हुआ था लुट लुट लुट यश लुट स्वाद जो पेज जो बार मिर्गी कि यह फ्रॉम विनिंग मजबूर चीफ रन लुटा में रामनाथ मिश्रा नीरज गौतम सत्यम परम मीडिया यह जो हमारा जीवन है मैं इसमें और कई बातें ऐसी होती हैं जो प्रत्यक्ष न होने पर भी वृक्ष के समान होते हैं तो हम लाउडस्पीकर देख रहे हैं इतनी स्त्रियों को देख रहें हैं इस तरह पुरुषों को देख रहे हैं तो आप लोग तो उसका इसलिए हैं कि दिखाई भरते हैं परंतु महल तक इसलिए हूं कि देख रहा हूं कि स्कूलों में पर है कि नहीं आ
कि दूसरे लोग तो था किस लिए हैं कि दिखाई पड़ते हैं परंतु मैं सच इसलिए हूं कि देख रहा हूं और भी पर बैठ करके जो देख रहा है वह तो देखा नहीं जाता है है तो क्या मैं ऐसा मैं विश्वास कर रहा हूं नहीं मैं विश्वास नहीं कर रहा हूं मैं साख और परोक्ष हूं मैं विश्वास से सिद्ध नहीं हूं आप लोग प्रत्यक्ष से सिद्ध है और तिजोरी में जो पैसा है वह करो शत्रुघ्न आप लोग सुरक्षित हैं और मैं न प्रत्यक्ष और परोक्ष हूं परंतु स्वयं अप्रूव स्थित अच्छा मैं आप लोगों को जानता
हूं और आप जाने जाते हैं तो मैं जानता हूं कि मैं किसी की बात पर विश्वास करके हूं मैं हूं यह हमारा मैं प्यार करता हूं मैं आपसे समझूंगा तो आप क्वाथ बना होना अपना जानना और अपना प्यार यह दूसरे यह बताने से इस पर विश्वास नहीं किया जाता अपनी प्रति प्यार स्वभाविक है मैं स्वभाविक रूप से जानता हूं और मैं स्वभाविक रूप से हूं इसमें दूसरे किसी की मदद की जरूरत नहीं है और इसमें इसमें विश्वास की भी कोई जरूरत नहीं है अब आपको एक दूसरी बात सुनाता ह्या आपने यह सोचा कि यह जो
जिस्म ऐसे मैं प्यार करता हूं जिस मैं के रूप में रहकर मैं जानता हूं जो मैं हूं वह मेरा मैं वह आपका मैं कितना बड़ा है उसकी लंबाई चौड़ाई कितनी है हुआ था अच्छा उस समय की उम्र कितनी है उस मैं का वजन कितना है कि नहीं तो सवाल है मैं की लंबाई चौड़ाई कितनी है कि मेडिकल उम्र कितनी कि मैं का वजन कितना तो बहुत ने कहा कि मैं की उम्र 16 और जजों ने कहा कि मैं की लंबाई चौड़ाई शरीर के बराबर हाथी के शरीर में हाथी के बराबर और मच्छर के शरीर में
मच्छर के बराबर और अपना वजन कितना बोले भाई वजन का सवाल तो जगदीश शरीर हम है सब तो उठेगा और नहीं है तो नहीं उठेगा चार ने कहा कि जितना शरीर का वजन का वजन में इस बात को पकड़ा उसने कहा कि शरीर का वजन उतना मैं और को पकड़ा उसने कहा कि इतनी ही लंबाई चौड़ाई और लंबाई चौड़ाई और को पकड़ा उसने कहा कि तो बदलता रहता है है इसलिए मै पिछड़ बदलता रहता है तो मैं खर्चा और मैं का और मैं इंचेज कि वैदिक वैदिक धर्म का यह कहना है कि मैं व होता
है जो लंबाई चौड़ाई का होना जानता है और उसका ना होना जानता है मैं व है तो वजन कम होना जानता है और ना होना जानता है और मैं व है जो कि शाहरुख खन का होना जानता है और उसका ना होना जानता है इसलिए ट्रेन स्कूल वस्तु का ज्ञाता है वह मारा मैं है अब देश काल वस्तु का ज्ञाता जो है वह मैं है तो मैं ज्ञान में ही देश-काल पत्तों का होना और न होना है इसलिए उदेश कुल वस्तु के जेम का प्रकाशन उद्देश कुल वस्तु के ज्ञान का आदि कल्पना का हिंदुस्तान देख
