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क़यामत || The Day Of Judgement | Qayamat ka Manzar | End of The World

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1.63M3,298 Palabras16m readGrade 18
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कयामत एक दिन तमाम दुनिया इंसान हैवान जिन फरिश्ते आसमान और जो कुछ इनमें है सब फना हो जाएंगे अल्लाह के सिवा कुछ बाकी ना रहेगा इसी को कयामत आना कहते हैं मेरे प्यारे दोस्तों कयामत आने से पहले कुछ कयामत की निशानियां जाहिर होंगी और हम आपको इस वीडियो में कयामत आने से लेकर कयामत आने के बाद और दज्जाल से लेकर मेहंदी अलैहि सलाम ईसा अलैहि सलाम और याजूज और माजूज जन्नत दोजख इन सबके बारे में बताने वाले हैं तो आप लोगों से गुजारिश है कि आप लोग इस वीडियो को पूरा देखें और हो सके तो
अपने दोस्तों और घर वालों को भी शेयर करके दिखाएं कयामत आने की पहली निशानियां में खस यानी तीन जगह आदमी जमीन में धस जाएंगे पूरब में पश्चिम में और अरब में इल्म दीन उठ जाएगा जे हालत की कसरत होगी शराब और जीना की ज्यादती होगी और इस बेहयाई के साथ होगी कि जैसे गधे घोड़ा खाते हैं मर्द कम होंगे औरतें ज्यादा होंगी यहां तक कि एक मर्द की सरपरस्ती में 50 औरतें होंगी माल की ज्यादती होगी अरब में खेती और बाग और नहरें जारी होंगी नहरें फरात अपने खजाने खोल देगी और वह खजाना सोने के
पहाड़ होंगे मर्द अपनी औरत के कहने में होगा मां-बाप की ना सुनेगा दोस्तों से मेल झोल रखेगा और मां-बाप से जुदाई गाने बजाने की कसरत होगी वद का और ना हल सरदार बनाए जाएंगे जलील जिनको तन का कपड़ा ना मिलता था वो बड़े-बड़े महलों पर इतराए गे मस्जिद में लोग चिल्लाए इस्लाम पर कायम रहना इतना कठिन होगा जैसे मुठी में अंगारा लेना यहां तक कि आदमी कब्रस्तान में जाकर तमन्ना करेगा कि काश मैं इस कब्र में होता वक्त यानी टाइम में बरकत ना होगी यहां यहां तक कि साल सिर्फ महीना के और महीना सिर्फ हफ्ता
के और हफ्ता सिर्फ दिन के और दिन ऐसा हो जाएगा जैसे किसी चीज को आग लगी और जल्द भड़क कर खत्म हो गई यानी वक्त बहुत जल्द जल्द गुजरेगा दरिंदे जानवर आदमी से बात करेंगे सूरज पश्चिम से निकलेगा इस निशानी के जाहिर होते ही तौबा का दरवाजा बंद हो जाएगा इस वक्त में इस्लाम लाना कुबूल ना होगा ई के अलावा बड़े दज्जाल के 30 दज्जाल और होंगे जो सब नबी होने का दावा करेंगे हालांकि नबूवत खत्म हो चुकी है हमारे नबी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बाद कोई नबी ना होगा इन दज्जाल में बहुत से
गुजर चुके और जो बाकी हैं जरूर होंगे ंजा यह काना होगा इसके एक ओंक होंगी और खुदाई का दावा करेगा इसके माथे पर काफ फेरे लिखा होगा यानी काफिर जिसको हर मुसलमान पढ़ेगा और काफिर को नाना दिखाई देगा यह बहुत तेजी से पूरी दुनिया का सैर करेगा 40 दिन में हरमैन शरीफे के सिवा तमाम रूहे जमीन का गश्त करेगा 40 दिन में पहला दिन साल भर के बराबर होगा और दूसरा दिन महीना भर के बराबर और तीसरा दिन हफ्ता के बराबर और बाकी दिन 2424 घंटे के होंगे इसका फिना बहुत सख्त होगा एक बाग और
