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Halla Bol Full: Swami Avimukteshwaranand के स्नान विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया | Anjana Om Kashyap

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बात यह है कि हम अगर शंकराचार्य नहीं है तो इसका निर्णय कौन करेगा? सोशल मीडिया चलाने वाला फेसबुकिया Facebookिया निर्णय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं? बाघ मेले का प्रशासन वो निर्णय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं। [संगीत] नमस्कार आप देख रहे हैं आज तक। आपके साथ मैं हूं अंजना ओम कश्यप। आज जिस विषय पर हम चर्चा करने वाले हैं संत नीति पर राजनीति उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है। मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अभी मुक्तेश्वरानंद के स्थान को लेकर विवाद हुआ है। उस पर चर्चा करेंगे। लेकिन बड़ी खबर
इस वक्त आ रही है। आईसीसी ने बांग्लादेश क्रिकेट टीम को झटका दिया है। कह रहे थे भारत में नहीं खेलेंगे। दूसरे देश में कीजिए। भारत में बांग्लादेश के नहीं खेलने के मुद्दे पर जो उन्होंने अपील की थी [संगीत] कि भारत की जगह कहीं और T20 वर्ल्ड कप कराया जाए। बांग्लादेश की उस मांग को खारिज कर दिया है। ICC ने बांग्लादेश क्रिकेट टीम को झटका दिया है। राहुल रावत हमारे सहयोगी इस वक्त हमारे साथ इसी खबर पर सीधा न्यूज़ रूम से जुड़ रहे हैं। राहुल जाहिर तौर पर बड़ा झटका यह बांग्लादेश के लिए क्योंकि आप उनके
क्रिकेट बोर्ड के लिए क्योंकि भारत में नहीं खेलेंगे कह रहे थे टी20 वर्ल्ड कप में। अंजना उनकी क्रिकेट बोर्ड और उनकी सरकार के लिए दोनों के लिए क्योंकि क्रिकेट बोर्ड वही कर रहा था जो बांग्लादेश की सरकार उनको कह रही थी करने के लिए। तो ये पूरा मामला आईसीसी आज आईसीसी के बोर्ड के सामने रखा गया जहां पर 16 मेंबर्स होते हैं और सबको वोट डालने को कहा। तो सिर्फ दो मेंबर्स ऐसे थे उस आईसीसी बोर्ड के जिन्होंने इस बात पर मोहर लगाई कि भाई ऐसा है कि बांग्लादेश को इंडिया से बाहर ये वर्ल्ड कप
खेलने की इजाजत दे दी जाए और वो दो देश थे एक बांग्लादेश खुद और दूसरा था पाकिस्तान। यानी बाकी के सभी 14 मेंबर्स ने कहा कि बांग्लादेश के साथ बांग्लादेश को इंडिया आना चाहिए। क्यों? क्योंकि एक इंडिपेंडेंट सिक्योरिटी असेसमेंट हुआ था। जिसमें सिक्योरिटी को लेकर कहा गया था कि कोई रिस्क नहीं है। कोई बड़ा कोई ऐसा रिस्क नहीं है सिक्योरिटी को लेकर। तो उसके बाद अब कहा है कि आपको आना है आप आइए नहीं तो आप अपनी सरकार को बता दीजिए कि आप यह वर्ल्ड कप नहीं खेलेंगे और आपकी जगह स्कॉटलैंड इस वर्ल्ड कप में
खेलती हुई नजर आएगी। ठीक है। तो इस पे बांग्लादेश का साथ किसने दिया? यह बताने के लिए एक बस कहावत कह देते हैं राहुल कि चोर चोर मौसेरे भाई होते हैं। लेकिन धन्यवाद। बड़ा झटका है ये। बांग्लादेश हां क्या राहुल? क्या राहुल? जी मैं कह रहा बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना। [हंसी] यह वही अब्दुल्ला है जो हर बेगानी शादी में पहुंच के नाचने के लिए निकल जाता है। बहुत धन्यवाद आपका इस पूरी जानकारी के लिए। अब उस विषय का रुख करते हैं जिस पर आज हम चर्चा करने वाले हैं जहां खुद अभी मुक्तेश्वर आनंद के
तेवर सरकार पर तल्क है। वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रशासन ने स्वामी अभी मुक्तेश्वरंद ने प्रयागराज में संगमनोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था। इसके बाद अभी मुक्तेश्वर आनंद के समर्थकों के साथ पुलिस की झड़प हुई थी। इसे अपमान बताकर अभी मुक्तेश्वर आनंद धरने पर बैठे ही थे। उन्हें खुद के शंकराचार्य होने को साबित करने का नोटिस प्रशासन ने दे दिया है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट का है। साल 2022 का है जिसमें उनके पटाभिषेक पर रोक
लगा दी गई थी क्योंकि कुछ लोग इसके खिलाफ गए थे। अभी मुक्तेश्वर आनंद ने नोटिस का जवाब तो दे दिया लेकिन इसे लेकर वो सीधे योगी आदित्यनाथ के साथ आरपार के मूड में दिख रहे हैं। इसीलिए आज हम हल्ला बोल में यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या अपमान का अभी मुक्तेश्वरंद का आरोप सही है और क्या अविश्वरानंद के बहाने विपक्ष हिंदू वोट साध रहा है। हल्ला बोल की बहस हम कुछ ही देर में शुरू करने वाले हैं क्योंकि आज दो ऐसे ही आचार्य आमने-सामने होंगे जिसमें जितेंद्र सरस्वती और शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरंद आमने सामने होंगे। लेकिन
पहले ये रिपोर्ट देखिए। [संगीत] अब ये स्वामी अभिमुक्तेश्वर आनंद के भक्तों और प्रयागराज [संगीत] के माघ मेला प्रशासन के बीच ठन गई लड़ाई भर नहीं। मौनी अमावस्या के दिन [संगीत] स्वामी अविश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद। अब योगी सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो चुका है। खुद के शंकराचार्य होने पर माघ मेला प्रशासन के नोटिस पर आठ पन्नों का जवाब देने के बाद अभिमुक्तेश्वरानंद [संगीत] खुलकर प्रशासन और सरकार की नीति और नियत दोनों पर हमलावर है। बात यह है कि हम अगर शंकराचार्य नहीं है तो इसका निर्णय कौन करेगा? सोशल मीडिया
चलाने वाला Facebookिया Facebookिया निर्णय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं? माघ मेले का प्रशासन वो निर्णय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं। फकत मुरली बजाने से कन्हैया हो नहीं सकते। जिसे राधा कहे मोहन वही घनश्याम होता है। भगवान की जय। सुनो शंकराचार्य वो है जिसको बाकी तीन पीठ के शंकराचार्य कहे कि शंकराचार्य है। तो बाकी तीन पीठ में से दो पीठ के शंकराचार्य हमको शंकराचार्य कहते हैं। पिछले माघ मेले में हमारे हमको साथ लेकर के स्नान कर चुके हैं। जब स्वयं श्रृंगेरी के शंकराचार्य जी द्वारका के शंकराचार्य जी हमको कह रहे हैं कि
हम शंकराचार्य हैं। हमको साथ में लेकर स्नान कर रहे हैं। तो अब किस प्रमाण की आपको जरूरत है? यह प्रशासन तय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं है। उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री तय करेगा कि भारत का राष्ट्रपति तय करेगा। भारत के राष्ट्रपति को भी अधिकार नहीं है कि वो तय करें कि कौन शंकराचार्य है। शंकराचार्य का निर्णय शंकराचार्य करते हैं। अभी मुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज मेला प्रशासन को जो जवाब दिया है उसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि शंकराचार्य की पदवी ग्रहण करने से उन्हें नहीं रोका गया। इस बीच जब अभिमुक्तेश्वरानंद
के तेवर इतने तल्ख हैं तो पूरे मसले को विपक्ष ने लपक लिया है। अखिलेश यादव समेत विपक्ष के तमाम नेता लगातार अपने बयानों से सरकार को घेर रहे हैं। अरे अधिकारियों का अधिकार है कि एक शंकराचार्य जी से पूछें। यह तो सनातन धर्म का सबसे बड़ा अपमान है। एक अधिकारी अगर पूछेगा शंकराचार्य जी के बारे में आपका सर्टिफिकेट परिचय क्या है? तो इससे बड़ा सनातन धर्म का इससे बड़ा हमारे साधु संतों का इससे बड़ा हमारी संस्कृति का इससे बड़ा हमारे मेघ माघ मेला का इससे बड़ा हमारे हिंदुस्तान का कोई अपमान नहीं हो सकता जो भारतीय
