क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया में ऐसे लाखों लोग हैं जो सालों तक मेहनत करते रहते हैं, हर महीने कमाते हैं, खर्च भी संभालते हैं। फिर भी उनके बैंक खाते में कभी ₹1 लाख नहीं जुड़ पाते। और दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो शुरुआत में बिल्कुल आपकी तरह संघर्ष करते हैं। लेकिन जैसे ही उनका पहला 1 लाख पूरा होता है, उसके बाद पैसा पहले से कहीं ज्यादा तेजी से [संगीत] बढ़ने लगता है। ऐसा क्यों होता है? क्या उनके पास कोई खास हुनर होता है? क्या उन्हें कोई बड़ा मौका मिल जाता है?
या फिर ऐसा कोई नियम है जिसे ज्यादातर लोग समझ ही नहीं पाते। सच्चाई यह है कि पहला 1 लाख सिर्फ एक रकम नहीं है। यह आपके धैर्य की परीक्षा है। आपकी आदतों का इम्तिहान है और आपकी सोच का सबसे बड़ा टेस्ट है। ज्यादातर लोग पहले [संगीत] 1 लाख तक पहुंचने से ठीक पहले हार मान लेते हैं। उन्हें लगने लगता है कि इतनी मेहनत करने के बाद भी जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आ रहा। वे सोचते हैं कि शायद अमीर बनने का रास्ता उनके लिए बना ही नहीं है। लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि वे
उस दरवाजे के बिल्कुल सामने खड़े हैं जिसके दूसरी तरफ उनकी पूरी आर्थिक जिंदगी बदल सकती है। कल्पना कीजिए कि आप एक बहुत बड़े पत्थर को धक्का दे रहे हैं। पहले [संगीत] दिन वह बिल्कुल नहीं हिलता। दूसरे दिन भी नहीं, 10वें दिन भी नहीं, 20वें दिन भी नहीं। अब आपको लगने लगता है कि आपकी सारी मेहनत बेकार जा रही है। लेकिन अगर आप धक्का देना बंद कर दें तो आप कभी नहीं जान पाएंगे कि शायद अगला ही धक्का उस पत्थर को हमेशा के लिए हिला देता। पैसे की दुनिया भी बिल्कुल ऐसी ही है। शुरुआत में हर
रुपया बहुत धीमा लगता है। ऐसा लगता है कि बचत करने का कोई फायदा ही नहीं। लेकिन एक समय आता है जब वही छोटी-छोटी बचतें, [संगीत] वही सही फैसले और वही अनुशासन मिलकर ऐसी रफ्तार बनाते हैं जिसे रोकना आसान नहीं होता। यही वजह है कि दुनिया के सबसे सफल निवेशकों और करोड़पतियों ने हमेशा शुरुआत की सबसे कठिन सीढ़ी की बात की है। उन्होंने करोड़ों कमाने से पहले पहले [संगीत] 1 लाख की मानसिक लड़ाई जीती थी। क्योंकि असली चुनौती पैसा कमाना नहीं होती बल्कि खुद को इतना बदलना होता है कि पैसा आपके पास टिकने लगे। लेकिन यहां
एक सवाल उठता है अगर पहला 1 लाख इतना महत्वपूर्ण है तो स्कूल हमें इसके बारे में क्यों नहीं सिखाते? हमें गणित पढ़ाई जाती है, इतिहास पढ़ाया जाता है, विज्ञान पढ़ाया जाता है। लेकिन यह नहीं बताया जाता कि हमारी पहली बड़ी [संगीत] पूंजी कैसे बनती है। हमें नौकरी करना सिखाया जाता है। लेकिन पैसा बचाना, उसे बढ़ाना और उसे [संगीत] अपने लिए काम पर लगाना शायद ही कभी सिखाया जाता है। यही कारण है कि लाखों लोग पूरी जिंदगी कमाने में निकाल देते हैं। लेकिन कभी आर्थिक स्वतंत्रता के करीब नहीं पहुंच पाते। इस वीडियो में हम किसी जादुई
योजना, [संगीत] रातोंरात अमीर बनने वाले फार्मूले या किसी झूठे वादे की बात नहीं करेंगे। हम उस सच्चाई की बात करेंगे जिसे समझने के बाद पैसे को देखने का आपका नजरिया बदल जाएगा। आप जानेंगे कि पहला 1 [संगीत] लाख इतना मुश्किल क्यों लगता है? दिमाग बार-बार बचत करने से क्यों रोकता है? छोटी-छोटी गलतियां कैसे वर्षों की मेहनत को खत्म कर देती है? और वह कौन सी सोच है जो साधारण लोगों को असाधारण आर्थिक सफलता तक पहुंचा देती है? हो सकता है इस समय आपके पास सिर्फ कुछ000 हो। हो सकता है आपकी सैलरी बहुत कम हो। हो
