हर साल लाखों इन्वेस्टर्स एक सिंपल बट कॉस्टली मिस्टेक करते हैं। वो मार्केट से प्रॉफिट कमा लेते हैं पर उसका एक बहुत बड़ा चंक टैक्स में लूज करते हैं। मजाक नहीं कर रही हूं। सिर्फ एफआई 23 में ही इंडिया के 8. 5 करोड़ लोगों ने गेस करो कितना कैपिटल गस टैक्स दिया होगा सरकार को। लगभग 2 लाख करोड़। मतलब अगर रफली देखें तो हर टैक्स फाइलर पर एवरेज 20,000 के आसपास कैपिटल गेंस टैक्स बैठता है और इसमें से काफी टैक्स ऐसा होता है जो लीगली ऑप्टिमाइज या अवॉइड किया जा सकता था अगर इन्वेस्टर्स को टैक्स हार्वेस्टिंग जैसा सिंपल कांसेप्ट पता होता। नाउ व्हाट इफ आई टेल यू इसी टैक्स हार्वेस्टिंग की मदद से मैंने 78,000 तक का टैक्स बचाया। और अगेन यह कोई लूप होल नहीं है। यह गवर्नमेंट का दिया हुआ लीगल रूल है। और इस स्टेप का फायदा सिर्फ टैक्स बचाने तक लिमिटेड नहीं है। इससे आप उन स्टॉक्स या म्यूच्यूअल फंड्स को भी पोर्टफोलियो से निकाल सकते हो जो काफी टाइम से पड़े हैं। लेकिन आपके पोर्टफोलियो में कोई खास वैल्यू ऐड नहीं कर रही। दोस्तों, अगर हम सिर्फ ब्लाइंडली इन्वेस्ट करते रहेंगे, तो मार्केट के हर गेन पर बस टैक्स ही भरते रहेंगे। लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग जरूरी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अगर 5 साल के लिए पैसा इन्वेस्ट कर दिया तो 5 साल बाद ही पोर्टफोलियो खोल के देखेंगे। हर साल मार्च से पहले गवर्नमेंट हमें एक मौका देती है पोर्टफोलियो को ऑप्टिमाइज करने का। तो क्यों ना उसका फायदा उठाया जाए। इसीलिए टैक्स हार्वेस्टिंग समझना हर इन्वेस्टर के लिए बेहद जरूरी है। और अगर आपको इसे प्रॉपर्ली समझना है तो दिस इज द ओनली वीडियो फॉर यू। क्योंकि इसमें हमने टैक्स हार्वेस्टिंग के चारों प्रैक्टिकल केसेस कवर किए हैं। इक्विटी, म्यूच्यूल फंड्स, एफएओ और इक्विटी प्लस म्यूच्यूल फंड का कॉम्बिनेशन। कोई सिर्फ इक्विटी में इन्वेस्ट करता है, कोई सिर्फ म्यूच्यूल फंड्स में, कोई दोनों का मिक्स रखता है और कुछ लोग एफएओ में भी ट्रेड करते हैं। अच्छी बात यह है इन सभी केसेस में कुछ ऐसे फार्मूलाज़ होते हैं जिनका यूज करके टैक्स बचाया जा सकता है। आप टाइम स्टैंप्स के थ्रू डायरेक्टली उस सेक्शन पर जंप कर सकते हैं जो आपके इन्वेस्टमेंट से रेलेवेंट है। हमने हर टाइप को सेक्शन में बांट दिया है। जैसे अगर मुझे म्यूच्यूल फंड प्लस इक्विटी का देखना है तो आई विल वॉच सेक्शन वन प्लस टू और उसके साथ सेक्शन थ्री ऑफ़ टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग भी देखूंगी। अगर मैं सिर्फ एफएनओ में ट्रेड करती हूं तो मैं सीधा सेक्शन फोर देखूंगी और अगर आप मल्टीपल इन्वेस्टमेंट्स में इन्वेस्ट करते हैं तो पूरी वीडियो फॉलो करना यूज़फुल रहेगा। बस एक रिक्वेस्ट व्हाट कैन गो रॉन्ग इन टैक्स हार्वेस्टिंग वाला पार्ट जरूर देखना क्योंकि वो सारे टाइप के इन्वेस्टर्स के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। तो चलिए शुरू करते हैं विथ योर होस्ट स्वाति लेट्स गेट स्टार्टेड। सबसे पहले क्विकली समझ लेते हैं कैपिटल गेंस। अगर स्टॉक मार्केट में प्रॉफिट हुआ है और आपने उस इन्वेस्टमेंट को 12 महीने से कम होल्ड करके बेचा तो एसटीसीजी लगेगा मतलब 20% 12 महीने से ज्यादा होल्ड करके बेचा तो एलटीसीजी लगेगा 12% लॉस का रूल भी सिंपल है शॉर्ट टर्म लॉस शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों गेंस के अगेंस्ट एडजस्ट हो सकता है लेकिन लॉन्ग टर्म लॉस सिर्फ लॉन्ग टर्म गेंस के अगेंस्ट ही एडजस्ट होता है। तो इतना समझ आ गया? अब हम चारों टाइप के इन्वेस्टमेंट देखते हैं। सेक्शन वन इज़ इक्विटी इन्वेस्टमेंट। इक्विटी में आप दो तरीके से इन्वेस्ट कर सकते हो। एक हुआ डायरेक्ट स्टॉक्स में, दूसरा हुआ इक्विटी म्यूचल फंड्स में। अब मान लीजिए आपने 5 लाख एक अच्छी कंपनी या इक्विटी म्यूचल फंड में इन्वेस्ट किया। आप पूरे 5 साल इन्वेस्टेड रहते हो। मार्केट ग्रो करता है। कंपनी परफॉर्म करती है। हर साल रफ्ली 1.
