रुकिए। बस एक पल के लिए रुकिए और मुझे बताइए क्या आपने कभी किसी को इतना प्यार किया है कि यह सोचकर ही सांस रुक जाए कि एक दिन वह नहीं रहेंगे? क्या आपने कभी रात के सबसे [संगीत] गहरे अंधेरे में जब सब सो रहे हो और आप अकेले जाग रहे हो। यह सवाल पूछा है खुद से। अगर वह चले गए तो क्या हम दोबारा कभी मिलेंगे? यह सवाल छोटा नहीं है। यह सवाल इंसान के दिल की सबसे गहरी [संगीत] तकलीफ से उठता है। और आज इस वीडियो में मैं आपको वह जवाब दूंगा जो शायद आपने
पहले कभी इस तरह नहीं सुना। शिव महापुराण और संतों की वाणी में एक ऐसा रहस्य छुपा है जो बताता है कि क्या मृत्यु सच में दो आत्माओं को अलग [संगीत] कर सकती है या प्रेम उससे भी बड़ा होता है। पूरा वीडियो देखिए क्योंकि आगे जो रहस्य खुलने वाला है वह आपके जीवन को देखने का नजरिया हमेशा के लिए बदल देगा। हजारों साल पहले की बात है। हिमालय के किसी शांत और निर्जन कोने में एक महान ऋषि तपस्या कर रहे थे। उनका नाम था महर्षि शौनक। वो बहुत ज्ञानी थे। वेदों के ज्ञाता थे। उन्होंने जीवन की
बहुत सारी गुथियां सुलझाई थी। [संगीत] लोग दूर-दूर से उनके पास आते थे। अपने प्रश्नों के उत्तर लेने। लेकिन एक [संगीत] सवाल था जो खुद उनके सीने में पत्थर की तरह धंसा हुआ था। उन्होंने देखा था एक बार गांव में एक बूढ़ा आदमी अपनी पत्नी की अर्थी के पीछे चल रहा था। उसके कदम लड़खड़ा रहे थे। आंखों से आंसू नहीं बस एक खालीपन था। वह रो भी नहीं [संगीत] सकता था क्योंकि जब दर्द बहुत ज्यादा हो जाता है तो आंसू भी जवाब दे देते हैं और उस आदमी के चेहरे पर ऋषि को एक सवाल दिखा यह
प्रेम जो इतना सच्चा है इतना गहरा है मृत्यु के बाद इसका क्या होता है क्या वह दोनों [संगीत] कहीं फिर मिलते हैं या मिट्टी में मिलकर सब खत्म हो जाता है यह सवाल ऋषि को इतना बेचैन करने लगा कि वह अपने आसान पर भी ठीक से नहीं बैठ पाते थे रात को ध्यान में बैठते तो वह बूढ़े का चेहरा आ जाता भोर में जप करते तो वह सवाल उठ खड़ा होता। अंततः उन्होंने एक निर्णय किया। वह कैलाश पर्वत की ओर चल पड़े महादेव के पास। क्योंकि अगर इस सवाल का जवाब किसी के पास है तो
वह सिर्फ महाकाल है। जो काल के भी स्वामी हैं जो मृत्यु को भी जानते हैं और जो प्रेम को भी यहां एक पल रुकते हैं। क्योंकि यह सवाल सिर्फ उस ऋषि का नहीं था। यह आपका भी है, मेरा भी है। एक बेटा अपनी मां की चारपाई को देखकर सोचता है, क्या तुम कहीं हो मां? क्या तुम मुझे [संगीत] देख रही हो? एक पत्नी अपने पति की कमीज को सीने से लगाकर पूछती है, क्या तुम्हें मेरी याद आती है? एक बूढ़ा पति रोज सुबह उस कमरे [संगीत] में जाता है जहां उसकी पत्नी की तस्वीर रखी है
और बस देखता रहता है। कुछ नहीं कहता बस देखता है यह सवाल कमजोरी नहीं है। यह प्रेम की सबसे ऊंची आवाज है और हमारे शास्त्रों ने हमारे [संगीत] संतों ने हमारे महादेव ने इस आवाज को सुना और जवाब दिया। तो आइए उस जवाब को सुनते हैं। वर्षों की कठोर तपस्या के बाद महादेव प्रकट हुए। ऋषि शौनक की आंखों से आंसू बह निकले। उन्होंने कांपते हाथों से प्रणाम किया [संगीत] और पूछा भोलेनाथ इस संसार में पतिप जन्म भर साथ रहते हैं। एक दूसरे के बिना जीना नहीं जानते [संगीत] तो क्या मृत्यु के बाद उनका प्रेम खत्म
