमें रोक ना सके। और यकीन मानिए हर इंसान के अंदर वह शक्ति पहले से मौजूद होती है। बस उसे जगाने की देर होती है। आज की इस ऑडियो बुक में हम उसी शक्ति को जगाने का काम करेंगे। फोकस ऑन योर गोल अंटिल यू विन। यह सिर्फ एक किताब का नाम नहीं है। यह एक ऐसी सोच है जो आपकी पूरी जिंदगी बदल
सकती है। अगर आज आप स्ट्रगलिंग हो, थके हुए हो, कंफ्यूज्ड हो या फिर लाइफ में बार-बार फेल होते-होते तंग आ चुके हो तो यह वीडियो आपके लिए है। क्योंकि अगला एक घंटा सिर्फ आपकी जिंदगी को नहीं आपकी सोच को बदल देगा। आज आप आने वाले कुछ मिनटों में जानोगे कि आखिर क्यों दुनिया के सबसे सफल लोग दूसरों को देखने से पहले खुद पर काम करते हैं। क्यों जीतने वाले लोग कंपैरिजन की आग में खुद को नहीं जलाते? क्यों वह लोग तब तक हार नहीं मानते जब तक जीत उनके कदमों में ना आ जाए। और सबसे
बड़ी बात आप जानोगे कि आपके अंदर वह आग कैसे पैदा की जाए जो आपको आगे बढ़ने पर मजबूर कर दे। चाहे हालात कैसे भी हो। सोचिए अगर आज आप सिर्फ 1% रोज अपने आप पर ध्यान देना शुरू कर दें तो अगले 365 दिनों में आप कहां पहुंच सकते हो। शायद वहीं जहां पहुंचने का सपना आप सालों से देख रहे हो। लेकिन एक चीज याद रखना दुनिया का सबसे खतरनाक इंसान वह होता है [संगीत] जिसने अपनी असली ताकत पहचान ली हो। और यह वीडियो आपको आपकी ताकत दिखाने वाला है। इसीलिए मैं आपसे एक वादा चाहता हूं
इस वीडियो को बीच में मत छोड़ना क्योंकि शुरुआत आपकी सोच बदलेगी। बीच में आपकी आदतें बदलेंगी [संगीत] और अंत तक आपका पूरा माइंडसेट बदल चुका होगा। और अगर आज आप यह एक फैसला कर लो कि हां अब मैं खुद पर फोकस करूंगा [संगीत] जब तक जीत नहीं जाता। तो यह वीडियो आपकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन [संगीत] सकती है। तो गहरी सांस लो। दिमाग को शांत करो और तैयार [संगीत] हो जाओ अपनी जिंदगी का सबसे शक्तिशाली सफर शुरू करने के लिए। क्योंकि आने वाले कुछ मिनट सिर्फ आपकी ग्रोथ, आपकी जीत और आपके सपनों के लिए
हैं। और हां, अगर यह वीडियो आपको सच में मदद करे, अगर आपको लगे कि हां, यह आपकी जिंदगी में बदलाव ला रही है, तो वीडियो के अंत में इसे लाइक जरूर करना। चैनल को सब्सक्राइब करना ताकि आगे भी ऐसी ही पावरफुल वीडियोस आप बिना रुके पाते रहें। अब शुरू करते हैं आपका असली सफर। वो सफर जिसमें आप सिर्फ एक चीज सीखोगे। दुनिया चाहे जो कहे फोकस सिर्फ खुद पर करना है जब तक जीत नहीं मिलती है। चैप्टर वन अपने आप को पहचानो। जिंदगी में हर बड़ा बदलाव तब शुरू होता है जब इंसान खुद को पहचानना
शुरू करता है। लेकिन ज्यादातर लोग पूरी जिंदगी दूसरों को इंप्रेस करने, दूसरों जैसा बनने और दुनिया को खुश करने में निकाल देते हैं और आखिर में खुद से ही दूर हो जाते हैं। चैप्टर 1 की सबसे बड़ी सीख यही है कि अगर जीतना है, अगर आगे बढ़ना है, अगर महान बनना है तो सबसे पहले खुद को पहचानो और खुद को पहचानना आसान नहीं होता क्योंकि इसके लिए आपको अपने डर, अपनी कमजोरियों, अपनी गलतियों और अपनी सच्चाई से सामना करना पड़ता है। यह दर्द देता है। लेकिन यही दर्द आपको मजबूत बनाता है। सोचिए जब आप रोज