चांद चित्र में अध्यक्ष और इसके बिना देशकाल वस्तु की सिद्धि नहीं असल में वह अपना आत्मा निदेशालय पीड़ित है माने लंबाई चौड़ाई से उसको नाप नहीं सकते वह काला पीस है उसमें जन्म-मरण बिल्कुल नहीं है और वह कोई द्रव्य वजनी चीज नहीं है यह तो परमात्मा का यह तो परमात्मा का जो स्वरूप शास्त्रों में वर्णन किया गया है बिल्कुल वही होता है उसके सिवा यह दूसरा कुछ नहीं उठाए लेकिन मनुष्य की बुद्धि मनुष्य की इंद्रियां बाहर देखने हैं ब्रांच दिखाने व्याकरण स्वयंभू संत महंत प्रो लुट यतिनाथ रात मदन कश्यप जी रहा प्रत्यगात्मा अन्वेषण आव्रजक शुरू
अमृतत्व मिथक है इस दौरान खानी व्यक्ति लंबू परमात्मा ने जब इंद्रियों की सृष्टि की कि एक बार आप और बताओ जो लोग जुड़ सकता का नियंत्रित रूप से स्वयं भवन स्वीकार करते हैं जोड़ सप्ताह एक नियम के अनुसार परिणाम को प्राप्त होती है व्युअर्स सप्ताह को स्वयंभू मानते हैं कि नहीं हुआ स्वयंभू हमारा नाम स्वयंभू जो भूल में जुड़ सकता थी वहीं प्रपंच के रूप में बन गई तो वह स्वयं हुई कि नहीं और उसी को हमने अपनी ओर से देखा तो स्वयं प्रकाश उसका नाम हुआ कि नहीं हुआ करने की दृष्टि से उसका नाम
स्वयंप्रकाश शहद और सत्ता की दृष्टि से उसका नाम स्वयंभू है स्वयंभू बड़ी अद्भुत लीला है अ इंसान को ए सविता ने लुटा मानने पर सबसे उसमें क्या निरक्षरता रहेंगे यदि केंद्र विषय हैं तो वह सलमान ही तो है ना और निर्विघ्नं निर्विकार है तो वह तो है ना वो हैं तो असल में लोग ए पप्पु के लक्षण को ना मिला करके यह बल्क ऊपर ऊपर से वस्तु की तलाश करते हैं इसलिए यथार्थ ज्ञान नहीं होता आप खुदा शब्द का अर्थ मालूम होगा खुदा जो खुद आवेदक खुदा ए खुदा ए खुदा खुदा मानेंगे 100MB वही चीन
की दृष्टि से स्वयं प्रकार जो स्वयं प्रकाश को स्वयंभू और जो स्वयं रू100 प्रकार शुक्रवार इस तरह चेतन सत्ता और सत्ता मूड में नहीं है आप एक घी थोड़ी कर देते हैं सत्यं ज्ञानमनंतं ब्रह्म है कि पहले कहा कि पशु कैसा है प्रमाणित कैसा है मुझे सत्य हिसाब से तो जल्दी हो सकता है दैनिक जागरण ने घृणा तो ज्ञान ज्ञान ज्ञान भी हो सकता है इसलिए उसको सत्यम कहना जरूरी है तो आप चीनी स्वरूप और वस्तु से परिचित जो सत्य है जो ज्ञान है उसी को तो तत्व कहते हैं यौन शोषण भी हो सकता है
इसलिए उसको सत्यम कहना जरूरी चीज स्वरूप और से परिचय दो सत्य है जो ज्ञान है उसी को तो तत्व कहते हैं हम लोग भगवान के नाम से ईश्वर के नाम से जिस वस्तु का वर्णन करते हैं के विकास में आसमान में बैठी हुई चीज को अब ईश्वर या भगवान नहीं कहते हैं और साथ में आसमान में भी है यहां भी है और यहां से नीचे भी है एक और बात केवल रुपए में बैठे हुए भगवान को हम भगवान के बाहर हुए भगवान को भी कहते हैं कि जो लोग अपने को बहुत समझदार और अनुभवी होने
का दावा करते हैं कि यह बाहर और नाम की एक पद्घति कारण महात्मा कर रहे थे भगवान करो कि आपको यह ध्यान करो कि हम से तवा हाथ दूर और सवा हाथ ऊपर भगवान खड़े हैं और या तो यह ध्यान करो कि हमारे हृदय में भगवन बैठे हुए हैं शंख चक्र गदा पद्मधारी और मंद-मंद मुस्कराते हुए उनकी आंखों से ज्ञान की वृद्धि होती हैं और मुस्कान से आनंद की वर्षा होती हैं और उनका जो अस्तित्व स्वयं प्रकाशमान है चाहे बाहर ध्यान कर ॐ जपा कर ॐ जपा कर ॐ का यह क्या होता है कि होगा