सकता है आप एक छात्र हो। [संगीत] नौकरी की शुरुआत कर रहे हो या अपने परिवार की जिम्मेदारियों के बीच हर महीने कुछ बचाने की कोशिश कर रहे हो। लेकिन यह वीडियो किसी अमीर इंसान के लिए नहीं है। यह उस इंसान के लिए है जिसने कभी अपने भविष्य के लिए कुछ बड़ा करने का सपना देखा है। लेकिन हर बार हालात ने उसे पीछे धकेल दिया। और शायद सबसे महत्वपूर्ण [संगीत] बात इस वीडियो के अंत तक आपको यह एहसास होगा कि पहला 1 लाख कमाने का सबसे कठिन हिस्सा पैसे इकट्ठा करना नहीं [संगीत] बल्कि उस इंसान में
बदलना है जो 1 लाख बना सकता है। क्योंकि जिस दिन आपकी पहचान बदल जाती है उसी दिन आपकी आर्थिक दिशा भी बदलनी शुरू हो जाती है। इसलिए इस वीडियो को केवल सुनिए मत। इसे अपने भविष्य के साथ एक बातचीत की तरह महसूस कीजिए क्योंकि अगले कुछ मिनटों में जो बातें आप जानने वाले हैं [संगीत] वे सिर्फ आपके बैंक बैलेंस को नहीं बल्कि पैसे के प्रति आपकी पूरी सोच को बदल सकती है और हो सकता है यही वह पल हो जहां से आपकी आर्थिक यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण शुरुआत होने वाली अध्याय एक पहला 1 लाख नहीं
अपनी सोच बदलना सबसे कठिन होता है। अगर आपको आज कोई यह कहे कि अगले 12 महीनों में आपको ₹1 लाख बचाने हैं तो शायद आपका पहला जवाब होगा। इतना आसान नहीं है। दिमाग तुरंत बहाने ढूंढना शुरू कर देगा। मेरी सैलरी कम है। घर के खर्च बहुत हैं। महंगाई इतनी बढ़ गई है कि बचत करना मुश्किल है। और यही वह पल है जहां ज्यादातर लोग हार जाते हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी सबसे बड़ी समस्या पैसों की कमी है। जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। कभी गौर कीजिए। एक ही शहर में रहने वाले दो [संगीत]
लोग हैं। दोनों की आय लगभग बराबर है। दोनों की जिम्मेदारियां भी लगभग [संगीत] एक जैसी हैं। लेकिन 5 साल बाद एक व्यक्ति के पास अच्छी बचत, निवेश और आर्थिक आत्मविश्वास होता है। जबकि [संगीत] दूसरा व्यक्ति आज भी महीने के आखिरी दिनों में पैसों की चिंता कर रहा होता है। आखिर ऐसा क्यों? क्या पहले व्यक्ति को कोई गुप्त तरीका पता था? क्या उसकी किस्मत ज्यादा अच्छी थी? या फिर उसके पास कोई ऐसा अवसर था जो दूसरे के पास नहीं था? नहीं। फर्क सिर्फ एक चीज का था। उसने अपनी पहचान बदल ली थी। उसने खुद से कहना
बंद कर दिया था कि मैं पैसे नहीं बचा सकता। उसने कहना शुरू किया मैं ऐसा इंसान हूं जो हर हाल में बचत करता है। यह सुनने में एक छोटा सा बदलाव लगता है। लेकिन पूरी [संगीत] जिंदगी इसी बदलाव पर टिकी होती है। क्योंकि इंसान हमेशा अपने विश्वास के अनुसार जीता है। अगर आपको यकीन है [संगीत] कि पैसा आपके पास टिक ही नहीं सकता तो चाहे आपकी आय दोगुनी क्यों ना हो जाए खर्च भी उतनी ही तेजी से बढ़ जाएंगे। लेकिन अगर आपको यकीन है कि हर महीने आपकी संपत्ति [संगीत] बढ़नी ही चाहिए तो आपका दिमाग
अपने आप ऐसे फैसले लेने लगता है जो आपको उस [संगीत] दिशा में ले जाए। यही कारण है कि बहुत से लोग करोड़ों कमाने के बाद भी कर्ज में डूब जाते हैं और कुछ लोग साधारण आय के बावजूद धीरे-धीरे आर्थिक रूप से मजबूत बन जाते हैं। समस्या कमाई की नहीं पहचान की होती है। याद रखिए पहला [संगीत] 1 लाख बैंक खाते में बनने से पहले दिमाग में बनता है। अगर दिमाग तैयार नहीं है तो बैंक बैलेंस कभी तैयार नहीं होगा। अब एक और बात समझिए। दुनिया का हर बड़ा पेड़ कभी एक छोटा सा बीज था। जब
वह बीज [संगीत] मिट्टी के अंदर होता है तब बाहर से देखने वाले को कुछ दिखाई नहीं देता। उसे लगता है कि कुछ हो ही नहीं रहा। लेकिन मिट्टी के अंदर हर दिन जड़े बन रही होती हैं। धीरे-धीरे चुपचाप [संगीत] बिना किसी शोर के पैसे की यात्रा भी बिल्कुल ऐसी ही होती है। जब आप पहले आर एस 10,000 बचाते हैं। कोई आपकी तारीफ [संगीत] नहीं करता। आर एस 20,000 होते हैं। फिर भी कोई फर्क नहीं दिखता। आर एस [संगीत] 40000 आर एस 60000 आर एस 80000 फिर भी दुनिया को लगता है कि कुछ खास नहीं बदला।
