आज Lamborghini दुनिया की सबसे वांटेड और लग्जरी कार्स में से एक है। इस कंपनी का इयरली रेवेन्यू 25,000 करोड़ से भी ज्यादा है। और सबसे इंटरेस्टिंग बात यह है कि इनकी कार्स ज्यादातर दुनिया के सबसे रिच और फेमस लोग ही खरीदते हैं। लेकिन इस लेजेंडरी ब्रांड की शुरुआत किसी प्लानिंग से नहीं बल्कि एक बहुत बड़ी इंसल्ट से हुई थी। Feruchio Lamborghini जो उस टाइम सिर्फ ट्रैक्टर्स बनाते थे, वो अपनी एक Ferar की एक कंप्लेंट लेकर Ferari के ओनर के पास गए। लेकिन एंजो फरारी ने उन्हें हेल्प करने के बजाय जलील करते हुए कहा, तुम्हें कार
चलानी नहीं आती। तुम सिर्फ ट्रैक्टर्स ही बनाओ। फेरुचियों को [संगीत] यह बात आग की तरह चुभ गई। उन्होंने उसी टाइम यह ठान लिया कि अब वो ऐसी कार बनाएंगे जो फरारी को उसकी औकात दिखा देगी। किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक ट्रैक्टर मैकेनिक का वही गुस्सा एक दिन इटली की सबसे बड़ी दुश्मनी शुरू कर देगा। और दुनिया को मिलेगी एक ऐसी मशीन जिसे आज हम Lamborghini के नाम से जानते हैं। Lamborghini फेरुच lamborgini का बर्थ 28 अप्रैल 1916 को नॉर्दर्न इटली के एक पीसफुल विलेज रेनोजो में हुआ था। उस टाइम इटाली में वर्ल्ड
वॉर वन शुरू थी और 1918 तक कंट्री की इकॉनमी पूरी तरह टूट चुकी थी। चारों तरफ गरीबी और खाने की कमी थी। लेकिन Lamborghini फैमिली अपने छोटे से अंगूर के वाइनर्ड की वजह से गुजारा कर लेती थी। फैचियो का बचपन अपने फादर एंटोनियो के साथ फार्म में सुबह से शाम तक काम करते हुए बीता लेकिन एक दिन सब कुछ बदल गया। जब एंटोनियो एक पुराना ट्रैक्टर घर लेकर आए। इस ट्रैक्टर ने मेहनत को तो कम कर दिया लेकिन वह बहुत पुराना और नॉइज़ी था। फेरुचियो को उस मशीन से एक अलग ही लगाव हो गया। वो
घंटों उसे खोलते और वापस जोड़ते ताकि समझ सके कि वो कैसे काम करता है। जो शुरुआत एक बचपन की क्यूरियोसिटी से हुई थी वो जल्द ही एक जुनून बन गई। जैसे-जैसे फेरचियो बड़े हुए उनका मंस फार्म में नहीं बल्कि इंजल्स में लगने लगा। वो इंजीनियरिंग पढ़ना चाहते थे। पर अपने फादर से यह बात कहना आसान नहीं था। घर का सबसे बड़ा बेटा होने के नाते यह उनकी ड्यूटी थी कि वो फैमिली बिजनेस संभाले। लेकिन काफी टेंशन भरी बातचीत के बाद एंटोनियो मान गए और उन्हें ब्लेसिंग्स दी। इसके बाद फेरुचियो फर्टिलिटेटरिया टेक्निकल इंस्टट्यूट में पढ़ने के
लिए बोलूंगा चले गए। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने एक मास्टर ब्लैकस स्मिथ के साथ काम किया और वेल्डिंग के सीक्रेट सीखे। इस ट्रेनिंग की वजह से उन्हें सिटी की सबसे बड़ी फैक्ट्री कॉवेलेरी निकी में काम मिला जहां आर्मी के व्हीकल्स मेंटेन होते थे। 18 की ऐज में वो वापस अपने गांव आए और अपने दोस्त के साथ मिलकर एक मैकेनिकल वर्कशॉप खोली। सब कुछ सही चल रहा था। वो पुराने ट्रैक्टर्स ठीक करते और बचे हुए टाइम में गाड़ियां चलाकर मजे लेते। [हंसी] लेकिन फिर 1940 में वर्ल्ड वॉर टू शुरू हो गई और फेरुचियो को रॉयल इटालियन एयरफोर्स