दूसरों को देखते हो वो क्या पहन रहे हैं, क्या कर रहे हैं, क्या पा रहे हैं तो आपका दिमाग खुद की तुलना शुरू कर देता है। लेकिन जब आप खुद को देखने लगते हो तब आपकी असली ग्रोथ शुरू होती है। इस अध्याय में एक बहुत गहरी बात कही गई है। आपके अंदर दो इंसान रहते हैं। एक वह जो हार मान लेता है और दूसरा [संगीत] वह जो हार को सबक बनाकर फिर से खड़ा हो जाता है और आपकी जीत सिर्फ इस पर निर्भर करती है कि आप किस इंसान को ज्यादा बार चुनते हो। जब आप
खुद को पहचानने लगते हो तो आपको समझ आता है कि आपकी असली ताकत क्या है? लोगों की नजर में आपकी कीमत क्या है? उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। असली सवाल यह है कि आपकी नजर में आपकी कीमत क्या है? दुनिया कहेगी तुम नहीं कर पाओगे। लेकिन जब आप खुद को पहचान लेते हो तो आपकी आत्मा जवाब देती है मैं कर सकता हूं [संगीत] और मैंने करना शुरू कर दिया है। खुद को पहचानने का पहला कदम है खुद से ईमानदार होना। खुद से पूछो मैं सच में क्या चाहता हूं? क्या मैं अपने सपनों के लिए लड़
रहा हूं या बस दुनिया की भीड़ में खो गया हूं? क्या मैं हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा हूं? या फिर मैं उन लोगों जैसा बन रहा हूं जिनसे मैं आगे बढ़ना चाहता हूं। इस किताब का पहला अध्याय हमें यह याद दिलाता है कि किसी भी मंजिल तक पहुंचने का रास्ता बाहर नहीं बल्कि अंदर से शुरू होता है। खुद का सम्मान करो। अपने फैसलों की कद्र करो। अपनी मेहनत की कीमत समझो। क्योंकि जब आप खुद को महत्व देते हो, दुनिया भी आपको महत्व देना शुरू कर देती है। याद रखो हर सक्सेसफुल
इंसान ने अपनी ताकत दुनिया को दिखाने से पहले खुद को दिखाई थी और आपकी असली जीत तभी शुरू होगी जब आप खुद से यह कहोगे हां, मैं अपनी जिंदगी की कमान खुद पकड़ता हूं। खुद को पहचानना ही जीत की पहली सीढ़ी है और इस सीढ़ी पर कदम रखते ही आपकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल जाती है। [संगीत] चैप्टर टू ध्यान भटकाने वालों से दूरी बनाओ। जिंदगी में जीतने का सबसे बड़ा दुश्मन कोई इंसान, कोई हालात या कोई मुश्किल नहीं होती। सबसे बड़ा दुश्मन होता है ध्यान भटकना। और यह बात जितनी साधारण लगती है, असल में
[संगीत] उतनी ही खतरनाक होती है। जब एक इंसान अपने सपनों पर फोकस करता है, तभी वह आगे बढ़ता है। लेकिन जब वह हर छोटी-छोटी चीज में उलझ जाता है, दूसरों की लाइफ देखकर परेशान हो जाता है। सोशल मीडिया के जाल में फंस जाता है। तब उसका दिमाग धीरे-धीरे बिखरने लगता है और यह अध्याय इसी बिखराव से बाहर निकलने की शक्ति देता है। इस अध्याय में कहा गया है कि आपके आसपास तीन तरह के डिस्ट्रैक्शंस सबसे ज्यादा आपकी ग्रोथ को रोकते हैं। पहला वह लोग जो खुद कुछ नहीं करते लेकिन आपकी मेहनत पर शक करते हैं।