और होगा वह बाहर ही बाहर के भगवान का मंदिर है कि पूरी और दादू पर और उसके ऊपर भगवान बनकर बैठा हुआ है और वह मन है तो उड़ गया काश में निर्भया कांड में भगवान बंद प्रकट हो रहा है तब फिर बाहर और भीतर का भीगा रहा है मैं जब मैं नहीं बाहर और भीतर कंपनी पावर और मन ही फिगर और ज्ञान उस बाहर में वीरवार लोहे ग्रुप ज्वाइन यार हम बाहर करें इधर करें इसमें अंतर कहां पड़ा यह ध्यान करें इस समय भगवान हमारे लिए प्रकट हुए और यह ध्यान करें कि 5,000 भरत
ऐसे भगवान प्रकट हुए थे 5,000 व्रत पहले भगवान मुरली बजाते हुए और मुस्कराते हुए और प्रेम भरी तौर से देखते हुए और पीतांबर ठहराते हुए और कुंभ के प्रेम भरी चाल से चलते थे ₹5000 ने और अब ध्यान करो कि इसी समय भगवान हमारे सामने प्रेम भरी चितवन से देखते हुए मंद-मंद मुस्कराते हुए हैं और पितांबर ठहराते हुए और रुड़की सुधीर व्यास करते हुए भगवान चल रहे हैं इन दोनों ने याद करूंगा इन दोनों में भूत और वर्तमान गांड दोनों ही दल में दलदल में भगवान के बयान से अभीप्राय 5,000 बरस पहले हो कि कोई
मर गया और इस समय कोई पैदा नहीं हुआ अंतरिक्ष में भगवान के ध्यान से अपने-अपने रहेगा निर्माण शीघ्र निर्माण वर्तमान भी मन में है और कुछ भी मन में गहरा ज्ञान मत करो यह सब गए हो क्या करते हो यह बिल्कुल अनजान लोग कि को अनजान लोगों को बरगलाने की बॉडी है उनको धोखाधड़ी में डालना सिर्फ इतना बनाने की गोली है जो इसका ज्ञान हम अतीत में कर रहे हैं उसमें अतिथि हमारे बयान में है और इसका ध्यान हम वर्तमान में कर रहे हैं वहां पर प्रमाण भी हमारे ध्यान में है जब कहां लिखित यानि
कही है अब गाल भी ज्ञान सही है तो 5,000 वर्ष पहले और आज मैं पर कई का इसलिए सॉन्ग दृष्टि से प्रेमपूर्ण दृष्टि से इसी समय भगवान को अपने सामने अपने सामने अनुपात अपने सामने अनुभव करने चाहिए बॉलिंग ठीक से नहीं है कई लोगों का ऐसा घाघरे में है तो प्रेम कहां कि वह अब हम आपसे पूछते हैं आप अपनी आंख की पुतली से प्रेम करते हैं कि नहीं करता है ज्योति कि आपकी आंख में जो दिल गए उससे आपका प्रेम है कि नहीं है अरे इतना बचाते हैं हाथ लगा देता मंडी भागते हैं कोई
उंगली दिखावे तो जब फलक उस पर जब लेते हैं हमारी यहां पर किरकिरी न पड़ने पर वे आपने अपनी आंख की पुतली कभी देखी थी से में देखी होगी अगर आप इसे में देखी होगी आंख की पुतली अपनी अपनी आंख से अपनी आंख की पुतली नहीं दिखाई पड़ते हैं कि यह पुस्तक मालूम पड़ता है कि झूठ बोलना पड़ता है घृत आपने कभी देखा हो तो बताइए आपने अपनी आंख की पुतली नहीं देखी अपनी आंखों में आएगी नहीं है क्यों नहीं दिखती है इसलिए नहीं दिखती है कि वह आंख से बहुत नजदीक है बता वह आंख
से इतने निकट है इतने निकट हैं इतने निकट है कि उस पर पूरे और निकट कहना बनते ही नहीं देखना जो है वह आपकी पुत्री के साथ तादात्म्य बंद हो गया है उसे एक हो गया है अब आप अपने यदि कहते हो यह बात की पुतली को नहीं देखते इसलिए हमारे आंख की पुतली नहीं है तो आप के तर्क पर आपकी व्यक्ति पर तरस जाती है आप शाहजहां और हुए रुके नहीं है जहां आप रफ हुआ था जहां आपने वहीं इस वक्त और वह इतने निकट है इतने निकट है कि जैसी आंख की पुतली को
अपनी उंगली खुले करते वहीं लिए आप आप जब भी चाक हैं तो आपके भीतर ही ईश्वर आंख की पुतली के रूप में माने आपके हाथ के नए रेल कार्य के रूप में आप के प्राण प्यारे के रूप में आपके रुष व के रूप में आप के प्राणी ईश्वर के रूप में वही परिभाषित करता है जहां में प्राप्त जाते हैं ईश्वर को ढूंढने के लिए उस श्रीमद्भागवत गीता में श्रीधर स्वामी ने एक प्रस्ताव लिया आत्मा हिल गया था कि पढ़े-लिखे एक विक्षिप्त मूर्खों की यह दशा देखें मूर्त रूप में हो और यह जाना तय था यानी