एक आग इसके साथ होगी जिसका नाम जन्नत दोजख रखेगा जहां जाएगा उनको साथ लिए होगा उसकी जन्नत दरअसल आग होगी और उसका जहन्नम आराम की जगह होगी लोगों से कहेगा कि हमको खुदा मानो जो उसे खुदा कहेगा उसे अपनी जन्नत में डालेगा और जो इंकार करेगा उसे अपने जहन्नम में फेंक देगा मुर्दे लाएगा पानी बरसाए जमीन को हुक्म देगा वह सब्जे उगाए गी वीराने में जाएगा तो वहां के दफन शहद की मक्खियों की तरह दल के दल उसके साथ हो जाएंगे इस किस्म के बहुत से शब्द दिखाएगा और हकीकत में यह सब जादू के करिश्मे
होंगे वाक में कुछ ना होगा इसीलिए उसके वहां से जाते ही लोगों के पास कुछ ना रहेगा जब हरमैन शरीफे में जाना चाहेगा तो फरिश्ते उसका मुंह फिर देंगे दज्जाल के साथ यहूदी की फौज होगी और पूरी दुनिया में कुफ्र फैल जाएगा फिर हजरत इमाम मेहदी अलैहि सलाम आएंगे और आप हुजूर अलैहि सलातो वस्सलाम की औलाद में हसनी सैयद होंगे आप इमाम व मुस्तैद होंगे कयामत के करीब जब तमाम दुनिया में कुफ्र फैल जाएगा और इस्लाम सिर्फ हरमन शरीफे ही में रह जाएगा औलिया और अब्दाल सब वहीं हिजरत कर जाएंगे रमजान शरीफ का महीना होगा
काबा शरीफ का तवाफ कर रहे होंगे हजरत इमाम मेहंदी अलैहि सलाम भी वहां मौजूद होंगे औलिया उन्हें पहचानेंगे और तमाम मुसलमान को उनसे बैत लेने को कहेंगे लेकिन वह सब इंकार करेंगे तो गैब से आवाज आएगी यह अल्लाह का खलीफा मेहदी है उसकी बात सुनो और उसका हुक्म मानो तो फिर तमाम मुसलमान उनके हाथ पर बैत करेंगे फिर हजरत इमाम मेहदी रदी अल्लाह अन्हो सबको अपने साथ लेकर मूल के शाम आ जाएंगे फिर हजरत ईसा अलैहि सलाम का आसमान से उतरना होगा जब दज्जाल सारी दुनिया फिर फिरा करर मुल्के शाम को जाएगा उस वक्त हजरत
ईसा अलैहि सलाम दमिश्क की जामे मस्जिद के पूर्वी मीनार पर आसमान से उतरेंगे यह सुबह का वक्त होगा फजर की नमाज के लिए इकामत हो चुकी होगी हजरत इमाम मेहदी अलैहि सलाम नमाज पढ़ाए और उधर दज्जाल मलून हजरत ईसा अलैहि सलाम की सौस की खुशबू से पिघलना शुरू होगा जैसे पानी से नमक पिघलता है और आपकी सांस की खुशबू वहां तक जाएगी जहां तक निगाह पहुंचती है दज्जाल भागेगा आप उसका पीछा करेंगे और उसकी पीठ में नेज मारेंगे इससे वह वासिल जहन्नम होगा फिर हजरत ईसा अलैहि सलाम खिंची को कत्ल करेंगे उसके बाद याजूज माजूज
निकलेगा यह एक कौम है याफ बिन नूह अलैहि सलाम की औलाद से इनकी तादाद बहुत ज्यादा है ये जमीन में फसाद करते थे बाहार के मौसम में हरी चीजें सब खा जाते और सूखी चीजों को लाद ले जाते आदमियों को भी खा लेते और जंगली जानवरों सांपों बिछु तक को चट कर जाते यह सब देखकर हजरत बुलकर नैन ने उन्हें दीवार खींच कर उनका आना रोक दिया लेकिन जब दज्जाल को कत्ल करके अल्लाह के हुक्म से हजरत ईसा अलैहि सलाम मुसलमानों को कोहेतूर पर ले जाएंगे तब दीवार तोड़कर यह याजूज व माजूज निकलेंगे और जमीन
में बड़ा फसाद मचाएंगे लूटमार कत्ल वगैरह करेंगे फिर अल्लाह ताला हजरत ईसा अलैहि सलाम की दुआ से उन्हें हलाक व बर्बाद कर दे फिर जितने यहूदी ईसाई बचे रहे होंगे वह आप पर ईमान लाएंगे उस वक्त तमाम जहां में दीन एक दीन इस्लाम होगा और मजहब एक मजहब अहले सुन्नत होगा और उस वक्त का बच्चे सांप से खेलेंगे शेर और बकरी एक साथ चड़ेंगे आप निकाह करेंगे और औलाद भी होगी 40 बरस तक रहेंगे और बाद वफात रोज अनवर में दफन हो उसके बाद दाब वतुल अर्ध निकलेगा यह एक अजीब शक्ल का जानवर है जो
