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जब आनंद आने लगे तो यह समझना.. || संध्या सत्संग 16-08-2024 Morning Sandhya #satsang #motivation

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Ashram Sandhya
आत्मने आत्मन बंधु आत्मने रिपरा आत्माना बंधु रात्म आत्मा तस्य नात्म मना जिता अना मस्तु शत्रु ते ते ताम शत्रु अत यदि अनाम वस्तुओं में चित्त लगाया अनाम पदार्थों में मन को लगाया तो हम अपने आप के शत्रु हो जाते और छोटे हो जाते हैं अनाम वस्तुओं से मन को हटाकर आत्मा में लगाया तो आप श्रेष्ठ हो जाते हैं अपने मित्र हो जाते हैं बड़े हो जाते हैं नानक तुमसे बड़े नहीं थे कबीर तुमसे बड़े नहीं थे महावीर तुमसे बड़े नहीं थे बुद्ध तुमसे बड़े नहीं थे क्राइस्ट तुमसे बड़े नहीं थे कृष्ण भी तुमसे बड़े नहीं
थे तुम्हारा ही रूप थे लेकिन सब बड़े हो गए क्यों कि उन्होंने अपने में स्थिति की और हम लोग पराए में स्थिति करते हैं इसलिए हम मारे गए और वे लोग तर गए इतना ही फर्क है जो हो गया समय बीत गया सो बीत गया लेकिन अब बात समझ गई मैं आ गई तो आप याद रखना कि सात दिन में मरने वाले हैं उस बूढ़े को तो सचमुच एकनाथ ने राज खोलकर नहीं बताया तो उसका कल्याण हुआ मैंने तो राज खोलकर तुम्हें इसलिए बताया कि तुम समझदार हो ऐसे ही राज समझते हुए भी तुम सात
दिन याद रखोगे और सच बोलता हूं कि सात दिन के अंदर ही अंदर मौत है उस मौत को सामने रखना कि आखिर कब तक कल का रविवार छुट्टी मनाएंगे खेल घूमेंगे लेकिन एक रविवार ऐसा भी तो हो सकता है इतवार के अर्थी प चले जाए सोमवार को हम फलाने यार से मिलने को जा रहे हो सकता है कि कोई ऐसा सोमवार हो कि हम शमशान में ही जाते हो मंगल को हम इससे मिलेंगे हो सकता है ऐसा भी कोई मंगल आएगा कि हम अर्थी से मिलेंगे बुद्ध को हम यह करेंगे हो सकता है बुद्ध को
बुद्ध की ना हमारा शब पड़ा हो गुरु को हम यह करेंगे ऐ करेंगे व करेंगे क्या पता गुरु को हम गुरु के द्वार जाते हैं कि यम के द्वार जाते कोई पता नहीं शुक्र को हम यह करेंगे अरे शुक्र को शुक्राचार्य जैसे ज्ञान को आते हैं कि क्या पता शुक्र जैसे योनियों की तरफ जाते हैं कोई पता नहीं शनिवार को ये करेंगे वो करेंगे पहले याद रखो सुबह उठो परमात्मा और मौत को याद कर लो कि क्या पता कौन से दिन चले जाएंगे आज सोमवार है क्या पता इस देह का अंत किसी सोमवार को हो
जाए आज मंगल है क्या पता कौन से मंगल को चले जाएं सच बोलता हूं कोई ना कोई दिन होगा इन आठ में से भगवान की कसम खाके बोल आठ दिन में मौत है सप्ताह में आठ दिन कहा जाता है लेकिन सात ही दिन होते हैं रवि सोम मंगल बुध गुरु शुक्र शनि सात ही दिन में सप्ताह में मौत होगी तो आप तो चतुर हैं समझते हैं इसलिए मौत को और परमात्मा को दोनों को सामने रखोगे तो फिर महान होने में देरी नहीं मौत को परमात्मा को सामने रखोगे तो साइन बोर्ड देखने में जरा उत्साह होगा
अपने गांव का पाटिया आ जाए तो फिर तुम चले जाना पूछने मत रहना कि मेरा रा गांव है कि तेरा गांव है तुम चले जाना फलाना गया कि नहीं गया उसका इंतजार मत करना कई लोग आश्चर्य चकित बातें करते हैं बैठते हैं वातावरण में शांत हो जाता है उनका चित्त और जब चित्त शांत होता है तो खुली आंख भी आनंद आने लगता है और चित्त शांत नहीं है तो बंद आंखें भी कुछ नहीं होता है जब जब आनंद आने लग जाए तो समझना कि अनजाने में चित्त शांत हो गया है तुम्हारे बिना परिश्रम के वातावरण