जनता की योग्यता को देखो तो हम आत्मा नंबर रम्मत वर्क प्रॉब्लम आत्मानुभव जहां तुम हो अपने प्यारे आत्मा उसको मान लिया और जो चीज है इसको लिए जा रहें हैं परमात्मा श्री कृष्ण कहते हैं यह गुझिया रात के समय सड़क नगर की रोशनी थी उसने कुछ दूर रहे थे कि मैं एक विद्यार्थी उधर से निकला कोई साधु दही वड़ा मैया क्या ढूंढ रही है मैं तेरी मदद कर दो ढूंढूं तुम बढ़िया बोलिंग की छोड़ तो सुई रही हूं सुई ढूंढ रहे दूसरे का कहां खोई थी जरा बता दो तो मैं हूं हिंदू उसने कहा कि
कोई तो घर में थी अ कि घर में कोई नहीं तो यह क्या ढूंढ रही है तो कॉलेज कर दिया नहीं है रोशनी नहीं है यहां भी रोशनी है इसलिए ढूंढने के लिए चली जाएगी नहीं इसलिए मैक्रम वाले मिलेंगे थे घर में सोचिए वह यह लोग उतर चुकी है नहीं कि यह रकम मिल जाती है वह जंगल में नहीं तो अटल पैसों के निरूपण प्रणाली कहते हैं यह-यह एंट्री का बना हुआ यह मेरा नाम और जिसका घ्र घ्र मे लुट और मी राजीव इट्स वर्क महेंद्र देगा इश्वर मैं और मेरा ईश्वर परमेश्वर है कि आपको
इतना पास इतने निकट ईश्वर बैठा हुआ है आपको मैं जब परिश्रम और सही वह शाक्तों गणपत यो यो और यह बात सुनाता हूं किसी भी मुलाकात नाथ संप्रदाय में इश्वर को अपराध नहीं माना जाता नित्य प्रात भरा जाता है यह केवल प्रमुख ज्ञान के संप्रदाय में नहीं प्रभु प्रार्थना संप्रदाय में की बात मानी जाती है कि हमारे हृदय में ही अंतर्यामी के रूप में अंतर जाने के रूप में किशोर बैठा हुआ है नित्य प्रात व्यक्ति प्रणाम कहां गए पड़ोसी से पूछने गए ईश्वर कहां है कि अब यह बात तो पड़ोसी की ईमानदारी पर गई उसने
कभी कहां हमको मालूम है कहां रखा है अब एक और चीज नहीं होती और तुम्हारे साथ हैं सुख से भय से ग्रस्त हो रहा है जन्मों चुकी है लोग उसको ईश्वर दिखाने के लिए भी अगर ग्रुप में से लुट उसको क्या इसमें आपत्ति है यदि वह उसके ह्रदय में है तो इस तरीके से में क्यों नहीं है यदि वह मनुष्य करते हैं तो पशु-पक्षी किरदार में क्यों नहीं है और जब रिएक्शन जगह में हुसैन को आप लोग बहुत बढ़िया मत समझना किसी काम रहता है में रहता है में रहता है घ्र अपने दिल को हमको
तो एक महात्मा ने बचपन में बताया था इसी से मिलना हो तो मुसाफिर खाने में ना उससे कोई यह कोई अच्छी बात नहीं है आप जानते हैं उनके लिए हैं और फिर कहते हैं कि तुम हमको मिलते हैं मैं अपने दिल को एकांत कमरा तो बताया नहीं ईश्वर से मिलने लायक प्यार करने लायक बनाया नहीं मुसाफिरखाने में इश्वर से मिलना चाहते हैं जहां यह घड़ी घड़ी काम आवेंगी घड़ी घड़ी घड़ी को दावे गढ़ि गढ़ि गढ़ि गढ़ि यह तो ऐसे ही किसी से मिलने का तरीका तो जरूर बच्चे हैं में काफी में पंक्चर जुड़े थे तो
मैं तुम्हारे काशी नरेश राम नगर के राजा उनको अपने महल में ले गए हम लोगों ने सुना शिकायत है कि उन्होंने अपने पास खानी पितृत्व वाद मे ही बाद का प्लग प्रिंटर का प्लग उन्होंने अपने इस प्रसिद्ध थे समझा जाने वाला होता है तो हम इतनी सफाई करते हैं कि मेरे सुना है कि मैंने यह उनके लिए बना हुआ है लुट जलन के नोट चलाए चाय बनाई गई बने और मामूली लकड़ी पर हम चाहते हैं कि स्वच्छता और हम अपने जीवन में चाहते हैं ईश्वर को और उसको रखना चाहते हैं मुसाफिर खाने में में ईश्वर
