दर्शकों को तीन तस्वीरें हम आपको दिखा रहे हैं। जरा तीन तस्वीरें देखकर अंदाजा लगाइए कि किस तरीके से पहले नरसंहार किया गया था भारत में पहलगाम में और उसके बाद पूरा देश एकजुट था। सब की मांग यही थी कि बदला लिया जाना चाहिए। अब इसके बाद देखिए 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर लांच किया गया। नौ ठिकानों को नेसनाबूत कर दिया गया पाकिस्तान के। 100 से ज्यादा आतंकवादी उसके मारे गए थे और पूरी दुनिया में एक बार फिर से पाकिस्तान बेनकाब हुआ। तो 8 मई को पाकिस्तान ने हमला करने की कोशिश की, जिसमें वो पूरी तरह
से नाकाम रहा। भारत ने तमाम लड़ाकू विमान उड़ाए और उसके बाद ड्रोंस को मार गिराया। अब देखिए 8 मई शाम को धुआंधार पाकिस्तान की तरफ से हमला किया गया। लगातार कोशिश की गई भारत पर हमला करने की जिसको पूरी तरह से भारत भारतीय सेना की तरफ से नाकाम कर दिया गया। तो भारत के S400 एयर डिफेंस सिस्टम ने गुरुवार शाम को सतवारी, सांबा, आर एसपुरा और अर्निया के आसमान में आठ पाकिस्तानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक नष्ट कर डाला था। रक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में एक बयान भी जारी किया है। तो देखिए जरा जम्मू, पठानकोट और
उधमपुर में सैनिक स्टेशंस को पाकिस्तान ने ड्रोंस और मिसाइलों से निशाना बनाया। स्टैंडर्ड को ऑपरेटिव प्रोसीजर के अनुसार काइनेटिक और नॉन काइनेटिक क्षमताओं का उपयोग करके खतरों को तुरंत बेअसर कर दिया गया। इन हमलों में जान माल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। इतना ही नहीं भारत और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए और अपने लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। यह कहा गया था भारत की तरफ से रक्षा मंत्रालय की तरफ से। तो लगातार हमारे साथ हमारे सभी संवाददाता बने हुए हैं। आशरफ भी हमारे साथ हैं। श्रेया
भी हमारे साथ हैं। कमलजीत भी हमारे साथ हैं। आशरफ हम आपका रुख करेंगे। जिस तरीके से हम गीदड़ भबकी सुनते रहे पाकिस्तान की तरफ से लगातार जब से हमने आतंकवादियों के कैंप्स को नष्ट किया गया कि हम एटम बम का इस्तेमाल करेंगे। बार-बार सवाल यह पूछा जाता रहा कि अस्तित्व पर जब खतरा हो तब जाकर एटमी पावर का कोई देश इस्तेमाल करता है। क्या जो वो गढ़ थे आतंकवाद के वो उनका अस्तित्व था जिसके बाद यह सोचा जा रहा है कि क्यों ना एटम बॉम्ब का इस्तेमाल कर लिया जाए भारत के लिए? नहीं यह तो
दरअसल एक ही चीज है जिससे वो दुनिया या भारत को डरा सकते हैं। लेकिन भारत को भी पता है और दुनिया को भी पता है। न्यूक्लियर वेपन्स का इस्तेमाल करना इतना आसान नहीं है। हम तीन साल से देख रहे हैं यूक्रेन और रूस में युद्ध चल रहा है। रशिया के पास सबसे ज्यादा न्यूक्लियर एसेटस है। लेकिन उन्होंने भी एक बार धमकी दी थी जब पूरा दबाव जो है रशिया पर आया था कि हम इनका इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन करने वाला कोई नहीं है क्योंकि उसके साथ तो खात्मा है वो फिलहाल वो एक चिंता की