हो जाता है? क्या वह हमेशा के लिए बिछड़ जाते हैं? महादेव मुस्कुराए। [संगीत] वह मुस्कुराहट जो तब आती है जब कोई सच में सही सवाल पूछे और फिर उन्होंने कहा मुनिवर इस संसार में दो तरह के संबंध होते हैं। एक जो शरीर से बनते हैं और दूसरे जो आत्मा से बनते हैं जो शरीर से बनते हैं वह शरीर के साथ खत्म हो जाते हैं। लेकिन जो आत्मा से बनते हैं उन्हें मृत्यु [संगीत] छू भी नहीं सकती। जरा सोचिए इस बात को। हम सोचते हैं कि प्रेम आंखों से होता है, हाथों से होता है, आवाज से
होता है। लेकिन महादेव कह रहे हैं असली प्रेम तो आत्मा से होता है और आत्मा कभी मरती नहीं। फिर महादेव ने एक बात और कही जो बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा लेकिन मुनिव यह हर किसी के साथ नहीं होता। जिनका संबंध सिर्फ स्वार्थ पर टिका हो। जहां अहंकार हो, छल हो, क्रोध हो, वहां प्रेम की जड़े गहरी [संगीत] नहीं होती। और जब मृत्यु आती है, वह आत्माएं अलग-अलग दिशाओं में निकल जाती हैं। जैसे धुआं [संगीत] हवा में बिखर जाता है। यह सुनकर रुकिए अभी इसी पल अपने रिश्ते के बारे में सोचिए। [संगीत] क्या वह रिश्ता
आत्मा का है या सिर्फ शरीर का? क्या उसमें गहराई है या सिर्फ आदत? महादेव ने एक कहानी सुनाई। [संगीत] एक गांव में एक जोड़ा रहता था। पति का नाम था गंगाधर। पत्नी का नाम था रामकली। ना उनके पास बड़ा घर था। ना धन दौलत ना कोई ऊंचा ओहदा गंगाधर दिन भर [संगीत] खेतों में काम करता मिट्टी में हाथ डालता पसीना बहाता और शाम को जब घर लौटता रामकली दरवाजे पर खड़ी होती गंगाधर कुछ कहता नहीं था रामकली कुछ पूछती नहीं थी बस उसके चेहरे को देखती और समझ जाती [संगीत] आज दिन अच्छा रहा या आज
कुछ भारी था मन पर यह है असली प्रेम बिना शब्दों के पढ़ लेना जब रामकली किसी बात से परेशान होती गंगाधर [संगीत] उसके पास बस बैठ जाता बस बैठ जाता कुछ नहीं कहता बस होता वहां क्योंकि कभी-कभी [संगीत] साथ होना ही काफी होता है। हर सुबह दोनों मिलकर भगवान का नाम लेते एक दीपक जलाते और एक दूसरे [संगीत] के लिए प्रार्थना करते। यही उनकी दिनचर्या थी। कोई लंबी पूजा नहीं। कोई बड़ा अनुष्ठान नहीं। बस दो हाथ जुड़े हुए। दो दिल एक साथ। साल बीतते गए। बाल [संगीत] सफेद हुए। झुर्रियां आई। घुटने दुखने लगे। लेकिन उनकी
आंखों में वही रोशनी रही जो पहले दिन थी और फिर एक दिन गंगाधर [संगीत] बीमार हो गए। बहुत बीमार रामकली ने दिन रात उनकी सेवा की नींद छोड़ी खाना भूली। बस उनके पास बैठी रही। जब अंत का वक्त आया गंगाधर ने अपनी आंखें खोली। रामकली का हाथ ढूंढा पकड़ा और बहुत धीरे से कहा अगर हमारा प्रेम सच्चा है तो हम फिर मिलेंगे। रामकली की आंखों से आंसू बह निकले। उसने कुछ नहीं कहा। लेकिन उसके दिल में एक आग [संगीत] जल उठी। एक ऐसा विश्वास जो बुझने वाला नहीं था। हम फिर मिलेंगे। कुछ ही पलों बाद
गंगाधर [संगीत] की सांसे थम गई। वर्षों बाद रामकली भी इस दुनिया से चली गई। लेकिन यहीं कहानी खत्म नहीं होती। यहीं से असली रहस्य शुरू [संगीत] होता है। महादेव ने ऋषि को बताया मृत्यु के बाद आत्मा अपने कर्मों के अनुसार अलग-अलग लोकों में जाती है। यह यात्रा हर आत्मा की अलग होती है। कुछ आत्माएं [संगीत] जल्दी नया जन्म ले लेती हैं। कुछ सूक्ष्म लोकों में समय बिताती हैं। अपने कर्मों का हिसाब चुकाते हुए और कुछ अपने अधूरे मोह के कारण यहीं आसपास भटकती रहती है। लेकिन एक बात सबके लिए सच है। जिन आत्माओं के बीच