कि कोहे सफा से निकलेगा तमाम शहरों में बहुत जल्द फिरे फसाहट से कलाम करेगा उसके हाथ में हजरत मूसा अलैहि सलाम का आसा और हजरत सुलेमान की अंगूठी होगी असा से मुसलमान के माथे पर एक चमकदार निशान लगाएगा और अंगूठी से काफिर के माथे पर एक काला धब्बा उस वक्त तमाम मुस्लिम व काफिर अला निया जाहिर होंगे यानी खुल्लम खुल्ला पहचाने जाएंगे यह निशानी कभी ना बदलेगी और जो लोग ईमान लाना चाहेगा वह कभी हरगिज ईमान ना लाएगा और जो मुसलमान है हमेशा ईमान पर कायम रहेगा हजरत ईसा अलैहि सलाम की वफात के बाद जब
कयामत आने को सिर्फ 40 बरस रह जाएंगे तब एक ठंडी खुशबूदार हवा चलेगी जो लोगों को बगलो के नीचे से गुजरेगी जिसका असर यह होगा कि मुसलमान की रूह निकल जाएगी और काफिर ही काफिर रह जाएंगे उन्हीं काफिरों पर कयामत आएगी यह चंद निशानियां इस वीडियो में बयान की गई उनमें से बाज जाहिर हो चुकी और कुछ बाकी हैं जब निशानियां पूरी हो जाएंगी और मुसलमानों की बगलो से वह खुशबूदार हवा गुजरेगी जिससे तमाम मुसलमानों की वफात हो जाए तो उसके बाद फिर 40 बरस का जमाना ऐसा गुजरेगा जिसमें किसी को औलाद यानी बच्चे पैदा
ना होगी यानी 40 बरस से कम उम्र का कोई ना रहेगा और दुनिया में काफिर ही काफिर हो अल्लाह कहने वाला कोई ना होगा कोई अपनी दीवार लीप होता होगा कोई खाना खाता होगा मतलब सब अपने-अपने काम में लगे होंगे कि एकाएक अल्लाह ताला के हुक्म से हजरत इसरा फील अलैहि सलाम सूर फुकें पहले उसकी आवाज हल्की होग बाद में धीरे-धीरे बहुत तेज हो जाएगी लोग कान लगाकर उसकी आवाज सुनेंगे और बेहोश होकर गिर पड़ेंगे और मर जाएंगे फिर आसमान जमीन दरिया पहाड़ यहां तक कि खुद सूर और इजराफिल और तमाम फरिश्ते फना हो जाएंगे
उस वक्त वक्त सिवा अल्लाह वाहिद हकीकी के कोई ना होगा फिर जब अल्लाह ताला चाहेगा इसरा फील अलैहि सलाम को जिंदा करेगा और सूर को पैदा करके दोबारा फूंकने का हुक्म देगा और सूअर फूंक ही तमाम अव्वन व आखरी फरिश्ते इंसान जिन हैवान सब मौजूद हो जाएंगे लोग कब्रों से निकल पड़ेंगे उनका आमाल नामा उनके हाथ में दिया जाएगा और हश्र के मैदान में लाए जाएंगे यहां हिसाब जजा के इंतजार में खड़े हो जमीन तांबे की होगी सूरज निहायत तेजी पर सर से बहुत करीब हो गर्मी की सख्ती से भेजे खोलते होंगे जबाने सूख कर
कोटा हो जाएंगी बाजों की मुंग से बाहर निकल आएंगी पसीना बहुत आएगा किसी के टखने तक किसी के घुटने तक किसी के गले तक किसी के मुंह तक जिसका जैसा अमल होगा वैसी ही तकलीफ होगी फिर पसीना भी निहायत बदबूदार होगा इसी हालत में बहुत देर हो जाएगी 5 हज बरस का तो वह दिन होगा और इसी हालत में आघा गुजर जाएगा लोग सिफारिश तलाश करेंगे जो इस मुसीबत से छुटकारा दिलाए और जल्द फैसला हो सब लोग मशवरा करके हजरत आदम अलैहि सलाम के पास जाएंगे वह फरमाए हजरत नूह के पास जाओ वह हजरत इब्राहिम
