आज हम भारत के एक ऐसे डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोग्राम के बारे में बात करेंगे जिसको लेकर आप कह सकते हैं कि जब यह प्रोग्राम शुरू हुआ था तो तब मैं छोटा बच्चा था और बड़ी शरारत करता था इतना ही नहीं बल्कि आपको एक इंटरेस्टिंग बात और बताते हैं कि यह प्रोग्राम इतना पुराना है कि डिफेंस कोर्ड के 2. 4 पर व्यूअर उस एज ग्रुप में आते हैं जिनका उस समय जन्म भी नहीं हुआ था अब बाकी वीडियो के थंबनेल और टाइटल से तो आपको समझ में आ ही गया होगा हम किस प्रोग्राम के बारे में बात कर रहे हैं हम बात कर रहे हैं इंडियन एयर फोर्स के मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के बारे में जो कि एमआरएफए या एमएमआरसीए तो इनके नाम से भी जाना जाता है तो आज के एपिसोड में हम इस प्रोग्राम की शुरुआत से लेकर वर्तमान समय में इसका क्या स्टेटस चल रहा है और यह प्रोग्राम अपना अंतिम रूप कब देखेगा देखेगा अ या नहीं देखेगा तो इन सभी संभावनाओं पर हम बात करेंगे और साथ ही साथ ये भी जानेंगे कि इस प्रोग्राम को लेकर और इस प्रोग्राम में जितने भी फाइटर्स कंपीट कर रहे हैं तो उनके बारे में अलग-अलग डिफेंस एक्सपर्ट्स के क्या व्यूज है तो स्वागत है आप सभी का डिफेंस ज्ञान सीरीज के एक बेहद ही फ्रेश एपिसोड में सो विदाउट वेस्टिंग एनी टाइम लेट्स बिगिन तो इस एमआरएफए प्रोग्राम को शुरू करने का उद्देश्य था इंडियन एयरफोर्स की फाइटर स्क्वाड्रन की स्ट्रेंथ को बढ़ाना और इंडियन एयरफोर्स की मिग 21 एफएल और मिग 23 फाइटर्स की फ्लीट जो पुरानी हो रही थी उसको रिप्लेस करना और इसी उद्देश्य के साथ इसके लिए जो इनिशियल आरएफआई थी रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन तो वह सन 2001 में रिलीज की गई और 2001 में इनिशियल आरएफआई की रिलीज होने के बाद इस बात की उम्मीद थी कि इस प्रोग्राम के लिए जो आरएफपी है यानी कि रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल तो वह दिसंबर 2005 तक इशू किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ बल्कि इस प्रोग्राम के लिए जो रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल था वह 2005 के बजाय 28 अगस्त 2007 को रिलीज किया गया जिसमें इस बात को मेंशन किया गया कि एयरफोर्स को 126 मीडियम मल्टीरोल कॉमेट एयरक्राफ्ट की रिक्वायरमेंट है और इस पूरे प्रोग्राम की लागत थी ₹ 2000 करोड़ और यह रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल इस प्रोग्राम में कंपीट कर रहे छह वेंडर्स को इशू किया गया जिसमें रशिया अपने मि 35 के साथ स्वीडन अपने ग्रिप फाइटर के साथ फ्रांस अपने रफल के साथ और यूएस f16 फलकन और f18 सुपरनेट के साथ बाकी ब्रिटेन जर्मनी स्पेन और इटली का कंसोर्टिंग कर रहा था यानी कि टोटल छह फाइटर जेट्स थे जो कि इस प्रोग्राम के लिए कंपीट कर रहे थे और आरएफपी के मुताबिक इस प्रोग्राम में 126 