जनता पार्टी अपने चाबलूस अधिकारियों से करवा रहे हैं कि आप केवल जनता को भ्रमित करने का सनातनियों को अपमान करने का यह काम कर रहे हैं। शंकराचार्य जी शंकराचार्य थे और शंकराचार्य हैं। पूरा देश उनका सम्मान करता है। पहले भी कई ऐसे मौके आए हैं। मसलन अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के समय अभिमुक्तेश्वर आनंद का रुख बीजेपी की मुश्किलें खड़ी करता रहा है। लेकिन यह पहली बार है जब बड़े हिंदू संत के अपमान को विपक्ष मुद्दा बना रहा है। बीजेपी द्वारा हिंदू आस्था के अपमान पर अक्सर घिरने वाला विपक्ष अब उसको इसी मुद्दे पर
घेर रहा है। आज तक ब्यूरो दो खास मेहमान हमारे साथ जुड़ रहे हैं। सबसे पहले आपको सीधे उनका रुख कराते हैं। शंकराचार्य अभी मुक्तेश्वर आनंद हमारे साथ इस वक्त जुड़ रहे हैं। और आचार्य जितेंद्र जितेंद्र सरस्वती जी हमारे साथ जुड़ रहे हैं। मैं शंकराचार्य जी आपके पास पहले अभी तो शंकराचार्य पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। टाइटल पर ही सवाल खड़े हो गए कि आप शंकराचार्य हैं या नहीं है। अब मेला अथॉरिटी ने आपको इस टाइटल पर नोटिस भेज दिया है कि सुप्रीम कोर्ट ने जब 2022 में कहा था कि आपके पटाभिषेक पर रोक
लगा दी थी। अगर आप पटाभिषेक नहीं हुआ तो आप शंकराचार्य कैसे हो सकते हैं? एक सवाल दूसरा वो कह रहे हैं यह कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट है। यानी अदालत की अवहेलना है। आठ पन्ने की आपने चिट्ठी जरूर की है। लेकिन हमारे दर्शकों को बताइए कि कोर्ट के रोक लगाने के बावजूद आज आप अपने आप को शंकराचार्य कैसे कह रहे हैं। यहीं से शुरू करते हैं। ऐसा है अंजना जी कि सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर के अगर जिम्मेदार प्रशासन को बात करनी थी हम तो साफ-साफ सत्य शब्दों में जो तथ्य है उसको सामने रखना चाहिए था। इन्होंने
क्या किया है कि तथ्यों को छुपाते हुए कुछ बात को आगे रख के उसको भी दूसरे ढंग से प्रस्तुत किया है। जिससे जनता में यह संदेश चाहे यह भ्रम उत्पन्न हो कि संभवत इनके शंकराचार्य होने में कोई समस्या है। हम सच्चाई यह है कि जिस दिन का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट का दिखा रहे हैं हम उस दिन के एक महीना से ज्यादा पहले ही हमारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में अभिषेक हो चुका था और एक महीना पहले ही सुप्रीम कोर्ट को भी यह बात बता दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में ऑन रिकॉर्ड यह
बात है। जब हमारे प्रतिपक्षी स्वामी वासुदेवानंद जी महाराज जिनसे परंपरागत मुकदमा ज्योतिष पीठ का हमारे गुरु जी महाराज के साथ चल रहा था। हम तो पार्टी ही नहीं थे। हम हमारे गुरु जी पार्टी थे लेकिन उनका शरीर पूरा हो गया तो उनकी जगह हमको आना था। तो उन्होंने जब हमारा अभिषेक हो गया और हम ज्योतिष पीठाधीश्वर के रूप में काम करने लगे। तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया कि इनको रोक दिया जाए। यह योग्य नहीं है और इनको ज्योति पीठाधीश्वर के रूप में अपने आप को उद्देशित उद्घोषित करने से और तदनुसार कार्य करने से
रोक दिया जाए। 21 सितंबर को 2022 में यह सुनवाई हुई और सुप्रीम कोर्ट ने उनके आवेदन को निरस्त कर दिया और कहा कि यह नहीं हो सकता है। तब जाकर के 14 अक्टूबर को 12 अक्टूबर को फिर से उन्होंने एक छद्म हलफनामा बना के पूरी के शंकराचार्य जी महाराज का झूठा हलफनामा बना के दाखिल किया और कहा कि इन्होंने कहा है कि इनका अभिषेक हो गया और शंकराचार्यों ने इनको समर्थन कर दिया है। लेकिन पूरी के शंकराचार्य जी का यह हलफना देखिए। उन्होंने कहा है कि नहीं हमने इनको मान्यता नहीं दी है। हम तो कोर्ट
ने देखा उन्होंने उनके ऊपर उनके पास तो पटल पर पहले से ही यह जानकारी थी कि हमारा अभिषेक हो गया है और हम इस रूप में कार्य कर रहे हैं। तो उन्होंने सोचा और इसके साथ इन्होंने प्रेयर यह भी किया केवल हमको रोकने के लिए नहीं। अबकी बार इन्होंने कहा कि अभी मुक्तेश्वर आनंद या कोई और कोई भी संस्था या कोई भी व्यक्ति अपने आप का पट्टा अभिषेक जो डिस्ट्रिक्ट पर ना कराए इसके लिए आदेश कर दीजिए। हां तो सुप्रीम कोर्ट ने वह आदेश इनको दे दिया हां यह कहते हुए कि जो इन्होंने मांगा था
जिन शब्दों में दे दिया ठीक है अब क्या हुआ कि हम लोगों को पता चला हम लोग तो थे नहीं वहां पर एक्स पार्टी आर्डर हो गया हम तो हम लोगों ने देखा कि ऑर्डर तो हुआ ना ऑर्डर तो हुआ ना शंकराचार्य जी अब देखिए एक सेकंड एक सेकंड एक मेरा एक सवाल सुनिए स्थिति हो रही थी ये तो तमाम तर्क इस पे दिए जा सकते हैं लेकिन आज एक सच्चाई है कि कई जो सन्यासी अखाड़े हैं वो इसके खिलाफ है आपके आपके खिलाफ और जैसा आपने खुद ही कहा कि पूरी के शंकराचार्य जी थे।
उन्होंने भी इससे इंकार किया। यह एक लीगल मैटर है। इसको अलग रखते हैं। अब आते हैं असल मुद्दे पर। आपका कहना है कि आपको स्नान नहीं करने दिया गया। ये आपका कंटेंशन है कि भाई ये मेरा अपमान हो गया है। जिसकी वजह से आप यहां पर बैठे हैं। लेकिन शाही स्नान में तो पालकी से जाने की बात होती है। यहां पर तो ये तो शाही स्नान भी नहीं है। ये तो माघ मेला है। पुलिस कह रही है 50 मीटर की दूरी पर आप पैदल चले जाइए। आप कहते हैं नहीं हम पैदल नहीं जाएंगे। हम तो
पालकी में ही जाएंगे। मतलब पुलिस ही तो पुलिस का काम करेगी ना। वही उसने रिक्वेस्ट किया आपसे। यह अपमान कैसे हो गया? इसके बाद मैं आ रही हूं आपके पास। आचार्य जितेंद्र आनंद जी देखिए कहने कहने में एक्सेंट में एक्सेंट में बात होती है। रंजना जी आप तो भाषा की पंडित हैं। आप जानती हैं कि किसी वाक्य को किस ढंग से उच्चारण किया जाए तो उसका क्या अर्थ हो जाता है। उनके कहने में जो तरीका था वह अपमानजनक तरीका था। इसीलिए हमको लगा कि यह हमारा अपमान करना चाहते हैं और बहाना दूसरी चीजों का ले
रहे हैं। लेकिन बाकी साधु संत तो पैदल ही चल कर जा रहे थे ना। मैं इसका जवाब आपसे लेती हूं। जितेंद्र जी आचार्य जी आपके पास आ रही हूं। वो कह रहे हैं कि मेरा अपमान किया गया है। जिस तरह से मेरे साथ व्यवहार हुआ है। यह उनका अपमान किया गया है। आचार्य जी। इसमें क्या गलत है? वो कह रहे हैं कि भाई गलत व्यवहार हुआ पुलिस की तरफ से। दीदी पालकी पर तो स्नान के लिए आज तक जब से माघ मेला कुंभ लग रहा है हम कोई परंपरा ही नहीं रही है और माघ मेला
में तो कोई शाही स्नान की परंपरा नहीं है और शाही स्नान भी जो अर्ध कुंभ और कुंभ में होता है उसमें स्नान के जो डी एरिया का क्षेत्र है उसके बाहर ही सारे अखाड़ों के रथ रोक दिए जाते हैं। तो आपको क्या ऐसी मजबूरी है कि 50 फीट या 50 मीटर भी आप पालकी से उतरना नहीं चाहते और उस एरिया में जहां भगदड़ की आशंका हो जहां पे दो नंबर पुल किस लिए था? इमरजेंसी एग्जिट है। वो इमरजेंसी एग्जिट का बैरिकेडिंग तोड़ा जाना यह किस श्रेणी का अपराध है? योगी की पुलिस नहीं उत्तर प्रदेश सरकार