के पास भेजेंगे हजरत इब्राहिम हजरत मूसा अलैहि सलाम के पास जाने को कहेंगे हजरत मूसा हज ईसा अलैहि सलाम के पास भेजेंगे हजरत ई हमारे आखरा मौला रहमत आलम सरदार अंबिया मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास भेजें जब लोग हमारे हुजूर से फरियाद करेंगे और शफात की दरख्वास्त लाएंगे तो हुजूर फरमाएंगे कि मैं इसके लिए तैयार यह फरमा करर बारगाह इलाही में सजदा करेंगे अल्लाह ताला फरमाए ऐ मोहम्मद सर उठाओ कहो सुना जाएगा मा पाओगे शफात करो कबूल की जाएगी अब हिसाब शुरू होगा भिजाने अमल में आमाल तोतले जाएंगे अपने ही हाथ पांव बदन
के आजा अपने खिलाफ गवाही दें जमीन के जिस हिस्से पर कोई अमल किया था वह वह भी गवाही देने को तैयार होगा ना कोई यार होगा ना मददगार ना बाप बेटे के काम आवे ना बेटा बाप के आमाल पूछे जा रहे हैं जिंदगी भर का सब किया हुआ सामने है ना गुनाह से इंकार कर सकता है ना कहीं से नेकियों मिल सकती इस बेबसी के वक्त में दस्तगीर बे कसम हुजूर पुर नूर महबूब खुदा मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम काम आएंगे और अपने मानने वालों की शफात फरमाए हुजूर की शफात कई तरह की होगी बहुत
से लोग आपकी शफात से बेहिसाब जन्नत में दाखिल होंगे और बहुत से लोग जो दोजख के लायक हो हुजूर की सिफारिश से दोजख से बच जाएंगे और जो गुनहगार मुसलमान दोजख में पहुंच चुके होंगे वह हुजूर की शफात से दोजख से निकाले जाए जन्नति हों की शफात करके उनके दर्जे बुलंद कराएंगे हुजूर के अलावा बाकी अंबिया सहाबा लमा औलिया शोहदा हुन फाज हुज्जाज भी शफात करें लोग लमा को अपने ताल्लुकात याद दिलाएंगे अगर किसी ने आलिम को दुनिया में वजू के लिए पानी लाकर दिया होगा तो वह भी याद दिलाकर शफात के लिए कहेगा और
वह उसकी शफात करे यह कयामत का दिन जो हजार बरस का दिन होगा जिसकी मुसीबतें वि शुमार व ना काबिले बर्दाश्त होंगी यह दिन अंबिया औलिया सालेहीन के लिए इतना हल्का कर दिया जाएगा कि मालूम होगा कि इसमें इतना वक्त लगा जितना एक वक्त की फर्ज नमाज में लग बल्कि इससे भी कम यहां तक कि बाजों के लिए तो पलक झपक में सारा दिन तय हो जाए सबसे बड़ी नेमत जो मुसलमानों को उस दिन मिलेगी वह अल्लाह ताला का दीदार होगा अब इसके बाद आदमी को हमेश की के घर जाना है किसी को आराम का
घर मिलेगा जिसके ऐश व आशा इश की कोई इंतिहा नहीं इसको जन्नत कहते हैं किसी को तकलीफ के घर में जाना पड़ेगा जिसकी तकलीफ की कोई हद नहीं उसे जहन्नम और दोजख कह इनका इंकार करने वाला काफिर है जन्नत दोजख बन चुकी है और अब मौजूद हैं यह नहीं कि कयामत के दिन बनाई जाएंगी कयामत हश्र हिसाब सवाब अजाब जन्नत दोजख सबके वही मानी है जो मुसलमानों में मशहूर हैं लिहाजा जो आदमी इन चीजों को तो हक कहे मगर इनके मानी कुछ और कहे मसलन यह कहे कि सवाब के मानी इन चीजों का मुनकर है
और जो मुनकर है वह काफिर कयामत बेशक जरूर कायम होगी इसका इंकार करने वाला काफिर है हश्र रूह और जिस्म दोनों का होगा जो कहे सिर्फ रूह उठेंगी जिस्म जिंदा ना होंगे वह भी काफिर है दुनिया में जो रूह जिस बदन में थी उस रूह का हश्र उसी बदन में होगा ऐसा नहीं कि नया बदन पैदा करके उसमें रूह डाली जाएगी बदन की अज्जा अगरचे मरने के बाद इधर ऊपर हो गए और जानवरों की खुराक हो गए मगर अल्लाह ताला उन सब बॉडी पार्ट को जमा करके कयामत के दिन उठाएगा हिसाब हक है आमाल का