सच्चा प्रेम होता है, उनके बीच एक सूक्ष्म [संगीत] धागा बना रहता है। यह धागा दिखता नहीं। तराजू पर नहीं तोला जा सकता। किसी यंत्र से नापा नहीं जा सकता। लेकिन यह होता है और यह टूटता [संगीत] नहीं। महादेव ने इसे एक सुंदर उदाहरण से समझाया। जब दो दीपक एक ही कमरे में जलते हैं, उनकी रोशनी मिली होती है। जब एक बुझ जाता है, तो दूसरा उसकी गर्मी अपने भीतर समेट लेता है। वह उसका हिस्सा बन जाती है। ऐसे ही जब एक आत्मा इस दुनिया से जाती है, उसका प्रेम दूसरी आत्मा में [संगीत] कहीं गहरे समा
जाता है और वह प्रेम उन्हें समय के किसी अगले मोड़ पर फिर एक दूसरे की ओर खींचता है। गंगाधर और रामकली का यही [संगीत] हुआ। उनकी आत्माएं अलग-अलग लोकों में गई। अलग-अलग रास्तों पर चली। लेकिन वह सूक्ष्म धागा वो प्रेम का अदृश्य बंधन कभी टूटा नहीं। और कई वर्षों बाद उसी क्षेत्र में दो आत्माओं ने फिर से पृथ्वी [संगीत] पर जन्म लिया। दो अलग-अलग परिवारों में दो अलग-अलग घरों में वो बड़े हुए। पहली बार किसी उत्सव में मिले और दोनों के मन में एक साथ एक ही पल में एक अजीब सी अनुभूति हुई। जैसे [संगीत]
यह चेहरा पहचाना है। जैसे इस आवाज में कुछ अपना है उन्हें नहीं पता था। लेकिन उनकी आत्माएं जानती थी यहां एक पल रुकिए और सोचिए क्या आपके जीवन में कोई ऐसा [संगीत] है जिनसे पहली बार मिले थे और लगा था जैसे वह अजनबी नहीं जिनकी आवाज में कुछ था जो [संगीत] सुना सुना लगा जिनके साथ बैठकर चुप रहना भी भारी नहीं लगता जिनसे झगड़ा भी होता है पर दिल से दूर नहीं जा पाते अगर हां तो शायद यह पहली मुलाकात नहीं है शायद यह एक पुरानी यात्रा का नया पड़ाव है आत्माएं रास्ता जानती हमें बस
उन पर भरोसा करना होता है। अब यहां ऋषि शौनक ने वही सवाल पूछा जो आप भी शायद पूछना चाहते हैं। महादेव क्या यह हर पति-पत्नी के साथ होता है? और महादेव ने सच बोला। वह सच जो सुनने में कड़वा लग सकता है। लेकिन जिसे जानना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा नहीं मुनिवर यह हर किसी के साथ नहीं होता। [संगीत] जो संबंध सिर्फ मजबूरी से चलता है, वह मृत्यु के साथ खत्म हो जाता है। जो संबंध सिर्फ दिखावे के लिए है, वह मृत्यु के साथ खत्म हो जाता है। [संगीत] जो संबंध में एक तरफ प्रेम है
और दूसरी तरफ सिर्फ स्वार्थ है, वह भी मृत्यु [संगीत] के साथ टूट जाता है और यह सच है। हम सब जानते हैं कि दुनिया में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो सिर्फ नाम के होते हैं। [संगीत] जिनमें दो लोग साथ रहते हैं। लेकिन वास्तव में अकेले होते हैं। लेकिन जिस संबंध में दोनों तरफ त्याग है जिसमें एक दूसरे की आत्मा को समझने की कोशिश है जिसमें भगवान का नाम साथ लिया जाता है जिसमें माफ करना आता है सच में माफ करना दिल से जिसमें झगड़े भी होते हैं लेकिन रात को सोने से पहले दिल साफ