एयरक्राफ्ट में से पहले के 18 एयरक्राफ्ट डायरेक्टली फ्लाई अवे कंडीशंस के तहत लिए जाने थे और जबकि बाकी के बचे एयरक्राफ्ट ट्रांसफर ऑफ़ टेक्नोलॉजी के अंडर भारत में ही मैन्युफैक्चर किए जाने थे और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के साथ-साथ इसमें 50 का ऑफसेट क्लॉज भी शामिल था और फिर इस आरएफपी के रिलीज होने के बाद इस प्रोग्राम के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू हुई जिसमें कुछ बीड्स ने इस आरएफपी का रिस्पांस देने के लिए जो डेडलाइन सेट की गई थी उसमें एक्सटेंशन भी मांगा और फिर आगे की प्रोसेस बिल्कुल वैसे ही हुई जैसे कि आमतौर पर डिफेंस डील्स में होती है अलग-अलग लेवल पर नेगोशिएशंस इक्विपमेंट की परफॉर्मेंस को टेस्ट करने के लिए उनके फीड ट्रायल्स टेक्निकल इवेलुएशन और एक-एक करके इसमें कंपीट करने वाले सभी छह फाइटर्स को इवेलुएट करने के बाद दिसंबर 2010 में इंजीनियर फोर्स चेफ की तरफ से बता दिया गया कि उनकी तरफ से सभी फाइटर्स का इवैल्यूएशन पूरा हो चुका है और अब पूरा मामला भारतीय रक्षा मंत्रालय के पास है और एयरफोर्स से उम्मीद जताई गई थी और एयरफोर्स से उम्मीद जताई थी कि जुलाई 2011 तक यह कांट्रैक्ट साइन हो सकता है और अलग-अलग पैरामीटर्स पर सभी एयरक्राफ्ट का मूल्यांकन करने के बाद अप्रैल 2011 में अनाउंस किया गया कि यूरो फाइटर टाइफून और डसॉल्ट रफाल तो इन दो एयरक्राफ्ट को इस प्रोग्राम के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है यानी कि जहां कंपटीशन छह का था छह में से कंपटीशन अब दो के बीच रह गया था और एंड में इन दो में से डसॉल्ट रफाल ने इस कंपटीशन को पूरी तरह से जीत लिया और इस बात की अनाउंसमेंट जनवरी 2012 में कर दी गई थी और डसॉल्ट रफाल के इस कंपटीशन को जीतने के अनाउंसमेंट के साथ ही ऐसा लगने लगा था कि अब यह कांट्रैक्ट साइन हो जाएगा और इंजीनियर फोर्स रफाल फाइटर्स को एक बहुत बड़ी संख्या में ऑपरेट करेगी लेकिन यह जो पूरी प्रक्रिया थी ये इतनी आसान नहीं थी बल्कि डसॉल्ट रफाल के विनर अनाउंस होने के बाद भी और ज्यादा कॉम्प्लिकेट हो गई क्योंकि पहले डसॉल्ट एविएशन ने जेट्स को प्रोड्यूस करने और उनकी टेक्नोलॉजी को हैंडल करने की एचएल की कैपेबिलिटी पर सवाल उठाए और फिर उसके बाद नेगोशिएशंस हुए और जो बातचीत थी वो 50-50 डील की तरफ बढ़ रही थी लेकिन फिर लगभग दो वर्ष के बाद फ्रांस इस बात पर सहमत हो गया कि वो पहले के 18 फल फाइटर्स भारत को भेजेगा और जो बाकी के बचे फाइटर्स हैं तो व भारत में एचएल बनाएगी और फिर नवंबर 2014 में ल्ट एविएशन की सीईओ ने इस बात की उम्मीद जताई कि इसके लिए जो फाइनल कांट्रैक्ट है तो वो मार्च 2015 तक साइन किया जाएगा लेकिन 2015 में डील साइन होने के बजाय जुलाई 2015 में तत्कालीन रक्षा मंत्री श्री मनोहर परगर जी की तरफ से राज्यसभा में बताया गया कि 126 एमएमआरसीए वाले जो डील है उसे ऑफिशियल