की पुलिस है। योगी उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया हैं वर्तमान में। तो कोई भी सरकार रहती क्या अखिलेश की पुलिस ने इनको नहीं तोड़ा था क्या? तो जब आप कानून तोड़ेंगे तो आपको समाज तोड़ ये सरकार तोड़ेगी। इसी पर जल्दी से जवाब दीजिए आचार्य जी आप अभी मुक्तेश्वर आनंद जी। बाकी साधु संत पैदल जाकर स्नान करते हैं और माघ मेले में शाही स्नान में तो भाई है परंपरा है पालकी से जाने की। यहां पर आपको क्या ऐसी दिक्कत आ गई कि आप मतलब पैदल चलकर जाने को जो पुलिस कह रही थी आप तैयार नहीं हुए।
पैदल जाके स्नान करने में क्या दिक्कत है? पैदल ही जाते हम भी पैदल ही जाते। हम तो अपने पालकी घोड़े गंगा जी में लेके जाते। हम भाई पालकी से जहां तक जाना था वहां तक जाते। उसके बाद हम भी पैदल ही जाते। हम ऐसी क्या बात है? गए क्यों नहीं? तो फिर आपने इसको हमारे विवेक को हम बोलिए बोलिए। क्यों? क्यों स्वीकार नहीं किया गया? क्या हमारा कोई विवेक नहीं है? गंगा जी जाने का हमारा कोई विवेक नहीं है? हमारे विवेक पर शक क्यों किया गया? हम भी तो विवेक संपन्न व्यक्ति हैं। अच्छा ठीक है।
मान लीजिए आपके विवेक पर हम लोग भरोसा कर लिया। अगर मैं गलत हूं तो सही कीजिएगा। आपके साथ 200 समर्थक भी थे। तस्वीरें भी हम दिखा रहे हैं। पुलिस को लगा कि पैदल जाना चाहिए। पुलिस के विवेक पर भरोसा होगा या नहीं होगा। एडमिनिस्ट्रेशन और यह सब तो पुलिस और प्रशासन ही करेगा ना। वो कोई आप बार-बार कहते हैं कि पुलिस वाले थोड़ी तय करेंगे ना कोर्ट तय करेगा शंकराचार्य तय करेंगे शंकराचार्य नहीं है। अब पुलिस प्रशासन का काम भी तो पुलिस ही करेगी ना कि आप और वो करने लगेंगे। ऐसा है कि आपको बिल्कुल
जानकारी होगी। आप बहुत अनुभवी पत्रकार हैं और आपने स्वयं भी यहां पर आकर के कवर किया है। हां जी। घटनाओं को देखा है। स्नान के समय यहां पर आप आकर के खड़े होकर के देखें ना तो यहां पर झुंड के झुंड लोग आते हैं। एक गांव के लोग एक साथ रहना चाहते हैं। एक बड़े परिवार के लोग एक साथ रहना चाहते हैं। एक संस्था के जितने सारे पदाधिकारी होते हैं सब एक साथ रहना चाहते हैं। तो यहां झुंड के झुंड ही लोग आते हैं और वो झुंड में आराम से स्नान करते हैं और चले जाते
हैं। दिन में सैकड़ों झुंड आप जो करोड़ों की संख्या बता रहे हैं उसमें हजारों झुंड होंगे। जो झुंड ही जाएंगे और झुंड ही स्नान करके गए होंगे लेकिन किसी को कोई तकलीफ नहीं होती है। तो हमारे साथ अगर 10 20 50 लोग थे तो उससे कौन सी समस्या उत्पन्न हो जा रही थी? सब झुंड में ही जाते हैं। सब अपनी-अपनी पहचान कायम करके जाते हैं लोग। लोटा डंडे में लोटा ऊपर उठा लेते हैं। उसी को देखतेदेखते पूरा झुंड चला जाता है। हम हम ये इसी का जवाब दीजिए ना जो वो कह रहे हैं कि झुंड
के झुंड जाते हैं। इसीलिए आचार्य जितेंद्र आनंद जी आप बोलिए। वो कह रहे हैं कि भाई मुझे ही टारगेट किया जाता है। मुझे जानबूझकर टारगेट किया है और यही मुद्दा विपक्ष उठा रहा है। अखिलेश यादव से लेकर कांग्रेस पार्टी सब कह रहे हैं कि जानबूझकर इनका अपमान किया जाता है। यह वह राजनैतिक दल हैं जो मोदी और योगी के विरोध में अंधे होके देशद्रोह की सीमा तक जा सकते हैं। तो अगर इस मुद्दे पर एक मुहरा उन्होंने धर्म क्षेत्र में सेट कर लिया और वह भी इतिहास की लंबी परंपरा है ये कांग्रेस समर्थित होने का
और सारी मीडिया के पास भी इसकी सूचना है आपके यहां पर कि वो लगातार प्रियंका गांधी से और अखिलेश यादव से वार्ता कर रहे हैं। अपनी एक-एक रणनीति कह लीजिए राजनीति की। अच्छा बिहार में कौन सी घटना घट गई थी? 243 सीटों पर चुनाव लड़ाने के लिए गए थे कैंडिडेट लेकर के। तो राजनैतिक व्यक्ति धर्म के चोले में अगर उसे कोई राजनीति ही करनी है तो उसका हमारे पास तो इलाज नहीं है। अभी मुक्तेश्वरानंद जी वो कह रहे हैं कि लगातार आप संपर्क में हैं पार्टी के नेताओं से। एक पॉलिटिकल सवाल इस पर मैं अलग
से भी करना चाहती हूं। लेकिन असल सवाल तो यह है ना कि आपके पास मौका था। आप कहते हैं कि अभी पुलिस ने जानबूझ के मुझे टारगेट किया। योगी की पुलिस मुझे टारगेट कर रही है। आपके पास मौका था। आप एग्जांपल देते, एग्जांपल बनाते कि भाई यह पालकी में ही क्यों जाना है? आप मुझे अगर दिक्कत है मैं पैदल चलके चला जाऊंगा। गंगा जी और आपके बीच में कोई और क्यों आए? अच्छा सुनिए। पुलिस का काम पुलिस करेगी। क्या पुलिस का यह काम है कि छोटे-छोटे वेद पाठी बटकों को चोटी पकड़ करके उनको घसीट घसीट
करके ले जाए और उनको उठा उठा करके पटके? क्या 84 साल के बुजुर्गों के ऊपर जूतों से प्रहार करें? क्या दंडी सन्यासियों को मारपीट करें? यह पुलिस का काम है। यह पुलिस का काम किया गया है। यहां पर जो किया गया है यह पुलिस का काम होता है। अब देखिए वो तो वो कह रहे हैं कि पुलिस का यह काम नहीं है। पुलिस ने जिस तरह का व्यवहार किया है। स्वामी जितेंद्र जी आज सवाल यह है कि वह अनशन पर बैठे हुए हैं। वह तो वहां पर बैठ गए हैं। वो कह रहे हैं जब तक
इज्जत के साथ मुझे स्थान के लिए नहीं ले जाया जाएगा मैं तो यहां से हिलूंगा नहीं। अब पहली बात दीदी कि वो शंकरा पहली बात कि वो शंकराचार्य नहीं है। ना किसी अखाड़े ने ना काशी विद्वत परिषद ने ना शंकराचार्य परंपरा ने उन्हें स्वीकार किया है। स्वयंभू स्वयं को घोषित करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनके अभिषेक पर रोक लगा रखी है। अभिषेक जब हुआ नहीं तो उनके वकील कुतर्क देते हैं कि अभिषेक पे रोक लगाई ना। शंकराचार्य लिखने पे नहीं लगाई। अरे भाई विवाह हुआ नहीं। पति लिखने पे रोक लगाने की बात कैसे आ
जाएगी? जब आपका अभिषेक ही नहीं हुआ और आपने ही कार्ड बांटे थे। अखबारों में आपके मीडिया से ने बयान जारी किया कि 17 अक्टूबर को होगा। तो सुप्रीम कोर्ट ने उसी 17 अक्टूबर को आधार मान के 14 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करके रोक लगा दी और उस रोक की बकायदा व्याख्या उन्होंने कहा मेरे नाम से नहीं किया तो हाई कोर्ट ने बकायदा इनका नाम लिखते हुए कि स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और ये शंकराचार्य के किसी रिचुअल अगर आपको चाहिए तो मैं अभी भी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दोनों आर्डर दिखा सकता हूं और
मीडिया में नेगेटिव बयानबाजी के चलते अपने नाम के आगे शंकराचार्य लिखने का जो परंपरा है यह सनातन धर्म के लिए बहुत घातक है। ठीक है। ठीक है। ये तो खैर वो खुद ही कह रहे हैं कि कोर्ट शंकराचार्य हैं। ठीक है। कोर्ट कोर्ट ने रोक लगाई थी। वो कह रहे हैं पटाभिषेक पर रोक लगाई थी। लेकिन उस दिन वो इसके लिए नहीं जा रहे थे। अच्छा आपको जानबूझकर लग रहा है अभी मुक्तेश्वर आनंद जी? क्यों टारगेट करेंगे आपको जानबूझकर? ऐसा क्या है? आप मतलब क्यों आप ही को क्यों टारगेट कर रही है योगी की सरकार?