बात जरूर है लेकिन इतना जरूर है कि पाकिस्तान जो है उस पर भरोसा नहीं है। यही कारण है कि जो अमेरिका है उसकी निगाहें हैं कि कई कोई जो है कोई ऐसा मिस एडवेंचर जो है पाकिस्तान की तरफ से ना हो जो विश्व के लिए खतरा बन सकता है। उसको लेकर जो है उनको पूरी तरह से अमेरिका की तरफ से भी और चीन की तरफ से भी वो गाइडलाइन दी गई है क्योंकि अगर हम अमेरिका पाकिस्तान की बात करें जितना पाकिस्तान का स्टेक वहां नहीं है उससे ज्यादा चीन का है। जितना भी बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पाकिस्तान
में है, वह चीन का है और चीन भी चाहता है कि जिस अंदाज से भारत के पास शक्ति है, क्षमता है, उसके चलते जो है पाकिस्तान का भारत के साथ टकराना अच्छी बात नहीं होगी और पाकिस्तान का ही नुकसान होगा और उसका एहसास जो है भारतीय सेना ने और वायु सेना ने पिछले दो दिन के दौरान पाकिस्तान को दिया है। क्योंकि जिस अंदाज से पहले तो जो ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत हुई जिस अंदाज से न सिर्फ पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया बल्कि पाकिस्तान के दिल के भीतर यानी पंजाब वहां
पर हुआ और कल उसका ट्रायल था जब रावलपंडी क्योंकि वो आर्मी का पूरा जो हेड क्वार्टर है वो आईएसआई का पूरी जो गतिविधि है वो रावलपंडी में ही है। रावलपिंडी, पाकिस्तानी, पंजाब और पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के बीच में है। और वहां पर भी जो है कई सारे धमाके जो ड्रोनस ने सफल किए वहां पर या जो बाकी जो एयर ट्रैक्स वहां पर हुई, जिसमें पाकिस्तान ने भी माना है कि उनको नुकसान हुआ है। उनका जो एयर डिफेंस सिस्टम है उसको क्षति पहुंची है। उनके सैनिक मारे गए हैं। दूसरी तरफ कल इतनी मतलब मिनट भर
भी देर नहीं लगाई पाकिस्तान ने। जो ही दो उनके चाइनीस F17 जहाज जो है वो गिराए गए तो उन्होंने कबूल भी किया कि तुरंत कि हमारे जहाज गिराए गए हैं और पाकिस्तान भारत की तरह ये बर्दाश्त नहीं कर सकता है कि अगर उनके चार या पांच विमान गिर जाएंगे तो उनकी क्षमता ही खत्म हो जाएगी। तो जाहिर है कि एक अपनी जनता को खुश करने के लिए पाकिस्तान की क्योंकि जिस अंदाज से पाकिस्तानी सेना की फजीहत पाकिस्तान में हुई है जिस अंदाज से वो पूरी तरह से जो है कहीं ना कहीं अपने आवाम के सामने
ही नंगे हो गए हैं। उस बीच पाकिस्तानी सेना को अपनी नाख बचाने के लिए कल वो जो है एक सिंबॉलिक एक अटैक कैरी करना था। अलग-अलग हिस्सों में उन्होंने वो किया जिसको पूरी तरह से विफल जो है वो भारतीय सेना और वायु सेना बहुत सारे और भी सवाल हो जाते हैं। देखिए बीएलए तो उनकी सेना के तमाम लोगों को अगवा करती है और उसके बाद फिर वहां की सेना कहती है कि यहां के नेताओं की वजह से हमें मुंह की खानी पड़ रही है। वहां की जो जनता है वो वैसे ही बहुत लंबे समय से
तमाम चीजों को देखने की वजह से बहुत ज्यादा त्रस्त है। क्योंकि वहां पे इमरान खान के लिए कैसे लोग सड़कों पर उतर आते हैं। टैंक्स पर चढ़ जाते हैं। कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो स्थिति उतनी भी अच्छी नहीं है और वहां की जनता को भरमाना वहां के सियासतों के लिए या फिर वहां की सेना के लिए इतना आसान भी नहीं है। बहुत सही कहा आपने शशि और जिस दौर से पाकिस्तान गुजर रहा है और वहां पर एक तरफ न सिर्फ बलचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ अब तक का मतलब पिछले कई दशकों से वहां