लेकिन उन्हें यह नहीं दिखता कि इन पैसों से कहीं ज्यादा मूल्यवान चीज आपके अंदर बन चुकी है। अनुशासन, धैर्य, खर्च पर नियंत्रण, लालच पर जीत [संगीत] और भविष्य के लिए सोचना। यही वे गुण हैं जो आगे चलकर लाखों नहीं करोड़ों रुपए बनाने की क्षमता देते हैं। इसीलिए पहला [संगीत] 1 लाख सिर्फ पैसे जमा करने का लक्ष्य नहीं है। यह अपने पुराने व्यक्तित्व को पीछे छोड़ने की प्रक्रिया है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि आज की दुनिया आपको लगातार इसके विपरीत [संगीत] दिशा में धकेल रही है। हर दिन नए ऑनर, नई सेल, नई ईएमआई, [संगीत]
नई इच्छाएं और सोशल मीडिया पर ऐसी जिंदगी दिखाई जाती है जिसे देखकर आपको लगता है कि अगर आपने अभी खर्च नहीं किया तो शायद आप पीछे रह जाएंगे। यहीं सबसे बड़ी मानसिक लड़ाई शुरू होती है। एक आवाज कहती [संगीत] है आज जी लो। दूसरी आवाज कहती है, भविष्य बनाओ। ज्यादातर लोग पहली आवाज सुन लेते हैं। बहुत कम लोग दूसरी आवाज को चुनते हैं और वही लोग आगे चलकर दूसरों के लिए प्रेरणा बनते हैं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। असल [संगीत] खेल तो तब शुरू होता है जब आप बचत करना शुरू करते हैं। फिर भी
महीनों तक कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं देता। यहीं पर सबसे मजबूत इरादे वाले लोग भी टूटने [संगीत] लगते हैं। उन्हें लगने लगता है कि शायद यह रास्ता उनके लिए नहीं बना। [संगीत] लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि वे सफलता के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ के बिल्कुल करीब पहुंच चुके हैं। अगले अध्याय [संगीत] में हम उस अदृश्य शक्ति को समझेंगे जिसके कारण पहले आरसी का [संगीत] 10000 तक पहुंचना सबसे धीमा और सबसे कठिन लगता है। और क्यों उसके बाद [संगीत] वही पैसा आपके लिए काम करना शुरू कर देता है। हाय दो। वह अदृश्य मोड़ जहां पैसा
आपके लिए काम करना शुरू करता है। जरा अपनी जिंदगी के पिछले कुछ वर्षों को याद कीजिए। कितनी बार ऐसा हुआ कि आपने पूरी ईमानदारी से बचत शुरू की। कुछ दिनों तक खर्चों पर नियंत्रण रखा। थोड़े-थोड़े [संगीत] पैसे अलग रखे। लेकिन फिर अचानक कोई जरूरी खर्च सामने आ गया। कभी मोबाइल खराब हो गया। कभी घर में कोई जरूरत आ गई। कभी दोस्तों के साथ बाहर जाने का प्लान बन गया और कभी आपने खुद से ही कह दिया [संगीत] इतना भी क्या बचाना जिंदगी एक ही बार मिली है। धीरे-धीरे जो रकम आपने मेहनत से जमा की थी,
वह वापस वहीं पहुंच गई। जहां से आपने शुरुआत की थी। यही कारण है कि ज्यादातर लोग सालों तक मेहनत करते हैं, लेकिन उनका बैंक बैलेंस वहीं का वहीं रहता है [संगीत] क्योंकि वे पैसे कमाने की दौड़ में तो शामिल हो जाते हैं, लेकिन पैसा रोकने की कला [संगीत] कभी नहीं सीखते और यही पहला 1 लाख मुश्किल होने का सबसे बड़ा कारण है। पैसा कमाना कठिन नहीं है। उसे अपने पास टिकाए रखना कठिन है। सोचिए अगर आप हर महीने आर एस 10,000 बचाते हैं तो 1 साल में आपके पास आर एस एक 20,000 हो सकते हैं।
सुनने में यह बहुत आसान लगता है। लेकिन असलियत में ऐसा क्यों नहीं हो पाता? क्योंकि इस पूरे 1 साल में आपकी सबसे बड़ी लड़ाई महंगाई से नहीं दुनिया से नहीं बल्कि अपने ही मन से होती है। मन हमेशा वर्तमान में जीना [संगीत] चाहता है। उसे भविष्य की चिंता नहीं होती। उसे नया फोन चाहिए। नई घड़ी चाहिए, महंगे कपड़े चाहिए, [संगीत] हर वह चीज चाहिए जो कुछ मिनटों की खुशी दे सके। लेकिन भविष्य हमेशा त्याग मांगता है। यही वजह है कि जो इंसान आज छोटी-छोटी इच्छाओं को नियंत्रित कर लेता है, वही कल बड़ी आजादी खरीद पाता