की कृपा से भगवान की संतों की कृपा करुणा से तुम्हारा मन अनजाने में ही ध्यान स्त हो गया है धारणा में आ गया तभी तुम्हें आनंद आता है लोग अजीब होते हैं कि साई मेरे पर दया करो क्या बात है कि मेरा ध्यान नहीं लगता है दया करो मेरा ध्यान नहीं लगता है चेहरा खबर दे रहा है कि अमृत पिया है एक आद घूंट झेल लिया है मैं क्या ध्यान नहीं लगता बोले नहीं सा ध्यान नहीं लगता मैं क्या क्या होता है बोले आनंद तो बहुत आता है आनंद बहुत आता है और ध्यान नहीं लगता
है अरे बड़े मिया ध्यान का फल क्या है आनंद है कि दुख है ध्यान का फल क्या है ईश्वर प्राप्ति का फल क्या है मम दर्शन फल परम अनुपा जीव पाव निज सहज स्वरूपा भगवान कहते हैं मेरे दर्शन का फल परम अनुपम है क्या कि जीव अपना स्वरूप पाले अपना सहज सुख रूप अंदर से उसको गुनगुनाने लगे उस सुख स्वरूप की अनुभूति होने लगे सुख स्वरूप की झलके आने लगे यह जरूरी नहीं है कि गुरु दीक्षा लेंगे फूंक मारेंगे गुरु जी सिर पर हाथ रखेंगे और हम नारियल देंगे पैसे देंगे बाद में गुरु अपना ब्रह्म
ज्ञान देंगे या करुणा कृपा देंगे एक कोई पंडित गुरु नहीं है सतगुरु तो बिना लिए ही दे देता है ढूंढता रहता है कोई मिल [प्रशंसा] जाए व विधि विधान बने हम शिष्य बने तभी वह कुछ देंगे बात नहीं वो तो पहले तो होलसेल में दे देते हैं बाद में हमारी श्रद्धा होती तो हम उनको गुरु मानते हैं वरना वोह गुरु मनवाने की भी इच्छा नहीं रखते क्योंकि वो तो गुरुओं के गुरु हैं विश्वात्मा है वो दो चार 10 50 25 हजार आदमी के गुरु थोड़े वोह सारे ब्रह्मांड के गुरु हैं कबीरा जोगी जगत गुरु तजे
जगत की आश जिसने जगत के पदार्थों की भीतर से आश छोड़ रखी है वह तो सारे जगत का गुरु है हम उन्हें माने ना माने तो क्या फर्क पड़ता है कबीराज जोगी जगत गुरु तजे जगत आश जो जग की आशा करे तो जग गुरु और व दास मैं श्री चरणों में जब गया था मेरे गुरुदेव के चरणों में गया था तो कोई विधि नहीं की थी उनको गुरु माना मन से तो मान लिया था लेकिन कोई विधि नहीं की थी तो ज जाते ही पंचदशी पड़ी और पहले साक्षात्कार हुआ बाद में हम गुरु माने ऐसा
भी घटना घट गई लेकिन हम पहले ही मान चुके थे जब घर से निकले तो उनके लिए श्रद्धा थी और वो जो कहेंगे ऐसा करूंगा मन से तो मैंने मान रखा था इसलिए मन से मान रखा था तो उन्होंने मन से दे दिया बाद में लोगों ने जाना कि अरम शिष्य है और वो गुरुजी है वरना तो हम घर छोड़े थे तभी सेही बस वही जाएंगे उसी उही के पास अपना बेड़ा पार होगा दूसरा कोई चारा नहीं दृढ़ संकल्प कर लिया तो हो गए गुरु ओम ओ और सतगुरु हमारे बनाने से थोड़ा बनता है जो
तुम्हारे बनाने से गुरु बनेगा व तुम्हारे तोड़ने से टूट भी जाएगा तुमने बनाया है ना तुम्हारा बनाया हुआ गुरु कब तक रहेगा जब तुम्हारी बुद्धि मलिन हुई गुरु गुरु कई नथ फको फुटाने आम राखो तुम्हारा बनाया हुआ गुरु वह अपने को गुरु नहीं मानता गुरु बनाया नहीं जाता गुरु तो हो जाता है यूनिवर्सिटी में एक सम्मेलन हुआ और एक बिल पास किया गया विश्वविद्यालय में आज के बच्चों को गुरु का आदर करना चाहिए गुरु को प्रणाम करना चाहिए शि होना चाहिए एक कानून पास किया कुछ वर्ष पहले की बात है चांसलर आदि लोग थे लेकिन
उनको पता नहीं है कि विद्यार्थी गुरु को प्रणाम करें यह कानून नहीं बनाया जाता है गुरु को प्रणाम करें यह कानून नहीं बनाया जाता और कानून के द्वारा जो प्रणाम होंगे वह ऐसे ही होंगे कल बताया था ना कप्तान की बात कप्तान जब जाता था फौज में सला मिले था तो लोग सलामी देते थे तो फिर कप्तान भीतर से आवाज आ जाती ऐसे ही तो करते हो ऐसे ही तो करते हो साथियों ने पूछा कि साहब आप क्यों चड़ जाते आपको कोई सलाम करता है कोई स्लोट मारता है नीचे के अफसर आपको करते तो आप
