कायनात को हम देखते हैं तो इस कायनात में जो है वो एक तंजीम पाया जाता है। एक नज़म पाया जाता है। तो क्या नज़म बगैर मुनजम के हो सकता है? अगर हम देखें तो कुछ ऐसे कवायद भी इस कायनात में मौजूद है जो अभी तक इसका कोई जो है वो हमें मखलूकात में से कोई क्रिएटर समझ नहीं सामने नहीं आया। जैसे कि 2 + 2 जो है वो चार होते हैं। तो इसका कोई क्रिएटर नहीं है। लेकिन ये जो है वो कायनात के फितरत के अंदर खुद ब खुद मौजूद है। तो क्या ये इतना मुनसम
कायनात जो है वो खुदब चल सकता है सर या बगैर जो है वो किसी क्रिएटर के खुद बख आ सकता है। माज़ भाई ये तो आपने वो वाली बात कर दी कि हमने कुत्ते के दुम पे पांव रख दिए। देख जब भी आप किसी एथिक से इस्लामोफोब से किसी से भी आप बात करेंगे ना वो कभी भी इस टॉपिक पर नहीं जाता कि डू वी हैव ए क्रिएटर और नो वो उस पर डिस्कशन ही नहीं करता। क्यों? क्योंकि कोई भी इंकार कर ही नहीं सकता क्रिएटर के होने से। और ये वो क्लेम है जो इटसेल्फ
कुरान भी कर रहा है। कुरान कह रहा है कि ऐ नबी ए मुसलमानों तुम अगर इन कुफार से भी जाके पूछोगे ना तो वो भी तुम्हें कहेंगे कि हमारे बनाने वाला है। इनकार कोई नहीं करता है। इसीलिए ये बहुत अच्छी ट्रिक करते हैं बेवकूफ बनाने के लिए। वो कहते हैं कि यार हम क्रिएटर पे बात नहीं करेंगे। हम जंप करके आ जाएंगे या हम खुदा पे बात करेंगे या अल्लाह पे बात करेंगे। अकली तौर पे हां अकली तौर पे मुमकिन ही नहीं है कि कोई भी चीज खुद से बन जाए। अगर खुद से कोई चीज
बन रही है तो वो नथिंग से बन रही है। और नथिंग से बन रही है ये बेवकूफी है। जो ये मानेगा वो बंदा बेवकूफ है। इससे ज्यादा और कुछ भी नहीं है। पहली बात। दूसरी बात हम इस चीज को जानते हैं कि कोई भी कानून खुद से नहीं बनता। उसको बनाने वाला चाहिए। कोई कानून इटसेल्फ बन ही नहीं सकता। ना सिर्फ बनाने वाला चाहिए। कानून कोई बेवकूफ भी नहीं बना सकता है। अगर कोई कानून बेवकूफ बना सकता है भाई मैं आपको000 डॉलर देने के लिए तैयार हूं। मेरे सामने कोई बेवकूफ ले आओ और मैं देखता
हूं वो कैसे कानून बनाता है। तो ये सारी बहकी बहकी बातें होती है। कहने के लिए अच्छी लगती है। और यही जो ट्रिक है ये हमारे मासूम मजलूम मुसलमान बच्चों के आगे इस्तेमाल करते हैं। वो क्रिएटर पे जाने की बजाय खुदा और अल्लाह पर बात करते हैं और फिर वहां पर जो लूप होल्स होते है ना उनको इस्तेमाल करते हैं और यहां से वहां छलांगे लगाते हैं और हमारे मासूम से जो बच्चे होते हैं बेचारे वो उनकी बातों में बहक जाते हैं। कायनात को हम देखते हैं तो इस कायनात में जो है वो एक तंजीम
पाया जाता है। एक नज़म पाया जाता है। तो क्या नज़म बगैर मुनजम के हो सकता है? अगर हम देखें तो कुछ ऐसे कवायद भी इस कायनात में मौजूद है जो अभी तक इसका कोई जो है वो हमें मखलूकात में से कोई क्रिएटर समझ नहीं सामने नहीं आया। जैसे कि 2 + 2 जो है वो चार होते हैं। तो इसका कोई क्रिएटर नहीं है। लेकिन ये जो है वो कायनात के फितरत के अंदर खुद ब खुद मौजूद है। तो क्या ये इतना मुनसम कायनात जो है वो खुदब चल सकता है सर या बगैर जो है वो
किसी क्रिएटर के खुद बख आ सकता है। माज़ भाई ये तो आपने वो वाली बात कर दी कि हमने कुत्ते के दुम पे पांव रख दिए। देख जब भी आप किसी एथिक से इस्लामोफोब से किसी से भी आप बात करेंगे ना वो कभी भी इस टॉपिक पर नहीं जाता कि डू वी हैव ए क्रिएटर और नो वो उस पर डिस्कशन ही नहीं करता। क्यों? क्योंकि कोई भी इंकार कर ही नहीं सकता क्रिएटर के होने से। और ये वो क्लेम है जो इटसेल्फ कुरान भी कर रहा है। कुरान कह रहा है कि ऐ नबी ए मुसलमानों
तुम अगर इन कुफार से भी जाके पूछोगे ना तो वो भी तुम्हें कहेंगे कि हमारे बनाने वाला है। इनकार कोई नहीं करता है। इसीलिए ये बहुत अच्छी ट्रिक करते हैं बेवकूफ बनाने के लिए। वो कहते हैं कि यार हम क्रिएटर पे बात नहीं करेंगे। हम जंप करके आ जाएंगे या हम खुदा पे बात करेंगे या अल्लाह पे बात करेंगे। अकली तौर पे हां अकली तौर पे मुमकिन ही नहीं है कि कोई भी चीज खुद से बन जाए। अगर खुद से कोई चीज बन रही है तो वो नथिंग से बन रही है। और नथिंग से बन
रही है ये बेवकूफी है। जो ये मानेगा वो बंदा बेवकूफ है। इससे ज्यादा और कुछ भी नहीं है। पहली बात। दूसरी बात हम इस चीज को जानते हैं कि कोई भी कानून खुद से नहीं बनता। उसको बनाने वाला चाहिए। कोई कानून इटसेल्फ बन ही नहीं सकता। ना सिर्फ बनाने वाला चाहिए। कानून कोई बेवकूफ भी नहीं बना सकता है। अगर कोई कानून बेवकूफ बना सकता है भाई मैं आपको000 डॉलर देने के लिए तैयार हूं। मेरे सामने कोई बेवकूफ ले आओ और मैं देखता हूं वो कैसे कानून बनाता है। तो ये सारी बहकी बहकी बातें होती है।
कहने के लिए अच्छी लगती है। और यही जो ट्रिक है ये हमारे मासूम मजलूम मुसलमान बच्चों के आगे इस्तेमाल करते हैं। वो क्रिएटर पे जाने की बजाय खुदा और अल्लाह पर बात करते हैं और फिर वहां पर जो लूप होल्स होते है ना उनको इस्तेमाल करते हैं और यहां से वहां छलांगे लगाते हैं और हमारे मासूम से जो बच्चे होते हैं बेचारे वो उनकी बातों में बहक जाते हैं।