योगी की पुलिस क्या है ऐसा? क्या किया आपने? हां जी बस यही बात है। जानबूझकर के टारगेट किया गया। क्यों? और क्योंकि हम गौ रक्षा की बात उठा रहे हैं। गौ रक्षा के लिए आवाज दृढ़ता से उठाते चले जा रहे हैं। और केंद्र और प्रदेश की सरकारें जो भाजपा शासित हैं वो गौ रक्षा करना नहीं चाहती हैं। इसीलिए उनको हमारी आवाज से समस्या हो रही है और इसीलिए वह हमको लक्ष्य कर रहे हैं। मूल बात यह है। अच्छा ठीक है। आचार्य जितेंद्र आनंद जी वो कह रहे हैं कि उनकी आवाज वो गौ रक्षा के लिए
आवाज उठा रहे हैं इसलिए उनके खिलाफ है। अब आप इस बात का जवाब दीजिए कि भाई एक तबका है ना जो इनके साथ खड़ा है। भाई कांग्रेस हो, समाजवादी पार्टी हो, यह सारे उनका साथ दे रहे हैं और बहुत सारे लोग हैं। अब एक बड़ा बवाल यह खड़ा हो गया है। वो तो वहां पर बैठ गए हैं। यह सब उनका साथ दे रहे हैं। तो बनना भी चाहिए। वो तो पाकिस्तान के भी आवाज हैं। वो तो देशद्रोहियों के भी आवाज हैं। कश्मीर से धारा 370 जो हटी है वो नहीं हटनी चाहिए। यह भी कहने वाले
हैं। वह तो मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे माफिया और गुंडों की भी आवाज है कि उसकी न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए। वह तो सेुलर सारे सेकुलरों की भी आवाज है कि प्रधानमंत्री को राम मंदिर के उद्घाटन में नहीं जाना चाहिए। हां, राम जन्मभूमि के नाम पर उन्होंने सोना इकट्ठा किया जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या है? गवर्नमेंट ऑफ इंडिया को क्या आदेश है? राम जन्मभूमि के संदर्भ में संविधान बेंच के सर्वसमत फैसले का कि भारत सरकार का गृह मंत्रालय एक ट्रस्ट बनाए वो ट्रस्ट मंदिर का निर्माण करेगा। आपने पहले से अपने रामालय ट्रस्ट में
सोना इकट्ठा करना शुरू कर दिया। समाज को कभी हिसाब दिया। सार्वजनिक को प्रेस करके बताया कितना सोना लिया था। जब एनएसए लगाने की धमकी सरकारों ने दी तब इन्होंने ये वसूली बंद की तो ये धर्म को धंधे में बदल करके और एंटी नेशनल गैंग की आवाज बन जाना वो आवाज के लिए तो सोशल मीडिया पर पाकिस्तान से लेकर के टर्की तक से संचालन किया जा सकता है। आराम से दुनिया के अन्य देशों से भारत विरोधी सोशल मीडिया के जो लेकिन आचार्य जितेंद्र आनंद जी वो एंटी बीजेपी आवास के तौर पर अगर आप उनको देखिए और
वह तो कह रहे हैं कि हमको बीजेपी साथ तो दे। बीजेपी वाले कहे कि हां भाई गलत हुआ। एक वहां पर जा रहे थे अगर स्वामी अभी मुक्तेश्वर आनंद जी तो जाने देते उनको स्नान करने पालकी में। तो वो कह रहे बीजेपी साथ दे। क्या? अच्छा एक बात बताइए। हां। अच्छा अब किस बात का अपमान हुआ? आप दो नंबर पुल को तोड़ रहे हैं। आपके बटुक पुलिस की कॉलर पे हाथ डाल रहे हैं। मारपीट झगड़ा कर रहे हैं। और आप रथ पर बैठकर के कह रहे हो कि आगे बढ़ो आगे बढ़ो। और कह रहे हो
कि अपमान हुआ है। कौन? यहां पूरी के शंकराचार्य जी भी हैं। सुमेरू पीठ के शंकराचार्य नरेंद्र जी भी हैं। सभी अखाड़ कई जगदगुरु यहां पे हैं। सभी चुपचाप नहाने गए। पैदल गए। नहा करके चले आए। किसी ने किसी को रोका टोका शाही स्नान अर्ध कुंभ और कुंभ में होता है। माघ मेले में आज तक कोई रथ और हाथी घोड़ा पालकी लेकर के नहीं गया नहाने। तुम्हें ही चुल्ल ऐसी क्यों मची है भाई? मेला खराब करने की यहां पे भगदड़ मचने की चुल्ल क्यों मची है? सीधी-सीधी सी बात है। आप राजनीतिक दलों के हथियार हो। एंटी
मोदी, एंटी योगी सुबह से शाम तक आप कहते हो कि योगी सन्यासी नहीं है। यह भी सर्टिफिकेट बांटने का काम अपने हाथ में ले रखा है। जिस प्रदेश में जाओ जिसके बारे में मन हो जो मन हो वही बोलते रहो और विशेषकर हिंदू समाज के बारे में विश्व हिंदू परिषद इनकी नजर में संगठन नहीं है। आरएसएस के बारे में सुबह से शाम तक मोहन राव भागवत से लेकर के अशोक सिंघल तक को गालियां देना इनका धंधा बना हुआ है। तो इस धंधे के बदले इनके पीछे मुसलमान सपोर्ट में तो खड़ा रहेगा ना। चलिए इसका जवाब
दीजिए अभी मुक्तेश्वर आनंद जी। वो कह रहे हैं कि आपका एजेंडा है बीजेपी के खिलाफ है और धर्म के नजरिए से ही देखिए ना। क्या आपने इसको अपनी अहम की लड़ाई बना लिया है? धर्म के नजरिए से देखिए। भाई गंगा जी में स्नान करने गए थे। जाइए स्नान कीजिए। पलकी पालकी में ही क्यों जाना है? तमाम ऐसी बातें उठ रही है। पुलिस क्यों आ रही है? भाई आप जाइए गंगा जी में स्नान कीजिए। ऐसा है कि आप इसको अहम कह रही हैं ना यह स्वाभिमान की बात है। यह निज सम्मान की बात है और स्वाभिमान
और निज सम्मान से बढ़कर के इस संसार में कुछ नहीं होता है। जब आत्मा पर चोट की जाती है तो आदमी तिलमिला जाता है। हम इसलिए अपने स्वाभिमान की रक्षा को आप अहम से मत जोड़िए। ये ठीक नहीं होगा। न्याय नहीं होगा। स्वामी मुक्तेश्वर स्वामी जितेंद्र जी कुछ कहना चाहेंगे आप उनसे सीधा क्या अच्छा एक बात बताइए अच्छा अब किस बात का अपमान हुआ आप दो नंबर पुल को तोड़ रहे हैं। आपके बटुक पुलिस की कॉलर पे हाथ डाल रहे हैं। मारपीट झगड़ा कर रहे हैं। बैठ के कह रहे हो कि आगे बढ़ो आगे बढ़ो।
और कह रहे हो कि अपमान हुआ है। कौन? यहां पूरी के शंकराचार्य जी भी हैं। सुमेरू पीठ के शंकराचार्य नरेंद्रानंद जी भी हैं। सभी अखाड़ कई जगतगुरु यहां पे हैं। सभी चुपचाप नहाने गए। पैदल गए नहा करके चले। आए किसी ने किसी को रोका टोका। शाही स्नान अर्ध कुंभ और कुंभ में होता है। माघ मेले में आज तक कोई रथ और हाथी, घोड़ा पालकी लेकर के नहीं गया नहाने। तुम्हें ही चुल्ल ऐसी क्यों मची है भाई? मेला खराब करने की हम यहां पे भगदड़ मचवाने की चुल क्यों मची है? सीधी-सीधी सी बात है। आप राजनीतिक