हिसाब होगा मीजान हका है यह एक तराजू होगी इसके दो पल्ले होंगे इस पर लोगों के अच्छे बुरे अमल तोतले जाएंगे पूल सिरात हक है यह एक पुल है जो जहन्नम के ऊपर बाल से ज्यादा बारीक और तलवार से ज्यादा ते जन्नत का रास्ता है सबको इस पर चलना होगा काफिर ना चल सकेगा और जहन्नम में गिर जाएगा मुसलमान पार हो जाएंगे कोई तो इतनी जल्दी जैसे बिजली चमकी अभी इधर थे अभी वो घर पहुंच गए कोई तेज हवा की तरह कोई तेज घोड़े की तरह कोई धीरे-धीरे कोई गिरते पड़ते कांपते लंगड़ा जितना अच्छा अमल
होगा उतनी ही जल्दी पार होगा हौज कौसर जो हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को दिया गया है हक है उसकी लंबाई एक महीना का रास्ता है और उतनी ही चौड़ाई है उसके किनारे सोने के हैं उन पर मोती के कुब्बे बने हैं उसकी तह मुश्क की है उसका पानी दूध से ज्यादा सफेद और छत से ज्यादा मीठा है और मुश्क से ज्यादा खुशबूदार है जो उसका पानी एक बार पिएगा कभी प्यासा ना होगा उस पर पानी पीने के बर्तन सितारों से भी गिनती में उसमें जन्नत से दो नहरें ूरे हैं एक सोने का दूसरा चांदी
का मकाम महमूद अल्लाह ताला अपने हबीब मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को मकाम महमूद देगा जहां अगले पिछले सब आपकी तारीफ करेंगे लेवा उल हमद यह एक झंडा है जो हमारे आका मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलाही वसल्लम को कयामत के दिन मिलेगा जिसके नीचे हजरत आदम अलैहि सलाम से लेकर कयामत तक जितने मुसलमान हुए हैं नबी वली सब इसी झंडे तले जमा हो जन्नत जन्नत एक बहुत बड़ा अच्छा घर है जिसको अल्लाह ताला ने मुसलमानों के लिए बनाया है उसकी दीवार सोने चांदी की ईटों और मुश्क के गारे से बनी जमीन जाफरान व अंबर की है
कंकरिया की जगह मोती जवाहरात है इसमें जन्नति हों के रहने के लिए निहायत खूबसूरत हीरे जेवरात और मोती के बड़े-बड़े महल और खेमे हैं जन्नत में 100 दर्जे हैं हर दर्जा की चौड़ाई इतनी है जितनी जमीन से आसमान तक दरवाजे इतने चौड़े हैं कि एक बाजू से दूसरे बाजू तक तेज घोड़ा 70 बरस में पहुंचे जन्नत में ऐसी नेमतें होंगी जो किसी के ख्वाबो ख्याल में भी नहीं आती तरह-तरह के फल मेवे दध शहद शराब जन्नत की शराब में ना बू होगी ना नशा और अच्छे-अच्छे खाने बढ़िया-बढ़िया कपड़े जो दुनिया में कभी किसी को नसीब
ना हुए वह जन्नति हों जाएंगे खिदमत के लिए हजारों साफ सुथरे गलमा और सोहबत के लिए सैकड़ों हूरें मिलेंगी जो इतनी खूबसूरत हैं कि अगर कोई इनमें से दुनिया की तरफ झांके तो उसकी चमक और खूबसूरती से सारी दुनिया के लोग बेहोश हो जाएं बहिश्त में ना नींद आएगी ना बीमारी होगी ना कोई डर होगा ना कभी मौत आएगी ना किसी किस्म की कोई तकलीफ होगी बल्कि हर तरह का आराम होगा और हर ख्वाहिश पूरी होगी और सबसे बढ़कर नेमत अल्लाह ताला का दीदार होगा दोजख यह भी एक घर है इसमें धुप अंधेरी और तेज