है। अब एक बहुत गहरी बात समझिए। पहला 1 लाख इसलिए कठिन नहीं होता क्योंकि वह बड़ी रकम है बल्कि इसलिए कठिन होता है क्योंकि उस समय तक आपका [संगीत] पैसा अकेला काम कर रहा होता है। कल्पना कीजिए आप एक भारी गाड़ी [संगीत] को धक्का दे रहे हैं। शुरुआत में पूरी ताकत लगाने के बाद भी गाड़ी मुश्किल से कुछ इंच आगे बढ़ती है। उस समय आपको लगता है शायद यह कभी चलेगी ही नहीं। [संगीत] लेकिन जैसे ही गाड़ी चलना शुरू करती है उसे आगे बढ़ाने में पहले जितनी ताकत नहीं लगती। यही नियम पैसे पर भी लागू
होता है। शुरुआत में आपकी हर बचत, हर निवेश, [संगीत] हर सही फैसला बहुत छोटा दिखाई देता है। लेकिन धीरे-धीरे यही फैसले एक दूसरे के ऊपर बनते [संगीत] जाते हैं। फिर एक दिन ऐसा आता है जब आपका अनुभव, आपकी आदतें, आपका अनुशासन और आपका पैसा चारों मिलकर आपके लिए काम करने लगते हैं। यहीं से खेल बदलता है। अब आप सिर्फ मेहनत से नहीं कमाते। आप बेहतर फैसलों से कमाते हैं। अब हर अतिरिक्त आय खर्च नहीं होती। [संगीत] उसका एक हिस्सा संपत्ति बनता है। अब आपका ध्यान दिखावे पर नहीं [संगीत] विकास पर होता है। यही वह मोड़
है जहां आम इंसान और आर्थिक [संगीत] रूप से सफल इंसान के रास्ते अलग हो जाते हैं। लेकिन यहां एक ऐसी गलती होती है जो लाखों लोग कर बैठते हैं। जैसे ही उनके पास थोड़ी बचत [संगीत] होती है। वे अपनी जीवन शैली बदलने लगते हैं। थोड़ी आय बढ़ी तो खर्च उससे पहले बढ़ गया। थोड़ा बोनस मिला तो नई खरीदारी शुरू, [संगीत] थोड़ी सफलता मिली तो दिखावा भी शुरू और यहीं उनकी आर्थिक यात्रा फिर से शून्य पर लौट आती है। याद रखिए अमीर बनने से पहले अमीर दिखने की कोशिश सबसे महंगी गलती होती है। दुनिया आपकी कार
देखेगी। आपके कपड़े [संगीत] देखेगी। आपका फोन देखेगी। लेकिन आपका बैंक बैलेंस, आपकी निवेश [संगीत] की आदत और आपकी आर्थिक सुरक्षा उन्हें कभी दिखाई नहीं देगी। इसलिए [संगीत] दूसरों को प्रभावित करने के लिए खर्च किया गया पैसा आपके भविष्य से चुराया गया पैसा होता है। सच्चा धन वह नहीं जो लोग देख लें। सच्चा धन वह है जो आपको किसी भी कठिन समय में झुकने ना दे। यही कारण है कि जिन लोगों ने पहला 1 लाख बनाया उन्होंने अक्सर अपनी सबसे बड़ी जीत चुपचाप हासिल की। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बचत नहीं दिखाई। उन्होंने अपने सपनों को
दिखावे से बड़ा रखा। लेकिन कहानी का सबसे रोमांचक हिस्सा अभी बाकी [संगीत] है। क्योंकि पहला 1 लाख बनने के बाद भी हर कोई अमीर नहीं बनता। कुछ लोग वहीं रुक जाते हैं। [संगीत] जबकि कुछ लोग उसी 1 लाख को ऐसी मशीन में बदल देते हैं जो समय के साथ लगातार धन पैदा करती रहती है। आखिर वे ऐसा क्या करते हैं जो बाकी लोग नहीं कर पाते। अगले अध्याय में हम उस रहस्य को समझेंगे जहां मेहनत से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है सिस्टम। और यही सिस्टम तय करता है कि आपका पैसा हमेशा आपके काम करेगा या
पूरी जिंदगी आपको ही पैसे के लिए काम करना पड़ेगा। अध्याय तीन अमीर लोग ज्यादा मेहनत नहीं करते। वे अपने पैसों के लिए एक सिस्टम बनाते हैं। अगर आज मैं आपसे एक सवाल पूछूं, मान लीजिए आपके पास पहला ₹1 लाख जमा हो चुके हैं। अब आपके सामने दो रास्ते हैं। पहला आप उसी तरह नौकरी करते रहें, कमाते रहें, खर्च चलाते [संगीत] रहें और जो बचे उसे बचाते रहें। दूसरा आप ऐसा सिस्टम बनाना शुरू करें जहां हर महीने आपकी कमाई का एक हिस्सा बिना किसी बहस के सीधे आपकी संपत्ति में बदल जाए। आप कौन सा रास्ता चुनेंगे?