दलों के हथियार हो। एंटी मोदी, एंटी योगी सुबह से शाम तक आप कहते हो कि योगी सन्यासी नहीं है। यह भी सर्टिफिकेट बांटने का काम अपने हाथ में ले रखा है। जिस प्रदेश में जाओ, जिसके बारे में मन हो, जो मन हो, वही बोलते रहो। और विशेषकर हिंदू समाज के बारे में विश्व हिंदू परिषद इनकी नजर। ठीक है। अभी मुक्तेश्वर आनंद जी जल्दी से इसका एक जवाब आप दे दीजिए। क्या आप विपक्ष के हाथ में हथियार हैं बीजेपी के खिलाफ? बात यह है कि यही तो मजे की बात है कि शंकराचार्य का अपमान हो रहा
है। दंडी सन्यासी, बटुक, ब्रह्मचारी मारे पीटे जा रहे हैं और भाजपा के लोगों को सबसे आगे कतार में खड़े होकर के उसका विरोध करना चाहिए था। लेकिन भाजपा का कोई व्यक्ति नहीं बोल रहा है। दूसरी पार्टियों के लोग बोल रहे हैं। कितना गजब की बात है और जहां तक हमारे संबंध संपर्क की भी बात है तो हम पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं। आज भी मौका है स्पष्ट कर देते हैं कि जो गौ माता का नहीं है वह हमारा नहीं है। चाहे वह कांग्रेस हो, चाहे समाजवादी हो, चाहे भाजपा हो। नरम रहते हैं ना आप
नरम रहते हैं सुनिए ना सुनिए ना स्वामी अभिेश्वरंद जी आरोप यह लगता है कि विपक्ष के नेताओं पर आप नरम रहते हैं अखिलेश यादव हो कांग्रेस पार्टी हो वरना एक वक्त पर लाठी चार्ज हुआ था ना ऐसा है प्रयागराज में नहीं काशी में चली थी और साधु संतों पे नहीं हम ही पे चली थी और हम नरम नहीं थे हमने सरकार उनकी बदलवा दी थी आप रिकॉर्ड उठा करके देखिए हमने प्रतिकार यात्रा निकाली थी। उसका प्रभाव पूरे प्रदेश में गया था। हम नरम किसी के ऊपर नहीं रहते हैं और गर्म भी किसी के ऊपर नहीं
रहते हैं। लेकिन हृदय का संबंध उसी से स्थापित करते हैं जो सनातन मान बिंदुओं के प्रति समर्पित हमको दिखाई देता है। आज के समय में गाय माता की रक्षा करने के लिए हमने हर पार्टी के दरवाजे जाकर के दस्तक दी है। कोई भी पार्टी अभी तक आगे आकर के गौ माता की रक्षा के लिए अपने आप को प्रस्तुत नहीं कर पाई है। हम उनका सीधा आरोप है बीजेपी का जिस पर मैं एक स्पेसिफिक आपसे जवाब चाहती हूं। 2027 में चुनाव है और सोशल मीडिया पर भी लोग यही लिख रहे हैं कि 2027 में यूपी में
चुनाव है। उसी चुनाव को टारगेट करने के लिए बीजेपी को नुकसान पहुंचाने के लिए विपक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए आप इस मुद्दे को इतना हवा दे रहे हैं। ऐसा है कि चुनाव केंद्र में रख के राजनीतिक लोग सोचते हैं। हम धार्मिक व्यक्ति हैं। हम चुनाव को केंद्र में रख के चिंतन नहीं करते हैं। हम्म। इसलिए वो लोग राजनीतिक हैं। राजनीति को ही दृष्टि में रख के जो कुछ सोचना होगा सोचेंगे। लेकिन इसको छोटा प्रश्न कहना हमको और पीड़ा दे रहा है कि आप इतनी बड़ी घटना को छोटी बात कह रही हैं। भारतीय जनता पार्टी
के शासन में योगी आदित्यनाथ के शासन में जब संगम पर होनी अमावस्या के पावन दिन में सन्यासियों को भटकों को और सन्यासियों को और सन्यासिनियों को पीटा जाता है। उनको अपमान योगी जी आपको अभी सुन रहे हो। योगी जी अभी आपको सुन रहे हो। क्या कहना चाहेंगे आप उनसे? क्या कहिएगा? उनको कहना चाहेंगे कि या तो आपने इनको कहा है कि यह सब करो और या तो आपको खुश करने के लिए सब लोग कर रहे हैं। ऐसे में घाटा किसका हो रहा है? घाटा आप ही का हो रहा है। अगर आपने कहा है तो गलत
लोगों को कहा है। ये लोग सही ढंग से आपका ये बात को क्रियान्वित नहीं कर पा रहे हैं। और अगर यह आपको खुश करने के लिए कर रहे हैं और इनके इन सब किए से आप खुश हो रहे हैं तो इससे आपको भविष्य में घाटा होगा। ऐसा मत करवाइए। आप सही काम करिए। यह हम उनसे कहना चाहेंगे। हम पर योगी जी कह रहे हैं कि आप योगी जी के खिलाफ आपका एजेंडा है। योगी जी भी तो संत ही थे ना। खबरदार वो इस समय नेता हैं और मुख्यमंत्री हैं उत्तर प्रदेश के। संत जो है वह
धर्म की शपथ लेता है और जो मुख्यमंत्री और दूसरे मंत्री होते हैं, राजनेता होते हैं वह धर्मनिरपेक्षता की शपथ लेते हैं। तो जो धर्मनिरपेक्षता की शपथ ले चुका है वो इस समय संत नहीं वो इस समय मुख्यमंत्री ही है। चलिए वो कह रहे हैं कि संत नहीं है वो। अब नेता हैं वो। ये रूठना मनाना जो चल रहा है उनके साथ। मतलब यह लग रहा है कि हमेशा होता है कुछ-कुछ दिनों पर। स्वामी जितेंद्र जी कुछ सजेशन दीजिए। मैं इतना ही कहूंगा कि संतों की मर्यादा तो कलयुग के कारण अपने आप बड़ी मात्रा में नष्ट
हुई है। धर्म धंधे के तरफ बदल गया है। लेकिन कुछ संत ऐसे बचे हैं। हालांकि भगवान राम के समय से ही काल नेमी से काल नेम जिम रावण राहु तभी से ये सारी चीजें चलती रही हैं। छद्म वेश में इस तरीके की हरकतों का। लेकिन कुछ संत ऐसे हैं जो तीर्थराज प्रयाग की पवित्र भूमि पर तप करने आते हैं, कल्पवास करते हैं। दो समय नहाते हैं। एक समय खाते हैं। भगवान का कीर्तन करते हैं। यहां तो इस धरती पर तो राजनीति ना करो। नहीं तो मैं इतना ही कहूंगा आपके चैनल के माध्यम से हाथ जोड़
के कि तीर्थराज की धरती पर जो तपा हम जो इस तरीके की अधार्मिक गतिविधियां किया। कभी नरेंद्र गिरी भी इसी तरीके से यहां तपे हुए थे। उनके चेले आनंद गिरी भी तपे हुए थे। एक दुनिया से गए, एक जेल में है। तो ऐसा पाप तीर्थराज की पवित्र भूमि पर ना करें लोग। यही हम सलाह देना चाहेंगे। चलिए आपका दोनों का बहुत-बहुत धन्यवाद हमारे साथ जुड़ने के लिए। बहुत धन्यवाद। धन्यवाद आचार्य जी। धन्यवाद। आप दोनों का बहुत धन्यवाद हमारे साथ जुड़ने के लिए। सवाल यही है कि क्या ये अब अहम की लड़ाई बन गई है? सियासी
लड़ाई बन गई है क्योंकि आप देख रहे हैं सियासी अखाड़ा भी इस पर सज चुका है। योगीराज सरकार स्वामी अभी मुक्तेश्वरानंद के मीडिया इंचार्ज हमारे साथ जुड़ गए हैं। आचार्य शैलेश तिवारी धर्म गुरु जुड़ गए हैं। राजकुमार भाटी प्रवक्ता समाजवादी पार्टी के संगीत रागी राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर हमारे साथ जुड़ गए हैं। मैं आपके पास सबसे पहले आना चाहती हूं। आचार्य शैलेश तिवारी जी आपने सुनाई उनको। वो कह रहे हैं कि जानबूझकर उनको टारगेट किया जाता है और पालकी से नहीं जाने दिया गया। सही आरोप है। देखिए अंजनाभा ने जानबूझकर के स्वामी अभिवक्तेश्वरानंद जी