काली आग है जिसमें रोशनी का नाम नहीं यह बदक और काफिरों के रहने के लिए बनाया गया है काफिर इसमें हमेशा कैद रखे जाएंगे इसकी आग दम बदमड़ती रहेगी जहन्नम की आग इतनी तेज है कि सुई के नाके के बराबर खोल दिया जाए तो तमाम जमीन वाले सब के सब उसकी गर्मी से मर जाएं अगर जहन्नम का कोई दरोगा दुनिया में आ जाए तो उसकी डरावनी सूरत देखकर तमाम लोगों की जान निकल जाए कोई जिंदा ना बचे जहन्नम यों को तरह-तरह का अजाब दिया जाएगा बड़े-बड़े सांप बिच्छू काटेंगे भारी-भारी हथौड़ से सर को चला जाएगा
भूख प्यास बहुत लगेगी तेल के तलछट के ऐसा खोलता पानी और पीप पीने को कांटेदार रीला फूल खाने को मिलेगा जब उस फल को खाएंगे तो यह गले में रुक जाएगा उसके उतारने को पानी मांगेंगे तो खोलता पानी दिया जाएगा उसके पीने से आंतों के टुकड़े टुकड़े होकर बह प्यास इस बला की होगी कि इसी पानी पर तोस के मारे हुए ऊंट की तरह गिरेंगे कु प्रकार जब अजाब से आजिज आकर मौत की तमन्ना करेंगे और मौत भी ना आएगी तो आपस में मशवरा करके जहन्नम के दारोगा हजरत मलिक अलैहि सलाम को पुकार कर कहेंगे
कि अब अपने रब से हमारा कस्सा तमाम करा दो हजरत मालिक हजार बरस तक ना देगे हजार बरस के बाद कहेंगे मुझसे क्या कहते हो उससे कहो जिसकी नाफरमानी की है तब फिर हजार बरस तक अल्लाह ताला को उसके रहमत के नामों से पुकारेंगे वह हजार बरस तक जवाब ना देगा इसके बाद फरमाए दूर हो जहन्नम में पड़े रहो मुझसे बात ना करो उस वक्त कुफर हर किस्म की खैर से ना उम्मीद हो जाए और गधे की आवाज की तरह चिल्लाकर रोएंगे पहले आंसू निकलेगा जब आंसू खत्म हो जाएगा तो खून रोएंगे रोते राते गालों
में खं कों की तरह गड्ढे पड़ जाएंगे रोने का खून और पीप इतना होगा कि अगर कश्तियों डाली जाए तो चलने लगे जहन्नम यों की शक्ल ऐसी बुरी होगी कि अगर कोई जहन्नम दुनिया में उसी सूरत पर लाया जाए तो तमाम लोग उसकी बदसूरत और बदबू की वजह से मर जाए आखिर में काफिरों के लिए यह होगा कि हर काफिर को उसके कुद के बराबर संदूक में बंद करेंगे फिर आग भड़का जाएंगे और आग का फुफल लगाएंगे फिर यह संदूक आग के दूसरे संदूक में रखा जाएगा और उन दोनों के बीच में आग जलाई जाएगी
और उसमें भी कुफ लगा दिया जाएगा फिर उसी तरह इस संदूक को एक और संदूक में रखकर आग का कुफल लगाकर आग में दिया जाएगा तो अब हर काफिर यह समझेगा कि इसके सिवा अब कोई आग ना रहा और यह अजाब बाला अजाब है और अब हमेशा इसके लिए अजाब ही रहेगा जो कभी खत्म ना होगा जब सब जन्नती जन्नत में पहुंच जाएंगे और जहन्नम में सिर्फ वही लोग रह जाएंगे जिन्हें हमेशा वहां रहना है उस वक्त जन्नत और दोजख के बीच में मौत मेड़ की शक्ल मिलाकर खड़ी की जाएगी फिर एक पुकारने वाला जन्नत
वालों को पुकारेगा वह डरते हुए झांक के कि ऐसा ना हो कि यहां से निकलने का हुक्म हो फिर जहन्नम हों को पुकारे वह खुश होकर झांक कि शायद इस मुसीबत से छुटकारे का हुक्म हो फिर उनसे पूछेगा कि इसे पहचानते हो सब कहेंगे हां यह मौत है फिर वह जिबाह कर दी जाएगी और कहेगा ऐ जन्नत वालों हमेशा कीी है अब मरना नहीं और ए दोज खियो हमेश की है अब मरना नहीं उस वक्त जन्नति हों को खुशी पर खुशी होगी और जहन्नम हों को गम के ऊपर ग्रम तो सब्सक्राइब योर चैनल
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