यह है फेरूज अबू लूलू। इसको बाकी फारसी सिपाहियों के साथ नावांत की जंग में बंदी बनाया गया था। तब से यह मेरे साथ था और जब मैं मदीना वापस आया तो इसको भी अपने साथ ले लिया। यह गोला फैग बनाने के कारखाने में काम करता था। अपनी रोज की कमाई से चार दरहम मुझे देता और बाकी खुद रखता था। अल्लाह ही कोई भी इसकी तरह गोला फैग नहीं बना सकता। यह एक माहिर नक्काश और तराशने वाला भी है। और इसके हाथों के हुनर का तो कोई जवाब ही नहीं। यह थी हजरत उमर की अपने