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गणेश चतुर्थी विशेष | सभी कष्टों व संकटों से मुक्ति दिलानेवाली कथा | HD | Sant Shri Asharamji Bapu

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Sant Shri Asharamji Bapu
झाल ओम श्री गणेशाया नमः श्री गणेशा जय महाराज गजानंद जी का अध्यात्मिक स्वरूप और आदिदैविक स्वरूप हम लोग थोड़ा सा समझेंगे कि भगवान राम मर्यादा अवतार हैं है और भगवान कृष्ण कि प्रेमावतार हैं कि भगवान के एक बहुत सारे अवतार होते हैं के आवेश अवतार प्रवेश अवतार मर्यादा अवतार ज्ञान अवतार कपिल अवतार यह भगवान का ज्ञान अवतार है श्री राम जी का अवतार यह मर्यादाओं अवतार है कृष्ण का प्रेमावतार है नरसिहं अवतार आवेश अवतार है की साड़ियों में अवतरित हो जाना यह प्रवेश अवतार है है और भगवान के अवतार भक्तों के हृदय में भी होते
अंतर्यामी अवतार प्रेरणा अवतार साक्षी अवतार है और अर्चना अवतार और अर्चना अवतार में भगवान भक्त के पराधीन होते हैं जो भक्त जिस बखत अर्चना पूजा करें और जिस भाव से भगवान को माने भगवान उसको उसी भाव से पोस्ट करते सालिगराम में नारायण का रूप की भावना करें तो कर सकता है शिवलिंग में शंभू सदाशिव चंद्रशेखर की भावना करे वह कर सकता है और अर्चना अवतार में भगवान की अर्चना पूजा करने वाला भक्त साधक जो भी पत्रं-पुष्पं प्रेम से अर्पण करता है उसका वो स्वीकार होता है भाव रूप से हुआ है कि भगवान के अर्चना अवतार
के साथ-साथ आयुध अवतार भी होते हैं में बहुत सारे भगवान के अवतारों में देख गणपति अवतार भी है जय राम जी की जय राम जी बोला कंजूसी से काम नहीं चलेगा एक पौराणिक कथा को देखें तो ऐसा आता है कि मां पार्वती ने अपने योगशक्ति से गणपति नाम के पुत्र कावा सर्जन किया अ है और स्नानागार में गई कोई आसान उपाय अंदर अ कि अब वह उस बालक को पता नहीं कि यह शिव जी मेरे पिता हो गए रोक दिया शिवजी को कि शिवजी को हुआ के यह ना मुन्नार मेरे को रोकता मेरे घर में
प्रवेश होने को कि श्रुति और स्मृति कहती है कि पिता से दसगुनी सेवा और आज्ञा मां की पालनी चाहिए कि इस बालक अवतार ने मात्र आज्ञा को इतना महत्व दिया है कि शिवजी हैं इनके होते हुए अंदर नहीं जा सकते थे आकर शिवजी ने उनको आप मस्तक से दिन के भीतर गए परिस्थिति का पता चला शिवजी को सोते के बालक लगता तो छोटा लेकिन उसकी निष्ठा बहुत बड़ी अ कि शिवजी चाहते तो वहीं मस्तक लगा सकते थे लेकिन शिवजी ने गणों को कहा जाओ एक बड़ा मस्तक ले और बड़ा मस्तक हाथी का ले आए थे
एक अर्ध दिया और विधर्मी लोग मजाक उड़ाते हैं कि प्रदेश में हम गए तो हमारे हिंदू लड़कों का ब्रेनवाश करने के लिए कि वहां के लोगों को बोलते तुम्हारा गॉड कैसा तुम्हारा भगवान कैसा हाथी का सिर भगवान का ऐसा भगवान उन मूर्ख बच्चों को पता नहीं आ है जो हिंदू बच्चों की श्रद्धा तोड़ते हैं है कि तुम अभी सर्जरी हैं है क्या जो आविष्कार कर रहे हो हैं उससे कई गुना आगे उसकी सर्जरी भारत के भगवान और ऋषि-मुनि और भारत के मनीषियों ने खोज रखी थी और जो मनुष्य का शर्तों सर्जरी करके मनुष्य की किडनी