में ड्राफ्ट कर लिया गया। उनकी मैकेनिकल स्किल्स को देखते हुए आर्मी ने उन्हें ग्रीस के रोड्स आइलैंड पर भेज दिया। जहां 3 साल तक उन्होंने मिलिट्री के ट्रक्स और ट्रैक्टर्स ठीक किए। जब 1943 में इटाली ने सरेंडर कर दिया तो जर्मंस ने आइलैंड पर कब्जा कर लिया। फिर फेरुचियो ने जैसे तैसे करके जर्मंस को मना लिया कि वो वहां रहकर अपना वर्कशॉप चलाएंगे। फिर 1945 में जब अलाइड फोर्सेस ने रोड्स आइलैंड पर कब्जा कर लिया तो फेरोचियो को कैद कर लिया गया। लेकिन उनका टैलेंट देखकर उन्हें अलाइड फोर्सेस के व्हीकल्स ठीक करने का काम दे
दिया गया। एक साल बाद वह वापस इटली लौटे लेकिन वहां हालात बहुत खराब थे। पैसों की वैल्यू गिर चुकी थी और इकोनमी तबाह थी। फिर भी उन्होंने एक छोटा वर्कशॉप खोला और पुराने व्हीकल्स ठीक करने लगे। इसी बीच उन्होंने क्लेलिया मोंटी से शादी कर ली और 1947 में उनका बेटा टोनीनो पैदा हुआ। फेरुचियो बहुत खुश थे पर यह खुशी ज्यादा देर की नहीं थी। डिलीवरी के टाइम क्लेलिया मोंटी की डेथ हो गई और फेरुचियो अपने न्यूबर्न बेबी के साथ बिल्कुल अकेले रह गए। वो गहरे डिप्रेशन में चले गए और खुद को काम में बिजी कर
लिया ताकि दुख भुला सके। लेकिन अब एक नई मुश्किल थी। पैसा बिजनेस स्लो था और वह अपने बेटे को एक बहुत अच्छी लाइफ देना चाहते थे। लेकिन सिर्फ पुराने ट्रैक्टर ठीक करके यह बिल्कुल पॉसिबल नहीं था। इसलिए वह कुछ बड़ा करना चाहते थे। तभी एक दोपहर उन्हें उनके फादर का एक अर्जेंट मैसेज आया जिसने उनकी जिंदगी का रास्ता ही बदल दिया। उनके वाइनर्ड का ट्रैक्टर खराब हो चुका था और उन्हें हेल्प चाहिए थी। फेरचुअल सब कुछ छोड़कर जब [संगीत] भी अपने फादर के फार्म पर पहुंचे। वहां काम करते टाइम उन्होंने देखा कि उनके फादर काफी
परेशान थे। फ्यूल के प्राइसेस बहुत बढ़ चुके थे। ट्रैक्टर्स रिलायबल नहीं थे और उनके स्पेयर पार्ट्स बदलना बहुत महंगा पड़ता था। तभी फेरुच को रियलाइज हुआ कि यह सिर्फ उनके फादर की नहीं बल्कि पूरे इटली [संगीत] के फार्मर्स की कहानी है। उस टाइम इटली को अपनी इकॉनमी सुधारने के लिए खेती बढ़ानी थी। लेकिन ट्रैक्टर्स इतने महंगे थे कि फार्मर्स उन्हें अफोर्ड नहीं कर पा रहे थे। तभी फेरचू ने डिसाइड किया कि वो ऐसा ट्रैक्टर बनाएंगे जो सस्ता भी हो और फ्यूल भी कम खर्च करें। उस टाइम इटली की गवर्नमेंट बचे कुचे मिलिट्री इक्विपमेंट्स का ऑक्शन