भारत सरकार ने वापस ले लिया है और इसके बदले योजना में बदलाव किए गए और 23 सितंबर 2016 को तत्कालीन रक्षा मंत्री श्री मनोहर परकर जी और उनके फ्रेंच काउंटर पार्ट के बीच फ्रांस से ऑफ द शेल्फ 36 रफाल फाइटर्स को ही परचेस करने का कॉन्ट्रैक्ट औपचारिक रूप से साइन हुआ और जिसमें समान इंफ्लेशन एडजेस्टेड प्राइस पर 18 और रफाल फाइटर्स को लेने का ऑप्शन शामिल था और फिर 2016 में जो 36 रफल फाइटर्स की डील साइन हुई तो उसकी डिलीवरी 2019 से शुरू हुई और अब सारे 36 रफल फाइटर्स भारत को डिलीवर हो चुके हैं लेकिन 2016 में 36 रफल फाइटर्स की डील साइन होने के बाद फिर अप्रैल 2019 में इंडियन एयरफोर्स ने एक बार फिर से करीब 114 मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट की खरीद के लिए एक फ्रेश आरएफआई जारी कर दी और यह फ्रेश स्टैंडर एमआरएफए या फिर एमएमआरसीए 2. 0 के नाम से भी जाना जाता है या अगर दूसरे शब्दों में कहें तो आप यह कह सकते हैं कि एमएमआरसी वाली जो पहली वाली डील थी जो कि 2001 से शुरू हुई थी तो 2019 में उसका पुनर्जन्म हुआ है लेकिन कुछ बदलाव के साथ इसमें से सबसे प्रमुख बदलाव यह है कि जहां पहले वाले एमएमआरसीए में 126 एयरक्राफ्ट लेने थे वहीं इस फ्रेश टेंडर में केवल 114 एयरक्राफ्ट की बात की गई है दूसरा बदलाव यह है कि पहले वाले टेंडर में केवल छह ही फाइटर्स कंपीट कर रहे थे लेकिन इस mmc.
exe 2 रो फाइटर टाइफ और ल् रफल यानी कि इसमें एंट्री हुई है दो नई एयरक्राफ्ट की सुख su3 और f15ex ल 2 और बाकी f21 को नई एंट्री में काउंट करना है या नहीं करना है उसको को हम आगे डिस्कस करेंगे क्योंकि यहां पे f21 पहले वाले टेंडर में f16 की ही जगह पर है बस थोड़े बहुत थोरेट्स के साथ इसके अलावा जैसे कि पहले वाले प्रोग्राम का नाम था मीडियम मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और उसका नाम है मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट यानी कि इस नए वाले प्रोग्राम में पहले वाले के कंपैरिजन में फाइटर किस कैटेगरी का रहेगा तो उसको हटा दिया गया है पहले वाले टेंडर में रिक्वायरमेंट रखी गई थी कि जो एयरक्राफ्ट होगा उसमें 20 टन तक की मैक्सिमम टेक ऑफ वेट कैपेसिटी होनी चाहिए लेकिन ये वाली जो रिक्वायरमेंट थी इसे बाद में हटा दिया गया पहले वाले टेंडर में फोकस किया गया था कि जो पुराने मिक फाइटर्स हैं मिराज 000 फाइटर्स हैं तो उनको रिप्लेस करने के लिए अधिक से अधिक संख्या में फाइटर जेट्स को इंडक्ट किया जाए यानी कि पहले संख्या पर काफी जोर दिया गया था लेकिन अब इस नए वाले टेंडर में स्टेल टेक्नोलॉजीज जैसी एडवांसमेंट्स पर मेन फोकस किया जा रहा है और अब भारत का मेन फोकस है मल्टीरोल कैपेबिलिटीज पर ताकि वो मल्टीपल डोमस पर एक महत्त्वपूर्ण बढ़त प्राप्त कर सके फिर चाहे एरियल वरफेन हो ग्राउंड सपोर्ट हो रिकॉन सेंस हो इलेक्ट्रॉनिक वरफेन हो या ऐसा ही कुछ और अब चलिए एक-एक करके बात करते हैं कि इस एमएमआरसी 2. 