ज्यादातर लोग पहला रास्ता चुनते हैं क्योंकि वह आसान लगता है। उन्हें लगता है कि जब आय बढ़ेगी तब निवेश करेंगे। जब जिम्मेदारियां कम होंगी तब बचत करेंगे। जब सही समय [संगीत] आएगा तब शुरुआत करेंगे। लेकिन सच्चाई यह है सही समय कभी नहीं आता। सही समय बनाया जाता है। यही वह अंतर है जो एक साधारण कमाने वाले इंसान और एक धन बनाने वाले इंसान के बीच होता है। ध्यान से सोचिए अगर हर महीने आर 500 कमाने वाला व्यक्ति आर [संगीत] 5000 बचाता है और दूसरा व्यक्ति आर एस 300 कमाकर भी आर000 निवेश कर देता है तो
कुछ वर्षों बाद आगे कौन होगा? ज्यादातर [संगीत] लोग पहली नजर में पहले व्यक्ति का नाम लेंगे। लेकिन वास्तविकता दूसरी है। धन हमेशा बड़ी आय का नहीं बेहतर आदतों का पुरस्कार देता है। यहीं से सिस्टम की शुरुआत होती है। सिस्टम का मतलब केवल निवेश करना नहीं है। सिस्टम का मतलब है [संगीत] ऐसे नियम बनाना जिन्हें आपको हर महीने दोबारा सोचने की जरूरत ही ना पड़े। क्योंकि इंसान का दिमाग हर दिन सही फैसला नहीं ले सकता। कभी मन करेगा कभी नहीं करेगा। कभी लगेगा बचत कर लेते हैं, कभी लगेगा इस महीने छोड़ देते हैं। अगर आपका भविष्य
हर दिन के मूड पर निर्भर है तो वह कभी सुरक्षित नहीं होगा। इसीलिए सफल लोग अपने व्यवहार पर भरोसा नहीं करते। वे अपने सिस्टम पर भरोसा करते हैं। वे पहले से तय कर लेते हैं। कमाई आएगी तो उसका एक हिस्सा सीधे बचत और निवेश में जाएगा। जो पैसा पहले अलग हो गया वही भविष्य बनता है। जो पैसा बचने का इंतजार करता है वह अक्सर कभी बचता ही नहीं। अब एक छोटी सी कहानी सुनिए। दो दोस्त थे दोनों ने एक ही कंपनी में एक साथ नौकरी शुरू की। दोनों की सैलरी लगभग बराबर थी। पहले दोस्त ने
सोचा जब ज्यादा कमाऊंगा तब बचत करूंगा। दूसरे दोस्त ने सोचा [संगीत] जो भी कमाऊंगा उसका एक हिस्सा पहले अपने भविष्य को दूंगा। 5 साल [संगीत] बीत गए। पहले दोस्त की सैलरी ज्यादा थी, लेकिन उसका खर्च उससे भी तेज बढ़ चुका था। दूसरे दोस्त की सैलरी [संगीत] थोड़ी कम थी, लेकिन उसके पास बचत भी थी, निवेश भी था और सबसे बड़ी बात आत्मविश्वास था। क्यों? क्योंकि उसने पैसे का इंतजार नहीं किया। उसने आदत बना ली। याद रखिए आदतें हमेशा आय से बड़ी होती हैं। आय आपको पैसा देती है। आदतें उस पैसे को टिकाती हैं [संगीत] और
सिस्टम उसे बढ़ाता है। यही एक और गलती होती है। कुछ लोग पहला 1 लाख बनने के बाद खुद को सफल मान लेते हैं। वे सोचते हैं अब तो मैं सुरक्षित हूं। लेकिन धन की दुनिया में रुकना धीरे-धीरे पीछे जाने जैसा है। [संगीत] क्योंकि महंगाई कभी नहीं रुकती। समय कभी नहीं रुकता। और अवसर भी किसी का इंतजार नहीं करते। इसलिए पहला 1 लाख अंत नहीं है। यह तो सिर्फ पहला इंजन है जिसे अब लगातार शक्ति देते रहना होगा। आपने शायद देखा होगा एक हवाई जहाज उड़ान भरते समय सबसे ज्यादा ईंधन खर्च करता है। [संगीत] लेकिन एक
बार जब वह आसमान में पहुंच जाता है तो वही सफर पहले से कहीं आसान हो जाता है। पहला 1 लाख भी उसी उड़ान की तरह है। उसे बनाने में सबसे ज्यादा अनुशासन लगता है। लेकिन उसके बाद अगर आपका सिस्टम मजबूत है तो आपकी प्रगति की रफ्तार बदलने लगती [संगीत] है। अब सवाल यह नहीं रह जाता कि मैं कितना कमाता हूं। सवाल यह बन जाता है मेरे कमाए हुए पैसों में से कितना [संगीत] मेरे लिए काम कर रहा है और जिस दिन यह सवाल आपकी सोच का हिस्सा बन जाता है उसी दिन आपकी आर्थिक यात्रा एक
नए स्तर पर पहुंच जाती है लेकिन यहां एक ऐसी मानसिक कमजोरी छिपी होती है जो सबसे अनुशासित इंसान को भी रास्ते से भटका सकती है। एक ऐसी कमजोरी जो लोगों से उनकी वर्षों की बचत छीन लेती है बिना उन्हें एहसास हुए अगले अध्याय में हम उस अदृश्य दुश्मन का सामना करेंगे। लालच, दिखावा और तात्कालिक सुख की वह आदत जो करोड़ों [संगीत] लोगों को पहला 1 लाख बनाने से ठीक पहले रोक देती। अध्याय चार सबसे बड़ा दुश्मन गरीबी नहीं। तात्कालिक सुख की लत है। जरा एक पल के लिए अपने पिछले 1 महीने के खर्चों के बारे