क्यों ऐसे गुस्से में आ जाते हो कते ऐसे ही तो करते हो उसने कहा मैं सिपाही में से प्रमोशन पाता पाता कप्तान हुआ हूं मुझे पता है कि कैसे प्रणाम होता है मैं जानता हूं बाहर से तो प्रणाम करते सलाम करते भीतर से लगता कि कब जाए यहां से तो जो कायदे बाजी से सलूट मारे जाते हैं कायदे बाजी से जो आदर किया जाता है कायदे बाजी से जो गुरु बनाया जाता है वह गुरु ठीक है कायदे बाजी से जो शिष्य बनाया जाता है वह कब तक तुम्हारे धागे में रहेगा शिष्य और गुरु का तो
पवित्र नाता होता है गुरु हो जाता है शिष्य हो जाता है तुम स्टम पम परर लाओ पांच पाच रुपए का और सिग्नेचर करो बापू की आज्ञा मानूंगा बापू का शिष्य हूं ये हूं ये हूं और फिर भी नहीं आओ तो कोई मैं कोर्ट में थोड़ा जाऊंगा तो जो शुद्ध हृदय होता है त्यों गुरुओं के लिए अपना नश्वर निछावर होता जाता है और गुरु भी जो जों हम लोगों को भीतर से निकट महसूस करता है त्यों त्यों गुरु बरसता जाता है फिर तुमने विधि से दीक्षा ली कि नहीं ली उस पर गुरु का ध्यान नहीं होता
तुम भीतर से निकट आते जाते हो भीतर से आव भाव से भरे जाते हो तो गुरु अपने आप भीतर से आता जाता है क्योंकि चेतन वस्तु का एक दूसरे के आंदोलनों का पता होता है तुम कार को याद करो कार तुम्हारे पास नहीं आएगी लेकिन कार के मालिक को खूब याद करो तो भागा भागा कार लिए हुए तुम्हारे पास आएगी ऐसे ही तुम जगत की नश्वर चीजों को याद करो तो नश्वर चीजें नहीं आएगी लेकिन जगत के अधिष्ठान को याद करो तो जगत की चीजें पाले हुए कुत्ते की ना तुम्हारे पीछे पीछे फिरेगी फिर तुम्हारी
दया पड़ जाए तो उनका उपयोग करो नहीं तो ठुकरा दो विकार उन अब क्या बताऊं व वेदांत छड़ेगा तो फिर एक आध घंटा चला जाएगा उन यक्ष और गंधर्व को अधिकार है जो आत्मज्ञानी की सेवा करने में हाथ नहीं बढ़ाते उन देवताओं को भी िकार है जो ज्ञानियों की सेवा में आनाकानी करते हो ने कसम उठा रखी है कि कहीं बुद्ध पुरुष हो कहीं ज्ञानियों में सेवा उसकी करके अपना सार्थकत्व अनुभव करो तुम एक बार ज्ञान को उपलब्ध हो जाओ यह क्या भीख मंगो की नहीं ये दे दो ये दे दो य दे दो य
दे दो कुछ नहीं चाहिए बाप थोड़ तो जो थोड़ तो मरो पछ बहुत पसारा मत करो कर थोड़े की आ देखो ये साखी कबीर की है लेकिन मैं हिम्मत करता हूं थोड़ी कबीर ज्ञानी है ज्ञानी के वचनों को टालने की हिम्मत नहीं करना चाहिए नहीं टालने चाहिए लेकिन फिर भी मैं हिम्मत करता हूं कि आधुनिक जमाने में साखी में थोड़ी आधुनिकता लाऊंगा बहुत पसारा मत करो कर थोड़े की आस बहुत पसारा जिन किया वे भी गए निराश ये प्राचीन साखी है अब कबीर की स्थिति में आकर में इसमें फिर फार भी कर देता हूं मैं
यूं कहूंगा कि बहुत पसारा मत करो कर प्रभु की आश बहुत पसारा जिन किया वे भी गए निराश क्योंकि लोग बोलेंगे थोड़ा तो कबीर जी ने कहा ले थोड़ू तो आलो लेकिन ये थोड़ा भी निकम्मा है ज्यादा भी निकम्मा है थोड़ा बहुत मिलने की तुम इच्छा मत करो तुम प्रभु की इच्छा करो बाकी का तो वो अपने आप आएगा पाश्चात्य दर्शन शास्त्री कहते हैं फर्स्ट डिजर्व एंड देन डिजायर पहले अधिकारी बनो और बाद में इच्छा करो वेदांत बोलता है छी डिजर ओनली नॉट टू डिजायर अधिकारी बनो इच्छा मत करो आप सम्राट बन जाते हैं फिर
इच्छा थोड़ी करते कि मुझे राजमहल मिले मेरे को नौकर मिल जाए मेरे को चाकर मिल जाए मेरे को रथ मिल जाए अरे तुम कलेक्टर की पोस्ट पर आ जाते हो फिर ऐसा थोड़ कहते हो कि मेरे को चपरासी मिल जाए मेरे को क्वार्टर मिल जाए व अपने आप व्यवस्था हो जाती है तुम न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठ जाते हो फिर थोड़े तुमको चिंता करनी पड़ती है कि मेरा ऑफिस का मटलानी का भर लू जरा बुहारी कर लूं वादी प्रतिवादी जरा आ जाओ वकील लोग जरा आ जाओ नहीं जज का अपनी कुर्सी पर बैठना न्यायाधीश का