पर तनाव चल रहा है लेकिन अब तक का सबसे बड़ा विरोध चल रहा है। वहां पर पिछले 48 घंटों के दौरान 14 पाकिस्तानी सैनिक दो अलग-अलग आईडी विस्फोटों में मारे गए हैं। पाकिस्तान में उतनी सेना नहीं है जो बलूचिस्तान के या फिर नॉर्दर्न एरियाज के या फिर खैबर पख्तों के हालात को अंदरूनी हालात को देखे और दूसरी तरफ जो है भारत के साथ युद्ध कर सके वो परिस्थिति पाकिस्तानी सेना में नहीं है। दूसरी तरफ जो आपने इमरान खान की बात की आप ये भी देख लीजिए न सिर्फ इमरान खान के समर्थक पूरी तरह से चाहते
हैं कि पाकिस्तान एक्सपोज हो। पाकिस्तानी सेना एक्सपोज हो। उसी तरह जो है खैबर पख्तू के तहरीक तालिबान जो है वो भी पूरी तरह से जो है पाकिस्तानी सेना के खिलाफ खड़े हैं और तीसरी तरफ सबसे महत्वपूर्ण जो है कि पाकिस्तानी सेना के भीतर जो है वहां पर भी जो है दरारें हैं जो जिस मखौोटे को इस्तेमाल सबसे ज्यादा पाकिस्तानी सेना करती थी धर्म के आड़ को लेकर उसमें भी फाड़ है। हमने दो दिन पहले देखा कि जो लाल मस्जिद के इमाम हैं उन्होंने साफ तौर पर यह कह दिया है कि उनके समर्थक और उनके लोग
जो हैं वो पाकिस्तानी सेना का साथ नहीं देंगे और इमरान खान के समर्थक ये कह रहे हैं कि वो पाकिस्तान छोड़ के इंग्लैंड चले जाएंगे। तो जाहिर है कि जो कौम या जो देश इस चुनौती की घड़ी में एकजुट नहीं हो सकती है उसका क्या हाल होगा। वहां पर भारत की तरफ से इतने सारे राजनीतिक दल इतने सारे प्रांत इतने सारे आइडियोलॉजी डिफरेंट-डिफरेंट होने के बावजूद भी पाकिस्तान के खिलाफ एकजुट न सिर्फ पूरा देश हुआ बल्कि सभी राजनीतिक दल क्योंकि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ होगा। जब जो देश के राजनीतिक दल जो कल ऑल
पार्टीज बैठक हुई थी वहां पर एक सुर में सब ने कहा कि वो पाकिस्तान के खिलाफ खड़े हैं। सरकार के साथ हैं तो कहीं ना कहीं वो भी एक सुकून करने वाली बात है और उन सभी चीजों पर जो है पाकिस्तान की नजर है और इसलिए पाकिस्तान इस चाहता है कि कोई बीच में आए और इस तनाव को कम करे। यहां तक कि उन्होंने पहले दिन से जब ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत हुई नहीं चाहते हैं। तनाव नहीं चाहते हैं तो कल की हमाकत उनको नहीं करनी चाहिए थी। या यह भी हो सकता है कल की
हमाकत उन्होंने सिंबॉलिक तौर पर और अपनी ताकत दिखाने के लिए की हो। लेकिन जिस अंदाज से उनकी कल की कार्रवाई पूरी तरह से विफल हो गई। भारत को ना कोई नुकसान पहुंचा सकी ना यहां पर एयरबेस को कोई नुकसान पहुंचा। ना किसी सैनी ठिकाने को यहां तक कि कुछ देर के बाद पूरी तरह से सरकार की तरफ से डिफेंस मिनिस्ट्री की तरफ से उसका विवरण दिया जाएगा कि पाकिस्तान की तरफ से क्या हुआ था। और उसके जवाब में भारतीय सेना ने क्या किया है? हम थोड़ी देर उसी का इंतजार करेंगे जो सही और सटीक बातें
वहां से बाहर आएंगी। उन्हीं को अपने दर्शकों तक पहुंचाते हैं। बिल्कुल श्रेया जो हम लगातार बात कह भी रहे हैं ना कि सबसे महत्वपूर्ण बात तो ये है ना कि आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया था भारत की तरफ से। वही आतंकवादी जो नरसंहार करते रहे हैं भारत में और पहलगाम में तो हद ही कर दी थी उन्होंने। अब सवाल ये था पूरी दुनिया के सामने भारत ने ये साबित किया कि ना तो सिविलियंस को टच किया गया ना सेना को टच किया गया। यह भी साफ-साफ मैसेज था कि हम किसी भी तरह के युद्ध