में सोचिए। ऐसी कितनी चीजें थी जिनकी आपको वास्तव में जरूरत थी? और ऐसी कितनी चीजें थी जिन्हें आपने सिर्फ इसलिए खरीद लिया क्योंकि उस समय वे अच्छी लग रही थी। [संगीत] अगर हम ईमानदारी से जवाब दें तो हमें पता चलेगा कि हमारी जेब [संगीत] अक्सर जरूरतों से नहीं भावनाओं से खाली होती है। जब हम खुश होते हैं तो खुद को इनाम देने के लिए खर्च करते हैं। जब हम दुखी होते हैं तो खुद को बेहतर महसूस कराने के लिए खर्च करते हैं। जब हम तनाव में होते हैं तो खरीदारी करके कुछ मिनटों की खुशी ढूंढते
हैं। और जब हम दूसरों को कुछ नया खरीदते देखते हैं तो हमें भी वही चाहिए होता है। यानी पैसा कमाने की लड़ाई से पहले हमें अपने मन को समझने की लड़ाई जीतनी [संगीत] पड़ती है। यही कारण है कि आज की दुनिया में कंपनियां सिर्फ उत्पाद नहीं बेचती। वे आपकी भावनाएं खरीदती हैं। वे जानती हैं अगर इंसान को यह महसूस करा दिया जाए कि यह चीज तुम्हारी जिंदगी बदल देगी तो वह बिना ज्यादा सोचे पैसा खर्च कर देगा। सोचिए कितनी बार आपने कोई चीज खरीदने के बाद कुछ दिनों में उसका उत्साह खो दिया। पहले दिन बहुत
खुशी। दूसरे दिन थोड़ा कम। एक हफ्ते [संगीत] बाद वह सामान्य लगने लगती है। एक महीने बाद आपकी नजर किसी नई चीज पर चली जाती है। इसे ही मनोविज्ञान में क्षणिक संतुष्टि कहा जाता है। दिमाग नई चीजों का आदि है। [संगीत] उसे हमेशा अगली खुशी चाहिए। लेकिन धन बनाने का नियम बिल्कुल उल्टा है। धन उन लोगों के पास जाता है जो आज की छोटी खुशी को [संगीत] कल की बड़ी आजादी के लिए छोड़ सकते हैं। यही वजह है कि पहला 1 लाख सिर्फ बैंक बैलेंस नहीं बनाता। वह आपके चरित्र का निर्माण करता है। अब एक और
दृश्य की कल्पना कीजिए। दो दोस्त हैं। दोनों को आज से 25,000 का बोनस मिलता है। पहला दोस्त तुरंत नया फोन खरीद लेता है। कुछ दिनों तक लोग उसकी तारीफ करते हैं। उसे अच्छा महसूस होता है। लेकिन 6 महीने बाद वह फोन पुराना लगने लगता है। दूसरा दोस्त उसी बोनस को अपनी बचत और निवेश में जोड़ देता है। शुरुआत में कोई उसकी तारीफ नहीं करता। कोई सोशल मीडिया पोस्ट नहीं बनती। [संगीत] कोई दिखावा नहीं होता। लेकिन 5 साल बाद पहले दोस्त के पास यादें हैं, दूसरे दोस्त के पास विकल्प हैं। और जिंदगी में यादों से ज्यादा
ताकत विकल्पों की होती है। जब आपके पास पैसा होता है तो आप मजबूरी में फैसले नहीं लेते। आप चुनते हैं। आपके पास समय चुनने की आजादी होती है। काम चुनने की आजादी होती है। [संगीत] जीवन जीने का तरीका चुनने की आजादी होती है। यही असली अमीरी है। लेकिन अफसोस ज्यादातर लोग इस आजादी को कुछ मिनटों की खुशी के बदले बेच देते हैं। अब एक सवाल खुद से पूछिए। क्या आपने [संगीत] कभी किसी ऐसी चीज पर RS 10,000 या RS 20,000 खर्च किए हैं जो आज आपके किसी काम की नहीं है? अगर जवाब हां है तो
दुखी मत होइए। लगभग हर सफल इंसान ने यह गलती की है। फर्क सिर्फ इतना है कि उन्होंने उस गलती से सीख लिया। उन्होंने समझ लिया कि हर खर्च सिर्फ जेब से पैसा नहीं निकालता। वह आपके भविष्य से भी कुछ छीन लेता है। याद रखिए हर बार जब आप किसी अनावश्यक चीज पर पैसा खर्च करते हैं तो आप सिर्फ वह रकम नहीं खोते। आप उस रकम का भविष्य भी खो देते हैं। यानी जो पैसा आगे चलकर और पैसा बना सकता था, वह वहीं समाप्त हो जाता है। यहीं से समझदार लोग एक नया नियम अपनाते हैं। वे