अपनी चेयर पर विराजमान होना ही सारी न्यायालय में हरकत शुरू हो जाएगी सब काम होने लगेंगे ऐसे ही तुम अपनी कुर्सी पर बैठो अपने आत्म खजाने पर अरुण हो जाओ अपने असली गद्दी पर बैठो बाकी का काम तो यूं होगा अपने आप होता है कि नहीं होता देखो जरा तुम्हारे जीवन में नहीं देखे तो किसी के जीवन में देखो एक मेहमान आवे ना तो जी बाहर निक जाए हो जाए महीनों महीनों पहला तैयारी करके आवाना से न आवाना नवाना एक दो मेहमान आता है तो कितना हो जाता है बर्डन बद्रस छोटी मोटी शादी करते हो
10 पा 25 50 मेहमान आते घर में तो कितना प शुरू हो जाते तो कोई नहीं आप 500 700 800 मेहमान आया ब पहला थी तैयार बसवान तैयारी करो रात करम करो य करो पर करावा वा साधक एने भी बर्न नहीं सेवादारी से पूछो थके हो उभे हो नहीं मैनेजमेंट वालों से पूछो बोले मैनेजमेंट क्या होता है हमको तो पता भी नहीं हो गया हो गया हमसे पूछो कि बापू कितनी फिक्र है हमारी जरा भी नहीं आपसे से पूछता हूं कितनी तकलीफ है बोले जरा भी नहीं हमको जरा भी फिक्र नहीं और तुमको जरा भी
तकलीफ नहीं क्यों ऐसा क्यों अरे तुम निष्व परमात्मा की र आते हो तो बाकी का सब गौण हो जाता है और प्रकृति सहयोगी हो जाती है अपने को बोझा नहीं उठाना पड़ता है अपने को कर्तृत्व का अभिमान होता है तभी बोझा लगता है कर्तृत्व का अभिमान नहीं है देह अध्यास गल जाए परमात्मा तत्व का साक्षात्कार हो जाए तो फिर तो तुम्हारे लिए सब खेल है विनोद है विनोद मात्र व्यवहार जैनो ब्रह्म निष्ट प्रमा तुम्हारा व्यवहार विनोद जैसा हो जाए व्यवहार को इतना महत्व नहीं दोगे बस सिर पर चढ़ बैठे हृदय का कब्जा ले ले श
बहु ब तो थथ हमारे गुरुजी विनोदी बात कहा करते थे कि हमारे गांव में पुसु मल ब्राह्मण था ब्राह्मण और गांव में जब बारिश बारिश देर से होती तो हम लोग सब जाते हमारे बुजर्ग जाते तो मैं भी साथ में जाता गुरु जी लीला सा तो पुरुषु मिश्र मिस्र में बाण मिश्र तो पुरुषु ब्राह्मण के पास समझाते सब गांव वाले के भूदेव आप बताओ कैसा बरसात बरसात होगी कि नहीं होगी तो बोलता भाई देखो मैं बुढ़ापे में दो बातें नहीं बताऊंगा बात एक बताऊंगा सच बताऊं कि झूठ बोले सच बताओ व बोलता था कि ऐसे
कि देखो आखिरी बात बता दूं के दो चार बताऊ बोले एकही बात बताओ व हारी नारी सब थ जोड़ पुरुष ब्राह्मण खूब शांत होकर बोलते थे कि भाई एक ही बात बताता हूं सच्ची बात बताता हूं विश्वास करना सुन लेना बरसात पड़ेगी जा तो नहीं पड़ेगी तो जानते बोले हमसे झूठ मत बुलवा हो जा तो पड़ेगी या तो नहीं पड़ेगी मैं बोल देता हूं ओम ओ ऐसे ही संसार का हाल है या तो अनुकूलता आएगी या तो प्रतिकूलता आएगी तीसरा तो कुछ है नहीं है या तो अनुकूलता आएगी या तो प्रतिकूलता आएगी या तो अनुकूलता
पड़ेगी या तो नहीं पड़ेगी ओहो या तो यश आएगी या तो अपयश आएगी और क्या होगा तीसरा तो कोई है नहीं परमात्मा तो अपना स्वरूप है परमात्मा तो आएगा नहीं जाएगा नहीं जो आएगा वह जरूर जाएगा तुम भी जाओगे जाओगे कि नहीं जाओगे तो सब जब जाने वाला ही है तो उनका बोजा अपने सिर पर क्यों रखना राम तीर्थ दृष्टांत देते थे कि एक युवक की मंगनी हुई शादी हुई पहली बार गया ससुराल तो जरा मिठाई मिठाई का बक्सा और कपड़े लते लेकर जब पहुंचा गर्मियों के दिन थे घोड़े पर सवारी होती थी देखा कि