का मिलन हो रहा है कि विश्व तो है हम लोग ईश्वर के बारे में तीन प्रकार का सिद्धांत स्थापित करके निरूपण करते हैं कि इस वंश वृद्धि बधाई ईश्वर को मांग करके हो यह तीन सिद्धांत स्थापित करते हैं ईश्वर ने सृष्टि बनाई रॉब ईश्वर प्रतिबंध है कि दूंगा विश्वशक्ति बधाई यह पहला और ईश्वर से टीम बन गया है दूसरा और नंबर ना नंबर बनाया केवल सृष्टि के रूप में देखता भर है यह तीसरा पहले का नाम शास्त्र में आरंभ कार है इसको नया एक मानते हैं दूसरे का नाम प्रमुख परिणाम बाद है इसको सही शाक्त
व शैव मानते हैं बन गया और दूसरे का नाम विवर्त बाद है इसको शांति शांति मानते हैं परिणाम में परिणाम परिणाम परिणाम और कर्म परिणाम लगातार सुधीर विचार होते हैं कोई ईश्वर नहीं दृष्टि बनाए है तो उसकी कारीगरी देखकर के कुछ हो जाओ कैसी बढ़िया कैसी सुंदर दिन तेरे बिना अच्छी तरह की है आज तक लोगों ने उसकी कारीगरी तो बहुत देखी थी थे लेकिन नारायण पुष्प कारीगर को नहीं देखा था कि एक एक सज्जन को हमको कपड़े की मिल दिखाने के लिए ले गए थे उनके बैठने की कमरे में तरह-तरह के तितली तितली तितली
उड़ती हुई वो बोले महाराज हमने अमेरिका से भी आगे हैं कि वे काहे को बाबा इतनी तितली तुम कहां से बोल रहे हो उल्टे कपड़े की डिजाइन हम इसी को देख-देख बनाते हैं डिजाइन बनाते हैं इनको देख करके ईश्वर ने जो बयान करुण चित्रण को मोर नाचता है इश्वर की संगति साधु की दृष्टि से की तस्वीर लिखे सभी गीत जरूर जगत के चतुर चितेरे थे तो लिखने बैठ जाती थी सभी कई गर्भ क्रूर बड़ा विमान लेकर के बैठने लगे हम ईश्वर की तस्वीर बनाएंगे ईश्वर की तस्वीर बना लेंगे लेकिन भय नहीं देते जगत के चतुर
चितेरे कूर आराम से पश्चिम धीमी ना कम पश्चिमी कछुआ था जो उसके बनाए हुए बगीचे को देख करके उसमें पास जाते हैं वहीं के मालिक पर दृष्टि नहीं जाती है देखो यह जीवन स्वर्ण जा रहा है एक हम एक हम भी तो हैं और इस तरह जन्म जन्म विविध गए डुबकी गए परंतु मनुष्य को विषय-भोग से कभी तृप्ति नहीं मिली आप जानते हैं विषय-भोग का स्वभाव के आए थे को विजय भोग का प्रभावी है कि जितना जितना भोग करो फोन उठ नहीं उतना मुर्गा अभ्यास बढ़ता है और मनुष्य की पराधीनता पड़ती है मैं अपने ऐसा
सुना है कि जयहे ग्राहक रोड भोजन बढ़ाते चले जाएं एक ग्राफ इन करके बहुत बड़ा में सैकड़ों दिन तक को पढ़ता गलत जाएगा और भोजन पूरा भारी आपका हो जाएगा मैंने सुना थोड़ा-थोड़ा करके अकबर ने बीरबल को बांटते ज्यादा खिलाया ऐसा ही सुनो पिंपल बीरबल ने अकबर को व्हाट्सएप ज्यादा गिरा दिया बिजली ओमप्रकाश व्यास बनाओगे भाई को बदलते हुए विमानों के हमले में दो कि वह के पीछे रुक पड़ता है और ज्ञान कौशल बढ़ता है और जो चिन्ह अधिक प्रयोग करता है वह गंदा आदमी पूरा दिन होता है कि झूठ तो हमको मालूम नहीं है
इंदौर इंदौर के एक पशु की पुत्री अपने शरीर में लगवाई थी के लिए और उसको हिस्से तृप्ति नहीं हुई एक राजा के बारे में मैंने सुना था कि वह भोजन करते हैं कि कंट्री घंटे में कट कर देते हैं पूजन करते हैं कर देते हैं क्योंकि बार वार लें उनको था कब हुई थी मैं जयपुर की पीछे अमृत जब हम बिरयानी एवं पांचवां स्त्रियां लावै कृपया ग्राम यष्टिमधु द्वारा संभव जैन विनोद जैन एवं कृत्रिम उक्त अवधि में यह लोग महाभारत में वाल्मीकि रामायण में विष्णु पुराण में श्रीमद्भागवत में मनुस्मृति में कहीं-कहीं अर्थांतर कहीं-कहीं प्रधान करते