दूसरा वह हालात जो आपको इमोशनली कमजोर बनाते हैं और आपका ध्यान आपकी प्रायोरिटीज से हटाते हैं। और तीसरा वो चीजें जिनका आपकी जिंदगी में कोई फायदा नहीं। लेकिन आप अपना समय उनमें गवाते जाते हो। अगर आप जीतना चाहते हो तो सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि आपका समय आपकी सबसे कीमती पूंजी है। आप उसे बचा भी सकते हो, बर्बाद भी कर सकते हो और ध्यान भटकाने वाली चीजें आपका समय सबसे जल्दी चुरा लेती हैं। इस अध्याय में एक गहरा संदेश है। आप जिस भी चीज को अपनी नजर देते हो, वही आपकी जिंदगी को नियंत्रित
करना शुरू कर देती है। अगर आपकी नजर सपनों पर है, आप आगे बढ़ोगे। अगर आपकी नजर दूसरों की जिंदगी पर है, आप पीछे रह जाओगे। अगर आपकी नजर दुनिया की नकारात्मक बातों में फंसी है, आपकी सोच धीरे-धीरे झड़ से भर जाएगी। इसी वजह से इस अध्याय में कहा गया है कि उन लोगों से दूरी बनाओ जो आपको छोटा दिखाते हैं। उन हालातों से निकलो जो आपको कमजोर बनाते हैं और उन चीजों से बचो जो आपकी फोकस की ताकत को खत्म करती हैं। क्योंकि जब आप डिस्ट्रैक्शन से दूरी बनाते हो तभी आप डिसिप्लिन के करीब जाते
हो और डिसिप्लिन ही वह शस्त्र है जिससे हर सपने की लड़ाई जीती जाती है। इस अध्याय का सबसे बड़ा सबक यह है कि अगर आप अपने समय अपनी ऊर्जा और अपने दिमाग की सुरक्षा नहीं करोगे तो दुनिया का शोर आपकी आत्मा की आवाज को दबा देगा। और जब इंसान खुद की आवाज सुनना बंद कर देता है तो उसका फोकस भी खत्म हो जाता है। इसलिए खुद से एक वादा करो। मैं उन लोगों से दूर जाऊंगा जो मेरे फोकस को तोड़ते हैं और उन चीजों के करीब रहूंगा जो मेरे सपनों को मजबूत बनाती हैं। यही वह
कदम है जो आपको औसत लोगों की भीड़ से निकालकर विजेताओं की कतार में खड़ा करता है। चैप्टर थ्री अपने लक्ष्य को साफ करो। वरना रास्ता धुंधला ही रहेगा। जिंदगी में सबसे बड़ा मसला यह नहीं होता कि इंसान में क्षमता नहीं है। असल परेशानी यह होती है कि वह जानता ही नहीं कि उसे जाना किस दिशा में है। यही कारण है कि लाखों लोग मेहनत तो बहुत करते हैं, लेकिन कहीं पहुंचे बिना ही थक जाते हैं, टूट जाते हैं और धीरे-धीरे हार मान लेते हैं। इस अध्याय की सबसे ताकतवर बात यही है। अगर लक्ष्य साफ नहीं
होगा तो रास्ता भी कभी साफ नहीं मिलेगा। जब तक इंसान अपने सपने को शब्दों में, तस्वीरों में या एक साफ दिशा में तय नहीं करता तब तक उसका दिमाग भी उलझन में रहता है। आप सोचिए अगर आप एक कार लेकर निकलो [संगीत] और आपको पता ही ना हो कि जाना कहां है तो आप कितनी भी तेज चलाओ मंजिल कहीं नहीं मिलेगी। यही हाल जिंदगी का भी है। लोग कभी किसी की बात सुनकर कुछ करने लगते हैं। कभी किसी की [संगीत] लाइफ देखकर कुछ और करने लगते हैं। और इसी चक्कर में उनका ध्यान बिखर जाता है।
लेकिन जब आपका लक्ष्य साफ होता है, आपकी ऊर्जा एक दिशा में लगती है। यह अध्याय हमें सिखाता है कि लक्ष्य बड़ा हो या छोटा, उसे लिखा जरूर होना चाहिए। लिखा हुआ लक्ष्य दिमाग को आदेश देता है। यह मेरी दिशा है और मुझे इसी तरफ बढ़ना है। लिखा हुआ लक्ष्य आपकी हर रोज की मेहनत को मायने देता है और सबसे बड़ी बात लक्ष्य जितना साफ होगा फोकस उतना ही मजबूत होगा। इस अध्याय में कहा गया है कि अपने लक्ष्य को सिर्फ सोचो मत। उसे महसूस करो। अपने सपने को ऐसा देखो जैसे वह आज ही सच हो