हर खरीदारी से पहले खुद से केवल एक सवाल पूछते हैं। क्या यह चीज मेरे जीवन की गुणवत्ता बढ़ाएगी या सिर्फ कुछ दिनों का उत्साह देगी? [संगीत] अगर जवाब सिर्फ उत्साह है तो वे रुक जाते हैं और यही [संगीत] रुकना आगे चलकर उन्हें बहुत आगे पहुंचा देता है। अब आप शायद समझने लगे होंगे कि पहला 1 लाख कमाने की असली चुनौती कम कमाई [संगीत] नहीं बल्कि सही फैसले हैं। क्योंकि पैसा हमेशा उस इंसान के पास टिकता है जो अपनी भावनाओं का मालिक होता है। लेकिन अभी भी एक आखिरी रहस्य बाकी है। एक ऐसा सिद्धांत जिसे समझने
के बाद आपको एहसास होगा कि पहला 1 लाख सिर्फ एक लक्ष्य नहीं था बल्कि वह दरवाजा था जिसके बाद आपकी पूरी आर्थिक जिंदगी की रफ्तार बदल सकती है और यही वह सिद्धांत है [संगीत] जिसने साधारण लोगों को असाधारण संपत्ति बनाने की ताकत दी। अगले और अंतिम अध्याय में हम जानेंगे कि क्यों पहला आर्य से [संगीत] एक कानाजी सिर्फ शुरुआत है और उसके बाद पैसा किस तरह धीरे-धीरे आपके लिए काम कर है जबकि आप अपनी जिंदगी को पहले से कहीं ज्यादा आजादी के साथ जीना शुरू कर देते हैं। अध्याय पांच पहला 1 लाख अंत नहीं आपकी
आर्थिक आजादी की पहली सीढ़ी है। अगर आप इस सफर में यहां तक पहुंच चुके हैं तो अब मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं। [संगीत] मान लीजिए आज सुबह जब आपकी आंख खुली और आपने अपना बैंक बैलेंस देखा तो उसमें ठीक आर एस एंजाई हजार पड़े थे। अब सोचिए क्या सिर्फ इस रकम को देखकर आपकी जिंदगी बदल जाएगी शायद नहीं। क्योंकि असली बदलाव उस रकम में नहीं बल्कि उस इंसान में है जो इस रकम तक पहुंचा है। यही वह सच्चाई है जिसे अधिकांश लोग कभी समझ ही नहीं पाते। [संगीत] वे सोचते हैं पहला 1 लाख
उनका लक्ष्य है। लेकिन वास्तविकता यह है पहला 1 लाख तो उस इंसान का प्रमाण है जिसने खुद पर नियंत्रण करना सीख लिया है। उसने अपनी इच्छाओं को हराना सीख लिया। उसने आज के बजाय भविष्य को चुनना सीख लिया। उसने दूसरों को प्रभावित करने के बजाय अपने भविष्य को सुरक्षित करना सीख लिया और सबसे बड़ी बात उसने यह समझ लिया कि पैसा मेहनत से कमाया जाता है। [संगीत] लेकिन संपत्ति अनुशासन से बनती है। यही कारण है कि पहला 1 लाख इतना महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बाद आपके पास सिर्फ पैसा नहीं होता। आपके पास अनुभव होता है।
आप जानते हैं कैसे बचत करनी है, कैसे अनावश्यक खर्च रोकना है, कैसे सही निर्णय लेना है और कैसे भावनाओं के बजाय [संगीत] तर्क के आधार पर पैसा संभालना है। याद रखिए धन कभी अचानक नहीं बनता। वह छोटे-छोटे सही फैसलों का परिणाम होता है जो वर्षों तक लगातार दोहराए जाते हैं। आज दुनिया जिन लोगों को सफल कहती है उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी आय नहीं थी। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी निरंतरता थी। वे हर महीने थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ते [संगीत] रहे। जब लोग उनका मजाक उड़ा रहे थे। वे फिर भी बचत कर रहे थे। जब लोग दिखावे
में पैसा खर्च कर रहे थे। [संगीत] वे अपनी संपत्ति बना रहे थे। जब लोग कह रहे थे जिंदगी का क्या भरोसा तब वे कह रहे थे भविष्य भी मेरी जिंदगी का ही हिस्सा है। [संगीत] यही सोच उन्हें भीड़ से अलग करती है। अब एक आखिरी उदाहरण समझिए। कल्पना कीजिए। दो लोग एक ही दिन एक लंबी यात्रा पर निकलते हैं। पहला व्यक्ति हर 5 किलोमीटर बाद रुक जाता है। कभी थक कर, [संगीत] कभी बहाना बनाकर, कभी रास्ता बदलकर। दूसरा व्यक्ति धीरे चलता है लेकिन रुकता नहीं। एक दिन, 2 दिन, एक महीना, [संगीत] एक साल और फिर
अचानक दोनों के बीच की दूरी इतनी बढ़ जाती है कि पहला व्यक्ति सोच भी नहीं पाता। यह कैसे हुआ? यही धन का नियम है। धन तेज भागने वालों के पास नहीं जाता। धन लगातार चलते रहने वालों के पास जाता है। अगर आप हर महीने हर परिस्थिति में [संगीत] थोड़ा सा भी अपने भविष्य में निवेश करते हैं तो समय धीरे-धीरे आपका सबसे शक्तिशाली साथी बन जाता है। और जिस दिन समय आपका साथी बन गया उस दिन आपको हर चीज के लिए [संगीत] दोगुनी मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। क्योंकि आपका अनुशासन, आपकी आदतें और आपकी बनाई हुई संपत्ति