हुआ है कि संसार के सारे भोग अंधाधुंध को प्रदीप जवाब दे दिया जाए तब हाथी घोड़े को सबस्क्राइब पुरुष जाए फिर भी नहीं होगी नहीं होगी करके जो हैं वह घ्र [संगीत] लुटेरे करने की जरूरत होती है इतनी से मनोज जी बहुत भरोसा करते हैं का कहना है कि न जातु कामान्न भयान्न हम भोग लगाएं यदि अभिषेक वक्त बेवक्त इसी प्रकार जो कि यह चाहिए है बीते विषय-भोग रूप से अगली यह तो जब हम अपने हृदय में बैठे हुए ईश्वर को छोड़कर बाहर जाते हैं किसी को ढूंढने के लिए की आदत होती है ब्लुटूथ अपने
घर में ले गए भोजन करना था या बदलाव नहीं करानी थी कोई बात होगी मुंबई की बात है मैं तो जाकर उनके कमरे में बैठ गया सजाया था कमरे को और वह स्वयं हमको वहां पर खड़ा कर दरवाजे के बाहर निकल गए और खड़े रहे बहुत देर हो गई 15 मिनट हो गया मैंने उनसे पूछा क्या तुम हो का [संगीत] इंतजार में बैठा हूं और इंतजार कर रहे हैं तो बैठा है तुम्हारे घर में और इंतजार कर रहे हो इंतजार कर रहे हो लुटी श्रीमती जी नहीं आई श्रीमान जी नहीं आए हैं और कैसा नहीं
आया पैसे की ओर नजर है कि वह वह ठन वैसा गिरा दी हुई कोई आरएस 3000 मीटर दूर बैठा हुआ है परमेश्वर पैसों का मालिक तो इधर बैठा हुआ मालिक भीतर बैठा हुआ पुरुष का लिंग अपने आप को ले जाने के लिए अंतर करने के लिए यह यहां पर यह हमारा ईश्वर को पाने के लिए एक कदम बाहर करने की जरूरत नहीं है एक मिनट के लिए इंतजार करने की जरूरत नहीं है है और उसको पाने के लिए कुछ भी करने की जरूरत नहीं है लुट को पाने के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं 1
मिनट इंतजार करने की जरूरत नहीं एक कदम चलने की जरुरत नहीं इसी से हमारे प्रेमी उपासक लोग तो कहा करते थे कि दिल के आईने में अब हम जानते ही होंगे मैं कर सुनाओ दिल के आईने में है सच भी दे यार जरा गर्दन झुका ही देख ली थी में वृद्धि आईने में है तस्वीरें यार यार की तस्वीर कहां है दिल के आईने में दर्द क्यों नहीं है दिखते इसलिए नहीं है न जरूर किसी हो गई है ना सिर्फ को देखने की कोई जरूरत नहीं वैसे भी हम करके अभिमान छोड़ कर के विवाह छोड़ो अहंकार
अभिमान जी लुट का आगमन छोड़ो फोन अभिमान छोड़ने का अभिमान फोन अभिमान छोड़ दिया कई लोगों को इसका लाभ होता है हमारे 11 उनका स्वभाव था कि जब तक वह जमीन पर नहीं बैठ सकते हो और यह कितने निर्विघ्नं हैं और देखते रहते हैं उनसे बात हुई है लुट लेगी यह सब अभिमानी तो जाकर पूछिए आसन पर बैठते समय देखो मैं कितना दरबार हूं कि देकर मिल्क अभी क्या हुआ अरे घायल हो गया भाई मेरा भी मान्यता का निरभिमानता का अभिमान हो गया कि आध्यात्मिक बीमार इसको बोलते हैं कि आज आदमी का अभिमान अभिमान अभिमान
होते हैं जो कि लोग कहते हैं कि यह तो अभी में लगे हुए हैं बचपन से अपने हाथ नहीं लगा है है और वाला व्यक्ति बाबा जी बनाने के लिए कि लोग समझें कि बड़े महात्मा है घ्र घ्र बुधि के स्वामी जी अभी तुम यह आपको जो लोग हैं वह कहीं को बता देते हैं तो भगवान की मूर्ति को बता देते हैं और आंख बंद करने पर जो उनको के भीतर दिखता है तो कहते हैं वह बहुत ऊंची ऊंची अधिकारी अधिकारी हैं और बड़े अधिकारी यहां वहां एक पाठ बोलने लगे आंवला तुम्हारा गुरु तुमको कहेंगे