चुका हो। जब आप किसी चीज की कल्पना भावनाओं के साथ करते हो तो दिमाग उस सपने को सच करने के लिए हर तरह की ऊर्जा जगाने लगता है। लेकिन सिर्फ सपने देखना काफी नहीं। उस सपने तक पहुंचने का रास्ता भी साफ होना चाहिए। इस अध्याय में एक गहरी बात कही गई है। हर बड़ा लक्ष्य छोटे-छोटे कदमों में टूट कर ही पूरा होता है। सपने बड़े रखो लेकिन उन्हें छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पूरा करो। हर दिन यह सोच कर उठो कि आज एक छोटा कदम अपने बड़े सपने के करीब ले जाना है और जब आप रोज
एक छोटा कदम उठाते हो। एक दिन अचानक देखकर आपको पता चलता है कि आप वहां पहुंच चुके हो जहां पहुंचने का दूसरों ने सिर्फ सपना देखा था। लेकिन लक्ष्य साफ करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपको डिस्ट्रैक्शन से बचाता है। जब आपको पता हो कि आप किस दिशा में जा रहे हो तो दुनिया का शोर भी आपको भटका नहीं पाता। जब लक्ष्य साफ हो तो कंपैरिजन कम होता है। जब लक्ष्य साफ हो तो हार का डर घटना शुरू होता है। जब लक्ष्य साफ हो तो दिमाग साफ सोचता है और साफ सोच ही
हर जीत की जड़ है। इसलिए इस अध्याय का सार यही है। खुद से भाग्य मत मांगो। अपने लक्ष्य को इतना साफ कर दो कि भाग्य खुद आपके कदमों में आकर खड़ा हो जाए। चैप्टर फोर बहाने छोड़ो और कार्यवाही शुरू करो। जिंदगी में जितने सपने टूटते हैं उनमें से आधे सपने किसी और की वजह से नहीं बल्कि हमारे अपने ही बहानों की वजह से टूटते हैं। इंसान [संगीत] के पास दुनिया जितनी ऊर्जा देती है उससे कहीं ज्यादा बहानों की ताकत होती है। समय नहीं है। पैसा नहीं है। माहौल सही नहीं है। लोग साथ नहीं देते। मौके
नहीं मिलते। हालात खराब हैं। यह सारे बहाने सुनने में सच लगते हैं। लेकिन असल में यह वह दीवारें हैं जो हम खुद अपनी सफलता के रास्ते में खड़ी कर देते हैं। इस अध्याय की सबसे जोरदार बात यही है। जो इंसान बहाने ढूंढता है वह मौके खो देता है। जो इंसान कार्यवाही करता है, दुनिया उसके लिए रास्ते बनाती है। बहाना एक ऐसा जाल है जिसमें फंसकर इंसान अपने ही सपनों से दूर चला जाता है। लेकिन मजेदार बात यह है कि बहाने सिर्फ दिमाग की बनाई हुई एक कहानी होते हैं जिन्हें अगर आप चाहे तो आज ही
बदल सकते हैं। यह अध्याय हमें यह समझने पर मजबूर करता है कि कार्यवाही करने के लिए परफेक्ट टाइम नहीं होता। परफेक्ट हालात नहीं होते और परफेक्ट माहौल भी कभी नहीं होता। जो लोग जीतते हैं, वह इंतजार नहीं करते। वह वहीं से शुरू करते हैं जहां वह खड़े हैं। जितना उनके पास है, जितना वह कर सकते हैं। और जैसे-जैसे वह कदम बढ़ाते जाते हैं, वैसे-वैसे रास्ते खुद साफ होने लगते हैं। इस अध्याय में एक बहुत गहरी लाइन कही गई है। एक्शन इज द एंटीडोट टू फियर। यानी कारवाई ही डर का सबसे बड़ा इलाज है। [संगीत] जब