मनुष्य में फिट कर दिया मनुष्य का अंग मनुष्य के साथ जोड़ दिया है लेकिन हाथी का सिर मनुष्य पर रखा जा सकता यह योग सर्जरी का कितना आविष्कार रहा होगा जय राम जी की सा कि यह बालक कोई साधारण बालक नहीं है निष्ठावान बालक है है जैसे कोई व्यक्ति गणमान्य होता है गण मना लो को गाना दूसरा इंद्रियों का गण तो इंद्रियों का गण कहो लोगों का गण कहो गाना नाम पति ही थी गणपति यह बालों का स्वामी होने के काबिल है भले बालक है लेकिन यह सेवक होकर तो खड़ा है लेकिन निष्ठा इसकी स्वामी
होने की है में गणपति जी गणपति जी का सिर्फ कि हाथी मुखा है गणपति और सवारी बिल्कुल नन्हीं चूहे की कि गजब करती है भारत के संस्कृति ने ऐसे भगवानों का अवतरण करवा दिया है कि थोड़ा भजन करें तो तुरंत बुद्धि में प्रकाशकों के ऐसा कैसे इतने बड़े भगवान और चूहे पर क्यों बैठे होंगे कैसे बैठे होंगे तो खाली पूजा में अर्चना में अथवा प्रतिमा में रुक न जाए इस बात को पूछने के लिए संत के चरण पहुंचा और सत्संग मिले तो गणपति का वास्तविक तत्त्व का आत्मरूप में समझकर मुक्त हो जाए आदमी अथवा तो
गुणों के प्रति हम कैसे हो सकते हैं यह भी कथा में वह समझ सकता है कि गणपति हाथी मुद्दा है एक बड़ा सिर है जो गणों का स्वामी होना चाहता है उसको मस्तिष्क बड़ा रखना चाहिए जय राम जी की नैरो माइंड से काम नहीं चलेगा जरा-जरा बात में संकीर्णता से काम नहीं चलेगा विशाल ब्रेन होना चाहिए बड़ा मस्तक होना चाहिए कि गणपति के कान भी बड़े सुपर है जैसे सुपर में धान जानते हो अच्छा सही-सही ध्यान रहे जाता है और कूड़ा कचरा निकल जाता है ऐसे गुणों का जो स्वामी है कुटुंब का आग्रह है उसके
कानों पर तो दुनिया भर की बात आएगी लेकिन छानकर सार बात लेना बाकी की बात फैंक देना तभी तुम्हारे कुटुम का समाज का गणपति पद चलेगा नहीं तो गड़बड़ हो जाएगा जय राम जी की बोलना पड़ेगा कि भगवान गणपति की सूंड लंबी है नासिका लंबी है है अर्थात जो गणों का अग्रगण्य है जो कुटुम का समाज का अगुवा है उसको जहां-तहां की सुगंध आनी चाहिए की बात मिलनी चाहिए समाज क्या कह रहा है लोकमत क्या हो रहा है वातावरण क्या चल रहा है उसको गंध आनी चाहिए उसे गंध रखनी चाहिए अर्थात उसे नासिका दूर तक
पहुंचे ऐसी बुद्धिमता करनी चाहिए और फिर गणपति जी को मोदक प्रिय करा दो के गणों का अथवा समाज का हुआ वही हो सकता है जो औरों के सत्कर्मों में अनुमोदन करें मधुर वाणी बोले मिठास और पुष्टि करने वाला व्यक्ति जिसके हाथ में माधुरी और पुष्टि है उसी को लॉक मानेंगे पूजेंगे और उसी के पास रिद्धि-सिद्धि रहेगी जिसके पास कर्णवास और कमजोरी है उसके पास रिध्दी सिध्दी नहीं रहती है उसके पास माधुर्य नहीं रहता है तो जीवन में मधुरता और सामर्थ्य यह मोदक का प्रेरक है कि गणपति जी का चूहा क्यों सवारी इतने बड़े भारी गणपति