में नहीं जाना चाहते। लेकिन छोड़ेंगे भी नहीं अगर इसी तरह से आतंकवाद फैलाता रहा पाकिस्तान तो। देखिए बिल्कुल मतलब इसमें कोई दो राहे नहीं है कि अगर पाकिस्तान लगातार एस्केलेशन करते रहे और हमारे सिविलियंस को हमला करते रहे तो भारत की तरफ से भी रिटाैलिएशन की जाएगी। हालांकि अगर हम भारत की रणनीति की बात करें हम कभी भी किसी भी देश की सिविलियंस को अटैक नहीं करते और अगर आप लगातार पिछले दिनों से जो हमारे द्वारा किए गए अटैक्स देखेंगे ये फोकस्ड मेजर टारगेटेड जो ये तीन शब्दों का इस्तेमाल किया गया था जब पहला प्रेस
कॉन्फ्रेंस किया गया था ऑपरेशन सिंदूर में ये एक मैसेजिंग था कि कैसे पहले टारगेट्स लॉक किए गए और उसके बाद यह अटैक किया गया। नौ ऐसे टेरर कैंप्स को आइडेंटिफाई करके यह अटैक किया गया। उसके आसपास के भी अब कई वीडियोस भी सामने आए शशि। उस वीडियोस में आप देखेंगे इन टेरर कैंप्स के आसपास के स्ट्रक्चर्स को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। तो एक तरीके से ये एक बहुत बड़ा मैसेजिंग था कि भारत का निशाना पाकिस्तान के सिविलियंस नहीं है। लेकिन पाकिस्तान में पनपने वाले इन आतंकवादी हैं और इन आतंकवाद की फैक्ट्रीज हैं। बिल्कुल। कमलजीत हमारे
साथ लगातार बनी हुई है। कमलजीत आज का दिन बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है और अगर आगे की स्ट्रेटजी की बात की जाए और इंटरनेशनल फोरम की अगर हम बात करें तो किस तरीके से इसे देखा जाना चाहिए और जिस तरीके से पाकिस्तान बहुत अलग-थलग पड़ा हुआ है हर लेवल पर। वैसे भी कई बार तो लगता ही है कि पाकिस्तान पूरी तरह से एक रुक स्टेट है। पूरी तरह से एक फेलोर कंट्री है और जिस तरह से वहां की जनता उनसे खुद ट्रस्ट है और भारत ने जिस तरह के डिसिशनंस अभी तक लिए हैं कुल मिलाकर आगे
क्या किस तरह की तस्वीर देखने को मिल सकती है? देखिए पाकिस्तान ने हमेशा से एक स्ट्रेटजी अपनाई है और अपने आप को विक्टिम ऑफ टेरर बताया है। जहां पे सबसे ज्यादा आतंकवाद आता है वही अपने आप को सबसे बड़ा विक्टिम बता रहा है। ये एक हैरानी वाली बात है। दूसरी अगर हम बात करें जिस तरह से उन्होंने स्ट्रेटेजाइज़ किया है। वो हमेशा एक इस्लामिक नेशन होने की बात करते हैं। और इस तरह से उनका एक पैटर्न है और वहां पे वो सीक करते हैं इंटरनेशनल रिस्पांस। खासतौर पे लाइक माइंडेड कंट्रीज से। टर्की है, अज़र भाईजान
है, कई हैं ऐसे जो उनको बिल्कुल सपोर्ट करते हैं। उनके अलायज़ हैं। वहां पे अगर हम दूसरी बात करें कि जो भारत है वो सेकुलर कंट्री है। और यहां पे जिस तरह से क्योंकि सब लोग एक साथ मिलकर रहते हैं। ये भी एक चीज है जो कि पाकिस्तान को कहीं ना कहीं खलती जरूर है। एक मिसइफार्मेशन फैलाने की बात यहां पे जरूर की जाती है। आपको बता दें कि देर रात क्योंकि शेलिंग होती रही। हमारे साथ एक शख्स हैं। काफी देर से इंतजार कर रहे हैं। उनसे एक थोड़ा सा एक रिएक्शन ले लेते हैं। आप
गुजरात आपने कहा आप गुजरात के रहने वाले हैं। आप जम्मू कश्मीर आए और इसी बीच में इतनी बड़ी कारवाई भी हुई और उसके बाद अगर हम बात करें जिस तरह से देर रात तक शेरिंग होती रही। ये क्या आपका पहला एक्सपीरियंस था और क्या हुआ? कुछ आप बता पाएंगे। आप भी थी? हां, यह भी मेरा पहला एक्सपीरियंस है। मैं घूमने के लिए श्रीनगर चार जा गया था। वहां से वापस आ रहा हूं। तो यहां पे नाइट होल्ड मैंने किया है रजोरी में। मगर यहां पे भी बहुत सारा ब्लैकआउट पूरी रात रहा हुआ है। और एस