हमारे सनातन के जो धर्माचार्य हैं जो गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर हैं योगी आदित्यनाथ जी उनके खिलाफ जानबूझकर के बार-बार ये षड्यंत्र एक तरह से कर रहे हैं। आपने महाकुंभ में देखा कैसे उन्होंने षड्यंत्र किया। महाकुंभ में किस प्रकार से उन्होंने बार-बार उनको इस्तीफा की मांग की और आप देख रहे हैं देख रही हैं कि कैसे इस महा अभी ये महाकुंभ नहीं है माघ मेला है। सामान्य रूप से संत महात्मा जा रहे हैं स्नान करके आ रहे हैं। आप शंकराचार्य अपने आप को कहते हैं आप 50 मीटर पैदल नहीं चल सकते। हमारे शंकरा आदि गुरु शंकराचार्य पूरे
भारत का भ्रमण पैदल चलकर के किया था। संतों के अंदर अहंकार नहीं होता। संतों के अंदर घमंड नहीं होता। गुस्सा नहीं होता। आप 24 घंटा गुस्से में रहते हैं। 24 घंटा अहंकार की बात करते हैं। आप 370 हटाया गया। आप फिर से लाने की बात करते हैं। आप हिंदुस्तान पाकिस्तान की जब ऑपरेशन सिंदूर हो रहा था उसमें पाकिस्तान के साथ दे रहे हैं आप। तो आप कैसे संत हैं जो सनातन विरोधी बातें करते हैं? ठीक है। इसी का जवाब दीजिए सरकार। आपने चुनाव जी आचार्य जी मैं आ रही हूं। आ रही हूं आ रही हूं
तिवारी जी आ रही हूं। आचार्य जी जल्दी से इसी का जो आप कह रहे हैं उसी का जवाब लेते हैं योगी राज सरकार से। सत्य तप अहिंसा शांति ईश्वरीय शक्ति। अरे ये तो साधु संत के होते हैं ना भाव। मतलब हम पालकी में ही जाएंगे। हम तय करेंगे हम कहां तक जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाई हुई है। बावजूद उसके हम शंकराचार्य का इस्तेमाल करेंगे नाम का। भाई अगर कोर्ट कह रहा है तो कोर्ट से ऊपर तो कोई नहीं हो सकता है ना इस देश में। संविधान से ही मामला चलेगा ना योगी राज जी।
और यहां पर जब पुलिस कह रही थी कि यहां से लौटना है। और पिछली बार जब कुंभ में भगदड़ हुई थी तो यह इन्होंने ही कहा था कि योगी की पुलिस फेल हो गई। योगी का प्रशासन फेल हो गया। भगदड़ मचाने की जिम्मेदारी पुलिस की है ना। उसकी बात तो सुननी पड़ेगी। देखिए अंजना जी ऐसा है कि 2025 में महाकुंभ हुआ। जब 2025 में महाकुंभ हुआ था तब भी जगुरु शंकराचार्य जी शंकराचार्य थे। तब नहीं पूछा गया कि आप शंकराचार्य कैसे लिख रहे हैं? 2024 में माघ मेला हुआ। तब भी जगत गुरु शंकराचार्य जी थे।
तब माग मेला 204 नहीं पूछा गया कि आप जगुरु शंकराचार्य जी कैसे लिख रहे हैं। 23 में भी माघ मेला हुआ तब भी शंकराचार्य लिखते थे और शंकराचार्य थे वो तो 2023 में भी नहीं पूछा गया। इसलिए मैं कहना चाहता हूं साफ शब्दों में कहना चाहता हूं कि ये जो घटना घटी है ये बिल्कुल बदले की भावना से घटना घटी है और बिल्कुल शासन प्रशासन ने जो है साजिश मैं तो ये आरोप लगाता हूं सत्य है कि जगतगुरु शंकराचार्य जी की हत्या की साजिश थी। यह तो वो डोली से नहीं उतरे इसलिए बच गए अन्यथा
अगर वो डोली से उतर जाते हैं योगीराज सरकार योगीराज सरकार देखिए टीवी का इस्तेमाल आवाज नीचे कीजिए योगीराज जी टीवी का इस्तेमाल इस तरह का ना प्रोपोगेंडा फैलाने के लिए मत कीजिए पुलिस बात कर रही थी उनसे पुलिस कह रही थी वही पुलिस वही अर्धसैनिक बल जिनकी जिम्मेदारी होती है ये जो आप तेवर दिखा रहे हैं ना तैश दिखा रहे हैं इसको रोकिए नियंत्रित कीजिए धर्म से जुड़े हुए धर्म के झंडादार कहने वाले इस तरह के आवेश में बात ना करें। सबसे पहले तो धर्म नियंत्रण सिखाता है। धर्म सिखाता है कि आप अच्छे भावना से
बात करें। आप ये हत्या की साजिशें करके भड़काएं ना लोगों को। मुद्दे पर रहे जो मैं सवाल पूछ रही हूं। पालकी से उतर कर 50 मीटर जाने में क्या दिक्कत थी? योगीराज जी प्लीज एड्रेस दिस क्वेश्चन। उसके बाद मुझे भारती जी और संगीत रागी के पास जाना है। एक किलोमीटर दूर जगतगुरु शंकराचार्य जी को ले जाकर छोड़ने की क्या आवश्यकता थी? प्रशासन को चार घंटा जगतुगुरु शंकराचार्य जी को प्रशासन गोल-गोल घुमाता रहा। और फिर ले जाके शिविर के सामने छोड़ के चला आया। तो जगतगुरु शंकराचार्य जी को प्रशासन ने जहां छोड़ा था जगतगुरु शंकराचार्य जी
वहीं पे बैठे। 2027 में चुनाव है। चुनाव के मुद्दे को लेकर के सरकार के खिलाफ काम कर रहे हैं। 2027 में जो चुनाव है उसी चुनाव के विपक्षी नेता बन के काम कर रहे हैं अभिवक्तेश्वरानंद जी बार-बार सपा के गोद में बैठकर के कांग्रेस के गोद में बैठकर के कांग्रेस के गोद में बैठकर के बीजेपी के खिलाफ काम कर रहे हैं। जो काम कर रहे हैं वह नेता का काम है। नेता का काम नेता को करने दीजिए। साधु संत का काम साधु संत को करने दीजिए। खुद ही जगतगुरु खुद ही भगवान बन गए। खुद ही
शंकराचार्य बन गए और आज देखिए क्या हाल है उनका भाटी जी भाटी जी और संगीत रागी जी को दिखाइए एक बार भाटी जी अगर जो स्थिति वहां पर बनी उसके लिए मैं आपसे समझना चाहती हूं क्योंकि उन्होंने खुद ही बताया था कि अखिलेश जी ने काशी में एक बार उन्हीं पर लाठियां बरसाई थी तो कुछ तो वजह रही होगी ना कोई भी हो चाहे वो कोई भी बड़ा से बड़ा साधु संत वो कानून से ऊपर थोड़ी हो जाएगा पुलिस कहेगी भाई पालकी से उतरना है तो उतरना पड़ेगा गाड़ी से उतर के जाना है तो जाना
पड़ेगा। जाना चाहिए था कि नहीं उतर के? नहीं एक तो आपके शो में मैंने दोनों जो संत जो बीजेपी के समर्थन में बोल रहे हैं। जितेंद्र सरस्वती पहले बोल रहे थे और अभी क्या नाम है? मैं नाम भूल गया। अभी आपके आचार्य तिवारी हैं। आचार्य शैलेश तिवारी दोनों का एकमात्र आरोप यह है। हम हां तिवारी जी दोनों का फोकस इस बात पे है कि यह बीजेपी के विरोधी हैं। योगी मोदी के विरोधी हैं। समाजवादी पार्टी कांग्रेस का समर्थन करते हैं। तो इसका मतलब तो यह हो गया कि इस देश में जो बीजेपी का विरोध करेगा,