कर रही थी। इसलिए फेरचू ने इसका फायदा उठाया क्योंकि उन्हें एक्सिस और एलट दोनों तरह की व्हीकल्स का एक्सपीरियंस था। इसलिए उन्होंने ऑक्शन से एक पुराना ब्रिटिश मॉरिस इंजन बहुत सस्ते में खरीद लिया। अपनी वर्कशॉप में उन्होंने उस इंजन में एक कमाल का चेंज करके एक फ्यूल ऑटोमाइजर इंस्टॉल किया। इस इनोवेशन की वजह से ट्रैक्टर पेट्रोल से स्टार्ट होता और चलने के बाद सस्ते डीजल पर स्विच हो जाता। उन्होंने मिलिट्री स्क्रैप का यूज करके कॉस्ट और कम कर दी। फिर कई रातों की मेहनत के बाद उनका पहला कैरियों का ट्रैक्टर रेडी हुआ। जब उनके फादर
ने इसे टेस्ट किया तो वह हैरान रह गए क्योंकि ट्रैक्टर पावरफुल था और खर्चा बिल्कुल ना के बराबर था। जब उन्होंने उनके नेबर्स को दिखाया तो बात आग की तरह फैल गई। कुछ ही हफ्तों में फार्मर्स उनके दरवाजे पर लाइन लगाने लगे। इसलिए फेरोचू का बिजनेस स्काई रॉकेट हो गया। पहले वो हफ्ते में एक ट्रैक्टर बनाते थे पर जल्द ही हर दिन नए ऑर्डर्स आने लगे। लेकिन यहां एक सवाल यह आता है कि अकेला बंदा इतना काम कैसे संभालता? इसलिए उन्हें लोन की जरूरत थी पर बैंक वालों ने मना कर दिया। तब उनके फादर एंटोनियो
ने अपने बेटे पर भरोसा किया और अपना फैमिली फार्म मतलब वाइन यारार्ड गिरवी रख दिया। यह एक बहुत बड़ा गैंबल था क्योंकि अगर फेरुचियो फेल होते तो उनका घर और फार्म दोनों बिक जाते। लेकिन फेरोचियो ने जान लगा दी। उन्होंने एक टीम हायर की हजारों इंजंस खरीदे और अपनी नई कंपनी Lamborghini ट्रेटोरी शुरू की। 1952 तक वो अपने खुद के डीजल इंजंस बनाने लगे जो पहले से ज्यादा पावरफुल और सस्ते थे। किस्मत ने भी साथ दिया। गवर्नमेंट ने फार्मर्स को उन्हीं मशीनंस के लिए लोन देना शुरू किया जो इटली में बनी थी और Lamborghini के
ट्रैक्टर्स इसमें फिट बैठे थे। लेट 50ज तक Lamborghini इटाली के सबसे बड़े ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरर में से एक बन चुकी थी। उन्होंने 1960 में हीटिंग और एयर कंडीशनिंग का बिजनेस भी शुरू किया जो काफी सक्सेसफुल रहा। अब फेरुशि इटली के सबसे अमीर लोगों में गिने जाने लगे। वेल्थी होने के बाद उन्होंने अपनी सक्सेस को सेलिब्रेट महंगी वाइन और फास्ट कार्स के साथ किया। उनके पास Mercedes, Jaguar, Merzerat और Ferari जैसे बड़े ब्रांड्स का कलेक्शन था। लेकिन उन्हें हर कार में कोई ना कोई कमी लगती थी। सबसे ज्यादा परेशान वो अपनी Ferari 250 GT से थे जो
उनकी सबसे महंगी कार थी। उसका क्लच हाई स्पीड पर बार-बार खराब हो जाता था। फेरुचियों ने जब कई बार अपनी Ferrari का क्लच ठीक करवाया तो उनका सब्र टूट गया। फिर उन्होंने कार अपनी ट्रैक्टर फैक्ट्री में लाई और अपने मैकेनिक से उसे खुलवा दिया। हैरानी की बात यह थी कि Ferrari में वही क्लच लगा था जो Lamborghini के ट्रैक्टर्स में यूज़ होता था। Ferio यह देखकर शॉक रह गए। उनके ट्रैक्टर्स के लिए उस क्लच की कीमत सिर्फ 10 थी। जबकि Ferrari उसी पार्ट के लिए उनसे 1000 ले रहा था। दिस Ferrari क्लच कॉस्ट 1000। द