तुम वेदांत की अधिकारी हो तो ठीक है उदित लेकिन जब तुम कहते हो कि वह अगली छोटी और जो कि छोटा और भजन छोटा और जुड़ाव धर्म डोडा और हम प्रेम की अधिकारी तो आपने मैंने आगे करके चक्र दिया तुम्हारे गले को हनुमान कहते हैं कि लोग नहीं जा सकते जहां नहीं जा सकते जहां शिवजी का प्रवेश नहीं है वहां मेरे हाथ में ए आर रहमान का प्रवेश शिवजी का प्रवेश करेंगे तो यह जो अकाल में जीव और ईश्वर के बीच में अगर कोई प्रतिबंध है विद्यार्थियों को एक विमान होता है हम तो कंपनी विचार
मनन निदिध्यासन धीर वेदांत अरे यह सब क्या है और यह खाने में क्या है यह व्यक्ति चाहे जहां अपने व्यक्तित्व की से हम अपने बड़प्पन का आरोप करते हैं वहां यह हमारे के बीच में केवल एक ही है पूरा कोई पहाड़ नहीं है यह इंतजार यहां इंतजार करना नहीं है इंतजार करना नहीं है यहां किसी भी पर की कोठरी में उतना नहीं है यह नहीं समझ रही विश्व निकला छोटा है वह इस तरह की को टर्न रहता है और बाहर की कोठरी में नहीं रहता ईश्वर इतना नहीं है ऐसा पदार्थ नहीं है जो तब में
व्यापक न हो ऐसा पदार्थ है जो आज इंतजार करने का समय कहां गया इस समय वह कहीं थी जैसे लोग चले जाते हैं विदेश में होता है झाले बैठे कुछ बना लेते हैं बिना काम ही के काम निकाल करके अपनी बात ना पूरी करते हैं जो इश्वर कहीं आजकल विदेश में घूमने गया है क्या ईश्वर का वे 10,000 बरस बाद पैदा होने वाला है इस वर्ष पहले सरदार पहले को इश्वर की असल में इंतजार भी नहीं करनी है और एक कदम चलकर के ईश्वर के पास जाना है और ऐसा कोई ऐसा ही जो हमारे बीच
में हमारे उन लोगों से सुना दो कि एक महात्मा रहते थे आगरे के किले के पास वह बजाने में निपुण थे और रहते थे एक दिन उनके मन में जी कि पीतल के बाद शांति मिले सोहराब वह जोड़ी वाला फकीर कुंभकार कंपनी हो गई बीएफ की जोड़ दूंगा किले में और जाकर भोला दास मिलना चाहते हैं और हुए हैं लुटी बहुत सारी पट्टी रातें बात कही थी नहीं मिलता है कि आप पहले उस से स्वीकृति लेनी पर भारी पड़ती है उससे मिलने की पोशाक बनवाई नहीं पड़ती है तो अमुखी पोशाक पहनकर के अब समय बाद
हम उस जगह चाहिए बाद जब मिलने के मूड में थे तब उर्मिला बौद्ध राय ने कहा कि बाबा हमसे तो यह सब कुछ होने वाला नहीं है ना यह सब करते हैं कि अगर वे क्या बोल देंगे तो बड़ा बखेड़ा है भाई अब हम सीधे वीणा बजाने लगा और रात का समय बेगम और बादशाह दोनों किले के ऊपर जिले के ऊपर घूम रहे थे वह कि आखिर शाहरुख खान में बड़ी बेगम साहिबा ने कहा कि मीणा बजाने वाले को बुलवाओ या हमारे चैनल पर भी आदमी भेजा गया अब वह बीच में हमको कोई गम को
कोई मतलब नहीं कि हम भी तो आप लोग हम तो गांव से निकलकर और उसकी कुटिया में पहुंच गए हो और उसकी उड़ने लगे हैं है कि जब मनुष्य अपनी विशेषता बे अपने अहंकार से ईश्वर को प्रभावित करना चाहता है तब ईश्वर प्रभावित नहीं होता लेकिन जब वह अपने अहंकार को छोड़कर अपने अहंकार को छोड़कर अपने में ही डूब नहीं लगता है तो इश्वर स्वयं उनके पास आता है यह शास्त्रों में प्रसिद्ध है जितना जितना तुम्हारा अंक पड़ेगा जो तो जत्थों ने बर्थडे मुच्यते तथा जहां-जहां से निवृत होगा वहां वहां से मुक्ति प्राप्त होगी और