वो घोड़े का जो है जीन बन सब पसीने से भीग गई है बड़ी दया आई कि मैं कितना निर्दय हूं एक मैं बैठा हूं दूसरा इधर वो सामान तीसरा यह बिस्तर चौथा यह थैला ये सब इस पर बेचारे पर इतना बोजा वो युवक उतरा पीछे तो वो मिठाई की बांध द पास में बिस्तर लगा दिया इधर उधर झोला झंडी सब बांध दिया बोले कि हां अब इससे बोजा हटा लेता हूं अपने उठाओ थोड़ा बांध केही बोजा उठाना चाहिए व सब बोजा अपने सिर पर लाद कर घोड़े पर बैठ गया घोड़ा दौड़ा तो ऊपर जो लादा
था ये वो लादा था रग रग एक एक सेल जो शरीर के थे उनकी बस नाई हो गई पहुंचा ससुराल के गांव गांव वाले आए स्वागत समय करवा के समय बमय पछी पहला खाटलो लाओ अन हॉस्पिटल ले जाए व खालो लाओ ऐसे ही सारा तुम्हारे जीवन का बोजा परमात्मा रूपी घोड़े पर है और तुम बच्चों का अरे तुम बच्चों का क्या करते हो बच्चों को जन्म देना तुम्हारे हाथ की बात नहीं है बच्चों को प्रसन्न रखना तुम्हारे हाथ की बात नहीं उनकी अकल होगी तो प्रसन्न रहेंगे तुम्हारा जन्म तुम्हारे हाथ की बात नहीं तुम्हारा मौत
तुम्हारे हाथ की बात नहीं तुम रे काले बाल सफेद होने से रोकना तुम्हारे हाथ की बात नहीं जब मुख्य मुख्य काम तुम्हारे हाथ की बात नहीं तो फिर दूसरा भी सौप दे परमात्मा को डोरी सौंप के तो देख मेरा चिंत होत नहीं हरि को चिंत होए हरि को चिंत हरि क मैं रहूं निश्चिंत काम निश्चिंत माना आलसी नहीं चिंता रहित तुम कर्म करो फिर जो परिणाम आए वावा या तो बरसात पड़ेगी या तो नहीं पड़ेगी और जो लोग निश्चिंत होते हैं ना उनके कार्य भगवान की दया से होही जाते हैं ऐसे कई लोगों को मैं
जानता हूं य साई बच्ची बड़ी हो गई बड़ को फेरा फिर ले निश्चिंत हो जा अभ है कि साई ऐसी जगह प हो गया कि होना ही था कोई बड़ी बात है क्या ये नियम है कायदा है तुम जब निश्चिंत हो जाते हो तो तुम्हारा कर्म करने के लिए प्रकृति अनुकूल हो जाती है कि साई तुमने जाकर हमारे यों के अंदर चेंज कर दिया वो नहीं किसी को मानने वाले अभी तो बोलते साई का फोटो दो साई का फोटो दो साई अभी तो आपको मानने लग जाएंगे हमारे को माने चाहे नहीं माने आपका काम हो
गया बस नहीं नहीं हमारा तो काम हो गया लेकिन बापू आपका नाम हो गया क्या लाओ हाथ अपने दोनों का लाभ हो गया ओ जंगल में है तुझे मंगल जो होए तू होए तू दिल के छोड़े मकर जैसा भीतर ऐसा बाहर हो जाए जीवन कोई आपत्ति नहीं जीना इतना मजूरी से थोड़ी जिया जाता जीना तो बड़ा आनंद प्रद है दुख तो है ही नहीं लेकिन दुख लोग ऐसा बना लेते कि सुख दिखता नहीं दुखी दुख दिखता है तुम भीतर वाले से एक होकर जब हरकत करते हो तो प्रकृति और लोग तुम्हारे साथ एक हो जाते
हैं और भीतर वाले से एक एकता छोड़ देते हो और बाहर वाले को जब सजाने लगते हो तो व तुम्हें धोखा दे देते हैं तुम भीतर वाले से अलग यदि बाहर वाले को मानोगे तो बाहर वाला तुम्हारे को छोड़ देगा तुम क्षत्रियों को आत्मा से मानोगे तो क्षत्रिय लोग तुम्हारा अनादर कर देंगे तुम सेठ और साहब को परमात्मा सत्ता से अलग मानते हो अपने आत्मा से अलग मानते हो तो सेठ और साहब तुम्हारा तिरस्कार कर देंगे तुम नौकर को आत्मा से अलग मानते हो तो नौकर तुम्हारे साथ गद्दारी कर देगा और तुम पराए बच्चों को
भी अपना आत्मा मानते हो तो सब सेवादारी होकर आश्रम की सेवा करेंगे साधना करेंगे ध्यान करेंगे भजन करेंगे को एक के नौकर नथ तो टनाटन नहीं सब अपना स्वरूप मान के चलो सब अनुकूल हो जाएगा और अपने बेटों को भी को मानो तु शरीर के बेटों को अपना बेटा मत मानो ये तो शरीर के बेटे हैं शरीर की बेटियां है शरीर के मकान को अपना मकान मत मानो शरीर के दुकान को अपना दुकान मत मानो शरीर की जाति को अपनी जाति मत मानो तुम्हारी जाति तो ब्रह्म है तुम्हारी जाति के मेरे को पूछा सब लोग