इंसान बैठा रहता है, सोचता रहता है, टालता रहता है, तब उसका डर बढ़ता रहता है। लेकिन जैसे ही वह पहला कदम उठाता है, डर टूटने लगता है, दिमाग खुलने लगता है और अंदर एक नई हिम्मत जन्म लेती है। यही वजह है कि इस अध्याय में साफ कहा गया है। तुम्हारा पहला कदम परफेक्ट नहीं होना चाहिए। बस उठाया हुआ होना चाहिए। हम अक्सर सोचते रहते हैं कि पहले सब ठीक हो जाए तब शुरू करेंगे। लेकिन सच्चाई यह है कि शुरू करने से ही चीजें ठीक होती हैं। इस अध्याय का एक और महत्वपूर्ण संदेश है। अगर आप
किसी चीज को जरूरी नहीं मानते तो आप उसके लिए कभी समय नहीं निकालोगे। जिस दिन आप यह समझ जाओगे कि कार्यवाही करना ही सफलता की सबसे बड़ी चाबी है। उस दिन आपके हर बहाने की ताकत खत्म हो जाएगी। और याद रखो दुनिया उन्हीं लोगों को याद रखती है जो बहानों से नहीं अपने कामों से पहचाने जाते हैं। आप आज कहां खड़े हो इससे फर्क नहीं पड़ता। आपके पास कितना ज्ञान है इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि आज आपने अपने सपने की तरफ एक कदम बढ़ाया या नहीं। इस
अध्याय की असली सीख यही है। अगर आप जीतना चाहते हैं तो शुरू करना ही होगा। अभी इसी पल बिना किसी बहाने के चैप्टर [संगीत] फाइव असफलता से डरना छोड़ो क्योंकि असफलता ही जीत का सबसे बड़ा रास्ता है। जिंदगी में जितने भी लोग ऊपर पहुंचे हैं उनमें एक चीज कॉमन होती है। उन्होंने असफलता से भागा नहीं बल्कि उसे अपनी ताकत बनाया। और इस अध्याय की सबसे गहरी बात यही है कि असफलता कभी आपकी दुश्मन नहीं होती। असली दुश्मन होता है आपका डर। डर के लोग क्या कहेंगे? डर कि अगर मैं गिर गया तो वापस उठ नहीं
पाऊंगा। डर की कहीं मेरी मेहनत बेकार ना चली जाए। लेकिन यह किताब हमें बताती है कि असफलता आपकी जिंदगी का अंत नहीं बल्कि आपकी सफलता की शुरुआत है। सोचिए जब एक बच्चा चलना सीखता है तो वह कितनी बार गिरता है। लेकिन क्या वह गिरने से डर कर चलना सीखना छोड़ देता है? नहीं। क्योंकि उसे नहीं पता कि गिरना गलत है। वह बस उठता है और फिर से कोशिश करता है। यही असली जिंदगी है। गिरो, सीखो, उठो और आगे बढ़ो। लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, हम दूसरों की राय से, समाज की सोच से और
अपनी खुद की शंकाओं से डरने लगते हैं। और यही डर हमें रोकता है। इस अध्याय में कहा गया है, जिस दिन तुम असफलता को अपनी यात्रा का हिस्सा मान लोगे, उस दिन तुम अनस्टपेबल हो जाओगे। असफलता आपकी कमजोरी नहीं। आपका सबसे बड़ा शिक्षक है। हर बार जब आप असफल होते हो तो जिंदगी आपको कुछ नया सिखाती है। कहीं आपने प्लानिंग में गलती की, कहीं आपने कम मेहनत की, कहीं आपने गलत दिशा चुनी। लेकिन हर असफलता आपको किसी ना किसी रूप में आगे बढ़ाती है। इस अध्याय में एक और अद्भुत बात कही गई है। फेल फास्ट,