हो जाता है जिसमें एक दूसरे की खुशी अपनी खुशी से बड़ी लगती है [संगीत] वह संबंध मृत्यु से बड़ा होता है। अब जरा ईमानदारी से सिर्फ खुद से पूछिए आपका रिश्ता किस तरफ है? क्या आपने अपने साथी को आज बताया कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं? क्या आपने उनकी कोई छोटी सी जरूरत बिना कहे पूरी की आज? क्या आपने आज उनके लिए भगवान से प्रार्थना की? अगर नहीं तो अभी [संगीत] भी वक्त है। अभी भी महादेव ने ऋषि को एक और गहरी बात बताई। मुनिवर आत्माओं का मिलन केवल भावना से नहीं होता। वो कर्मों
की पवित्रता से भी जुड़ा है। यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। हम सोचते हैं [संगीत] कि बस दिल में प्रेम होना चाहिए। लेकिन महादेव कह रहे हैं प्रेम के साथ कर्म भी देखा जाता है। अगर आपने अपने जीवन साथी को दुख पहुंचाया है। अगर आपने उनका विश्वास तोड़ा है। अगर आपने उन्हें वह सम्मान नहीं दिया जिसके वह [संगीत] हकदार थे तो वह घाव आत्मा पर पड़ते हैं और वह घाव उस धागे को [संगीत] कमजोर करते हैं। लेकिन और यह लेकिन बहुत बड़ा है। अगर आप अपनी गलती [संगीत] को समझे माफी मांगे और बदलने की कोशिश करें
तो वह धागा फिर से मजबूत हो सकता है। महादेव ने कहा संसार में सबसे बड़ी शक्ति क्षमा है। जब एक आत्मा दूसरी आत्मा को सच्चे दिल से माफ करती है तो वह बंधन और भी गहरा हो जाता है क्योंकि तब वो प्रेम परिपक्व हो जाता है। मजबूत हो जाता है और ऐसा प्रेम जन्मों तक साथ चलता है। संतों ने कहा है गृहस्थ जीवन भी एक तपस्या है। लोग सोचते हैं कि सन्यास [संगीत] लेने से ही भगवान मिलते हैं। जंगल में जाकर सब छोड़कर अकेले रहकर लेकिन [संगीत] महादेव ने कहा जो पतिपत्नी एक दूसरे का सम्मान
करते हैं एक दूसरे के दुख को अपना [संगीत] दुख मानते हैं और साथ मिलकर भगवान का नाम लेते हैं उनका घर किसी मंदिर से कम [संगीत] नहीं यह कितनी बड़ी बात है हम मंदिर जाने के लिए घर से निकलते हैं लेकिन महादेव कह रहे हैं अगर घर में प्रेम है सम्मान है करुणा है तो भगवान वही है आपके घर में आपके आंगन में आपके उस रिश्ते में महादेव ने यह भी कहा इस [संगीत] संसार में जब भी आपको किसी से मिलकर ऐसा लगे जैसे यह मुलाकात पहली नहीं है जैसे इस [संगीत] चेहरे में कुछ जाना
पहचान है। तो समझिए यह आत्माओं की पुरानी पहचान है। यह [संगीत] संयोग नहीं होता। यह कर्मों का प्रेम का जन्मों का हिसाब होता है। तो यही था वह रहस्य जो महादेव ने उस ऋषि को बताया जो आज मैं आपको बता रहा हूं। मृत्यु शरीर को अलग कर सकती है लेकिन सच्चे प्रेम को नहीं। आत्माओं के बंधन को नहीं बस एक शर्त है। वह प्रेम सच्चा होना चाहिए। उसमें त्याग होना चाहिए। उसमें क्षमा होनी चाहिए। उसमें क्षमा होनी चाहिए। उसमें क्षमा होनी चाहिए। [संगीत] और उस प्रेम के बीच भगवान का नाम होना चाहिए। अगर यह है
आपके रिश्ते में तो ना मृत्यु अलग कर सकती है। ना समय ना कोई भी शक्ति इस जगत में। आज घर जाइए। अपने जीवन साथी को देखिए और मन ही मन कहिए। तुम मेरी आत्मा के साथ ही हो। इस [संगीत] जन्म में भी और अगले जन्म में भी। बस इतना काफी है। जय श्री हरि विष्णु। जय श्री महाकाल। अगर इस कथा ने आपके दिल को छुआ तो इसे अपने जीवन साथी के साथ जरूर शेयर करें। कमेंट में लिखिए जय श्री राम और चैनल को सब्सक्राइब करें ताकि ऐसी और कथाएं आप तक पहुंचती