यात्रा में गए तो फिर क्या हुए बोले आप जी गुरुजी गुरुजी ज क्या अब इन पंडों को ऐसे ही होगा कि साधु ऐसा है नास्तिक है जरा कर दक्षिणा दे दिया ऐसे रुप पाच रुप तो बोले गुरु जी संकल्प कराओ गुरु आपका नाम बताओ आशारा बोले आपका गोत्र बताओ मैं क्या मेरा गोत्र तो ब्रह्म ब्रह्म में से तो निकले मेरा गोत्र ब्रह्म है बोले तुम्हारा कुल में क्या ब्रह्म ओम ओम ओ ठीक है भाई ये गोत्र याद रहे तो ठीक है लेकिन मूल गोत्र तो ब्रह्म है सबका मूल गोत्र ब्रह्म है मूल गोत्र परमात्मा है
तुम्हारा मूल कुल भी परमात्मा है तुम्हारा कितनी खुश खबरिया है कि तुम्हारा कुल परमात्मा का है तुम्हारा गोत्र परमात्मा का है ओम ओम ओम और यह तुम्हें खुश करने के लिए जैसे नेता लोग भाषण में कुछ खुश करने के लिए मस्का मार देते ऐसा मैं मस्का नहीं मार रहा हूं मैं हकीकत कह रहा हूं मैं हकीकत कह रहा हूं कि तुम्हारा परमात्मा है और यदि तुम इंकार करते हो तो कर लो शास्त्रार्थ तुम्हारा गोत्र परमात्मा नहीं है यह बात तुम साबित करके दिखाओ तो मैं आपका शिष्य हो जाऊं नहीं तो मैं साबित करके बैठा हूं
कि तुम्हारा गोत्र परमात्मा है तुम्हारा कुल परमात्मा है बोलो संदेह है किसी को कल अर्ज किया था कि पांच प्रकार के भेद होते हैं और पांच प्रकार के भ्रम होते हैं तो उन पांच प्रकार के भ्रमों के कारण हम अपना कुल और अपना गोत्र कुछ अलग पक्का मान बैठे उन पांच प्रकार के भ्रमों को जरा समझ लेंगे ना तो पता चलेगा कि वास्तव में हमारा गोत्र परमात्मा है और हमारा परमात्मा आकाश पाताल में नहीं वो हमारा परमात्मा एक क्षण भी हमको छोड़कर अलग नहीं है यह भी तुमको अनुभव हो सकता है ओम ओम ओम ओम
ओम ओम देह छता जैनी दशा ते देहा तीत ते ज्ञानी ना चरण मा हो वंदन अग चुंबक में आपकी गति हो गई तो आपको याद करके कोई आदमी कोई काम का प्रारंभ करता है तो उसको कुदरत सहयोग कर देगी केवली कुंभक में आप पहुंच गए तो आपका स्मरण करते करते कोई मरा तो उसको जमदूत छू नहीं सकता पार्षदों के पास य भगवान का हम स्मरण क्यों करते हैं उन लोगों का केवली कुंभक सिद्ध है साधन काल में लिए भगवान कृष्ण राम गुरु नानक गुरु बाबा है ऐसा नहीं कि वो आते हैं और तुम्हारे को उठाकर
अपने कंधे पर और फिर स्वर्ग में ले जाते हैं नहीं उनका चिंतन करने से प्रकृति आपके लिए रात कर देती है ओम ओ केवली कुंभक जिसका हुआ उसकी ब्रह्म में स्थिति हो जाती ब्रह्मा के परमात्मा के नजदीक हो जाता है और जो परमात्मा के नजदीक हो जाता तो फिर जो प्राइम मिनिस्टर के नजदीक है तो उसके लिए इंपोर्टेंट एक्सपोर्ट इंपोर्ट के लाइसेंस बनाने में ज्यादा देर नहीं लगती है ज्यादा मेहनत नहीं लगती उसको वीजा वीजा मिलने में कोई देर नहीं लगती प्राइम मिनिस्टर के नजदीक के आदमी बन जाते ना तो उनको फिर वायुयान में बैठने
के लिए कोई बड़ी बात नहीं है उनको कोई लो लोकल में थोड़ी लटकना पड़ता है लोकल में तो उन लोगों को लटकना पड़ता है कि जिनके पास आईडिया नहीं पैसा नहीं समय नहीं परिचय नहीं जिनके पास परिचय है पुण्य रूपी पैसा है साधना रूपी आइडिया है वह तो फिर य हवाई जहाज का रास्ता है ब्रह्मज्ञान हवाई जहाज का रास्ता है मंजीरा बजाने का नहीं है व लोकल का रास्ता अलग है ओम ओत का मार्ग तो ऐसा है बस मुआ पनो वाय दो नकाम हो मरने के बाद का नहीं यही अनुभव करो मुआ पछ नो वायद
