राम राम मेरा नाम है आदित्य और ग्रह लक्षण ज्योतिष में आपका स्वागत है इस वीडियो में हम जानेंगे कि नक्षत्र क्या होता है और उनका उपयोग हम अपने बेनिफिट के लिए कैसे कर सकते हैं देखिए नक्षत्र शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है नक्स प्लस तारा यानी टू मैप द स्टार अर्थात तारों द्वारा ब्रह्मांड को मैप करना देखिए राशियों का वर्गीकरण तो बाद में हुआ है वैदिक काल में सबसे पहले नक्षत्र ही थे उसके बाद रा का आगमन हुआ है नक्षत्र के द्वारा हम ग्रह के फल को प्रेसा ढंग से जान सकते हैं आप जानते
होंगे कि नक्षत्र 27 होते हैं नक्षत्रों का वर्गीकरण चंद्रमा के आधार पर हुआ है पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा को चक्कर लगाने में लगभग 27 दिन लगते हैं इसीलिए हम पूरे जोडियक बल्ड को 27 बराबर भागों में बांट देंगे देखिए यह हमारा सौरमंडल है और यह पूरा जोडिक बेल्ट मैंने आपको पिछले वीडियो में बताया था कि सारी बारा राशिया कुछ और नहीं बल्कि तारों का ग्रुप है यह जोडे बथ हमारे सौर मंडर को 3060 डिग्री के सर्कल में घेरा हुआ है हमें नक्षत्र को प्राप्त करने हेतु इसे ही 27 बराबर भागों में बांटना है पर
हम जब नक्षत्र की बात करते हैं तो इसमें कुछ और तारा मंडल भी जुड़ जाते हैं जो राशियों में नहीं लिए जाते अब हम इन्हें 27 बराबर भागों में बांट सकते हैं यह नक्षत्र अश्वनी से लेकर रेवती कुछ इस प्रकार है देखिए नक्षत्र और राशियां एक ही जोडियक बेल्ट के अलग-अलग डिवीजन है सुविधा के लिए इन्हें हम कुछ इस प्रकार अरेंज कर सकते हैं क्योंकि नक्षत्रों का वर्गीकरण चंद्रमा के आधार पर ही हो रहा है इसलिए चंद्रमा का नक्षत्रों से बहुत गहरा लिंक है आप लोगों ने सुना होगा कि प्रजापति दक्ष ने अपनी 27 पुत्रियों
का विवाह चंद्रमा से किया था परंतु चंद्रमा को केवल रोहिनी ही पसंद थी यह दक्ष की 27 पुत्रियां कुछ और नहीं बल्कि नक्षत्र हैं और चंद्रमा को रोहिणी नक्षत्र इसलिए प्यारा है क्योंकि जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में होता है तो उसका ओसिन नॉर्मल से अलग होता है चंद्रमा जब रोहिणी नक्षत्र में होता है तो बहुत अच्छा फल करता है और चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में उच्च का भी होता है इसलिए चंद्रमा को रोहिणी नक्षत्र बहुत प्यारा है यह सब इसी चीज का मेटाफर है क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगभग 27 दिन में लगाता है इसलिए चंद्रमा
27 दिन में 27 नक्षत्र कवर कर लेता है अपनी हर एक पत्नी के लिए एक दिन 27 नक्षत्रों के अलावा भी एक 28 वां अभिजीत नक्षत्र भी होता है जो मुहूर्त पर्पस के लिए इस्तेमाल होता है लेकिन जन्म कुंडली के एनालिसिस में इसका इस्तेमाल नहीं होता है अभी जीत नक्षत्र को आम मुहूर्त वाले वीडियो में समझेंगे अब देखिए 12 राशियां होती है और 27 न नक्षत्र अतः एक राशि में सवा नक्षत्र होते हैं इन्हें हम आगे समझेंगे अब क्योंकि सर्कल 360° का होता है यह तो सबको पता ही होगा अब क्योंकि राशियां 12 है इसीलिए
हम 360 को 12 से भाग करेंगे तो आंसर 30° आएगा इसीलिए सभी राशियों के स्पैन यानी विस्तार 30° का होता है अब क्योंकि सर्कल 3060 डि का होता है और नक्षत्र 27 है इसलिए हम 360 में से 27 का भाग देंगे तो 13.3 3 डिग्री आएगा आपको पता होगा कि जब डिग्री का कैलकुलेशन करते हैं तो इसे पॉइंट में नहीं लिखते इसे हम डिग्री आर्क मिनट आर्क सेकंड में लिखते हैं जिसे शुद्ध हिंदी में अंश कला विकला कहते हैं इसलिए जब हम 13.33 डिग्री को डिग्री मिनट सेकंड में बदलते हैं तो 13 डिग्री 20 मिनट
आता है यानी हिंदी में 13 अंश 20 कला अतः प्रत्येक नक्षत्र 13 डिग्री 20 मिनट का होता है इसकी सहायता से हम सभी नक्षत्रों का स्टार्टिंग और एंडिंग पॉइंट ज्ञात कर सकते हैं इसकी सहायता से हम किसी भी ग्रह का डिग्री जान के उसका नक्षत्र निकाल सकते हैं पिछले वीडियो में मैंने आप सबको डिक्ट पंचांग वेबसाइट के बारे में बताया था चलिए अब हम इस एग्जांपल कुंडली को फिर से डिस्कस कर लेते हैं देखिए इस व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा तुला राशि में 21 डिग्री 2 मिनट पर था देखिए इसके बगल में इसका नक्षत्र