यह जो भगवान का नाम है यह जो भगवान का रूप है यह जो भगवान की लीला है यह हमारे अपने आप को भुला देती है मुर्गी मोईद मोहन मयूरी मन मेरो भयो हरिचंद नंबर पहचान है शुभेच्छुक निर्भय प्राणमई प्राण-भय गांडू और यह मैंने जाने पर रे घाघरा घाघरा यह न जाने पर कौन है पुराने बोलती है कि अधीक्षक बी कि आज मैंने देखा कहां कली मटक कली हिंदी धीर जमुना जी के तट पर दो उनको दूर सूख सरकार वो मुस्कुराई वो आज मैं एक दूसरे को मुस्करा रहे थे गांव में जाएगी को हथेली से थोड़ी
तो बताओ मैंने इन्हें भूल गई हो इस मुद्दे पर की प्रीति है ना निष्क्रियता निष्क्रियता लुट जड़ कर देते हैं निष्क्रियता को कर देती है परंतु यह जो तरंग आसमान की उन लोगों ने प्रेम की परिभाषा है एक कप व्यक्ति जनम प्रवास हुआ हु इस समय हमारा ज्ञान नाश्ता होता है याद रखिए उल्लसित अवस्था का नाम ज्ञान की उल्लसित अवस्था का नाम ज्ञान शांत रहता है तो उसका नाम और ज्ञान सब ज्ञान और ज्ञान अपने आप में ही होता है नित्यानंद प्रेम करे वह क्योंकि ज्ञान नहीं वह लोगों के बीच में ही अपने आप ही
ना हो रहा है जैसे जैसे समय पांव नाचते नाचते हैं दो है इसलिए सिर धो लें अब एक है कितनी बार घृत भरतनाट्यम जितनी बात मणिपुरी नृत्य संगीत है गीत ना ना ना ना ना कृष्णा कृष्णा कृष्णा राधे राधे जय शंकर यह हमारा ना होता है प्रेम और घृणा होता है उसको बोलते हैं जो कि प्रॉब्लम है उसको याद रख बोलते हैं और विशेषाधिकार जो सिविल ज्ञान होता है उसको स्वप्न दोष रहे हैं और नारायण बिना शांत हुई ए प्रेम व शांति की जरूरत नहीं है वह तो शेष स्थान हुआ था को जा रहे हैं
हुआ था समाधि में शांति है और विषय आकार का में उपचाराधीन का प्रावधान था कि रुपए पराधीनता घ्र परंतु प्रेम में ज्ञान का जो उल्लसित आकार है उनमें कहीं यही प्रेम आता है यही प्रेम का स्वर है लेकिन ईश्वर का शुक्र है शुक्र का घृत को बदलने के लिए विवश करता है स्वाधीनता ईश्वर है और ईश्वर का नियंता इश्वर का नियंता प्रेम है तो यह जो प्रेम है यह ही प्रताप की ईश्वर के रूप में दर्शन देता है वह राधा कृष्ण के रूप में भी वही और गौरी शंकर के रूप में भी वही सीता राम
के रूप में भी लक्ष्मी नारायण के रूप में भी वही और निराकार के रूप में भी वही ब्रह्म के रूप में भी वही जल्दी चीटियां का न हो यदि ज्ञान में उल्ला खन हुए गूंदना हुए ईश्वर का दर्शन ईश्वर का दर्शन दुर्लभ और यह जो भगवन नाम का उच्चारण करते हैं उसी ज्ञान से छेड़छाड़ जरा नाचने लगे के लिए को बनाने के लिए यह नाम क्या है वह मेरे गेम शुरू करो है अब और हमें ईश्वर का दर्शन करा खुद नाम प्रेम ज्ञान यह सब अलग चीज नहीं है एक ही वस्तु के अनेक नाम है
आपको प्रेम से ईश्वर का नाम लेकर पुकारा आपके हृदय में ईश्वर ईश्वर प्रकट होगा और जो चीज है वह भी आ सकती है आंखों के सामने भी आ सकती है क्योंकि जो है वह से बाहर देखता है बाहर और नहीं है इसलिए जब वह अपनी दृष्टि को प्रेम में लपेटकर के प्रेम में लपेटकर के बाहर भगवान का नाम नामोच्चारण से छेड़छाड़ करके नचाने वाला करने वाला और ऑफिस जो प्रेम है वह भगवान को मिलाने वाला हुआ करता है के लिए अपने सुख के लिए 5 मिनट अपना अपने जीवन का 5 मिनट इश्वर के साथ कड़ी
जोड़ने के लिए रखिए और वह कड़ी रूप के द्वारा नहीं छोड़ती लाम के द्वारा नाम के द्वारा वह कड़ी जुड़ती हैं आप 5 मिनट को भगवान के नाम का उच्चारण अवश्य करें श्री कृष्णम शरणम मामा श्री कृष्ण शरणम नमः श्री कृष्णम शरणम मामा श्री कृष्ण शरणम मामा