2 या फिर इस एमआरएफए प्रोग्राम के जो आठ कंटेंडर्स हैं तो वो भारत को क्या खास ऑफर कर रहे हैं तो शुरुआत करते हैं साफ ग्रुप के जस 39 गपन e फाइटर से और साफ ग्रुप ने अपने गपन के एजी यानी कि नेक्स्ट जनरेशन वेरिएंट को इस कंपटीशन में उतारा है इसमें से गपन e सिंगल सीट वेरिएंट है और गपन f ल सीट वेरिएंट और जिसे गपन के पहले वाले मॉडल्स की प्रूवन कैपेबिलिटीज के आधार पर बनाया गया है इसमें अत्याधुनिक एविनिक्स इंप्रूव रडार सिस्टम एडवांस सर्वाइवेबिलिटी फीचर्स ये सभी देखने को मिलते हैं ये एक सिंगल इंजन एयरक्राफ्ट है जिसमें जनरल इलेक्ट्रिक का f414 g इंजन इस्तेमाल हुआ है इसकी टॉप स्पीड है ma2 और कॉम्बैट रेडियस से लगभग 1500 किमी कॉम्बैट रेडियस का मतलब होता है कि कोई भी एयरक्राफ्ट नॉर्मल लोड के साथ अपने बेस से कितनी अधिक दूरी तक बिना रिफ्यूलिंग के जाके वापस आ सकता है बाकी इस कंपटीशन को जीतने के लिए साप ग्रुप सारे प्रयासों में लगी हुई है जिसके तहत कई अलग-अलग ऑफर्स भी भारत को दिए गए जैसे कि कंपनी का कहना है कि अगर इस कंपटीशन में उनके क्रिप्टन फाइटर को चुना जाता है तो वह हर साल इंडिन एयर फोर्स के लिए 20 से 25 फाइटर्स को मैन्युफैक्चर करने का प्रॉमिस करते हैं बाकी इस एयरक्राफ्ट को इक्विप किया गया leonardo's डिटेक्शन ट्रैकिंग और एंगेजमेंट कैपेबिलिटीज प्रोवाइड करती है और जबकि पैसिव सर्विलेंस और टारगेटिंग को एनहांस करने के लिए यह इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक सिस्टम के साथ भी आता है और यह एरका मीटर बीवीआर मिसाइल आयस एयर टू एयर मिसाइल्स के साथ कई अलग-अलग तरह के गाइडेड और अनगाइडेड बॉम्ब्स को कैरी करता है और इसे वर्तमान समय में एक्टिव दुनिया के सबसे बेस्ट सिंगल इंजन 4 प्लस प्लस जनरेशन के एयरक्राफ्ट में काउंट किया जाता है अब अगर बात करें इस कंपटीशन के दूसरे कंटेंडर की तो वो है बो का f15ex ल 2 जो कि एक ऑल वेदर मल्टीरोल स्ट्राइक फाइटर है और यह य के आइकॉनिक f15 सीरीज के फाइटर्स का लेटेस्ट मेंबर भी है जो कि अति आधुनिक एविनिक्स हाई पलट कैपेसिटी और मॉडर्नाइज सिस्टम्स के साथ आता है यह ट्विन इंजन एयरक्राफ्ट है और इसको पावर देने के लिए जनरल इलेक्ट्रिक के f110 g 129 इंजन का इस्तेमाल किया गया है इसके टॉप स्पीड है मै 2. 5 और कॉमेट रेडियस है 1770 किमी बाकी यह एयरक्राफ्ट सुपीरियर टारगेट डिटेक्शन ट्रैकिंग और एंगेजमेंट कैपेबिलिटीज के लिए ए एज 82 v ए ए रडार से इ कूप्ड है और जबकि इलेक्ट्रॉनिक वरफेन और सर्वाइवेबिलिटी को बढ़ाने के लिए इसमें ईगल पैसिव एक्टिव वार्निंग एंड सर्वाइवेबिलिटी सिस्टम का भी इस्तेमाल किया गया है इस एयरक्राफ्ट की जो वेपन कैपेसिटी है वो बहुत ही कमाल की है क्योंकि ये लगभग 13000 किग्रा तक के ऑर्डिनेंस को कैरी कर सकता है जिसमें ए 120d एमर मिसाइल्स ए 