5 लाख के आसपास वैल्यू इनक्रीस होती रहती है। अब 5 साल बाद आप पोर्टफोलियो चेक करते हैं। 5 लाख की वैल्यू हो चुकी है 12. 5 लाख। मतलब टोटल लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कितना हुआ? 7.
5 लाख। अब यहां से दो सिनेरियोस निकल कर आते हैं। सिनेरियो वन में आप टैक्स हार्वेस्टिंग नहीं करते हो और सिनेरियो टू में करते हो। तो सबसे पहले सिनेरियो वन देखते हैं। आपने 5 साल कुछ नहीं किया। मतलब बस 5 साल इन्वेस्ट किया और पूरा इन्वेस्टमेंट फिफ्थ ईयर में सेल कर दिया। यहां पे टोटल लॉन्ग टर्म गेन कितना बना? 7. 5 लाख। सेक्शन 112 ए के अंदर ₹1,25,000 का एलटीसीजी टैक्स फ्री मिलता है। तो 75 लाख में से 12,25,000 गया तो 6,25,000 टैक्सेबल बचा। इस पर 12.
5% टैक्स लगेगा। रफ्ली हुआ 78,125 मतलब सीधा 78,000 तक का टैक्स चला गया। प्रॉब्लम क्या हुई? आपने 5 साल इन्वेस्ट किया लेकिन 1. 25 लाख का एक्सेंपशन का बेनिफिट सिर्फ एक ही साल लिया। बाकी चार साल जो 1.
25 लाख का एक्सेंपशन मिल सकता था वो यूज़ ही नहीं हुआ। प्लानिंग नहीं थी इसलिए टैक्स अननेसेसरी चला गया। अब सिनेरियो टू देखते हैं जिसमें आप डिसिप्लिंड थे। आप हर फाइनेंसियल ईयर के एंड में अपना एलटीसीजी चेक करते हैं। जितना गेन 1. 25 लाख के अंदर होता है, उतना बुक कर लेते हैं। यूनिट सेल करते हैं, गेन रियलाइज़ करते हैं और फिर सेम इन्वेस्टमेंट वापस ले लेते हैं। हर साल 1 25 लाख टैक्स फ्री। 5 साल यह रूल फॉलो किया तो 6. 25 लाख गेन कंप्लीटली टैक्स फ्री हो गया। फिफ्थ ईयर के एंड में जो थोड़ा सा रिमेनिंग गेन बचता है वो भी एक्सेंपशन के अंदर आ जाता है। रिजल्ट टैक्स ज़ीरो। अब कंपेयर कीजिए। सेम 5 लाख, सेम 5 साल एक इन्वेस्टर ने 78,000 टैक्स दिया। दूसरे ने ऑलमोस्ट कुछ नहीं। डिफरेंस मार्केट का नहीं था। डिफरेंस प्लानिंग का था। यह ट्रेडिंग नहीं थी। यह पोर्टफोलियो चेंज नहीं था। यह सिर्फ सेक्शन 112A का स्मार्ट यूज़ था। और सोचिए अगर यह हैबिट 10 साल तक फॉलो हो जाए तो इंपैक्ट कितना बड़ा हो सकता है। यही है टैक्स गेन हार्वेस्टिंग की रियल पावर। तो यहां हम म्यूच्यूल फंड्स के टैक्स हार्वेस्टिंग की बात करेंगे। अब म्यूच्यूल फंड इन्वेस्टर्स के लिए टैक्स हार्वेस्टिंग का कांसेप्ट और भी इंटरेस्टिंग है। स्पेशली अगर आप एसआईपी कर रहे हैं। सोचिए आप 5 साल से हर महीने 10,000 के एसआईपी कर रहे हैं। एक इक्विटी म्यूच्यूल फंड में। हर महीने अलग एनएवी पर यूनिट्स ली हैं। कभी 40 पर, कभी 60 पर, कभी 80। आज एनवी मान लो 140 है। मतलब आपके पोर्टफोलियो में डिफरेंट परचेस प्राइसेस पर यूनिट्स का मिक्स है। और नेचुरली सबसे पुरानी एसआईपी यूनिट्स में सबसे ज्यादा गेन भी होगा। अब मान लीजिए टोटल लॉन्ग टर्म अनरियलाइज्ड गेन 1.