Lamborghini ट्रैक्टर क्लच जस्ट 10। आई विल रिज़ाइन दिस टू बी बेटर बेटर सुपीरियर। अ परफेक्ट बैलेंस ऑफ़ कॉस्ट एंड क्वालिटी। एक इंजीनियर होने के नाते फेरुशियो ने उस क्लच को बेहतर बनाया और इंजो फरारी से मिलने चले गए। उनका इरादा झगड़ा करना नहीं था। वह बस इंसो की मदद करना चाहते थे ताकि उनकी कार्स बेहतर हो सके। लेकिन इंजो फरारी काफी एटीट्यूड और गुस्से वाले इंसान थे। उन्होंने फेरुचो की बात सुनने के बजाय उनकी इंसल्ट कर दी। इंजो ने कहा मेरी कार्स परफेक्ट है। प्रॉब्लम तुम्हारे चलाने में है। तुम्हें कार चलानी नहीं आती। तुम बस
ट्रैक्टर्स बनाओ और स्पोर्ट कार्स मुझ पर छोड़ दो। तुम सिर्फ ट्रैक्टर्स ही बनाओ। यह इंसल्ट फेरुचू के दिल पर लग गई। घर वापस आते टाइम उन्होंने फैसला किया कि वो अपनी स्पोर्ट्स कार बनाएंगे जो Ferari से भी ज्यादा बेहतर, कंफर्टेबल और रिलायबल होंगी। 1963 में उन्होंने ऑटोमोबली Lamborghini की फाउंडेशन रखी। उन्होंने Ferari के ही टॉप थ्री इंजीनियर्स को हायर किया और उन्हें 4 महीने का टाइम दिया ताकि वह ट्यूरिन मोटर शो तक कार रेडी कर सके। यह काम लगभग इंपॉसिबल था लेकिन टीम ने दिन-रा मेहनत की। ट्यूरिन ऑटो शो तक कार रेडी तो हो गई
पर एक बड़ी प्रॉब्लम आ गई। इंजन अभी तक रेडी नहीं था लेकिन फेरोचियो ने हार नहीं मानी। उन्होंने इंजन की जगह ब्रिक्स भरवा दी ताकि कार का वेट सही लगे और हुड को लॉक कर दिया ताकि कोई अंदर ना देख सके। यह गैंबल काम कर गया। लोगों को डिज़ इतना पसंद आया कि किसी ने इंजन देखने की जिद नहीं की। इसके बाद Lamborghini 350 GT ल्च हुई जो एक टेक्निकल मास्टर पीस थी। अगली बड़ी सक्सेस थी Lamborghini Mura। 1966 में इस कार ने दुनिया को पहली बार सुपर कार वर्ल्ड से इंट्रोड्यूस करवाया। यह उस टाइम
की सबसे फास्ट कार थी और इसका डिजाइन इतना आइकॉनिक था कि बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज इसके पीछे क्रेजी हो गए। Feruchio ने ना सिर्फ Ferrari को पीछे छोड़ा बल्कि कस्टमर सर्विस में भी नए स्टैंडर्ड सेट किए। अगर किसी की Lamborghini खराब होती तो कंपनी अपने खर्चे पर मैकेनिक जरूरत पड़ने पर प्लेन से भेजती थी। लेकिन 1970 की शुरुआत में फेरुच्यू को एक बड़ा झटका लगा। बोलीविया की गवर्नमेंट ने 5000 ट्रैक्टर्स का ऑर्डर देकर पॉलिटिकल टर्मोइल की वजह से कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कर दिया। फेरुचियो ने इस ऑर्डर के लिए भारी लोन लिया था और अब वह भारी डेप्ट में