पर द इनफेशन बहुत जगह पे ड्रोन का अटैक भी हुआ हुआ है। तो यहां पे बहुत टेंशन वाला एटमॉस्फियर है। तो हम भी यहां से अभी सभी वापस ही अंकलेश्वर जा रहे हैं गुजरात में। तो थोड़ा संभल के ही जाना पड़ेगा क्योंकि लगता है कि ये थोड़ा टेंशन वाला मैटर है। रात भर नींद आई क्योंकि धमाके थे, ब्लैकआउट था। मींस आप परिवार के साथ आए हुए हैं। तो उसके बारे में बताइए। नहीं हम आपको फोन आते रहेगा रात? हां पूरी रात फैमिली के फोन आए हैं और उनको भी थोड़ा टेंशन होता है तो पूरी रात
सो तो नहीं पाए क्योंकि फोन भी चालू था और वैसे टेंशन के हिसाब से सो भी नहीं पाए काफी टाइम से धमाकों की आवाज सुनाई धमाको का दो एक दो बार सुनाई दिया है ज्यादा कुछ नहीं सुनाई दिया है मगर होटल अच्छा है तो अंदर ज्यादा आवाज नहीं आ रहा है मगर बाहर बहुत बाहर बहुत ही टेंशन है ऐसा न्यूज़ में और सब जगह से पता चल रहा है हमको हां तो यहां से अब आप चले जाएंगे वापस हां हम यहां से वापस जा रहे हैं गुजरात से ठीक है तो ये हमें बता रहे थे
बताइए एक गुजरात के स्थानीय निवासी है यहां पे घूमने आए थे और खासतौर पे आपको बता दें कई टूरिस्ट साइट उससे पहले बंद हो गई थी। गंडोला हमें बताया गया वह आउट ऑफ एक्शन कर दिया गया। लेकिन एक जो बात है कि जो आम नागरिक है खासतौर पे जो नियंत्रण रेखा में रहते हैं जो हम बात करें इंटरनेशनल बॉर्डर के पास रहते हैं। यहां पर उन्होंने कई दशकों तक पाकिस्तान की हरकतें देखी हैं। गोलाबारी देखी है। कम्युनिटी बंकर्स हैं। लेकिन कई सालों तक क्योंकि यहां पर फायरिंग और इस तरह की आर्ट शेलिंग नहीं हुई की
तो इतनी तैयारी नहीं थी और बहुत जल्दी हरकत में भारत सरकार भी आई और उसके बाद किस तरह से स्ट्रेंथन किया गया और हमने देखा है चाहे उडी हो चाहे हम पुंज की बात करें वहां पे इमीडिएट रिलीफ था क्योंकि कई ऐसे डॉक्टर्स थे जो पुलिस वाले थे जो भारतीय सेना के जवान तो सामने बिल्कुल डटे हुए हैं लेकिन जो बाकी जो सिविल डिफेंस है वो भी पूरी तरह से एक्टिवेटेड था और हमने देखा है क्योंकि एक इंफॉर्मेशन ये भी आ रही थी कि कहीं ना कहीं फिदाई भी हो सकता है क्योंकि जश्न मोहम्मद और
लश्कर तबा के ठिकानों पर कहीं ना कहीं जरूर टारगेटिंग हुई है। तो उनके लिए एक पर्सनलाइज्ड एक मैसेज है और वहां पे वो रिसोंड कर सकते हैं। तो ये नॉन स्टेट एक्टर्स का इस्तेमाल करना आतंकी हमले कराना ये पाकिस्तान की पुरानी हरकत रही है और इसको हम प्रॉक्सी वॉर लो कॉन्फ्लिक्ट ज़ोन वॉर बोलते हैं। और इस वजह से पाकिस्तान जो कन्वेंशनल वॉरफेयर में भारत को तो टक्कर नहीं दे सकता लेकिन प्रॉक्सी वॉर है जहां पे वो नॉन स्टेट एक्टर्स के जरिए काम करता है वो हमेशा इस्तेमाल करता रहता है। इसी वजह से एक हाइट एंड
अलर्ट है और आगे आने वाले दिनों में भी चाहे हम बात करें बीएसएफ की चाहे हम बात करें भारतीय सेना की पूरी तरह से मुस्तैद है और मुंहतोड़ जवाब देने की कार्रवाई लगातार चल रही है। आशावाणी सबसे बड़ा महत्वपूर्ण बात सवाल और बात तो ये हो जाती है कि पाकिस्तान बार-बार बेनकाब होता है। जिस तरीके से आतंकवादियों के जनाजे के समय पर उनके राष्ट्रीय ध्वज से उन्हें लपेट कर चाहे वो सेना के प्रमुख की तरफ से फूल भेजे गए हो या फिर तमाम बड़े पॉलिटिशियंस की तरफ से फूल भेजे गए हो वहां पर नमाज पढ़ने