योगी मोदी का विरोध करेगा, उसे ना तो यह हिंदू मानेंगे, ना यह उसे शंकराचार्य मानेंगे, ना उसे भारतीय मानेंगे। और चाहे वह मीडिया में है तो मीडिया में से हटा दिए जाएंगे। चाहे तो जो चैनल इनके खिलाफ खबर दिखाएगा वो चैनल के ऊपर इनकम टैक्स के छापे पड़वा के चैनल बिकवा दिया जाएगा। यानी अब इस देश में उसे बोलने का अधिकार है जो मोदी योगी के समर्थन में बोलेगा जो बीजेपी के समर्थन में बोलेगा। अगर अब मुक्तेश्वरानंद जी हालांकि हमारी पार्टी के तो वह विरोध में रहे हमारी पार्टी का विरोध किया उन्होंने चुनाव में लेकिन
अगर एक बार को मान लिया जाए कि उन्होंने समर्थन कर भी दिया तो ये इतना बड़ा गुनाह हो गया क्या देश में लोकतंत्र नहीं है क्या देश में संविधान नहीं है और जो अपमानजनक व्यवहार साधुओं के साथ प्रयागराज में किया गया है वीडियो मौजूद है जिस तरह से चोटी पकड़ पकड़ के बाल पकड़ पकड़ के खींचा गया है साधुओं को और उनके उनके ऊपर लाठियां बरसाई गई है जो अपमानजनक व्यवहार किया गया है उसेचार को अब ये इन्हें इन्हें कैसे संत कहें ये बीच में चिल्ला रहे हैं नाटक की तरह जैसे नुक्कड़ पे लोग चिल्लाते
हैं नहीं अब बताओ क्या करें इन्हें इनका क्या सम्मान करें ये लोग बीजेपी के अंध समर्थन में इतने अंधे हो गए हैं इन्हें ना अपने धर्म की मर्यादा का ख्याल है आप भी वही धर्म की मर्यादा का ख्याल है आप भी वही कर रहे हैं अभी आप बीजेपी पर आरोप लगा रहे थे कि उनके खिलाफ जो बोलता है वह गलत हो जाता है। आप भी वही कह रहे हैं। उनके धर्म गुरु होने पर ही सवाल खड़ा कर दिया अगर उन्होंने काउंटर किया। मेरे सवाल पर तो आइए भाटी जी। मेरा सवाल सिर्फ इतना है कि शाही
स्नान में तो परंपरा भी है। एक सेकंड पालकी की। यहां तो परंपरा ही नहीं है पालकी की। लेकिन बावजूद इसके जहां तक गए गए पुलिस ने फिर कहा। क्या उनको उतर कर 50 मीटर दूर नहीं उतरना चाहिए था? अंजना जी मैंने जो सवाल उठाया वो दूसरा है। मैं एक राजनीतिक व्यक्ति हूं। राजनीतिक पार्टी का प्रवक्ता हूं। इसके बावजूद मैं इतनी मर्यादा का पालन कर रहा हूं कि मैं किसी के बीच में एक शब्द नहीं बोला। और यह साधुओं के चिल्ला रहे हैं बीच में। राजनीतिक प्रवक्ताओं की तरह तो क्या यह यह सोचने की बात नहीं
है? क्या यह विचारनीय बात नहीं है? क्यों है क्यों चिल्ला रहे हैं? एक पार्टी के समर्थन में इतने अंधे हो जाते हैं। यह यह मुस्लिम अंधा क्यों पाकिस्तानी समर्थक उनको अंधा क्यों विरोधी है यह देश विरोधी अंधा क्यों कह रहे हैं? यह अंधापन होता है क्या इन्हें पार्टियों को किसी का समर्थन करना अंधापन यह अंधभक्ति है यह अंधापन है इन्हें राजनीति अरे आपके भी इतने समर्थक हैं वो सारे अंधभक्त थोड़ी है भगवान श्री राम के भक्त हैं आपके भी राजनीतिक सर्टिफिकेट देने का अधिकार किसने दिया वापस आ रही हूं छोड़िए छोड़िए आचार्य जी को मैं
वापस उस सवाल पर आ रही हूं टेक थ्री क्वेश्चन वन क्वेश्चन वन टेक थ्री जी क्या 50 मीटर पालकी से उतर के नहीं चल के चला जाना चाहिए अगर पुलिस कह रही है। देखिए हम तो इतने बड़े लोग नहीं है कि हम धार्मिक संस्कारों में सलाह दे सकें। धार्मिक मर्यादा क्या कहती है? शंकराचार्य हिंदू धर्म के सबसे बड़े गुरु होते हैं। सबसे सम्मानीय होते हैं। शंकराचार्य का सम्मान करना तो कम से कम इस सरकार को सीखना चाहिए। संगीत रागी जी इसका जवाब दीजिए। देखिए एक कहावत है सूप दूषित दूषित चलनिया भी जिसमें सहस्त्र छेद है
समाजवादी पार्टी यदि शंकराचार्यों के सम्मान के बारे में बात करें तो तो इन्हीं अभिवक्त नारायण को लाठी से पिटवाया था और यही है समाजवादी पार्टी जिन्हें अयोध्या में संतों को पीटा था गोलियां चलाई थी कार से अधिकार दूसरी बात दूसरी बात सैलरी तो लेते यूनिवर्सिटी मैंने डिस्टर्ब नहीं किया था। अभी पूरे दिन चैनल करते हैं। और बांटते हैं। गलत बोलेंगे तो मैंने आपके पिताजी का पैसा लेता हूं। आपके पिताजी का पैसा लेता हूं। पहले पिताजी का लेता हूं। तुम्हारे तुम्हारे पिताजी का लेता हूं। यार सैलरी संगीत आपको पूरा तुम करोगे तय। तुम करेगा भाटी। पिताजी
के लिए भाटी तू तुम तय करेगा। नहीं तू बदतमीजी बदतमीजी का जवाब यही है दोनों की खत्म कीजिए दोनों की हो गया हो गया हो गया ये तू तड़ाक बंद कीजिए बंद कीजिए तू तड़ाक बंद कीजिए बारी-बारी से बोलिए संगीत रागी जी नाम में आपके संगीत है उल्टा सुर छेड़ रहे हैं वापस आइए टॉपिक पे आइए नहीं नहीं नहीं बीच में मैंने मैंने किसी को डिस्ट मैंने किसी को डिस्टर्ब नहीं किया और भाटी और कवाटी जैसे आदमी से तो मैं बिल्कुल नहीं सुनना चाहता हूं जो आदमी असभ्यता के हटाइए दोनों की आवाज हटाइए। दोनों की
आवाज हटाइए। मैं फिर से कह रही हूं भाटी समुदाय का हर समुदाय का आज तक पूरा सम्मान करता है और किसी भी देखिए उनका टाइटल भाटी है इसलिए आप बाकियों का अपमान मत कीजिए। यह तरीका ठीक नहीं है। यह गलत है और मैं यह नहीं करने दूंगी आपको रागी जी। मैं आपको फिर कह रही हूं नियंत्रित भाषा में अपने विषय को रखिए। क्वेश्चन पेपर आप प्रोफेसर है ना क्वेश्चन पेपर देखिए दीजिएगा। उसमें कोई किसी को गाली दे देगा मार्क्स दीजिएगा आप उसको। हमने आपसे एक सवाल पूछा। वो कह रहे हैं कि जो भी इनके खिलाफ