न कामो को जाने छ काल आज अत्यारे अब घड़ी साधु जोलो नगदी रोकड़ माल नगद खजाना पड़ा है व पिता तुम्हें बुला रहा है और तुम घूम रहे हो कि एक पैसा दे दे जरा सा जूता बनाना है जरा चाय पिला दे जरा फाफड़ा दे दे बोलता कि हम तो आपके वजीर हैं और आपको राजा साब राज्य देना चाहते आप राजकुमार है आप राजा का ही स्वरूप है बोले अच्छा तो मेरे रथ का है लाओ रथ चलो ऑर्डर गंगा जल लाओ ये लाओ उसी समय पूरी दरिद्रता चली गई वही दरिद्रता चली गई नहीं कि राज्य
में जाने पर वहीं उसको पता चल गया कि मैं राजकुमार हूं ऐसे आपको यही पता चल जाता कि आप आत्मा है ब्रह्म है ओम ओम ओ ओम जो धर्म में संप्रदाय में एक ही साधना पद्धति चलती है एक ही मंत्र चलता है नाम चलता है वे साधना के जगत में कंगाल है जिस संप्रदाय में जिस पंथ में एक ही पद्धति चलती है साधना की एक ही प्रकार का मंत्र चलता है वो साधना के जगत में कंगाल है वेद में अनेक अनेक मार्ग हैं इसलिए अनेक देवत्व है अनेक प्रक्रियाएं हैं व्यक्ति अनेक है उनकी संभावना अनेक
है उनकी योग्यता अनेक है इसलिए उनकी साधनाए भी अनेक होती है जिसके शरीर में पृथ्वी तत्व अधिक है वह शिव जी की उपासना करेगा तो जल्दी सफल हो जाएगा जिसके शरीर में जल तत्व अधिक है वह विष्णु की उपासना करेगा तो लाभ होगा शिव की उपासना से ना होगा इतना जिसके शरीर में तेज तत्व है वह सूर्य की उपासना करे तो जल्दी लाभ होगा दूसरे देवों से इतना लाभ नहीं होगा जिसका अनमय कोष में मन ज्यादा रहता है वह तीर्थ रटन करे तो उसे लाभ होगा जिसका प्राण में कोष में मन रहता है उसको प्राणायाम
और ध्यान लाभ देगा जिसका मनोमय कोष में मन रहता है उसको श्रद्धा प्रेम अहो भाव आदि के द्वारा उसकी यात्रा होगी जिसका विज्ञान में में मन रहता है उसके लिए तत्व का चिंतन करते करते आत्मा में डूबने का रास्ता ही उसके लिए सर्वोपरि हो जाता है और जिसका आनंदमय कोष में मन रहता है उसके लिए आनंद स्वरूप परमात्मा का बयान करते हुए जगत की भ्रांति हटने का उपदेश ही काफी है तो साधक अलग अलग होते हैं सबकी अपनी अपनी क्षमता योग्यता होती है इस देश के ऋषियों ने बड़ा उपकार किया है कि समूह में बोलेंगे
तभी भी अनेक अनेक प्रकार का बोलेंगे ताकि किसी को कुछ पल्ले पड़ जाए किसी को कुछ पल्ले पड़ जाए सबकी थोड़ी बहुत यात्रा होती ही रहे गुरु भक्ति अपनी जगह पर है ईश्वर भक्ति अपनी जगह पर है हर एक जीव को भक्त तो बनना ही पड़ता है बिना भक्त के कोई नहीं सब भक्त है सारी पृथ्वी भक्त से भरी है अ भक्त कोई नहीं कि बाबा जी हम तो बोलते नास्तिक है यह भक्त नहीं है यह भक्त नहीं है आ बिचार भक्त छ आप बापो भक्त छ आ बचार भक्त छ भक्त बिचार हो नहीं भक्त
बिचारा होता नहीं लेकिन सचमुच हम बिचारा भक्त कहते तो बिचारा है सारी पृथ्वी भक्तों से भरी है कोई देश का भक्त है कोई सत्ता का भक्त है कोई धन का भक्त है कोई जन का भक्त है कोई सुख का भक्त है कोई संपत्ति का भक्त है कोई शांति का पुजारी है तो कोई झगड़े का पुजारी है कोई देवी का भक्त है कोई देवता का भक्त है कोई भगवान का भक्त है तो कोई भैरव का भक्त है तो बिना भक्त के संसार में कोई समझदार आदमी तुमको नहीं मिगा लेकिन यह सब भक्त खंड खंड के भक्त
है यह भक्त सब एक एक परमात्मा की व्यापकता के एक एक हिस्से के भक्त हैं कोई राष्ट्र का कोई देश का ये ईश्वर के खंड खंड के भक्त है जिसको वेदांत में भक्त कहा गया है वह वेदांत का भक्त इन सब भक्तों से निराला होता है जय राम जी की तो वेदांत तुम है खंड खंड की भक्ति से रोकता नहीं लेकिन खंड खंड की भक्ति में ही तुम्हारा जीवन गवा देने से तुमको टोकता जरूर है यह तुम सब करो लेकिन तुम्हारी दृष्टि थोड़ी बदल दो खंड खंड से तो व्यवहार करो लेकिन दृष्टि अखंड की रखो