नन्हे चूहे पर कैसे बैठे होंगे बाबा जी यह बात समझ में नहीं आती कि अ जुआ तो बिल में जाता है जिस किसी के घर में घुस जाता है तो गणपति के जिस किसी के घर में घुसकर पूछ लेते हैं को यह बात समझ में नहीं आती ऐसा यह अवतार है रामावतार ने तो अपने ज्ञान से विचारों से मर्यादा की लीलाओं से जगत को देश को तो क्या विदेश को भी भूमंडल को आलोकित किया श्रीकृष्ण के अवतार ने तो गीता और माखन चोरी लीला से लेकर माधुरी लीलाओं से लेकर लोगों का मन जीता लेकिन गणपति
अवतार ने तो अपने रूप आकृति पूरा युद्ध और सवारी के द्वारा दुनिया भर का चित्र अपनी और आकर्षित करके उनको सुक्ष्म ध्यान देने की प्रेरणा दी मैं अपने वेशभूषा सिर पैर था महाराज यदु आदि तो ठीक है चूहे को रखकर उन्होंने सबका ध्यान खींचा है मैं अपने वेशभूषा और आकृति के द्वारा जिस भगवान ने ध्यान खींचा समाज का ज्ञान के तरफ पुश भगवान का नाम गणपति भगवान है का गाना नाम पति थी गणपति ही गणों का जो पति है इंद्रिय कणों का पति अथवा समाजिक गणों का जो अगवा है ऐसे ही तुम्हारे मन बुद्धि इंद्रियों
का जो सार तत्व है वह चैतन्य कि अब वह चैतन्य साकार रूप लेकर आए और फिर चूहे पर कैसे भगवान सवारी करें अर्थात वह बता रहे हैं कि जो कुटुंब का समाज का अगवा हो गणों का स्वामी हो रिद्धि सिद्धि फोर्स सामर्थ्य हो योग्यता हो गणपति जी की योग्यता अद्भुत भगवान वेदव्यास जी ने आवाहन किया भगवान गणपति का गणपति जी आए बोले प्रभु में समाधि करके श्री कृष्ण चरित्र का वर्णन करता हूं है जो मैं बोलता हूं वह चलो कि आप लिखते जाए अब कि गणपति जी इतने बुद्धिमान के श्लोक तो लिखते लेकिन तुम बोलते
हो मैं श्लोक लिखता हूं बीच का समय बचता क्या किया जाए समय का सदुपयोग होना चाहिए कुटुम का समाज का अगवा हो वह समय को रजोगुण तमोगुण में बर्बाद ना करें समय का सदुपयोग करने की जिसकी दृष्टि तत्पर होती वह जरूर आदमी अगवा हुई जाता है आगे ही जाता है व्यास जी ने कहा प्रभु मैं जो बोलूं वह आप लिखे और बीच में अगर समय बचता है तो मेरे बोलने में कहीं गलती ना हो जाए उसको आप चेक करते हुए लिखिए और 18,000 श्लोक लेकर गणपति जी ने हमको श्रीमद् भागवत जैसा अमृत देने में सहयोग
किया है वो कि ऐसा घोर कलिकाल फिर भी लोगों को सुख शांति आनंद हजारों लाखों की तादाद में लोग सुनकर अपने पाप-ताप मिटाकर प्रदेश में शांति का अनुभव करते हैं ऐसा अद्भुत ग्रंथ किसी व्यक्ति का सृजन नहीं व्यक्ति के स्वरूप में जो आदत परमात्मा गणपति है और अगस्त परब्रह्मा परमात्मा व्यास के इरादे से प्रकट हुए उन्हें के कृपा से श्रीमद् भागवत मिला है समाज को हां बाबा जी यह साहब हम मानते हाथ जोड़कर स्वीकार करते हैं लेकिन गणपति जी को वाहन चूहा क्यों दिया गया जय राम जी बोलना पड़ेगा ऐ में गणपति की सवारी के