जाता है उसको यह टारगेट करते हैं और शंकराचार्यों का सम्मान सीखना चाहिए। इस पर जवाब दीजिए। स्टिक टू द पॉइंट। अंजना जी अभी अंजना जी जब राजकुमार भाटी जी बोल रहे थे और बीच में एक एक संत बोल रहे थे तो उन्होंने संत को ज्ञान देना शुरू किया था। मैंने तो बीच के डिबेट में किसी में हस्तक्षेप नहीं किया था। यही बीच में आकर के टपक कर रहे हैं क्योंकि इनको मुंह का बवासीर हो जाता है हमेशा। मुंह वर्बल डायरिया जिसे कहते हैं अंग्रेजी में। दूसरी बात। दूसरी बात। शंकराचार्य शंकराचार्य जी ना तो यह जगतगुरु
हैं ना यह शंकराचार्य हैं। यह शुद्ध राजनैतिक व्यक्ति हैं। यह हेलीकॉप्टर से जाते हैं कहां प्रचार करने? गौबद्ध कहां पर होना चाहिए? गौबद्ध नहीं होना चाहिए। यह मेघालय में चले जाते हैं। मैंने इनसे पूछा गुवाहाटी एयरपोर्ट पर हमसे मिले थे और मैंने इनसे यही चीज कहा था कि जिस समाज जिस समय हिंदू समाज इस्लामिक आक्रांताओं और इस्लामिस्टों के प्रहार झेल रहा है। क्रिश्चियन मिशनरियों का प्रहार झेल रहा है। उस समय आप हिंदुओं के साथ ना खड़े होकर के इन ताकतों के साथ खड़े होते हैं। आप कांग्रेस के शंकराचार्य हैं। आप हिंदू समाज के शंकराचार्य तो
कतई नहीं है। ये मैंने वन टू वन डिबेट में कहा था। फिर उन्होंने मुझसे पूछा था आपको क्यों ऐसा लगता है? मैंने कहा कि आपकी करनी ऐसी है। आप राजनैतिक व्यक्ति हैं। शुद्ध राजनैतिक व्यक्ति और वसीयत के सहारे कोई शंकराचार्य जी इस देश में नहीं बनता है। शंकराचार्य तब बनता है जब भारत के विद्वत परिषद काशी के विद्वत परिषद और संत स संत समुदाय जो है उसे एक्सेप्ट करता है। आपको संत समाज एक्सेप्ट ही नहीं करता है सर। आप में कौन सा ऐसा संत का गुण है जो जिसके आधार पर आपको शंकराचार्य जी की बात
की जाए। इसका जवाबी से आपने सही प्रश्न किया। 50 गज आप 50 गज नहीं जा सकते आप। आप 50 गज है आप में इतना बड़ा अहंकार है कि आप 50 गज जा के आप स्नान नहीं कर सकते हैं। योगीराज ठीक है योगीराज जी के साथ अंजना जी बोलिए अंजना जी जी राजू जी आप ही बात का जवाब ले रहे हैं। जी ये जो बोल रहे हैं इनको पता है शंकराचार्य कितने बड़े विद्वान होते हैं। चारों वेद ज्ञाता होते हैं। उपनिषद शास्त्र सबके वो ज्ञाता होते हैं। आपको उपनिषद के बारे में कुछ पता है? किसी वेद
के बारे में आप कुछ जानते हैं? अच्छा योगीराज जी योगीराज जी क्या उनके पटाभिषेक पर रोक नहीं लगाई गई थी सुप्रीम कोर्ट द्वारा? मेरी भी तो सुन लीजिए। साल 2022 में एक सवाल पूछ रही हूं आपसे। पूछिए। पटाभिषेक पर कोर्ट ने रोक नहीं लगा दी थी साल 2022 में। अंजना जी जगत गुरु शंकराचार्य जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी मुक्तेश्वर सरस्वती जी का अभिषेक पहले ही हो चुका था जिस तरीके से रोक लगाई गई थी ना सुप्रीम कोर्ट ने कहा मेरी बात सुन लीजिए मेरी मेरी बात तो सुन अच्छा मुझे ये बताइए कोई आदमी खाना खा ले
और फिर कहा उसका भोजन मत दो वो तो भोजन कर चुका है जगतगुरु शंकराचार्य जी का अभिषेक हो चुका था 24 घंटे में दो पीठा थी सर ब्रह्मलीन जगतुगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के ब्रह्मलीन होने के बाद 24 घंटे के अंदर द्वारिका शारदा पीठ में सदानानंद जी का और ज्योतिष पीठ में स्वामी अभियुक्तानंद जी का ये तो इनका अभिषेक हो चुका श्रृंगेरी के शंकराचार्य जी ने किया है। सदानानंद जी तीन तीन शंकराचार आचार्य शैलेश तिवारी जी इसका जवाब दें। देखिए अंजना जी वासुदेवानंद जी माधवाश्रम महाराज जी और अभिवक्तेश्वरानंद जी के गुरु जी इन तीनों
लोगों की लड़ाई चल रही थी उस जो जोशी मठ के लिए वहां के शंकराचार्य पद के लिए और वह अभी भी मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। गुरु ने उनके गुरु ने कहा है कि हम अपने जीवित रहते किसी भी शिष्य को अपना पटाभिषेक नहीं करेंगे। निश्चनंद जी भी इसको नहीं मानते। आज भी निश्चलंद जी जो हैं वह इन दोनों लोग को नहीं मानते। चाहे अब मुक्तेश्वरानंद जी हो चाहे सदानानंद जी हो दोनों को नहीं मानते निश्चलानंद जी। इसके बावजूद भी ना तो अखाड़ा परिषद मानता है ना काशी विश्व परिषद मानता है। चलिए ये
लड़ाई ऐसे ही चलेगी और कहां तक जाकर रुकेगी अभी समझ नहीं आ रहा है क्योंकि वहां पर स्वामी अभि मुक्तेश्वर आनंद तो बैठे हुए हैं अपनी जगह पर। आप सभी का धन्यवाद हमारे साथ जुड़ने के लिए। लेकिन हल्ला बोल में अब हम रोज रात 9:00 बजे ब्लैक एंड वाइट में क्या दिखाने वाले हैं वो आपको बताएंगे क्योंकि आज ब्लैक एंड वाइट में इन खबरों का हम विश्लेषण करेंगे रात 9:00 बजे जरूर रहिएगा मेरे साथ क्योंकि दुनिया के नक्शे से ईरान को क्या ट्रंप मिटा देंगे ऐसा दावा वो कर रहे हैं क्या ईरान ट्रंप की हत्या
की साजिश रच रहा है ऐसा आरोप लगा रहे हैं डोन्ड ट्रंप अमेरिका यूरोप की जुबानी जंग युद्ध में बदलेगी क्या क्योंकि पहली बार अगर आप देखिए तो लगभग ये छह सात दशक में अमेरिका अमेरिका और यूरोप आमनेसामने आ गए हैं। और इसी के साथ भारत यूरोपियन यूनियन के बीच मदर ऑफ ऑल डील्स जिसे कहा जा रहा है सबसे बड़ा ट्रेड डील वो है क्या? साथ ही ये इंटरेस्टिंग खबर होगी। फर्जी पिज़्ज़ा हट पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की ऐसी बेइज्जती हो गई। पिज़्ज़ा हट का इनोगेशन किया और बाद में तस्वीरें हम दिखाएंगे। पता चला पिज़्ज़ा
हट ने कहा ये हमारी दुकान तो है ही नहीं। रक्षा मंत्री है पाकिस्तान के। और साथ ही अभी मुक्तेश्वरानंद खुद को शंकराचार्य साबित कर पाएंगे। साथ [संगीत] ही शराब कारोबार में मंदी के पीछे क्या जजी है? जी हां, खुशी की बात है।
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Magh Mela Controversy: Jagadguru Rambhadracharya Angry On Swami Avimukteshwaranand |Dr. Manish Kumar
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Rashtra Ki Baat : वोटर लिस्ट से मुसलमानों को कौन हटवा रहा ? Manak Gupta के साथ LIVE | 'INDIA' VS NDA
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