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Kabir Das Amritwani | Sant Milan Ko Jaiye Complete I संत मिलन को जाइए सम्पूर्ण पाठ I Kabirji ke Dohe
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ध्यान में ज्ञान वर्षा || Dhyan Mein Gyan Varsha || Meditation Guidance || Sant Shri Asharamji Bapu
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श्रीमद्भागवत कथा - जीवन को पूर्ण रूप से निर्दुख बनानेवाली कथा | HD | Sant Shri Asharamji Bapu
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Tensions और Problems को हटाकर Happy Life कैसे पायें ? Full HD | Sant Shri Asharamji Bapu
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सहज में समझें अध्यात्म की आखरी बात | Understand with ease the epitome of spirituality | Pujya Bapuji
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एकांतवास सत्संग - ब्राह्मीस्थिति तक पहुँचानेवाला दुर्लभ तत्वज्ञान | HD | Sant Shri Asharamji Bapu
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Live -  24X7  |  त्रिकाल संध्या - अहमदाबाद आश्रम || Sant Shri Asharamji Ashram Ahmedabad
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जीवनमुक्ति का सहज अनुभव । तत्वज्ञान का गूढ़ उपदेश | दुर्लभ सत्संग | HD | Sant Shri Asharamji Bapu
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Sant Shri Asharamji Bapu
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यह सत्संग दिमाग खोल दे अगर अच्छी तरह समझ में आ जाये तो… | HD | Sant Shri Asharamji Bapu
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मंत्र जप में दृढ़ता की यह कथा आपको चौंकाकर रख देगी | HD | Sant Shri Asharamji Bapu
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अपने आपमें बैठो | Apne Aapme Baitho | Part-1 | Sant Shri Asharamji Bapu
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Sant Shri Asharamji Bapu
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संसार के  सबसे बड़े 2 रोगों  की अनुपम दवाई | Sant Shri Asharamji Bapu | Satsang |
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Mangalmay Digital
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LIVE -  चिंचवड पुणे महा. || श्री रामा भाई  || गीता भागवत सत्संग  कार्यक्रम  11-1-2024
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Sant Shri Asharamji Ashram
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उत्पति प्रकरण  सर्ग - 37 || Shri Yogvasishth Maharamayan Path | श्री योगवाशिष्ठ महारामायण 05-09-2024
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Ashram Sandhya
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Hari Om Musical Chanting-1 Hour Healing Meditation || दिव्य 'हरि ॐ' ध्यानमय गुंजन - 60 minutes
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Sant Shri Asharamji Ashram
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EP 01 मेरे एक एक रोम में देवी देवता दर्शन दे रहे हैं ! #udiya #baba #bhaktiashram
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Bhakti Ashram
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बस इतना करके देखो - सुख-सुविधायें, मान-सम्मान आपके पास न आये तो कहना | HD | Sant Shri Asharamji Bapu
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