9x साइड वंडर अलग-अलग वैरायटी के एयर टू ग्राउंड मुनिशंस प्रेसीजन गाइडेड बम्स इस तरह के सभी हथियार आते हैं बाकी इसका एडवांस फ्लाई बाय वायर सिस्टम एडवांस कॉकपिट डिस्प्ले जॉइंट हेलमेट माउंटेड क्यूंग सिस्टम तो ये सभी चीजें पायलट के सिचुएशन अवेयरनेस को ऑप्टिमाइज करती और उसके ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बढ़ाती हैं और एक और बात इस ईल प्लेटफॉर्म का भी अभी तक ऑफिशियल कॉमेट क्रैश का कोई भी रिकॉर्ड नहीं है और इसे दुनिया के सबसे बेस्ट मल्टीरोल एयर सुटी फाइटर्स में गिना जाता है इसके बाद हमारा अगला कंटेंडर है रशिया का सुखोई एय 35 फंर e और यह भी एक ट्विन इंजन मल्टीरोल फाइटर है और यह रशिया के s27 का ही सबसे एडवांस और इंप्रूव्ड डेरिवेटिव भी है इसमें सेटन al4 f1s थ्रस्ट वेक्टरिंग इंजंस लगे हुए हैं और इस लिस्ट में मौजूद आठ कंटेंडर्स में से इकलौता एयरक्राफ्ट जिसके पास थ्रस्ट फैक्टरिंग कैपेबिलिटी है इसकी टॉप स्पीड है मै 2.
25 इसके कॉमेट रेंज है 3600 किमी इसकी जो पीएस है रडार है वह 400 किमी की दूरी तक टारगेट को डिटेक्ट कर सकती है 30 टारगेट्स को एक साथ ट्रैक कर सकती है और आठ टारगेट्स को एक साथ इंगेज कर सकती है अगर आसान शब्दों में कहें तो su3 5 एयरफोर्स द्वारा ऑपरेट किए जाने वाले su3 एमकेआई का एक बेटर अपग्रेड पैकेज साबित हो सकता है इसके बाद इस लिस्ट का अगला नाम है मेन m 35 यह एक 4 प् प्स जनरेशन का मल्टीरोल फाइटर है और इसे आप m 29 एयरक्राफ्ट का एडवांस एवल्यूशन कह सकते हैं क्योंकि m 29 के कंपैरिजन में m 35 में एनक्स वेनरी इसके कॉम्बैट कैपेबिलिटीज इन सभी को महत्त्वपूर्ण तरीके से इंप्रूव किया गया है इसको पावर देने के लिए दो क्लिम r 33m के आफ्टर बर्निंग टर्बो फैन इंजंस इस्तेमाल होते हैं इसकी टॉप स्पीड है मै 2. 25 कॉमेट रेंज है 1000 किमी आगे बाय डिफॉल्ट इसमें थ्रस्ट वेक्टरिंग कैपेबिलिटी नहीं आती है लेकिन हां कस्टमर के रिक्वायरमेंट पर इसे भी थ्रस्ट वेक्टरिंग कैपेबिलिटी दी जा सकती है हालांकि 29 का एडवांस वर्जन होने के बावजूद भी जो मिग 35 है तो प्रोडक्शन के मामले में अभी वो काफी कम है और उसको बैटल ग्राउंड पर टेस्ट किया जाना बाकी है और यह एयरक्राफ्ट एमएमआरसी के पहले वाले टेंडर में भी था लेकिन उस टेंडर में ट्रायल्स के दौरान ट्रायल्स के दौरान इसके जो इंजंस थे वो पर्याप्त मात्रा में थ्रस्ट जनरेट करने में सक्षम नहीं पाए गए थे जिसके चलते कंपटीशन से बाहर हो गया था इसके बाद इस लिस्ट का अगला नाम है बो का f18 e सुपर होर्नेट जिसकी सर्विस में एंट्री हुई थी अर्ली 2000 में और जो ये सुपर hornet's है जो कि बड़े साइज के एयर फ्रेम एन हैंस एविनिक्स इंक्रीज फ्यूल कैपेसिटी इन सभी के साथ आता है यह भी दो इंजन वाला एयरक्राफ्ट है और इसमें जनरल इलेक्ट्री के f414 400 टर्बो फैन इंजंस का इस्तेमाल किया गया है इसकी टॉप स्पीड है मै 1.