लिखा हुआ है पर फिर भी मैं इसे डिग्री द्वारा आपको निकालना सिखा देता हूं देखिए यहां विशाखा नक्षत्र 20 डिग्री तुला से शुरू होता है और वृश्चिक राशि में 3डि 20 मिनट पर खत्म हो जाता है आप किसी भी ग्रह का नक्षत्र इसी प्रकार निकाल सकते हैं एक बात और ध्यान रखिए आपकी जन्म कुंडली में चंद्रमा जिस भी नक्षत्र में है वही नक्षत्र आपका जन्म नक्षत्र होगा उसी नक्षत्र के एटिबल आप में आते हैं अब 13 डि 20 मिनट का विस्तार बहुत बड़ा होता है कोई भी ग्रह यदि इस पूरे विस्तार में कहीं भी होगा
तो क्या एक ही जैसा फल देगा इसलिए हमारे ऋषियों ने प्रत्येक नक्षत्र को चार-चार बराबर भागों में बांटा है है जिसे पद या चरण भी कहते हैं देखिए यह प्रथम पद है यह द्वितीय पद यह तृतीय पद और यह चतुर्थ पद और प्रत्येक नक्षत्र को एक-एक साउंड से एसोसिएट किया गया है जैसे अश्विनी नक्षत्र के प्रथम पद को चू साउंड से एसोसिएट किया गया है द्वितीय पद को चे साउंड से एसोसिएट किया गया है तृतीय पद को चो से चतुर्थ पद को ला से भरणी नक्षत्र के प्रथम पद को ली से इत्यादि प्रत्येक नक्षत्र को
एक देवता से भी एसोसिएट किया गया है इन देवताओं के गुण धर्मों से इन नक्षत्रों का गुणधर्म जानने में बहुत ज्यादा सहायता मिलती है जैसे अश्विनी नक्षत्र के देवता अश्विनी कुमार है यह देवताओं के वैद्य हैं वैद्य जख्म भरने अर्थात हीलिंग में सहायता करता है अतः जिनका चंद्रमा अश्वनी नक्षत्र में होता है वह प्रायः दूसरों को अच्छी सलाह देते हैं जिससे उसका जख्म भर सके अर्थात प्रॉब्लम से छुटकारा मिल सके इसी प्रकार भरनी नक्षत्र के देवता यमराज हैं इसलिए इस नक्षत्र में प्राया कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए क्योंकि यमराज मृत्यु के देवता है इसलिए
इस नक्षत्र में किए गए कार्य की भी मृत्यु हो जाती है अर्थात काम खराब हो जाता है परंतु यह नक्षत्र कोई क्रूर कार्य करने के लिए अच्छा है इसी प्रकार कृतिका नक्षत्र के देवता अग्नि है और सभी नक्षत्रों के देवता इस टेबल में मेंशन है और यह है सभी नक्षत्र च की करेस्पॉन्डिंग्ली अपनी कुंडली में चंद्रमा का नक्षत्र और उसका पद देखिए देखिए इस कुंडली में विशाखा नक्षत्र है और प्रथम पद है अब इस टेबल में विशाखा नक्षत्र का प्रथम पद देखिए इसे ती शब्द से एसोसिएट किया गया है यही ती शब्द इस व्यक्ति का
जन्म अक्षर है आपका कुंडली वाला नाम इसी जन्म अक्षर से शुरू होता है अब देखिए नक्षत्र 27 होते हैं और प्रत्यक के चार-चार हिस्से होते हैं इसलिए जब 27 को चार से गुणा करते हैं तो 108 आता है आप जब किसी भी मंत्र का 108 बार जाप करते हैं तो हर एक मंत्र ब्रह्मांड के एकएक हिस्से को कवर करता है चाहे आपका कोई ग्रह कितना भी खराब हो वह ब्रह्मांड की किसी ना किसी हिस्से में तो अवश्य ही रहेगा और बार-बार मंत्र के जप से वह हिस्सा रिकवर कर जाएगा इसलिए सनातन धर्म में 108 बार
मंत्र जप करने का इतना बड़ा महत्व है मैंने आपको इस वाले वीडियो में नाम राशि के बारे में बता या था यह टेबल इन्हीं नक्षत्र पदों से बना हुआ है देखिए हर नक्षत्र का चार पद होता है और हर राशि में कुल नौ पद होते हैं इसीलिए हर राशि में सवा दो नक्षत्र होते हैं यहां देखिए मेष राशि में अश्विनी नक्षत्र के चार पद हैं ये भरनी नक्षत्र के चार पद हैं और कृतिका नक्षत्र का केवल एक पद है और यह हो गए सवा नक्षत्र जो एक राशि का स्पैन है कृतिका के बाकी तीन नक्षत्र
अगली राशि वृष में है इसी प्रकार बाकी के नक्षत्र पद समझना चाहिए अब सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट चीज नक्षत्र का उपयोग किस प्रकार हम अपने जीवन को बेहतर करने के लिए कर सकते हैं देखिए कोई नक्षत्र ना तो अच्छा होता है ना ही बुरा प्रत्येक नक्षत्र के कुछ एटिबल यानी गुण धर्म होते हैं दिक्कत तब आती है जब हम उस पर्टिकुलर नक्षत्र में उसके गुण धर्म के बिल्कुल विपरीत काम करते हैं देखिए एडिटिंग में पता लगा कि यह वीडियो बहुत लंबा हो गया इसलिए मैं इस वीडियो को दो भागों में बांट रहा हूं इसका अगला वीडियो
दो दिन बाद आएगा अब यदि आपको मेरा वीडियो पसंद आया है तो इस वीडियो को लाइक करिए मेरे चैनल को सब्सक्राइब करिए और बेल आइकन भी दबाइए चलिए अब मिलते हैं इस वीडियो के दूसरे भाग में जय श्री राम