लर्न फास्ट, राइज फास्ट। यानी जितनी जल्दी आप गिरोगे, उतनी जल्दी सीखोगे और उतनी जल्दी जीतोगे। दुनिया के सबसे सफल लोग वह नहीं है जो कभी नहीं गिरे। वह लोग हैं जो हर बार गिर कर उठे और हर बार उठकर पहले से ज्यादा ताकतवर बने। जब आप असफलता को अपनाना सीख जाते हो [संगीत] तब आपकी जिंदगी में दो चीजें बदलती हैं। पहली आप जोखिम लेना शुरू कर देते हो। दूसरी आपकी सोच में एक जबरदस्त आत्मविश्वास पैदा हो जाता है। क्योंकि आप जानते हो कि चाहे कुछ भी हो जाए आप रुकने वाले नहीं हो। इस अध्याय में
यह भी कहा गया है कि असफलता से डर तभी लगता है जब इंसान खुद को परिणाम से जोड़ लेता है। लेकिन जीतने वाले लोग खुद को परिणाम से नहीं प्रक्रिया से जोड़ते हैं। [संगीत] वह जानते हैं कि अगर प्रोसेस सही है तो एक ना एक दिन नतीजे भी सही आएंगे। इसीलिए वह गिरने पर डरते नहीं बल्कि गिरने को अपनी ग्रोथ का हिस्सा मानते हैं। इस अध्याय का सार यही है। यदि तुम असफलता से भागोगे तो तुम सफलता से भी दूर रहोगे। लेकिन यदि तुम असफलता को गले लगाते हो उससे सीखते हो और आगे बढ़ते हो
तो दुनिया की कोई ताकत तुम्हें रोक नहीं पाएगी? तो अब एक सवाल खुद से पूछो। क्या मैं गिरने से डर रहा हूं या जीतने के लिए तैयार हूं? चैप्टर सिक्स। लगातार बने रहो क्योंकि जीत उन्हीं को मिलती है जो रुकते नहीं। जिंदगी में जितनातना मुश्किल नहीं है। मुश्किल है लगातार बने रहना। ज्यादातर लोग शुरुआत तो बहुत जोश से करते हैं। पहले दिन मोटिवेशन ऊंची, दूसरे दिन एनर्जी स्ट्रांग, तीसरे दिन एक्शन पावरफुल। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, उनका जोश कम होने लगता है। और फिर धीरे-धीरे वह वहीं वापस लौट जाते हैं, जहां से उन्होंने शुरू किया
था। इस अध्याय की सबसे जबरदस्त सीख यही है। कंसिस्टेंसी इज मोर पावरफुल देन इंटेंसिटी। यानी रोज थोड़ा-थोड़ा करना उस एक दिन की भारी मेहनत से कहीं ज्यादा ताकतवर है। इस अध्याय में बताया गया है कि दुनिया के हर सफल इंसान में एक बात कॉमन होती है। वह रुकते नहीं। चाहे हालात कैसे भी हो, चाहे मन करे या ना करे, चाहे दुनिया उनके खिलाफ हो, चाहे उन्हें लगे कि कुछ हो नहीं रहा। वह फिर भी रोज एक छोटा कदम उठाते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि छोटे-छोटे कदम ही बड़ी जीतों की नींव रखते हैं। इस अध्याय
में एक बहुत सुंदर उदाहरण दिया गया है। एक नदी पहाड़ को अपनी ताकत से नहीं बल्कि अपनी निरंतरता से काटती है। नदी कभी नहीं रुकती कभी नहीं ठहरती। और जैसे-जैसे वह बहती रहती है, पत्थर भी उसकी राह में टिक नहीं पाते। यही इंसान की जिंदगी है। यदि आप लगातार बहते रहे, लगातार चलते रहे, लगातार कोशिश करते रहे तो दुनिया की कोई रुकावट आपको रोक नहीं सकती। इस अध्याय में कहा गया है कि जो लोग लगातार रहते हैं उनके अंदर तीन चीजें विकसित हो जाती हैं। पहली डिसिप्लिन, दूसरी पेशेंस और तीसरी सेल्फ बिलीफ। यह तीनों मिलकर
इंसान को ऐसे मुकाम पर ले जाती हैं [संगीत] जहां बाकी लोग पहुंचने की कल्पना भी नहीं कर पाते। लेकिन लगातार बने रहना आसान नहीं। दिमाग बहाने ढूंढता है, शरीर थकता है, दिल डरता है और दुनिया आपके कदम रोकने की कोशिश करती है। यही कारण है कि कंसिस्टेंसी को एक आदत बनाना सीखना जरूरी है। इस अध्याय में यह कहा गया है कि आपको परफेक्ट नहीं बनना है। बस एवरीडे बेटर बनना है। अगर आज आपने थोड़ा भी इंप्रूव किया है तो आप जीत की तरफ बढ़ चुके हैं। लेकिन अगर आपने रुकना शुरू कर दिया तो आपका सपना