3 लाख का है। स्मार्ट इन्वेस्टर क्या करेगा? फाइनेंसियल ईयर खत्म होने से पहले उतनी यूनिट्स रिडीम करेगा जिससे 1. 25 लाख का लॉन्ग टर्म गेन रियलाइज हो जाए। बस उतना ही पूरा फंड रिडीम नहीं करेगा। सिर्फ उतना जितना एक्सेंपशन कवर करे। फिर अगर लॉन्ग टर्म इन्वेस्टेड रहना है तो सेम अमाउंट वापस इन्वेस्ट कर देगा। यह है प्रैक्टिकल हार्वेस्टिंग। लेकिन यहां एक चीज समझना बहुत जरूरी है। एफआईएफओ मतलब फर्स्ट इन फर्स्ट आउट। सिस्टम सबसे पहले आपकी पुरानी एसआईपी यूनिट्स को सोल्ड मानता है। और यह आपके फेवर में होता है। क्योंकि पुरानी यूनिट्स के होल्डिंग पीरियड 12 महीने से ज्यादा होता है। इसलिए वो लॉन्ग टर्म कैटेगरी में आती हैं। लेकिन ब्लाइंडली रिडेंशन मत कीजिए। रिडेंपशन से पहले बस एक बार परचेस डेट्स, होल्डिंग पीरियड और एनीवी डिफरेंस चेक कर लीजिए। यही तीन चीज पूरा कैलकुलेशन डिसाइड करती है। और यह सब चेक करना मुश्किल नहीं है। आप अगर एंजल वन जैसे प्लेटफार्म पर इन्वेस्ट करते हैं तो आप अपनी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री में क्लियरली देख सकते हैं कि कौन सी यूनिट्स किस एनएवी पर खरीदी गई थी। हिस्टोरिकल एनएवी और परचेस डेट दोनों विज़िबल होते हैं। जैसे आप स्क्रीन पर देख सकते हैं। दोस्तों, इसी डेट के बेसिस पर हार्वेस्टिंग का डिसीजन लेना चाहिए। अगर रीसेंट एसआईपी यूनिट्स गलती से इंक्लूड हो गई है जिनका होल्डिंग पीरियड 12 महीने से कम है तो उन पर एसटीसीजी लग सकता है और पूरा कैलकुलेशन डिस्टर्ब हो सकता है। इसीलिए म्यूच्यूल फंड हार्वेस्टिंग इंपल्स डिसीजन नहीं है। यह कैलकुलेटेड रिडेंशन है। अब एक बहुत इंपॉर्टेंट क्लेरिटी यह 1.
25 लाख का एलटीसीजी एक्सेंपशन ओवरऑल इक्विटी इन्वेस्टमेंट्स के लिए होता है। आई रिपीट ओवरऑल इक्विटी इन्वेस्टमेंट। यह अलग-अलग लिमिट नहीं है। मतलब अगर आपने स्टॉक्स में ₹80,000 का लॉन्ग टर्म गेन बुक किया और म्यूच्यूल फंड्स में ₹0000 का तो टोटल ₹1,400 हो गया। इसमें से सिर्फ ₹1,25,000 टैक्स फ्री होगा। बाकी 15,000 टैक्सेबल होगा। यह कंबाइंड लिमिट पर फाइनेंसियल ईयर पर इंडिविजुअल होता है। सीधी बात याद रखिए चाहे डायरेक्ट स्टॉक्स हो या इक्विटी म्यूच्यूल फंड। सेक्शन 112A के अंडर 1. 25 लाख का एक्सेंपशन टोटल लॉन्ग टर्म गेंस पर अप्लाई होता है। जो इन्वेस्टर इसको क्लियरली समझ लेता है वो टैक्स प्लानिंग में अननेसेसरी मिस्टेक्स नहीं करता। तो यहां तक हमने प्रॉफिट में टैक्स बचाना तो सीख लिया बट असली स्मार्ट इन्वेस्टर वही है जो लॉस में भी पैसा बनाएं। नाउ कम्स द पार्ट जो इक्विटी और म्यूच्यूल फंड दोनों इन्वेस्टर के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। दैट इज़ टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग। आपके पोर्टफोलियो में कोई पॉसिबल है कि ऐसा स्टॉक हो जो बिल्कुल रिटर्न्स नहीं दे रहा हो। रादर लॉस में आपका पोर्टफोलियो ले जा रहा हो। बेसिकली अ रॉन्ग इन्वेस्टमेंट। आप इस लॉस को मार्च के पहले रिकवर कर सकते हैं। टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग से आप यह लॉस वाले इन्वेस्टमेंट से अपना टैक्स बचा सकते हो। हियर हाउ। अब मान लीजिए आपने एक स्टॉक बेचा और 2 लाख का लॉन्ग टर्म गेन रियलाइज़ किया। 12,25,000 टैक्स एक्सेंपशन हुआ। 75,000 टैक्सेबल बचा। इस पर 12.