डूब गए थे। साथ ही कंपनी में भी प्रोडक्शन डिलीज की वजह से लॉस हो रहा था। मजबूरन 1972 में उन्हें अपनी कार कंपनी का 51% स्टेक बेचना पड़ा और अगले ही साल उन्होंने अपना पूरा ट्रैक्टर बिजनेस अपने कॉम्पिटिट को बेच दिया ताकि वह बैंककरप्ट ना हो जाए। फेरुचियों के लिए अपने ट्रैक्टर बिजनेस को छोड़ना बहुत बड़ा दुख था। लेकिन उनकी प्रॉब्लम्स यहीं खत्म नहीं हुई। 1970 के ऑयल क्राइसिस ने पूरी दुनिया की इकोनमी हिला दी। पेट्रोल इतना महंगा हो गया कि Lamborghini जैसी गैस गज़लीन सुपर कार्स को कोई पूछने वाला तक नहीं था। Ferrari और
Porsha ने भी यह प्रॉब्लम झेली। पर Lamborghini एक नई कंपनी थी जिसके पास ज्यादा बैकअप नहीं था। हर मुमकिन कोशिश करने के बाद भी जब बात नहीं बनी तो फेरुचियो थक गए और 1974 में उन्होंने अपने बचे हुए 49% शेयर्स भी बेच दिए और अर्ली रिटायरमेंट ले ली। उन्होंने फरारी को वो प्रूफ करके दिखाया था जो वो करना चाहते थे कि वह दुनिया की बेस्ट कार्स बना सकते हैं। उन्होंने अपना हीटिंग बिजनेस बेटे टोनीटो को दिया और वापस अपने फार्म से जुड़ने चले गए। हैरानी की बात यह है कि रिटायरमेंट में भी उनका एंटरप्रेन्योरियल स्पिरिट
कम नहीं हुआ और उन्होंने एक हाई क्वालिटी वाइन बिजनेस खड़ा कर दिया। फिर 1993 में एक हार्ट अटैक की वजह से उनकी डेथ हो गई। पैरुचियो के जाने के बाद कंपनी का सफर काफी बेकार रहा। 1978 से 1981 के बीच नए ओनर्स मैनेजमेंट संभाल नहीं पाए और कंपनी बैंककरप्ट हो गई। बाद में दो फ्रेंच ब्रदर्स ने इसे सिर्फ $3 मिलियन में खरीद लिया। फिर 1987 में उन्होंने इसे क्रिसलर को $2 मिलियन में बेच दिया। क्रिसलर ने lamborghini डब्लो ल्च की जो $320 km/h की स्पीड क्रॉस करने वाली पहली सुपर कार बनी। 1994 में क्रिसलर ने
इसे एक इंडोनेशियन ग्रुप को $ मिलियन में बेचा। पर 1997 के एशियन फाइनेंसियल क्राइसिस ने उन्हें भी पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। और आखिरकार 1998 में Audi Volkswaggen ग्रुप ने Lamborghini को $10 मिलियन में खरीदा। उन्होंने इटालियन डिज़ और जर्मन प्रिसेस का ऐसा कॉम्बिनेशन बनाया कि Lamborghini की किस्मत ही पलट गई। Audi के अंडर मर्स लाो, गायाडो और अवेंटडो ने धूम मचा दी। लेकिन असली गेम चेंजर था। 2018 में लॉन्च हुई Lamborghini US। यह पहली ऐसी एसयूवी थी जिसमें स्पोर्ट्स कार की पावर और एक फैमिली कार की स्पेस दोनों थी। आज Lamborghini की वैल्यू
ऑलमोस्ट $1 बिलियन है और वो साल में 10,000 से ज्यादा कार्स बेचती है जिसमें से आधी से ज्यादा कार्स सिर्फ उरूस होती है। अगर आपको यह वीडियो थोड़ी सी भी इनफेटिव लगी तो कमेंट में अपना ओपिनियन जरूर शेयर करो। और ऐसी बिजनेस स्टोरीज अगर आपको पसंद है तो मैं रिकमेंड करूंगा कि आप नेक्स्ट यह वीडियो देखें।