भी रुक जाएगा। इसी अध्याय में एक लाइन है जो दिल को छू जाती है। तुम्हें तेज नहीं दौड़ना है। तुम्हें बस रुकना नहीं है। सोचिए अगर आप अगले 100 दिन बिना रुके रोज अपने लक्ष्य के लिए कुछ करते रहो तो आपकी जिंदगी कैसी दिखेगी। शायद वैसी [संगीत] जैसी आपने सोचा भी नहीं होगा। इसलिए इस अध्याय का मूल मंत्र यही है। जितना भी करो लेकिन रोज करो। धीरे-धीरे लेकिन लगातार क्योंकि जीत का दरवाजा तभी खुलता है जब आप उसे हर दिन खटखटाते हो और एक दिन अचानक वह खुल जाता है। चैप्टर सेवन अपने आप पर विश्वास
रखो क्योंकि विश्वास ही हर जीत की जड़ है। दुनिया में जितने भी बड़े काम हुए हैं, जितनी भी महान जीतें मिली हैं, जितने भी लोगों ने असंभव को संभव किया है, उन सब की शुरुआत एक ही चीज से हुई है। खुद पर विश्वास। यह अध्याय बताता है कि आप चाहे जितना भी ज्ञान ले लो, चाहे कितनी भी किताबें पढ़ लो, चाहे कितने भी मेंटर्स मिल जाए, [संगीत] जब तक आपके अंदर खुद पर भरोसा नहीं है, तब तक कोई भी चीज आपको आगे नहीं बढ़ा सकती। और सच्चाई यह है कि आज ज्यादातर लोग प्रतिभा की कमी
से नहीं हारते। वह खुद पर विश्वास की कमी से हारते हैं। जब इंसान खुद को कम समझना शुरू कर देता है तो दुनिया भी उसे कम समझने लगती है। जब इंसान खुद शक करने लगता है तो दुनिया भी शक करने लगती है। और जब इंसान खुद को हारने वाला मान लेता है तो दुनिया भी उसे जीतने नहीं देती। लेकिन जिस दिन इंसान खुद को बोल देता है, हां, मैं कर सकता हूं। मैं इसके लायक हूं और मैं इसके लिए खड़ा रहूंगा। [संगीत] उस दिन से उसकी पूरी जिंदगी बदलनी शुरू हो जाती है। इस अध्याय में
कहा गया है कि खुद पर विश्वास रखना कोई जादू नहीं है। यह एक माइंडसेट [संगीत] है और माइंडसेट अभ्यास से बनता है। जब आप रोज अपने सपने के लिए कदम उठाते हो, जब आप अपनी गलतियों से सीखते हो, जब आप खुद को दूसरों से कंपेयर करना बंद करते हो, तो धीरे-धीरे आपके अंदर विश्वास की एक मजबूत दीवार खड़ी होने लगती है। और यही दीवार आपको उन तूफानों से बचाती है जो आपकी आत्मा को तोड़ने की कोशिश करते हैं। इस अध्याय में एक बेहद जरूरी बात कही गई है। दुनिया आपको तभी पहचानती है जब आप खुद
को पहचान लेते हो और दुनिया आपको तभी मानती है जब आप खुद को मान लेते हो। आपके शब्द आपकी जिंदगी बदल सकते हैं। अगर आप खुद से कहते हो मैं कमजोर हूं तो आपका दिमाग भी कमजोर होने के मौके ढूंढेगा। लेकिन अगर आप खुद से कहते हो मैं जीतने के लिए बना हूं तो आपका दिमाग रास्ते ढूंढना शुरू कर देगा। इस अध्याय में यह भी कहा गया है कि अपने आप पर विश्वास रखना कोई एक बार का काम नहीं है। यह रोज का अभ्यास है। [संगीत] रोज का संघर्ष है। रोज का वचन है। हर दिन