तीनों मिलकर आपके लिए काम करना शुरू कर देंगे। लेकिन एक बात हमेशा याद रखिए जब आपका पहला 1 लाख पूरा हो जाए तो रुकिए मत। उसे अपनी मंजिल मत समझिए। उसे अपना पहला सैनिक समझिए जो आपके लिए आगे और सैनिक लेकर आएगा। फिर दूसरा 1 लाख पहले से थोड़ा आसान लगेगा। तीसरा उससे भी आसान [संगीत] और धीरे-धीरे आप महसूस करेंगे कि जिस रकम को कभी आपने असंभव समझा था, वह अब आपकी नई शुरुआत बन चुकी है। क्योंकि [संगीत] धन का सबसे बड़ा रहस्य यह नहीं है कि आपके पास कितना पैसा है। सबसे बड़ा रहस्य यह
है कि आपका पैसा हर साल हर महीने हर दिन आपके लिए कितना काम कर रहा है और शायद आज इस पूरी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है। अगर आपका बैंक बैलेंस अभी छोटा है तो निराश मत होइए। हर विशाल इमारत एक ईंट से शुरू हुई थी। हर विशाल वृक्ष एक छोटे बीज [संगीत] से शुरू हुआ था। हर करोड़पति कभी शून्य पर खड़ा था और हर पहला 1 लाख कभी सिर्फ पहला अरस्थांद्रो था। इसलिए अपने सफर की तुलना किसी और की मंजिल से मत कीजिए। बस इतना सुनिश्चित कीजिए कि आज का आपका कदम कल से
बेहतर हो क्योंकि आर्थिक स्वतंत्रता एक दिन में नहीं मिलती। वह हर दिन लिए गए सही फैसलों का पुरस्कार होती है। हो सकता है कुछ साल बाद जब आप पीछे मुड़कर आज के इस दिन को देखें तो आपको एहसास हो कि आपकी जिंदगी बदलने की शुरुआत [संगीत] उस दिन नहीं हुई थी जब आपके खाते में पहला आर एस 61000 आया था। वह शुरुआत आज हुई थी। जब आपने यह निर्णय लिया कि [संगीत] अब से पैसा सिर्फ कमाना नहीं है। पैसे को अपने लिए काम पर भी लगाना है। और यकीन मानिए जिस दिन यह निर्णय आपके भीतर
सच बन जाता है। उसी दिन आपकी आर्थिक आजादी की उलटी गिनती शुरू हो जाती है। अगर इस पूरी यात्रा में आपको सिर्फ एक बात याद रखनी हो तो वह यह होनी चाहिए कि अमीर बनने की शुरुआत ज्यादा पैसा कमाने से नहीं बल्कि अपने पैसों को सही दिशा देने से होती है। पहला 1 लाख सिर्फ एक लक्ष्य नहीं है। यह उस इंसान की पहचान है जिसने खुद पर जीत हासिल कर ली है। और जब इंसान खुद पर जीत जाता है तब दुनिया की कोई भी चुनौती उसे ज्यादा समय तक रोक नहीं सकती। आज इस वीडियो को
बंद करने से पहले खुद से सिर्फ एक वादा कीजिए। चाहे आपकी कमाई कितनी भी हो, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हो, आप हर महीने अपने भविष्य के लिए कुछ ना कुछ जरूर बचाएंगे। क्योंकि एक दिन यही छोटी-छोटी रकम मिलकर आपकी सबसे बड़ी ताकत बनने वाली है। हो सकता है आज आपकी शुरुआत छोटी हो। लेकिन याद रखिए इतिहास हमेशा बड़े कदमों से नहीं [संगीत] लगातार उठाए गए छोटे कदमों से लिखा जाता है। अगर आपको यह ऑडियो बुक पसंद आई [संगीत] हो और इससे आपकी सोच में थोड़ा भी बदलाव आया हो तो इसे उन लोगों के साथ जरूर
साझा करें जो अपने भविष्य [संगीत] को बेहतर बनाना चाहते हैं और अगर आप ऐसी ही ज्ञानवर्धक और जीवन बदल देने वाली ऑडियो बुक्स सुनना चाहते हैं तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें और नोटिफिकेशन बेल जरूर ऑन कर लें ताकि अगली बार जब हम किसी नई किताब या नए विचार के साथ आए तो आप सबसे पहले उसका हिस्सा बने। में याद रखिए पहला 1 लाख आपके बैंक खाते में बनने से पहले आपके दिमाग में बनता है। अपने सपनों पर विश्वास रखिए। अपने अनुशासन को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाइए और हर दिन अपने भविष्य की
तरफ एक छोटा सा कदम बढ़ाइए। मैं आपसे फिर मिलूंगा एक नई किताब, एक नई सोच और एक नए सफर के साथ। तब तक सीखते [संगीत] रहिए, बढ़ते रहिए और अपने पैसों को सिर्फ कमाइए मत। उन्हें अपने लिए काम करना भी सिखाइए।