दूसरी सवारी नहीं मिटटी को कि चूहे के साथ जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती और पिता महादेवा एकदम तो दयावंत चारभुजाधारी मस्तक मे सिंदूर से और चूहे की सवारी चूहे की सवारी क्यों और बताओ ना प्लीज बताओ जरा यह क्या है वो भारतीए संस्कृति ने इतने सूक्ष्मा आविष्कार किए हैं और बुद्धि की ऐसी पराकाष्ठा के उन्होंने दीदार कर आए हैं दर्शन शास्त्र में अपने सिर झुके बिना नहीं रहता कि गणपति जी का पेट मोटा क्यों है है वक्रतुंडाय धीमहि यह गणेश गायत्री में वक्रतुंडाय शब्द क्यों आया है और इस चूहे पर
क्यों है यह सवाल बाबा जी वाला तुम बताता हूं जरा वेट प्लीज है अर्थात जो इतना बड़ा रिद्धि सिद्धि का स्वामी है गणों का पति है ऐसे व्यक्ति को शूद्र से शूद्र छोटे से छोटे जीव का भी अपने देवी कार्य में उपयोग करना चाहिए और चूहा जिस किसी के घर में जा सकता है बिल में जा सकता है अर्थात तुम्हारी वहिकल अथवा तुम्हारा आयोजन ऐसा हो कि तुम्हारा फायदा जिस किसी के घर पहुंच सके और जिस किसी जगह पर तुम्हारा संदेशा अथवा फंदा सके ऐसी तुम्हारी सूक्ष्म व्यवस्था होनी चाहिए दूसरा अर्घ्य के शूद्र-शूद्र जीव को
भी वह अपने साथ रखते हैं बड़प्पन में शक नहीं जाते हैं जय राम जी की आज के मनुष्य को अगर फिर आठ गाड़ियां मर्सिडीज गाड़ी और ड्राइवर मिल जाता है तो अपने को बड़ा मान लेता है और एक दिन ड्राइवर नहीं आया तो गाड़ी कौन चलाएगा इज्जत का सवाल है अरे गाड़ी से तेरी तक ड्राइविंग करने से तेरी इज्जत चली जाती है या गाड़ी जाने जाने से तेरी इज्जत बनती बिगड़ती है तो तेरी इज्जत नहीं हुई वह तो उसमें लोहे की इज्जत हुई तेरी इज्जत की तो कोई वैल्यू नहीं पैसा मिलने से आदमी अपने को
बड़ा मानता है तो अपना बड़प्पन नहीं रहा पैसे का बड़प्पन कुर्सी आने से अपने को बड़ा मानता है तो अपना बड़प्पन दब गए हैं कुर्सी का बड़प्पन आया रूप-लावण्य से अपने को बड़ा मानता है तो रूप-लावण्य चला गया तो बड़प्पन चला जाएगा तुम्हारा बड़प्पन जड़ वस्तुओं के आधार नहीं होना चाहिए तुम्हारा बड़प्पन अपने गणों के इंद्रियों के स्वामी आत्मा के कारण होना चाहिए और वह बड़प्पन शाश्वत रहता है थोपा हुआ बड़प्पन नश्वर है बाबा जी वक्रतुंडाय धीमहि कि यह क्यों गणपति जी पकड़ तुम लोग क्यों ओंकार से मुक्ति मिलती हूं कि गणपति जी कहते हैं
कि जान लोकनायक और सज्जन लोग बहुजन हिताय बहुजन सुखाय प्रवृत्ति करते हैं वहां दुर्जन दुष्ट उनकी मखोल भी बढ़ाते हैं मजाक भी करते हैं और कभी-कभी उनके दैवी कार्यों में विशेष भी करते इसलिए सज्जनों को अति सज्जन होकर बाहर से नहीं देखना चाहिए कभी-कभी सांप में जहर नहीं भी होता है फिर भी सब सांपों को लहरी समझ कर लो किनारा करते हैं ऐसे ही सज्जन में द्वेष नहीं होता है वक्रता नहीं होती तो लोग उनका शोषण कर लेंगे इसलिए सज्जनों को कभी-कभार दुर्जनों के बीच में भिड़ा मारना चाहिए वक्र दिखावा करना चाहिए जय राम जी
की नहीं तो लोग जीने नहीं देंगे बुद्धू समझेंगे भगत ब्लासम देंगे और प्रॉब्लम खड़ा कर देंगे कर दो कर दो अजय को कर दो
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