वाले खुद आतंकवादी नजर आए हैं। कहीं ना कहीं दुनिया के सामने एक बार फिर से पाकिस्तान ने खुद को बेनकाब कर दिया था। शशि यह तो पॉलिसी रही है पिछले 30 साल से पाकिस्तान की और किस अंदाज से वो इन अलग-अलग प्रांतों के गरीब बच्चों को पहले तो एक फैक्ट्री में ट्रेन करता है। उसके बाद जहर भरता है और उसके बाद उनका इस्तेमाल करता है। और कहीं ना कहीं वही एक ताकत फिलहाल जो है लोगों को ठेस पहुंचाने के लिए लोगों को गांव देने के लिए पाकिस्तान के पास है। उन्होंने इसी का इस्तेमाल अफगानिस्तान में
किया और तालिबान जो है वह यह बात समझ गया और तालिबान ने किस अंदाज से अब पाकिस्तान के साथ फिर जंग की स्थिति बनी भी है और बन भी गई है और वो भी पहचान गए हैं कि पाकिस्तान का असली चेहरा है और पाकिस्तानी सेना का असली चेहरा क्या है और यही कारण है कि सबसे ज्यादा तनाव अगर भारत से भी ज्यादा पाकिस्तान का किसी के साथ है वो अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के साथ है। क्योंकि जो रिफ्यूजीस पाकिस्तान में पिछले 30 साल से रह रहे थे जो पाकिस्तान को बचाने के लिए अमेरिका के कहने
पर जो है रूस के खिलाफ लड़ने के लिए वहां पहुंचे तब उनकी जो मलाई है अमेरिका की और वेस्ट की वह खा रहा था और उसका जो है कबूलनामा खुद वहां के विदेश मंत्री ने जो है दुनिया के सामने ख्वाजा आसिफ ने रखा है। लेकिन कहीं ना कहीं जो है इस वक्त सबसे बुरे दौर से पाकिस्तान गुजर रहा है और यही कारण है कि कल सरकार ने हाथ बंद करके सब कुछ सेना के हवाले कर दिया। लेकिन सेना उस परिस्थिति में नहीं है जिस परिस्थिति में कुछ साल पहले पाकिस्तानी सेना थी। खासतौर से जब से
वहां पर राजनीति को लेकर इमरान खान को जीतकर बेदखल कर दिया गया और उसके बाद पहली बार पाकिस्तानी सेना ने देखा कि आवाम की आ ताकत क्या होती है और आवाम ने ही पाकिस्तानी सेना के घरों में घुस घुसकर उनको पीटा मारा यहां तक कि उसकी क्रूरता तो छुपी नहीं है चाहे वो बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी हो चाहे तहरीकी तालिबान हो तो वो कहीं ना कहीं जो है वो चीज जो है वो पाकिस्तान को काफी परेशान कर रही है और उस बीच से जिस अंदाज से भारत ने पहली बार जो है इस तरह की कारवाई ऑपरेशन
सिंदूर में की आतंकवाद के खिलाफ की उसकी जो है कल्पना पाकिस्तान को नहीं थी। अब जाहिर है कि जो जो अभी कमलजीत बोल रही थी नॉन सिटीक एक्टर्स जिसका इस्तेमाल एक हथियार रहा है जियाउल हक जनरल जियाउल हक के दौर से पाकिस्तान के लिए उसको वो खोना नहीं चाहते हैं वो उसी का इस्तेमाल करना चाहते हैं ताकि वो पर्दे के पीछे उनकी सहायता करें मदद करें और वो पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान के लिए दूसरे देशों में जो हैं हमले करें लेकिन अब वो भी कहीं ना कहीं समझ गए होंगे और जाहिर है जिस मौलाना मसूद
अजहर को पाकिस्तानी सेना या आईएसआई ने ये आश्वासन दिया था भारत की तरफ से ऑपरेशन सिंदूर से पहले कि तुम्हारा बाल भी बांका नहीं होगा। जब उसका ही मुख्यालय उठ जाता है, हाफिज सईद का ही मुख्यालय उठ जाता है, तो जाहिर है कि उनके दिल में भी पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नफरत जो है वो खड़ा हो जाएगी और यही कारण था कि सरकार से सेना तक जो है वो खड़े दिखे वहां उन जनाज़ों में जहां पर आतंकियों के साथ-साथ उनके समर्थक मारे गए।