आपको उन आवाजों से लड़ना होता है जो आपको नीचे खींचती हैं। दूसरों की आवाजें भी और आपके अंदर की आवाज भी। लेकिन जब आप हर सुबह उठकर खुद से यह कहते हो मैं अपने सपनों लायक हूं तो एक नई ऊर्जा एक नई रोशनी आपके अंदर जागती है जो आपको आगे बढ़ाती रहती है। इस अध्याय का सबसे ताकतवर संदेश यही है। तुम्हारी जीत का फैसला दुनिया नहीं करती। तुम्हारा आत्मविश्वास करता है। दुनिया में कोई भी इंसान तब तक नहीं जीत सकता जब तक वह खुद को जीतने वाला मान ना ले। इसलिए अगर आपको बड़ी जीत चाहिए,
अगर आपको बड़ी मंजिल पर पहुंचना है, अगर आपको अपनी जिंदगी बदलनी है, तो सबसे पहले अपनी सोच बदलो और अपनी सोच बदलने की शुरुआत एक ही लाइन से होती है। हां, मैं कर सकता हूं। इस पूरी ऑडियो बुक यात्रा में आपने एक बात बार-बार महसूस की होगी। जिंदगी तब बदलती है जब इंसान खुद को बदलने का फैसला लेता है। आपने सीखा कि ध्यान कहां लगाना है, खुद को कैसे पहचानना है, बहानों से कैसे दूर रहना है, असफलता को कैसे अपनाना है? और सबसे जरूरी खुद पर विश्वास कैसे रखना है? अब सवाल यह नहीं है कि
आप क्या सीख कर गए? असली सवाल यह है कि क्या आप आज से उन बातों को अपनी जिंदगी में लागू करना शुरू करोगे या नहीं? क्योंकि ज्ञान तभी ताकत बनता है जब उसे इस्तेमाल किया जाए। आज आप जहां खड़े हो वहां से आपकी जिंदगी के दो रास्ते निकलते हैं। पहला वही पुराना रास्ता जो आपको वहीं छोड़ देगा जहां आप हमेशा से थे। दूसरा वह रास्ता जो मुश्किल है, चुनौती भरा है, मेहनत मांगता है, लेकिन आपको आपकी मंजिल तक ले जाएगा और यह वीडियो आपको उसी दूसरे रास्ते पर चलने की प्रेरणा देने के लिए बनाया गया
है। अब यह [संगीत] आप पर है कि आप क्या चुनते हो? आराम या विकास, डर या विश्वास, रुकना या आगे बढ़ना। अगर इस वीडियो ने आपको थोड़ी भी हिम्मत दी है, थोड़ी भी रोशनी दी है, थोड़ा भी कॉन्फिडेंस दिया है कि हां आप कर सकते हो तो आज से ही पहला कदम उठा दो। छोटा हो या बड़ा बस उठा [संगीत] दो। आपकी जीत उसी कदम के बाद शुरू होगी। और अगर इस वीडियो ने आपकी जिंदगी में एक भी सकारात्मक बदलाव लाया है, अगर इसने आपके दिल को छुआ है, अगर इसने आपके सपनों को फिर से
जगा दिया है, तो इस वीडियो को लाइक जरूर करें। कमेंट में मुझे बताएं कि कौन सा चैप्टर आपका सबसे पसंदीदा था और किस बात ने आपके दिल को सबसे ज्यादा छुआ। अगर आप पहली बार चैनल पर आए हैं तो सब्सक्राइब जरूर करें क्योंकि आगे आने वाली हर वीडियो आपकी ग्रोथ, आपकी सक्सेस और आपकी माइंडसेट को मजबूत बनाने के लिए ही है। और हां, इस वीडियो को अपने उन दोस्तों या परिवार वालों के साथ जरूर शेयर करें जो अभी संघर्ष में हैं [संगीत] जो टूटा हुआ महसूस कर रहे हैं जिन्हें सिर्फ एक सही दिशा की जरूरत
है। हो सकता है आप किसी की जिंदगी बदलने की वजह बन जाए। याद रखिए जीत उनका इंतजार करती है जो खुद पर फोकस करते हैं और तब तक फोकस करते हैं जब तक जीत ना मिल जाए। अब आपकी बारी है। [संगीत] उठिए आगे बढ़िए और दुनिया को दिखाइए कि आप कौन हैं। आप जीतने के लिए बने हैं। बस अब रुकना मत। धन्यवाद दोस्तों। [संगीत]